Thursday, July 30, 2026

एमएलसी का टिकट कटने पर फूट-फूटकर रोए पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम, तेजस्वी यादव पर साधा निशाना, पार्टी के सभी पदों से दिया इस्तीफा!

पटना। बिहार की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के भीतर मचे घमासान को सरेआम कर दिया है। आरजेडी के कद्दावर नेता, पूर्व मंत्री और पार्टी के अनुसूचित जाति एवं जनजाति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष शिवचंद्र राम को आगामी एमएलसी (विधान परिषद) चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनाए जाने के बाद उनका दर्द छलक उठा। एक लाइव प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिवचंद्र राम अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए और कैमरे के सामने ही फूट-फूटकर रोने लगे। आंसुओं के इस सैलाब के बीच उन्होंने तेजस्वी यादव और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर वादाखिलाफी का गंभीर आरोप लगाते हुए आरजेडी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है।

मेरे साथ घोर अन्याय हुआ, पहले विधानसभा और अब एमएलसी से काटा पत्ता”

रुंधे गले और आंखों में आंसू लिए शिवचंद्र राम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा, “पार्टी के लिए सालों तक खून-पसीना बहाने का मुझे यह सिला मिला है। पहले मुझे विधानसभा चुनाव का टिकट नहीं दिया गया, और अब जब एमएलसी चुनाव की बारी आई, तो वहां भी मेरा पत्ता साफ कर दिया गया। मेरे साथ पार्टी के भीतर घोर अन्याय हुआ है।” हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि उन्होंने फिलहाल पार्टी के पदों से इस्तीफा दिया है, लेकिन पार्टी की प्राथमिक सदस्यता नहीं छोड़ी है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आंसुओं का सैलाब: एमएलसी चुनाव में टिकट न मिलने से आहत आरजेडी के पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम कैमरे के सामने ही फूट-फूटकर रो पड़े। पार्टी नेतृत्व पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए उन्होंने अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया।
 

तेज प्रताप यादव ने  पार्टी को घेरा, कहा – निराशाजनक और निंदनीय व्यवहार

शिवचंद्र राम के इस तरह सरेआम रोने और इस्तीफा देने के बाद आरजेडी के भीतर की गुटबाजी भी खुलकर सामने आ गई है। लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव खुलकर शिवचंद्र राम के समर्थन में उतर आए हैं और उन्होंने अपनी ही पार्टी के फैसले पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तेज प्रताप यादव ने इस घटनाक्रम को बेहद दुखद और पीड़ादायक क्षण बताते हुए कहा, “वर्षों तक संगठन और समाज के लिए समर्पित होकर कार्य करने वाले शिवचंद्र राम ने संत रविदास के आदर्शों पर चलते हुए पूरे बिहार में समाज को जोड़ने का काम किया। मेरा मानना है कि उनके योगदान का सम्मान होना चाहिए था। उनके साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, वह बेहद निराशाजनक और निंदनीय है।”

तेज प्रताप यादव ने आगे कहा कि सामाजिक न्याय, समान भागीदारी और बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के सिद्धांतों की भावना के अनुरूप सभी को सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने इस मुश्किल घड़ी में शिवचंद्र राम के साथ खड़े रहने का एलान किया और कहा कि जनशक्ति जनता दल भी उनके संघर्ष, समर्पण और सम्मान की लड़ाई में पूरी एकजुटता के साथ उनके साथ है।

आरजेडी के दलित कार्डपर उठ रहे सवाल

शिवचंद्र राम आरजेडी के भीतर अनुसूचित जाति और जनजाति समाज का एक बड़ा चेहरा माने जाते रहे हैं। उनके इस तरह बागी रुख अपनाने और शीर्ष नेतृत्व पर वादाखिलाफी का आरोप लगाने से आरजेडी के दलित वोट बैंक की राजनीति को बड़ा झटका लग सकता है। चुनावी माहौल के बीच एक पूर्व मंत्री का इस तरह कैमरे पर रोना विपक्षी दलों को भी बैठे-बिठाए आरजेडी को घेरने का एक बड़ा मुद्दा दे गया है।

खनिज माफियाओं पर बिहार सरकार का सर्जिकल स्ट्राइक! 10 जून से सीमाओं पर कड़ा पहरा, बिना ‘ट्रांजिट पास’ घुसे वाहन तो जब्त होगी गाड़ी, लगेगा भारी जुर्माना!

60 रुपये प्रति मीट्रिक टन या 85 रुपये प्रति घनमीटर की दर से वसूला जाएगा ट्रांजिट शुल्क; अवैध खनन, परिवहन और भंडारण के खेल को खत्म करने के लिए खान एवं भूतत्व विभाग ने कसी कमर।

पटना : बिहार में अवैध खनन और खनिजों की हेराफेरी करने वाले सिंडिकेट के खिलाफ सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी नाकेबंदी की तैयारी पूरी कर ली है। बिहार सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग ने राज्य में पर्यावरणीय रूप से अनुकूल एवं धारणीय खनन को बढ़ावा देने तथा अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से एक क्रांतिकारी और बेहद सख्त व्यवस्था लागू करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस नए कानून के तहत 10 जून 2026 से बिहार की सीमा में अन्य राज्यों से प्रवेश करने वाले बालू, पत्थर एवं अन्य लघु खनिजों से लदे सभी वाहनों के लिए ट्रांजिट पास (आईएसपीटी) प्राप्त करना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। विभाग द्वारा जारी की गई आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, अब राज्य में प्रवेश करने वाले सभी खनिज वाहनों को निर्धारित कड़े शुल्क के साथ ही ट्रांजिट पास काउंटर से गुजरना होगा।

सांकेतिक (प्रतीकात्‍मक)  तस्‍वीर

क्या है सरकार की नई रणनीति और क्यों पड़ी इसकी जरूरत? विभागीय अधिकारियों का साफ कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में अन्य राज्यों से बिहार की सीमा के भीतर आने वाले खनिजों की सटीक मात्रा एवं उसके प्रकार की प्रभावी मॉनिटरिंग (अनुश्रवण) करने के लिए कोई भी पुख्ता या समुचित व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। इसी गंभीर तकनीकी कमी और लूपहोल का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी और अवैध परिवहन का खेल चल रहा था। इस बड़ी प्रशासनिक कमी को जड़ से खत्म करने के लिए ही यह नई और फुलप्रूफ पारदर्शी व्यवस्था लागू की जा रही है। खान एवं भूतत्व विभाग के तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, इस नए ट्रांजिट पास प्रणाली के धरातल पर उतरने से राज्य में प्रवेश करने वाले खनिजों का एक-एक किलोग्राम का सटीक आंकड़ा कंप्यूटर स्क्रीन पर उपलब्ध हो सकेगा।

एक चालान पर बार-बार ढुलाई करने वालों का खेल खत्म सरकार के इस कड़े कदम से न केवल अवैध खनन पर पूरी तरह से रोक लगेगी, बल्कि राज्य सरकार के राजस्व संग्रह में भी भारी और ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की जाएगी। अब तक माफिया एक ही चालान के आधार पर बार-बार खनिजों का अवैध परिवहन कर अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकते थे, लेकिन नई व्यवस्था में एक चालान पर केवल एक ही बार गाड़ी सीमा पार कर सकेगी, जिससे अवैध परिवहन पर प्रभावी रूप से ब्रेक लग जाएगा। आधिकारिक अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि बिहार खनिज “समनुदान, अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण निवारण” नियमावली, 2019 “यथा संशोधित” के नियम-41 के तहत इस सख्त ट्रांजिट पास शुल्क को कानूनी रूप से निर्धारित किया गया है।

खनिज परिवहन से जुड़े वाहन स्वामियों एवं चालकों के लिए अनिवार्य गाइडलाइंस:

  • अंतिम तिथि का रखें ध्यान: 10 जून 2026 की मध्यरात्रि से बिहार की सीमाओं में बिना वैध ऑनलाइन ट्रांजिट पास के कोई भी लघु खनिज वाहन प्रवेश नहीं कर पाएगा।
  • लागू शुल्क दरें: परिवहन किए जा रहे खनिज पर 60 रुपये प्रति मीट्रिक टन अथवा 85 रुपये प्रति घनमीटर की दर से ट्रांजिट शुल्क का भुगतान अनिवार्य रूप से करना होगा।
  • डबल डॉक्यूमेंटेशन अनिवार्य: सभी वाहन चालकों को गाड़ी में ट्रांजिट पास (आईएसपीटी) के साथ-साथ मूल वैध खनिज परिवहन चालान भी अपने पास रखना होगा।
  • सख्त कानूनी कार्रवाई: नियमों का रत्ती भर भी उल्लंघन करने पर गाड़ी को तुरंत जब्त कर भारी आर्थिक जुर्माना वसूला जाएगा तथा वाहन स्वामी और चालक पर आपराधिक मुकदमा दर्ज होगा।
  • ऑनलाइन पंजीकरण: किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए सभी ट्रांसपोर्टर समय रहते अपने वाहनों का विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण सुनिश्चित कर लें।

सरकार के इस कदम को राज्य में सशक्त निगरानी, पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था और माफिया राज पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। विभाग के जिला अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि वे 10 जून की सुबह से ही राज्य के सभी बॉर्डर चेकपोस्टों पर अतिरिक्त पुलिस बल के साथ मुस्तैद रहें, ताकि नियमों को कड़ाई से लागू किया जा सके और किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त न की जाए।

बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए सम्राट चौधरी की मौजूदगी में एनडीए का महा-नामांकन, पवन सिंह की धमाकेदार एंट्री से विपक्ष चित; मंत्री दीपक प्रकाश का कटा पत्ता, कुर्सी पर मंडराया संकट!

नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार समेत एनडीए उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत तय; राष्ट्रीय लोक मोर्चा में टिकट कटने से भारी खलबली, उपेंद्र कुशवाहा के पास बचे अब अंतिम तीन विकल्प, राजद से महज एक ने किया पर्चा दाखिल।

पटना। बिहार विधानमंडल परिसर में बिहार विधान परिषद द्विवार्षिक चुनाव-2026 और उपचुनाव को लेकर राजनैतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। सोमवार को नामांकन के अंतिम दिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सभी 9 उम्मीदवारों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की गरिमामयी उपस्थिति में अपने-अपने पर्चे दाखिल किए। इस महा-नामांकन के साथ ही बिहार विधान परिषद की सीटों का पूरा समीकरण साफ हो गया है। एनडीए के सभी 9 कैंडिडेट की जीत पूरी तरह तय मानी जा रही है, जिससे राजनैतिक गलियारों में जश्न का माहौल है। वहीं दूसरी ओर, गठबंधन के भीतर सीटों के गणित और चेहरों के बदलाव ने कई दिग्गजों के समीकरण पूरी तरह बिगाड़ दिए हैं।

बिहार विधानमंडल परिसर में बिहार विधान परिषद द्विवार्षिक चुनाव-2026 हेतु एनडीए प्रत्याशियों के नामांकन के ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, भोजपुरी सुपरस्टार और नवनिर्वाचित भाजपा प्रत्याशी पवन सिंह, संजय मयूख, अशरफ अंसारी व अन्य वरिष्ठ राजनेता और प्रत्याशी एकजुट होकर उंगलियों से ‘विक्ट्री’ (विजय) का प्रतीक चिन्ह दिखाते हुए। इस मौके पर सम्राट चौधरी ने सभी प्रत्याशियों को  हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

पावर स्टार पवन सिंह की एंट्री और एनडीए का सामाजिक समीकरण

इस बार के चुनाव में सबसे बड़ा धमाका भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने भोजपुरी सिनेमा के पावर स्टार पवन सिंह की विधिवत सदन में एंट्री कराकर किया है। बीजेपी ने इस चुनाव में सामाजिक और जातीय संतुलन को बेहद बारीकी से साधने की रणनीति अपनाई है। बीजेपी के कोटे से कुल 4 उम्मीदवारों ने नामांकन किया है, जिसमें पवन सिंह, संजय मयूख, अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित शामिल हैं। इनमें अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित अति पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिससे बीजेपी ने अपने कोर वोटर बेस को मजबूत संदेश दिया है।

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के कोटे से भी 4 उम्मीदवारों ने पर्चा भरा है, जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे और राज्य सरकार में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का नाम सबसे प्रमुख है। वहीं लोक जनशक्ति पार्टी-रामविलास (एलजेपी-आर) की तरफ से कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अशरफ अंसारी ने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की मौजूदगी में अपना पर्चा भरा।

मंत्री दीपक प्रकाश का कटा पत्ता, कुर्सी जाने का खतरा

इस चुनाव की सबसे सनसनीखेज और चौंकाने वाली खबर राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के खेमे से आई है। आरएलएम के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की तरफ से इस बात का संकेत पहले से ही मिल गया था कि उनके बेटे और सम्राट चौधरी सरकार के कैबिनेट मंत्री दीपक प्रकाश कुशवाहा को विधान परिषद चुनाव में नहीं भेजा जाएगा। सोमवार को नामांकन की समय सीमा समाप्त होने तक दीपक प्रकाश कुशवाहा ने पर्चा दाखिल नहीं किया, जिससे उनका पत्ता पूरी तरह कट चुका है।

दीपक प्रकाश कुशवाहा के एमएलसी नहीं बनने से अब सरकार में उनका मंत्री पद जाना तय माना जा रहा है। राजनैतिक नियमों के अनुसार, बिना सदन का सदस्य रहे कोई भी व्यक्ति अधिकतम छह महीने तक ही मंत्री पद पर रह सकता है। इस विपरीत परिस्थिति में अब उपेंद्र कुशवाहा के पास दीपक प्रकाश के हटने की सूरत में दो  मुख्य विकल्प बचे हैं:

  1. रालोमो कोटे से दीपक प्रकाश की पत्नी साक्षी मिश्रा कुशवाहा को मंत्री बनवाया जाए।
  2. या फिर राष्ट्रीय लोक मोर्चा विधायक दल के कद्दावर नेता माधव आनंद को मंत्री पद की शपथ दिलाई जाए।

विपक्ष का हाल: राजद से महज एक नामांकन, निर्विरोध निर्वाचन तय

विधानसभा के मौजूदा संख्या बल के हिसाब से एक उम्मीदवार को विधान परिषद पहुंचने के लिए कम से कम 25 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता है। विधानसभा में एनडीए के पास प्रचंड बहुमत है, जिसके कारण एनडीए के सभी 9 उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित है। विपक्षी खेमे की बात करें तो राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेतृत्व वाले महागठबंधन के पास केवल इतनी ही संख्या है कि वे एक सीट आसानी से जीत सकें। इसी गणित के तहत राजद की तरफ से केवल एक प्रत्याशी ने अपना नामांकन दाखिल किया है।

चूंकि कुल 10 खाली सीटों पर एनडीए के 9 और राजद का केवल 1 नामांकन ही आया है, इसलिए किसी भी सीट पर मतदान या वोटिंग की नौबत नहीं आएगी। स्क्रूटनी के बाद सभी 10 उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना पूरी तरह तय है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सभी एनडीए प्रत्याशियों को बधाई देते हुए इसे विकास की जीत बताया है।

सम्राट कैबिनेट का महा-ऐलान, 25 बड़े एजेंडों पर मुहर से बदलेगी बिहार की सूरत, युवाओं के लिए खुली ‘जी-राम’ रोजगार गारंटी!

  • 1 जुलाई से लागू होगी विकसित भारत-जी राम जीयोजना, ग्रामीण इलाकों में मचेगा रोजगार का उत्साह
  • अमृत 2.0 के तहत बिहारशरीफ, हाजीपुर, बेगूसराय और सहरसा में जलापूर्ति और सीवरेज नेटवर्क के लिए अरबों रुपये मंजूर
  • पेंशनभोगियों को बड़ी राहत: तीन महीने के एडवांस भुगतान के लिए 3662 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत

विशेष संवाददाता, पटना। बिहार प्रशासनिक गलियारे से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की हाई-प्रोफाइल बैठक में सुशासन और विकास की रफ्तार को दोगुना करने वाले कुल 25 महत्वपूर्ण एजेंडों पर अंतिम मुहर लगा दी गई है। इस महा-बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी देने से लेकर शहरों में अरबों रुपये की जलापूर्ति योजनाओं को हरी झंडी दिखाई गई है। बैठक के समापन के बाद मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मीडियाकर्मियों को इन ऐतिहासिक निर्णयों की विस्तृत और बिंदुवार जानकारी साझा की।

रोजगार का महा-मिशन: 1 जुलाई से लागू होगी जी-राम जीयोजना

सम्राट सरकार ने ग्रामीण युवाओं और श्रमिकों को बड़ा तोहफा देते हुए ‘विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ यानी ‘विकसित भारत-जी राम जी’ योजना, बिहार 2026 को पूरी तरह से स्वीकृत कर दिया है। सरकार ने इस क्रांतिकारी योजना को धरातल पर उतारने के लिए 1 जुलाई 2026 की समय-सीमा निर्धारित की है। इस योजना के लागू होने से ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और आजीविका के साधनों को मजबूती मिलेगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक अभूतपूर्व उछाल आने की उम्मीद है।

अमृत 2.0 का एक्शन प्लान: चार बड़े शहरों में जलापूर्ति और सीवरेज के लिए अरबों स्वीकृत

शहरी विकास और बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत केंद्र प्रायोजित ‘अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन’ (अमृत 2.0) के तहत भारी भरकम बजट पास किया गया है। इसके तहत बिहारशरीफ आईएंडडी और एसटीपी निर्माण परियोजना हेतु लागत राशि 101,63,33,464 रुपये (एक सौ एक करोड़ तिरेसठ लाख तैंतीस हजार चार सी चौंसठ रुपये) की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।

इसी तरह हाजीपुर जलापूर्ति परियोजना के लिए 131,88,40,241 रुपये, बेगूसराय सीवरेज नेटवर्क एवं एसटीपी निर्माण परियोजना के लिए सबसे बड़ी राशि 375,86,61,872 रुपये और सहरसा जलापूर्ति परियोजना के लिए 127,45,52,059 रुपये की भारी-भरकम राशि को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं से चारों बड़े शहरों में पेयजल और जल निकासी की समस्या का स्थायी समाधान होगा।

गन्ना किसानों के बकाये का भुगतान और जल संसाधन के बड़े प्रोजेक्ट्स

गन्ना उद्योग विभाग के तहत गोपालगंज के सासामूसा में स्थित मेसर्स सासामूसा शुगर वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड के पुनः परिचालन और गन्ना किसानों के पूर्ववर्ती पेराई सत्रों के बकाये ईख मूल्य मूलधन के भुगतान के लिए कुल 42,99,09,095 रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिससे हजारों किसानों को बड़ी राहत मिली है।

जल संसाधन विभाग के अंतर्गत डकरानाला पम्प नहर योजना के अवशेष कार्यों (असैनिक, यांत्रिक, विद्युत एवं स्काडा सिस्टम सहित) को पूरा करने के लिए प्रथम पुनरीक्षित प्राक्कलित राशि 251.55 करोड़ रुपये की प्रशासनिक एवं व्यय स्वीकृति दी गई है। इसके अलावा बाढ़ प्रबंधन एवं सीमावर्ती क्षेत्र कार्यक्रम के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में विभिन्न बजट उपबंधों के माध्यम से करोड़ों रुपये की राशि को निकासी और व्यय के लिए हरी झंडी दिखाई गई है, जिसमें नदी प्रबंधन गतिविधियों के लिए 120 करोड़ रुपये का प्रावधान भी शामिल है।

परिवहन नीति में बदलाव और अन्य विभागों के महत्वपूर्ण निर्णय

परिवहन विभाग के अंतर्गत भारत सरकार के निर्देशों के आलोक में 15 वर्ष से पुरानी सरकारी और गैर-सरकारी वाहनों के स्क्रैपिंग से जुड़ी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के नियमों में आवश्यक संशोधनों को मंजूरी दी गई है। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंध विभाग के तहत समस्तीपुर के तत्कालीन जिला अवर निबंधक मणिरंजन को सेवा से बर्खास्त करने के कड़े दंडात्मक फैसले पर मुहर लगाई गई है, जो सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाता है। साथ ही बिहार स्टाम्प नियमावली 2026 के प्रावधानों के तहत सेवा प्रदाताओं के लिए अधिकतम क्रेडिट सीमा 10,00,000 रुपये निर्धारित करने की स्वीकृति दी गई है।

लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के तहत ‘जल जीवन मिशन 2.0’ के अंतर्गत केंद्र और राज्य सरकार के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर की सैद्धांतिक सहमति बनी है। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के तहत आईआईटी पटना रिसर्च पार्क के निर्माण कार्य और आईआईटी पटना फेज-2 के तहत कंस्ट्रक्शन ऑफ हॉस्टल का कार्य भवन निर्माण विभाग द्वारा कराए जाने की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।

पेंशनभोगियों के लिए अरबों का एडवांस और सामाजिक सुरक्षा को बल

समाज कल्याण विभाग (सामाजिक सुरक्षा निदेशालय) के तहत राज्य में संचालित सभी छह प्रकार की सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं (जैसे इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन, इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन, इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय नि:शक्तता पेंशन, लक्ष्मीबाई सामाजिक सुरक्षा पेंशन, बिहार नि:शक्तता पेंशन एवं मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन) के लाभार्थियों को माह मई, जून एवं जुलाई 2026 के पेंशन भुगतान हेतु आकस्मिकता निधि से 366209.97 लाख रुपये (तीन हजार छह सौ दो करोड़ निन्यानवे लाख सत्तानवे हजार रुपये) की भारी-भरकम अग्रिम राशि की स्वीकृति दी गई है, जिससे राज्य के लाखों बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सकेगी।

सरसों के तेल की ‘धार’ या जनता पर महंगाई की ‘मार’? कांग्रेस के एक ट्वीट ने सियासी गलियारों में भड़काई बहस की चिंगारी!

महंगाई पर छिड़ा ट्वीट वॉर‘: कांग्रेस पार्टी द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किया गया इंफोग्राफिक, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दौरान सरसों तेल की कीमतों की तुलना कर ‘विकास काल’ बनाम ‘विनाश काल’ का नैरेटिव सेट करने का प्रयास किया गया है।

सरसों के तेल की कीमतों ने बढ़ाया सियासी पारा

देश में चुनावी मौसम हो या न हो, लेकिन जनता की रसोई का बजट हमेशा से ही सबसे बड़ा सियासी हथियार रहा है। हाल ही में मुख्य विपक्षी दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल से एक ऐसा ग्राफिक पोस्ट किया है, जिसने देश के मध्यम और निम्न वर्ग की दुखती रग पर हाथ रख दिया है। कांग्रेस ने सीधे तौर पर देश की थाली के सबसे अहम हिस्से—सरसों के तेल की कीमतों का सहारा लेकर मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा किया है।

इस वायरल तस्वीर में एक तरफ पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के चेहरे के साथ विकास काल‘ (2014 से पहले) लिखकर सरसों तेल की कीमत ₹90 दिखाई गई है, तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर के साथ विनाश काल‘ (2014 के बाद) लिखकर यही कीमत ₹190 दर्शाई गई है। यह ग्राफिक सोशल मीडिया पर तेजी से तैर रहा है और आम लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर रहा है कि क्या वाकई बीते एक दशक में विकास के दावों के बीच आम आदमी की जेब पूरी तरह कट चुकी है?

आंकड़ों का खेल या जमीनी हकीकत? एक विश्लेषण

कांग्रेस के इस आक्रामक दांव ने एक गंभीर बहस को जन्म दे दिया है। सवाल यह उठता है कि क्या कांग्रेस द्वारा पेश किए गए आंकड़े महज एक राजनीतिक प्रोपेगैंडा हैं या फिर भारतीय रसोई की कड़वी सच्चाई?

अगर हम आर्थिक आंकड़ों और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के रिकॉर्ड पर नजर डालें, तो साल 2014 के आसपास सरसों के तेल की औसत कीमत ₹90 से ₹100 प्रति लीटर के बीच हुआ करती थी। वहीं, साल 2021 और 2022 के दौर में कोरोना महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर खाद्य तेलों की सप्लाय चेन बाधित हुई, जिसके चलते भारत में सरसों का तेल वास्तव में ₹190 से लेकर ₹250 प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर तक जा पहुंचा था। हालांकि, मौजूदा समय में कीमतों में कुछ सुधार हुआ है और यह ₹140 से ₹180 के आसपास बनी हुई है, लेकिन कांग्रेस ने ₹190 के चरम आंकड़े को छूकर सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोला है।

विकास कालबनाम विनाश काल‘: नैरेटिव की जंग

कांग्रेस इस तस्वीर के जरिए जनता को यूपीए (UPA) सरकार के उन दिनों की याद दिलाना चाहती है, जब वैश्विक मंदी के बावजूद घरेलू बाजारों में आवश्यक वस्तुओं की कीमतें एक निश्चित दायरे में थीं। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र की मौजूदा सरकार बड़े-बड़े कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने में व्यस्त है, जबकि आम नागरिक दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहा है।

दूसरी तरफ, सत्तापक्ष यानी भाजपा का हमेशा से यह तर्क रहा है कि 2014 के बाद से देश के बुनियादी ढांचे, डिजिटल इकॉनमी और वैश्विक साख में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। सरकार समर्थकों का कहना है कि महंगाई को केवल एक वस्तु (जैसे सरसों तेल) के पैमाने पर नहीं मापा जा सकता। सरकार द्वारा मुफ्त राशन योजना, उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलेंडर और सीधे किसानों के खाते में पैसे भेजने जैसी कल्याणकारी योजनाओं से जनता को सीधी राहत दी गई है। लेकिन विपक्ष का यह पलटवार भी मजबूत है कि जब बुनियादी खाद्य पदार्थ ही आम आदमी की पहुंच से दूर हो जाएंगे, तो बाकी विकास के दावों का क्या मोल?

आम जनता की जुबानी: क्या वाकई बदल गई जिंदगी?

इस ट्वीट के वायरल होने के बाद जब ग्राउंड जीरो पर आम नागरिकों से बात की गई, तो मिली-जुली लेकिन दर्द से भरी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

  • गृहिणियों का दर्द: मुजफ्फरपुर  के एक मध्यमवर्गीय परिवार की गृहणी मंजू देवी कहती हैं, “पहले रसोई का मासिक बजट 5 से 6 हजार रुपये में सिमट जाता था, आज वह बढ़कर 11 से 12 हजार हो चुका है। तेल, दाल, गैस सिलेंडर—हर चीज के दाम बढ़े हैं। विपक्ष का यह ग्राफिक पूरी तरह झूठ नहीं है, क्योंकि हमने खुद ₹200 लीटर तक सरसों का तेल खरीदा है।”
  • दिहाड़ी मजदूरों की बेबसी: वहीं, मजदूरी करने वाले रमेश कुमार मुन्‍ना  का कहना है कि उनकी दिहाड़ी पिछले 10 सालों में दोगुनी नहीं हुई, लेकिन खाने-पीने की चीजों के दाम दोगुने से भी ज्यादा हो गए हैं। उनके लिए ‘विकास’ केवल टीवी और विज्ञापनों तक सीमित है, थाली में आज भी संघर्ष ही परोसा जा रहा है।

महंगाई का यह चक्रव्यूह और सरकार की चुनौतियां

भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% खाद्य तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजारों में होने वाली हलचल सीधे भारतीय रसोई को प्रभावित करती है। लेकिन कांग्रेस के इस हमले ने सरकार की उस नीति पर सवाल उठा दिया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ का दम भरती है। यदि भारत खाद्य तेलों के मामले में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा था, तो कीमतें इस कदर आसमान क्यों छू गईं?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सोशल मीडिया पोस्ट सीधे जनता के मनोविज्ञान पर असर डालते हैं। जब एक आम आदमी बाजार में बटुआ निकालता है, तो उसे सरकार के बड़े-बड़े आर्थिक आंकड़े (जैसे GDP ग्रोथ या विदेशी मुद्रा भंडार) याद नहीं रहते, बल्कि उसे सरसों तेल की बोतल पर छपी कीमत ही याद रहती है।

क्या यह मुद्दा पलटेगा सियासी बाजी? : कांग्रेस का यह ‘एक्स’ पोस्ट केवल एक तस्वीर नहीं, बल्कि आने वाले चुनावों के लिए एक सेट किया जा रहा बड़ा एजेंडा है। बेरोजगारी के बाद महंगाई ही वह अचूक तीर है, जिससे विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।

अब देखना यह होगा कि भाजपा इस ‘विनाश काल’ वाले नैरेटिव की काट किस तरह ढूंढती है। क्या सरकार खाद्य तेलों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस और परमानेंट कदम उठाएगी, या फिर यह मुद्दा इसी तरह सोशल मीडिया से लेकर संसद तक देश की राजनीति को गर्माता रहेगा? फिलहाल, इस तस्वीर ने आम जनता को सोचने पर मजबूर जरूर कर दिया है कि उनकी जेब के लिए कौन सा ‘काल’ बेहतर था।

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बिहार में ‘भागवत’ हुंकार: सत्ता बदलने के बाद पहली बार पटना पहुंचे संघ प्रमुख; खुद सीएम सम्राट चौधरी ने संभाली अगवानी की कमान!

तीन दिवसीय बिहार दौरे पर पहुंचे मोहन भागवत, पटना से सीधे मुंगेर के लिए रवाना; संघ शिक्षा वर्ग में स्वयंसेवकों को देंगे महामंत्र

पटना। बिहार की सियासी फिजां बदलने और भाजपा सरकार में शामिल होने के बाद पहली बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत आज पटना पहुंचे। उनके इस दौरे को लेकर सूबे की राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भारी हलचल है। संघ प्रमुख के पटना एयरपोर्ट पहुंचते ही खुद बिहार के मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी ने गर्मजोशी से उनकी अगवानी की। इस दौरान एयरपोर्ट पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे और संघ व भाजपा कार्यकर्ताओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ा।

बिहार में डबल इंजन सरकार बनने के बाद पहली बार पटना पहुंचे RSS प्रमुख मोहन भागवत से शिष्टाचार मुलाकात करते सूबे के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी।

मुंगेर में तीन दिन तक मथेगे संघ का विचार पटना पहुंचने के तुरंत बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत का काफिला सीधे मुंगेर के लिए रवाना हो गया। तय कार्यक्रम के अनुसार, वे अगले तीन दिनों तक मुंगेर में ही प्रवास करेंगे। मुंगेर में आयोजित हो रहे ‘संघ शिक्षा वर्ग’ में मोहन भागवत मुख्य रूप से शामिल होने आए हैं।

स्वयंसेवकों को मिलेगा राष्ट्रवाद का महापाठ सूत्रों के मुताबिक, इन तीन दिनों के दौरान संघ प्रमुख देश के कोने-कोने से आए स्वयंसेवकों को संघ की मूल विचारधारा, राष्ट्र सेवा, अनुशासित कार्यप्रणाली और सामाजिक समरसता के विभिन्न आयामों से अवगत कराएंगे। बिहार में बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों के बीच संघ प्रमुख का यह दौरा कैडर में एक नया जोश फूंकने वाला माना जा रहा है।

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महाधिवेशन में बड़ा धमाका: आलोक सिंह बने बिहार RLM के नए ‘कैप्टन’, राजनीतिक गलियारों में मची खलबली!

रवींद्र भवन में राष्ट्रीय लोक मोर्चा का शक्ति प्रदर्शन, नई टीम के साथ चुनावी रण में उतरने का शंखनाद

विशेष संवाददाता, पटना। बिहार की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और सनसनीखेज खबर आ रही है! पटना का ऐतिहासिक रवींद्र भवन आज एक बड़े राजनीतिक उलटफेर और भारी हुजूम का गवाह बना। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के राज्यस्तरीय महाधिवेशन में पार्टी ने अपनी नई सेना का ऐलान कर सबको चौंका दिया है। आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए पार्टी ने युवाओं और अनुभवी चेहरों के मिश्रण पर दांव लगाया है।

एकजुटता का हुंकार: पटना के रवींद्र भवन में आयोजित RLM के राज्यस्तरीय महाधिवेशन के दौरान नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आलोक सिंह, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष प्रशांत पंकज, सुभाष चंद्रवंशी, प्रधान महासचिव हिमांशु पटेल और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता एक-दूसरे का हाथ उठाकर जीत का संकल्प दोहराते हुए।

लंबे इंतजार और कयासों के दौर पर विराम लगाते हुए पार्टी नेतृत्व ने आलोक सिंह को बिहार राष्ट्रीय लोक मोर्चा का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। आलोक सिंह के कंधों पर अब बिहार में पार्टी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और संगठन को धार देने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी।

त्रिगुट रणनीति: प्रशांत, सुभाष और हिमांशु को भी मिली कमान

RLM ने सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष ही नहीं बदला, बल्कि बिहार फतह के लिए एक अभेद्य चक्रव्यूह तैयार किया है। पार्टी ने संगठन को मजबूत करने के लिए प्रशांत पंकज और सुभाष चंद्रवंशी को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं, पार्टी के तेजतर्रार नेता हिंमाशु पटेल को प्रधान महासचिव की गद्दी दी गई है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि RLM का यह नया समीकरण विरोधियों के पसीने छुड़ाने के लिए काफी है।

मंच पर एकजुटता, विपक्षियों को सीधी चुनौती

महाधिवेशन के दौरान जब पार्टी के शीर्ष नेताओं ने एक-दूसरे का हाथ हवा में उठाकर एकजुटता का प्रदर्शन किया, तो पूरा रवींद्र भवन गगनभेदी नारों से गूंज उठा। नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आलोक सिंह ने कहा, यह सिर्फ पद नहीं, बल्कि बिहार के मान-सम्मान की लड़ाई का संकल्प है। RLM अब सूबे की राजनीति में नया इतिहास लिखने को तैयार है।”

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झारखंड भाजपा में ‘सुपर संडे’: राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने बुना जाल, आईटी सेल से लेकर कप्तानों तक को मिला ‘जीत’ का टास्क!

विशेष संवाददाता, रांची झारखंड की सियासी पिच पर भारतीय जनता पार्टी ने विरोधियों को पटकनी देने के लिए आगे की ऐसी बिसात बिछानी शुरू कर दी है, जिसने विरोधी खेमे में अभी से हड़कंप मचा दिया है। राज्य विधानसभा का पिछला चुनाव नवंबर 2024 में संपन्न हुआ था और नई सरकार का गठन नवंबर 2024 के अंत में हुआ था। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार इस विधानसभा का कार्यकाल नवंबर 2029 में पूरा होगा। हालांकि, भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को फिलहाल विपक्ष में बैठना पड़ा है और अगले विधानसभा चुनाव में अभी पूरे तीन साल से अधिक का समय शेष है, लेकिन भाजपा ने सत्ता परिवर्तन के लिए रविवार को रांची की धरती पर ‘सुपर संडे’ के तहत अपनी पूरी ताकत झोंक दी।

रांची स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित जिला अध्यक्ष, जिला प्रभारी, प्रदेश प्रवक्ता, सोशल मीडिया एवं आईटी सेल की संयुक्त बैठक के मंच पर उपस्थित भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और अन्य वरिष्ठ नेता।

झारखंड प्रवास पर पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने रविवार को मैराथन बैठकें कर पूरे राज्य के संगठन का पेंच कस दिया। उन्होंने साफ कर दिया है कि भाजपा के लिए विश्राम का कोई समय नहीं है और आज से ही ‘मिशन 2029’ के लिए ‘करो या मरो’ की तर्ज पर काम शुरू करना होगा।

ओरमांझी में ऐतिहासिक स्वागत, उमड़ा जनसैलाब

राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के झारखंड आगमन पर कार्यकर्ताओं का अपार उत्साह देखने को मिला। रांची के ओरमांझी (कुच्चू) में उनके स्वागत में भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। आत्मीय स्वागत, अपार उत्साह और अटूट स्नेह के साथ कार्यकर्ताओं ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष का पलक-पावड़े बिछाकर अभिनंदन किया। कार्यकर्ताओं के इस भारी हुजूम ने साफ कर दिया कि झारखंड की जमीनी राजनीति में भाजपा का कैडर पूरी तरह चार्ज हो चुका है।

प्रदेश भाजपा कार्यालय के सभागार में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के दिशा-निर्देशों को सुनते और आगामी ‘मिशन 2029’ का संकल्प लेते झारखंड भाजपा के जिला अध्यक्ष, जिला प्रभारी एवं विभिन्न प्रकोष्ठों के पदाधिकारी।

कुच्चू में दिग्गजों का महाजुटान, कोर कमेटी के साथ चक्रव्यूह तैयार

नितिन नवीन के झारखंड प्रवास के दौरान रांची जिला अंतर्गत ओरमांझी प्रखंड के  कुच्चू और बाद में प्रदेश कार्यालय में बैठकों का महादौर चला। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्रीगण, केंद्रीय मंत्रीगण, पूर्व प्रदेश अध्यक्षगण, पूर्व सांसदगण, पूर्व विधायकगण एवं वर्ष 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के प्रत्याशियों के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण परिचयात्मक और रणनीतिक बैठक आयोजित की गई।

इसके तुरंत बाद नितिन नवीन ने प्रदेश कोर कमेटी और पूर्व प्रदेश अध्यक्षों के साथ बंद कमरे में उच्च स्तरीय बैठक की। इस महामंथन में संगठन की मजबूती, जनसंपर्क विस्तार तथा विकसित झारखंड एवं विकसित भारत के संकल्प को लेकर रोडमैप तैयार किया गया।

इस ऐतिहासिक महाजुटान में झारखंड और केंद्र के ये तमाम दिग्गज मौजूद रहे:

  • बाबूलाल मरांडी (नेता प्रतिपक्ष)
  • विजय शर्मा (उपमुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़)
  • रघुवर दास (पूर्व मुख्यमंत्री)
  • अर्जुन मुंडा (पूर्व मुख्यमंत्री)
  • मधु कोड़ा (पूर्व मुख्यमंत्री)
  • अन्नपूर्णा देवी (केंद्रीय मंत्री)
  • संजय सेठ (रक्षा राज्यमंत्री)
  • कर्मवीर सिंह (प्रदेश महामंत्री, संगठन)
  • रविन्द्र राय (पूर्व प्रदेश अध्यक्ष)
  • राकेश प्रसाद (प्रदेश उपाध्यक्ष)

आईटी सेल, सोशल मीडिया और जिला कप्तानों को डिजिटल वॉरका टास्क

दिग्गजों से संवाद के बाद असली कड़ा रुख तब देखने को मिला जब राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने रांची स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में जिला अध्यक्षों, जिला प्रभारियों, प्रदेश प्रवक्ताओं तथा प्रदेश मीडिया, सोशल मीडिया एवं आई.टी. सेल के पदाधिकारियों के साथ संयुक्त महाबैठक की।

इस बैठक में नितिन नवीन ने सीधे तौर पर जिला कप्तानों और डिजिटल टीम को काम पर लग जाने का फरमान सुनाया। उन्होंने दो टूक कहा कि वर्तमान दौर में आधी लड़ाई डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लड़ी जाती है, इसलिए सोशल मीडिया और आईटी सेल का एक-एक योद्धा चौबीसों घंटे एक्टिव मोड में रहे। उन्होंने प्रभावी जनसंपर्क, जमीनी मुद्दों पर सरकार की घेरेबंदी और आगामी सांगठनिक कार्यक्रमों को लेकर बेहद कड़े और महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान मंच पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा एवं प्रदेश महामंत्री (संगठन) कर्मवीर सिंह भी मुस्तैद रहे।

झारखंड प्रवास के दौरान रांची में भाजपा नेताओं के साथ अनौपचारिक बैठक में विचार-विमर्श करते राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, साथ में उपस्थित पूर्व मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और प्रदेश के वरिष्ठ पदाधिकारी।

प्रदेश अध्यक्ष आदित्य प्र. साहू के आवास पर रणनीतिक संवाद

अपनी व्यस्त बैठकों के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन प्रदेश अध्यक्ष आदित्य प्र.साहू के आवास पर पहुंचे। वहां उन्होंने आदित्य साहू के परिवारजनों से आत्मीय मुलाकात की। इसके साथ ही उन्होंने आवास पर उपस्थित प्रदेश पदाधिकारियों के साथ आगामी कार्ययोजनाओं को लेकर एक और दौर की गंभीर चर्चा की।

भाजपा के इस ‘सुपर संडे’ के एक्शन पैक शेड्यूल से यह साफ संदेश चला गया है कि झारखंड में विपक्ष में होने के बावजूद भाजपा का संगठन पूरी तरह आक्रामक है और उसकी नजरें अभी से नवंबर 2029 के सिंहासन पर टिक गई हैं।

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पढ़ाई के बाद जब क्लासरूम बन गया खुशियों का घर: तालियों की गड़गड़ाहट से बदली फिजा और बच्चों की सादगी ने जीत लिया सबका दिल!

सुजावलपुर रोड स्थित ‘एक्सपर्ट कोचिंग सेंटर‘ में दिखा गुरु-शिष्य परंपरा का पावन रूप; पश्चिमी सभ्यता के केक काटने की संस्कृति से दूर, सादगी और भारतीय संस्कारों के साथ मनाया गया जन्मदिन

विशेष संवाददाता, सकरा (मुजफ्फरपुर): आधुनिकता के इस दौर में जहाँ जन्मदिन जैसे अवसरों पर पाश्चात्य संस्कृति और दिखावे का बोलबाला बढ़ता जा रहा है, वहीं सकरा के सुजावलपुर रोड स्थित ‘एक्सपर्ट कोचिंग सेंटर’  में गुरु-शिष्य के पावन रिश्ते और भारतीय संस्कारों की एक बेहद खूबसूरत मिसाल देखने को मिली। संस्थान के बेहद लोकप्रिय चहेते शिक्षक गुड्डू सर का जन्मदिन कोचिंग सेंटर के प्रांगण में बेहद सादगी, गरिमा और भाव-प्रवण माहौल में मनाया गया।

“एक ही छत के नीचे मार्गदर्शकों का समागम: सकरा के एक्सपर्ट कोचिंग सेंटर के मंच पर उपस्थित संस्थान के ही वरिष्ठ शिक्षक प्रभात कुमार,  गुड्डू सर, शिक्षिका अंकिता कुमारी, शिक्षक राजेश कुमार एवं मनोज कुमार, जो सादे समारोह की गरिमा बढ़ा रहे हैं।”

रोज़ाना की तरह जैसे ही क्लासरूम में पढ़ाई समाप्त हुई, वैसे ही शांत दिखने वाला कमरा अचानक बच्चों की सहज मुस्कान और करतल ध्वनि से गूंज उठा। बच्चों ने अपने गुरु के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए इस सादे समारोह का आयोजन किया था, जिसकी सादगी ने वहाँ मौजूद हर शख्स का दिल जीत लिया।

केक काटने की संस्कृति से बनाई दूरी, भारतीय सादगी को दी प्राथमिकता :  इस पूरे आयोजन की सबसे खास और अनुकरणीय बात यह रही कि इसमें केक काटने, मोमबत्ती बुझाने जैसी पश्चिमी और तड़क-भड़क वाली संस्कृति को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया। इसके बजाय, कार्यक्रम को पूरी तरह भारतीय मूल्यों और सादगी के रंग में ढाला गया। बच्चों ने अपने हाथ से लिखी एक सुंदर नाम सूची तैयार की थी और बेहद अनुशासित तरीके से अपने शिक्षक को जन्मदिन की बधाई दी।

“सादगी से सजी खुशियों की महफ़िल: क्लास खत्म होने के बाद क्लासरूम में ही सादी पार्टी का आनंद लेते छात्र-छात्राएं। बेंच पर रखी प्लेटें और बच्चों की अनुशासित बैठक गुरु-शिष्य परंपरा को परिभाषित कर रही है।”

सीनियर शिक्षक प्रभात कुमार ने दिए भावुक आशीष वचन:  इस सादे और गरिमामयी समारोह में एक्सपर्ट कोचिंग सेंटर के ही सभी साथी शिक्षकों का जमावड़ा रहा। संस्थान के वरिष्ठ शिक्षक प्रभात कुमार ने उपस्थित छात्र-छात्राओं और साथी शिक्षकों को संबोधित किया। उन्होंने अपने आशीष वचनों से गुड्डू सर के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और सदैव प्रफुल्लित जीवन के लिए मंगलकामना की। प्रभात कुमार ने कहा, एक शिक्षक के जीवन की सबसे बड़ी पूंजी उसके शिष्यों का यही निश्छल प्रेम और आदर है। गुड्डू सर ने कोचिंग के बच्चों को हमेशा अपने बच्चों की तरह सींचा है, आज वही स्नेह इस क्लासरूम में खुशियों के रूप में बिखरा दिख रहा है।”

“गुरुचरणों में शिष्यों का उपहार: जन्मदिन के पावन अवसर पर एक्सपर्ट कोचिंग के छात्रों द्वारा अपने प्रिय शिक्षक गुड्डू सर को आदरपूर्वक उपहार (गिफ्ट) भेंट कर उनका आशीर्वाद लेते छात्र।”

गिफ्ट भेंट कर छात्रों ने लिया गुरु का आशीर्वाद : कार्यक्रम के दौरान गुरु-शिष्य का रिश्ता उस वक्त और भी गहरा हो गया, जब छात्रों ने शिक्षक कक्ष में  जाकर गुड्डू सर को अपनी सामर्थ्य और अगाध श्रद्धा के अनुसार सुंदर उपहार (गिफ्ट) भेंट किए। नीले रंग के आकर्षक रैपर में लिपटे उपहार और कलम को जब बच्चों ने अपने गुरुदेव के हाथों में सौंपा, तो गुड्डू सर की आंखें भी आदर के इस समंदर को देखकर सजल हो उठीं। मंच पर कोचिंग संस्थान के ही अन्य सम्मानित शिक्षक राजेश कुमार, मनोज कुमार और शिक्षिका अंकिता कुमारी भी मौजूद रहीं, जिन्होंने गुड्डू सर को बधाई देते हुए संस्थान के विकास और बच्चों के बेहतर भविष्य के संकल्प को दोहराया।

समर, अंकित, शिल्पी सहित इन होनहारों ने संभाली कमान,  इस सादे और सुंदर समारोह को सफल बनाने तथा व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में कोचिंग के इन छात्र-छात्राओं ने अपनी मुख्य भूमिका निभाई:अंकित कुमार, अविनाश कुमार, शुभम कुमार, लक्ष्मी, शिल्पी, अनमोल, सलहद प्रवीण, ज्योति, भवानी, कंचन, अनामिका, मुकेश, आकाश, राखी, नेहा, सुप्रिया, ओम प्रकाश और समर राज। इन सभी बच्चों की अनुशासनप्रियता ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।

मिठाई, समोसे और लिट्टी की सादी पार्टी के साथ संपन्न हुआ उत्सव : औपचारिक बधाई और उपहार सौंपने के सिलसिले के बाद, गुड्डू सर ने अपने सभी प्रिय शिष्यों का दिल से आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के अंत में गुड्डू सर की ओर से सभी बच्चों के लिए एक सादी लेकिन बेहद लजीज पार्टी का आयोजन किया गया। क्लासरूम की बेंचों पर बैठे सैकड़ों छात्र-छात्राओं को समोसा लिट्टी और मिठार्इ परोसे गए। बच्चों ने बड़े चाव और अनुशासन के साथ इस स्वदेशी दावत का आनंद लिया। विदाई के वक्त हर छात्र के चेहरे पर एक संतोष था कि उन्होंने अपने गुरु के विशेष दिन को बिना किसी दिखावे के, केवल अपने आदर और सादगी से एक ऐतिहासिक पल बना दिया।

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मुजफ्फरपुर में ‘मौत के सौदागर’ बने निजी अस्पताल! प्रसाद हॉस्पिटल का निबंधन सस्पेंड; दर्जन भर नर्सिंग होम सील, मंचा हड़कंप!

अग्निकांड के बाद जिला प्रशासन का महा-एक्शन: बिना लाइसेंस और मानकों को ताक पर रखकर चल रहे थे स्वास्थ्य केंद्र, भर्ती मरीजों को आधी रात सुरक्षित निकाल SKMCH में कराया गया भर्ती!

मुजफ्फरपुर (विशेष प्रतिनिधि): शहर के अखाड़ाघाट रोड स्थित ‘प्रसाद अस्पताल’ में हुए भीषण अग्निकांड के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह से ‘रौद्र रूप’ और एक्शन मोड में आ गया है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी और मरीजों की जान को जोखिम में डालने वाली आपराधिक लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन, मुजफ्फरपुर ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। सिविल सर्जन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रसाद हॉस्पिटल का निबंधन  तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। इसके साथ ही अस्पताल प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए निर्देश दिया है कि वे सात दिनों के भीतर सभी आवश्यक साक्ष्यों, दस्तावेजों और तथ्यपरक स्पष्टीकरण के साथ अपना पक्ष रखें। यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो अस्पताल का निबंधन हमेशा के लिए रद्द कर उस पर परमानेंट ताला लगा दिया जाएगा।

मुजफ्फरपुर का वह विवादित ‘प्रसाद हॉस्पिटल’ जहाँ अग्निकांड के बाद मची भारी अफरा-तफरी के बीच आग बुझाने और राहत कार्य में जुटी ‘बिहार अग्निशमन सेवा’ की गाड़ियां और डरी-सहमी जनता की भारी भीड़। (दाएं): हादसे के तुरंत बाद ग्राउंड जीरो पर भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे पदाधिकारी, जो खुद खड़े होकर अवैध अस्पताल को सील करने की बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई का नेतृत्व कर रहे हैं।

खौफनाक सच: न दस्तावेज, न फायर सेफ्टी; सीधे यमराज को न्योता!

जिलाधिकारी के सख्त आदेश पर अनुमंडल पदाधिकारी (पूर्वी) तुषार कुमार के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग ने श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (SKMCH) के आसपास और पूरे शहर में एक महा-अभियान छेड़ा। इस औचक छापेमारी के लिए प्रशासन द्वारा तीन अलग-अलग विशेष जांच टीमों का गठन किया गया था, जिसमें मुशहरी, मीनापुर, गायघाट और औराई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के वरिष्ठ चिकित्सा पदाधिकारियों को शामिल किया गया।

जांच के दौरान जो हकीकत सामने आई, उसने अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए। दर्जनों नामी निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के पास संचालन के लिए आवश्यक वैध लाइसेंस और सरकारी दस्तावेज तक उपलब्ध नहीं थे। कई जगहों पर स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में सरकारी मानकों और फायर सेफ्टी नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं।

प्रशासन के इस ताबड़तोड़ हंटर से पूरे जिले के अवैध नर्सिंग होम और मेडिकल माफियाओं में हड़कंप मच गया है। पिछले दो दिनों के भीतर चले इस विशेष अभियान के तहत कुल 1दर्जन निजी स्वास्थ्य संस्थानों और अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्रों को पूरी तरह से सील कर बंद कर दिया गया है।

कार्रवाई के दौरान सबसे बड़ी चुनौती इन अस्पतालों में वेंटिलेटर और आईसीयू में भर्ती बेबस मरीजों की सुरक्षा की थी। प्रशासन ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए भारी पुलिस बल की मौजूदगी में सभी गंभीर और सामान्य मरीजों को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू किया और एम्बुलेंस के जरिए सरकारी अस्पताल (SKMCH) में शिफ्ट कराया, जहां डॉक्टरों की विशेष टीम उनका मुफ्त और बेहतर इलाज कर रही है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अभी यह कार्रवाई थमने वाली नहीं है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक अन्य निजी स्वास्थ्य संस्थानों की सघन जांच जारी है। स्वास्थ्य के नाम पर जनता की जेब काटने वाले और उनकी जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले एक दर्जन से ज्यादा अन्य अस्पतालों को भी बहुत जल्द बंद करने का फरमान जारी हो सकता है।

चेहरे और पते बदलकर फिर मौत का धंधाशुरू करने की फिराक में शातिर माफिया!

प्रशासनिक कार्रवाई से बचने के लिए ये पेशेवर और शातिर अपराधी नया रास्ता निकालने में माहिर हैं; सील होने के बाद ये लोग नए नाम, नए पते और किसी दूसरे छद्म चेहरे को आगे कर दोबारा अवैध नर्सिंग होम का धंधा चमका लेते हैं। स्वास्थ्य के नाम पर इंसानी जिंदगियों से खिलवाड़ करने वाले इन सफेदपोश अपराधियों के इस खतरनाक चक्रव्यूह को तोड़ने का एकमात्र रास्ता यही है कि सिर्फ अस्पतालों की बिल्डिंग को सील न किया जाए, बल्कि इन अवैध संचालकों की व्यक्तिगत पहचान (जैसे आधार, पैन और फिंगरप्रिंट ट्रैक कर) सुनिश्चित की जाए। जिला प्रशासन को इन शातिर माफियाओं के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं और जालसाजी (420) के तहत नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर इन्हें सलाखों के पीछे भेजना होगा, ताकि कानून के खौफ से दोबारा कोई मासूम मरीजों की जान का सौदा करने की हिम्मत न कर सके।

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