पढ़ाई के बाद जब क्लासरूम बन गया खुशियों का घर: तालियों की गड़गड़ाहट से बदली फिजा और बच्चों की सादगी ने जीत लिया सबका दिल!

सुजावलपुर रोड स्थित ‘एक्सपर्ट कोचिंग सेंटर‘ में दिखा गुरु-शिष्य परंपरा का पावन रूप; पश्चिमी सभ्यता के केक काटने की संस्कृति से दूर, सादगी और भारतीय संस्कारों के साथ मनाया गया जन्मदिन

विशेष संवाददाता, सकरा (मुजफ्फरपुर): आधुनिकता के इस दौर में जहाँ जन्मदिन जैसे अवसरों पर पाश्चात्य संस्कृति और दिखावे का बोलबाला बढ़ता जा रहा है, वहीं सकरा के सुजावलपुर रोड स्थित ‘एक्सपर्ट कोचिंग सेंटर’  में गुरु-शिष्य के पावन रिश्ते और भारतीय संस्कारों की एक बेहद खूबसूरत मिसाल देखने को मिली। संस्थान के बेहद लोकप्रिय चहेते शिक्षक गुड्डू सर का जन्मदिन कोचिंग सेंटर के प्रांगण में बेहद सादगी, गरिमा और भाव-प्रवण माहौल में मनाया गया।

“एक ही छत के नीचे मार्गदर्शकों का समागम: सकरा के एक्सपर्ट कोचिंग सेंटर के मंच पर उपस्थित संस्थान के ही वरिष्ठ शिक्षक प्रभात कुमार,  गुड्डू सर, शिक्षिका अंकिता कुमारी, शिक्षक राजेश कुमार एवं मनोज कुमार, जो सादे समारोह की गरिमा बढ़ा रहे हैं।”

रोज़ाना की तरह जैसे ही क्लासरूम में पढ़ाई समाप्त हुई, वैसे ही शांत दिखने वाला कमरा अचानक बच्चों की सहज मुस्कान और करतल ध्वनि से गूंज उठा। बच्चों ने अपने गुरु के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए इस सादे समारोह का आयोजन किया था, जिसकी सादगी ने वहाँ मौजूद हर शख्स का दिल जीत लिया।

केक काटने की संस्कृति से बनाई दूरी, भारतीय सादगी को दी प्राथमिकता :  इस पूरे आयोजन की सबसे खास और अनुकरणीय बात यह रही कि इसमें केक काटने, मोमबत्ती बुझाने जैसी पश्चिमी और तड़क-भड़क वाली संस्कृति को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया। इसके बजाय, कार्यक्रम को पूरी तरह भारतीय मूल्यों और सादगी के रंग में ढाला गया। बच्चों ने अपने हाथ से लिखी एक सुंदर नाम सूची तैयार की थी और बेहद अनुशासित तरीके से अपने शिक्षक को जन्मदिन की बधाई दी।

“सादगी से सजी खुशियों की महफ़िल: क्लास खत्म होने के बाद क्लासरूम में ही सादी पार्टी का आनंद लेते छात्र-छात्राएं। बेंच पर रखी प्लेटें और बच्चों की अनुशासित बैठक गुरु-शिष्य परंपरा को परिभाषित कर रही है।”

सीनियर शिक्षक प्रभात कुमार ने दिए भावुक आशीष वचन:  इस सादे और गरिमामयी समारोह में एक्सपर्ट कोचिंग सेंटर के ही सभी साथी शिक्षकों का जमावड़ा रहा। संस्थान के वरिष्ठ शिक्षक प्रभात कुमार ने उपस्थित छात्र-छात्राओं और साथी शिक्षकों को संबोधित किया। उन्होंने अपने आशीष वचनों से गुड्डू सर के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और सदैव प्रफुल्लित जीवन के लिए मंगलकामना की। प्रभात कुमार ने कहा, एक शिक्षक के जीवन की सबसे बड़ी पूंजी उसके शिष्यों का यही निश्छल प्रेम और आदर है। गुड्डू सर ने कोचिंग के बच्चों को हमेशा अपने बच्चों की तरह सींचा है, आज वही स्नेह इस क्लासरूम में खुशियों के रूप में बिखरा दिख रहा है।”

“गुरुचरणों में शिष्यों का उपहार: जन्मदिन के पावन अवसर पर एक्सपर्ट कोचिंग के छात्रों द्वारा अपने प्रिय शिक्षक गुड्डू सर को आदरपूर्वक उपहार (गिफ्ट) भेंट कर उनका आशीर्वाद लेते छात्र।”

गिफ्ट भेंट कर छात्रों ने लिया गुरु का आशीर्वाद : कार्यक्रम के दौरान गुरु-शिष्य का रिश्ता उस वक्त और भी गहरा हो गया, जब छात्रों ने शिक्षक कक्ष में  जाकर गुड्डू सर को अपनी सामर्थ्य और अगाध श्रद्धा के अनुसार सुंदर उपहार (गिफ्ट) भेंट किए। नीले रंग के आकर्षक रैपर में लिपटे उपहार और कलम को जब बच्चों ने अपने गुरुदेव के हाथों में सौंपा, तो गुड्डू सर की आंखें भी आदर के इस समंदर को देखकर सजल हो उठीं। मंच पर कोचिंग संस्थान के ही अन्य सम्मानित शिक्षक राजेश कुमार, मनोज कुमार और शिक्षिका अंकिता कुमारी भी मौजूद रहीं, जिन्होंने गुड्डू सर को बधाई देते हुए संस्थान के विकास और बच्चों के बेहतर भविष्य के संकल्प को दोहराया।

समर, अंकित, शिल्पी सहित इन होनहारों ने संभाली कमान,  इस सादे और सुंदर समारोह को सफल बनाने तथा व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में कोचिंग के इन छात्र-छात्राओं ने अपनी मुख्य भूमिका निभाई:अंकित कुमार, अविनाश कुमार, शुभम कुमार, लक्ष्मी, शिल्पी, अनमोल, सलहद प्रवीण, ज्योति, भवानी, कंचन, अनामिका, मुकेश, आकाश, राखी, नेहा, सुप्रिया, ओम प्रकाश और समर राज। इन सभी बच्चों की अनुशासनप्रियता ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।

मिठाई, समोसे और लिट्टी की सादी पार्टी के साथ संपन्न हुआ उत्सव : औपचारिक बधाई और उपहार सौंपने के सिलसिले के बाद, गुड्डू सर ने अपने सभी प्रिय शिष्यों का दिल से आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के अंत में गुड्डू सर की ओर से सभी बच्चों के लिए एक सादी लेकिन बेहद लजीज पार्टी का आयोजन किया गया। क्लासरूम की बेंचों पर बैठे सैकड़ों छात्र-छात्राओं को समोसा लिट्टी और मिठार्इ परोसे गए। बच्चों ने बड़े चाव और अनुशासन के साथ इस स्वदेशी दावत का आनंद लिया। विदाई के वक्त हर छात्र के चेहरे पर एक संतोष था कि उन्होंने अपने गुरु के विशेष दिन को बिना किसी दिखावे के, केवल अपने आदर और सादगी से एक ऐतिहासिक पल बना दिया।

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