Sunday, June 7, 2026

मुजफ्फरपुर में ‘मौत के सौदागर’ बने निजी अस्पताल! प्रसाद हॉस्पिटल का निबंधन सस्पेंड; दर्जन भर नर्सिंग होम सील, मंचा हड़कंप!

अग्निकांड के बाद जिला प्रशासन का महा-एक्शन: बिना लाइसेंस और मानकों को ताक पर रखकर चल रहे थे स्वास्थ्य केंद्र, भर्ती मरीजों को आधी रात सुरक्षित निकाल SKMCH में कराया गया भर्ती!

मुजफ्फरपुर (विशेष प्रतिनिधि): शहर के अखाड़ाघाट रोड स्थित ‘प्रसाद अस्पताल’ में हुए भीषण अग्निकांड के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह से ‘रौद्र रूप’ और एक्शन मोड में आ गया है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी और मरीजों की जान को जोखिम में डालने वाली आपराधिक लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन, मुजफ्फरपुर ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। सिविल सर्जन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रसाद हॉस्पिटल का निबंधन  तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। इसके साथ ही अस्पताल प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए निर्देश दिया है कि वे सात दिनों के भीतर सभी आवश्यक साक्ष्यों, दस्तावेजों और तथ्यपरक स्पष्टीकरण के साथ अपना पक्ष रखें। यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो अस्पताल का निबंधन हमेशा के लिए रद्द कर उस पर परमानेंट ताला लगा दिया जाएगा।

मुजफ्फरपुर का वह विवादित ‘प्रसाद हॉस्पिटल’ जहाँ अग्निकांड के बाद मची भारी अफरा-तफरी के बीच आग बुझाने और राहत कार्य में जुटी ‘बिहार अग्निशमन सेवा’ की गाड़ियां और डरी-सहमी जनता की भारी भीड़। (दाएं): हादसे के तुरंत बाद ग्राउंड जीरो पर भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे पदाधिकारी, जो खुद खड़े होकर अवैध अस्पताल को सील करने की बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई का नेतृत्व कर रहे हैं।

खौफनाक सच: न दस्तावेज, न फायर सेफ्टी; सीधे यमराज को न्योता!

जिलाधिकारी के सख्त आदेश पर अनुमंडल पदाधिकारी (पूर्वी) तुषार कुमार के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग ने श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (SKMCH) के आसपास और पूरे शहर में एक महा-अभियान छेड़ा। इस औचक छापेमारी के लिए प्रशासन द्वारा तीन अलग-अलग विशेष जांच टीमों का गठन किया गया था, जिसमें मुशहरी, मीनापुर, गायघाट और औराई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के वरिष्ठ चिकित्सा पदाधिकारियों को शामिल किया गया।

जांच के दौरान जो हकीकत सामने आई, उसने अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए। दर्जनों नामी निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के पास संचालन के लिए आवश्यक वैध लाइसेंस और सरकारी दस्तावेज तक उपलब्ध नहीं थे। कई जगहों पर स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में सरकारी मानकों और फायर सेफ्टी नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं।

प्रशासन के इस ताबड़तोड़ हंटर से पूरे जिले के अवैध नर्सिंग होम और मेडिकल माफियाओं में हड़कंप मच गया है। पिछले दो दिनों के भीतर चले इस विशेष अभियान के तहत कुल 1दर्जन निजी स्वास्थ्य संस्थानों और अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्रों को पूरी तरह से सील कर बंद कर दिया गया है।

कार्रवाई के दौरान सबसे बड़ी चुनौती इन अस्पतालों में वेंटिलेटर और आईसीयू में भर्ती बेबस मरीजों की सुरक्षा की थी। प्रशासन ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए भारी पुलिस बल की मौजूदगी में सभी गंभीर और सामान्य मरीजों को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू किया और एम्बुलेंस के जरिए सरकारी अस्पताल (SKMCH) में शिफ्ट कराया, जहां डॉक्टरों की विशेष टीम उनका मुफ्त और बेहतर इलाज कर रही है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अभी यह कार्रवाई थमने वाली नहीं है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक अन्य निजी स्वास्थ्य संस्थानों की सघन जांच जारी है। स्वास्थ्य के नाम पर जनता की जेब काटने वाले और उनकी जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले एक दर्जन से ज्यादा अन्य अस्पतालों को भी बहुत जल्द बंद करने का फरमान जारी हो सकता है।

चेहरे और पते बदलकर फिर मौत का धंधाशुरू करने की फिराक में शातिर माफिया!

प्रशासनिक कार्रवाई से बचने के लिए ये पेशेवर और शातिर अपराधी नया रास्ता निकालने में माहिर हैं; सील होने के बाद ये लोग नए नाम, नए पते और किसी दूसरे छद्म चेहरे को आगे कर दोबारा अवैध नर्सिंग होम का धंधा चमका लेते हैं। स्वास्थ्य के नाम पर इंसानी जिंदगियों से खिलवाड़ करने वाले इन सफेदपोश अपराधियों के इस खतरनाक चक्रव्यूह को तोड़ने का एकमात्र रास्ता यही है कि सिर्फ अस्पतालों की बिल्डिंग को सील न किया जाए, बल्कि इन अवैध संचालकों की व्यक्तिगत पहचान (जैसे आधार, पैन और फिंगरप्रिंट ट्रैक कर) सुनिश्चित की जाए। जिला प्रशासन को इन शातिर माफियाओं के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं और जालसाजी (420) के तहत नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर इन्हें सलाखों के पीछे भेजना होगा, ताकि कानून के खौफ से दोबारा कोई मासूम मरीजों की जान का सौदा करने की हिम्मत न कर सके।

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नीतीश-भाजपा की लिस्ट से ‘कुशवाहा’ गायब, उधर चिराग ने ‘मुस्लिम कार्ड’ खेलकर सबको चौंकाया; बिहार MLC चुनाव में भारी उलटफेर!

उपेंद्र कुशवाहा के बेटे (मंत्री) की कुर्सी पर मंडराया संकट, अंतिम समय में ‘पत्ता’ खुलने का इंतजार; लोजपा (रा.) ने अशरफ अंसारी को मैदान में उतारकर चली बड़ी चाल।

पटना। बिहार विधान परिषद (MLC) की 9 सीटों और 1 सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर सूबे की सियासत में भूचाल आ गया है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपनी रणनीति के तहत 9 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने 4-4 सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा की है। लेकिन इस पूरी लिस्ट में सबसे चौंकाने वाला और सनसनीखेज मोड़ लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के फैसले और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के कोटे को लेकर आया है।

“बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए लोजपा (रामविलास) का टिकट मिलने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और समर्थकों के बीच माला पहनकर आभार जताते उम्मीदवार व प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष अशरफ अंसारी। पास में खड़े पार्टी पदाधिकारी एकजुटता का संदेश देते हुए।”

चिराग पासवान का मास्टरस्ट्रोक‘, पुराने चेहरे पर जताया भरोसा लोजपा (रामविलास) के मुखिया चिराग पासवान ने शनिवार को एक बड़ा सियासी दांव खेलते हुए सबको हैरान कर दिया। पार्टी के केंद्रीय पार्लियामेंट्री बोर्ड ने बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए अपने पुराने और भरोसेमंद मुस्लिम चेहरे, प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष अशरफ अंसारी को उम्मीदवार घोषित किया है। चिराग के इस ‘मुस्लिम कार्ड’ को विपक्ष के कोर वोट बैंक में सेंधमारी के रूप में देखा जा रहा है। टिकट मिलने के बाद अशरफ अंसारी ने पार्टी नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा, पार्टी ने जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसे पूरी निष्ठा के साथ निभाएंगे और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरेंगे।”

उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और मंत्री दीपक प्रकाश की कुर्सी खतरे में! दूसरी तरफ, सबसे बड़ा सस्पेंस सम्राट सरकार में पंचायती राज मंत्री और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश (दीपक कुशवाहा) को लेकर बना हुआ है। एनडीए की घोषित 9 सीटों में उनका नाम गायब है। चूंकि वह अभी किसी भी सदन (विधानसभा या विधान परिषद) के सदस्य नहीं हैं, इसलिए मंत्री पद पर बने रहने के लिए उनका एमएलसी बनना अनिवार्य है। इस झटके के बाद उपेंद्र कुशवाहा के बेटे के मंत्री पद पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

अंतिम समय में पत्ता खुलने की उम्मीद, कुशवाहा ने संभाली कमान इस संकट के बीच राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा अपने बेटे को एमएलसी बनाने की जुगत में पूरी ताकत से जुट गए हैं। शनिवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, अभी नामांकन खत्म होने में दो दिन बाकी हैं, तब तक इंतजार कीजिए।” कुशवाहा ने पुष्टि की कि वह इस मसले पर एनडीए के शीर्ष नेताओं से लगातार संपर्क में हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अंतिम समय में कोई बड़ा उलटफेर हो सकता है और दीपक प्रकाश का पत्ता खुल सकता है।

क्या है सीटों का गणित? बिहार विधान परिषद में विधानसभा कोटे की 9 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव और पूर्व सीएम नीतीश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई 1 सीट पर उपचुनाव हो रहा है। विधानसभा में संख्याबल के हिसाब से कुल 10 में से 9 सीटों पर एनडीए की जीत पूरी तरह तय मानी जा रही है, जबकि 1 सीट विपक्ष के खाते में जा सकती है। चुनाव के लिए 8 जून को नामांकन का आखिरी दिन है, जबकि 18 जून को मतदान होना है। अब देखना यह है कि आखिरी दो दिनों में उपेंद्र कुशवाहा अपनी साख और बेटे की मंत्री कुर्सी बचा पाते हैं या नहीं!

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आपकी थाली में ‘शाकाहार’ के नाम पर क्या परोसा जा रहा है? अब ‘वीगन’ करेगा पहचान

खाद्य सुरक्षा विभाग (FSSAI) ने जारी की सख्त संशोधन विनियम 2026′ की अधिसूचना! 1 जुलाई 2027 से बिना इस सरकारी वीगन लोगोके बाजार में नहीं बिकेगा कोई भी वीगन फूड पैकेट; उल्लंघन करने वालों पर होगी कड़ी कानूनी कार्रवाई।

विशेष रिर्पोट  : एस. एस. कुमार ‘पंकज ’  

 देश में शुद्ध शाकाहार और वीगन जीवनशैली अपनाने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से अब तक की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। बाजार में शुद्धता और ‘प्योर वेज’ के नाम पर चल रहे भ्रम को हमेशा के लिए जड़ से खत्म करने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। FSSAI ने खाद्य सुरक्षा और मानक (वीगन खाद्य पदार्थ) संशोधन विनियम, 2026′ की आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना जारी कर दी है।

इस नए सरकारी फरमान के तहत अब देश में बिकने वाले हर एक वीगन प्रोडक्ट के पैकेट पर सरकार द्वारा प्रमाणित विशेष वीगन लोगोलगाना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है।

वीगन एक ऐसी जीवनशैली और आहार पद्धति है, जो पूरी तरह से पशु-क्रूरता और उनके शोषण को समाप्त करने के सिद्धांत पर आधारित है। वीगन आहार अपनाने वाले लोग न केवल मांस-मछली और अंडे से दूरी बनाते हैं, बल्कि वे उन सभी चीजों का भी पूरी तरह त्याग करते हैं जो किसी भी जानवर से प्राप्त होती हैं—जैसे कि दूध, दही, पनीर, मक्खन, घी और यहाँ तक कि शहद भी। साधारण शाकाहार से अलग, वीगन जीवनशैली जीने वाले लोग चमड़े, ऊन, रेशम, या जानवरों पर टेस्ट किए गए सौंदर्य प्रसाधनों का भी इस्तेमाल नहीं करते हैं। सीधे शब्दों में कहें, तो यह जीवन को पूरी तरह से केवल पेड़-पौधों से मिलने वाले (Plant-based) विकल्पों पर केंद्रित करने और पशुओं के प्रति दयाभाव रखने का एक संकल्प है।

1 जुलाई 2027 से लागू होगा चक्रव्यूह

सरकारी अधिसूचना के मुताबिक, यह नियम 1 जुलाई, 2027 से पूरे देश में पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा। इस तारीख के बाद, यदि कोई भी कंपनी बिना FSSAI की लिखित मंजूरी और बिना तय मानक वाले ‘लोगो’ के अपने उत्पाद को ‘वीगन’ बताकर बेचती पाई गई, तो उसे कानूनन संगीन अपराध माना जाएगा और भारी जुर्माने के साथ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) राजित पुनहानी द्वारा जारी इस आदेश से मिलावटखोरों और भ्रामक विज्ञापन करने वाली कंपनियों में हड़कंप मच गया है।

क्या है वीगनका असली खेल और क्यों पड़ी जरूरत?

आम जनता अक्सर सामान्य शाकाहार (Vegetarian) और वीगन (Vegan) में अंतर नहीं समझ पाती। वीगन खाद्य पदार्थों में न केवल मांस-मछली, बल्कि दूध, दही, पनीर, घी, शहद या किसी भी जानवर से प्राप्त होने वाले तत्व की एक बूंद भी शामिल नहीं हो सकती।

अब तक बाजार में कंपनियां बिना किसी कड़े मानक के अपने मनमुताबिक पैकेट पर ‘वीगन’ लिख देती थीं, जिससे उपभोक्ता ठगे जा रहे थे। लेकिन अब FSSAI के इस नए चक्रव्यूह से फर्जीवाड़ा करने वाले ब्रांड्स का बचना नामुमकिन होगा। कंपनियों को इस लोगो को छापने के लिए FSSAI की प्रयोगशालाओं से कड़े वेरिफिकेशन टेस्ट से गुजरना होगा।

कैसा होगा नया सरकारी लोगो? (सटीक पैमाना तय)

FSSAI ने इस लोगो की बनावट और रंगों का बिल्कुल सटीक गणितीय पैमाना जारी किया है:

  • डिजाइन: एक हरे रंग के चौकोर बॉक्स के अंदर अंग्रेजी का बड़ा ‘V’ अक्षर होगा, जिसके बीच में एक छोटी सी सुरक्षित पत्ती बनी होगी और नीचे स्पष्ट अक्षरों में ‘VEGAN’ लिखा होगा।
  • सटीक आकार: सरकार ने मिलीमीटर (mm) में इसका साइज तय किया है (A=7, B=10, C=7, H=15, I=15 mm) ताकि कोई भी कंपनी इसके मूल स्वरूप से छेड़छाड़ न कर सके।
  • रंग का कोड: लोगो के लिए विशेष हरा रंग निर्धारित किया गया है जिसका इंटरनेशनल प्रिंटिंग कोड (C=60, M=0, Y=89, K=0) तय है।

जनता पर क्या होगा असर?

इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब उपभोक्ताओं को पैकेट के पीछे लिखे बारीक अक्षरों वाली सामग्री को पढ़ने के लिए सिरपच्ची नहीं करनी होगी। पैकेट के ठीक सामने लगा यह खास ‘V’ मार्क ही इस बात की सौ प्रतिशत गारंटी होगा कि प्रोडक्ट पूरी तरह से क्रूरता-मुक्त (Cruelty-free) और पशु-तत्व रहित है। अब आपकी थाली में धोखा परोसना नामुमकिन होगा!

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खाद माफियाओं में हड़कंप: बिहार में बड़ी स्ट्राइक, 208 डीलरों के लाइसेंस रद्द, 29 पर FIR!

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा का कड़ा एक्शन; सीमावर्ती 7 जिलों में एक साथ छापेमारी से मचा हड़कंप, 275 दुकानों में पकड़ी गई हेराफेरी।

पटना। बिहार में किसानों के हक पर डाका डालने वाले खाद माफियाओं और कालाबाजारियों के खिलाफ जदयू -भाजपा (NDA) सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। सूबे के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के निर्देश पर राज्य के सीमावर्ती जिलों में अचानक चलाए गए महा-अभियान से खाद तस्करों और भ्रष्ट दुकानदारों के खेमे में हड़कंप मच गया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि किसानों के पसीने की कमाई को लूटने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

एक साथ 2,573 दुकानों पर छापा, खुली पोल

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने खुद सोशल मीडिया (ट्विटर) पर इस ताबड़तोड़ कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि किसानों को सही कीमत पर और बिना किसी किल्लत के गुणवत्तापूर्ण उर्वरक (खाद) मुहैया कराने के लिए पूरे राज्य में एक व्यापक जांच अभियान छेड़ा गया। इस अभियान के तहत विशेष रूप से सीमावर्ती 7 जिलों की कुल 2,573 उर्वरक दुकानों पर एक साथ धावा बोला गया। इस औचक निरीक्षण ने खाद वितरण में चल रहे काले खेल की पोल खोल कर रख दी।

कार्रवाई का पूरा ब्योरा: आंकड़ों में समझिए हड़कंप

कुल निरीक्षण (दुकानें)पकड़ी गई अनियमितताएंरद्द किए गए लाइसेंसदर्ज हुई FIR
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जांच के दौरान 275 दुकानों में भारी अनियमितताएं, स्टॉक में हेराफेरी और कालाबाजारी के सबूत मिले। सरकार ने इस पर बिना कोई वक्त गंवाए बिजली की गति से एक्शन लिया। नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले 208 उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिए गए हैं, यानी उनका धंधा हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है। वहीं, गंभीर धोखाधड़ी में शामिल 29 दुकानदारों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराकर उन्हें जेल भेजने की तैयारी कर ली गई है।

किसानों के हितों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं”

“यह कार्रवाई महज एक शुरुआत है। किसानों के हितों की रक्षा और उर्वरक वितरण व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता लाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। एनडीए (NDA) सरकार किसानों को उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराने और सूबे की कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कालाबाजारी करने वाले सुधर जाएं, वरना अगली बारी जेल की होगी।” विजय कुमार सिन्हा, कृषि मंत्री, बिहार

सीमावर्ती जिलों पर विशेष नजर

जानकारों के मुताबिक, सीमावर्ती जिलों से अक्सर खाद की तस्करी और ऊंची कीमतों पर बिक्री की शिकायतें आ रही थीं। कृषि विभाग की इस अचानक हुई कार्रवाई से उन सिंडिकेट्स की कमर टूट गई है जो नकली खाद या ऊंचे दामों पर खाद बेचकर किसानों का शोषण कर रहे थे। सरकार के इस सख्त रुख से आम किसानों ने राहत की सांस ली है, वहीं भ्रष्ट अधिकारियों और डीलरों की नींद उड़ गई है।

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मोकामा के ‘घूसखोर’ जूनियर इंजीनियर धरनीधर राय को कोर्ट ने ठहराया दोषी! : भ्रष्टाचार पर सम्राट  सरकार का बड़ा प्रहार

विजिलेंस कोर्ट का बड़ा फैसला: सर्व शिक्षा अभियान में ₹5,000 की घूस लेते रंगे हाथों पकड़े गए थे साहब, अब भुगतेंगे सजा

निगरानी विभाग की तगड़ी चार्जशीट से थर्राए रिश्वतखोर सरकारी बाबू, ₹300 से लेकर ₹2 लाख तक की घूस खाने वालों का खुला कच्चा चिट्ठा!

पटना। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही ‘जीरो टॉलरेंस’ की मुहिम के तहत विजिलेंस (निगरानी) विभाग को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। पटना के विशेष निगरानी कोर्ट के माननीय न्यायाधीश ने एक कड़ा फैसला सुनाते हुए सर्व शिक्षा अभियान, मोकामा (पटना) के कनीय अभियंता (JE)  धरनीधर राय को भ्रष्टाचार का दोषी करार दिया है। विजिलेंस ब्यूरो द्वारा अदालत में पेश किए गए पुख्ता सबूतों और चार्जशीट के आगे आरोपी इंजीनियर की एक न चली और कोर्ट ने उसे सलाखों के पीछे भेजने का रास्ता साफ कर दिया।

भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस कोर्ट का बड़ा हथौड़ा; मोकामा के कनीय अभियंता धरनीधर राय को ₹5,000 की घूसखोरी मामले में पटना निगरानी अदालत ने ठहराया दोषी।दायें में  मुजफ्फरपुर के जिला योजना पदाधिकारी (₹2 लाख घूसकांड) से लेकर नवादा के बिजली विभाग के JE (₹300 घूसकांड) समेत कुल 9 घूसखोरों को पटना की विशेष निगरानी अदालत ने जारी किया नाम ।

₹5000 की रिश्वत लेते दबोचे गए थे साहब

मामला साल 2016 का है। निगरानी थाना कांड संख्या-35/2016 (विशेष वाद सं.-19/2016) के तहत आरोपी कनीय अभियंता धरनीधर राय को विजिलेंस की टीम ने ₹5,000 की रिश्वत की राशि के साथ रंगे हाथों दबोचा था। बच्चों की शिक्षा और स्कूलों के विकास के लिए आने वाले फंड में भी कमीशनखोरी का यह घिनौना खेल चल रहा था।

इन धाराओं के तहत तय हुआ दोष, जाएगी नौकरी!

अदालत ने आरोपी धरनीधर राय को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7, 13(2) सह पठित धारा 13(1)(डी) के तहत दोषी पाया है। कानूनी जानकारों के मुताबिक, इस दोषसिद्धि के बाद अब आरोपी इंजीनियर की सरकारी नौकरी जाना तय है, साथ ही उन्हें एक लंबी जेल टर्म और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की इस बड़ी सफलता से रिश्वतखोर सरकारी बाबुओं और इंजीनियरों के खेमे में हड़कंप मच गया है।

कुर्सी भी जाएगी और जेल की चक्की भी पीसेंगे!

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, विजिलेंस कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद अब इन सभी 9 आरोपियों की सरकारी नौकरी जाना लगभग तय माना जा रहा है। इसके साथ ही इन सभी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भारी आर्थिक जुर्माना और कई सालों की कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी। बिहार सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, यह फैसला उन सभी कर्मचारियों के लिए एक कड़ा सबक है जो जनता की गाढ़ी कमाई पर डाका डालते हैं।”

निगरानी विभाग की तगड़ी चार्जशीट से थर्राए रिश्वतखोर सरकारी बाबू, ₹300 से लेकर 2 लाख तक की घूस खाने वालों का खुला कच्चा चिट्ठा!

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ विशेष निगरानी अदालत ने एक साथ बड़ा हथौड़ा चलाते हुए राज्य के विभिन्न विभागों में तैनात रहे 9 घूसखोर अधिकारियों और कर्मियों को दोषी करार देने की पक्रिया जारी की है। विजिलेंस ब्यूरो द्वारा अदालत में पेश किए गए अकाट्य साक्ष्यों और वैज्ञानिक तरीके से तैयार की गई चार्जशीट के आधार पर माननीय विशेष न्यायालय (निगरानी) ने इन सभी आरोपियों को अलग-अलग मामलों में सजा सुनाने का रास्ता साफ कर दिया है।

अदालत के इस फैसले से पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। इस सूची में वन विभाग के रेंजर, पुलिस के थानेदार, बिजली विभाग के कनीय अभियंता और जिला योजना पदाधिकारी जैसे रसूखदार नाम शामिल हैं, जिन्हें निगरानी की टीम ने सैकड़ों रुपये से लेकर लाखों रुपये तक की रिश्वत लेते हुए दबोचा था।

इन 9 ‘महा-भ्रष्टाचारियोंके पाप का घड़ा फूटा, देखिए पूरी ब्लैक लिस्ट:

  1.  ओम प्रकाश (तत्कालीन जिला योजना पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर): इस सूची के सबसे बड़े खिलाड़ी, जिन्हें ₹2,00,000 (दो लाख रुपये) की भारी-भरकम रिश्वत राशि के साथ विजिलेंस ने दबोचा था।
  2.  धरनीधर राय (कनीय अभियंता, सर्व शिक्षा अभियान, मोकामा, पटना): बच्चों की शिक्षा के फंड में कमीशनखोरी करने वाले इन साहब को ₹5,000 की रिश्वत लेते पकड़ा गया था।
  3.  राम नरेश प्रसाद (प्रभारी प्रधान लिपिक, अंचल कार्यालय, दिनारा, रोहतास): जमीन और अंचल के कामों के बदले ₹8,000 की घूस लेते पकड़ा गया था।
  4. लाल बाबू प्रसाद (तत्कालीन थाना प्रभारी, अतरी, गया): खाकी को दागदार करने वाले इस पूर्व थानेदार को केस रफा-दफा करने के नाम पर ₹6,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया था।
  5. जयराम सिंह (कनीय अभियंता, ग्रामीण विकास विभाग, नवादा): ग्रामीण सड़कों और विकास योजनाओं में ₹3,000 की कमीशनखोरी के जाल में फंसे JE साहब भी अब नप गए हैं।
  6. कृष्णदेव पासवान (प्रधान लिपिक-सह-लेखापाल, नगर परिषद, डेहरी ऑन सोन): नगर परिषद के फंड में हेराफेरी और ₹2,900 की घूसखोरी के मामले में नप गए हैं।
  7. सीताराम चौधरी (तत्कालीन रेंजर, जिला-वैशाली): पर्यावरण और जंगलों की सुरक्षा के बदले ₹1,500 की रिश्वत लेने वाले पूर्व रेंजर ।
  8.  सुदामा राय (कनीय विद्युत अभियंता, नवादा): आम जनता को बिजली कनेक्शन या बिल सुधार के नाम पर महज ₹300 जैसी छोटी रकम की भी घूस खाने वाले कनीय अभियंता है।
  9. नरेश प्रसाद (तत्कालीन सहायक अवर निरीक्षक, थाना-गिरियक, नालंदा) एवं नरेश प्रसाद (दलाल): थाने में दलाली का नेक्सस चलाने वाले इस दारोगा और उसके दलाल साथी को भी विजिलेंस रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया था।

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खेतों से उठेगी तरक्की की गूंज! बिहार को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार का महाशंखनाद, खरीफ महाभियान-2026 शुरू!

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा का बड़ा ऐलान: “प्रकृति के सारथी किसानों के दम पर खड़ी होगी बिहार की नई अर्थव्यवस्था, अब आधुनिक तकनीक से बदलेगी अन्नदाताओं की तकदीर”

पटना, बिहार के कृषि क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत करते हुए आज राजधानी पटना के बामेती सभागार से ‘राज्यस्तरीय शारदीय (खरीफ) महाभियान-2026’ का धमाकेदार शंखनाद हो गया। बिहार कृषि प्रबंधन एवं प्रसार प्रशिक्षण संस्थान (बामेती ) द्वारा आयोजित इस राज्यस्तरीय कर्मशाला और ‘कृषि जन कल्याण चौपाल’ का भव्य उद्घाटन मुख्य अतिथि एवं प्रदेश के यशस्वी कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने दीप प्रज्वलित कर किया।

पटना के बामेती सभागार में आयोजित ‘राज्यस्तरीय शारदीय (खरीफ) कर्मशाला 2026’ का दीप प्रज्वलित कर विधिवत उद्घाटन करते माननीय कृषि मंत्री  विजय कुमार सिन्हा। इस गरिमामयी अवसर पर उनके साथ विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक और प्रदेशभर से आए विशेषज्ञ कृषि तकनीक एवं किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प के साथ उपस्थित रहे।

इस ऐतिहासिक अवसर पर उपस्थित जनसमूह, कृषि वैज्ञानिकों और किसान प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि किसान हमेशा प्रकृति के अनुसार चलता है और कृषि ही बिहार की अर्थव्यवस्था की सबसे मजबूत नींव है। उन्होंने जोर देकर कहा, “हमारा लक्ष्य केवल फसल उगाना नहीं, बल्कि बिहार के हर एक किसान को आर्थिक रूप से सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाना है। यह कार्यशाला प्रदेश के अन्नदाताओं को नई ऊर्जा, आधुनिक कृषि पद्धतियों और अत्याधुनिक तकनीकों से जोड़ने की दिशा में एक क्रांतिकारी मील का पत्थर साबित होगी।”

कृषि मंत्री ने अपनी नीति स्पष्ट करते हुए कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी मार्गदर्शन और केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी के कुशल नेतृत्व में देश का कृषि क्षेत्र लगातार अधिक उन्नत, लाभकारी और किसान-केंद्रित बन रहा है। इसी कड़ी में, बिहार के मुख्यमंत्री  सम्राट चौधरी के नेतृत्व में राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ किसानों की आय में रिकॉर्ड वृद्धि, कृषि नवाचार, एग्री-स्टैक, फार्मर रजिस्ट्री और टिकाऊ (प्राकृतिक) कृषि प्रणाली को धरातल पर उतारने के लिए चौतरफा काम कर रही है।

 महाभियान 2026 के मुख्य एजेंडे: जिनपर बनी बड़ी रणनीति

  • गुणवत्तापूर्ण बीज और उर्वरक: हर जिले के आखिरी किसान तक समय पर उच्च कोटि के बीज व खाद की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
  • प्राकृतिक खेती पर जोर: रसायनों के बढ़ते प्रयोग को रोककर मिट्टी की सेहत बचाने के लिए प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन बनाया जाएगा।
  • डिजिटल कृषि (फार्मर रजिस्ट्री): एग्री-स्टैक के जरिए हर किसान का डेटाबेस तैयार होगा ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से मिले।

कर्मशाला के दौरान विभिन्न जिलों से आए कृषि कर्मियों, विभागीय अधिकारियों और देश के नामचीन कृषि वैज्ञानिकों के साथ खरीफ फसलों की उत्पादकता को रिकॉर्ड स्तर पर ले जाने के लिए तकनीकी सत्रों में गहन मंथन हुआ। कृषि मंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक आविष्कारों का लाभ केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि इसे खेतों तक प्रभावी रूप से पहुंचाया जाए। उन्होंने साफ कहा कि समृद्ध किसान, सशक्त कृषि और विकसित बिहार ही हमारी सरकार का अंतिम और अटल संकल्प है, जिससे कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

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लालू-राबड़ी की Z+ सुरक्षा छिनने से भड़का ‘यादव परिवार’, पटना आवास के बाहर से खुद हटा दी पूरी फोर्स!

सियासी भूचाल: बिहार सरकार ने लालू-राबड़ी की सुरक्षा घटाई, गुस्से में पूर्व मुख्यमंत्रियों ने बचे-खुचे गार्ड्स को भी वापस भेजा; प्रशांत किशोर का तीखा तंज- “सुरक्षा तो इनके लिए स्टेटस सिंबल है।”

पटना। बिहार की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। नीतीश सरकार द्वारा राबड़ी आवास को खाली करने का नोटिस दिए जाने के बाद, अब लालू परिवार की सुरक्षा व्यवस्था में हुए बड़े बदलाव ने राजनीतिक गलियारों में तहलका मचा दिया है। बिहार सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की ‘Z+’ (जेड प्लस) सुरक्षा कवर को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। सरकार के इस फैसले से नाराज लालू-राबड़ी ने एक बेहद चौंकाने वाला कदम उठाते हुए अपने पटना आवास के बाहर तैनात सभी बचे हुए सुरक्षाकर्मियों को भी खुद ही हटाकर वापस भेज दिया है।

सुरक्षा हटाने के विरोध में सन्नाटा: पटना स्थित राबड़ी आवास का मुख्य गेट, जहाँ से Z+ सुरक्षा हटने के बाद लालू-राबड़ी के निर्देश पर सभी सुरक्षाकर्मियों को हटा दिया गया है। खाली पड़े सुरक्षा बूथ और मेटल डिटेक्टर साफ बयां कर रहे हैं कि लालू परिवार सरकार के इस फैसले से कितना खफा है।

अब 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी आवास का मुख्य द्वार पूरी तरह सूना नजर आ रहा है, जहाँ कभी चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मियों का कड़ा पहरा हुआ करता था।

अब कैसी होगी लालू-राबड़ी और तेजस्वी की सुरक्षा? Z+ सुरक्षा श्रेणी खत्म होने के बाद अब लालू यादव और राबड़ी देवी को बिहार पुलिस की विशेष सुरक्षा व्यवस्था दी जाएगी। नई व्यवस्था के तहत उनके पास एस्कॉर्ट, बुलेटप्रूफ कार और सीमित सुरक्षा गार्ड तैनात रहेंगे। वहीं दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की ‘Y+’ (वाई प्लस) सुरक्षा को फिलहाल बरकरार रखा गया है। सरकार के इस कदम को राष्ट्रीय जनता दल  राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बता रही है।

सुरक्षा इनके लिए सिर्फ स्टेटस सिंबल है” प्रशांत किशोर का करारा हमला इस पूरे सुरक्षा विवाद पर ‘जन सुराज’ के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने लालू परिवार पर तीखा तंज कसा है। पीके ने कहा, जिनको सिक्योरिटी चाहिए, वो इस लड़ाई में पड़ें। जन सुराज में तो कम से कम हम लोग यह कहते हैं कि हमें कोई सुरक्षा नहीं चाहिए। न हम लोग सुरक्षा लेकर चलते हैं और न ही इस चक्कर में रहते हैं कि हमारे साथ कितने गार्ड चल रहे हैं।”

प्रशांत किशोर ने आगे कहा, जिनके लिए सुरक्षा सिर्फ एक स्टेटस सिंबल‘ (रसूख का प्रतीक) है, चिंता भी उन्हीं को होती है कि उनकी सुरक्षा घट रही है या बढ़ रही है। हम लोग तो पहले भी गांव-देहात में पैदल अकेले ही चल रहे थे और आज भी जनता के बीच अकेले ही घूम रहे हैं। हमारे साथ जनता का प्यार है, हमें किसी सरकारी सुरक्षा की जरूरत नहीं। जिनका हटाया, घटाया या बढ़ाया गया है, यह सिरदर्द उनका है, टिप्पणी भी वही लोग करें।”

आर-पार के मूड में लालू परिवार राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा हटाए जाने और आवास खाली करने के नोटिस को लालू परिवार जनता के बीच ‘विक्टिम कार्ड’ के रूप में भुनाने की कोशिश करेगा। आवास से अचानक सारे गार्ड्स को हटाकर लालू-राबड़ी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे सरकार के सामने झुकने वाले नहीं हैं। अब देखना यह है कि अब  आगे सुरक्षा का यह ‘सुलगता मुद्दा’ बिहार की राजनीति को किस ओर मोड़ता है।

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धरती को बचाने के लिए युवाओं का महासंकल्प: “साँसें हो रही हैं कम, आओ पेड़ लगाएं हम!”

मुखर्जी सेमिनरी हाई स्कूल में विश्व पर्यावरण दिवस पर उमड़ा ‘मेरा युवा भारत’ का सैलाब, युवाओं ने लिया हरियाली का संकल्प

मुजफ्फरपुर, 5 जून 2026 बढ़ते प्रदूषण और तपती धरती के बीच आज मुजफ्फरपुर के युवाओं ने पर्यावरण संरक्षण का एक नया अध्याय लिख दिया है। ‘मेरा युवा भारत, मुजफ्फरपुर’ के तत्वावधान में ‘वीर वॉरियर युवा क्लब’ द्वारा मुखर्जी सेमिनरी हाई स्कूल में विश्व पर्यावरण दिवस का धमाकेदार आयोजन किया गया। इस दौरान युवाओं के जोश और संकल्प को देखकर ऐसा लगा कि अब मुजफ्फरपुर की आबो-हवा बदलने वाली है।

“धरती का श्रृंगार, पौधों से प्यार!”: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुखर्जी सेमिनरी हाई स्कूल परिसर में मिट्टी को खोदकर पौधा रोपते ‘मेरा युवा भारत’ और ‘वीर वॉरियर यूथ क्लब’ के उत्साही युवा।

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि जिला युवा अधिकारी (मेरा युवा भारत, मुजफ्फरपुर) बुशरा रहमान, विशिष्ट अतिथि एन.सी.सी. ए.एन.ओ. बालमुकुंद कुमार और सहायक प्रशाखा अधिकारी चन्देश्वर पाण्डेय द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर की गई।

जल की तरह स्वच्छ हवा भी है जीवन का आधार” : बुशरा रहमान युवाओं को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि बुशरा रहमान ने बेहद गंभीर लहजे में चेतावनी देते हुए कहा, “आज के दौर में जिस तरह जीवन के लिए जल महत्वपूर्ण है, ठीक उसी तरह स्वच्छ हवा भी हमारे स्वास्थ्य के लिए अतिआवश्यक है। प्रदूषित होते वातावरण को शुद्ध करने के लिए सिर्फ बातें करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि हमें भारी मात्रा में पेड़ लगाने होंगे और उससे भी ज्यादा जरूरी है कि हमें उन पेड़ों को बचाना होगा।”

“हरियाली की हुंकार, युवा तैयार!”: पर्यावरण संरक्षण के महासंकल्प के साथ मुखर्जी सेमिनरी हाई स्कूल के मुख्य द्वार पर मुख्य अतिथि बुशरा रहमान, विशिष्ट अतिथि बालमुकुंद कुमार, चन्देश्वर पाण्डेय एवं वीर वॉरियर यूथ क्लब के सदस्यों के साथ बैनर थामे एकजुटता प्रदर्शित करते मुजफ्फरपुर के देशप्रेमी युवा।

हर युवा लगाए कम से कम एक पेड़ कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे एन.सी.सी. ए.एन.ओ. बालमुकुंद कुमार ने युवाओं में जोश भरते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण का रास्ता पर्यावरण की सुरक्षा से होकर गुजरता है। उन्होंने हर युवा से अनिवार्य रूप से कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी जिम्मेदारी लेने का आह्वान किया।

प्रतियोगिताओं और वृक्षारोपण से गूंजा परिसर पर्यावरण दिवस के इस विशेष अवसर पर स्कूल परिसर में केवल भाषण नहीं हुए, बल्कि धरातल पर काम दिखा। युवाओं ने बढ़-चढ़कर वृक्षारोपण किया। इसके साथ ही पर्यावरण चेतना को जगाने के लिए क्विज प्रतियोगिता और सेमिनार का भी आयोजन किया गया, जिसमें युवाओं ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उपस्थित वक्ताओं ने इस दौरान युवाओं को देशभक्ति, सामाजिक सेवा और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रेरित किया।

इन जांबाज युवाओं ने निभाई अग्रणी भूमिका इस भव्य कार्यक्रम को सफल बनाने में पूर्व राष्ट्रीय स्वयंसेवक चंदन कुमार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक धर्मेन्द्र कुमार, राजा कुमार (मुशहरी), कुमारी गीताजंली (मरवन) और संतोष कुमार (मीनापुर) ने दिन-रात एक कर महत्वपूर्ण सहभागिता निभाई। इसके साथ ही, वीर वॉरियर यूथ क्लब की अध्यक्ष साक्षी कुमारी और क्लब के अन्य सदस्यों ने अपनी पूरी ताकत झोंककर इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।

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समस्तीपुर में बंद पड़े कारखानों को खोलने के लिए आर-पार की जंग का ऐलान, 15 जून को DM दफ्तर का महाघेराव!

चीनी मिल, पेपर मिल और जूट मिल की बदहाली पर फूटा जनता का गुस्सा; दूधपूरा हवाई अड्डे को फिर चालू करने की उठी पुरजोर मांग, सड़क पर उतरे जिले के सभी दिग्गज नेता।

समस्तीपुर, 5 जून 2026: जिले के आर्थिक और औद्योगिक वजूद को बचाने के लिए अब जनता ने सीधे सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। “समस्तीपुर जिला विकास संघर्ष मोर्चा” के बैनर तले शुक्रवार को पूरे शहर में एक व्यापक और आक्रामक जनसंपर्क अभियान चलाया गया। इस अभियान ने शहरवासियों को एकजुट कर आने वाले दिनों में एक बड़े जनांदोलन का शंखनाद कर दिया है। मोर्चा ने दो टूक एलान किया है कि आगामी 15 जून 2026 को जिलाधिकारी (DM) कार्यालय के समक्ष एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल होंगे।

औद्योगिक मौत के कगार पर समस्तीपुर, युवाओं में भारी गुस्सा अभियान के दौरान जनसमूह को संबोधित करते हुए मोर्चा के शीर्ष नेताओं ने आरोप लगाया कि समस्तीपुर के विकास की रीढ़ माने जाने वाले महत्वपूर्ण संस्थान वर्षों से बंद पड़े हैं, लेकिन शासन-प्रशासन गहरी नींद में सोया हुआ है। इसके कारण जिले का आर्थिक ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है और स्थानीय व्यापार ठप होने की कगार पर है।

“हक की आवाज:” समस्तीपुर जिला विकास संघर्ष मोर्चा के बैनर तले बंद पड़े उद्योगों को पुनः चालू कराने और जिले के विकास की मांगों को लेकर शहर में जनसंपर्क अभियान चलाते विभिन्न राजनीतिक व सामाजिक संगठनों के नेता और कार्यकर्ता।

मोर्चा ने सरकार के सामने रखीं ये 4 बड़ी मांगें:

  1. वर्षों से बंद पड़ी ऐतिहासिक समस्तीपुर चीनी मिल को अविलंब दोबारा चालू किया जाए।
  2. जिले के औद्योगिक गौरव ठाकुर पेपर मिल का पुनरुद्धार कर उत्पादन शुरू हो।
  3. मरणासन्न स्थिति में पहुंच चुकी प्रसिद्ध मुक्तापुर रामेश्वर जूट मिल को बचाने के लिए विशेष पैकेज और विस्तार की गारंटी दी जाए।
  4. उपेक्षा का शिकार बने दूधपूरा हवाई अड्डा का जीर्णोद्धार कर इसे हवाई परिचालन के लिए फिर से सक्रिय किया जाए।

नेताओं ने कहा कि इन मिलों और हवाई अड्डे के चालू होने से न सिर्फ हजारों स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि जिले के समग्र विकास का रास्ता खुलेगा। लंबे समय से चल रही उपेक्षा के कारण जनता के भीतर सुलग रहा गुस्सा अब ज्वालामुखी बनकर फटने को तैयार है। मोर्चा ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक इन मांगों पर ठोस और धरातलीय पहल नहीं होती, तब तक यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है।

आंदोलन की कमान थामे ये : इस महा-अभियान में मोर्चा के संयोजक शत्रुघ्न राय पंजी, भाकपा माले के सुरेंद्र प्रसाद सिंह, उपेंद्र राय, जीतेंद्र कुशवाहा, दीनबंधु प्रसाद, माकपा के सत्यनारायण सिंह, रघुनाथ राय, कांग्रेस के विश्वनाथ सिंह हजारी, परमानंद मिश्र, राजद के राकेश ठाकुर, राम विनोद पासवान, मनोज राय समेत पिंकू पासवान, सुरेंद्र राम, राजकुमार महतो, शाहीद हुसैन, शंभू राय, जगदीश प्रसाद यादव, रामनारायण राय, सेवानिवृत्त शिक्षक शंकर प्रसाद साह, अशोक कुमार राय, रंजीत कुमार सिंह समेत विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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मुजफ्फरपुर में ‘मौत का अस्पताल’: प्रसाद हॉस्पिटल के ICU में जिंदा जले 6 मरीज; मेंटेनेंस-एडमिन हेड और ऑन-ड्यूटी गायब डॉक्टर गिरफ्तार, मालिकों पर लटकी तलवार!

मुजफ्फरपुर सिटी एसपी का बड़ा बयान— “बिल्डिंग निर्माण व फायर ऑडिट में मिली गड़बड़ी तो सीधे जेल जाएंगे हॉस्पिटल के ओनर और डायरेक्टर, जांच शुरू।”

मुजफ्फरपुर : ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ‘प्रसाद हॉस्पिटल’ में गुरुवार की तड़के सुबह इंसानियत को झकझोर देने वाला एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वाकया सामने आया है। सुबह करीब 4:00 बजे जब पूरा शहर सो रहा था, तब अस्पताल के अत्यंत संवेदनशील आईसीयू (ICU) वार्ड में अचानक भीषण आग लग गई। इस भयंकर अग्निकांड में आईसीयू में भर्ती बेबस मरीज अपनी जान बचाने के लिए तड़प उठे और देखते ही देखते कुल 6 बेकसूर लोगों की दर्दनाक मृत्यु की पुष्टि हो चुकी है। इस घटना के बाद पूरे जिले में कोहराम और आक्रोश का माहौल है।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस महकमे ने बेहद आक्रामक और त्वरित कार्रवाई की है। मुजफ्फरपुर के नगर पुलिस अधीक्षक (सिटी एसपी) मो0 मोहिबुल्लाह अंसारी ने प्रेस मीडिया को रोंगटे खड़े कर देने वाले इस केस की पूरी जानकारी दी। सिटी एसपी ने बताया कि मंडल अग्निशमन पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर के लिखित आवेदन के आधार पर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ काण्ड संख्या 177/26 दर्ज कर ली गई है।

ऑन-ड्यूटी डॉक्टर की घोर लापरवाही, 3 भेजे गए जेल

सिटी एसपी मो0 मोहिबुल्लाह अंसारी ने कड़े शब्दों में कहा कि प्रथम दृष्टया अस्पताल प्रशासन की आपराधिक लापरवाही उजागर हुई है। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने कड़ा एक्शन लेते हुए 03 मुख्य अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है, जिन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा रहा है। गिरफ्तार लोगों में:

  1. मेंटेनेंस हेड (जो सुरक्षा मानकों की देखरेख में नाकाम रहे)
  2. एडमिनिस्ट्रेशन हेड (जिन्होंने आपातकालीन सुरक्षा की अनदेखी की)
  3. आईसीयू ऑन-ड्यूटी डॉक्टर (जो हादसे के वक्त अपनी ड्यूटी से पूरी तरह नदारद और गायब थे)

एसपी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अस्पताल के ओनर और डायरेक्टर भी पुलिस के रडार पर हैं। जांच टीम यह खंगाल रही है कि क्या अस्पताल की बिल्डिंग बनाने में कानून (Building Bylaws) का उल्लंघन हुआ था और क्या फायर सेफ्टी का ऑडिट समय पर कराया गया था? अगर इनमें रत्ती भर भी खामी मिली, तो अस्पताल मालिकों को भी गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे डाला जाएगा।

मृतकों की संख्या हुई 6; प्रशासन ने तुरंत बांटा मुआवजा

तस्वीर में साफ देखा जा सकता है: मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा स्थित प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड में असमय काल के गाल में समाए मृतक बृजनंदन राय की मृत्यु के बाद उनके अत्यंत गरीब और शोकाकुल परिवार को सांत्वना देने प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे हैं। माननीय मुख्यमंत्री बिहार के सख्त निर्देश और जिलाधिकारी के आदेश पर त्वरित कार्रवाई करते हुए, अंचलाधिकारी व स्थानीय पुलिस बल की उपस्थिति में रोते-बिलखते पीड़ित आश्रित को आपदा प्रबंधन विभाग के तहत ₹4,00,000 (चार लाख रुपए) की अनुग्रह अनुदान राशि का सरकारी चेक तत्काल सुपुर्द किया गया।

अस्पताल में लगी आग की चपेट में आने से घायल एक और मरीज बृजनंदन राय की उपचार के दौरान मृत्यु हो जाने से कुल मृतकों की संख्या बढ़कर अब 6 हो गई है। घटना की भयावहता को देखते हुए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन तुरंत एक्शन मोड में आया। माननीय मुख्यमंत्री के कड़े निर्देश पर जिलाधिकारी के आदेशानुसार स्थानीय अंचलाधिकारी ने तत्काल मृतक के निकटतम आश्रित परिवार से मुलाकात की और आपदा प्रबंधन विभाग के तहत मिलने वाली ₹4-4 लाख की अनुग्रह अनुदान राशि का चेक रोते-बिलखते परिजनों को हाथों-हाथ सौंप दिया, ताकि पीड़ित परिवार को इस दुख की घड़ी में तुरंत राहत मिल सके।

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