बोचहां/मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर जिले के बोचहां थाना क्षेत्र स्थित अकाली चौक के पास 6 अगस्त 2026 को हुई बाइक सवार अपराधियों द्वारा लूटपाट की घटना का पुलिस ने सफल पर्दाफाश कर दिया है। इस सनसनीखेज वारदात में शामिल दो शातिर अपराधियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस ने इनके पास से लूटा गया मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल भी बरामद कर ली है।
बोचहां लूटकांड का सफल खुलासा करते ग्रामीण पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार सिंह प्रभाकर एवं पुलिस टीम की गिरफ्त में दो अभियुक्त।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर गठित हुई थी विशेष टीम
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुजफ्फरपुर के निर्देश पर सब डिविजनल पुलिस ऑफिसर (एसडीपीओ) ईस्ट-1 के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया था। इस टीम में बोचहां थानाध्यक्ष और थाना के अन्य पुलिस अधिकारी शामिल थे। पुलिस टीम ने मैनुअल और टेक्निकल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करते हुए अज्ञात लुटेरों की पहचान की और घेराबंदी कर उन्हें धर दबोचा।
कटरा थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं गिरफ्तार लुटेरे
मामले का खुलासा करते हुए ग्रामीण पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार सिंह प्रभाकर ने प्रेस वार्ता में बताया कि 6 अगस्त को अकाली चौक के पास तीन अज्ञात बाइक सवार अपराधियों ने लूट की घटना को अंजाम दिया था। सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और बोचहां थाना कांड संख्या 228/26 दर्ज कर छानबीन शुरू की गई।
कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार किए गए दोनों अपराधियों की पहचान कटरा थाना क्षेत्र निवासी श्रवण कुमार और राजा कुमार के रूप में हुई है।
पुराना आपराधिक इतिहास, पुलिस खंगाल रही अन्य मामले
ग्रामीण पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार सिंह प्रभाकर ने आगे बताया कि गिरफ्तार अभियुक्तों का पहले से आपराधिक इतिहास रहा है। ये दोनों आरोपी कटरा थाना क्षेत्र के कई आपराधिक मामलों में पूर्व से ही चार्जशीटेड हैं। पुलिस फिलहाल इनसे गहन पूछताछ कर रही है ताकि इनके गिरोह के अन्य सदस्यों और इनके काम करने के तरीके (मोडस ऑपरेंडी) का पता लगाया जा सके। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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पटना / हाजीपुर / सोनपुर (07 सितम्बर 2026): बिहार में बाढ़ के कहर के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद मैदान में उतर चुके हैं। वैशाली और सारण जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों का तूफानी दौरा करते हुए मुख्यमंत्री ने हाजीपुर और सोनपुर में संचालित राहत शिविरों की कमान अपने हाथों में ले ली। आपदा की इस संकट घड़ी में बाढ़ पीड़ितों का दर्द बांटने पहुंचे मुख्यमंत्री ने खुद अपने हाथों से बाल्टी और कलछी उठाकर पीड़ितों को खाना परोसा और सोनपुर में उनके साथ बैठकर भोजन भी किया।
बाढ़ राहत शिविर में हाथ में बाल्टी और कलछी थामकर बाढ़ पीड़ितों को खुद अपने हाथों से गर्म भोजन परोसते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, साथ में उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी।
राहत शिविरों में खुद लिया व्यवस्थाओं का जायजा
वैशाली जिले के गंगा ब्रिज थाना के सामने बने बाढ़ राहत शिविर में पहुंचे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कम्युनिटी किचन, भोजन वितरण काउंटर और निबंधन सह नियंत्रण कक्ष का निरीक्षण किया। उन्होंने महिलाओं और पुरुषों के रहने के लिए बने अलग-अलग शिविरों में जाकर सीधे लोगों से बात की। इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्र और शैक्षणिक शिविर में बच्चों से पढ़ाई और खान-पान का हाल जाना।
मृतकों के आश्रितों को 4-4 लाख रुपये की मदद, किसानों के लिए मुआवजे का ऐलान
स्वास्थ्य शिविर का जायजा लेते हुए मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों को तुरंत इलाज मुहैया कराने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने पशु चिकित्सा शिविर में दवा और पशु चारा की पूरी व्यवस्था करने को कहा। बाढ़ में डूबने से हुई मौतों पर दुख व्यक्त करते हुए उन्होंने मृतकों के आश्रितों को 4-4 लाख रुपये की सहायता राशि के चेक सौंपे। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि बाढ़ से हुए फसल नुकसान का सर्वे कराकर सभी प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाएगा।
गंगा के पानी में 17 से 18 सेंटीमीटर की गिरावट, फरक्का से 15 लाख क्यूसेक डिस्चार्ज
सोनपुर के स्काउट एंड गाइड सेंटर शिविर में निरीक्षण के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि गंगा के जलस्तर में लगभग 17 से 18 सेंटीमीटर की गिरावट आई है और फरक्का बराज से करीब 15 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। अगले 2 से 3 दिनों में स्थिति में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि गंगा नदी के स्ट्रेच को सीमा में बांधने और बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए केंद्रीय जल आयोग से भी बातचीत की गई है।
निरीक्षण में मौजूद रहे कई दिग्गज
इस दौरे में मुख्यमंत्री के साथ उप मुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, उप मुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, विधायक जनक सिंह, विधायक संजय सिंह, विधायक सिद्धार्थ पटेल, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल, गृह विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार, वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह, सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव, सारण के वरीय पुलिस अधीक्षक रौशन कुमार और वैशाली के पुलिस अधीक्षक सुभांक मिश्रा समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।
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पटना : बिहार में कुदरत का कहर और नदियों का उफान थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य की प्रमुख नदियों के जलस्तर में लगातार हो रही भयानक बढ़ोतरी से पूरे बिहार पर महाबाढ़ का संकट मंडराने लगा है। जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी), बिहार द्वारा जारी आंकड़ों ने पूरे राज्य की नींद उड़ा दी है। राज्य के प्रमुख बैराजों से लगातार पानी का डिस्चार्ज बढ़ाया जा रहा है, जिससे मैदानी इलाकों और नदियों के तटीय क्षेत्रों में प्रलयकारी स्थिति उत्पन्न हो गई है।
बैराजों से निकला जल-सैलाब, बढ़ता जा रहा जलस्तर
जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के तीनों प्रमुख बैराजों से पानी छोड़ने की दर लगातार बढ़ रही है:
सोन बैराज (इंद्रपुरी): सोन बैराज की डिजाइन डिस्चार्ज क्षमता 14.58 लाख क्यूसेक है। 06 सितंबर 2026 को दोपहर 2:00 बजे तक यहां से 2,01,092 (दो लाख एक हजार बांधवे) क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। लगातार बढ़ते रुझान (राइजिंग ट्रेंड) के कारण सोन नदी का जलस्तर तेजी से चढ़ रहा है।
कोसी बैराज (वीरपुर): वीरपुर स्थित कोसी बैराज की क्षमता 9.50 लाख क्यूसेक है। दोपहर 2:00 बजे तक यहां से 1,81,145 (एक लाख एकासी हजार एक सौ पैंतालीस) क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया। सुबह 11:00 बजे यह 1.69 लाख क्यूसेक था, जो दोपहर तक लगातार बढ़कर जल प्रलय का संकेत दे रहा है।
गंडक बैराज (वाल्मीकिनगर): वाल्मीकिनगर बैराज (क्षमता 8.50 लाख क्यूसेक) से दोपहर 2:00 बजे तक 1,29,300 (एक लाख उनतीस हजार तीन सौ) क्यूसेक पानी छोड़ा गया। यहां स्थिति स्थिर (स्टैडी) बनी हुई है, लेकिन विशाल जलराशि निचले इलाकों में तबाही मचाने के लिए काफी है।
दियारा क्षेत्र पूरी तरह जलमग्न, गांवों का संपर्क टूटा
बैराजों से छोड़े गए लाखों क्यूसेक पानी और गंगा के उफान से राज्य के निचले इलाकों तथा दियारा (नदी तटीय) क्षेत्रों की स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है। सैकड़ों गांव पानी से घिर चुके हैं और दियारा का मुख्य शहरों से संपर्क पूरी तरह कट चुका है। हजारों लोग ऊंचे स्थानों और बांधों पर शरण लेने को मजबूर हैं। फसलों के डूबने से किसानों को भारी नुकसान हुआ है।
सरकार पर बरसे तेजस्वी यादव, केंद्र से मांगी विशेष पैकेज
गंगा और अन्य नदियों के भयावह रूप पर चिंता जताते हुए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने स्थिति को अत्यंत गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि गंगा के किनारे बसे कई इलाकों में हालात बेकाबू हो चुके हैं। खासकर दियारा क्षेत्र पूरी तरह से जलमग्न हो चुका है और लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
तेजस्वी यादव ने आपदा की इस घड़ी में केंद्र सरकार से बिहार के लिए तत्काल विशेष राहत पैकेज जारी करने की मांग की। उन्होंने राज्य सरकार से भी मांग की कि प्रभावित परिवारों तक सूखा राशन, दवाएं, नावें और सुरक्षित आश्रय स्थल तुरंत उपलब्ध कराए जाएं।
प्रशासन अलर्ट पर, तटबंधों की निगरानी तेज
जल संसाधन विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी संबंधित जिलों के अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रखा है। अभियंता (इंजीनियर) लगातार तटबंधों पर गश्त कर रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार के कटाव या दरार को तुरंत ठीक किया जा सके। निचले इलाकों के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।
मवेशी बह गए, हजार करोड़ का सार्वजनिक ढांचा तबाह
बाढ़ के इस महाविनाश में सबसे भारी मार पशुपालकों और किसानों पर पड़ी है। पशुपालकों के सैकड़ों मवेशी बाढ़ के तेज बहाव में डूबकर बह गए हैं। इसके अलावा सड़कें, पुल-पुलिया, स्कूल और अन्य सार्वजनिक ढांचे बुरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं। राज्य को हजारों करोड़ रुपये के जान-माल का नुकसान हुआ है। प्रभावित इलाकों में भुखमरी और जल जनित बीमारियों का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का तंज: बिहार सरकार दिवालिया, केंद्र घोषित करे राष्ट्रीय आपदा
गंगा और अन्य नदियों के बढ़ते जलस्तर पर गहरा असंतोष और चिंता व्यक्त करते हुए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार की व्यवस्था पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि दिवालिया हो चुकी बिहार सरकार बाढ़ पीड़ितों की सहायता करने में पूरी तरह उदासीन और निष्प्रभावी साबित हो रही है।
तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार से मांग की है कि:
बिहार की इस विनाशकारी बाढ़ को तुरंत ‘राष्ट्रीय आपदा‘ घोषित किया जाए।
बदहाल बिहार के लिए तत्काल 5 हजार करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय सहायता प्रदान की जाए।
बाढ़ राहत, खोज और बचाव कार्यों के लिए भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर्स का सहयोग सुनिश्चित किया जाए ताकि फंसे हुए लोगों तक भोजन और राहत सामग्री पहुँचाई जा सके।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी पुरजोर आग्रह किया कि वे अविलंब बिहार का दौरा कर यथास्थिति का हवाई व जमीनी सर्वेक्षण करें और पीड़ित जनता को तत्काल राहत पहुँचाने के लिए ठोस कदम उठाएं।
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मधुबनी (बिहार): मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मधुबनी का एक दिवसीय दौरा किया, जहाँ उन्होंने धार्मिक आस्था और विकास कार्यों की समीक्षा के बीच एक व्यस्त कार्यक्रम को अंजाम दिया। मुख्यमंत्री का स्वागत स्थानीय नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा गर्मजोशी से किया गया।दौरे की शुरुआत में, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी राजनगर स्थित ऐतिहासिक राज कॉम्प्लेक्स पहुँचे। यहाँ, उन्होंने प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर में भगवान शिव और माँ कामाख्या की पूजा-अर्चना की और राज्य की समृद्धि और शांति के लिए आशीर्वाद माँगा। मंदिर प्रशासन ने उन्हें एक प्रतीक चिन्ह और प्रसाद देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने मंदिर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की सराहना की।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मधुबनी में अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए।
पूजा-अर्चना के बाद, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मधुबनी कलेक्ट्रेट में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में, उन्होंने जिले में चल रहे प्रमुख विकास कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। विशेष रूप से, उन्होंने कमला नदी के जलस्तर की ताजा स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे बाढ़ और सुखाड़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए तैयार रहें और राहत और बचाव कार्यों के लिए आवश्यक कदम उठाएं। उन्होंने विकास कार्यों में तेजी लाने और पारिश्रमिक के सही इस्तेमाल को सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
समीक्षा बैठक के दौरान, एक महत्वपूर्ण चर्चा राजनगर के राज परिसर को एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की रूपरेखा पर भी हुई। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में अधिकारियों को एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने और इस ऐतिहासिक स्थल को पर्यटन के मानचित्र पर लाने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के दौरे ने स्थानीय जनता में एक नई उम्मीद जगाई है। उनके द्वारा किए गए वादों और निर्देशों से यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार मधुबनी के विकास और यहाँ की जनता की भलाई के लिए प्रतिबद्ध है।
बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, मधुबनी के सांसद रामप्रीत मंडल, कई विधायक, और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस क्षेत्र में एक बहुमंजिली इमारत अचानक ढह गई। इस हादसे के बाद इलाके में अफ़रा-तफ़री का माहौल बन गया। इमारत के मलबे में कई बच्चों और स्थानीय लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना स्थल पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है।
दिल्ली विश्वविद्यालय साउथ कैंपस के पास ढही बहुमंजिली इमारत का मलबा, जहां दबे लोगों को निकालने के लिए बचाव कार्य जारी है।
इस दुखद हादसे को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट साझा करते हुए इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
पप्पू यादव ने अपने संदेश में लिखा कि दिल्ली विश्वविद्यालय साउथ कैंपस के पास बहुमंजिली इमारत गिरने से कई बच्चे मलबे के नीचे दब गए हैं, जो कि अत्यंत दुःखद है। उन्होंने इस घटना पर अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि पूरा देश इस घटना से मर्माहत है। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सिर्फ भाषण देने के बजाय तुरंत प्रभाव से घटना स्थल पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य (रेस्क्यू) में तेजी लाई जानी चाहिए और प्रभावितों को हर संभव मदद पहुंचानी चाहिए।
दिल्ली विश्वविद्यालय साउथ कैंपस बहुमंजिली इमारत गिर गई है
बहुत सारे बच्चे इसके नीचे दब गए हैं, अत्यंत दुःखद, हम सब मर्माहत हैं!
कल दिल्ली विश्वविद्यालय में पीएम साहब लंबी लंबी छोड़ने गए थे। आज रेस्क्यू करने आइए PM साहब। भाषण नहीं मदद कीजिए। pic.twitter.com/fKWhvov3bx
स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें मलबे को हटाकर फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने के प्रयास में जुटी हुई हैं। घायलों को पास के अस्पताल पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस तैनात कर दी गई हैं।
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पटना / विशेष संवाददाता: बिहार में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। राज्य के दो सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटों में बढ़ोतरी की स्वीकृति दी गई है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (नेशनल मेडिकल कमीशन) के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड द्वारा सेकंड अपील कमेटी के निर्णय के तहत समस्तीपुर और छपरा (सारण) स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेजों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एमबीबीएस की 50-50 सीटों के लिए अनुमति पत्र जारी किया गया है।आयोग द्वारा जारी पत्र के अनुसार, समस्तीपुर स्थित श्री राम जानकी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल और छपरा (सारण) स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज में 50-50 एमबीबीएस सीटों पर विद्यार्थियों के दाखिले की आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है।
कार्यक्रम के दौरान अपने विचार व्यक्त करते स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का वक्तव्य: “स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में मिलेगी मदद”
इस स्वीकृति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने कहा कि यह कदम राज्य में चिकित्सा शिक्षा के प्रसार में सहायक सिद्ध होगा।
निशांत कुमार ने कहा, “बिहार में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की दिशा में यह एक और महत्वपूर्ण कदम है। समस्तीपुर के श्री राम जानकी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल तथा छपरा (सारण) के सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीटों की बढ़ोतरी बिहार के विद्यार्थियों के लिए चिकित्सा शिक्षा के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगी।”
उन्होंने आगे कहा, “यह विस्तार न केवल मेडिकल की पढ़ाई करने वाले युवाओं के लिए अवसर बढ़ाएगा, बल्कि आने वाले समय में प्रदेश में योग्य चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”
केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग की सराहना
स्वास्थ्य मंत्री ने विभागीय समन्वय और मार्गदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के सहयोग और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रेरणा से बिहार सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा को विस्तार देने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। हमारा संकल्प स्वस्थ बिहार, सशक्त बिहार है। बेहतर चिकित्सा शिक्षा और मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में हमारा प्रयास निरंतर जारी रहेगा।”
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पंचकूला / दिल्ली : गिद्धों की लगातार घटती संख्या और पारिस्थितिक संतुलन पर मंडराते खतरे को देखते हुए 6 सितम्बर 2026 को पंचकूला में अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस 2026 का भव्य आयोजन किया गया। “संकट से उबरना – भारत के गिद्धों का संरक्षण” (Crisis to Recovery: Conserving India’s Vultures) विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने किया।इस अवसर पर हरियाणा के पर्यावरण, वन और वन्यजीव मंत्री राव नरबीर सिंह के साथ-साथ केंद्रीय और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कार्यशाला का आयोजन वन एवं वन्यजीव संरक्षण मंत्रालय, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, हरियाणा वन एवं वन्यजीव विभाग, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी और पिंजोर स्थित जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र के संयुक्त सहयोग से संपन्न हुआ।
पंचकूला में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस 2026 के अवसर पर राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव।
प्रकृति की सफाई प्रणाली पर गहराया संकट : कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भूपेंद्र यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार किसी एक प्रजाति तक सीमित न रहकर पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के मॉडल पर कार्य कर रही है। गिद्धों को प्रकृति का सबसे कुशल सफाईकर्मी बताते हुए उन्होंने कहा कि जानवरों के शवों को तेजी से खाकर ये पोषक तत्वों के चक्र को बनाए रखते हैं और महामारियों को फैलने से रोकते हैं।
उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि 1990 के दशक से खाद्य श्रृंखला में व्यवधान और मवेशियों को दी जाने वाली दर्द निवारक दवाओं (जैसे डाइक्लोफेनाक आदि) के उपयोग के कारण गिद्धों की आबादी में भारी गिरावट आई है। भारत में श्वेत-पूंछ वाले, लंबी चोंच वाले, पतली चोंच वाले, लाल सिर वाले, मिस्र के, हिमालयी ग्रिफ़ॉन, यूरेशियन ग्रिफ़ॉन, सिनेरियस और दाढ़ी वाले गिद्धों जैसी विभिन्न प्रजातियों के संरक्षण के लिए सुरक्षित क्षेत्र तैयार किए जा रहे हैं।
जटायु केंद्र पिंजोर ने स्थापित की मिसाल कार्यक्रम से पहले भूपेंद्र यादव ने पिंजोर स्थित जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र का दौरा किया। 2025-26 के दौरान इस केंद्र में 356 गिद्धों को आश्रय दिया गया और सफलतापूर्वक 35 नए चूजों का प्रजनन कराया गया। इतना ही नहीं, केंद्र ने 87 गिद्धों को प्राकृतिक आवास में पुनर्नवाचित करने और 90 पक्षियों को अन्य संरक्षण संस्थानों में भेजने का अभूतपूर्व कार्य किया है।
कॉफी टेबल बुक का विमोचन और पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान ‘जटायु की कहानी: भारत के गिद्धों का संरक्षण’ नामक एक विशेष कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया गया। इसके साथ ही गिद्ध संरक्षण पर आयोजित ऑनलाइन चित्रकला और डिजिटल फोटोग्राफी प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित और पुरस्कृत किया गया।
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नई दिल्ली: 5 सितंबर 2026: नई दिल्ली के विज्ञान भवन में शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर भव्य समारोह आयोजित किया गया। इस गरिमामय कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देशभर के उत्कृष्ट शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया।
समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शिक्षा को देश के विकास का सबसे सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिक्षा हमारे संविधान में निहित ‘अवसर की समानता’ के आदर्श को धरातल पर उतारने का सबसे कारगर साधन है। प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों के पढ़ाई बीच में छोड़ने (ड्रॉप-आउट) की दर के नगण्य हो जाने को ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए उन्होंने इसका पूरा श्रेय शिक्षकों की अटूट निष्ठा और निरंतर प्रयासों को दिया।
नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शिक्षक को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान करती हुईं। मंच पर केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी, प्रह्लाद जोशी और अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित हैं।
शुरुआती शिक्षा से ही राष्ट्रनिर्माण की नींव
राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि स्कूली शिक्षा पूरी व्यवस्था का मूल आधार है। ज्ञान और कौशल जीवन के किसी भी पड़ाव पर सीखे जा सकते हैं, लेकिन बचपन में बोए गए सदाचार के बीज सबसे अधिक प्रभावी होते हैं। यदि प्रारंभिक कक्षाओं में बच्चों के बौद्धिक, शारीरिक और नैतिक विकास पर ध्यान दिया जाए, तो शिक्षक देश के लिए कर्तव्यनिष्ठ नागरिकों की नई पीढ़ी तैयार कर सकते हैं।
कमजोर और संकोची बच्चों को आगे बढ़ाना प्राथमिकता
उन्होंने शिक्षकों का ध्यान विशेष परिस्थितियों वाले विद्यार्थियों की ओर आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि जो बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर हैं, पहली पीढ़ी के शिक्षार्थी हैं, गांव से शहर आए हैं या स्वभाव से संकोची हैं, उनमें आत्मविश्वास जगाना और उन्हें बराबरी का अवसर देना शिक्षकों का सबसे बड़ा दायित्व है।
भारत को ज्ञान और कौशल की वैश्विक महाशक्ति बनाने का आह्वान
राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि भारत को विश्व स्तर पर ज्ञान की महाशक्ति और कौशल-केंद्र के रूप में स्थापित करना राष्ट्रीय प्राथमिकता है। विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए विश्वस्तरीय शिक्षा जरूरी है, और हमारे शिक्षक इस पूरी व्यवस्था में ‘प्राण-वायु’ का काम करते हैं। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे अपने स्नेह और समर्पण से हर विद्यार्थी में ज्ञान, प्रेरणा, नैतिकता और संवेदनशीलता का संचार करें।
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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का बड़ा ऐलान: मार्च 2027 तक दशहरा कमेटी को मिलेगा नया स्थायी ठिकाना, श्रीकृष्ण महोत्सव 4.0 में दी बधाई
पटना, 05 सितंबर: राजधानी पटना के गांधी मैदान में वर्षों से आयोजित होने वाला ऐतिहासिक रामलीला और रावण वध कार्यक्रम अब जल्द ही एक नए और भव्य पते पर स्थानांतरित होने जा रहा है। पटना के मरीन ड्राइव के समीप तीन विशाल मैदान तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें से एक मैदान का नामकरण विशेष रूप से ‘रामलीला मैदान‘ किया जाएगा। यह महत्वपूर्ण घोषणा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को पटना के गांधी मैदान में आयोजित ‘श्रीकृष्ण महोत्सव 4.0-2026: कान्हा के रंग, उत्सव के संग’ कार्यक्रम का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ करते हुए की।
पटना के गांधी मैदान में आयोजित ‘श्रीकृष्ण महोत्सव 4.0-2026: कान्हा के रंग, उत्सव के संग’ कार्यक्रम में मंच से श्रद्धालुओं एवं जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी।
दशहरा कमेटी की 71 साल पुरानी मांग होगी पूरी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में बताया कि दशहरा कमेटी ट्रस्ट वर्ष 1955 से गांधी मैदान में रामलीला महोत्सव एवं रावण वध का सफल आयोजन करता आ रहा है। समिति की ओर से लंबे समय से इन आयोजनों के लिए एक अलग और समर्पित स्थान उपलब्ध कराने की मांग की जा रही थी। इस दिशा में कार्रवाई करते हुए पटना के जिलाधिकारी कुंदन कुमार को आवश्यक निर्देश दे दिए गए हैं। अगले वर्ष मार्च तक मरीन ड्राइव के पास तीनों मैदान बनकर तैयार हो जाएंगे और मार्च 2027 तक दशहरा कमेटी ट्रस्ट को नया रामलीला मैदान हैंडओवर कर दिया जाएगा। इसके बाद रामलीला और रावण वध के भव्य आयोजन वहीं पूरी भव्यता और आधुनिक व्यवस्थाओं के साथ संपन्न होंगे।
अन्याय के खिलाफ खड़े होने और सत्य की विजय का संदेश
श्रीकृष्ण महोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन और उनका दर्शन हमें हमेशा अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने महाभारत का प्रसंग याद दिलाते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने शांति के लिए हर संभव प्रयास किया था और कौरवों से केवल 5 गांव मांगे थे, लेकिन अधर्म और अन्याय के कारण युद्ध को टाला नहीं जा सका। गीता के माध्यम से उन्होंने अर्जुन को कर्तव्य और धर्म का बोध कराया। आज भी उनका संदेश समाज को न्याय और सत्य के पथ पर चलने की राह दिखाता है।
बाढ़ की स्थिति पर सरकार की पैनी नजर, नदियों के किनारे बनेंगे मार्ग
प्रदेश में जारी प्राकृतिक आपदा का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 10 वर्षों की तुलना में इस बार गंगा नदी का जलस्तर काफी अधिक है। सोन और गंडक नदियों में भी भारी मात्रा में जलप्रवाह हो रहा है। नेपाल की तराई वाले क्षेत्रों से आने वाले पानी के कारण बिहार के निवासियों को हर वर्ष परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सभी प्रभावित जिलों में मंत्रियों और अधिकारियों को तैनात किया है। कोसी, गंडक और गंगा बेसिन को व्यवस्थित करने के लिए एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। केंद्रीय जल आयोग के साथ मिलकर दोनों बेसिनों के किनारों पर पक्की सड़कों का निर्माण और वाटर ट्रांसपोर्टेशन (जल परिवहन) की व्यवस्था विकसित की जाएगी ताकि मानसून के दौरान जनता को होने वाली कठिनाइयों को कम किया जा सके।
विकसित बिहार का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने के लिए बिहार सरकार पूरी निष्ठा से काम कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदर्शी सोच और परिकल्पना के अनुरूप बिहार को एक समृद्ध और सशक्त राज्य बनाने का खाका तैयार कर लागू किया जा रहा है।
दही-हांडी प्रतियोगिता में बढ़ाया युवाओं का उत्साह
कार्यक्रम के दौरान कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार और सात्विका ग्रुप के सौजन्य से आयोजित दही-हांडी प्रतियोगिता में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्वयं जाकर हिस्सा लिया और भाग लेने वाले प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। दशहरा कमेटी ट्रस्ट के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न (मोमेंटो) भेंट कर उनका अभिनंदन किया।
गहमागहमी के बीच प्रमुख हस्तियों की रही उपस्थिति
गांधी मैदान में आयोजित इस भव्य समारोह में राज्य के कई गणमान्य नेता और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। मंच एवं प्रांगण में स्वास्थ्य मंत्री निशांत, श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण मंत्री अरुण शंकर प्रसाद, सांसद रविशंकर प्रसाद, विधायक संजीव चौरसिया, महापौर सीता साहू, बिस्कोमान अध्यक्ष विशाल सिंह, पटना के जिलाधिकारी कुंदन कुमार, वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के शर्मा, दशहरा कमेटी ट्रस्ट के पदाधिकारी तथा भारी संख्या में आम जनता उपस्थित थी।
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उत्साहपूर्ण माहौल: सकरा के प्रगति मोड़ पर स्थित परिसर में डॉ. राधाकृष्णन को किया गया याद, बच्चों का बढ़ाया गया मार्गदर्शन।
सकरा (मुजफ्फरपुर): सकरा प्रखंड के मझौलिया, प्रगति मोड़ स्थित क्षेत्र के प्रमुख शिक्षण संस्थान वेव वर्ल्ड स्कूल में शिक्षक दिवस का आयोजन अत्यंत उत्साहपूर्ण, गरिमामय और अनुशासित माहौल में संपन्न हुआ। भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर आयोजित इस समारोह में विद्यालय परिसर को रंग-बिरंगे गुब्बारों, झालरों एवं फूलों से आकर्षक रूप से सजाया गया था। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. राधाकृष्णन के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई, जिसके बाद पूरा परिसर शैक्षणिक और नैतिक चेतना के माहौल से सराबोर हो उठा।
सकरा के मझौलिया स्थित वेव वर्ल्ड स्कूल में शिक्षक दिवस समारोह के दौरान डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र के समक्ष उपस्थित विद्यालय की शिक्षिकाएं
शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य राष्ट्र निर्माण: राजीव गुप्ता
समारोह के मुख्य वक्ता एवं विद्यालय के प्रबंध निदेशक (एमडी) राजीव गुप्ता ने उपस्थित विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए शिक्षक दिवस के मर्म और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था पर विस्तार से अपने विचार रखे।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“शिक्षा केवल किताबी ज्ञान, अक्षरों की पहचान या परीक्षा में अंक हासिल करने तक सीमित नहीं है। शिक्षा का वास्तविक और व्यापक उद्देश्य बच्चों में राष्ट्रीयता, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और अटूट देशप्रेम की भावना को जागृत करना है। आज के ये नन्हें-मुन्ने बच्चे ही कल के भारत का भविष्य हैं। इन्हें केवल पढ़ाना ही काफी नहीं है, बल्कि सही दिशा देना और सुसंस्कृत नागरिक बनाना हम सभी शिक्षकों की सामूहिक जिम्मेदारी है।”
एमडी राजीव गुप्ता के इस प्रेरणादायक संबोधन ने उपस्थित सभी लोगों के बीच नैतिक और सामाजिक दायित्वों के प्रति एक नई सोच और चेतना का संचार किया।
समर्पित शिक्षक टीम ने संभाली कमान, बच्चों का बढ़ाया मार्गदर्शन
कार्यक्रम के सफल आयोजन, मंच संचालन और संपूर्ण व्यवस्था प्रबंधन में विद्यालय के शिक्षकों की भूमिका बेहद मुस्तैदी भरी और सराहनीय रही। शिक्षक और शिक्षिकाओं— प्राची, अदीबा, प्रियंका, आदित्य, रोशन, अर्चना, नेहा, आरती और रूपम ने पूरे अनुशासन के साथ कार्यक्रम की रूपरेखा को संभाला।
शिक्षकों ने न केवल व्यवस्था की कमान संभाली, बल्कि विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने, निरंतर सीखने और शैक्षणिक व व्यावहारिक जीवन में और अधिक उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित भी किया।
ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में गुणात्मक शिक्षा का स्तर सुधारने के दृष्टिकोण से वेव वर्ल्ड स्कूल का यह आयोजन केवल एक औपचारिक उत्सव तक सीमित नहीं रहा। यह कार्यक्रम इस बात का संकेत है कि शैक्षणिक संस्थान अब केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहकर चरित्र निर्माण, अनुशासन और राष्ट्रीय मूल्यों को प्राथमिकता दे रहे हैं। सकरा जैसे प्रखंड स्तर पर इस तरह के आयोजन बच्चों के सर्वांगीण विकास और सामाजिक चेतना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के अंत में बच्चों द्वारा प्रस्तुत की गई प्रस्तुतियों की सभी ने सराहना की और शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए समारोह का समापन हुआ।
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