Wednesday, July 29, 2026

मुजफ्फरपुर के नगर पंचायत मुरौल में बड़ा घोटाला: आउटसोर्सिंग बहाली के नाम पर ‘लाखों की लूट’, नियमों को हवा में उड़ाकर सरकारी खजाने में लगाई चपत!

जानिए कैसे कागज़ों पर बुना गया 10 लाख से ज़्यादा का घपला जाल‘—2023 में 60% तो 2025 में भी वसूला गया दोगुना कमीशन!

[विशेष रिपोर्ट: एस. एस. कुमार ‘पंकज’]

मुजफ्फरपुर । क्या आपने कभी सुना है कि सरकार का नियम कहे कि किसी काम का कमीशन (सेवा शुल्क) ज़्यादा से ज़्यादा 7 प्रतिशत होना चाहिए, और अफ़सर-ठेकेदार मिलकर 60 प्रतिशत का कमीशन पास कर दें?

जी हाँ, यह कोई फ़िल्मी कहानी नहीं, बल्कि मुजफ्फरपुर ज़िले के नगर पंचायत मुरौल की नंगी सच्चाई है! बिहार सरकार के नगर विकास विभाग और जेएम (GeM) पोर्टल के आधिकारिक काग़ज़ात की जब पड़ताल की गई, तो अफ़सरों, बाबुओं और ठेकेदारों के उस बड़े खेल की पोल खुल गई जिसने सरकारी खजाने को 10 लाख रुपये से भी ज़्यादा की चपत लगा दी।

आइए आम और सीधी भाषा में समझते हैं कि मुरौल में आउटसोर्सिंग बहाली के नाम पर यह ‘महा-घोटाला’ आख़िर कैसे रचा गया!

सबसे पहले समझिए: बिहार सरकार का नियम क्या कहता है?

बिहार सरकार के वित्त विभाग ने आउटसोर्सिंग (ठेके पर मैनपावर रखने) के लिए मार्च 2023 में ही बहुत सख्त नियम बनाए थे:

  1. कमीशन की सीमा: कोई भी ठेकेदार कंपनी 3.85 प्रतिशत से कम और 7 प्रतिशत से ज़्यादा कमीशन (सर्विस चार्ज) नहीं माँग सकती।
  2. सीधे रिजेक्ट करने का नियम: अगर कोई कंपनी 7 प्रतिशत से 1 पैसा भी ज़्यादा माँगती है, तो अफ़सरों का फ़र्ज़ है कि उस कंपनी की अर्ज़ी को तुरंत कचरे के डिब्बे में फेंक दें (निरस्त कर दें)

लेकिन नगर पंचायत मुरौल में इस नियम को ढाल बनाने के बजाय पैर तले कुचल दिया गया!

क्‍या है नियम देखें नीचे पत्रांक M-4/06/2023 -2988

घपले का पैंतरा #1 (दिसंबर 2023): ’60 प्रतिशत कमीशन का महा-झोल

  • खेल की शुरुआत: 12 दिसंबर 2023 को नगर पंचायत मुरौल ने 11 महीने के लिए 9 कर्मचारियों (डेटा एंट्री ऑपरेटर, टैक्स कलेक्टर, सैनिटरी इंस्पेक्टर आदि) का ठेका एशियास्किल्स (AsiaSkills) नाम की एक ओडिशा की कंपनी को दिया।
  • कमीशन का डाका: नियम के हिसाब से कंपनी को ज़्यादा से ज़्यादा 7 प्रतिशत कमीशन मिलना चाहिए था। लेकिन अफ़सरों ने आँखें मूंदकर 60 प्रतिशत का अकल्पनीय कमीशन स्वीकृत कर दिया! यानी नियम से साढ़े आठ गुना ज़्यादा!
  • बाबुओं का कब्जा: काग़ज़ात बताते हैं कि इस पूरे अनुबंध में मुख्य खरीदार और पेमेंट करने वाला अफ़सर खुद हेड क्लर्क (प्रधान लिपिक) बना बैठा था। कानूनन किसी क्लर्क को लाखों के ठेके पास करने का कोई हक़ नहीं होता, लेकिन अफ़सरों ने पूरी कमान एक लिपिक के हाथ में सौंप रखी थी।
  • खजाने की लूट: 11 महीने का यह ठेका 23,24,622.19 रुपये का था। अगर नियम से काम होता, तो खर्च सिर्फ़ 15.54 लाख रुपये आता। यानी सीधे-सीधे लगभग 7,70,000 रुपये (सात लाख सत्तर हजार) ठेकेदार की जेब में मुफ़्त के ठूँस दिए गए!
(2023 का अनुबंध – GEMC-511687754617948):60% सेवा शुल्क का खुला खेल: जेएम (GeM) पोर्टल पर 12 दिसंबर 2023 को जारी आधिकारिक अनुबंध पत्र, जिसमें लाल घेरे में दर्शाया गया है कि वित्त विभाग के अधिकतम 7% सेवा शुल्क के कड़े नियम की धज्जियां उड़ाते हुए 60 प्रतिशत अकल्पनीय दर स्वीकृत की गई। साथ ही, प्राथमिक खरीदार (Buyer) के रूप में एक लिपिक (Head Clerk) को अनधिकृत वित्तीय कमान दी गई।

घपले का पैंतरा #2 (मार्च 2025): ‘सुधार का नाटक  और दोगुना डाका

जब 2023 के घोटाले पर सवाल उठने लगे, तो मार्च 2025 में 24 महीने (2 साल) का नया ठेका निकाला गया। इसमें अफ़सरों ने बायोमेट्रिक हाजिरी का नियम लगाकर ऐसा दिखाया कि सब कुछ ‘दूध का धुला’ हो गया है। लेकिन जब गहराई से जाँच की गई, तो भीतर वही पुराना खेल चल रहा था!

  • दोगुना कमीशन पास किया: 25 मार्च 2025 को फिनाक्सी (Finaccy) नाम की दरभंगा की एजेंसी के साथ 2 साल के लिए 41,06,057.26 रुपये का नया ठेका हुआ।
  • नियमों की फिर धज्जियाँ: काग़ज़ों पर दावा किया गया कि व्यवस्था सुधर गई है, लेकिन इसमें भी कमीशन 14.16 प्रतिशत स्वीकृत कर लिया गया। जो कि सरकार की 7 प्रतिशत वाली अधिकतम सीमा से सीधा दोगुना है!
  • खजाने को फिर चपत: इस नए ठेके में भी नियम के विपरीत जाकर ठेकेदार को लगभग 2,45,000 रुपये (दो लाख पैंतालीस हजार) का अतिरिक्त अनुचित फायदा पहुँचाया जा रहा है।

कुल मिलाकर कितना घपला? (10.15 लाख का सीधा हिसाब)

अगर आप दोनों ठेकों का हिसाब जोड़ें:

  • 2023 का घोटाला: 7,70,000 रुपये
  • 2025 का घोटाला: 2,45,000 रुपये
  • कुल हेराफेरी: ₹10,15,000 (दस लाख पंद्रह हजार रुपये से अधिक)

मुरौल की जनता के टैक्स की कमाई के ₹10 लाख से ज़्यादा रुपये बिना किसी डर के ठेकेदारों और अफ़सरों की जुगलबंदी की भेंट चढ़ गए!

(2025 का अनुबंध – GEMC-511687725968999):2025 में भी नियम-विरुद्ध 14.16% कमीशन: 25 मार्च 2025 को किए गए 24 महीने के नए अनुबंध पत्र की कॉपी, जिसमें लाल घेरे में दर्ज 14.16% सेवा शुल्क साफ देखा जा सकता है, जो वित्त विभाग की तय सीमा (7%) से सीधा दोगुना है। इसमें कार्यपालक पदाधिकारी की जगह एक कार्यालय कर्मी (विशाल कुमार) को बायर बनाया गया।

तुलनात्मक चार्ट: एक नज़र में देखिए पूरा खेल

बात / पैंतरा2023 का ठेका (11 माह)2025 का ठेका (24 माह)असली सच्चाई क्या है?
सरकारी नियमज़्यादा से ज़्यादा 7% कमीशनज़्यादा से ज़्यादा 7% कमीशनदोनों बार नियम को दरकिनार किया गया।
दिया गया कमीशन60.00% (8.5 गुना ज़्यादा)14.16% (2 गुना ज़्यादा)दोनों ठेके पूरी तरह गैर-कानूनी हैं।
कुल बिल23,24,622.19 रुपये41,06,057.26 रुपयेखजाने से बेहिसाब पैसा निकाला गया।
अवैध फायदा (घपला)~ 7,70,000 रुपये~ 2,45,000 रुपयेकुल 10.15 लाख की सीधी चपत।
किसके दस्तखत/कमानहेड क्लर्क (प्रधान लिपिक)विशाल कुमार को जेएम (GeM) पोर्टल पर मुख्य खरीदार (प्राइमरी बायर)क्लर्क से लेकर अधिकारी तक सब घेरे में।

प्रशासनिक नियमों का फिर उड़ा मज़ाक: बायर बने विशाल कुमार की सच्चाई

2025 के नए अनुबंध में जहाँ एक तरफ सुधार का ढोल पीटा गया, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक मर्यादाओं की फिर धज्जियाँ उड़ाई गईं। जिस विशाल कुमार को जेएम (GeM) पोर्टल पर मुख्य खरीदार (प्राइमरी बायर) बनाकर वित्तीय कमान सौंपी गई है, वे कोई गजटेड अफ़सर या अधिकृत कार्यपालक पदाधिकारी नहीं, बल्कि कार्यालय के ही एक कर्मचारी हैं। सरकारी नियमों और वित्तीय शक्तियों के प्रत्यायोजन (डेलीगेशन ऑफ फाइनेंशियल पावर्स रूल्स) के अनुसार, किसी गैर-राजपत्रित कर्मचारी को बायर बनाकर लाखों रुपये के अनुबंधों को ओके करने का अधिकार देना खुद में एक बड़ा administrative violation (प्रशासनिक अपराध) है। 2023 में जहाँ प्रधान लिपिक को बायर बनाकर खेल हुआ, वहीं 2025 में कार्यालय कर्मी विशाल कुमार के नाम का इस्तेमाल कर 7 प्रतिशत की जगह 14.16 प्रतिशत का नियम-विरुद्ध कमीशन स्वीकृत कर लिया गया। इस पूरे खेल में कार्यालय कर्मी विशाल कुमार तो कानूनी शिकंजे में फँसेंगे ही, साथ ही पर्दे के पीछे से अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ने वाले उच्चाधिकारियों पर भी गाज गिरना तय है।

किसकी-किसकी फंसेगी गर्दन? (कानूनी शिकंजा)

  1. तत्कालीन हेड क्लर्क और एक्जीक्यूटिव ऑफिसर (2023): एक क्लर्क को लाखों के पेमेंट का पावर देना और 60% का घोटाला पास करना भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट) के तहत सीधी जेल की राह दिखाता है।
  2. कार्यालय कर्मी विशाल कुमार एवं बैकडेट अफ़सर (2025 मामला): 2025 के अनुबंध में कार्यपालक पदाधिकारी की जगह कार्यालय कर्मी विशाल कुमार को प्राइमरी बायर बनाया गया और 7 प्रतिशत की वैध सीमा को लाँघकर 14.16 प्रतिशत कमीशन का ठेका साइन कराया गया। एक निचले स्तर के कर्मचारी को वित्तीय बायर बनाना और नियम-विरुद्ध दर पास करना सीधे तौर पर धोखाधड़ी और पद के दुरुपयोग का मामला बनाता है, जिसमें साइन करने वाले कर्मचारी और सहमति देने वाले अफ़सर दोनों की विधिक गर्दन फँस चुकी है।
  3. चेयरमैन (मुख्य पार्षद) व वाइस चेयरमैन (उपमुख्य पार्षद): नगर पंचायत की सशक्त स्थायी समिति के प्रमुख होने के नाते बोर्ड बैठक में इन अवैध प्रस्तावों पर चुप रहना और पास होने देना गंभीर आपराधिक लापरवाही है। धारा 25(5) के तहत इनकी कुर्सी जाना तय माना जा रहा है।

नगर पंचायत अध्यक्ष (मुख्य पार्षद) राम नरेश प्रसाद मेहता का पक्ष:

हमें तकनीकी और वित्तीय जानकारी नहीं होती, सारा काम कार्यपालक पदाधिकारी का है”

आउटसोर्सिंग बहाली में 60 प्रतिशत और 14.16 प्रतिशत सेवा शुल्क दिए जाने के मामले पर नगर पंचायत मुरौल के अध्यक्ष राम नरेश प्रसाद मेहता ने अपनी अनभिज्ञता जाहिर की है। उन्होंने कहा, हमें इन सब बातों और टैक्स/कमीशन की कोई जानकारी नहीं रहती है। हम लोग तो पॉलिटिक्स में हैं।  हमें इतनी तकनीकी जानकारी नहीं दी जाती। टेंडर प्रक्रिया और सिलेक्शन कमेटी में जनप्रतिनिधियों की कोई भूमिका नहीं होती, सारा काम सरकार के प्रतिनिधि यानी कार्यपालक पदाधिकारी देखते हैं। इस पूरे मामले में जो भी विस्तृत जानकारी चाहिए, वह कार्यपालक पदाधिकारी ही दे सकते हैं।”

उप-मुख्य पार्षद (उपाध्यक्ष) अजय कुमार यादव का पक्ष:

मुझे कोई जानकारी नहीं, सशक्त स्थायी समिति के कोरम का दुरुपयोग कर मुख्य पार्षद ने कराया खेल”

आउटसोर्सिंग बहाली में 60 प्रतिशत और 14.16 प्रतिशत सेवा शुल्क दिए जाने के सवाल पर नगर पंचायत मुरौल के उप-मुख्य पार्षद (उप-अध्यक्ष) अजय कुमार यादव ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उन्हें इस टेंडर और प्रक्रिया की कोई जानकारी ही नहीं दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य पार्षद ने अपने मनोनीत तीन सदस्यों का दस्तखत कराकर कोरम पूरा किया और मनमाने तरीके से प्रस्ताव पास करा लिए।

अजय यादव ने कहा, पहली बैठक के बाद मुझे सशक्त स्थायी समिति के बैठकों की सूचना तक नहीं दी जाती थी और घर-घर जाकर दस्तखत कराए जाते थे। नियम के विपरीत 60% सेवा शुल्क देना पूरी तरह गलत है। बोर्ड की बैठक में तय हुआ था कि स्थानीय लोगों को रखा जाएगा, लेकिन नियमों को दरकिनार कर दिया गया। अब नए सशक्त समिति के गठन के बाद हम इन गलत फैसलों और एजेंसियों के खिलाफ कदम उठाएंगे।”

वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) का रुख और आगे की कानूनी राह:

अधिकारी ने नहीं उठाया फोन, जानिए क्या होना चाहिए अगला प्रशासनिक कदम?

नगर पंचायत मुरौल में हुए इस बड़े घपले पर वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) का मंतव्य जानने के लिए न्यूज़ भारत टीवी  के पत्रकार कुमार पंकज ने (मोबाइल नम्‍बर;-7562033888 के द्वारा) उनसे चार बार फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। नतीजतन, इस घोटाले पर उनका कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आ सका।

हालांकि, यह पूरा मामला मीडिया और आधिकारिक दस्तावेजों के जरिए सार्वजनिक होने के बाद वर्तमान ईओ का पहला प्रशासनिक दायित्व बनता है कि वे पूर्व में हुए दोनों नियम-विरुद्ध अनुबंधों (2023 के 60% और 2025 के 14.16% कमीशन) की फाइलों की तत्काल समीक्षा कर पूरी वित्तीय अनियमितता की एक अंतरिम रिपोर्ट तैयार करें। 2025 के अनुबंध में गैर-राजपत्रित कार्यालय कर्मी विशाल कुमार को अनधिकृत रूप से ‘प्राइमरी बायर’ बनाए जाने और वित्त विभाग की 7% की अधिकतम सीमा का उल्लंघन होने के ठोस आधार पर वे इस अवैध अनुबंध को निरस्त (Cancel) करने की सिफारिश नगर विकास एवं आवास विभाग (UDHD) को भेज सकते हैं। इसके साथ ही, सरकारी खजाने को पहुँचे लगभग 10.15 लाख रुपये के वित्तीय नुकसान की वसूली के लिए संबंधित एजेंसियों (एशियास्किल्स व फिनाक्सी) को कारण बताओ नोटिस जारी करने, मामले की विजिलेंस जाँच के लिए विभाग को पत्र लिखने, तथा इसमें संलिप्त पूर्व अधिकारियों व कर्मियों पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने हेतु सशक्त स्थायी समिति एवं बोर्ड के समक्ष प्रस्ताव प्रस्तुत करना उनका प्राथमिक विधिक कर्तव्य है।

जनता का सवाल: क्या विजिलेंस जाँच होगी?

जब सरकार का साफ़ आदेश था कि 7% से ज़्यादा कमीशन मांगने वाली कंपनी को रिजेक्ट कर दो, तो फिर 60% और 14.16% वाले टेंडर को जेएम पोर्टल पर ओके किसने और क्यों किया?क्या बिहार का नगर विकास विभाग और विजिलेंस टीम मुरौल नगर पंचायत में हुए इस 10 लाख रुपये से ज़्यादा के घपले पर कार्रवाई करेगी, या फिर अफ़सर-ठेकेदार मिलकर यूँ ही जनता की गाढ़ी कमाई लूटते रहेंगे?

 क्या निष्पक्ष ऑडिट और जांच की आवश्यकता है?

इस पूरे ‘महा-घोटाले’ की तह तक पहुँचने और संलिप्त चेहरों को बेनकाब करने के लिए केवल विभागीय पत्राचार या लीपापोती काफी नहीं है। इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है:

  • फॉरेंसिक और थर्ड-पार्टी वित्तीय ऑडिट: नगर पंचायत मुरौल के पिछले 3 वर्षों के सभी आउटसोर्सिंग बिलों, GeM टेंडर फाइलों और भुगतान वाउचरों का एक स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए। इससे यह स्पष्ट होगा कि कागज़ों पर दिखाए गए कर्मचारियों की वास्तविक संख्या कितनी थी और वास्तव में कितना भुगतान किया गया।
  • GeM पोर्टल वेंडर्स और बैंक खातों की जांच: संबंधित आउटसोर्सिंग एजेंसी के बैंक खातों और लेन-देन का ऑडिट यह उजागर करेगा कि 60% और 14.16% के रूप में वसूला गया अतिरिक्त कमीशन किन-किन अधिकारियों या बिचौलियों के खातों में किस रूप में पहुँचा।
  • विजिलेंस (निगरानी अन्वेषण ब्यूरो) जांच: मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और नगर विकास विभाग को तुरंत इस प्रकरण को विजिलेंस जांच के सुपुर्द करना चाहिए, ताकि पद का दुरुपयोग करने वाले लोक सेवकों और एजेंसी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई और FIR दर्ज हो सके।

 यदि समय रहते इस मामले का निष्पक्ष ऑडिट और जांच नहीं कराई गई, तो यह न केवल स्थानीय निकायों में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देगा, बल्कि GeM जैसे पारदर्शी पारदर्शी ई-गवर्नेंस सिस्टम के मूल उद्देश्यों पर भी गहरा सवालिया निशान खड़ा करेगा।

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‘इलाज यहीं होगा, कहीं जाने की जरूरत नहीं’—स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक्शन में सरकार, बिहार के 25 अस्पतालों में मुफ़्त डायलिसिस और मुफ़्त पैथोलॉजी लैब की शुरुआत!

पटना, 22 जुलाई 2026 बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को एक नया और ऐतिहासिक नया मोड़ देते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरु गोविंद सिंह अस्पताल (जिला अस्पताल), पटना सिटी के नवनिर्मित भवन में विभिन्न अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का लोकार्पण किया। इसके साथ ही उन्होंने जिला औषधि भंडार गृह, पटना का भी शिलापट्ट अनावरण कर विधिवत शुभारंभ किया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नवनिर्मित भवन के विभिन्न विभागों का गहन निरीक्षण किया और वहां उपलब्ध कराई जा रही उच्चस्तरीय सुविधाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों से सीधी बातचीत कर उनका हाल-चाल जाना और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।

गुरु गोविंद सिंह अस्पताल, पटना सिटी में नवनिर्मित भवन एवं विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाओं का शिलापट्ट अनावरण कर लोकार्पण करते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, साथ में स्वास्थ्य मंत्री निशांत एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी।

डॉक्टरों को सख्त हिदायत: मरीजों को रेफर करना बंद करें, यहीं मिले सर्वोत्तम इलाज

निरीक्षण के क्रम में मुख्यमंत्री ने ऑर्थोपेडिक ऑपरेशन थिएटर (OT) का भी बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने उपस्थित डॉक्टरों को कड़े एवं स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि ऑर्थोपेडिक इलाज की एक विशिष्ट पहचान बनाई जाए ताकि मरीजों को भटकना न पड़े। मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों से कहा, अस्पताल में इलाज की सभी सुविधाएं बेहतर ढंग से उपलब्ध रखी जाएं ताकि मरीजों को रेफर करने की नौबत न आए। डॉक्टरों सहित इलाज की सभी सुविधाएं समय पर मरीजों को मिलनी ही चाहिए।”

 गुरु गोविंद सिंह अस्पताल में स्थापित अत्याधुनिक ऑर्थोपेडिक ऑपरेशन थिएटर (OT) एवं मरीजों के लिए तैयार सर्वसुविधायुक्त वार्ड का दृश्य।

समारोह की मुख्य बातें एवं राज्यस्तरीय सौगातें:

  • ICU और आपातकालीन सेवाओं का विस्तार: राज्य के विभिन्न जिला अस्पतालों में 105 नए ICU बेड, 70 इंटरमीडिएट केयर यूनिट (IMCU) बेड तथा 24X7 आपातकालीन सेवाओं का भव्य लोकार्पण किया गया।
  • निःशुल्क पैथोलॉजी सेवाओं की शुरुआत: सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत निःशुल्क पैथोलॉजी सेवाओं के प्रथम चरण की शुरुआत की गई। इसके तहत 11 हब लैब (जहां आधुनिक मशीनें और उपकरण स्थापित हैं) तथा 221 स्पोक लैब (नमूना संग्रहण केंद्र) को आपस में जोड़ा गया है, जिससे जांच रिपोर्ट समय पर मिलेगी।
  • 25 अनुमंडलीय अस्पतालों में फ्री डायलिसिस: राज्य के 25 अनुमंडलीय अस्पतालों में निःशुल्क डायलिसिस सेवा की शुरुआत की गई। PHH और आयुष्मान कार्डधारियों को यह सुविधा पूर्णतः मुफ्त मिलेगी, जबकि अन्य पात्र लाभार्थियों को बेहद रियायती दरों पर डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे किडनी रोग से पीड़ित मरीजों को दूसरे जिलों में भागने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
  • खंडा साहिबका लोकार्पण: मुख्यमंत्री ने गुरु गोविंद सिंह अस्पताल परिसर में प्रबंध कमेटी तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब की ओर से स्थापित ‘खंडा साहिब’ का लोकार्पण कर शीश नवाया और नमन किया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं को जिला एवं अनुमंडल स्तर तक पहुंचाया जा रहा है। सरकार अत्याधुनिक तकनीक, बेहतर चिकित्सा उपकरण, प्रशिक्षित मानव संसाधन और मजबूत स्वास्थ्य अवसंरचना के बल पर बिहार को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।

कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति:

कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य मंत्री निशांत, विधायक रत्नेश कुमार, पटना की महापौर सीता साहू, अन्य जनप्रतिनिधिगण, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव डॉक्टर त्याग राजन एसएम, राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय, बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सुब्रत कुमार सेन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सक और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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गंगा घाटों की बदल गई तस्वीर: 46.26 करोड़ रुपये से चमके पटना के तीन प्रमुख घाट, अब मिलेगा वर्ल्ड क्लास अनुभव!

पटना, 22 जुलाई 2026 । राजधानी पटना के निवासियों और श्रद्धालुओं के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। गंगा नदी के तट पर स्थित तीन प्रमुख घाटों—भद्र घाट, महावीर घाट और नौजर घाट का रूप-रंग पूरी तरह बदल गया है। 46.26 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से इन तीनों घाटों का आधुनिक सुविधाओं के साथ कायाकल्प कर दिया गया है।

बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिलापट्ट का अनावरण कर इन रिवर फ्रंट और सौंदर्यीकरण परियोजनाओं का भव्य लोकार्पण किया। लोकार्पण समारोह के बाद मुख्यमंत्री ने तीनों गंगा घाटों का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने साइट प्लान के माध्यम से पूरे विकास मॉडल और वहां दी जाने वाली सुविधाओं की जानकारी दी।

पटना के भद्र घाट, महावीर घाट एवं नौजर घाट के 46.26 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का शिलापट्ट अनावरण कर लोकार्पण करते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी। साथ में नगर निगम की महापौर सीता साहू, विधायक रत्नेश कुशवाहा एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित।

निरीक्षण के क्रम में मुख्यमंत्री ने भक्तिभाव से गंगाजल स्पर्श कर मां गंगा को नमन किया और पूरे प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली के लिए प्रार्थना की। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र प्रदान कर मुख्यमंत्री का स्वागत किया, वहीं स्थानीय नागरिकों ने उन पर उत्साहपूर्वक पुष्पवर्षा की।

कच्चे घाटों से मुक्ति, अब छट पर्व में मिलेगी हाई-टेक सुविधाएं

पहले ये घाट पूरी तरह कच्चे और असुरक्षित स्थिति में थे, जिससे लोगों को स्नान और पूजा-पाठ में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम (बुडको) ने इन्हें पक्का बनाकर चकाचौंध से भर दिया है।

नए घाटों की प्रमुख विशेषताएं:

  • सुरक्षा और बैरिकेडिंग: श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए मजबूत बैरिकेडिंग की गई है।
  • हाई मास्ट लाइट: पूरे घाट परिसर में पर्याप्त रोशनी के लिए आधुनिक हाई मास्ट लाइटें लगाई गई हैं।
  • वॉक-वे और सिटिंग एरिया: टहलने के लिए शानदार वॉक-वे और बैठने के लिए आधुनिक बेंचों का निर्माण हुआ है।
  • स्वच्छता की व्यवस्था: साफ-सफाई के लिए विशेष डस्टबिन और ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया गया है।

इन सुविधाओं से न केवल रोज़मर्रा के श्रद्धालुओं को सहूलियत होगी, बल्कि लोक आस्था के महापर्व छठ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं को स्वच्छ, सुरक्षित और सुगम माहौल मिलेगा।

सौंदर्यीकरण और पक्के निर्माण के बाद आधुनिक वॉक-वे, सुरक्षित बैरिकेडिंग और आकर्षक सजावट से सजा हुआ पटना का नव-निर्मित गंगा घाट।

कार्यक्रम में ये प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद

इस भव्य लोकार्पण के मौके पर विधायक रत्नेश कुशवाहा, पटना नगर निगम की महापौर सीता साहू, उपमहापौर रेशमी कुमारी मौजूद रहीं। प्रशासनिक पक्ष से मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, नगर विकास विभाग के सचिव अनिमेष कुमार पराशर, पटना नगर निगम के आयुक्त यशपाल मीणा तथा बुडको के मुख्य प्रबंध निदेशक सुरेंद्र कुमार मेहता सहित कई वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित थे।

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घूसखोर जेई और तकनीशियन रंगे हाथ गिरफ्तार: भागलपुर में नया बिजली कनेक्शन देने के नाम पर ले रहे थे 4000 रुपये की रिश्वत, निगरानी विभाग की टीम ने दबोचा

भागलपुर (विशेष संवाददाता)। बिजली विभाग में जारी भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कौटिल्या नॉर्थ विद्युत उपकेंद्र के कनीय अभियंता (जेई) और एक प्राइवेट कंपनी के तकनीशियन को 4,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई  भागलपुर स्थित कचहरी रोड के विद्युत उपकेंद्र परिसर में की गई।

भागलपुर में 4,000 रुपये रिश्वत लेते निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की गिरफ्त में आए कनीय अभियंता अमित कुमार (बाएं, लाल घेरे में) और तकनीशियन सौरभ कुमार (दाएं, लाल घेरे में) टीम के सदस्यों के साथ।

नया कनेक्शन देने के नाम पर मांगी थी घूस

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, झौवा कोठी, खंजरपुर, थाना- बरारी, जिला- भागलपुर के निवासी संतोष कुमार (पिता- श्याम प्रसाद साह) ने पटना स्थित निगरानी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। परिवादी ने आरोप लगाया था कि नया बिजली कनेक्शन देने के बदले कौटिल्या नॉर्थ विद्युत उपकेंद्र के कनीय अभियंता और लाइनमैन द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही है।

सत्यापन में सही पाए गए आरोप

शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने मामले की गुप्त जांच कराई। जांच और सत्यापन के दौरान आरोपी अधिकारियों द्वारा रिश्वत मांगे जाने के पुख्ता प्रमाण मिले। प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने के बाद 17 जुलाई 2026 को निगरानी थाना कांड संख्या 0-086/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।

डीएसपी के नेतृत्व में धावादल ने बिछाया जाल

मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुसंधानकर्ता मिथलेश कुमार, पुलिस उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के नेतृत्व में एक विशेष धावादल (ट्रैप टीम) का गठन किया गया। योजना के अनुसार जैसे ही परिवादी ने रिश्वत की राशि सौंपी, निगरानी की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को दबोच लिया।

गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान

निगरानी टीम द्वारा गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में:

  1. अमित कुमार: कनीय अभियंता (जेई), कौटिल्या नॉर्थ, विद्युत उपकेंद्र, कचहरी रोड, भागलपुर।
  2. सौरभ कुमार: तकनीशियन, जीनस कंपनी (स्मार्ट मीटर अधिष्ठापन कंपनी), सेन्ट्रल गेट, भागलपुर।

विशेष न्यायालय में किया जाएगा पेश

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्तों से पूछताछ के बाद उन्हें भागलपुर स्थित माननीय विशेष न्यायालय, निगरानी में प्रस्तुत किया जाएगा। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और अनुसंधान जारी है।

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समस्‍तीपुर में भड़का किसानों का आक्रोश: सड़क पर उतरे आंदोलनकारी, ट्रम्‍प और मोदी का फूंका पुतला!

22 जुलाई 2026विशेष संवाददाता, समस्तीपुर। संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर मंगलवार को समस्तीपुर शहर की सड़कें किसानों के प्रचंड आक्रोश की गवाह बनीं। भारत-अमेरिका कृषि व्यापार समझौते को रद्द करने, कृषि भूमि की कॉरपोरेट लूट पर रोक लगाने तथा किसानों के हितों की रक्षा की मांग को लेकर किसान संगठनों ने शहर में एक विशाल विरोध मार्च निकाला। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने पेपर लीक मामले के जिम्मेवार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और छात्रों पर लाठी-आश्रुगैस चलाने के जिम्मेवार गृह मंत्री अमित शाह से तत्काल इस्तीफे की पुरजोर मांग की।

समस्‍तीपुर के स्‍टेशन चौराहे पर भारत-अमेरिका कृषि व्यापार समझौते और कॉरपोरेट नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन करते संयुक्त किसान मोर्चा के नेता एवं कार्यकर्ता और चौराहे पर ट्रंप व मोदी का पुतला दहन करते आक्रोशित किसान।

शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरा विरोध मार्च

यह विरोध मार्च समस्तीपुर शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों और बाजारों से होकर गुजरा। मार्च के दौरान किसान संगठनों के कार्यकर्ता हाथों में लाल झंडे, बैनर और तख्तियां लेकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी कर रहे थे। जुलूस शहर के मुख्य रास्तों से होते हुए अंततः स्टेशन चौराहे पर पहुंचा, जहां एक विरोध सभा का आयोजन किया गया।

खेती और खाद्य सुरक्षा पर मंडराया संकट

सभा को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका कृषि व्यापार समझौता देश की पारंपरिक खेती, किसानों और पूरी कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी साबित होगा। नेताओं ने स्पष्ट किया कि खेती और कृषि भूमि को कॉरपोरेट घरानों के हवाले करने की किसी भी साजिश के खिलाफ किसानों का यह संघर्ष अनवरत जारी रहेगा।

सभा के दौरान वक्ताओं ने 12 सैटेलाइट टाउनशिप और टोपो लैंड के नाम पर कृषि भूमि के लैंड पूलिंग के माध्यम से किए जा रहे कथित भूमि अधिग्रहण की योजनाओं को तुरंत वापस लेने की मांग उठाई। नेताओं ने चेतावनी दी कि देश के अन्नदाताओं की आजीविका और खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करने वाली किसी भी नीति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और किसान संगठन इसका पुरजोर विरोध करेंगे।

नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप का फूंका पुतला

सभा के अंत में आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने स्टेशन चौराहे पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। पुतला दहन के दौरान पूरा स्टेशन परिसर केंद्र सरकार की कृषि एवं आर्थिक नीतियों के खिलाफ नारों से गूंज उठा। उपस्थित सभी किसानों और मजदूरों ने किसान हितों की रक्षा के लिए इस आंदोलन को और तेज करने का संकल्प लिया।

समस्‍तीपुर के स्‍टेशन चौराहे पर भारत-अमेरिका कृषि व्यापार समझौते और कॉरपोरेट नीतियों के खिलाफ ट्रंप व मोदी का पुतला लेकर प्रदर्शन करते संयुक्त किसान मोर्चा के नेता एवं कार्यकर्ता

आंदोलन में प्रमुख नेताओं की रही मौजूदगी

इस  विरोध सभा की अध्यक्षता बिहार राज्य किसान सभा के जिला संयोजक अनिल प्रसाद ने की। सभा को संबोधित करने वालों में जिला किसान कौंसिल के जिला मंत्री सत्यनारायण सिंह, संयुक्त सचिव उपेंद्र राय, दिनेश राय, भूषण महतो, सुरेंद्र कुमार, बिगन पटेल शामिल थे।

इसके अलावा अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला सचिव ललन कुमार, जिलाध्यक्ष महावीर पोद्दार, सुनील कुमार, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, अनील चौधरी, मो० उस्मान, सोनेलाल पासवान, प्रो० उमेश कुमार तथा बिहार राज्य किसान सभा के महासचिव रामचंद्र महतो, सुरेंद्र कुमार सिंह मुन्ना, रामरतन सिंह राकेश, शंकर साह और शंभू चौधरी समेत भारी संख्या में किसान, खेत मजदूर और ग्रामीण मौजूद रहे।

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सकरा में प्रशासनिक बेरुखी की इंतेहा: बीईओ और बीडीओ के दफ्तर से चंद कदम दूर बदहाली पर आंसू बहा रहा राजकीय उच्च मध्य विद्यालय, प्रखंड कॉलोनी सकरा,

  • न सुरक्षा, न सुविधाएं, ऊपर से होमगार्ड का कब्जा! खेल का मैदान छीना, शौचालय गंदे, प्यास को तरसते बच्चे: सकरा प्रखंड कॉलोनी स्कूल की बदहाली की पूरी कहानी , कौन जवाब देगा?
  • अधिकारियों के दफ्तर में चकाचौंध, बगल के स्कूल में घोर अंधेरा: बाउंड्री विहीन कैंपस और जर्जर भवन दे रहे हादसों को दावत,

[विशेष रिपोर्ट: एस. एस. कुमार पंकज]

सकरा (मुजफ्फरपुर)  बिहार में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और इसे सर्वसुलभ बनाने के लिए सरकार द्वारा अरबों रुपये का बजट आवंटित किया जाता है। नित नई योजनाओं की घोषणाएं होती हैं, वादे किए जाते हैं और कागजों पर विकास की गंगा बहाई जाती है। लेकिन जब धरातल की कड़वी सच्चाई से सामना होता है, तो ये सारे दावे खोखले और हवा-हवाई साबित होते हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के सकरा प्रखंड में शिक्षा तंत्र की एक ऐसी ही हृदयविदारक और चिंताजनक तस्वीर देखने को मिल रही है, जहाँ प्रशासनिक उदासीनता, अधिकारियों की बेरुखी और व्यवस्था की अकर्मण्यता ने सैकड़ों बच्चों के भविष्य को अंधकार और खतरे में डाल दिया है।

सकरा प्रखंड मुख्यालय से मात्र 200 मीटर की दूरी पर स्थित सकरा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 6 में राजकीय उच्च मध्य विद्यालय, प्रखंड कॉलोनी, सकरा अवस्थित है। भौगोलिक रूप से देखा जाए तो यह विद्यालय किसी सुदूर ग्रामीण इलाके में नहीं, बल्कि प्रखंड प्रशासन के ठीक नाक के नीचे है। यह विद्यालय सकरा के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) के आवास के ठीक बगल में है और सकरा प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) के कार्यालय से इसकी दूरी महज 100 मीटर के करीब है। इसके बावजूद, यह विद्यालय आज भौतिक रूप से अत्यंत दयनीय दुर्दशा का शिकार है। ऐसा लगता है मानो यह विद्यालय किसी प्रशासनिक नक्शे में शामिल ही नहीं है या फिर अधिकारी जानबूझकर इस ओर से अपनी आंखें मूंदे बैठे हैं।

जर्जर और खतरनाक परित्यक्त भवन बन चुका है हादसों का अड्डा इस तस्वीर में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि विद्यालय परिसर के ठीक बीचों-बीच एक पुराना, जीर्ण-शीर्ण और परित्यक्त भवन खड़ा है। वहीं दायें की तस्‍वीर में व्यवस्था से हारकर आवेदन हाथ में लिए न्याय की गुहार लगाते जनप्रतिनिधि इस तस्वीर में सकरा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 6 के पार्षद पति सह स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता रामबालक शर्मा हाथ में लिखित आवेदन लिए विद्यालय के जर्जर भवन के सामने खड़े हैं। अधिकारियों के चक्कर काटकर और दर्जनों बार मिन्नतें करने के बाद जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो वे खुद इस लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए मैदान में उतरे हैं। उनकी यह तस्वीर प्रशासनिक तंत्र की उस विफलता को उजागर करती है जहाँ एक जनप्रतिनिधि को भी एक बुनियादी समस्या के समाधान के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं।

समस्याओं का अंबार, लेकिन सभी की जड़ एक – चाहारदीवारी का न होना

राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, प्रखंड कॉलोनी, सकरा में समस्याओं की एक लंबी फेहरिस्त है। लेकिन अगर सूक्ष्मता से विश्लेषण किया जाए, तो विद्यालय की शत-प्रतिशत समस्याओं की जड़ एक ही है – विद्यालय की चाहारदीवारी (बाउंड्री वॉल) का न होना।

चाहारदीवारी न होने के कारण विद्यालय की समस्याएं कम होने के बजाय हर रोज बढ़ती ही जा रही हैं। सरकार या प्रशासन की ओर से विद्यालय के विकास या सुविधाओं के लिए जो भी छोटे-मोटे कार्य कराए जाते हैं, वे सब चाहारदीवारी के अभाव में बेकार साबित होते हैं। उन्हें असामाजिक तत्वों द्वारा तुरंत विनष्ट कर दिया जाता है।

इसका सबसे ताजा और ज्वलंत उदाहरण कुछ माह पूर्व देखने को मिला। विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को शुद्ध एवं स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति उपलब्ध कराने के उद्देश्य से परिसर में समरसेबल लगाया गया और बेसीन का निर्माण कराया गया। लेकिन चाहारदीवारी न होने के कारण सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं था। नतीजा यह हुआ कि मात्र 2 माह के भीतर ही असामाजिक और अराजक तत्वों ने रात के अंधेरे में या सुनसान मौके का फायदा उठाकर बेसीन में लगी टाइल्स को बुरी तरह तोड़ दिया और पानी के नलों को नोचकर उखाड़ ले गए। आज स्थिति यह है कि नल गायब हैं और बच्चों को पीने के पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। असामाजिक तत्वों की इस करतूत की सजा उन निर्दोष बच्चों को भुगतनी पड़ रही है जो यहाँ पढ़ने आते हैं।

पीने के पानी का स्‍थल भी बदहाल , काई युक्‍त है।तस्‍वीर में  दिख रहा है कि  वॉशबेसिन टूटा-फूटा है और उसमें लगे नल गायब हैं।

शौचालय की सफाई, अनुसेवियों की कमी और शिक्षकों की लाचारी

खुली चाहारदीवारी का खामियाजा केवल बच्चों को ही नहीं, बल्कि विद्यालय के शिक्षकों और प्राचार्य को भी उठाना पड़ रहा है। बाउंड्री न होने के कारण रात में या स्कूल की छुट्टी के बाद बाहर के अवांछित लोग विद्यालय के शौचालय में अवैध रूप से प्रवेश कर जाते हैं और उसे गंदा कर देते हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल सफाई व्यवस्था को लेकर उठता है। इस विद्यालय में सफाई के लिए  अनुसेवी (आदेशपाल) पदस्थापित नहीं है। जब अनुसेवी ही नहीं है, तो विद्यालय में नियमित साफ-सफाई का काम पूरी तरह से ठप रहता है। एजेन्‍सी के माध्‍यम से जो सफाई कर्मी हैं, वे केवल खानापूर्ति कर रहे हैं, विद्या के इस मंदिर में साफ सफाई की स्थिति बदतर है।  

  • वर्ग कक्ष की सफाई: कक्षा की कमरों की सफाई का काम मासूम बच्चों को खुद अपने हाथों से करना पड़ता है।
  • शौचालय की सफाई: बाहर के लोगों द्वारा गंदे किए गए शौचालय की सफाई कराने की पूरी जिम्मेदारी विद्यालय के प्राचार्य के मत्थे आ जाती है। अब प्राचार्य महोदय विद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था को संभालें, या शौचालय साफ कराने का प्रबंध करें?

हैरानी की बात यह है कि प्रखंड मुख्यालय के तमाम आला अधिकारी यहाँ से महज 4 कदम की दूरी पर बैठते हैं, लेकिन किसी भी अधिकारी को आकर झांकने तक की फुर्सत नहीं मिलती कि यहाँ बच्चे और शिक्षक किन परिस्थितियों में दिन गुजार रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, विद्यालय में जो शिक्षक पदस्थापित हैं, वे इस बदहाल व्यवस्था के बीच अपनी नौकरी बचाने और कागजी खानापूर्ति में ही उलझे रहने को मजबूर हैं।

तस्‍वीर में स्‍पष्‍ट है  “राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, प्रखंड कॉलोनी, सकरा” लिखा है, लेकिन पास ही लगा हैंडपंप साफ सफाई नहीं होने के कारण बदहाल पड़ा है और चारों तरफ गंदगी पसरी हुई है।दायें  की तस्‍वीर में दूसरा हैंड पंप बन्‍द कर दिया गया है

जानवरों का डर, मध्याह्न भोजन और सड़क हादसों का खतरा

चाहारदीवारी न होने के दुष्परिणाम यहीं खत्म नहीं होते। परिसर खुला होने के कारण हमेशा आवारा मवेशियों (कुत्ते, गाय, सांड) और असामाजिक तत्वों के किचेन शेड में प्रवेश कर जाने का भय बना रहता है। किचेन शेड में मध्याह्न भोजन का सामान रखा होता है और खाना पकाया जाता है। ऐसे में किसी भी दिन कोई जानवर या अराजक तत्व खाने में कोई जहरीली चीज मिला दे या नुकसान पहुंचा दे, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?

इसके अलावा, मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) के समय जब बच्चों की छुट्टी होती है, तो चाहारदीवारी न होने के कारण बच्चे बिना किसी रोक-टोक के विद्यालय परिसर से बाहर निकल जाते हैं। बच्चे विद्यालय कैंपस से लगभग 1-1 किलोमीटर दूर मुख्य बाजार की ओर चले जाते हैं। सकरा का बाजार और मुख्य सड़कें हमेशा व्यस्त रहती हैं, जहाँ तेज रफ्तार गाड़ियां दौड़ती रहती हैं। बाउंड्री के अभाव में बच्चों का इस तरह खुलेआम बाहर निकल जाना किसी बड़ी अनहोनी या गंभीर सड़क दुर्घटना को दावत देने जैसा है।

बच्चों से छीन लिया गया खेल का मैदान: अधिकारियों की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा

किसी भी विद्यालय में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए खेलकूद का मैदान बेहद महत्वपूर्ण होता है। लेकिन इस विद्यालय के बच्चों का दुर्भाग्य देखिए कि उनसे उनका खेल का मैदान भी प्रशासनिक नीतियों की बलि चढ़ाकर छीन लिया गया।

  1. बीडीओ आवास के सामने का मैदान छीना: पूर्व में इस विद्यालय के बच्चे सकरा प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) के आवास के सामने स्थित मैदान में खेला करते थे। उस मैदान में बच्चों के मनोरंजन और शारीरिक विकास के लिए लोहे के झूले, रेलिंग और विभिन्न प्रकार के खेल उपकरण लगे हुए थे। लेकिन प्रशासन ने बच्चों से वह मैदान छीन लिया। वहां पानी का नल कूप (ट्यूबवेल) निर्माण करा दिया गया और उस पूरे मैदान की घेराबंदी करके चाहारदीवारी का निर्माण करा दिया गया।
  2. नर्सरी का रास्ता भी किया गया बंद: जब खेल का मैदान छीन लिया गया, तो मासूम बच्चे मध्याह्न भोजन के अवकाश के समय सामने स्थित ब्‍लौक कैम्‍पस की  नर्सरी की ओर रुख करने लगे। कुछ वर्ष पूर्व तक बच्चे दोपहर के समय विद्यालय के सामने वाली नर्सरी में खेलकूद कर अपना समय बिता लेते थे। आम और लीची के मौसम में बच्चे नर्सरी में जाकर फल-फूल तोड़कर खा लिया करते थे। लेकिन जब यह बात प्रखंड के बड़े पदाधिकारियों तक पहुंची, तो उन्होंने आनन-फानन में नर्सरी की तो मजबूत चाहारदीवारी करवा दी ताकि बच्चे अंदर न जा सकें!

विरोधाभास देखिए: अधिकारियों ने अपने आवास की चाहारदीवारी करा दी, सरकारी नर्सरी की चाहारदीवारी करा दी,नल कूप के कैम्‍पस की चाहारदीवारी करा दी,  लेकिन जिस विद्यालय में सैकड़ों बच्चों का भविष्य संवर रहा है, उसकी चाहारदीवारी कराना किसी भी अधिकारी ने आज तक मुनासिब नहीं समझा!

स्कूल भवन की बालकनी में जवानों के कपड़े सूखते नजर आ रहे हैं, जो दर्शाता है कि स्कूल परिसर का इस्तेमाल पढ़ाई के अलावा अन्य कामों के लिए भी हो रहा है।

ऊपरी तल्ले पर होमगार्ड जवानों का कब्जा: वर्ग कक्षों की भारी कमी, एक ही कमरे में 2-2 कक्षाओं के बच्चे बैठने को मजबूर

विद्यालय में जगह की किल्लत और प्रशासनिक मनमानी की पराकाष्ठा यहीं खत्म नहीं होती। सकरा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 6 स्थित राजकीय उच्च मध्य विद्यालय (प्रखंड कॉलोनी, सकरा) के ऊपरी तल्ले पर पिछले लंबे समय से होमगार्ड के जवानों का बसेरा बना दिया गया है। होमगार्ड के जवान विद्यालय भवन के ऊपरी तल्ले पर अवैध रूप से कब्जा जमाए हुए हैं, जिससे विद्यालय प्रशासन और छोटे-छोटे बच्चों के सामने वर्ग कक्षों (क्लासरूम) का भारी संकट पैदा हो गया है।

जवानों द्वारा कमरों पर जबरन कब्जा जमाए रखने के कारण विद्यालय में पठन-पाठन के लिए जरूरी कमरे कम पड़ गए हैं। इसका सीधा और घातक असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। वर्ग कक्षों की अत्यंत कमी के कारण मजबूरी में पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी कक्षा (क्लास 1, 2, 3 और 4) के बच्चों को एक ही कमरे में एक साथ बिठाकर पढ़ाया जा रहा है। अब जरा सोचिए कि जिस कमरे में दो  अलग-अलग कक्षाओं के बच्चे एक साथ बैठे हों, वहां शिक्षक एक समय में किसे और क्या पढ़ा पाते होंगे? यह स्थिति न केवल शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) की धज्जियां उड़ाती है, बल्कि मासूम बच्चों के बौद्धिक विकास और शैक्षणिक गुणवत्ता के साथ एक बहुत बड़ा खिलवाड़ है। अधिकारियों की इस अनदेखी के कारण बच्चों का भविष्य पूरी तरह से राम भरोसे चल रहा है।

विद्यालय परिसर में असुरक्षा का माहौल, साइकिल चोरी के भय से घट रही छात्रों की सहूलियत

चारदीवारी (बाउंड्री वॉल) का अभाव विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था और छात्रों की उपस्थिति पर सीधा और प्रतिकूल असर डाल रहा है। स्कूल परिसर पूरी तरह खुला होने के कारण हमेशा असामाजिक तत्वों की आवाजाही और चोरी का भय बना रहता है। सबसे ज्यादा समस्या छात्राओं और दूर-दराज से आने वाले छात्रों को होती है, जो सुरक्षा के लिहाज से साइकिल से स्कूल आने से कतराते हैं, क्योंकि परिसर में खड़ी साइकिलों के चोरी या गायब होने का जोखिम हमेशा बना रहता है। सुरक्षित घेराबंदी न होने से विद्यालय का शैक्षणिक माहौल पूरी तरह असुरक्षित और अस्त-व्यस्त हो गया है, जिससे न केवल विद्यार्थियों की सुरक्षा दांव पर है बल्कि अभिभावक भी अपने बच्चों को स्कूल भेजने में असहज महसूस कर रहे हैं।

गौरवशाली अतीत से वर्तमान की गुमनामी तक का सफर

राजकीय उच्च मध्य विद्यालय, प्रखंड कॉलोनी, सकरा का इतिहास और इसके स्थापना का उद्देश्य बेहद खास था। इस विद्यालय को स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य सकरा प्रखंड कार्यालय, अंचल कार्यालय और सकरा थाना में कार्यरत सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना था।

स्थापना के शुरुआती दौर में यहाँ रहने वाले तमाम कर्मियों और अधिकारियों के बच्चे इसी विद्यालय में पढ़ा करते थे। उनके साथ-साथ आसपास के सामान्य वर्ग के बच्चे भी यहाँ शिक्षा ग्रहण करते थे। उस समय इस विद्यालय का एक अलग रुतबा था।

लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, आबादी बढ़ती गई और आसपास के बच्चों की संख्या में भारी इजाफा होता गया। वहीं दूसरी ओर, यहाँ कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी समय के साथ स्थानांतरित या पलायन कर गए। उनके जाने के बाद, अधिकारियों का इस विद्यालय से जुड़ाव खत्म हो गया और वे इसके प्रति पूरी तरह से उदासीन हो गए। परिणाम यह हुआ कि जो विद्यालय अधिकारियों की देखरेख में प्रखंड का सबसे बेहतरीन विद्यालय होना चाहिए था, वह अधिकारियों के अपने आवास छोड़ जाते ही उपेक्षा का शिकार होकर मूलभूत आवश्यकताओं के लिए तरसने लगा। अगर पिछले 1 दशक में आए किसी भी बीईओ या बीडीओ ने 4 कदम चलकर इस विद्यालय का नियमित निरीक्षण किया होता, तो आज यह सकरा प्रखंड का एक मॉडल और आदर्श विद्यालय होता। लेकिन अफसोस कि बीते 10 वर्षों में यहाँ जो भी प्रशासनिक अधिकारी आए, वे इस मामले में पूरी तरह संवेदनहीन और उदासीन ही साबित हुए।

थक-हारकर जनप्रतिनिधि पहुंचे सहयोग पोर्टलके द्वार

विद्यालय की इस बदहाली, जर्जर भवन के खतरे और बाउंड्री वॉल की मांग को लेकर सकरा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 6 के पार्षद पति रामबालक शर्मा ने लंबी लड़ाई लड़ी है। रामबालक शर्मा ने बताया कि उन्होंने सकरा के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) के समक्ष दर्जनों बार मौखिक और लिखित रूप से इस समस्या को लाया। अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटे, लेकिन अधिकारियों ने हर बार इसे अनसुना कर दिया और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

सकरा के सामाजिक कार्यकर्ता रामबालक शर्मा ने विद्यालय की इन समस्याओं को लेकर आवाज उठाई है। तसवीर में वे आवेदन दिखाते नजर आ रहे हैं, जिसमें उन्होंने स्कूल की मरम्मत, चारदीवारी के निर्माण और मूलभूत सुविधाओं को बहाल करने की मांग की है। शर्मा का कहना है कि यह स्कूल प्रखंड मुख्यालय के पास होने के बावजूद प्रशासन की उपेक्षा का शिकार है, जिससे बच्चों का भविष्य खतरे में है।

स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के इस रवैये से पूरी तरह से निराश और थक-हारकर रामबालक शर्मा ने आखिरकार बिहार सरकार द्वारा चलाए जा रहे सहयोग पोर्टल  के शिविर कार्यक्रम में इस गंभीर समस्या को ऑनलाइन निबंधित कराया है।

इसके साथ ही उन्होंने कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ), नगर पंचायत सकरा को भी एक विस्तृत लिखित आवेदन सौंपा है, जिसमें निम्नलिखित 3 मुख्य मांगें रखी गई हैं:

  1. जर्जर व परित्यक्त भवन को हटाना: विद्यालय परिसर के बीचों-बीच स्थित अत्यंत खतरनाक, जीर्ण-शीर्ण और परित्यक्त पुरानी बिल्डिंग को अविलंब ध्वस्त कर वहां से मलबा हटाया जाए ताकि दुर्घटना का खतरा टले और जगह बने।
  2. चाहारदीवारी का निर्माण: विद्यालय परिसर की सुरक्षा, असामाजिक तत्वों के प्रवेश को रोकने और पेयजल सुविधाओं को बचाने के लिए पूरे कैंपस की पक्की चाहारदीवारी (बाउंड्री वॉल) का निर्माण अविलंब कराया जाए।
  3. मिट्टी भराई एवं पेवर ब्लॉक कार्य: सड़क से नीचे स्थित विद्यालय के मैदान को समतल करने के लिए मिट्टी भराई कराई जाए और उस पर पेवर ब्लॉक (Paver Block) बिछाने का कार्य कराया जाए ताकि बच्चों को जलजमाव, कीचड़ और जलजनित बीमारियों से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सके।

जर्जर भवन, जलजमाव और बाउंड्री का अभाव: स्कूल की समस्याओं पर बोले एचएम

राजकीय उच्च मध्य विद्यालय, प्रखंड कॉलोनी, सकरा के प्राचार्य (HM) के कथनानुसार, विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण की नितांत आवश्यकता है। विद्यालय के पास अपनी कोई विशाल भूमि या खेल का मैदान उपलब्ध नहीं है; अनुमानतः महज पाँच कट्ठा जमीन परिसर में है, जिस पर केवल भवन निर्मित है तथा चारों ओर सड़क और ब्लॉक की सरकारी जमीन मौजूद है। जमीन संबंधी पिछला रिकॉर्ड पूर्व प्रभारी द्वारा नहीं सौंपे जाने के कारण अंचल अधिकारी (CO) से संपर्क की बात कही गई है। वर्तमान में लगभग 398 से 400 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, जिनके पठन-पाठन के लिए परिसर में 13 वर्ग कक्ष उपलब्ध हैं। विद्यालय की प्रमुख समस्याओं में चारदीवारी (बाउंड्री वॉल) का न होना, जल-जमाव से बचाव हेतु मिट्टी भराई की जरूरत और जर्जर भवन को हटाना शामिल है—जिसमें जर्जर मकान को ध्वस्त करने की प्रशासनिक प्रक्रिया (प्रोसीडिंग) जारी है। साफ-सफाई हेतु पदेन आदेशपाल न होकर आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, भवन की ऊपरी मंजिल पर बीडीओ के मौखिक निर्देश पर प्रशासनिक व्यवस्था के तहत सुरक्षा बलों को अस्थायी रूप से ठहराया गया है, जिनके लिए अन्यत्र व्यवस्था होते ही स्थान खाली कर दिया जाएगा।

कब जागेगा सुस्त प्रशासनिक अमला?

सकरा प्रखंड का यह विद्यालय आज इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब शासन और प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लेते हैं, तो उसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ता है। बीडीओ आवास से 200 मीटर और बीईओ कार्यालय से 100 मीटर दूर स्थित इस विद्यालय की दुर्दशा अधिकारियों की कार्यशैली पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।

अब देखना यह होगा कि सहयोग पोर्टल पर मामला दर्ज होने के बाद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की नींद खुलती है या फिर इस विद्यालय के बच्चे यूं ही जर्जर भवन के साये में, बिना बाउंड्री की असुरक्षा के बीच और जलजमाव वाले मैदान में अपना भविष्य तलाशने को मजबूर रहेंगे। सकरा की जनता और विद्यालय के नौनिहाल अब आने वाले समय का इंतजार कर रहे हैं कि कब इस विद्यालय की तसवीर बदलेगी।

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खाली कुर्सियाँ, बेअसर सिस्टम: सकरा के सहयोग शिविर में फरियादियों का अकाल, शाम तक आए सिर्फ 10 आवेदन

सकरा (मुजफ्फरपुर)। सकरा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 6 स्थित राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय प्रखंड कॉलोनी सकरा के प्रांगण में आयोजित नगर पंचायत सकरा  का सहयोग शिविर पूरी तरह बेअसर साबित हुआ। जनता की समस्याओं के तत्काल समाधान और योजनाओं के लाभ के लिए लगाए गए इस शिविर में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा और अधिकारी फरियादियों की राह तकते नजर आए।

सकरा नगर पंचायत के वार्ड 6 स्थित राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय प्रखंड कॉलोनी में आयोजित सहयोग शिविर में आवेदकों की जानकारी दर्ज करते आईटी असिस्टेंट निरंजन कुमार, डाटा एंट्री ऑपरेटर सुभाष कुमार व अन्य कर्मी।

सुस्ती और मौसम का बहाना, या सकरा नगर पंचायत के लोगो की समस्याएं हो गईं खत्म?

 शिविर में फरियादियों की बेहद निराशाजनक मौजूदगी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। एक तरफ जहां प्रचार-प्रसार की भारी कमी और खराब मौसम को लोगों के न पहुंचने की वजह बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या सकरा नगर पंचायत क्षेत्र के निवासियों की सभी समस्याओं का समाधान पहले ही हो चुका है? या फिर सरकारी दावों का ढोल पीटने वाले इस तंत्र से आम जनता का भरोसा उठ चुका है? कारण जो भी हो, लेकिन शाम 4 बजे तक पोर्टल पर महज 10 आवेदन ही पंजीकृत हो सके, जिसने प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोलकर रख दी।

केवल 10 आवेदनों पर सिमटा पूरा शिविर दिनभर चले इस शिविर में शाम तक दर्ज हुए कुल 10 आवेदनों का ब्योरा कुछ इस प्रकार रहा:

  • जमाबंदी से संबंधित: 4 आवेदन
  • नल-जल योजना से संबंधित: 2 आवेदन
  • आवास योजना से संबंधित: 2 आवेदन
  • बिजली समस्या: 1 आवेदन
  • विद्यालय चाहरदीवारी व उन्नयन: 1 आवेदन

शिविर में मुख्य रूप से अपनी समस्याएं लेकर पहुंचने वाले फरियादियों में अनुराधा कुमारी, अमरेन्द्र कुमार, मंजू कुमारी सिन्हा, रामबालक शर्मा और मंजय सिंह आदि शामिल रहे।

कुर्सियों पर बैठे रहे कर्मचारी और प्रतिनिधि : जनता की अनुपस्थिति के बावजूद शिविर की औपचारिकता पूरी करने के लिए नगर पंचायत सकरा के आईटी असिस्टेंट निरंजन कुमार, डाटा एंट्री ऑपरेटर सुभाष कुमार, होल्डिंग टैक्स संग्राहक राहुल कुमार, एमटीएस कर्मी शकल कुमार राय एवं सुबोध कुमार राय मौजूद रहे। इसके अलावा स्थानीय वार्ड पार्षद भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने शिविर स्थल पर पहुंचे रहे। हालांकि, फरियादियों के अभाव में सभी कर्मी दिनभर पोर्टल और लैपटॉप पर सन्नाटा नापते नजर आए।

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मानसून सत्र के पहले ही दिन भारी उथल-पुथल: विपक्ष के मार्च के बीच 87,383 करोड़ का बजट पेश, जेडीयू का तीखा तंज- ‘नेता प्रतिपक्ष खुद गायब, विपक्ष है कहां?’

 केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सदन के बाहर भारी हंगामा, अंदर वित्त मंत्री विजय कुमार चौधरी ने रखा अनुपूरक बजट

पटना: बिहार विधानसभा का मानसून सत्र पहले ही दिन हंगामे और भारी राजनीतिक घमासान की भेंट चढ़ता दिखाई दिया। सत्र के पहले दिन एक तरफ जहां सदन के अंदर सरकार ने अपनी वित्तीय योजनाओं को गति देने के लिए बड़ा कदम उठाया, वहीं दूसरी तरफ सदन के बाहर विपक्ष ने जोरदार प्रदर्शन कर माहौल को पूरी तरह गर्मा दिया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही वित्त मंत्री विजय कुमार चौधरी ने 87,383 करोड़ रुपये का भारी-भरकम अनुपूरक बजट सदन के पटल पर पेश किया। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि राज्य में चल रही विभिन्न विकास योजनाओं को गति देने और अन्य आवश्यक आकस्मिक व्ययों को समय पर पूरा करने के उद्देश्य से यह अतिरिक्त बजट लाया गया है।

बिहार विधानसभा मानसून सत्र के पहले दिन सदन की कार्यवाही में भाग लेते सत्ता पक्ष और विपक्ष के माननीय सदस्य।

सदन के भीतर की इस वित्तीय गतिविधि से इतर, विधानसभा परिसर का नजारा बेहद तनावपूर्ण और गहमागहमी से भरा रहा। विधानसभा की कार्यवाही विधिवत रूप से आरंभ होने से पहले ही विपक्षी विधायकों ने एकजुट होकर एक बड़ा मोर्चा खोल दिया। विपक्षी दलों के नेताओं और विधायकों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को बुलंद करते हुए परिसर में पैदल मार्च निकाला। इस विरोध मार्च के दौरान विपक्षी विधायकों के हाथों में बड़े-बड़े पोस्टर और बैनर थे, जिन पर सरकार विरोधी नारे लिखे हुए थे। पूरे विधानसभा परिसर में विपक्षी सदस्यों द्वारा की जा रही नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन से राजनीतिक तापमान अत्यंत बढ़ गया।

बिहार विधानसभा मानसून सत्र के पहले दिन सदन की कार्यवाही का विरोध करते एवं शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को बुलंद करते हुए विपक्ष के माननीय सदस्य।

विपक्ष के इस आक्रामक तेवर और लगातार किए जा रहे हंगामे पर सत्ताधारी दल जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने भी बेहद तीखा पलटवार किया है। जेडीयू के एमएलसी ने विपक्ष की भूमिका और उनकी गंभीरता पर गंभीर सवाल उठाते हुए तंज कसा। उन्होंने सीधे तौर पर हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में विपक्ष का कोई वजूद ही नजर नहीं आ रहा है, क्योंकि उनके मुख्य नेता प्रतिपक्ष खुद ही इस महत्वपूर्ण अवसर पर गायब हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष का यह प्रदर्शन केवल एक छलावा है, क्योंकि उनकी प्राथमिकता जनहित नहीं, बल्कि निजी और पारिवारिक हित साधना है।

सत्र के पहले ही दिन दोनों पक्षों के बीच उपजे इस भारी गतिरोध से आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही और अधिक गर्माहट भरी होने के आसार दिख रहे हैं।

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डमरू की गूंज और शंखनाद के साथ पाटलिपुत्र जंक्शन से 1,150 श्रद्धालुओं को लेकर सोमनाथ रवाना हुई स्वाभिमान स्पेशल ट्रेन, सम्राट चौधरी ने दिखाई हरी झंडी

विशेष ब्यूरो, पटना | 20 जुलाई 2026| बिहार की राजधानी पटना स्थित पाटलिपुत्र जंक्शन पर सोमवार को आस्था और भक्ति का ऐसा अभूतपूर्व नजारा देखा गया, जिसने इतिहास के पन्नों में एक नया अध्याय जोड़ दिया। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व (अटूट आस्था की गौरव गाथा) के तहत आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में कुल 1,150 श्रद्धालुओं के जत्थे को लेकर सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा स्पेशल ट्रेन रवाना हुई। पूरे स्टेशन परिसर को फूलों से दुल्हन की तरह सजाया गया था और जैसे ही ट्रेन की रवानगी का समय हुआ, दीप प्रज्वलन, डमरू वादन और शंख ध्वनि की महागुंज से पूरा आसमान गूंज उठा।

ट्रेन के भीतर पहुंचे मुख्यमंत्री, यात्रियों से की बातचीत  

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस पावन यात्रा का शुभारंभ करते हुए स्पेशल ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। हरी झंडी दिखाने से पहले मुख्यमंत्री खुद ट्रेन की बोगियों के भीतर गए, श्रद्धालुओं से मुलाकात की, उनका कुशलक्षेम जाना और यात्रा की सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि हमारे पूरे बिहार की आस्था, स्वाभिमान और सांस्कृतिक गौरव का संदेश लेकर देश के विभिन्न राज्यों में जा रही है। मुख्यमंत्री ने बिहारवासियों की ओर से श्रद्धालु शोभा सिंह को पवित्र कलश तथा अजीत कुमार को पावन ध्वज सौंपा, जो बिहार की समृद्धि के प्रतीक हैं।

बिहार के ऐतिहासिक गौरव का किया स्मरण

मुख्यमंत्री ने इतिहास का स्मरण कराते हुए कहा कि 1,000 वर्ष पूर्व विदेशी आक्रांताओं ने हमारे सोमनाथ मंदिर को लूटा था और नालंदा विश्वविद्यालय को भी बर्बाद कर दिया था। लेकिन 75 वर्ष पूर्व जब सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ, तो उसमें बिहार के लाल और प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद शामिल हुए थे। ठीक उसी तरह, आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नालंदा विश्वविद्यालय को पुनः स्थापित कर बिहार के गौरवशाली इतिहास को जीवित किया है। हमारा संकल्प है कि हम इस विरासत को फिर से प्रतिष्ठित करें।

दिग्गज नेताओं और अधिकारियों की रही मौजूदगी

 इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, कला एवं संस्कृति मंत्री प्रमोद कुमार और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सह विधायक संजय सरावगी ने भी संबोधित किया। समारोह के प्रारंभ में कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंटकर उनका स्वागत किया।

इस भव्य अवसर पर सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव, विधायक संजीव चौरसिया, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि और हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे सोमनाथ के साथ-साथ काशी विश्वनाथ के भी दर्शन करें और बाबा भोलेनाथ से बिहार के सुख, शांति, समृद्धि और सर्वांगीण विकास का आशीर्वाद मांगें।

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घूसखोर थाना प्रभारी पर निगरानी का शिकंजा: साम्यागढ़ थाना परिसर में 27,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, जेसबी चलाने के नाम पर वसूल रहा था साप्ताहिक रकम!

पटना: भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्य में सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। पटना जिले के साम्यागढ़ थाने के पुलिस अवर निरीक्षक-सह-थानाध्यक्ष सौरभ कुमार को निगरानी विभाग की मुख्यालय टीम ने 27,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी किसी गुप्त स्थान से नहीं, बल्कि खुद साम्यागढ़ थाना परिसर के भीतर से की गई है, जिससे पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

साम्यागढ़ थाना परिसर से 27,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किए गए आरोपी पुलिस अवर निरीक्षक-सह-थानाध्यक्ष सौरभ कुमार (लाल घेरे में) को अपनी कस्टडी में लेकर पटना ले जाती निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की धावा दल टीम।

जेसीबी चलाने के एवज में मांगी थी साप्ताहिक घूस : मिली जानकारी के अनुसार, प्रहलादपुर (थाना- साम्यागढ़, जिला- पटना) के रहने वाले परिवादी मनोज कुमार, पिता- बृजनंदन यादव ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के पटना कार्यालय में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि थाना प्रभारी सौरभ कुमार द्वारा उनके क्षेत्र में जेसीबी (जेसीबी) गाड़ी चलाने की अनुमति देने के बदले लगातार साप्ताहिक रिश्वत की मांग की जा रही थी। पीड़ित इस अवैध वसूली से बेहद परेशान था और उसने भ्रष्टाचार के सामने झुकने के बजाय कानून का सहारा लिया।

सत्यापन के बाद बिछाया गया जाल : शिकायत मिलने के बाद निगरानी ब्यूरो ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गुप्त रूप से जांच कराई। ब्यूरो द्वारा कराए गए सत्यापन के दौरान आरोपी थाना प्रभारी द्वारा रिश्वत मांगे जाने का ठोस प्रमाण मिला। प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने के तुरंत बाद निगरानी ब्यूरो के मुख्यालय में कांड संख्या 0-085/26 (दिनांक 17.07.2026) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद मामले के अनुसंधानकर्ता अरुणोदय पांडेय, वरीय पुलिस उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के नेतृत्व में एक विशेष धावा दल (ट्रैप टीम) का गठन किया गया।

थाना परिसर में ही दबोचा गया आरोपी : आज दिनांक 20.07.2026 को योजना के मुताबिक, निगरानी की धावा दल ने साम्यागढ़ थाना परिसर की घेराबंदी की। जैसे ही परिवादी मनोज कुमार से थानाध्यक्ष सौरभ कुमार ने रिश्वत के 27,000 रुपये (सत्ताईस हजार) नकद स्वीकार किए, वैसे ही पहले से घात लगाए बैठी निगरानी टीम ने उन्हें रंगे हाथ धर दबोचा। ब्यूरो के अधिकारियों ने तुरंत उनके पास से रिश्वत की पूरी रकम बरामद कर ली।

विशेष अदालत में पेशी की तैयारी : निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम आरोपी थानाध्यक्ष सौरभ कुमार को गिरफ्तार कर पटना स्थित अपने मुख्यालय ले आई है। ब्यूरो के अधिकारियों के अनुसार, अभियुक्त से गहन पूछताछ की जा रही है और पूछताछ की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें पटना स्थित माननीय विशेष न्यायालय, निगरानी के समक्ष उपस्थित किया जाएगा। मामले में आगे की कानूनी व अग्रतर अनुसंधान की कार्रवाई तेजी से की जा रही है।

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