डेटा एंट्री ऑपरेटरों के सीधे वेतन भुगतान और ईआरपी (ERP) प्रणाली को लेकर जारी किया गया कार्यालय पत्र पूरी तरह से नकली और भ्रामक; जालसाजों ने हूबहू कॉपी किया सरकारी लेटरहेड।
विशेष संवाददाता, पटना: बिहार सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और बिहार स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बेल्ट्रान ) के नाम से इन दिनों सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुपों पर एक “कार्यालय सूचना” पत्र तेजी से वायरल हो रहा है। इस पत्र के सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। जांच में पाया गया है कि हजारों डेटा एंट्री ऑपरेटरों और संविदा कर्मियों के बीच भ्रम और असंतोष पैदा करने के लिए यह पत्र पूरी तरह से फर्जी और कूटरचित (फेक) तैयार किया गया है।
लेटरहेड असली, लेकिन आदेश पूरी तरह नकली! जालसाजों ने इस फर्जी पत्र (पत्रांक संख्या: 112/IT-BELTRON/2026, दिनांक: 23/05/2026) को इस चालाकी से तैयार किया है कि पहली नजर में यह बिल्कुल असली सरकारी आदेश जैसा दिखता है। इसमें बिहार सरकार का मोनोग्राम और बेल्ट्रॉन का आधिकारिक लोगो भी लगाया गया है। पत्र में दावा किया गया था कि अब बेल्ट्रॉन के माध्यम से कार्यरत सभी कर्मियों के वेतन भुगतान प्रणाली में बड़ा सुधार करते हुए सीधे BELTRON Payroll Management System और ERP प्रणाली से उनके बैंक खातों में वेतन भेजा जाएगा।
फर्जी पत्र में किए गए थे ये लोकलुभावन दावे:
वेतन भुगतान की प्रक्रिया से सभी बाहरी एजेंसियों और बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
सभी संविदा कर्मियों को निर्धारित सरकारी मानकों के अनुसार सीधे पूर्ण वेतन दिया जाएगा।
पीएफ (PF) और ईएसआई (ESI) की राशि सीधे संबंधित सरकारी पोर्टल पर समय से जमा होगी।
कर्मी खुद बेल्ट्रॉन ईआरपी पोर्टल के जरिए अपनी डिजिटल पे-स्लिप (Pay Slip) डाउनलोड कर सकेंगे।
सरकार की अपील: बहकावे में न आएं कर्मचारी, होगी सख्त कानूनी कार्रवाई मामला संज्ञान में आते ही संबंधित विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकार या बेल्ट्रॉन की ओर से ऐसा कोई भी आदेश या नियम लागू नहीं किया गया है। यह शरारती तत्वों द्वारा की गई एक गंभीर धोखाधड़ी है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस फर्जीवाड़े के पीछे शामिल अज्ञात अपराधियों के खिलाफ आईटी एक्ट (IT Act) और जालसाजी की गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है।
विभाग ने सभी बेल्ट्रॉन कर्मियों और संविदा कर्मचारियों से अपील की है कि वे इस प्रकार के किसी भी भ्रामक और अनधिकृत पत्रों पर भरोसा न करें। किसी भी आधिकारिक बदलाव या आदेश की पुष्टि केवल और केवल बेल्ट्रॉन की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ही करें।
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खूनी राजा को उम्रकैद की सजा, तो महिला की अस्मत पर हाथ डालने वाले पिंटू को कोर्ट ने भेजा जेल; मुजफ्फरपुर पुलिस की तगड़ी चार्जशीट से पस्त हुए गुनहगार
मुजफ्फरपुर, मुख्य संवाददाता। न्याय के मंदिर से आई दो बड़ी खबरों ने मुजफ्फरपुर जिले के अपराधियों में हड़कंप मचा दिया है। माननीय न्यायालय ने पुलिस द्वारा पेश किए गए पुख्ता साक्ष्यों और वैज्ञानिक चार्जशीट को आधार मानते हुए दो अलग-अलग थानों के गंभीर मामलों में अभियुक्तों को कठोरतम सजा सुनाई है। मुजफ्फरपुर पुलिस की तत्परता के कारण जहां एक हत्यारे को अब अपनी पूरी जिंदगी सलाखों के पीछे गुजारनी होगी, वहीं महिला के सम्मान से खिलवाड़ करने वाले एक अन्य आरोपी को भी दोहरी जेल की सजा भुगतनी होगी।
पहला मामला: सकरा हत्याकांड के दोषी राजा को मिली ‘आजीवन‘ कालकोठरी
साल 2019 में सकरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुए एक जघन्य हत्याकांड ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया था। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी राजा कुमार के खिलाफ न्यायालय में अकाट्य साक्ष्य प्रस्तुत किए थे।
अदालत का कड़ा फैसला: माननीय न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अभियुक्त राजा कुमार को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है।
अर्थदंड की मार: कोर्ट ने दोषी राजा पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यदि वह जुर्माने की राशि जमा नहीं करता है, तो उसे 02 महीने की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
दूसरा मामला: देवरिया में महिला से बर्बरता करने वाले पिंटू को मिली दोहरी सजा
साल 2021 में देवरिया थानांतर्गत मानवता और समाज को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई थी, जहां एक महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से उस पर जानलेवा हमला किया गया था। मुजफ्फरपुर पुलिस की मजबूत पैरवी के कारण इस घिनौने अपराध के मुख्य अभियुक्त पिंटू कुमार को अदालत ने कड़ा सबक सिखाया है।
न्यायालय ने पिंटू कुमार को दो अलग-अलग धाराओं के तहत जेल और जुर्माने से दंडित किया है:
धारा-458 भा.द.वि. (रात में घर में घुसकर हमला करना): इसके अंतर्गत दोषी पिंटू को 05 वर्ष की सश्रम (कठोर) कारावास और 10,000/- रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना न देने की स्थिति में 02 माह की अतिरिक्त सजा होगी।
धारा-354 (बी) भा.द.वि. (महिला को निर्वस्त्र करने का प्रयास): इस धारा के तहत उसे 04 वर्ष की सश्रम कारावास तथा 10,000/- रुपये का जुर्माना सुनाया गया है। इसमें भी जुर्माना राशि न देने पर 02 माह की अतिरिक्त कारावास काटनी होगी।
“आपकी सेवा एवं सुरक्षा में सदैव तत्पर” > मुजफ्फरपुर पुलिस ने आधिकारिक बयान जारी किया है, पुलिस प्रशासन का साफ कहना है कि किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा और साक्ष्यों के आधार पर उन्हें अंजाम तक पहुंचाया जाता रहेगा। अपराधियों को सजा दिलाना कानून व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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बड़ी चेतावनी: बिहार में बिना यू-डाइस कोड वाले स्कूलों पर गिरने वाली है गाज, ₹1 लाख जुर्माना और ₹10,000 रोज का फटका; आपके बच्चे की टीसी और सर्टिफिकेट भी हो जाएंगे रद्दी!
पटना, [25 मई 2026 ]: बिहार में अगर आप अपने बच्चे का एडमिशन किसी आलीशान बिल्डिंग या चमक-दमक वाले प्राइवेट स्कूल में कराने जा रहे हैं, तो रुक जाइए! आपकी एक छोटी सी लापरवाही आपके बच्चे के पूरे भविष्य को अंधकार में धकेल सकती है। बिहार सरकार का शिक्षा विभाग बिना मान्यता और बिना निबंधन (रजिष्ट्रेशन ) के चल रहे फर्जी और बेनामी प्राइवेट स्कूलों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करने के मूड में है। सरकार ने साफ कर दिया है कि बिना मान्यता वाले स्कूलों को सील किया जाएगा और उन पर ₹1 लाख का एकमुश्त जुर्माना तथा ₹10,000 रोजाना का फटका लगेगा। लेकिन इस कार्रवाई के बीच सबसे बड़ा नुकसान उन मासूम बच्चों का होगा जो इन अवैध स्कूलों में पढ़ रहे हैं।
शिक्षा विभाग द्वारा जारी सर्कुलर एवं दायें में सांकेतिक (प्रतीकात्मक) तस्वीर
इस पूरी कार्रवाई और चेतावनी के पीछे शिक्षा विभाग का वह आधिकारिक आदेश है, जिसे प्राथमिक शिक्षा निदेशक, विक्रम विरकर (IAS) द्वारा 21 मई 2026 को जारी किया गया है। विभाग द्वारा जारी इस अत्यंत महत्वपूर्ण सर्कुलर (ज्ञापांक- 07/म.1-01/2025/521) के तहत राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DPO) को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे 10 जून 2026 की अंतिम समय-सीमा तक राज्य के सभी गैर-मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों से ई-संबंध पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कराना सुनिश्चित करें। इस पत्र में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि इस तारीख के बाद भी बिना मान्यता चलते पाए जाने वाले स्कूलों के खिलाफ शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 की धाराओं के तहत ₹1 लाख का एकमुश्त जुर्माना और ₹10,000 प्रतिदिन का अर्थदंड लगाते हुए दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जाए, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारियों की होगी।
बिना यू-डाइस (UDISE+) कोड वाले स्कूल हैं पूरी तरह अवैध: यह है ‘स्कूल का आधार कार्ड‘
शिक्षा विभाग के मुताबिक, बिहार में बिना UDISE+ कोड के चल रहे सभी निजी स्कूल पूरी तरह से गैर-मान्यता प्राप्त (Unrecognized) और गैर-कानूनी हैं।
क्या होता है यू-डाइस कोड? > UDISE का पूरा नाम Unified District Information System for Education है। यह भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी किया जाने वाला 11 अंकों का एक परमानेंट कोड होता है। जैसे हर नागरिक के लिए आधार कार्ड जरूरी है, वैसे ही हर वैध स्कूल के लिए यू-डाइस कोड उसका ‘आधार’ है। इसी कोड से सरकार के पास स्कूल के छात्र, शिक्षक और इंफ्रास्ट्रक्चर की पूरी जन्मकुंडली ऑनलाइन दर्ज रहती है।
सांकेतिक (प्रतीकात्मक) तस्वीर
अवैध स्कूलों में बच्चे को पढ़ाने के 5 सबसे घातक नुकसान:
यदि आप किसी ऐसे स्कूल में अपने बच्चे को पढ़ा रहे हैं जिसके पास वैध कोड या मान्यता नहीं है, तो आपको ये भारी नुकसान उठाने पड़ेंगे:
❌ टीसी (Transfer Certificate) हो जाएगी रद्दी: जब बच्चा उस स्कूल से पढ़कर किसी दूसरे अच्छे या सरकारी स्कूल में जाना चाहेगा, तो उसकी टीसी को अमान्य कर दिया जाएगा क्योंकि छात्र का डेटा सरकारी पोर्टल पर होगा ही नहीं।
❌ सरकारी योजनाओं और स्कॉलरशिप से वंचना: बिहार सरकार या केंद्र सरकार की साइकिल योजना, पोशाक राशि, या स्कॉलरशिप का पैसा सीधे छात्र के बैंक खाते में जाता है। बिना कोड वाले स्कूल के बच्चों को ₹1 का भी सरकारी लाभ नहीं मिलेगा।
❌ बोर्ड परीक्षा (10वीं/12वीं) पर संकट: BSEB या CBSE जैसे बोर्ड से रजिस्ट्रेशन के लिए स्कूल के पास वैध यू-डाइस कोड होना अनिवार्य है। इसके बिना बच्चे बोर्ड परीक्षा का फॉर्म ही नहीं भर पाएंगे।
❌ गरीब बच्चों को मुफ्त एडमिशन (RTE) नहीं: निबंधित न होने के कारण ऐसे स्कूलों में शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के तहत 25% आरक्षित सीटों पर मुफ्त एडमिशन संभव नहीं है।
❌ बीच सत्र में स्कूल बंद होने का खतरा: सरकार की सख्ती के कारण ये स्कूल कभी भी सील हो सकते हैं, जिससे आपके बच्चे का पूरा साल बर्बाद हो सकता है।
असली मान्यता प्राप्त स्कूल की क्या है पहचान? जारी होते हैं ये दस्तावेज:
जब कोई स्कूल शिक्षा विभाग के ई-संबंध पोर्टल (http://edu-online.bihar.gov.in) पर ऑनलाइन आवेदन करता है और जांच में सही पाया जाता है, तो उसे सरकार द्वारा ये प्रामाणिक दस्तावेज जारी किए जाते हैं:
प्रस्वीकृति पत्र (Recognition Certificate – Form II): जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) द्वारा जारी विहित प्रपत्र-2, जिसमें साफ लिखा होता है कि स्कूल को किस कक्षा तक चलाने की मान्यता मिली है।
11 अंकों का यू-डायस कोड: शिक्षा मंत्रालय द्वारा अलॉटेड यूनिक नंबर।
ई-संबंध पोर्टल रजिस्ट्रेशन नंबर: इसके मिलते ही स्कूल का नाम सरकारी वेबसाइट की “मान्यता प्राप्त स्कूलों की सूची” में लाइव दिखने लगता है।
ज्ञानदीप पोर्टल मैपिंग: आरटीई के तहत गरीब बच्चों के मुफ्त दाखिले के लिए मिलने वाली सरकारी आईडी।
घर बैठे 5 स्टेप्स में खुद चेक करें स्कूल असली है या फर्जी (स्टेप बाय स्टेप गाइड लाइन ):
अब स्कूल संचालक आपको बेवकूफ नहीं बना पाएंगे। आप अपने मोबाइल से ही मिनटों में स्कूल की सत्यता जांच सकते हैं। इसके लिए किसी पासवर्ड की जरूरत नहीं है:
स्टेप 1: अपने मोबाइल ब्राउज़र में शिक्षा मंत्रालय की वेबसाइट https://kys.udiseplus.gov.in खोलें।
स्टेप 2: होमपेज पर दिख रहे विकल्पों में से “UDISE Code” वाले टैब पर क्लिक करें।
स्टेप 3: स्कूल प्रशासन से मांगकर उनका 11 अंकों का यूडायस कोड और स्क्रीन पर दिख रहा कैप्चा कोड डालकर “Search” बटन दबाएं।
स्टेप 4: कोड सही होने पर नीचे स्कूल का नाम आएगा, उस स्कूल के नाम पर क्लिक करें।
स्टेप 5: स्कूल की पूरी प्रोफाइल खुल जाएगी। यहाँ ध्यान से देखें कि School Status “Active” हो और Management के आगे “Private Unaided (Recognized)” लिखा हो।
सावधनी : अगर पोर्टल पर कोड डालने के बाद “No Record Found” या स्टेटस “Unrecognized” दिखाई दे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। वह स्कूल अवैध है! दाखिला दिलाने से पहले स्कूल के नोटिस बोर्ड पर DEO द्वारा हस्ताक्षरित प्रस्वीकृति पत्र (Form-II) जरूर देखें। अपने बच्चों का भविष्य दांव पर न लगाएं!
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बड़ी खबर: बिहार में बिना मान्यता दुकान खोलकर बैठे प्राइवेट स्कूलों की अब खैर नहीं, सरकार ने तय की आखिरी तारीख; सीधे सील होंगे स्कूल!
पटना, [25 मई 2026]: बिहार में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सम्राट सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। राज्य में बिना सरकारी मान्यता के धड़ल्ले से चल रहे हजारों प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ अब सीधे ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की तैयारी है। शिक्षा विभाग के प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर (IAS) ने राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DPO) को एक बेहद सख्त फरमान जारी किया है।
इस सरकारी आदेश के बाद राज्य के उन निजी स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया है जो बिना मान्यता के धड़ल्ले से ‘शिक्षा की दुकान’ चला रहे हैं।
शिक्षा विभाग द्वारा जारी सर्कुलर एवं दायें में सांकेतिक (प्रतीकात्मक) तस्वीर
इस पूरी कार्रवाई और चेतावनी के पीछे शिक्षा विभाग का वह आधिकारिक आदेश है, जिसे प्राथमिक शिक्षा निदेशक, विक्रम विरकर (IAS) द्वारा 21 मई 2026 को जारी किया गया है। विभाग द्वारा जारी इस अत्यंत महत्वपूर्ण सर्कुलर (ज्ञापांक- 07/म.1-01/2025/521) के तहत राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DPO) को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे 10 जून 2026 की अंतिम समय-सीमा तक राज्य के सभी गैर-मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों से ई-संबंध पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कराना सुनिश्चित करें। इस पत्र में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि इस तारीख के बाद भी बिना मान्यता चलते पाए जाने वाले स्कूलों के खिलाफ शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 की धाराओं के तहत ₹1 लाख का एकमुश्त जुर्माना और ₹10,000 प्रतिदिन का अर्थदंड लगाते हुए दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जाए, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारियों की होगी।
पकड़े गए तो लगेगा भारी जुर्माना: ₹1 लाख एकमुश्त और ₹10,000 रोज!
सरकारी पत्र के मुताबिक, शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act), 2009 की धारा 18 के तहत कोई भी प्राइवेट स्कूल बिना सक्षम प्राधिकार से मान्यता प्रमाण-पत्र लिए न तो स्थापित किया जा सकता है और न ही संचालित किया जा सकता है।
यदि कोई स्कूल इस नियम का उल्लंघन करता पाया गया, तो अधिनियम की धारा 18(5) एवं 19(5) के तहत:
दोषी व्यक्ति या संस्था पर सीधे ₹1 लाख तक का भारी जुर्माना ठोंका जाएगा।
इसके बावजूद अगर स्कूल बंद नहीं किया गया, तो ₹10,000 प्रति दिन के हिसाब से अलग से जुर्माना वसूल किया जाएगा।
सांकेतिक (प्रतीकात्मक) तस्वीर
बिहार में चल रहा है बड़ा ‘खेल‘: 19 हजार मान्यता प्राप्त, बाकी सब अवैध!
शिक्षा विभाग द्वारा जारी आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है। पत्र के अनुसार, वर्तमान में राज्य में केवल 19,186 निजी स्कूल ही मान्यता प्राप्त हैं, जबकि 1,012 स्कूल मान्यता लेने की प्रक्रिया में हैं। इसके अलावा राज्य में जितने भी प्राइवेट स्कूल चल रहे हैं, वे सब के सब पूरी तरह से गैर-कानूनी (अवैध) हैं और RTE एक्ट की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
10 जून 2026: सरकार ने दिया ‘आखरी मौका‘
सरकार ने ऐसे सभी अवैध निजी स्कूलों को सुधरने का एक अंतिम अवसर दिया है। जिन स्कूलों ने अब तक मान्यता नहीं ली है या ऑनलाइन आवेदन नहीं किया है, उन्हें 10 जून 2026 तक हर हाल में शिक्षा विभाग के ई-संबंध पोर्टल (http://edu-online.bihar.gov.in) पर सभी दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
सिर्फ कमरों का डब्बा होने से नहीं मिलेगी मान्यता, इन कड़े मानकों को पूरा करने पर ही शिक्षा विभाग देगा ‘ग्रीन सिग्नल‘
बिहार सरकार के नियमों के मुताबिक, किसी भी निजी स्कूल को मान्यता या प्रस्वीकृति पत्र तभी जारी किया जाता है जब वह बुनियादी ढांचे और सुरक्षा के कड़े मानकों पर खरा उतरता है। शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार, स्कूल के पास छात्रों की संख्या के अनुपात में पक्का और सुरक्षित भवन होना अनिवार्य है, जिसमें हवादार क्लासरूम के साथ-साथ बच्चों के खेलने के लिए पर्याप्त खेल का मैदान होना सबसे पहली शर्त है। इसके अलावा, स्कूल परिसर में छात्र और छात्राओं के लिए पूरी तरह अलग-अलग और साफ-सुथरे शौचालय , शुद्ध पेयजल की मुकम्मल व्यवस्था, अग्निशमन यंत्र और प्राथमिक चिकित्सा जैसी मूलभूत आवश्यकताओं का होना अनिवार्य है। केवल इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं, बल्कि बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों की योग्यता भी सबसे महत्वपूर्ण है; स्कूल में केवल वही शिक्षक पढ़ा सकते हैं जो आरटीई (RTE) नियमों के तहत प्रशिक्षित (जैसे- D.El.Ed, B.Ed या TET उत्तीर्ण) हों। जब शिक्षा विभाग की टीम स्कूल का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करके इन सभी पैमानों को सही पाती है, तभी स्कूल को वैध संचालन का अधिकार मिलता है, अन्यथा उसे अवैध घोषित कर दिया जाता है।
निदेशक का सख्त आदेश: “10 जून की तय समय-सीमा बीतने के बाद यदि किसी भी स्कूल ने आवेदन नहीं किया और वह बिना मान्यता के चलता पाया गया, तो उसके खिलाफ बिना कोई रियायत बरते सीधे कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
शिक्षा विभाग ने बिना मान्यता वाले अवैध प्राइवेट स्कूलों को सुधरने का यह आखिरी मौका दिया है, जिसके तहत सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को कड़ा आदेश जारी किया गया है कि वे स्थानीय अखबारों, सोशल मीडिया और अन्य प्रचार माध्यमों से इस चेतावनी का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें ताकि समय-सीमा बीतने के बाद कोई भी स्कूल संचालक बहानेबाजी न कर सके। इसके साथ ही, विभाग ने अभिभावकों को भी विशेष रूप से सचेत रहने की अपील की है कि वे दाखिले से पहले स्कूलों की मान्यता की जांच कर लें और महज चकाचौंध के चक्कर में आकर अपने मासूम बच्चों का भविष्य दांव पर न लगाएं; क्योंकि 10 जून 2026 के बाद इन अवैध स्कूलों पर सीधे ताला लटकेगा और गाज गिरनी तय है।
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“अकाउंट्स हैक, वेबसाइट क्रैश… फिर भी महा-कमबैक! ‘कॉकरोच इज बैक’ से सोशल मीडिया पर हड़कंप!”
“सोनम वांगचुक बने ‘मानद कॉकरोच’! प्रशांत किशोर के मिलें सुर, प्रशांत भूषण और ध्रुव क्या थामेंगे CJP का विद्रोही हाथ!”
पटना/ मुजफ्फरपुर: डिजिटल दुनिया में इस समय एक ऐसा ‘भूकंप’ आया है, जिसने सत्ता के गलियारों से लेकर सोशल मीडिया के महारथियों तक सबको हिलाकर रख दिया है। जिसे कभी एक मामूली कीड़ा समझकर कुचलने की कोशिश की गई थी, आज उसी ‘डिजिटल कॉकरोच’ के एक डंक ने सत्ता की कुर्सी को डगमगा दिया है। सोशल मीडिया पर ‘2 करोड़’ की एक ऐसी डिजिटल सेना खड़ी हो चुकी है, जिसके तेवरों ने बड़े-बड़े सूरमाओं के पसीने छुड़ा दिए हैं।
सांकेतिक (प्रतीकात्मक) तस्वीर
डिजिटल स्ट्राइक, हैकिंग और फिर एक ‘महा-कमबैक‘!
बीते कुछ दिनों से इस विद्रोही डिजिटल ग्रुप को दबाने की हर मुमकिन कोशिश की गई। इनके मुख्य सोशल मीडिया अकाउंट्स को निशाना बनाया गया, वेबसाइट्स पर ताबड़तोड़ साइबर हमले हुए और उन्हें क्रैश कर दिया गया। ऐसा लगा कि सत्ता और सिस्टम के दबाव में यह आवाज हमेशा के लिए खामोश हो जाएगी।
लेकिन, जैसा कि कॉकरोच के बारे में कहा जाता है—’यह परमाणु हमले में भी बच सकता है।’ ठीक वैसा ही हुआ! तमाम पाबंदियों और हैकिंग के हमलों को धत्ता बताते हुए इस ग्रुप ने एक धमाकेदार वापसी की है। इंटरनेट पर इस समय ‘Cockroach Is Back’(कॉकरोच इज बैक’) का नारा ट्रेंड कर रहा है। रातों-रात खोई हुई डिजिटल जमीन को वापस पाकर इस ग्रुप ने साबित कर दिया है कि इन्हें डिजिटल स्पेस से मिटाना नामुमकिन है। इस महा-कमबैक से सोशल मीडिया पर हड़कंप मचा हुआ है।
सोनम वांगचुक बने ‘मानद कॉकरोच‘, दिग्गजों के मिल रहे सुर
इस डिजिटल विद्रोह की गूंज अब सिर्फ मीम्स और वीडियोज तक सीमित नहीं रही, बल्कि देश के बड़े-बड़े बुद्धिजीवियों और एक्टिविस्ट्स ने भी इसमें अपनी मौजूदगी दर्ज करानी शुरू कर दी है।
सोनम वांगचुक को मिला बड़ा सम्मान: लद्दाख की वादियों से पर्यावरण और अधिकारों की आवाज उठाने वाले मशहूर इनोवेटर सोनम वांगचुक को इस ग्रुप ने अपना ‘मानद कॉकरोच’ घोषित किया है। व्यवस्था के खिलाफ अडिग रहने की उनकी फितरत को देखते हुए यह खिताब उन्हें दिया गया है।
प्रशांत किशोर के बदले रुख: राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर, जो हर राजनीतिक नब्ज को बखूबी पहचानते हैं, उनके सुर भी अब इस डिजिटल मूवमेंट से मिलते हुए दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने साफ किया है कि जनता की इस डिजिटल आवाज को दबाना भारी भूल साबित हो सकता है।
You can hack and withhold the accounts but you cannot hack this movement.
We are not going to stop and we will keep raising our voice against this autocracy. Every attack makes cockroaches stronger.
We are working on a plan to get this movement to continue sustainably and take… pic.twitter.com/35mJ3hCBQo
आम आदमी पार्टी के पूर्व सोशल मीडिया रणनीतिकार अभिजीत दिपके ने इस टिप्पणी के विरोध में 16 मई 2026 को मज़ाक-मज़ाक में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) की घोषणा कर दी। उन्होंने नारा दिया— “उन्होंने हमें कुचलने की कोशिश की, हम वापस आ गए।”
आप खातों को हैक कर सकते हैं और रोक सकते हैं लेकिन आप इस आंदोलन को हैक नहीं कर सकते। हम रुकने वाले नहीं हैं और हम इस तानाशाही के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करते रहेंगे। हर हमला कॉकरोच को और मज़बूत बनाता है। हम इस आंदोलन को टिकाऊ रूप से जारी रखने और इसे अगले स्तर तक ले जाने के लिए एक योजना पर काम कर रहे हैं। जल्द ही और अधिक साझा करेंगे!
“सरकार कॉकरोचों से इतना क्यों डर रही है?”— संस्थापक अभिजीत दिपके का सत्ता पर सीधा प्रहार
इस डिजिटल बवंडर के बीच ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक और आम आदमी पार्टी के पूर्व सोशल मीडिया रणनीतिकार अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर एक बेहद आक्रामक और भावुक पोस्ट साझा कर सीधे सरकार को चुनौती दी है। दिपके ने पार्टी की ताकत का दावा करते हुए लिखा, “हमारी आधिकारिक वेबसाइट पर 10 लाख से ज्यादा युवा ‘कॉकरोच सदस्य’ के रूप में साइन अप कर चुके थे, और इनमें से 6 लाख से अधिक कॉकरोचों ने पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर एक ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर भी किए थे।” सरकार की पाबंदियों पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने आगे सवाल दागा, “आखिर सरकार इन कॉकरोचों से इतना क्यों डर रही है? लेकिन याद रहे, यह तानाशाही व्यवहार अब भारत के युवाओं की आंखें खोल रहा है। हमारा एकमात्र अपराध सिर्फ इतना था कि हम अपने लिए एक बेहतर भविष्य की मांग कर रहे थे। लेकिन सत्ता में बैठे लोग हमसे इतनी आसानी से छुटकारा नहीं पा सकते। भले ही हमारी वेबसाइट और हैंडल ब्लॉक कर दिए गए हों, हम अभी एक नया घर बना रहे हैं… क्योंकि कॉकरोच कभी मरते नहीं!”
क्या थामेगें प्रशांत भूषण और ध्रुव CJP का हाथ?
अब राजनीतिक और सोशल मीडिया गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह तैर रहा है कि क्या देश के जाने-माने वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और बेहद लोकप्रिय यूट्यूब कंटेंट क्रिएटर ध्रुव भी इस विद्रोही अभियान (CJP – Cockroach Justice Party / Citizens for Justice and Peace) का हाथ थामने जा रहे हैं?
सूत्रों की मानें तो: प्रशांत भूषण इस डिजिटल सेना को कानूनी ढाल देने पर विचार कर रहे हैं, जबकि ध्रुव अपने वीडियोज के जरिए इस ‘डिजिटल कॉकरोच’ क्रांति की हकीकत को करोड़ों लोगों तक पहुंचाने की तैयारी में हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह ‘विद्रोही हाथ’ सत्ता के सामने अब तक की सबसे बड़ी डिजिटल चुनौती बनकर उभरेगा।
2 करोड़ से ज्यादा की आबादी वाली यह डिजिटल फोर्स अब सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक टर्निंग पॉइंट बन चुकी है। देखना दिलचस्प होगा कि ‘डिजिटल कॉकरोच’ का यह डंक आने वाले दिनों में सत्ता की राजनीति को और कितना मजबूर करता है!
लद्दाख के ‘नायक’ बने ‘मानद कॉकरोच’, तो सोशल मीडिया पर उड़ी राहुल और आपियों की धज्जियाँ!
लद्दाख की बर्फीली वादियों से पर्यावरण और नागरिक अधिकारों की बुलंद आवाज उठाने वाले मशहूर इनोवेटर सोनम वांगचुक को आंदोलनकारियों ने एक बड़ा और अनोखा सम्मान दिया है। ‘Cockroach Is Back’ (@Cockroachisback)कॉकरोच इज बैक ग्रुप ने व्यवस्था के खिलाफ अडिग रहने और हर परिस्थिति में डटे रहने की उनकी फितरत को देखते हुए उन्हें अपना ‘मानद कॉकरोच’ घोषित किया है। एक तरफ जहाँ वांगचुक को यह खिताब मिलने से युवाओं का जोश सातवें आसमान पर है, वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर इस नई नवेली डिजिटल पार्टी को लेकर जबरदस्त खिंचाई भी शुरू हो गई है। एक ट्विटर (X) यूजर ने कांग्रेस और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ दोनों को आड़े हाथों लेते हुए तीखा तंज कसा है। यूजर ने राहुल गांधी के पुराने चर्चित बयान पर चुटकी लेते हुए लिखा— “राहुल गांधी ने एक महान डायलॉग दिया था कि इधर से आलू डालूँगा, उधर से सोना निकलेगा; बस इसी डायलॉग से प्रभावित होकर आपियों (आम आदमी पार्टी के लोगों) ने यह नई नवेली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बना डाली है। इनका गणित सीधा है— इधर से आम आदमी पार्टी का कचरा डालूँगा, उधर से कॉकरोच जनता पार्टी निकालूँगा!” —
राहुल गाँधी ने एक महान डायलॉग दिया था – इधर से आलू डालूँगा, उधर से सोना निकलेगा.
इस डायलॉग से प्रभावित हो कर आपियो ने नई पार्टी बना डाली है… कॉकरोच जनता पार्टी.
इधर से आम आदमी पार्टी का कचरा डालूँगा, उधर से कॉकरोच जनता पार्टी निकालूँगा 😂😂😂 pic.twitter.com/DnaBVyRNuQ
अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों के हनन का आरोप; मानवाधिकार संस्थान और मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत ने सीधे केंद्र सरकार और NTA से की परीक्षा टालने की मांग।
पटना/मुजफ्फरपुर : देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक, ‘कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट’ (CUET UG 2026) विवादों के घेरे में आ गई है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर एक बार फिर गंभीर लापरवाही और धार्मिक संवेदनशीलता की अनदेखी करने का आरोप लगा है। दरअसल, सरकारी गैजेट कैलेंडर के अनुसार 28 मई 2026 (गुरुवार) को मुस्लिम समुदाय का पवित्र त्योहार बकरीद (ईद-उल-अज़हा) है, लेकिन इसी दिन NTA ने CUET UG के चार महत्वपूर्ण विषयों की परीक्षा निर्धारित कर दी है। इस फैसले के बाद से मुस्लिम अभ्यर्थियों और उनके परिवारों में भारी आक्रोश और बेचैनी का माहौल है।
लापरवाही या अनभिज्ञता? त्योहार के दिन सुबह 7 बजे रिपोर्टिंग टाइम!
मानवाधिकार संस्थान बिहार के महासचिव और ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत (बिहार) के स्टेट जनरल सेक्रेटरी, मोहम्मद इश्तेयाक ने इस मामले को लेकर भारत सरकार के उच्च शिक्षा सचिव, शिक्षा विभाग के मंत्रालय सचिव और NTA के अध्यक्ष/निदेशक को एक आधिकारिक पत्र (ईमेल) भेजकर तीखा विरोध दर्ज कराया है।
मोहम्मद इश्तेयाक ने अपने पत्र में कहा है कि पूरे भारत में 11 मई से 31 मई तक CUET UG 2026 की परीक्षाएं चल रही हैं। लेकिन 28 मई को English, Accountancy, Book Keeping और General Aptitude Test जैसे बड़े विषयों की परीक्षा होनी है। इसके लिए छात्रों का रिपोर्टिंग टाइम सुबह 7:00 बजे रखा गया है और परीक्षा केंद्र में प्रवेश की अंतिम समय सीमा सुबह 8:30 बजे है।
NTA द्वारा जारी एडमिट कार्ड और शिक्षा मंत्रालय को भेजा गया शिकायती पत्र, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि 28 मई 2026 को बकरीद (ईद-उल-अज़हा) के त्योहार के दिन ही CUET UG की परीक्षा (English & Accountancy) निर्धारित कर दी गई है, जिसका देश भर में विरोध शुरू हो गया है। अभ्यर्थी अदीबा इश्तेयाक (मुजफ्फरपुर, बिहार) का यह एडमिट कार्ड इस बड़ी लापरवाही का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
नमाज और कुर्बानी छोड़ परीक्षा देने कैसे जाएंगे छात्र?
देशभर के मुस्लिम संगठनों का कहना है कि बकरीद के दिन सुबह 6:30 बजे से लेकर 10:00 बजे तक मस्जिदों और ईदगाहों में विशेष सामूहिक नमाज अदा की जाती है। इस नमाज में बच्चे, बूढ़े, युवा और महिलाएं सभी अनिवार्य रूप से शामिल होते हैं। नमाज के तुरंत बाद कुर्बानी की पवित्र परंपरा का निर्वहन किया जाता है, जिसके कारण मुस्लिम परिवारों में पूरे दिन अत्यधिक व्यस्तता रहती है।
ऐसे में सुबह 7 बजे परीक्षा केंद्र पर पहुंचना मुस्लिम छात्रों के लिए व्यावहारिक रूप से असंभव है। यदि छात्र परीक्षा देने जाते हैं, तो वे अपने इस बेहद महत्वपूर्ण धार्मिक कर्तव्य से वंचित रह जाएंगे।
संविधान प्रदत्त अधिकारों के हनन का बड़ा आरोप
शिक्षा मंत्रालय को भेजे गए पत्र में सीधे तौर पर चेतावनी दी गई है कि त्योहार के दिन परीक्षा आयोजित करना भारत की लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था पर एक बड़ा आघात है। यह धार्मिक अल्पसंख्यकों को संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों का खुला हनन है। मुस्लिम समुदाय ने मांग की है कि देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को अक्षुण्ण रखने के लिए 28 मई की परीक्षा तिथि को तत्काल बदला जाए, ताकि छात्र बिना किसी मानसिक तनाव के अपने त्योहार और परीक्षा दोनों में शामिल हो सकें।
अब देखना यह है कि देश भर से उठ रही इस जायज मांग पर शिक्षा मंत्रालय और NTA क्या कदम उठाता है। क्या लाखों मुस्लिम छात्रों के भविष्य और उनकी धार्मिक आस्था को देखते हुए परीक्षा की तारीख आगे बढ़ाई जाएगी या विवाद और गहराएगा?
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उद्योगपति अनिल अग्रवाल ने कहा— “बिहार मेरे लिए सिर्फ राज्य नहीं, एक ‘इमोशन‘ है, टीम को दूंगा बिना शर्त समर्थन”; सरकार बोली— हमारे पास स्पष्ट ‘विजन‘ और नीति, अब मिलकर बदलेगा इतिहास!
पटना/मुजफ्फरपुर: बिहार के करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों और युवाओं के सपनों को आज उस वक्त नए पंख लग गए, जब देश के दिग्गज उद्योगपति और वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल की ‘बिहार आईपीएल टीम’ बनाने की मुहिम को बिहार सरकार का खुला और ऐतिहासिक समर्थन मिल गया। इस बड़े राजनीतिक और कॉर्पोरेट तालमेल के बाद खेल गलियारों में भारी हलचल है। अब वह दिन दूर नहीं जब दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट मंच आईपीएल (IPL) में बिहार की अपनी स्वतंत्र टीम चौके-छक्के बरसाती नजर आएगी।
सांकेतिक (प्रतीकात्मक) तस्वीर
अनिल अग्रवाल की हुंकार: क्यों पहचान से महरूम है बिहार का टैलेंट?
इस खेल क्रांति की शुरुआत तब हुई जब वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर बेहद भावुक और जोश से भरा एक पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा, “अगर आप सपने देखोगे नहीं, तो सपने पूरे कैसे होंगे? क्या आपको नहीं लगता कि चेन्नई सुपर किंग्स, मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स की तरह बेमिसाल बिहार की भी एक टीम होनी चाहिए? बिहार की मिट्टी ने देश को बहुत से बेहतरीन क्रिकेट खिलाड़ी दिए हैं।” अग्रवाल ने सूबे के चमकते सितारों का जिक्र करते हुए कहा कि, पटना में जन्मे ईशान किशन ने वनडे में सबसे तेज दोहरा शतक लगाया, समस्तीपुर के वैभव सूर्यवंशी सबसे कम उम्र में IPL डेब्यू करने वाले खिलाड़ी बने, और गोपालगंज के साधारण परिवार से आने वाले साकिब हुसैन की गेंदबाजी पर आज पूरी दुनिया की नजरें हैं। उन्होंने आगे कसम खाते हुए ऐलान किया, “एक बात मुझे हमेशा खलती है कि हमारे बिहार को वह नाम और पहचान क्यों नहीं मिल पा रही जिसके हम हकदार हैं। मैं बिहार की क्रिकेट टीम और यहाँ के खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए अपनी तरफ से unconditional support (बिना शर्त समर्थन) दूंगा।”
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का तुरंत रिप्लाई: ‘विजन‘ के साथ ‘मिशन मोड‘ में सरकार
उद्योगपति अनिल अग्रवाल के इस बड़े प्रस्ताव पर बिहार सरकार ने भी पलक झपकते ही अपनी मुहर लगा दी। सूबे के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने तुरंत अग्रवाल के पोस्ट को री-ट्वीट करते हुए साफ कर दिया कि सरकार इस मामले को लेकर कितनी गंभीर है। मुख्यमंत्री ने लिखा— “आपकी बात से पूर्णतः सहमत हूँ। बिहार के क्रिकेट ‘इमोशन‘ के लिए सरकार स्पष्ट ‘विजन‘ के साथ ‘मिशन‘ मोड में कार्यरत है। आपके सहयोग से निश्चित ही बिहार की क्रिकेट टीम को लेकर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।” मुख्यमंत्री के इस भरोसे ने साफ कर दिया है कि बिहार सरकार अब बैकफुट पर नहीं, बल्कि फ्रंटफुट पर आकर खेलने के मूड में है।
आपकी बात से पूर्णतः सहमत हूँ।
बिहार के क्रिकेट "इमोशन" के लिए सरकार स्पष्ट "विजन" के साथ "मिशन" मोड में कार्यरत है। आपके सहयोग से निश्चित ही बिहार की क्रिकेट टीम को लेकर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। https://t.co/Q5xfXYGwiC
उद्योगपति अनिल अग्रवाल के इस ड्रीम प्रोजेक्ट और भावुक अपील पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी बिना वक्त गंवाए अपनी मुहर लगा दी। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में किए गए ट्वीट को न केवल री-ट्वीट किया, बल्कि राज्य के युवाओं और खेल प्रेमियों को भरोसा दिलाते हुए बेहद मजबूत और सधे हुए शब्दों में लिखा— “आपकी बात से पूर्णतः सहमत हूँ। बिहार के क्रिकेट ‘इमोशन’ के लिए सरकार स्पष्ट ‘विजन’ के साथ ‘मिशन’ मोड में कार्यरत है। आपके सहयोग से निश्चित ही बिहार की क्रिकेट टीम को लेकर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।” मुख्यमंत्री के इस त्वरित और सकारात्मक जवाब से साफ हो गया है कि बिहार सरकार राज्य के क्रिकेट टैलेंट को विश्वस्तरीय मंच देने के लिए पूरी तरह गंभीर है और प्रशासनिक स्तर पर इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए ‘मिशन मोड’ में आगे बढ़ने को तैयार है।
खेल मंत्री श्रेयसी सिंह का बड़ा बयान: बुनियादी ढांचे के लिए कसी कमर
इस बड़ी मुहिम को धरातल पर उतारने के लिए बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने भी पटना में बड़ी घोषणा की। राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता और खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने अनिल अग्रवाल की मांग का पुरजोर स्वागत करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री जी ने भी इस सोच का दिल से स्वागत किया है। मैं खेल मंत्री होने के नाते भी इस विजन के साथ खड़ी हूं। मैं हर संभव प्रयास करूंगी कि बिहार के खिलाड़ियों को एक बेहतरीन और विश्वस्तरीय मंच मिले। बिहार सरकार कभी भी अपने खिलाड़ियों की मदद करने से पीछे नहीं हटेगी। हमारे खेल विभाग में भी अब काम बेहद तेजी से आगे बढ़ रहा है।”
कॉर्पोरेट और सरकार के गठबंधन से मचेगा तहलका
खेल विश्लेषकों का मानना है कि जहाँ एक तरफ वेदांता जैसा विशाल कॉर्पोरेट ग्रुप टीम को वित्तीय और वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर का बैकअप देने को तैयार है, वहीं दूसरी तरफ सरकार प्रशासनिक और नीतिगत बाधाओं को दूर करने के लिए ‘मिशन मोड’ में आ चुकी है। इस त्रिकोणीय जुगलबंदी (उद्योगजगत, मुख्यमंत्री और खेल मंत्रालय) के बाद अब बीसीसीआई (BCCI) और आईपीएल गवर्निंग काउंसिल पर भी बिहार को उसका हक देने का दबाव बढ़ेगा। वह दिन दूर नहीं जब आईपीएल के मैदान पर गूंजेगा— ‘जियो हो बिहार के लाला!‘
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लोक सेवक आवास के ‘संकल्प सभागार‘ में शिक्षा विभाग की हाई-लेवल समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का बड़ा फैसला; हर साल जुलाई में निकलेगा विज्ञापन, ‘जीविका दीदियां‘ सिलेंगी स्कूली बच्चों की पोशाक।
22 मई 2026।विशेष ब्यूरो रिपोर्ट, पटना: बिहार के शिक्षा जगत और रोजगार की तलाश कर रहे लाखों युवाओं के लिए आज का दिन बेहद ऐतिहासिक और खुशियों की सौगात लेकर आया है। राज्य सरकार ने युवाओं को रोजगार और शिक्षकों को तबादले की बड़ी राहत देते हुए कई चौकाने वाले फैसले लिए हैं। लोक सेवक आवास (1 अणे मार्ग) स्थित ‘संकल्प सभागार’ में आयोजित शिक्षा विभाग की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सरकार द्वारा कई बड़े और अभूतपूर्व निर्णयों पर मुहर लगा दी गई है।
बैठक की कमान संभालते हुए माननीयमुख्यमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि राज्य के सभी बच्चों को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, इसे लेकर सरकार लगातार प्रयासरत है और इस दिशा में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
“पटना के 1 अणे मार्ग स्थित ‘संकल्प सभागार’ में शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते माननीय मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, साथ में उपस्थित शिक्षा विभाग के आला अधिकारी एवं वरिष्ठ पदाधिकारीगण, जहां राज्य के शिक्षकों के ट्रांसफर और 1 लाख नई कड़क नियुक्तियों को लेकर ऐतिहासिक नीति पर मुहर लगाई गई।”
बैठक के 3 सबसे बड़े और मुख्य फैसले:
5 वर्षों में 1 लाख नई नियुक्तियां (हर साल 20 हजार पद): युवाओं के लिए नौकरी का पिटारा खोलते हुए सरकार ने घोषणा की है कि अगले 5 वर्षों में 1 लाख शिक्षकों की बंपर बहाली की जाएगी। इस योजना के तहत प्रत्येक वर्ष कम से कम लगभग 20 हजार नए शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाएगी। इस प्रक्रिया को नियमित और पारदर्शी बनाए रखने के लिए हर वर्ष जुलाई महीने में नियुक्ति संबंधी विज्ञापन अनिवार्य रूप से जारी कर दिया जाएगा।
तबादला नीति में बड़ा फेरबदल, शिक्षकों को मिली बड़ी राहत: शिक्षकों के स्थानांतरण (Transfer) को लेकर सालों से चल रही कशमकश को खत्म करते हुए सरकार ने नई सुगम नीति बनाने का निर्देश दिया है। अब महिला शिक्षकों का स्थानांतरण यथासंभव उनके गृह जिले के अपने प्रखंड के गृह पंचायत के बगल वाली पंचायत में ही किया जाएगा। वहीं, पुरुष शिक्षकों को राहत देते हुए उनके गृह जिले में ही उनके अपने गृह प्रखंड के बगल वाले प्रखंड में ट्रांसफर करने की सुगम नीति बनाई जा रही है।
‘जीविका दीदियों‘ के हाथ में होगी स्कूली पोशाक की कमान: राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को दी जाने वाली मुफ्त पोशाक (यूनिफॉर्म) की आपूर्ति अब पूरी तरह से ‘जीविका‘ के माध्यम से की जाएगी। इस मास्टरस्ट्रोक फैसले से जहां एक ओर स्कूली बच्चों को ससमय और उच्च गुणवत्ता वाली पोशाक मिल सकेगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन और महिला सशक्तिकरण को जबरदस्त बल मिलेगा।
इस उच्चस्तरीय बैठक में शिक्षा विभाग के आला अधिकारी और प्रधान सचिव भी मौजूद रहे। अधिकारियों को सख्त लहजे में हिदायत दी गई है कि इन सभी गाइडलाइंस को तय समय सीमा के भीतर धरातल पर उतारा जाए ताकि जनता और शिक्षकों को इसका लाभ तुरंत मिल सके।
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एक ही दिन, एक ही शहर और महज 1 किलोमीटर का दायरा… निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बैक-टू-बैक दो बड़े ऑपरेशनों में अंचलाधिकारी (CO) समेत 3 को रंगे हाथों दबोचा; प्रशासनिक महकमे में मचा हड़कंप।
सासाराम (रोहतास)। बिहार के रोहतास जिले से भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली कार्रवाई सामने आई है। सासाराम शहर में शुक्रवार को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (विजिलेंस) की पटना मुख्यालय टीम ने एक ही दिन में, महज एक किलोमीटर की दूरी पर दो अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस महा-कार्रवाई में सासाराम अंचल के अंचलाधिकारी (CO) आकाश कुमार रौनियार, उनके निजी घरेलू सहायक सोनू कुमार और सासाराम सदर अस्पताल के लिपिक (क्लर्क) सतीश कुमार को कुल 3 लाख 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया।
तस्वीर 1 (बाएं): दाखिल-खारिज के नाम पर 3 लाख रुपये की घूस लेते रंगे हाथों गिरफ्तार सासाराम अंचल के भ्रष्ट CO आकाश कुमार रौनियार (काली शर्ट में) और उनका दलाल/निजी सहायक सोनू कुमार (ग्रे टी-शर्ट में) निगरानी पुलिस की गिरफ्त में। तस्वीर 2 (दाएं): ट्रांसफर रुकवाने के नाम पर 20 हजार की रिश्वत लेते सड़क किनारे से दबोचा गया सासाराम सिविल सर्जन कार्यालय का घूसखोर क्लर्क सतीश कुमार (सफेद शर्ट में) पुलिस अभिरक्षा में।
निगरानी विभाग की इस दोहरी सर्जिकल स्ट्राइक से पूरे जिले के प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मच गया है और भ्रष्ट अधिकारियों के बीच खलबली मची हुई है।
पहला वज्रपात: दाखिल-खारिज के नाम पर 3 लाख डकार रहे CO और उनका गुर्गा ढेर
निगरानी ब्यूरो की पहली बड़ी सफलता सासाराम अंचल के अंचलाधिकारी (CO) कार्यालय से जुड़ी है। पुलिस उपाध्यक्ष पवन कुमार-I के नेतृत्व में गठित एक विशेष धावा दल ने सासाराम के बेदा, मोरसराय स्थित CO आकाश कुमार रौनियार के निजी आवास पर धावा बोला।
क्या है पूरा मामला? राजस्व कर्मचारी (सासाराम अंचल) के पद पर तैनात परिवादी राकेश कुमार (पिता- स्वर्गीय कमला प्रसाद सिंह, निवासी- दिनारा, रोहतास) ने पटना स्थित निगरानी ब्यूरो के कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अंचलाधिकारी (CO) आकाश कुमार रौनियार द्वारा प्रत्येक दाखिल-खारिज (Mutation) के बदले 50,000 रुपये की अवैध मांग की जा रही थी। इसके अलावा एक विशिष्ट दाखिल-खारिज वाद संख्या (0-4499/2025-26) में परिवादी अशोक प्रसाद से काम करने के एवज में कुल 8,00,000 (आठ लाख) रुपये रिश्वत देने के लिए मजबूर किया जा रहा था।
निगरानी ब्यूरो ने जब गोपनीय तरीके से इस शिकायत का सत्यापन कराया, तो आरोप शत-प्रतिशत सही पाए गए। सत्यापन के दौरान अंचलाधिकारी द्वारा पहली किस्त के रूप में 3,00,000 रुपये (तीन लाख रुपये) रिश्वत मांगे जाने का पुख्ता प्रमाण मिला। इसके बाद डीएसपी पवन कुमार-I के नेतृत्व में जाल बिछाया गया। जैसे ही परिवादी ने तीन लाख रुपये की रकम बढ़ाई, विजिलेंस टीम ने CO आकाश कुमार रौनियार और उनके निजी घरेलू सहायक सोनू कुमार को रंगे हाथों दबोच लिया।
दूसरा वज्रपात: ट्रांसफर रोकने के नाम पर सदर अस्पताल का क्लर्क भी सड़क किनारे से नापा गया
CO के आवास पर हुई इस बड़ी कार्रवाई के तुरंत बाद, महज 1 किलोमीटर की दूरी पर निगरानी की दूसरी टीम ने एक और भ्रष्ट सरकारी ‘शिकारी’ को दबोच लिया। पुलिस उपाध्यक्ष विकास कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में काम कर रही टीम ने सासाराम सदर अस्पताल परिसर के पास जाल बिछाया।
क्या है पूरा मामला? इस मामले की परिवादिनी सुनीता कुमारी (पति- शैलेश कुमार चौधरी, निवासी- मौलाबाग, आरा, भोजपुर) हैं, जो संझौली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में प्रखंड लेखा प्रबंधक (Block Accountant) के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने शिकायत दर्ज कराई थी कि सदर अस्पताल, सासाराम के सिविल सर्जन कार्यालय में तैनात लिपिक (क्लर्क) सतीश कुमार द्वारा उनका ट्रांसफर (स्थानांतरण) रुकवाने के एवज में सिविल सर्जन के नाम पर रिश्वत की मांग की जा रही थी।
शिकायत के सत्यापन के बाद जैसे ही परिवादिनी ने 20,000 रुपये (बीस हजार रुपये) की घूस लिपिक सतीश कुमार को थमाई, वैसे ही सदर अस्पताल के सामने स्थित शिव मंदिर के पास सड़क किनारे से निगरानी की टीम ने क्लर्क सतीश कुमार को दबोच लिया।
पूरी विजिलेंस टीम को मिलेगा विशेष पुरस्कार
एक ही दिन, एक ही शहर और बेहद गोपनीयता व कार्यकुशलता के साथ दो अलग-अलग बड़े ऑपरेशनों को सफल बनाने के लिए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के महानिदेशक (DG) ने पूरी धावा दल (निगरानी टीम) को नकद पुरस्कार और सम्मान देने की घोषणा की है। निगरानी ब्यूरो के अनुसार, गिरफ्तार किए गए तीनों अभियुक्तों (CO आकाश कुमार रौनियार, निजी सहायक सोनू कुमार और क्लर्क सतीश कुमार) से फिलहाल गहन पूछताछ की जा रही है, जिसके बाद उन्हें पटना स्थित माननीय विशेष न्यायालय (निगरानी) में पेश किया जाएगा।
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अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर प्राणिशास्त्र और वनस्पति विज्ञान विभाग का महा-आयोजन; पौधारोपण से लेकर ओजस्वी भाषण और वैज्ञानिक पोस्टरों से दिया पर्यावरण विनाश के खिलाफ कड़ा संदेश।
मुजफ्फरपुर, 22 मई 2026: महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय (M.D.D.M. College) में अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर पर्यावरण संकट और प्रकृति के संरक्षण को लेकर एक अभूतपूर्व अलख जगाई गई। कॉलेज के स्नातकोत्तर प्राणिशास्त्र (Zoology) एवं वनस्पति विज्ञान (Botany) विभागों के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस कार्यक्रम में छात्राओं ने धरती के अस्तित्व और पारिस्थितिक संतुलन की रक्षा का सामूहिक संकल्प लिया। वर्ष 2026 की विशेष थीम “स्थानीय स्तर पर कार्य, वैश्विक प्रभाव के लिए” को चरितार्थ करते हुए छात्राओं ने अपनी अनूठी रचनात्मकता और वैज्ञानिक सोच से पूरे परिसर को मंत्रमुग्ध कर दिया।
एम.डी.डी.एम. कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग के बाहर अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर प्राचार्या डॉ. अलका जायसवाल, विभागाध्यक्ष डॉ. श्वेता यादव एवं अन्य शिक्षिकाओं के साथ हाथों में नए पौधे थामे जागरूक छात्राएं, जो धरती को हरा-भरा बनाने और ‘लोकल एक्शन’ का संदेश दे रही हैं।
वनस्पति विभाग में गूंजी पर्यावरण की गूंज, हुआ महा-पौधारोपण
कार्यक्रम का धमाकेदार आगाज वनस्पति विज्ञान विभाग में प्राचार्या डॉ. अलका जायसवाल की अध्यक्षता में हुआ। प्राचार्या ने स्वयं अपने हाथों से पौधारोपण कर छात्राओं को यह कड़ा संदेश दिया कि हर एक पौधा मानव जीवन के अस्तित्व की रक्षा की गारंटी है। इसके बाद छात्राओं के बीच चित्रांकन और ओजस्वी भाषण प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। शफ़, तनु, मरियम, ज्योति, अनुष्का, नंदिनी, अंजलि और तराना जैसी होनहार छात्राओं ने अपनी कला और वाणी के दम पर जैव विविधता संकट की भयावहता और उसके तात्कालिक समाधानों को बेबाकी से सामने रखा। वनस्पति विज्ञान विभाग की अध्यक्षा डॉ. श्वेता यादव ने स्वागत भाषण के जरिए पर्यावरण चेतना पर जोर दिया।
कॉलेज के गलियारे में सजी ‘जैव विविधता और उसका संरक्षण’ विषय पर आधारित पोस्टर्स प्रदर्शनी। छात्राओं द्वारा बनाए गए रंग-बिरंगे पोस्टरों और पक्षियों की विविधता के चार्ट्स का बारीकी से अवलोकन करतीं प्राचार्या एवं वरिष्ठ प्राध्यापिकाएं।
प्राणिशास्त्र विभाग में सजे पोस्टर, वैज्ञानिक चेतना ने खींचा ध्यान
दूसरी ओर, स्नातकोत्तर प्राणिशास्त्र विभाग में सजे वैज्ञानिक पोस्टरों ने आधुनिक दुनिया को प्रकृति के करीब आने की चेतावनी दी। विभागाध्यक्ष व कार्यक्रम संयोजक डॉ. अर्चना गुप्ता के कुशल निर्देशन में स्नातक और स्नातकोत्तर की छात्राओं ने रंग-बिरंगे और ज्ञानवर्धक पोस्टरों के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता के नुकसान से होने वाले खतरों और पारिस्थितिक स्थिरता को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया।
प्राणिशास्त्र विभाग (Department of Zoology) के सेमिनार कक्ष में मुख्य बैनर के सामने उपस्थित प्राचार्या डॉ. अलका जायसवाल, डॉ. अर्चना गुप्ता, डॉ. पल्लवी और अन्य शिक्षिकाएं, जो छात्राओं को पर्यावरण संकट के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
“किताबों से बाहर आकर करना होगा काम” — प्राचार्या
छात्राओं का हौसला बढ़ाते हुए प्राचार्या डॉ. अलका जायसवाल ने इस पहल को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा, “पर्यावरण संरक्षण अब केवल किताबों और नारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जब तक हमारी युवा पीढ़ी स्थानीय स्तर पर सक्रिय योगदान नहीं देगी, तब तक हम वैश्विक स्तर पर कोई बड़ा बदलाव नहीं देख पाएंगे।”
इस पूरे महा-आयोजन को सफल बनाने में आयोजन समिति की सदस्य डॉ. पल्लवी, डॉ. रचना, और डॉक्टर विभा रानी आदि शिक्षकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और छात्राओं का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम का समापन एक बेहद सार्थक शैक्षणिक संवाद के साथ हुआ। इस मौके पर भारी संख्या में कॉलेज की छात्राएं, विभिन्न विभागों के शिक्षक-शिक्षिकाएं और शिक्षकेतर कर्मचारी मुस्तैद रहे।
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