Saturday, September 12, 2026

6 करोड़ बिहारवासियों का बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड, बीमारियों के गंभीर होने से पहले घर-घर जाकर होगी मुफ्त जांच

मुजफ्फरपुर / पटना: राज्य सरकार ने बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक क्रांति की शुरुआत की है। आम लोगों को गंभीर बीमारियों के खतरे से बचाने और स्वास्थ्य सुविधाओं को सीधे उनके दरवाजे तक पहुंचाने के उद्देश्य से जांच एवं उपचार-चिकित्सा आपके द्वार महाअभियान का शंखनाद किया गया है। पटना स्थित ऊर्जा ऑडिटोरियम से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस राज्यव्यापी अभियान का शुभारंभ किया और प्रदेश के सभी 38 जिलों के लिए जागरूकता रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

यह विशेष अभियान 02 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक पूरे राज्य में संचालित किया जाएगा। इस महाअभियान का मुख्य लक्ष्य बिहार के 6 करोड़ नागरिकों की हेल्थ स्क्रीनिंग करना और उनका डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड तैयार करना है।

पटना स्थित ऊर्जा ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान 38 जिलों के लिए स्वास्थ्य जागरूकता रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उप मुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव व अन्य।

घर-घर पहुंचेंगे स्वास्थ्यकर्मी, 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों पर विशेष फोकस

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को बीमारी के गंभीर होने का इंतजार करने के बजाय समय रहते उसकी पहचान और उपचार सुनिश्चित करना है। उन्होंने जोर देकर कहा, जांच इसलिए कराएं ताकि आप बीमार ही न पड़ें। बीमारी की पहचान समय पर होगी, तभी सही और प्रभावी इलाज संभव हो सकेगा।”

अभियान के तहत 30 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी नागरिकों की नि:शुल्क स्क्रीनिंग की जाएगी। स्वास्थ्यकर्मी सीधे घर-घर जाकर प्राथमिक जांच एवं स्वास्थ्य परामर्श देंगे। आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर से लेकर जिला अस्पताल तक संपूर्ण इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

इन गंभीर बीमारियों की होगी नि:शुल्क स्क्रीनिंग:

  1. मधुमेह (डायबिटीज)
  2. उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर)
  3. सामान्य कैंसर
  4. हृदय रोग
  5. सांस एवं फेफड़ों से संबंधित रोग
  6. फैटी लिवर

स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़े बदलाव और नए कीर्तिमान

राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार:

  • रेफरल मामलों में आई कमी: जिला एवं अनुमंडल अस्पतालों में पहले जहां 36 प्रकार की बीमारियों की सर्जरी होती थी, अब उसे बढ़ाकर 45 प्रकार की बीमारियों की सर्जरी कर दिया गया है।
  • सर्जरी के आंकड़ों में उछाल: जून माह में जहां जिला अस्पतालों में केवल 2428 ऑपरेशन हुए थे, वहीं यह संख्या अब बढ़कर 8000 से अधिक हो गई है।
  • एनीमिया मुक्त अभियान: राज्य में 1 करोड़ लोगों की एनीमिया जांच का लक्ष्य रखा गया है।

मिशन कायाकल्पसे सुधरेंगे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र

प्राथमिक स्तर की स्वास्थ्य व्यवस्था को अत्याधुनिक और मजबूत बनाने के लिए मिशन कायाकल्प लाया जाएगा। इसके माध्यम से पीएचसी (PHC), एपीएचसी (APHC) और सब-सेंटरों की व्यवस्थाओं को पूरी तरह से दुरुस्त और बेहतर किया जाएगा, जिससे ग्रामीण इलाकों के लोगों को उनके घर के समीप ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा मिल सके।

पैरामेडिकल छात्रों को मिलेगा विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े मानव संसाधन को सशक्त बनाने के लिए नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे युवाओं को न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।

मुजफ्फरपुर में ‘जांच एवं उपचार-चिकित्सा आपके द्वार’ कार्यक्रम का शुभारंभ करते जिलाधिकारी कुमार गौरव, जनप्रतिनिधिगण एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी।

जिलाधिकारियों को सख्त मॉनिटरिंग के निर्देश

मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस विशेष अभियान की नियमित मॉनिटरिंग करें ताकि अभियान का उद्देश्य शत-प्रतिशत पूरा हो सके। उन्होंने बिहार की जनता से अपील करते हुए कहा कि स्वस्थ परिवार ही समृद्ध बिहार की आधारशिला है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकसित भारत’ और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ‘समृद्ध बिहार’ के सपने को साकार करने के लिए सभी नागरिक इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लें और अपने परिवार के 30 वर्ष से अधिक उम्र के सदस्यों की स्वास्थ्य जांच अवश्य करवाएं।

इस गरिमामयी कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उप मुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, स्वास्थ्य मंत्री निशांत, स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, राज्य स्वास्थ्य समिति के प्रबंध निदेशक अमित कुमार पाण्डेय सहित कई वरीय अधिकारी, सांसद, विधायक, जिलाधिकारी एवं स्वास्थ्यकर्मी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे।

अन्‍य खबरों  के लिए नीचे  ’न्‍यूज भारत टीवी ’ के लिंक पर क्लिक करें ,

||  https://newsbharattv.in  ||

शहादत भूमि की पवित्र मिट्टी से रचेगा इतिहास: 5 सितम्बर को गूंजेगा शोषितों का नारा, अमर शहीद जगदेव बाबू की प्रतिमा का केशोपुर में होगा भव्य शिलान्यास!

सकरा (मुजफ्फरपुर ): समाजवादी विचारधारा के क्रांतिकारी पुरोधा अमर शहीद जगदेव प्रसाद के 52वें शहादत दिवस पर केशोपुर पंचायत स्थित हनुमान मंदिर के प्रांगण में एक विशाल ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन होने जा रहा है। इस भव्य अवसर पर अमर शहीद जगदेव बाबू की प्रतिमा अनावरण के लिए शिलान्यास किया जाएगा। शिलान्यास समारोह को लेकर क्षेत्र में खासा उत्साह और हलचल देखी जा रही है।

केशोपुर पंचायत में आयोजित होने वाले अमर शहीद जगदेव प्रसाद के 52वें शहादत दिवस एवं प्रतिमा शिलान्यास कार्यक्रम का जारी आमंत्रण पत्र।

कुर्था से आएगी शहादत भूमि की मिट्टी : आयोजकों से मिली जानकारी के अनुसार, शिलान्यास का यह विशेष कार्यक्रम दोपहर 1:30 बजे आयोजित होगा। कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि शिलान्यास का कार्य जगदेव प्रसाद की शहादत भूमि यानी कुर्था प्रखंड, अरवल की पवित्र मिट्टी आने के पश्चात संपन्न किया जाएगा। इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने के लिए क्षेत्र के आम नागरिकों, शोषितों और वंचितों को बढ़-चढ़कर भाग लेने का निमंत्रण दिया गया है।

नारों से गूंजेगा प्रांगण : कार्यक्रम के माध्यम से जगदेव बाबू के उन क्रांतिकारी विचारों को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया जाएगा, जिन्होंने समाज में समता और अधिकार की अलख जगाई थी। ‘सौ में नब्बे शोषित हैं, नब्बे भाग हमारा है’ और ‘पहली पीढ़ी के लोग मारे जाएंगे, दूसरी पीढ़ी के लोग जेल जाएंगे, तीसरी पीढ़ी के लोग राज करेंगे’ जैसे नारों के साथ कार्यक्रम स्थल पर जगदेव बाबू के विचारों की वैचारिक हुंकार भरी जाएगी।

आयोजक मंडल जगदेव विचार मंच सकरा ने क्षेत्र के सभी बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम जनों से अपील की है कि वे अमर शहीद जगदेव बाबू के शहादत दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित होकर उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करें।

अन्‍य खबरों  के लिए नीचे  ’न्‍यूज भारत टीवी ’के लिंक पर क्लिक करें,

||  https://newsbharattv.in  ||

भूमाफियाओं पर चुप्पी, गरीबों पर गर्जा बुलडोजर! ताजपुर में फूटा आक्रोश, 3 को एसडीओ दफ्तर का घेराव

ताजपुर/समस्तीपुर (2 सितंबर 2026): प्रशासन का दोहरा रवैया अब जनआक्रोश का रूप ले चुका है। एक तरफ जहां ताजपुर की कीमती सरकारी जमीनों और सड़कों पर दबंगों तथा भूमाफियाओं का अवैध कब्जा कायम है और प्रशासन बेबस नजर आ रहा है, वहीं दूसरी तरफ मुसहर व गरीब दलित बस्तियों के आशियानों को उजाड़ने के लिए धड़ाधड़ बुलडोजर चलाए जा रहे हैं। प्रशासन की इस तानाशाही और गरीबों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ भाकपा माले ने मोर्चा खोल दिया है। आगामी 3 सितंबर को समस्तीपुर अनुमंडलाधिकारी (एसडीओ) कार्यालय का घेराव और जोरदार प्रदर्शन करने की तैयारियां पूरी गति से जारी हैं।

ताजपुर की मुसहरी बस्ती में बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ 3 सितंबर को होने वाले एसडीओ कार्यालय प्रदर्शन की सफलता के लिए ग्रामीणों से संवाद करते भाकपा माले नेता।

दर्जनों मुसहरी बस्तियों में गरजे नेता, नुक्कड़ सभाओं से हुंकार

बुधवार को भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह, किसान नेता ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, मनोज कुमार सिंह और सामाजिक कार्यकर्ता अनिल कुमार सिंह के संयुक्त नेतृत्व में ताजपुर की दर्जनों मुसहरी बस्तियों में नुक्कड़ सभाएं आयोजित की गईं। इस दौरान नेताओं ने दलित-गरीब बस्तियों में जाकर लोगों को गोलबंद किया और 3 सितंबर के विरोध प्रदर्शन में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की पुरजोर अपील की।

सभाओं को संबोधित करते हुए नेताओं ने ताजपुर अंचलाधिकारी (सीओ) आरती कुमारी पर सीधा हमला बोला और गंभीर आरोप लगाए। वक्ताओं ने कहा कि सीओ आरती कुमारी के शह पर मुसहरी क्षेत्रों में गरीबों की जमीनों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है। यही नहीं, जलनिकासी को बाधित करने के लिए खतरनाक डूबाऊ गड्ढे खोद दिए गए हैं और जननिकासी के मुख्य सरकारी बाहा (नाले) को मिट्टी से भर दिया गया है, जिससे बस्तियों में जलजमाव और नरकीय स्थिति बन गई है।

दबंगों के आगे पस्त, गरीबों पर चुस्त प्रशासन”

भाकपा माले नेताओं ने आरोप लगाया कि ताजपुर में सड़कों पर खुलेआम दबंगों का कब्जा है और दर्जनों एकड़ कीमती सरकारी जमीन भूमाफियाओं के चंगुल में है। सीओ आरती कुमारी को दबंगों से सरकारी जमीन खाली कराने की हिम्मत नहीं हो रही है, लेकिन जब बात गरीबों की झोपड़ियों की आती है, तो प्रशासन का बुलडोजर तुरंत निकल पड़ता है। माले नेताओं ने मांग की कि गरीबों के आशियाने उजाड़ने वाले अधिकारियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी सीओ पर सख्त कार्रवाई की जाए।

माले की मुख्य मांगें:

  1. मुसहर और अन्य दलित-गरीब बस्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई पर अविलंब रोक लगे।
  2. रैयती व सरकारी जमीन पर सालों से बसे गरीब परिवारों को वासगीत पर्चा, आवास और भूमि अधिकार मिले।
  3. सभी भूमिहीन परिवारों को रहने के लिए वासभूमि उपलब्ध कराई जाए।
  4. दलित-गरीब टोलों व मुसहरी बस्तियों के लिए पक्के पहुंचपथ (सड़क) का निर्माण कराया जाए।
  5. सरकारी नाले/बाहा को भरकर जलनिकासी बाधित करने वाले जिम्मेदारों पर कानूनी कार्रवाई हो।

3 सितंबर को बस स्टैंड से निकलेगा महाजुलूस

नुक्कड़ सभाओं के दौरान वक्ताओं ने घोषणा की कि अपने अधिकारों की रक्षा और शोषण के खिलाफ लड़ाई को तेज करने के लिए 3 सितंबर को सुबह 11 बजे समस्तीपुर शहर के सरकारी बस स्टैंड से एक विशाल जुलूस निकाला जाएगा। यह जुलूस शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए अनुमंडलाधिकारी कार्यालय पहुंचेगा, जहां जोरदार प्रदर्शन कर मांग पत्र सौंपा जाएगा।

अन्‍य खबरों  के लिए नीचे  ’न्‍यूज भारत टीवी ’ के लिंक पर क्लिक करें ,

||  https://newsbharattv.in  ||

हाई-टेक हुई मीठी गोलियों की ताकत: होम्योपैथिक रिसर्च और इलाज में एआई का बड़ा कदम!

  • राष्ट्रीय सेमिनार में जुटे देशभर के दिग्गज: सीसीआरएच और एनएचआरआईएमएच ने तैयार किया एआई का रोडमैप।
  • 9 बड़े मेडिकल कॉलेजों के साथ हुआ समझौता: मानसिक स्वास्थ्य और शोध को मिलेगी नई रफ्तार।

कोट्टायम / नई दिल्ली: पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में जब अत्याधुनिक तकनीक का समावेश होता है, तो स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक नए युग का सूत्रपात होता है। ऐसा ही एक क्रांतिकारी बदलाव भारत की सदियों पुरानी और विश्वसनीय होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति में देखने को मिल रहा है। केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएच), आयुष मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान (एनएचआरआईएमएच), कोट्टायम ने 31 अगस्त 2026 को “नैदानिक अभ्यास और होम्योपैथी में कृत्रिम मेधा (एआई) का अनुप्रयोग” विषय पर एक राष्ट्रीय सेमिनार का भव्य आयोजन किया। “बुद्धि और जुनून का संगम” थीम के तहत आयोजित इस ऐतिहासिक सेमिनार में स्वास्थ्य देखभाल और होम्योपैथिक अनुसंधान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उभरते अनुप्रयोगों पर देश के नामचीन विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, चिकित्सकों और छात्रों ने हिस्सा लिया और विस्तृत मंथन किया।

केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री ने बताया भविष्य का रोडमैप

केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने इस राष्ट्रीय सेमिनार को डिजिटल माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में एआई की बढ़ती प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए कहा कि होम्योपैथी के क्षेत्र में इसके जिम्मेदार और सटीक अनुप्रयोग पर व्यापक चर्चा समय की मांग है। उन्होंने जोर दिया कि तकनीक का सही उपयोग मरीजों की व्यक्तिगत देखभाल और सटीक दवा चयन में मील का पत्थर साबित होगा।

मानवीय देखरेख और कड़े नैतिक सुरक्षा उपाय अनिवार्य

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सीसीआरएच के महानिदेशक डॉ. सुभाष कौशिक ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा और अनुसंधान में एआई का लाभ उठाने के लिए इसकी विशाल क्षमताओं और नैतिक आयामों को गहराई से समझना होगा। सेमिनार में सर्वसम्मति से इस बात पर बल दिया गया कि होम्योपैथी में एआई के उपयोग के दौरान मानवीय देखरेख ,वैज्ञानिक पुष्टि , डेटा की विश्वसनीयता और कड़े नैतिक सुरक्षा उपाय सर्वोपरि होने चाहिए। एआई डॉक्टर का स्थान नहीं लेगा, बल्कि चिकित्सक के लिए एक बेहद सटीक ‘डिसीजन सपोर्ट सिस्टम’ के रूप में कार्य करेगा।

मानसिक स्वास्थ्य व शोध को बढ़ावा देने के लिए 9 बड़े एमओयू पर हस्ताक्षर

इस राष्ट्रीय सेमिनार की सबसे बड़ी उपलब्धि अनुसंधान और शैक्षणिक सहयोग का विस्तार रही। मनोरोग और मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में रिसर्च को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए देश के 9 प्रमुख होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के साथ ऐतिहासिक समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके साथ ही, अंतर-विषयक अनुसंधान और संस्थागत तालमेल को मजबूती देने के लिए सेवाभारती, एट्टुमानूर के साथ भी एक विशेष एमओयू किया गया।

देशभर के 12 से अधिक मेडिकल कॉलेजों की सहभागिता

एनएचआरआईएमएच के सहायक निदेशक (होम्योपैथी) एवं प्रभारी अधिकारी डॉ. देबदत्त नायक ने बताया कि इस सेमिनार में भारत भर के लगभग 12 होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ केरल के अग्रणी डॉक्टरों और संकाय सदस्यों ने भाग लिया।

कार्यक्रम को सीसीआरएच के उप महानिदेशक डॉ. के. सी. मुरलीधरन, राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के चिकित्सा मूल्यांकन एवं रेटिंग बोर्ड (एमएआरबी) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. जनार्दनन नायर और एनएचआरआईएमएच की क्षेत्रीय वैज्ञानिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) ईश्वर दास ने भी संबोधित किया। तकनीकी सत्रों के दौरान एआई-संचालित क्लीनिकल निर्णय, शोध की नैतिक सीमाओं और तकनीकी अनुप्रयोगों पर वैज्ञानिकों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।

होम्योपैथी में एआई का क्या पड़ेगा प्रभाव?

  1. सटीक दवा चयन : होम्योपैथी में हर मरीज के शारीरिक और मानसिक लक्षणों के आधार पर दवा तय होती है। एआई लाखों मरीजों के डेटा का विश्लेषण कर चिकित्सक को मिनटों में सबसे सटीक होम्योपैथिक दवा चुनने में मदद करेगा।
  2. मानसिक रोगों का त्वरित निदान: एनएचआरआईएमएच द्वारा किए जा रहे प्रयासों से न्यूरोलॉजिकल और मानसिक स्वास्थ्य विकारों के पैटर्न को शुरुआती स्तर पर पकड़ना आसान होगा।
  3. वैज्ञानिक पुष्टि और वैश्विक मान्यता: एआई की मदद से होम्योपैथिक दवाओं के प्रभाव, क्लीनिकल ट्रायल्स और मौलिक अनुसंधान का डेटा पारदर्शी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया जा सकेगा।

अन्‍य खबरों  के लिए नीचे  ’न्‍यूज भारत टीवी ’ के लिंक पर क्लिक करें ,

||  https://newsbharattv.in  ||

रेल प्रशासन के खिलाफ गरजा समस्तीपुर मंडल, बांहों पर काली पट्टी बांध मैदान में उतरे सैकड़ों रेलकर्मी!

ईसीआरईयू के आह्वान पर पूरे मंडल में मनाया गया काला दिवस‘, ओपीएस बहाली और खाली पड़े पदों को भरने की मांग को लेकर रेल कर्मचारियों ने किया आर-पार की जंग का ऐलान

समस्तीपुर (विशेष संवाददाता)। ईस्ट सेंट्रल रेलवे एम्प्लॉइज यूनियन (ईसीआरईयू) के केंद्रीय नेतृत्व के आह्वान पर और संजीव कुमार मिश्र के कुशल नेतृत्व में 1 सितंबर 2026 को समस्तीपुर रेल मंडल में कर्मचारियों के गुस्से का प्रचंड रूप देखने को मिला। रेल प्रशासन की कर्मचारी विरोधी नीतियों, पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली और लंबे समय से खाली पड़े पदों को न भरने के रवैये के खिलाफ पूरे मंडल के सभी कार्यस्थलों व शाखाओं पर कर्मचारियों ने बांहों पर काली पट्टी बांधकर ‘काला दिवस’ मनाया और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

समस्तीपुर रेल मंडल में लोको शेड और विभिन्न शाखाओं के कर्मचारी बांहों पर काली पट्टी बांधकर रेल प्रशासन की नीतियों के खिलाफ विरोध जताते हुए।

विभिन्न शाखाओं में दिखा एकजुटता का अभूतपूर्व नजारा

मंडल भर के सभी प्रमुख स्टेशनों, वर्कशॉपों और दफ्तरों में यूनियन के पदाधिकारियों के मार्गदर्शन में विरोध प्रदर्शन का सफल आयोजन किया गया:

  • लोको शेड शाखा: लोको शेड शाखा सचिव सह मंडल संयुक्त सचिव ईसीआरईयू सोहन कुमार यादव के नेतृत्व में शेड के रेलकर्मियों ने काली पट्टी बांधकर अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की।
  • दरभंगा शाखा: राकेश पासवान की अगुवाई में दरभंगा स्टेशन और कार्यस्थलों पर कर्मचारियों ने एकजुट होकर रेल प्रशासन के ढुलमुल रवैये पर कड़ा विरोध जताया।
  • हेडक्वार्टर शाखा: खगेश के नेतृत्व में समस्तीपुर मंडल मुख्यालय परिसर में कर्मचारियों ने इकट्ठा होकर अपनी आवाज बुलंद की।
  • मोतिहारी शाखा: बृजमोहन की देखरेख में शाखा स्तर पर कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया।
  • नरकटियागंज शाखा: अविनाश के नेतृत्व में रेलकर्मियों ने बांह पर बिल्ला व काली पट्टी लगाकर ‘काला दिवस’ मनाया।
  • सहरसा एवं सुपौल क्षेत्र: चंदन के नेतृत्व में सहरसा शाखा और आसपास के क्षेत्रों में रेल कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर अपना आक्रोश जताया।
  • आउटडोर शाखा: आउटडोर शाखा के प्रतिनिधियों और कर्मचारियों ने भी अपनी ड्यूटी के दौरान काली पट्टी बांधकर सक्रिय भागीदारी निभाई।

मांगे पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन होगा और तेज: संजीव कुमार मिश्र

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए संजीव कुमार मिश्र ने कहा कि रेल प्रशासन और सरकार लगातार कर्मचारियों के न्यायसंगत अधिकारों की अनदेखी कर रही है। पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली, रेलवे में खाली पड़े लाखों पदों को तत्काल भरने और कार्यस्थलों पर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने जैसी अति-महत्वपूर्ण मांगों पर प्रशासन का रवैया पूरी तरह उदासीन बना हुआ है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि रेलकर्मियों की न्यायसंगत मांगों को जल्द से जल्द पूरा नहीं किया गया, तो ईसीआरईयू का यह संघर्ष आने वाले दिनों में और अधिक उग्र एवं चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।

सुपौल स्टेशन पर ईसीआरईयू के बैनर तले काली पट्टी और विरोध बिल्ला लगाकर ‘काला दिवस’ मनाते रेलकर्मी।
कंट्रोल रूम व रिले रूम कार्यस्थल पर ड्यूटी के दौरान भी काली पट्टी बांधकर अपना आक्रोश व्यक्त करते रेलवे कर्मचारी।

अन्‍य खबरों  के लिए नीचे  ’न्‍यूज भारत टीवी ’ के लिंक पर क्लिक करें ,

||  https://newsbharattv.in  ||

75 हजार रिश्वत लेते फुल्लीडूमर बीडीओ अमित प्रताप सिंह और मामा बच्चन कुमार सिंह रंगे हाथ गिरफ्तार!

15वीं वित्त की योजनाओं की मंजूरी के बदले मांगी थी घूस, नेहरू कॉलोनी स्थित किराए के मकान से दबोचे गए

बांका/पटना :01 सितंबर, 2026:  बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की ताबड़तोड़ कार्रवाई जारी है। इसी कड़ी में मंगलवार को निगरानी विभाग की विशेष टीम ने बांका जिले में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए फुल्लीडूमर के प्रखण्ड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) अमित प्रताप सिंह और उनके सगे मामा बच्चन कुमार सिंह को 75,000 (पचहत्तर हजार) रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई बांका थाना क्षेत्र स्थित नेहरू कॉलोनी में बीडीओ के किराए के मकान में की गई।

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की गिरफ्त में लाल घेरे में खड़े फुल्लीडूमर बीडीओ अमित प्रताप सिंह (दाएं) और उनके मामा बच्चन कुमार सिंह (बायें) साथ में निगरानी विभाग की धावादल टीम।

26 कार्य योजनाओं की स्वीकृति के एवज में मांगी थी रिश्वत

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से मिली जानकारी के अनुसार, बेलहर थाना क्षेत्र के ग्राम बदलाचक, पोस्ट- धनकुडिया निवासी परिवादी गौतम प्रकाश (पिता- स्व. जय प्रकाश नारायण राय) ने इस संबंध में पटना स्थित निगरानी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। गौतम प्रकाश का आरोप था कि प्रखण्ड विकास पदाधिकारी अमित प्रताप सिंह 15वीं वित्त आयोग की राशि से फुल्लीडूमर प्रखण्ड में स्वीकृत होने वाली 26 कार्य योजनाओं के अनुमोदन और क्रियान्वयन के एवज में उनसे रिश्वत की मांग कर रहे हैं।

सत्यापन के बाद बिछाया गया जाल

शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने मामले का गोपनीय सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगे जाने का आरोप सही पाया गया। प्रथम दृष्टया मामला सत्य पाए जाने पर निगरानी थाना कांड संख्या- 102/26 (दिनांक 21.08.2026) दर्ज किया गया। इसके बाद अनुसंधानकर्ता विनोद कुमार (पुलिस निरीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो) के अनुरोध पर पुलिस उपाधीक्षक श्याम बाबू प्रसाद के नेतृत्व में एक धावादल (ट्रैप टीम) का गठन किया गया।

मंगलवार को जैसे ही परिवादी गौतम प्रकाश रिश्वत की राशि 75,000 रुपये देने नेहरू कॉलोनी स्थित बीडीओ के किराए के घर पहुंचे, वहां पहले से मुस्तैद निगरानी की टीम ने बीडीओ अमित प्रताप सिंह और उनके मामा बच्चन कुमार सिंह को पैसे लेते हुए दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद दोनों अभियुक्तों से पूछताछ की जा रही है और आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी कर उन्हें विशेष न्यायालय (निगरानी), भागलपुर में उपस्थापित किया जाएगा।

वर्ष 2026 में निगरानी का 94वां ट्रैप, 95 अभियुक्त गिरफ्तार

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में भ्रष्टाचार के खिलाफ दर्ज यह 102वीं प्राथमिकी (एफआईआर) है। चालू वर्ष में यह 94वां ट्रैप कांड है, जिसके तहत अब तक कुल 95 भ्रष्ट अधिकारियों व कर्मियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया जा चुका है।

इस वर्ष अब तक रिश्वत की कुल बरामद राशि 35,09,800/- (पैंतीस लाख नौ हजार आठ सौ) रुपये तथा 37,000 रुपये मूल्य की एक नई वाशिंग मशीन भी जब्त की जा चुकी है।

तुलनात्मक आंकड़ों पर नजर डालें तो:

  • वर्ष 2025 में: कुल 101 ट्रैप कांड दर्ज किए गए थे और कुल 37,80,300 रुपये बरामद हुए थे। इस दौरान प्रति माह औसतन 8.4 ट्रैप केस दर्ज हुए।
  • वर्ष 2026 में: प्रति माह औसतन 11.8 ट्रैप कांड दर्ज किए गए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 40 प्रतिशत अधिक हैं।

जनता से अपील: घूस मांगने पर तुरंत करें शिकायत

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने आम जनता से अपील की है कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ इस अभियान में सहभागी बनें। यदि कोई भी लोक सेवक (सरकारी अधिकारी या कर्मी) किसी भी काम के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो बिना डरे समय पर इसकी सूचना निगरानी विभाग को दें।

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना (6 सर्कुलर रोड, पटना)

  • लैंडलाइन नंबर: 0612-2215030, 0612-2215032, 0612-2215033, 0612-2215036, 0612-2215037, 0612-2999752
  • हेल्पलाइन (24 घंटे): 0612-2215344
  • मोबाइल नंबर: 7765953261
  • व्हाट्सएप नंबर: 9473494167
  • ई-मेल: spvig-bih@nic.in

अन्‍य खबरों  के लिए नीचे  ’न्‍यूज भारत टीवी ’ के लिंक पर क्लिक करें ,

||  https://newsbharattv.in  ||

मुजफ्फरपुर में 12 सितंबर को सजेगी राष्ट्रीय लोक अदालत, मुकदमों का होगा हाथों-हाथ महा-निटारा!

मुजफ्फरपुर । वर्षों से कोर्ट-कचहरी और मुकदमों के फेर में फंसे लोगों के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार, मुजफ्फरपुर के तत्वाधान में आगामी 12 सितंबर 2026 (शनिवार) को मुजफ्फरपुर व्यवहार न्यायालय (सिविल कोर्ट) के एडीआर भवन प्रांगण में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन होने जा रहा है।प्राधिकार से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, लोक अदालत की कार्यवाही सुबह 10:30 बजे से शुरू होगी। इस महा-अभियान का मुख्य उद्देश्य आपसी सहमति और सौहार्दपूर्ण वातावरण में वर्षों से लंबित मामलों का तुरंत निस्तारण करना है।

12 सितंबर 2026 को मुजफ्फरपुर व्यवहार न्यायालय प्रांगण स्थित एडीआर भवन में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत का आधिकारिक सूचना पोस्टर।

इन मामलों का मौके पर ही होगा समाधान:

राष्ट्रीय लोक अदालत में मुकदमे से पूर्व के मामले (प्री-लिटिगेशन) और अदालतों में वर्षों से लंबित पड़े विभिन्न प्रकार के वादों का निष्पादन किया जाएगा:

  1. आपराधिक एवं एनआई एक्ट मामले: संधि-योग्य (कंपाउंडेबल) लघु आपराधिक मामले तथा एनआई एक्ट की धारा 138 (चेक बाउंस) से संबंधित विवाद।
  2. बिजली, पानी व बिल संबंधी विवाद: बिजली, पानी और माप-तौल से जुड़े मामले (गैर-शमनीय यानी नॉन-कंपाउंडेबल को छोड़कर)।
  3. दुर्घटना एवं श्रम विवाद: मोटर वाहन दुर्घटना दावा (एमएसीटी), श्रम संबंधी विवाद और बैंक धन वसूली वाद।
  4. पारिवारिक व सेवा मामले: भरण-पोषण (मेंटेनेंस), वैवाहिक विवाद (तलाक को छोड़कर), सेवा संबंधी मामले (वेतन, भत्ता, सेवानिवृत्ति लाभ)।
  5. दीवानी व राजस्व मामले: सिविल सूट, भूमि अधिग्रहण, राजस्व वाद, किराया, सुखाधिकार तथा विनिर्दिष्ट कार्य वाद (स्पेसिफिक परफॉर्मेंस सूट्स)।

लोक अदालत के बड़े फायदे:

  • त्वरित न्याय: दोनों पक्षों की आपसी बातचीत से मुकदमों का तुरंत निपटारा होता है।
  • अदालती डिग्री की मान्यता: लोक अदालत द्वारा पारित फैसले (अवॉर्ड) की कानूनी मान्यता सिविल कोर्ट की डिग्री के बराबर होती है।
  • कोर्ट फीस वापसी: यदि मामले में कोई न्याय शुल्क (कोर्ट फीस) जमा की गई होगी, तो निस्तारण के उपरांत वह नियमानुसार वापस कर दी जाती है।
  • कोई अपील नहीं: इस फैसले के खिलाफ आगे कोई अपील नहीं होती, जिससे दोनों पक्षों के बीच का मनमुटाव हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है।

तुरंत कहां करें संपर्क?

जो भी व्यक्ति अपने मामलों का परस्पर वार्ता के आधार पर समाधान कराना चाहते हैं, वे तुरंत निम्नलिखित स्थानों पर संपर्क कर सकते हैं:

  • सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, व्यवहार न्यायालय परिसर, मुजफ्फरपुर।
  • संबंधित अनुमंडल विधिक सेवा समिति के सचिव।
  • संबंधित विभाग / बैंक / इंश्योरेंस कंपनी / बिजली कंपनी।
  • संबंधित न्यायालय या न्यायाधिकरण जहां मामला वर्तमान में लंबित है।
  • सचिव, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, पटना उच्च न्यायालय परिसर, पटना।
  • बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, बुद्ध मार्ग, पटना।

जिला प्रशासन, मुजफ्फरपुर एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकार, मुजफ्फरपुर ने आम जनता से अपील की है कि वे इस राष्ट्रीय लोक अदालत का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और वर्षों पुराने विवादों का शांतिपूर्ण समाधान कर तनावमुक्त जीवन जिएं।

अन्‍य खबरों  के लिए नीचे  ’न्‍यूज भारत टीवी ’ के लिंक पर क्लिक करें ,

||  https://newsbharattv.in  ||

बिहार में खुलेगा नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) का नया कैंपस, रंगकर्मियों में खुशी की जबरदस्त लहर!

अब अभिनय और थिएटर की बारीकियां सीखने दिल्ली नहीं जाएंगे राज्य के होनहार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अनुरोध पर केंद्र ने दी मंजूरी; बिहार सरकार देगी मुफ्त जमीन और 50 प्रतिशत निर्माण लागत

पटना, 01 सितंबर 2026 : बिहार के सांस्कृतिक इतिहास में आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। राज्य के युवाओं और रंगकर्मियों की बरसों पुरानी मुराद पूरी करते हुए केंद्र सरकार ने बिहार में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा – NSD) के नए कैंपस की स्थापना को अपनी आधिकारिक सहमति प्रदान कर दी है। केंद्र सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले की खबर मिलते ही राज्यभर के रंगकर्मियों, नाट्य प्रेमियों और युवा कलाकारों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के विशेष अनुरोध पर केंद्र सरकार ने यह बड़ा फैसला लिया है। इस मील के पत्थर जैसे निर्णय पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रति राज्य की जनता की ओर से हार्दिक आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य का यह समन्वित प्रयास बिहार की समृद्ध नाट्य और प्रदर्शन कला परंपरा को न केवल राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान देगा, बल्कि अपार नई संभावनाएं भी पैदा करेगा।

सांस्कृतिक विरासत को मिलेगी संस्थागत मजबूती

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध, विविधतापूर्ण और गौरवशाली रही है। यह महान महाकवि कालिदास, साहित्यकार रामवृक्ष बेनीपुरी और लोक नाट्य के जनक भिखारी ठाकुर जैसी विभूतियों की पावन कर्मभूमि रही है। बिहार के लोक नाट्य और प्रदर्शन कलाओं की अपनी एक विशिष्ट पहचान है। ऐसे में राज्य में एनएसडी का नया कैंपस खुलने से इस सांस्कृतिक विरासत को मजबूत संस्थागत आधार और संरक्षण मिलेगा।

युवा कलाकारों का पलायन रुकेगा, राज्य में ही मिलेगा विश्वस्तरीय प्रशिक्षण

अब तक बिहार के प्रतिभाशाली युवाओं को अभिनय, स्टेजक्राफ्ट, लाइट-साउंड डिजाइनिंग, डायरेक्शन और थिएटर के विभिन्न विषयों में पेशेवर प्रशिक्षण (प्रोफेशनल ट्रेनिंग) प्राप्त करने के लिए दिल्ली या देश के अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। लेकिन बिहार में एनएसडी कैंपस की स्थापना होने के बाद युवाओं का दूसरे राज्यों में जाने का पलायन काफी कम हो जाएगा। उन्हें अपने ही राज्य में अभिनय और प्रदर्शन कला के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे उन्नत अनुसंधान और शोध (रिसर्च) के नए रास्ते खुलेंगे।

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा – एनएसडी) का दिल्ली स्थित ऐतिहासिक परिसर, जिसकी तर्ज पर अब बिहार में भी नया अत्याधुनिक कैंपस स्थापित होने जा रहा है।

50 प्रतिशत खर्च और जमीन देगी बिहार सरकार

एनएसडी कैंपस की स्थापना प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए बिहार सरकार अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रही है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य सरकार संस्थान के निर्माण के लिए सर्वसुविधायुक्त उपयुक्त भूमि (जमीन) उपलब्ध कराएगी। इसके साथ ही, भवन निर्माण की स्वीकृत कुल लागत का 50 प्रतिशत हिस्सा (राज्यांश) बिहार सरकार खुद वहन करेगी। राज्य सरकार की ओर से सभी प्रशासनिक स्वीकृतियों और कार्यों में पूर्ण सहयोग दिया जा रहा है ताकि संस्थान का निर्माण कार्य अविलंब शुरू हो सके।

लोक नाट्य और आधुनिक थिएटर का ऐतिहासिक संगम

सरकार का मानना है कि एनएसडी के आगमन से बिहार की पारंपरिक लोक नाट्य कलाओं और आधुनिक थिएटर के बीच एक मजबूत समन्वय स्थापित होगा। बिहार की समृद्ध लोक कलाओं, पारंपरिक नाट्य शैलियों और आधुनिक थिएटर तकनीकों को एक साथ आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा। इससे स्थानीय परंपराएं सुरक्षित होकर नई पीढ़ी तक पहुंचेंगी और उन्हें राष्ट्रीय मंच पर स्थापित होने में मदद मिलेगी।

तैयार होगी थिएटर की नई पीढ़ी

राज्य सरकार ने नाट्य कलाओं के संरक्षण, संवर्धन और समन्वय के उद्देश्य से पहले ही बिहार संगीत नाट्य अकादमी की स्थापना की है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर के इस प्रतिष्ठित संस्थान (एनएसडी) की मौजूदगी राज्य के चल रहे प्रयासों को और अधिक धार देगी। इससे बिहार में थिएटर की एक पूरी नई पेशेवर पीढ़ी तैयार होगी और स्थानीय कलाकारों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का सीधा अवसर मिलेगा।

मुख्यमंत्री का संदेश:

बिहार में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय का कैंपस खुलना केवल एक नए शैक्षणिक संस्थान की स्थापना नहीं है, बल्कि यह राज्य की सांस्कृतिक विरासत, युवा प्रतिभाओं और आधुनिक रंगमंच के भविष्य में एक महत्वपूर्ण निवेश है। केंद्र और बिहार सरकार के समन्वित प्रयास से यह संस्थान राज्य को राष्ट्रीय रंगमंच के मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित करेगा।” सम्राट चौधरी, मुख्यमंत्री, बिहार

अन्‍य खबरों  के लिए नीचे  ’न्‍यूज भारत टीवी ’ के लिंक पर क्लिक करें ,

||  https://newsbharattv.in  ||

बिहार के लिए ऐतिहासिक महाप्लान! बाढ़-सुखाड़ का खेल खत्म, 16000 करोड़ से ज्यादा की परियोजनाओं पर दिल्ली में महामंथन

पटना/नई दिल्ली, 31 अगस्त 2026: उत्तर बिहार में हर साल तबाही मचाने वाली बाढ़ और दक्षिण बिहार का सुखाड़ अब इतिहास बनने जा रहा है। बिहार की बदहाली दूर करने और राज्य को बाढ़-सुखाड़ के दोहरे संकट से हमेशा के लिए उबारने के लिए एक ऐतिहासिक महाप्लान तैयार किया गया है। नई दिल्ली में आयोजित एक बेहद अहम बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मुलाकात कर बिहार की जल प्रबंधन, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी लंबित और भावी योजनाओं को तेजी से लागू करने पर गहन विचार-विमर्श किया।

नई दिल्ली में जल शक्ति मंत्रालय के बैठक कक्ष में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल को स्मृति चिन्ह भेंट करते उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी।

कोसी-मेची लिंक और लंबित योजनाओं के लिए दिल्ली से मदद की मांग

बैठक के दौरान राज्य सरकार की ओर से जानकारी दी गई कि केंद्रीय बजट 2024-25 में घोषित 11500 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के तहत बिहार सरकार ने कुल 16339.18 करोड़ रुपये की योजनाओं का विस्तृत रिपोर्ट (DPR) केंद्र सरकार को भेजा था। हालांकि इनमें से अभी तक केवल 2 परियोजनाओं को ही अंतिम स्वीकृति मिल सकी है।

विशेष रूप से 3652.56 करोड़ रुपये की लागत वाली ऐतिहासिक कोसी-मेची अंतरराज्यीय रिवर लिंक परियोजना पर जोर दिया गया। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य कोसी नदी के अतिरिक्त पानी का सही उपयोग कर उत्तर बिहार के विशाल कृषि क्षेत्र में सिंचाई की क्रांति लाना है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 395.41 करोड़ रुपये और 2026-27 के लिए 570 करोड़ रुपये (कुल 965.41 करोड़ रुपये) का प्रावधान किया गया था, लेकिन अब तक केवल 156.745 करोड़ रुपये ही राज्य को प्राप्त हुए हैं। बैठक में प्रथम चरण की बकाया राशि तुरंत जारी करने और द्वितीय चरण के डीपीआर को तुरंत मंजूरी देने का पुरजोर आग्रह किया गया।

इसके अलावा 125.08 करोड़ रुपये की सिकरहना दायां तटबंध निर्माण योजना, जिसकी संस्तुति पहले ही की जा चुकी है, के लिए भी केंद्रीय राशि तुरंत विमुक्त करने की मांग रखी गई। वर्तमान में सिंचाई क्षेत्र की 5951.45 करोड़ रुपये की 3 और बाढ़ प्रबंधन क्षेत्र की 3896.14 करोड़ रुपये की 15 परियोजनाएं जल शक्ति मंत्रालय के विचार-विमर्श स्तर पर अटकी हुई हैं।

आगामी बजट 2026-27 के लिए बिहार का 3 बड़ा मास्टर प्लान

बैठक में आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 के लिए 3 बेहद महत्वपूर्ण परियोजनाओं को शामिल करने का प्रस्ताव प्रमुखता से रखा गया:

  1. इंद्रपुरी जलाशय परियोजना: सोन नहर प्रणाली को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करने वाली इस बहुप्रतीक्षित योजना का रास्ता बिहार और झारखंड के बीच पानी के बंटवारे पर समझौता ज्ञापन (MoU) बनने के बाद साफ हो चुका है।
  2. सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना: इस योजना के तहत सोन नदी के जल को पाइपलाइन और नहरों के नेटवर्क से फल्गु नदी तक पहुंचाया जाएगा। इससे गयाजी और औरंगाबाद के सूखाग्रस्त इलाकों को पर्याप्त पानी मिलेगा और पवित्र फल्गु नदी में पूरे 12 महीने पानी का प्रवाह बना रहेगा।
  3. सारण जिला बाढ़ नियंत्रण एवं जलनिकासी परियोजना (फेज-1): 1350.95 करोड़ रुपये की इस योजना से मुख्य जलनिकासी नालों का जीर्णोद्धार होगा। इससे कृषि भूमि की सुरक्षा के साथ-साथ प्रस्तावित सोनपुर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और एयरोसिटी को बाढ़ से सुरक्षा मिलेगी।

पश्चिमी कोसी नहर का 8338 करोड़ का जीर्णोद्धार

बजट 2025-26 में शामिल पश्चिमी कोसी नहर परियोजना के विस्तार और आधुनिकीकरण  के लिए बिहार सरकार ने 8338.89 करोड़ रुपये का डीपीआर केंद्रीय जल आयोग को भेजा है। केंद्र से हरी झंडी और राशि का इंतजार किए बिना बिहार सरकार ने अपने सीमित संसाधनों से 3484.24 करोड़ रुपये की लागत से प्रथम चरण का काम शुरू भी कर दिया है। बैठक में इसकी औपचारिक मंजूरी और वित्तीय सहायता जल्द देने का आग्रह किया गया।

नेपाल सीमा विवाद, फराक्का बराज और राष्ट्रीय गाद नीति

बैठक में बाढ़ की स्थाई रोकथाम के लिए नेपाल से जुड़ी लंबित परियोजनाओं — कोसी हाई डैम, कमला बहुउद्देशीय परियोजना और बागमती बांध परियोजना के सर्वेक्षण और डीपीआर कार्य में तेजी लाने का मुद्दा गरमाया रहा। संयुक्त परियोजना कार्यालय (JPO) में बिहार के प्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ाने पर बल दिया गया।

साथ ही फराक्का बराज तथा भारत-बांग्लादेश जल संधि के कारण बिहार की नदियों में जमा हो रही गाद (सिल्ट) की विकराल समस्या की ओर केंद्र का ध्यान आकर्षित किया गया। बिहार ने मांग की कि गंगा नदी में गाद की समस्या से निपटने के लिए एक राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति बनाई जाए और इसके लिए अलग से एक समर्पित कोष गठित किया जाए। इसके साथ ही गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग (GFCC) के अध्यक्ष का मुख्यालय पटना में ही बनाए रखने पर अडिग रुख अपनाया गया, क्योंकि बिहार देश का सबसे ज्यादा बाढ़ प्रभावित (73 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र) राज्य है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विकास को मिलेगी नई रफ्तार

बैठक के अंत में विश्वास जताया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार बिहार के विकास को लगातार प्राथमिकता दे रही है। केंद्र और राज्य सरकार के साझा और समन्वित प्रयासों से इन सभी परियोजनाओं के पूरा होने पर बिहार के किसानों, ग्रामीण क्षेत्रों और पूरी अर्थव्यवस्था में एक नया क्रांति का अध्याय लिखा जाएगा।

अन्‍य खबरों  के लिए नीचे  ’न्‍यूज भारत टीवी ’ के लिंक पर क्लिक करें ,

||  https://newsbharattv.in  ||

25 सालों का सूखा खत्म! अमित शाह की मध्यस्थता से सोन नद जल विवाद सुलझा, बिहार-झारखंड में हुआ ऐतिहासिक समझौता

दिल्ली / पटना: पिछले 25 वर्षों से लंबित सोन नद जल बंटवारे का महाविवाद आखिरकार समाप्त हो गया है। केंद्र सरकार की सक्रिय पहल और गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में दिल्ली में आयोजित एक विशेष बैठक में बिहार और झारखंड के बीच ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए।इस ऐतिहासिक समझौते के तहत बिहार को 5.75 MAF (मिलियन एकड़ फीट) तथा झारखंड को 2.00 MAF जल आवंटित किया गया है। 25 वर्षों से चले आ रहे इस विवाद के सुलझने से दक्षिण बिहार और झारखंड के सूखा प्रभावित व पठारी इलाकों में सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक विकास का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में सोन नद जल बंटवारे के MOU पत्र का आदान-प्रदान करते बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन। साथ में मौजूद हैं बिहार के उप मुख्यमंत्री-सह-जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी०आर० पाटिल एवं अन्य।

जानिए पूरा विवाद और 1973 का बाणसागर समझौता

वर्ष 1973 के बाणसागर समझौते के तहत सोन नद के कुल 14.25 MAF जल में से मध्य प्रदेश को 5.25 MAF, उत्तर प्रदेश को 1.25 MAF तथा तत्कालीन अविभाजित बिहार को 7.75 MAF जल मिला था। लेकिन वर्ष 2000 में झारखंड के गठन के बाद 7.75 MAF जल के बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच तनातनी शुरू हो गई थी।

10 जुलाई 2025 को रांची में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की 27वीं बैठक में अमित शाह की अध्यक्षता में इस पर सहमति की नींव रखी गई थी, जिसे 31 अगस्त 2026 को अंतिम रूप दे दिया गया।

गयाजी और दक्षिण बिहार को मिलेगा सबसे बड़ा वरदान

समझौते के बाद सोन नद के पानी का सही इस्तेमाल करते हुए जलाशयों का निर्माण और बहुप्रतीक्षित सोन-फल्गु नदी जोड़ो परियोजना पर काम तेजी से शुरू होगा। फल्गु नदी में सालों भर पर्याप्त जल रहने से गयाजी में पितृपक्ष मेले के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को तर्पण और पिंडदान करने में भारी सुविधा होगी।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का विशेष आभार जताते हुए कहा कि यह केवल पानी का बंटवारा नहीं है, बल्कि दोनों राज्यों के बीच साझा विकास और विश्वास का नया दौर है।

मुख्य बिंदु:

  • बिहार को 5.75 MAF और झारखंड को 2.00 MAF जल का औपचारिक आवंटन।
  • 25 साल पुराना विवाद समाप्त: 1973 बाणसागर समझौते और वर्ष 2000 में राज्य विभाजन के बाद से अटका था मामला।
  • सोन-फल्गु नदी जोड़ो परियोजना: गयाजी समेत दक्षिण बिहार के तमाम जिलों में पेयजल और सिंचाई का संकट दूर होगा।
  • उपस्थिति: बैठक में अमित शाह, सी०आर० पाटिल, सम्राट चौधरी, हेमंत सोरेन, विजय कुमार चौधरी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

अन्‍य खबरों  के लिए नीचे  ’न्‍यूज भारत टीवी ’ के लिंक पर क्लिक करें ,

||  https://newsbharattv.in  ||