Sunday, June 7, 2026

बुलडोजर की ‘गुंडागर्दी’ के खिलाफ भड़का दीपंकर का गुस्सा! समस्तीपुर में गरजे माले महासचिव– “अब सड़कों पर होगा युवाओं का महाविस्फोट!”

जब सीजेआई ने युवाओं को कहा ‘कॉकरोच’, तो देश की नई पीढ़ी ने बना डाली ‘भाजपा के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी’!

नीट धांधली और पेपर लीक पर घेरा: 22 लाख छात्रों के भविष्य को संघ के हवाले करने का बड़ा आरोप

विशेष कवरेज समस्तीपुर ब्यूरो 22 मई 2026

बिहार की राजनीतिक चेतना और वामपंथी संघर्ष की भूमि समस्तीपुर आज एक बार फिर ऐतिहासिक और युगांतरकारी राजनीतिक गर्जना का गवाह बनी। मौका था देश के जाने-माने लोकप्रिय कम्युनिस्ट नेता, शोषितों-वंचितों के मसीहा और पूर्व विधायक दिवंगत कॉ. रामदेव वर्मा के चौथे स्मृति दिवस का। इस पावन स्मृति के अवसर पर भाकपा (माले) द्वारा समस्तीपुर के ऐतिहासिक कर्पूरी सभागार में बुलडोजर राज के खिलाफ लोकतंत्र की आवाज विषय पर एक राज्यस्तरीय विशाल सेमिनार का आयोजन किया गया।

समस्तीपुर में आयोजित सेमिनार के दौरान माइक संभालकर केंद्र व राज्य सरकार की ‘बुलडोजर नीति’ और ‘नीट परीक्षा धांधली’ पर बेहद आक्रामक और धारदार अंदाज में कड़ा प्रहार करते माले महासचिव कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य।

सभागार की स्थिति यह थी कि कार्यक्रम शुरू होने के घंटों पहले ही पूरा परिसर खचाखच भर चुका था। कड़कड़ाती धूप और उमस के बावजूद हजारों की संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, नौजवान, छात्र, प्रखर तेवरों वाली महिलाएं और समाज के प्रबुद्ध लोकतंत्रपसंद नागरिक आयोजन स्थल पर डटे रहे। लाल झंडों, नारों और क्रांतिकारी गीतों के बीच पूरा माहौल सत्ता विरोधी लहर में डूबा नजर आया। मंच पर जैसे ही मुख्य वक्ता के रूप में भाकपा (माले) के राष्ट्रीय महासचिव कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य ने कमान संभाली, पूरा सभागार तालियों और गगनभेदी नारों से गूंज उठा। दीपंकर भट्टाचार्य ने अपने चिरपरिचित धारदार, तार्किक और कड़कदार अंदाज में केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की गठबंधन की भाजपा सरकार की चूलें हिला दीं।

बुलडोजर अब मशीन नहीं, भाजपा के फासीवादी दमन की राजनीतिक पहचान: दीपंकर

सेमिनार के मुख्य विषय पर बोलते हुए कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि आज देश के भीतर संवैधानिक संस्थाओं को पंगु बना दिया गया है और न्याय की जगह ‘बुलडोजर तंत्र’ ने ले ली है। उन्होंने बेहद आक्रामक लहजे में कहा:

दिवंगत वामपंथी नेता कॉ. रामदेव वर्मा के चौथे स्मृति दिवस पर आयोजित सेमिनार में उमड़ी पार्टी कार्यकर्ताओं, महिलाओं, छात्रों और आम नागरिकों की गवाह बनती भारी और अनुशासित भीड़।

“आज देश में बुलडोजर केवल मलबे हटाने या सड़क बनाने वाली एक लोहे की मशीन नहीं रह गया है, बल्कि यह भाजपा शासन की क्रूर राजनीतिक पहचान और निरंकुश दमन का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुका है। अपराधियों और माफियाओं पर कार्रवाई के नाम पर शुरू हुआ यह खेल अब लोकतंत्र को कुचलने का सबसे बड़ा हथियार बन गया है।”

माले महासचिव ने इतिहास और वर्तमान की तुलना करते हुए कहा कि एक दौर था जब जनविरोधी सरकारों को हम – ‘लाठी-गोली और दमन की सरकार’ – कहते थे, लेकिन भाजपा ने भारतीय राजनीति को एक नया और घिनौना शब्द दिया है— “बुलडोजर राज”। उत्तर प्रदेश से शुरू हुए इस सिलसिले के तहत वहां के मुख्यमंत्री को – ‘बुलडोजर बाबा’ – का तमगा दिया गया और आज स्थिति यह है कि देश के जिस भी सूबे में भाजपा की सरकारें हैं, वहां बुलडोजर को न्याय व्यवस्था से ऊपर स्थापित कर दिया गया है।

समस्तीपुर के कर्पूरी सभागार में आयोजित ‘बुलडोजर राज के खिलाफ लोकतंत्र की आवाज’ सेमिनार के मुख्य मंच पर आसीन भाकपा (माले) के राष्ट्रीय महासचिव कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य, विधान परिषद सदस्य कॉ. शशि यादव, पूर्व विधायक कॉ. मंजू प्रकाश, जिला सचिव प्रो. उमेश कुमार एवं अन्य वरिष्ठ वामपंथी नेतागण।

बंगाल चुनाव परिणामों के बाद झालमुड़ीऔर गरीबों की रोजी-रोटी पर क्रूर प्रहार

बिहार के राजनीतिक परिदृश्य के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति का विश्लेषण करते हुए दीपंकर भट्टाचार्य ने हाल के बंगाल चुनाव परिणामों और उसके बाद की परिस्थितियों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बिहार के बाद बंगाल के चुनावी नतीजों ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंकाया है, लेकिन सत्ता में बैठे लोग अब वहां भी खतरनाक ‘बुलडोजर संस्कृति’ को जबरन लागू करने पर आमादा हैं।

उन्होंने बंगाल के मौजूदा हालातों को रेखांकित करते हुए कहा:

“चुनाव से पहले बंगाल की राजनीतिक फिजाओं में ‘झालमुड़ी’ खाने और खिलाने की बड़ी दोस्ताना चर्चाएं हो रही थीं। नेता जमीन पर उतरकर आम जनता से जुड़ने का नाटक कर रहे थे। लेकिन जैसे ही चुनाव खत्म हुए, रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक जगहों के पास दशकों से दुकान चलाकर अपना और अपने बच्चों का पेट पालने वाले छोटे-छोटे झालमुड़ी और चाय दुकानदारों को बेरहमी से उजाड़ने की खबरें सुर्खियां बन रही हैं।”

माले महासचिव ने इसके पीछे के गहरे कॉरपोरेट गठजोड़ का पर्दाफाश करते हुए कहा कि यह बुलडोजर किसी अवैध निर्माण पर नहीं चल रहा, बल्कि यह छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और गरीब मेहनतकशों की स्वावलंबन और रोजी-रोटी पर सीधा हमला है। सरकार इन गरीबों को हटाकर बड़ी-बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों, मॉल और टाउनशिप परियोजनाओं के लिए रास्ता साफ कर रही है।

उन्होंने आगे कहा कि बंगाल में बकरीद के मौके पर बीफ़ के छोटे और गरीब व्यापारियों पर पाबंदी लगाना, लाइसेंस और नियंत्रण के नाम पर उन्हें प्रताड़ित करना इसी क्रूर नीति का हिस्सा है। मकसद साफ है— गरीब और छोटे दुकानदारों को आर्थिक रूप से पूरी तरह बर्बाद कर दिया जाए ताकि पूरी अर्थव्यवस्था पर देश के चुनिंदा पूंजीपतियों का कब्जा हो सके। यह नीति पूरी तरह से अंबानी-अडानी केंद्रित और जनविरोधी है।

अदालतों का काम सत्ता ने छीना, बिना न्यायिक प्रक्रिया के विरोधियों को बनाया जा रहा निशाना

न्याय व्यवस्था की बदहाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कॉ. दीपंकर ने कहा कि हमारे देश का संविधान यह तय करता है कि कोई व्यक्ति दोषी है या निर्दोष, इसका फैसला केवल और केवल देश की अदालतें और हमारी स्थापित न्याय व्यवस्था ही कर सकती है। लेकिन आज भाजपा सरकार ने खुद को ही जज, जूरी और जल्लाद घोषित कर दिया है।

उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:

“शुरुआत में ढिंढोरा पीटा गया कि बुलडोजर माफियाओं पर चलेगा। लेकिन आज सच क्या है? आज बिना किसी अदालती सुनवाई के, बिना किसी जांच के, सत्ता अपने राजनीतिक विरोधियों और अपनी हक की आवाज उठाने वाले नागरिकों को निशाना बनाने के लिए बुलडोजर और एनकाउंटर की गैर-संवैधानिक राजनीति चला रही है।”

उन्होंने कहा कि आज इस देश में किसी को भी ‘बांग्लादेशी’, किसी को ‘अतिक्रमणकारी’ तो किसी को ‘देशविरोधी’ का ठप्पा लगाकर समाज के सबसे कमजोर तबकों—जैसे गरीबों, आदिवासियों, मुसलमानों, किसानों और लोकतंत्र के पक्ष में खड़े होने वाले एक्टिविस्टों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने बिहार सरकार पर भी दोहरा चरित्र अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि बिहार में चुनाव के पहले मंचों से घोषणाएं होती हैं कि गरीबों को दस-दस हजार रुपये दिए जाएंगे, उन्हें बसाया जाएगा, लेकिन जैसे ही चुनाव खत्म होते हैं और सरकारें बन जाती हैं, उन्हीं गरीबों के आशियानों पर बिना किसी पुनर्वास के बुलडोजर चला दिया जाता है।

नीट परीक्षा में ऐतिहासिक धांधली: 22 लाख छात्रों का भविष्य संघके हवाले

देश के सबसे बड़े संकट यानी शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर आते ही कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य के तेवर बेहद तल्ख हो गए। उन्होंने हाल ही में संपन्न हुई नीट (NEET) परीक्षा में सामने आई देशव्यापी धांधली और पेपर लीक मामले का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) जैसी बड़ी संस्थाओं के जरिए देश के 22 लाख से अधिक प्रतिभावान छात्रों के भविष्य के साथ भयंकर खिलवाड़ किया गया है।

उन्होंने इस शिक्षा घोटाले के पीछे की गहरी साजिश को उजागर करते हुए कहा:

“पिछले दस वर्षों के भाजपा शासन को उठाकर देख लीजिए, ऐसा कोई साल या ऐसी कोई बड़ी परीक्षा नहीं गुजरी जिसका पेपर लीक न हुआ हो। एनटीए जैसी अति-महत्वपूर्ण संस्थाओं पर आज किसी भी प्रकार का कोई लोकतांत्रिक नियंत्रण या संसदीय जवाबदेही नहीं रह गई है। पूरी परीक्षा प्रणाली और देश के बड़े शिक्षण संस्थानों को सोची-समझी रणनीति के तहत संघ परिवार (आरएसएस) के वैचारिक और सांगठनिक प्रभाव में चलाया जा रहा है। योग्यता को दरकिनार कर केवल अपनी विचारधारा के लोगों को फायदा पहुंचाया जा रहा है।”

बिहार की बदहाल शिक्षा व्यवस्था और युवाओं पर हो रहे अत्याचार का जिक्र करते हुए उन्होंने बिहार में TRE-4 (शिक्षक नियुक्ति) अभ्यर्थियों के शांतिपूर्ण आंदोलन पर हुए बर्बर लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि पटना की सड़कों पर न्याय मांग रही युवा लड़कियों और छात्राओं तक को पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया। इस पर शर्मिंदगी जताने के बजाय बिहार के शिक्षा मंत्री अत्यंत असंवेदनशील बयान दे रहे हैं कि ‘छात्राओं को सड़क पर आने की जरूरत ही क्या थी?’ कॉ. दीपंकर ने कहा कि यह बयान सत्ता के अहंकार की पराकाष्ठा है। आज देश और राज्य का नौजवान जब रोजगार मांगता है, तो उसे लाठियां मिलती हैं, उसकी आवाज को हर संभव तरीके से दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

कॉकरोचशब्द बना युवाओं के प्रतिरोध का नया बारूद; सोशल मीडिया की डिजिटल आग अब सड़कों पर उतरेगी

अपने संबोधन के सबसे चौंकाने वाले  हिस्से में कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य ने देश के भीतर उभर रहे एक नए सामाजिक और डिजिटल आंदोलन का खुलासा किया। उन्होंने देश के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) द्वारा हाल ही में सोशल मीडिया एक्टिविस्टों और सूचना के अधिकार (RTI) कार्यकर्ताओं के खिलाफ की गई विवादित टिप्पणी का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कहा कि जब देश के शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति ने व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने वाले सोशल मीडिया एक्टिविस्टों को “कॉकरोच” और “परजीवी” जैसी अपमानजनक संज्ञा दी, तो उन्हें लगा था कि युवा डर जाएंगे। लेकिन देश की नई और जागरूक पीढ़ी ने उसी अपमानजनक शब्द को सत्ता के खिलाफ अपने महा-प्रतिरोध का सबसे बड़ा प्रतीक बना दिया।

उन्होंने गर्व से कहा:

“आज देश के युवाओं ने सोशल मीडिया पर भाजपा के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी नाम से एक अभूतपूर्व और विशाल डिजिटल मोर्चा खोल दिया है। यह इस बात का सीधा संकेत है कि देश का नौजवान अब भाजपा की भय और दमन की राजनीति से डरने वाला नहीं है, बल्कि वह खुलकर सत्ता के सामने सीना तानकर खड़ा हो रहा है। जो नौजवान कभी गुमराह होकर ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाते थे, आज वही नौजवान भयानक बेरोजगारी, कमरतोड़ महंगाई और अपनी भविष्य की असुरक्षा के खिलाफ सरकार के सामने सबसे बड़ी और मजबूत दीवार बनकर खड़े हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि युवाओं को कॉलेज-यूनिवर्सिटी से डिग्रियां तो बांटी जा रही हैं, लेकिन उनके हाथों से स्थायी रोजगार को हमेशा के लिए छीन लिया गया है। देश में बेरोजगारी और महंगाई अपने जीवन के सबसे चरम स्तर पर पहुंच चुकी है। इसके बावजूद, मुख्यधारा की गोदी मीडिया और सरकार की चर्चाओं से शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों के संकट और गरीबों के बुनियादी सवाल पूरी तरह से गायब हैं।

उन्होंने याद दिलाया कि साल 2014 से पहले जो भाजपा नेता 40 रुपये लीटर पेट्रोल देने के बड़े-बड़े वादे करते थे, आज उनके राज में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं, भारतीय रुपया अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार औंधे मुंह गिर रहा है और रसोई गैस का सिलेंडर आम और गरीब जनता की पहुंच से बिल्कुल बाहर हो चुका है। जब कोई मजदूर अपनी सही मजदूरी मांगता है, या कोई नागरिक अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग करता है, तो उसे सीधे जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया जाता है।

माले महासचिव ने अपने कार्यकर्ताओं और देश के युवाओं का आह्वान करते हुए कहा:

“यह जो ‘कॉकरोच आंदोलन’ आप देख रहे हैं, यह दरअसल देश के करोड़ों शोषित और बेरोजगार नौजवानों के भीतर सुलग रहे भारी आक्रोश का डिजिटल विस्फोट है। अभी यह प्रतिरोध आपको सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म्स पर दिख रहा है, लेकिन मैं चेतावनी देता हूँ कि आने वाले समय में सरकार की गलत नीतियों के कारण यह गुस्सा देश की हर एक सड़क पर एक बड़े जन-आंदोलन और महाविस्फोट के रूप में दिखाई देगा। हमारी पार्टी के कार्यकर्ताओं की यह जिम्मेदारी है कि वे सोशल मीडिया की इस डिजिटल आवाज को जमीन के वास्तविक जन-आंदोलनों से जोड़ें, गांवों और कस्बों तक ले जाएं और सीधे शिक्षा मंत्री व केंद्र सरकार की छाती पर मूंग दलते हुए उनसे अपने हक का जवाब मांगें।”

कारपोरेट परस्ती, बलात्कारियों को संरक्षण और दमनकारी नीतियों के खिलाफ एकजुटता का आह्वान

भाजपा सरकार की अन्य नीतियों पर बोलते हुए कॉ. दीपंकर ने तीखा आरोप लगाया कि यह सरकार एक तरफ अपराधियों पर बुलडोजर चलाने का ढोंग करती है, तो दूसरी तरफ रसूखदार बलात्कारियों को खुला राजनीतिक संरक्षण देती है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि नीट की पीड़ित छात्रा को आज तक सही मायने में न्याय नहीं मिल सका है।

उन्होंने नए लेबर कोड (श्रम कानूनों में बदलाव) की आलोचना करते हुए कहा कि इसके जरिए मजदूरों को बंधुआ मजदूर बनाने की तैयारी है। पूरे देश में अंबानी-अडानी को फायदा पहुंचाने के लिए टाउनशिप और एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं के नाम पर बिना किसी उचित मुआवजे के गरीबों और किसानों की कीमती जमीनों के जबरन अधिग्रहण की कोशिशें तेज हो गई हैं। कॉ. दीपंकर ने मांग की कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण रोजगार गारंटी योजना को खत्म करने की साजिशें बंद हों और देश के उच्च शिक्षण संस्थानों व कैंपसों में दलित, पिछड़े और आदिवासी छात्रों के साथ होने वाले जातिगत भेदभाव को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए स्वर्गीय रोहित वेमुला की तर्ज पर ‘रोहित एक्ट’ कानून तत्काल प्रभाव से बनाया जाए।

कम्युनिस्ट योद्धा का. रामदेव वर्मा की विरासत पर बोले वामपंथी दिग्गज

सेमिनार में कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य ने बिहार के वरिष्ठतम वामपंथी नेता दिवंगत कॉ. रामदेव वर्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि कॉ. रामदेव वर्मा की पूरी राजनीतिक और सामाजिक जिंदगी देश के मेहनतकश अवाम के लिए एक खुली किताब की तरह है। वे बीच के केवल पांच वर्षों के कालखंड को छोड़ दें, तो साल 1980 से लेकर 2010 तक लगातार समस्तीपुर की जनता के प्यार और विश्वास की बदौलत बिहार विधानसभा के सदस्य रहे।

उन्होंने कहा कि देश और राज्य की राजनीति में चाहे कितने भी बड़े-बड़े आयाराम-गयाराम वाले बदलाव हुए हों, लेकिन रामदेव वर्मा ने कभी भी गरीबों, दलितों, वंचितों और मेहनतकश जनता का साथ नहीं छोड़ा। वे हमेशा सदन से लेकर सड़क तक दबे-कुचले लोगों की बुलंद आवाज बने रहे। आज जब देश फासीवाद के सबसे काले दौर से गुजर रहा है, तब कॉ. रामदेव वर्मा के संघर्षों की वही महान विरासत हमें इस क्रूर बुलडोजर राज के खिलाफ लोकतंत्र की रक्षा की इस लड़ाई में सही दिशा और ऊर्जा दे रही है।

मंच पर मौजूद अन्य प्रमुख वक्ताओं के तीखे संबोधन:

एमएलसी शशि यादव: बिहार में यूपी मॉडलकभी सफल नहीं होने देगी जागरूक जनता

बिहार विधान परिषद की सदस्य कॉ. शशि यादव ने अपने संबोधन में कॉ. रामदेव वर्मा को नमन करते हुए कहा:

“कॉ. रामदेव वर्मा आजीवन एक सच्चे और समर्पित कम्युनिस्ट सिपाही बने रहे। आज हम सब उनके स्मृति दिवस पर यह सामूहिक संकल्प लेते हैं कि उनके बताए क्रांतिकारी रास्ते पर आगे बढ़ते हुए जनता के संघर्षों की इस विरासत को और ज्यादा मजबूत करेंगे। भाजपा और संघ परिवार मिलकर बिहार की धरती पर भी उत्तर प्रदेश जैसा क्रूर और असंवैधानिक ‘बुलडोजर राज’ थोपना चाहती है, लेकिन बिहार की यह जागरूक और क्रांतिकारी जनता उनके इन मंसूबों को कभी भी सफल नहीं होने देगी।”

उन्होंने केंद्र सरकार से महिलाओं के लिए संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण को बिना किसी परिसीमन या जनगणना के पेंच के अविलंब और इसी वक्त लागू करने की पुरजोर मांग की। साथ ही, उन्होंने परिसीमन के नाम पर सीटों के साथ छेड़छाड़ और देश भर में महिलाओं व छात्राओं पर बढ़ रही हिंसक घटनाओं की भी तीखी आलोचना की।

पूर्व विधायक मंजू प्रकाश: सुन्दराइया नगरको फिर से बसाने के लिए होगी आर-पार की लड़ाई

बिहार की वरिष्ठ वामपंथी नेत्री, पूर्व विधायक और माले की केंद्रीय कमिटी सदस्य कॉ. मंजू प्रकाश ने सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि देश की नई पीढ़ी और नौजवानों को यदि राजनीति सीखनी है, तो उन्हें कॉ. रामदेव वर्मा के जमीनी संघर्षों, उनकी ईमानदारी और उनकी सादगी से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है।

उन्होंने स्थानीय प्रशासन और सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:

“समस्तीपुर जिले का ‘सुन्दराइया नगर’, जिसे हमारी पार्टी और वामपंथी आंदोलन ने सालों तक संघर्ष करके समाज के सबसे गरीब, बेघर और भूमिहीन लोगों को बसाने के लिए तैयार किया था, उसे इस क्रूर सरकार ने अपने बुलडोजर से पूरी तरह उजाड़ कर रख दिया। गरीब महिलाएं और बच्चे आज खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। मैं आज इस मंच से यह साफ घोषणा करती हूँ कि भाकपा (माले) इस दमन के आगे झुकेगी नहीं और सुन्दराइया नगर की उस गरीब बस्ती को दोबारा उसी स्थान पर सम्मान के साथ बसाने के लिए सरकार के खिलाफ आर-पार की सामूहिक लड़ाई लड़ेगी।”

मिथिलांचल प्रभारी धीरेंद्र झा: सांप्रदायिकता और मॉब लिंचिंग के खिलाफ जारी रहेगा संघर्ष

भाकपा (माले) के वरिष्ठ नेता और मिथिलांचल प्रभारी कॉ. धीरेंद्र झा ने अपने कड़कदार भाषण में कहा कि मिथिलांचल की यह धरती हमेशा से सामंतवाद और सांप्रदायिकता के खिलाफ प्रतिरोध की धरती रही है। उन्होंने कहा:

“जयमंगला गढ़ के ऐतिहासिक संघर्षों से लेकर उजियारपुर और मुसरीघरारी तक, हमारी पार्टी के जांबाज कार्यकर्ताओं ने समाज में फैले अन्याय, हत्या, लूट और दक्षिणपंथी ताकतों द्वारा प्रायोजित मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा हत्या) के खिलाफ लगातार अपने खून की आहुति देकर जनता की रक्षा की है। कॉ. रामदेव वर्मा की असली विरासत केवल बातों में नहीं, बल्कि जनता के इसी जुझारू प्रतिरोध और सांप्रदायिकता विरोधी अडिग संघर्ष की विरासत है।”

उन्होंने देश के सभी समाजवादियों, वामपंथियों और लोकतंत्रपसंद ताकतों से अपील की कि वे आज के इस फासीवादी दौर में आपसी मतभेदों को भुलाकर एक व्यापक और मजबूत ऐतिहासिक एकता का निर्माण करें ताकि इस जनविरोधी सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंका जा सके।

शिलान्यास, माल्यार्पण और श्रद्धांजलि की प्रमुख कड़ियां

इस राज्यस्तरीय सेमिनार की औपचारिक शुरुआत से ठीक पहले, सुबह समस्तीपुर जिले के पतेलिया गांव में स्थित कॉ. रामदेव वर्मा की भव्य आदमकद प्रतिमा पर एक गरिमामय श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। यहाँ माले महासचिव कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य, कॉ. मंजू प्रकाश, कॉ. धीरेंद्र झा, विधान परिषद सदस्य कॉ. शशि यादव, कॉ. संतोष सहर, कुमार परवेज सहित राज्य और जिले के दर्जनों वरिष्ठ वामपंथी नेताओं ने सामूहिक रूप से माल्यार्पण कर उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इसी ऐतिहासिक अवसर पर विधान परिषद सदस्य कॉ. शशि यादव के आधिकारिक ‘विधान परिषद सदस्य विकास मद’ (MLC Fund) से स्वीकृत राशि से बनने वाले भव्य का. रामदेव वर्मा स्मृति द्वार का पूरे वैदिक और क्रांतिकारी रीति-रिवाजों के साथ शिलान्यास भी किया गया। नेताओं ने कहा कि यह द्वार आने वाली पीढ़ियों को कॉ. रामदेव वर्मा के संघर्षों की याद दिलाता रहेगा। इसके उपरांत, समस्तीपुर शहर आगमन पर नेताओं के काफिले ने देश की आजादी के महानायक शहीद-ए-आजम भगत सिंह, भारतीय संविधान के निर्माता बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व जननायक कर्पूरी ठाकुर की स्थापित प्रतिमाओं पर भी पूरी श्रद्धा के साथ माल्यार्पण किया और उनके सपनों का भारत बनाने का संकल्प लिया।

सेमिनार के मंच पर माले MLC शशि यादव को अंगवस्त्र से सम्मानित करती माले राज्य कमिटी सदस्य बंदना सिंह

सभागार में मौजूद रहे कई प्रमुख चेहरे

इस भव्य और विशाल कार्यक्रम का बेहद कुशल और अनुशासित संचालन भाकपा (माले) के समस्तीपुर जिला सचिव प्रो. उमेश कुमार ने किया। इस दौरान मंच और दीर्घा में बिहार वामपंथी आंदोलन के कई प्रबुद्ध और जाने-माने चेहरे उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से: प्रो. सुरेंद्र सुमन, वंदना सिंह, डॉ. प्रभात कुमार, रंजीत राम, फूल बाबू सिंह, ललन कुमार, जीबछ पासवान, सुरेंद्र प्रसाद सिंह,अजय कुमार,अमित कुमार, दिनेश कुमार, महावीर पोद्दार, जयंत कुमार, सुनील कुमार, रौशन कुमार, लोकेश राज, दीपक यदुवंशी सहित समस्तीपुर, दरभंगा, मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों से आए हजारों की संख्या में पार्टी पदाधिकारी, किसान, मजदूर और युवा साथी उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में क्रांतिकारी गीतों और गगनभेदी नारों के साथ इस सफल महा-सेमीनार का समापन हुआ।

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दिल्ली में बजा बिहार का डंका! रोहतास की इस लेडी सिंघम मुखिया ने देश में गाड़ा झंडा, सम्राट के मंत्री भी रह गए दंग!

विशेष संवाददाता, पटना। बिहार की पंचायती राज व्यवस्था में एक नया इतिहास रचते हुए रोहतास जिले की एक महिला मुखिया ने पूरे देश में राज्य का नाम रोशन कर दिया है। रोहतास प्रखंड के तेलकप ग्राम पंचायत की मुखिया अनीता टोप्पो को केंद्र सरकार की ओर से प्रतिष्ठित ‘नानाजी देशमुख सर्वोत्तम पंचायत सतत विकास पुरस्कार-2025’ (राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार) की श्रेणी में पूरे भारत में दूसरा (द्वितीय) स्थान प्राप्त हुआ है। इस धमाकेदार और ऐतिहासिक कामयाबी के बाद पटना से लेकर दिल्ली तक तेलकप पंचायत की चर्चा हो रही है।

इस गौरवमयी उपलब्धि पर पंचायती राज विभाग, बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश ने मुखिया को विशेष रूप से आमंत्रित कर अपनी हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी। पटना में आयोजित एक उच्च स्तरीय मुलाकात के दौरान पंचायती राज विभाग के निदेशक ने भी विजेता मुखिया को पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया और उनके द्वारा धरातल पर किए गए कार्यों की जमकर सराहना की।

बिहार सरकार के पंचायती राज विभाग कार्यालय में माननीय मंत्रीगणों के नाम की पट्टिका के सामने राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता मुखिया अनीता टोप्पो, विभाग के अधिकारी और पंचायत से जुड़े कर्मी समूह चर्चा के बाद एकजुटता प्रदर्शित करते हुए।इस मौके पर पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश (दाएं) एवं बीच में दायें से दूसरे क्रम पर अनीता टोप्पो

मंत्री दीपक प्रकाश ने थपथपाई पीठ, चुनौतियों पर भी हुई आर-पार की बात

मुलाकात के दौरान पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने मुखिया अनीता टोप्पो से पंचायत में संचालित विकास कार्यों और वहां की स्थानीय चुनौतियों के बारे में वन-टू-वन फीडबैक लिया। बातचीत में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता और साफ-सफाई जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हुई। मंत्री ने माना कि तेलकप ग्राम पंचायत के कुछ वार्डों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। उन्होंने मुखिया को भरोसा दिलाते हुए ऐलान किया कि इस चुनौती को जड़ से खत्म करने के लिए पंचायती राज विभाग हरसंभव तकनीकी और आर्थिक सहयोग प्रदान करेगा। मंत्री ने जिला पंचायत संसाधन केंद्र द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की भी तारीफ की, जिसने मुखिया के क्षमता संवर्धन और योजनाओं के सटीक क्रियान्वयन में संजीवनी का काम किया। इसके साथ ही निदेशक ने पंचायत सचिव के कार्यों की भी सराहना की और कहा कि जमीन पर योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन ही इस राष्ट्रीय पुरस्कार का असली आधार है।

लाइब्रेरी से लेकर ओपन जिम तक… जानिए कैसे पलटी तेलकप पंचायत की किस्मत?

राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने के बाद मुखिया अनीता टोप्पो ने अपनी इस सफलता की पूरी कहानी और पंचायत की तस्वीर बदलने वाले ऐतिहासिक कामों को साझा किया। उन्होंने बताया कि किस तरह एक योजनाबद्ध तरीके से उन्होंने अपनी पंचायत को मॉडल पंचायत में तब्दील कर दिया:

  1. शिक्षा क्रांति और लाइब्रेरी: बच्चों के पढ़ने के लिए पंचायत में दो अलग-अलग जगहों पर अत्याधुनिक लाइब्रेरी (पुस्तकालय) की स्थापना की गई, ताकि गरीब बच्चों को पढ़ाई के लिए शहर न भागना पड़े।
  2. कीचड़ से मुक्ति और पेवर ब्लॉक: स्कूलों में आने-जाने वाले रास्तों और स्कूल कंपाउंड में जलजमाव एवं कीचड़ की भारी समस्या थी। बच्चों की इस परेशानी को दूर करने के लिए पूरे परिसर में शानदार पेवर ब्लॉक लगवाए गए और चकाचक सड़कें बनवाई गईं।
  3. स्वास्थ्य और हाईटेक सुविधाएं: उप स्वास्थ्य केंद्र की कायापलट करते हुए मरीजों के बैठने के लिए कुर्सियों और बुनियादी सुविधाओं की मुकम्मल व्यवस्था की गई।
  4. भीषण गर्मी में राहत: आम जनता को चुभती गर्मी से बचाने के लिए जगह-जगह वाटर कूलर लगवाए गए हैं ताकि लोगों को ठंडा और स्वच्छ पेयजल मिल सके। इसके अलावा मुसाफिरों के बैठने के लिए बस स्टैंड के पास सीमेंटेड चेयर (कुर्सियां) लगवाई गईं।
  5. हेल्थ और फिटनेस: पंचायत के युवाओं और ग्रामीणों की सेहत को ध्यान में रखते हुए ओपन जिम की शुरुआत की गई।
  6. भ्रष्टाचार पर चोट, पंचायत भवन में ही सारा काम: अब ग्रामीणों को जाति, आय, निवास प्रमाण पत्र या वृद्धावस्था पेंशन के लिए प्रखंड कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ते। पंचायत सरकार भवन में ही आरटीपीएस (RTPS) काउंटर के माध्यम से पंचायत सचिव के साथ बैठकर मुखिया खुद सारे दस्तावेज तुरंत तैयार करवाती हैं।
  7. महिला सभा और मनरेगा से बंपर रोजगार: अनीता टोप्पो खुद हर गांव में जाकर महिलाओं के साथ विशेष ‘महिला सभा’ करती हैं और उनकी समस्याओं को सीधे सुनकर फैसला लेती हैं। इसके साथ ही मनरेगा के तहत सैकड़ों बेरोजगारों को लगातार काम देकर पलायन रोका गया है।

विजेता मुखिया ने अपनी इस ऐतिहासिक कामयाबी का श्रेय बिहार के मुख्यमंत्री, पंचायती राज मंत्री और पूरे पंचायती राज विभाग को दिया है, जिनके सहयोग से तेलकप आज एक विकसित और आदर्श पंचायत बनकर देश के सामने मिसाल पेश कर रहा है।

पटना में राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार में देश में दूसरा स्थान हासिल करने वाली रोहतास के तेलकप पंचायत की मुखिया अनीता टोप्पो को पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित करते पंचायती राज विभाग के निदेशक। इस मौके पर पंचायती राज मंत्री विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

बनारस की गृहस्थी से देश की संसद तक: संघर्ष और आत्मनिर्भरता की अद्भुत मिसाल

कभी बनारस में अपने बच्चों के भविष्य को संवारने और एक साधारण गृहस्थी संभालने वाली अनीता टोप्पो का देश की संसद (पार्लियामेंट) तक का सफर बेहद प्रेरणादायी और संघर्षपूर्ण रहा है। अपने मायके में माता-पिता की इकलौती संतान के रूप में पली-बढ़ीं अनीता टोप्पो के जीवन में नया मोड़ तब आया, जब तेलकप पंचायत में अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए मुखिया पद की सीट आरक्षित हुई। उनकी शिक्षा और काबिलियत को देखते हुए पूरे पंचायत के प्रबुद्ध गार्जियनों और ग्रामीणों ने उन्हें बनारस से वापस बुलाकर पंचायत की कमान सौंपने का फैसला किया। चुनाव के दौरान किसी बड़े लाव-लश्कर के बजाय उन्होंने अकेले ही घर-घर जाकर, हाथ जोड़कर जनता से वोट मांगा, जहां पंचायत की महिलाओं ने उनका सबसे बड़ा संबल बनते हुए एक महिला को जिताने का संकल्प लिया।

शुरुआती दौर में जब कभी सरकारी कार्यों के लिए ब्लॉक या अनुमंडल जाना होता था, तो ड्राइवर्स के नखरों और समय पर न आने की आदत से तंग आकर उन्होंने हार नहीं मानी; बल्कि अपने पति द्वारा शौक से दिलाई गई फोर-व्हीलर की स्टीयरिंग खुद थाम ली। जल्द ही उन्होंने न सिर्फ गाड़ी चलाना सीखा, बल्कि बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप या ‘स्टेपनी’ (सहारे) के पूरे पंचायत प्रशासन को अकेले अपने दम पर ड्राइव करना शुरू कर दिया।

उनकी इसी आत्मनिर्भरता और जमीनी स्तर पर शिक्षा व महिला सशक्तिकरण के लिए किए गए अभूतपूर्व कार्यों की बदौलत बिहार सरकार ने उन्हें राज्य की उन शीर्ष पांच अनुसूचित जनजाति महिला मुखियाओं में चयनित किया, जिन्हें देश की संसद (पार्लियामेंट) भेजा गया। पंचायत सरकार भवन से शुरू हुआ यह सफर तब अपनी बुलंदी पर पहुंचा जब उन्होंने नए संसद भवन का दौरा किया, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला व महिला आयोग की मंत्रियों से मुलाकात की और राष्ट्रपति भवन में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ आमने-सामने बैठकर डिनर किया। राष्ट्रपति से मिली ‘सांसद बनने’ की प्रेरणा और एक मिनट से अधिक की आत्मीय बातचीत को वह अपने जीवन का सबसे गौरवान्वित करने वाला क्षण मानती हैं। आज वह घर की कामकाजी और मामूली पढ़ी-लिखी महिलाओं के लिए एक ‘पथ-प्रदर्शक’ बन चुकी हैं, जिनका साफ संदेश है कि महिलाओं को किसी और पर निर्भर रहने के बजाय अपने खुद के कंधे और दम पर आत्मनिर्भर बनना चाहिए।

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अदालत का फैसला: सबूतों के आगे झुका मुजरिम, ₹21 लाख का भारी जुर्माना और जेल की सलाखें!

मुजफ्फरपुर पुलिस की मजबूत चार्जशीट और पुख्ता सबूतों ने आरोपी को पहुंचाया अंजाम तक; एन.आई. एक्ट के तहत माननीय न्यायालय ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला।

मुजफ्फरपुर। कानून के लंबे हाथों से बचना नामुमकिन है, इसे एक बार फिर मुजफ्फरपुर पुलिस की मुस्तैदी और माननीय न्यायालय के कड़े फैसले ने साबित कर दिया है। शहर के एक चर्चित मामले में अदालत ने आरोपी को ऐसी सख्त सजा सुनाई है जिसे सुनकर अपराधियों के हौसले पस्त हो जाएंगे।

प्रस्तुत किए गए पुख्ता साक्ष्यों और पुलिस द्वारा दाखिल की गई दमदार चार्जशीट के आधार पर माननीय न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी को कारावास के साथ-साथ 21 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना ठोंका है।

चेक बाउंस (N.I. Act) मामले में कड़ा प्रहार

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2020 के मामला संख्या सी-860/2020 में आरोपित अभियुक्त सैयद जहिर हुसैन को एन.आई. एक्ट (Negotiable Instruments Act) के तहत दोषी पाया गया। अदालत ने मामले की गंभीरता और सबूतों को देखते हुए अभियुक्त को 01 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

जुर्माने की रकम सुनकर उड़ जाएंगे होश

न्यायालय ने केवल जेल की सजा ही नहीं दी, बल्कि आर्थिक रूप से भी तगड़ी चोट की है। अभियुक्त सैयद जहिर हुसैन पर:

  • ₹19 लाख का मुख्य जुर्माना लगाया गया है।
  • ₹02 लाख की अतिरिक्त राशि बतौर क्षतिपूर्ति (मुआवजा) देने का आदेश दिया गया है।
  • कुल मिलाकर अभियुक्त को ₹21 लाख की भारी राशि जुर्माने के रूप में भुगतनी होगी।

मुजफ्फरपुर पुलिस ने इस बड़ी सफलता पर अपनी पीठ थपथपाते हुए एक बार फिर दोहराया है कि वह आम जनता की सेवा और सुरक्षा के लिए हमेशा सदैव तत्पर है। इस फैसले के बाद कानूनी गलियारों और अपराधियों के बीच हड़कंप मचा हुआ है।

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अपराधियों के सीने में भर दो खौफ, जो पुलिस को चुनौती दे उसे 48 घंटे में मिलेगा जवाब: सम्राट चौधरी

नीतीश कुमार ने सुशासन की नींव रखी, अब बिहार में आएगा 5 लाख करोड़ का निवेश; पुलिसकर्मियों को मिलेगी कैशलेस इलाज की सुविधा

पटना, 21 मई 2026 बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपराधियों और कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा है कि राज्य में सुशासन से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने पुलिस बल को खुली छूट देते हुए कहा कि जो कोई भी पुलिस को चुनौती देगा, उसे 48 घंटे के भीतर करारा जवाब मिलेगा। मुख्यमंत्री ने यह बातें पटना के सरदार पटेल भवन ऑडिटोरियम में आयोजित ‘बैंक ऑफ बड़ौदा बिहार पुलिस सैलरी पैकेज दिवंगत पुलिसकर्मी बीमा लाभ वितरण कार्यक्रम’ के दौरान कहीं।

दिवंगत पुलिसकर्मियों के परिवारों को 37.50 करोड़ की सहायता समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कर्तव्य की वेदी पर जान गंवाने वाले 61 दिवंगत पुलिसकर्मियों के आश्रितों को कुल 37.50 करोड़ रुपये की बीमा राशि के चेक सौंपे। इस दौरान नवादा के मुफस्सिल थाना में तैनात रहे दिवंगत सहायक अवर निरीक्षक जितेंद्र कुमार सिंह के परिवार को 2 करोड़ रुपये की भारी-भरकम बीमा राशि का चेक प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी अपने को खोने का दुख धन से कम नहीं हो सकता, लेकिन यह राशि पीड़ित परिवारों को आगे का जीवन सम्मान से जीने और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में संबल प्रदान करेगी।

मुफस्सिल थाना नवादा के दिवंगत सहायक अवर निरीक्षक जितेंद्र कुमार सिंह के परिवार को बैंक ऑफ बड़ौदा बिहार पुलिस सैलरी पैकेज के तहत 2 करोड़ रुपये की बीमा राशि का चेक सौंपते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, पुलिस महानिदेशक विनय कुमार, बैंक के महाप्रबंधक सुब्रत और अन्य अधिकारी।

पुलिस लाइनों में खुलेंगे मॉडल स्कूल, मिलेगी कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा मुख्यमंत्री ने पुलिस बल के कल्याण के लिए दो बड़ी घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि राज्य की सभी 40 पुलिस लाइनों में पुलिसकर्मियों के बच्चों के लिए बेहतरीन स्कूल खोले जाएंगे। इसके साथ ही सूबे के 534 ब्लॉकों में ‘सरवती विद्या निकेतन’ की तर्ज पर मॉडल स्कूल बनाए जाएंगे, जहां दाखिले के लिए बड़े-बड़े अधिकारी और नेता पैरवी करेंगे।

इसके अलावा, पुलिसकर्मियों की सेहत की चिंता करते हुए मुख्यमंत्री ने डीजीपी के प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए कहा कि लगभग 150 से 200 करोड़ रुपये की लागत से बिहार पुलिस के जवानों और अफसरों के लिए बहुत जल्द ‘कैशलेस इलाज’ की व्यवस्था कैबिनेट से पास कराई जाएगी।

एनकाउंटर में जाति पूछने वाले बयान पर तंज हाल ही में विपक्ष द्वारा पुलिस कार्रवाई और एनकाउंटर पर उठाए गए सवालों पर चुटकी लेते हुए सम्राट चौधरी ने कहा, कुछ लोग आजकल पूछ रहे हैं कि पुलिस एनकाउंटर में जाति भी पूछनी चाहिए। मैं तो पुलिस वालों से कहूंगा कि भाई! अब गोली चलाने से पहले जाति पूछ लिया करना। समझ नहीं आता कि लोग कैसा कॉमन सेंस इस्तेमाल कर रहे हैं।” उन्होंने साफ किया कि अपराधी की कोई जाति नहीं होती और सुशासन के लिए सख्ती जरूरी है।

पटना के सरदार पटेल भवन ऑडिटोरियम में आयोजित बीमा राशि वितरण समारोह के दौरान राष्ट्रगान/मंच संचालन के समय सावधान की मुद्रा में खड़े मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, पुलिस महानिदेशक विनय कुमार, अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी एवं अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी।

बिहार बनेगा बड़ा मार्केट, 20 नवंबर तक 5 लाख करोड़ का टारगेट राज्य की आर्थिक प्रगति का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार को न्याय के साथ विकास के रास्ते पर लाया है। अब देश के प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत’ के सपने को पूरा करने के लिए बिहार तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि इस बार बिहार का बजट 3,47,000 करोड़ रुपये का है। राज्य में उद्योगों का जाल बिछाने के लिए 20 नवंबर 2026 से पहले बिहार की धरती पर 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश उतारने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने गर्व से कहा कि आज बिहार पुलिस में 30,000 से अधिक महिला कर्मी तैनात हैं, जो पूरे देश में सर्वोच्च संख्या है।

कार्यक्रम में ये दिग्गज रहे मौजूद इस ऐतिहासिक और भावुक क्षण के दौरान मंच पर बिहार सरकार के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी, पुलिस महानिदेशक विनय कुमार, पुलिस महानिदेशक (निगरानी) जितेंद्र सिंह गंगवार, पुलिस महानिदेशक (बीसप) जितेंद्र कुमार, पुलिस महानिदेशक कुंदन कृष्णन, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, अपर पुलिस महानिदेशक (बजट) संजय सिंह और बैंक ऑफ बड़ौदा के महाप्रबंधक सुब्रत उपस्थित रहे।

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MDDM कॉलेज की छात्राओं ने कैमरों में कैद किया परिंदों का संसार, डिजिटल तकनीक से खुलेंगे जैव विविधता के बड़े राज!

मुजफ्फरपुर : एमडीडीएम कॉलेज के स्नातकोत्तर प्राणीशास्त्र विभाग में उस समय भारी कौतूहल और रोमांच का माहौल बन गया, जब कॉलेज की छात्राओं ने पारंपरिक किताबों को छोड़कर आधुनिक डिजिटल गैजेट्स और कैमरों के जरिए कॉलेज परिसर में ही उड़ते परिंदों के गुप्त संसार को खंगालना शुरू कर दिया। मौका था महाविद्यालय के सेमिनार हॉल में आयोजित एक दिवसीय हाई-टेक शैक्षणिक कार्यशाला का, जिसका विषय “Introduction to Birds and Birdwatching & Digital Monitoring Tools” (बर्डवाचिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग टूल्स का परिचय) था।

दीप जलते ही गूंजीं तालियां, प्राचार्या ने भरा जोश

कार्यक्रम का गगनभेदी आगाज़ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। प्राणीशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता ने अपने औपचारिक स्वागत भाषण से उपस्थित लोगों में ऊर्जा फूंक दी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पारिस्थितिक तंत्र को समझने के लिए सिर्फ किताबी ज्ञान काफी नहीं है, अब पारंपरिक बर्डवाचिंग को आधुनिक डिजिटल तकनीकों से जोड़कर पर्यावरण संरक्षण का नया इतिहास लिखना होगा।

“हम हैं पर्यावरण की नई रक्षक!” बर्डवाचिंग कार्यशाला के व्यावहारिक सत्र के बाद देश की अनमोल जैव विविधता को बचाने का संकल्प लेकर एमडीडीएम कॉलेज की ऊर्जावान छात्राएं अपने प्रोफेसरों और विशेषज्ञों की टीम के साथ विक्ट्री पोज़ में ग्रुप फोटो खिंचवाती हुईं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही एमडीडीएम कॉलेज की प्राचार्या प्रो. डॉ. अलका जायसवाल ने अपने संबोधन में शोध और वैज्ञानिक अवलोकन को परिभाषित करते  हुए कहा, अकादमिक अनुसंधान और संरक्षण कार्यों के नए आयाम खुल चुके हैं। हमारी बेटियां अब वैज्ञानिक अवलोकन और पर्यावरणीय जागरूकता के क्षेत्र में तकनीकी क्रांति लाकर नए शोधपरक आयाम स्थापित करेंगी।”

एक्सपर्ट ने सिखाए बर्डवाचिंग के सीक्रेट्स

कार्यशाला के मुख्य आकर्षण और संसाधन व्यक्ति, ‘नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन’ के राहुल कुमार और उनकी जांबाज टीम रहे। उन्होंने तकनीकी सत्र के दौरान कुछ ऐसे हैरतअंगेज डिजिटल मॉनिटरिंग टूल्स और ऐप्स का प्रदर्शन किया, जिससे पक्षियों की पहचान, उनकी आवाजों का प्रलेखन और पारिस्थितिकीय आँकड़ों का संकलन चुटकियों में संभव हो जाता है। उन्होंने अपने खतरनाक और रोमांचक क्षेत्रीय अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि कैसे देश का आम नागरिक भी इस डिजिटल क्रांति का हिस्सा बनकर जैव विविधता को बचा सकता है।

“डिजिटल क्रांति का आगाज!” एमडीडीएम कॉलेज की प्राचार्या प्रो. डॉ. अलका जायसवाल, विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता, मुख्य वक्ता राहुल कुमार और अन्य सम्मानित प्रोफेसर कॉलेज के सेमिनार हॉल में पक्षियों की पहचान से जुड़ी हाई-टेक गाइडबुक और डिजिटल टूल्स का विमोचन करते हुए।

परिसर में मचा रोमांच: जब लाइव फील्ड में उतरीं छात्राएँ

थ्योरी सत्र के बाद असली रोमांच तब शुरू हुआ जब कॉलेज परिसर को ही ‘लाइव फील्ड’ में बदल दिया गया। स्नातक और स्नातकोत्तर की सैकड़ों छात्राएं विशेषज्ञों की उंगली थामकर स्थानीय और दुर्लभ पक्षी प्रजातियों का शिकार (कैमरे और टूल्स से) करने मैदान में उतरीं। छात्राओं ने न केवल पक्षियों को लाइव ट्रैक किया, बल्कि उनके डेटा को डिजिटल ऐप्स पर अपलोड करने का व्यावहारिक अभ्यास भी किया।

इस महा-अभियान में कॉलेज के विभिन्न विभागों के शिक्षकों—डॉ. पल्लवी कुमारी, डॉ. रचना कुमारी, डॉ. सूरबाला, डॉ. आशा सिंह यादव, डॉ. नूतन, डॉ. प्रियम फ्रांसिस, डॉ. सरिता, डॉ. दीपमाला, डॉ. स्वेता सिंह, डॉ. सुनीता, डॉ. सुजाता और डॉ. बिमला ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। अंत में डॉ. पल्लवी कुमारी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यशाला का समापन हुआ।

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‘बुलडोजर राज’ को उखाड़ फेंकने समस्तीपुर आ रहे माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य! लोकतंत्र बचाने को लेकर ‘रेड अलर्ट’ पर कम्युनिस्ट कार्यकर्ता

का० रामदेव वर्मा स्मृति दिवस पर 22 मई को कर्पूरी सभागार में मचेगा सियासी तहलका; बंदना सिंह और सुरेंद्र प्रसाद की अगुआई में घर-घर पहुंचा मालेका न्योता

समस्तीपुर/ताजपुर: बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल आने वाला है। देश में बढ़ते “बुलडोजर राज” और तानाशाही के खिलाफ भाकपा-माले ने समस्तीपुर की धरती से एक निर्णायक जंग का ऐलान कर दिया है। आगामी 22 मई 2026 (शुक्रवार) को सुबह 11:00 बजे शहर के ऐतिहासिक कर्पूरी सभागार में बुलडोजर राज के खिलाफ लोकतंत्र की आवाज” विषय पर एक महा-सेमिनार का आयोजन होने जा रहा है।

“लोकतंत्र की आवाज बुलंद करने की तैयारी:” समस्तीपुर और ताजपुर में ‘बुलडोजर राज के खिलाफ’ होने वाले महा-सेमिनार के पोस्टर हाथों में लेकर जनसंपर्क करते भाकपा-माले के वरिष्ठ नेता व संकल्पित कार्यकर्ता।

इस सेमिनार को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करने खुद भाकपा-माले के राष्ट्रीय महासचिव का० दीपंकर भट्टाचार्य समस्तीपुर पहुंच रहे हैं। यह कार्यक्रम लोकप्रिय और कद्दावर कम्युनिस्ट नेता स्वर्गीय का० रामदेव वर्मा के चौथे स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है।

शहर से लेकर गांवों तक सघन जनसंपर्क, थामे पोस्टर:

इस महा-आयोजन को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने के लिए भाकपा-माले ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। मंगलवार और बुधवार को समस्तीपुर के मोहनपुर रोड से लेकर ताजपुर बाजार क्षेत्र के विभिन्न मोहल्लों और दुकानों में सघन जनसंपर्क अभियान चलाया गया।

  • नेताओं की अपील: माले नेत्री बंदना सिंह और वरिष्ठ नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने जनता को जागरूक करते हुए कहा, आज देश में लोकतंत्र और आम जनता के अधिकारों पर चौतरफा हमले हो रहे हैं। गरीबों के आशियानों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है। महंगाई और बेरोजगारी से जनता त्रस्त है। इस दमनकारी शासन को रोकने के लिए व्यापक जन-एकजुटता की जरूरत है।”

इस जनसंपर्क अभियान के दौरान कार्यकर्ताओं के हाथों में सेमिनार के पोस्टर थे और स्थानीय जनता व दुकानदारों के बीच इसे लेकर भारी उत्साह देखा गया। अभियान में रेल विकास मंच के मनोज कुमार सिंह, दीनबंधु प्रसाद, आसिफ होदा, मो० एजाज, प्रभात रंजन गुप्ता, लखींद्र पासवान सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मुस्तैदी से डटे रहे।

ताजपुर में लाल झंडे का महासंग्राम: सड़क पर उतरे मजदूर, मोदी सरकार के ‘4 लेबर कोड’ के खिलाफ आर-पार की जंग!

मजदूरों की हुंकार से हिला समस्तीपुर; ₹700 दिहाड़ी और 200 दिन काम की मांग को लेकर चक्का जाम, जेल में बंद साथियों को रिहा करने की चेतावनी

“हक के लिए महासंग्राम:” ताजपुर में खेग्रामस प्रखंड कमिटी के बैनर तले हाथों में लाल झंडा और ‘4 लेबर कोड’ वापसी के पोस्टर थामे सड़क पर प्रदर्शन करते उग्र मजदूर।

समस्तीपुर/ताजपुर: केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ समस्तीपुर जिला अंतर्गत ताजपुर का जनता मैदान बुधवार को लाल झंडे से पट गया और मजदूरों की गगनभेदी हुंकार से पूरा इलाका दहल उठा। अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) के बैनर तले आयोजित इस देशव्यापी ‘मजदूर हड़ताल’ ने व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है।

मजदूरों ने शहर के मुख्य मार्गों पर एक विशाल आक्रोश जुलूस निकाला और सरकार विरोधी नारे लगाते हुए मुख्य मार्ग को पूरी तरह सांकेतिक रूप से जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना था कि कॉर्पोरेट हितैषी नीतियों को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मजदूरों की प्रमुख मांगें जिनपर अड़े आंदोलनकारी:

  • कालाश्रम कानून वापस लो: मजदूरों की गुलामी का दस्तावेज बन चुके 4 नए श्रमकोड (लेबर कोड) और जीरामजी को तुरंत रद्द किया जाए।
  • ₹700 दिहाड़ी और 200 दिन काम: मनरेगा के तहत काम के दिनों को बढ़ाकर 200 दिन किया जाए और न्यूनतम मजदूरी ₹700 दैनिक तय हो।
  • दमनकारी मुकदमे वापस लो: देश भर में शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे मजदूरों पर दर्ज झूठे मुकदमे वापस लिए जाएं और जेल में बंद मजदूर नेताओं को बिना शर्त रिहा किया जाए।
  • सुरक्षा और अधिकार: सभी असंगठित मजदूरों का सरकारी रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित कर उन्हें लेबर कार्ड और सामाजिक सुरक्षा दी जाए।

इस हड़ताल ने साबित कर दिया है कि यदि सरकार ने जल्द ही इन गरीब-मजदूरों की सुध नहीं ली, तो यह आक्रोश आने वाले दिनों में एक बड़े राष्ट्रव्यापी आंदोलन का रूप अख्तियार कर लेगा।

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बिना राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान के नहीं चलेगी क्लास, बिहार सरकार ने तय किया कड़ा शेड्यूल; आदेश जारी!

बिहार सरकार का बड़ा फरमान: अब ‘राष्ट्रीय गीत’ से शुरू और ‘राज्य गीत’ पर खत्म होंगे सरकारी कार्यक्रम, नियम तोड़ा तो खैर नहीं!

मुजफ्फरपुर/पटना: बिहार सरकार ने राज्य में राष्ट्रीयता की भावना, देश की अस्मिता और राज्य के गौरव को बढ़ावा देने के लिए एक बहुत बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। अब बिहार के सभी सरकारी व निजी स्कूलों के संचालन और सरकारी कार्यक्रमों के नियमों में भारी बदलाव कर दिया गया है। बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग और बिहार शिक्षा परियोजना परिषद (पटना) के आदेश पर मुजफ्फरपुर के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कुमार अरविन्द सिन्हा ने इस संबंध में एक बेहद सख्त और महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है।

इस नए आदेश के बाद अब राज्य के सभी स्कूलों में पढ़ाई शुरू होने से पहले एक कड़ा शेड्यूल तय कर दिया गया है, जिसका पालन करना हर हाल में अनिवार्य होगा।

सांकेतिक (प्रतीकात्‍मक) तस्‍वीर

नियम तोड़ा तो होगी कड़ी कार्रवाई, कड़ाई से पालन करने का अल्टीमेटम

सरकार की ओर से जारी आधिकारिक पत्रांक- Media 1064 के तहत साफ चेतावनी दी गई है कि इस नए प्रोटोकॉल का अक्षरशः और दृढ़ता से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने मुजफ्फरपुर जिले के सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO), कॉम्प्लेक्स रिसोर्स सेंटर (CRC) के समन्वयकों/संचालकों और सभी सरकारी व निजी विद्यालयों (कक्षा 1 से 12वीं तक) के प्रधानाध्यापकों, प्रधान शिक्षकों व प्रभारी प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया है कि वे अपने स्तर पर इसका तत्काल अनुपालन शुरू कराएं। आदेश का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर विभागीय गाज गिरनी तय है।

जानिए क्या है नया कड़ा शेड्यूल:

1. स्कूलों के लिए तय हुआ नया नियम (कक्षा 1 से 12वीं तक): अब राज्य के किसी भी सरकारी या निजी स्कूल में सीधे क्लास या पढ़ाई शुरू नहीं की जा सकेगी। प्रतिदिन स्कूल के दैनिक संचालन की शुरुआत इस तय क्रम में होगी:

  • सबसे पहले: स्कूल की शुरुआत अनिवार्य रूप से राष्ट्रीय गीत‘ (वंदे मातरम) के गायन से की जाएगी।
  • दूसरे नंबर पर: राष्ट्रीय गीत समाप्त होने के तुरंत बाद अनिवार्य रूप से सामूहिक रूप से राष्ट्रगान‘ (जन गण मन) गाया जाएगा।
  • इसके बाद: इन दोनों के गरिमापूर्ण गायन के बाद ही स्कूल की अन्य शैक्षणिक गतिविधियां और कक्षाएं (तय कार्यावली के अनुसार) शुरू हो सकेंगी।

2. सरकारी कार्यक्रमों के लिए बदला पूरा प्रोटोकॉल: सिर्फ स्कूल ही नहीं, बल्कि बिहार सरकार के सभी सरकारी कार्यक्रमों के लिए भी एक बिल्कुल नया और सख्त शेड्यूल जारी किया गया है:

  • शुरुआत: किसी भी सरकारी कार्यक्रम का आगाज़ सबसे पहले राष्ट्रीय गीत के गायन से होगा।
  • दूसरा चरण: इसके ठीक बाद कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों द्वारा राष्ट्रगान का गायन किया जाएगा, जिसके बाद ही मुख्य कार्यक्रम आगे बढ़ेगा।
  • समापन: कार्यक्रम का अंत अनिवार्य रूप से बिहार राज्य गीत‘ (मेरे भारत के कंठहार…) के गायन के साथ ही किया जाएगा। यानी अब बिना बिहार राज्य गीत के कोई भी सरकारी कार्यक्रम समाप्त नहीं हो सकेगा।

क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?

जिला शिक्षा पदाधिकारी कुमार अरविन्द सिन्हा द्वारा जारी पत्र के अनुसार, नई पीढ़ी और समाज में राष्ट्रीयता की भावना, देश की अस्मिता और गौरव को कूट-कूट कर भरने तथा बिहार के गौरवशाली इतिहास की पहचान को अक्षुण्ण रखने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने यह ऐतिहासिक आदेश लागू किया है। गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राष्ट्रगान के संबंध में जारी विस्तृत निर्देशों (जिसमें राष्ट्रगान के सामूहिक गायन के अवसर और गरिमा के नियम शामिल हैं) को भी इस आदेश के साथ जोड़कर कड़ाई से लागू करने को कहा गया है।


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अधिसूचना ठेंगे पर! बिजली बिल और होल्डिंग टैक्स ‘शहरी’ तो गैस सिलेंडर ‘ग्रामीण’ क्यों? तेल कंपनियों की खुली मनमानी!

HPCL अधिकारी का गैर-जिम्मेदाराना बयान- “सरकारी नोटिफिकेशन से कुछ नहीं होता!”… मुजफ्फरपुर की नवगठित नगर पंचायतों में चूल्हा बुझाने की साजिश!

मुजफ्फरपुर में गैस सिलेंडर पर ‘भू-राजनीतिक’ संकट का अजीब बहाना! बंद कमरे से जारी हुआ जनता की जेब काटने का फरमान


मुजफ्फरपुर। बिहार सरकार के गजट नोटिफिकेशन को ठेंगे पर रखकर ऑयल मार्केटिंग कंपनियां जनता की जेब और सब्र का कड़ा इम्तिहान ले रही हैं। ताजा मामला मुजफ्फरपुर के नवगठित नगर पंचायत मुरौल से सामने आया है, जिसे लेकर वार्ड पार्षद आनंद कंद साह ने कलेक्ट्रेट के सामने तल्ख तेवर दिखाते हुए अनशन तक कर दिया। हालांकि, जिला आपूर्ति पदाधिकारी (DSO) के आश्वासन के बाद अनशन भले स्थगित हो गया हो, लेकिन इस पूरे मामले ने पेट्रोलियम कंपनियों और स्थानीय अधिकारियों की संवेदनहीनता की पोल खोल कर रख दी है।

सरकारी तंत्र और तेल कंपनियों के दोहरे रवैये के खिलाफ HPCL का पत्र और लिफाफा दिखाकर आक्रोश जताते मुरौल नगर पंचायत के  पार्षद आनंद कंद साह।

वसूली शहरी, सुविधा ग्रामीण: जनता के साथ भद्दा मजाक

बिहार सरकार की आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक, मुरौल को ग्रामीण से प्रोन्नत कर शहरी क्षेत्र (नगर पंचायत) घोषित किया जा चुका है। इस घोषणा के बाद से यहां के निवासियों से बिजली विभाग DS-2 (शहरी दर) के हिसाब से बिल वसूल रहा है, जमीन की रजिस्ट्री में भारी-भरकम सर्किल रेट (न्यूनतम मूल्य रजिस्टर) MVR वसूला जा रहा है और होल्डिंग टैक्स की मार भी शहरी स्तर की है।यह स्थिति बिहार के अन्‍य नवगठित नगर पंचायतों की भी है।

लेकिन जब बात रसोई गैस (LPG) सप्लाई की आती है, तो हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) इसे ‘ग्रामीण’ इलाका बताकर पल्ला झाड़ लेता है। कंपनी के नए तुगलकी फरमान के मुताबिक, शहरी उपभोक्ताओं को 25 दिन के अंतराल पर अगली रिफिल बुकिंग की सुविधा मिलेगी, जबकि ग्रामीण उपभोक्ताओं को एक सिलेंडर के बाद अगली बुकिंग के लिए पूरे 45 दिन का लंबा इंतजार करना होगा। मुरौल नगर पंचायत के लोग पूछ रहे हैं कि जब टैक्स और बिल शहरी लिया जा रहा है, तो गैस के लिए उन्हें 45 दिनों के ग्रामीण कोटे के नरक में क्यों धकेला जा रहा है?

HPCL मुजफ्फरपुर क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा पार्षद आनंद कंद साह को भेजा गया पत्र, जिसमें नियमों का हवाला देकर शिकायत बंद करने की बात दर्ज है।एवं दायें में स्पीड पोस्ट के जरिए भेजा गया वह लिफाफा, जिसमें बंद कमरे के भीतर तैयार की गई औपचारिकता वाली चिट्ठी भेजी गई।

भू-राजनीतिकस्थिति का अनोखा रोना, बंद की शिकायत!

जब इस मनमानी के खिलाफ वार्ड पार्षद आनंद कंद साह ने आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई (शिकायत संख्या: MPANG/E/2026/0025532), तो HPCL के मुजफ्फरपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने जो जवाब दिया, उसे सुनकर किसी का भी सिर चकरा जाए। मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक महेंद्र सिंह यादव द्वारा जारी पत्र में इस देरी के पीछे वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति” (Geopolitical Situation) को जिम्मेदार ठहराया गया है! स्थानीय लोगों का कहना है कि रूस-यूक्रेन या मिडिल-ईस्ट के तनाव का बहाना बनाकर मुजफ्फरपुर की जनता का चूल्हा बुझाने की यह अजीब साज़िश है। इसी रटे-रटाए तर्क के आधार पर कंपनी ने उपभोक्ता की शिकायत को जबरन ‘क्लोज’ (बंद) भी कर दिया।

ऑडियो टेप से खुलासा: “नोटिफिकेशन से कुछ नहीं होता!”

इस पूरे मामले पर जब न्यूज़ भारत टीवी  के पत्रकार कुमार ‘पंकज’  ने HPCL के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक महेंद्र सिंह यादव से फोन पर सीधा सवाल किया, तो अधिकारी का गैर-जिम्मेदाराना रवैया साफ उजागर हो गया।

जब पत्रकार ने पूछा कि बिहार सरकार के गजट के अनुसार मुरौल शहरी क्षेत्र है, तो उन्हें 25 दिन पर सिलेंडर क्यों नहीं मिल रहा? इस पर अधिकारी ने तल्ख लहजे में कहा, अधिसूचना से कुछ नहीं होता है। एजेंसी जिस टाइम अलॉट होती है, वो रूरल है कि अर्बन है, इसके हिसाब से रहता है।” जब पत्रकार ने प्रतिवाद किया कि बाकी सारे सरकारी विभाग इस अधिसूचना को मान रहे हैं, तो अधिकारी ने अपनी जिम्मेदारी पेट्रोलियम मिनिस्ट्री पर डालते हुए कहा, आप पेट्रोलियम मिनिस्ट्री से सारा कन्फर्मेशन ले सकते हैं, वहीं से गाइडलाइंस आता है। आप मेल आईडी निकालिए और मेल कर दीजिए।”

इंडेन और भारत पेट्रोलियम ने भी साधी चुप्पी, सिंडिकेट बनाकर जनता को लूटने का खेल: हैरानी की बात तो यह है कि इस दोहरी नीति और मनमानी के खेल में सिर्फ हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ही शामिल नहीं है, बल्कि रसोई गैस बाजार की अन्य दिग्गज सरकारी कंपनियां इंडेन (IOCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) भी इसी रटे-रटाए बहाने की आड़ में अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही हैं। जब स्थानीय स्तर पर उपभोक्ताओं और जन प्रतिनिधियों ने अन्य कंपनियों से संपर्क साधा, तो वहां भी वही ढाक के तीन पात वाला रवैया देखने को मिला। ऐसा लगता है कि इन तीनों बड़ी तेल कंपनियों ने आपसी सिंडिकेट बनाकर मुजफ्फरपुर की नवगठित नगर पंचायतों के उपभोक्ताओं को प्रताड़ित करने का मन बना लिया है। कानूनन शहरी क्षेत्र घोषित होने के बावजूद इंडेन और भारत गैस के अधिकारी भी ‘ग्रामीण कोटे की एजेंसी’ का राग अलाप रहे हैं, जिससे साफ होता है कि कॉरपोरेट मुनाफे के आगे इन कंपनियों के लिए बिहार सरकार के गजट नोटिफिकेशन और जनता की सहूलियत की कोई बिसात नहीं है।

जनता का सवाल: इस दोहरी मार का जिम्मेदार कौन?

कंपनियों का तर्क है कि गैस एजेंसी ग्रामीण कोटे से खुली थी, इसलिए नियम नहीं बदलेंगे। मगर सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी नियमों और सीमाओं के बदलने के बाद तेल कंपनियां खुद को देश के कानून से ऊपर समझती हैं? यदि जल्द ही मुरौल और सकरा जैसी नवगठित नगर पंचायतों को शहरी एलपीजी रिफिल चक्र (25 दिन) का लाभ नहीं मिला, तो यह शांत दिख रहा अनशन आने वाले दिनों में पेट्रोलियम कंपनियों के खिलाफ एक बड़े जन-आंदोलन का रूप अख्तियार कर सकता है।

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 ’30 दिन में काम नहीं हुआ तो 31वें दिन सीधे सस्पेंशन!’ – सारण की धरती से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अफसरों को खुली चेतावनी

नोएडा की तर्ज पर चमकेगा सोनपुर; ‘गंगा अंबिका पथसे मिलेगा मरीन ड्राइव का मजा, जमीन देने वालों को घर बैठे मिलेगा 4 गुना मुआवजा!


सोनपुर/डुमरी बुजुर्ग (सारण)। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज सारण जिले के सोनपुर प्रखंड अंतर्गत डुमरी बुजुर्ग पंचायत में आयोजित ‘सहयोग शिविर’ के मंच से भ्रष्ट और सुस्त कार्यप्रणाली वाले अधिकारियों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा एलान कर दिया है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जनता की समस्याओं को लटकाने वाले अफसरों को बख्शा नहीं जाएगा—“30 दिन में काम करो, नहीं तो 31वें दिन सीधे सस्पेंड होने के लिए तैयार रहो!”

मुख्यमंत्री ने ‘सबका सम्मान, जीवन आसान’ के तहत जन समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए इस ‘सहयोग शिविर’ का दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत शुभारंभ किया। उन्होंने घोषणा की कि इस ऐतिहासिक ‘सहयोग शिविर’ और 1100 (ग्यारह सौ) सहयोग हेल्पलाइन नंबर के जरिए पूरे प्रदेश के गांवों और शहरों में रहने वाली जनता की तकलीफों का ऑन-द-स्पॉट और समयबद्ध निपटारा किया जाएगा।

“समृद्ध बिहार के लिए सहयोग का शंखनाद!” — सारण के सोनपुर (डुमरी बुजुर्ग) में आयोजित राज्यव्यापी ‘सहयोग शिविर’ का दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत शुभारंभ करते बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी। इस अवसर पर उपस्थित अन्य गणमान्य अतिथि और अधिकारीगण।

⏱️ तीन नोटिस और सीधे सस्पेंशन का सम्राट फॉर्मूला

मंच से दहाड़ते हुए मुख्यमंत्री ने फाइलों को दबाकर बैठने वाले अफसरों के लिए सख्त टाइमलाइन जारी की। उन्होंने कहा:

  • 10वां दिन: आवेदन मिलने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से संबंधित अधिकारी को पहला नोटिस जाएगा।
  • 20वां दिन: काम न होने पर दूसरा कड़ा नोटिस भेजा जाएगा।
  • 25वां दिन: सुधार का आखिरी और तीसरा मौका दिया जाएगा।
  • 31वां दिन: अगर 30 दिनों के भीतर जनता की समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो 31वें दिन उस अधिकारी को स्वतः (Automatically) निलंबित (Suspend) कर दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने दोटूक कहा, “न्यायालय या जमीन के मामलों का बहाना नहीं चलेगा, अफसरों को स्पष्ट आदेश करना होगा। हम समस्या को समाप्त करने आए हैं, किसी को छोड़ेंगे नहीं!” उन्होंने यह भी बताया कि अब हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को पंचायत स्तर पर ऐसे शिविर लगाए जाएंगे, जहां मंत्री खुद जाकर जनता की समस्याएं सुनेंगे।

30दिनों में जनसमस्याओं का समाधान न करने वाले अधिकारियों को 31वें दिन सीधे सस्पेंड कर दिया जाएगा।“सुस्त अफसरों पर गिरेगी गाज, जनता का होगा राज!” — ‘सबका सम्मान, जीवन आसान’ के संकल्प के साथ ‘सहयोग शिविर’ के मंच से जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी। मुख्यमंत्री ने मंच से ही साफ कर दिया कि 30

🏗️ सोनपुर बनेगा बिहार का नोएडा‘, मरीन ड्राइव की तर्ज पर बनेगा गंगा अंबिका पथ

चुनावी वादे को याद दिलाते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि मैंने सोनपुर सीट को गोद लेने का वादा किया था और आज उस सपने को पूरा कर रहा हूँ। सोनपुर में नया एयरपोर्ट और टाउनशिप बनने जा रही है। इसके साथ ही बाबा हरिहरनाथ के नाम पर एक भव्य नया टाउनशिप विकसित किया जाएगा।

कनेक्टिविटी में क्रांति लाते हुए उन्होंने एलान किया कि दिघवारा ब्रिज, सोनपुर का नया और पुराना जेपी सेतु, महात्मा गांधी सेतु और अगले महीने शुरू होने जा रहे कच्ची दरगाह-राघोपुर पुल समेत पांचों पुलों को जोड़ने के लिए पटना के मरीन ड्राइव की तर्ज पर सोनपुर में गंगा अंबिका पथ (एक्सप्रेस-वे) का निर्माण कराया जाएगा, जो इस पूरे इलाके को दिल्ली के नोएडा की तरह हाईटेक कमर्शियल जोन में बदल देगा।

“ऑन-द-स्पॉट समाधान: जनता के हाथ आया उनका हक!” — सोनपुर के ‘सहयोग शिविर’ में जिला प्रशासन द्वारा शत-प्रतिशत आवेदनों के निष्पादन के बाद लाभुकों को अपने हाथों से बासगीत पर्चा, राशन कार्ड और सरकारी योजनाओं के तहत प्रोत्साहन राशि का चेक सौंपते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी। मुख्यमंत्री के हाथों अधिकार पाकर लाभुकों के चेहरे खिल उठे।

ऑन-द-स्पॉट मिला अधिकार: सीएम ने खुद बांटे पर्चे, राशन कार्ड और चेक ‘सहयोग शिविर’ में केवल वादे और घोषणाएं ही नहीं हुईं, बल्कि जनता को सीधे उनका हक भी मिला। इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सारण जिला प्रशासन द्वारा कराए गए आवेदनों के शत-प्रतिशत निष्पादन के अंतर्गत लाभुकों के बीच खुद अपने हाथों से लाभों का वितरण किया। मुख्यमंत्री ने जरूरतमंद परिवारों को ‘बासगीत पर्चा’, नए ‘राशन कार्ड’ और ‘जन्म प्रमाण पत्र’ सौंपे। इसके साथ ही, सामाजिक सुरक्षा को सुदृढ़ करते हुए ‘मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना’ और ग्रामीण स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए ‘स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)’ के लाभार्थियों को प्रोत्साहन राशि के रूप में चेक प्रदान किए गए। सीधे मुख्यमंत्री के हाथों अपना हक और सम्मान पाकर उपस्थित माताओं-बहनों और बुजुर्गों के चेहरे खुशी से खिल उठे।

💰 बेटी की शादी या आपदा पर घर बैठे 4 गुना मुआवजा

जमीन अधिग्रहण से चिंतित किसानों और स्थानीय लोगों को भरोसा देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “अगर किसी के घर में आपदा है या बेटी की शादी करनी है, तो जिलाधिकारी (DM) को आवेदन दें। सरकार आपके घर और अकाउंट में चार गुना मुआवजा पहुंचाएगी। किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है।” इसके साथ ही उन्होंने अत्यधिक बिजली बिल और स्मार्ट मीटर की दिक्कतों पर भी संज्ञान लेते हुए विभाग को तुरंत सुधार के कड़े निर्देश दिए।

शिविर में जुटी भारी भीड़, खासकर चिलचिलाती धूप में बैठी महिलाओं और माताओं का मुख्यमंत्री ने सहृदय आभार व्यक्त किया और ‘जय हिन्द, जय बिहार’ के नारों के साथ विकास की इस नई क्रांति का शंखनाद किया।


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इतिहास के पन्नों से रूबरू हुईं एमडीडीएम की छात्राएं: रामचंद्र शाही संग्रहालय में खुली अतीत की खिड़की, जीवंत हो उठी भारतीय विरासत!


मुजफ्फरपुर। बदलते दौर में जहाँ युवा पीढ़ी डिजिटल स्क्रीन और सोशल मीडिया की आभासी दुनिया में खोती जा रही है, वहीं मुजफ्फरपुर के प्रतिष्ठित महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय (MDDM College) के इतिहास विभाग ने एक अनूठी और सराहनीय पहल की है। अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के पावन अवसर पर सोमवार को महाविद्यालय की छात्राओं के लिए एक विशेष शैक्षणिक परिभ्रमण  का आयोजन किया गया। इतिहास विभाग की अध्यक्ष डॉ. प्रांजलि के कुशल नेतृत्व में छात्राओं का यह जत्था मुजफ्फरपुर के ऐतिहासिक रामचंद्र शाही संग्रहालय  पहुँचा।

इस परिभ्रमण का मुख्य उद्देश्य किताबी ज्ञान की सीमाओं को लांघकर छात्राओं को भारतीय पुरातत्व, प्राचीन संस्कृति और अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से प्रत्यक्ष रूप से रूबरू कराना था। संग्रहालय की चहारदीवारी के भीतर कदम रखते ही छात्राओं के लिए मानो समय का पहिया सदियों पीछे घूम गया और इतिहास के पन्ने खुद-ब-खुद जीवंत हो उठे।

रामचंद्र शाही संग्रहालय, मुजफ्फरपुर के मुख्य कक्ष में प्रदर्शित प्राचीन पुरावशेषों और टेराकोटा कलाकृतियों का बारीकी से अध्ययन करतीं एमडीडीएम कॉलेज के इतिहास विभाग की छात्राएं। साथ में मार्गदर्शन करते विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक।

अतीत का झरोखा: संग्रहालय में बिखरी विरासत का लाइव

रामचंद्र शाही संग्रहालय पहुंचने पर छात्राओं का उत्साह देखते ही बनता था। गुलाबी और सफेद कॉलेज परिधान में सजी छात्राओं ने जैसे ही संग्रहालय के मुख्य दीर्घा (गैलरी) में प्रवेश किया, उनकी आँखें कौतूहल और गर्व से चमक उठीं।

डॉ. प्रांजलि के साथ-साथ संग्रहालय के विशेषज्ञों और गाइडों ने छात्राओं को एक-एक प्रदर्शित पुरावशेष  के बारे में विस्तार से समझाया। लकड़ी और कांच के बड़े-बड़े शोकेस (प्रदर्शन मंजूषा) में सहेज कर रखी गई प्राचीन मूर्तियाँ, मिट्टी के बर्तन (मृदभांड), टेराकोटा की कलाकृतियां और प्राचीन औजारों को देखकर छात्राओं ने भारतीय इतिहास के क्रमिक विकास को समझा।

  • पुरातत्व की व्यावहारिक समझ: इतिहास की कक्षा में ‘टेराकोटा’ या ‘पाषाण काल के औजार’ पढ़ना एक बात है, लेकिन उन्हें अपनी आँखों के सामने देखना बिल्कुल अलग अनुभव होता है। छात्राओं ने देखा कि कैसे हमारे पूर्वजों ने बिना किसी आधुनिक तकनीक के सिर्फ अपने हाथों के हुनर से मिट्टी और पत्थरों को जीवंत आकृतियों में ढाल दिया था।
  • डिजिटल युग में इतिहास का दस्तावेजीकरण: परिभ्रमण के दौरान एक बेहद खूबसूरत नजारा देखने को मिला। आज की आधुनिक छात्राएं अपनी इस ऐतिहासिक यात्रा को केवल यादों में नहीं, बल्कि अपने स्मार्टफोन में भी सहेज रही थीं। कई छात्राएं शोकेस के पास झुककर कलाकृतियों की तस्वीरें ले रही थीं, तो कुछ महत्वपूर्ण जानकारियों को अपनी डायरी में नोट कर रही थीं।

अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर शैक्षणिक परिभ्रमण के उपरांत रामचंद्र शाही संग्रहालय (कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार) के मुख्य द्वार पर भगवान बुद्ध की प्रतिमा के पास डॉ. प्रांजलि एवं अन्य सहयोगियों के साथ गौरवमयी मुस्कान बिखेरतीं एमडीडीएम कॉलेज की छात्राएं।

विरासत को संजोने के प्रयासों पर गंभीर मंथन

इस शैक्षणिक परिभ्रमण का एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू “धरोहर जागरूकता कार्यक्रम” रहा। छात्राओं ने इस बात पर गहन मंथन किया कि आखिर हमारी ऐतिहासिक धरोहरों को बचाना क्यों जरूरी है।

डॉ. प्रांजलि ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा:

“संग्रहालय केवल पुरानी और बेजान वस्तुओं को रखने की जगह नहीं हैं। ये हमारी सभ्यता का डीएनए (DNA) हैं। कोई भी समाज या राष्ट्र तब तक आगे नहीं बढ़ सकता, जब तक वह अपने अतीत को नहीं समझता। आज अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर हमारा यहाँ आना तभी सार्थक होगा, जब हम इन विरासतों के संरक्षण का संकल्प लें।”

छात्राओं ने भी माना कि बिहार की धरती (विशेषकर वैशाली और मुजफ्फरपुर का क्षेत्र) पुरातत्व के दृष्टिकोण से अत्यंत समृद्ध है। वज्जी संघ की इस ऐतिहासिक भूमि पर दफन इतिहास को संजोने में रामचंद्र शाही संग्रहालय जैसे संस्थान जो भूमिका निभा रहे हैं, वह वंदनीय है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फील्ड ट्रिप या शैक्षणिक परिभ्रमण छात्राओं के बौद्धिक विकास के लिए ‘संजीवनी’ का काम करते हैं। इतिहास जैसे विषय को अक्सर लोग ‘रटने वाला विषय’ मान लेते हैं, लेकिन जब छात्राएं खुद प्राचीन काल की मूर्तियों की बनावट, उनके गाउन, मुकुट और कलाशैलियों का विश्लेषण करती हैं, तो उनकी तार्किक क्षमता  का विकास होता है।

इस परिभ्रमण ने छात्राओं में न केवल परीक्षा के दृष्टिकोण से ज्ञान का वर्धन किया, बल्कि उनमें अपनी संस्कृति के प्रति एक गहरी संवेदनशीलता और गौरव का भाव भी पैदा किया। कार्यक्रम के अंत में सभी छात्राओं और प्राध्यापकों ने संग्रहालय के मुख्य द्वार पर स्थापित भगवान बुद्ध की सुनहरी प्रतिमा के सामने एक सामूहिक तस्वीर भी खिंचवाई, जो इस यादगार दिन के समापन का प्रतीक बनी।


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