मौत के कुएं को चीरकर बाहर आया 3 साल का मासूम: 300 फीट गहरे बोरवेल में फंसी जिंदगी जीती, रात भर चले ऑपरेशन के बाद पीयूष सुरक्षित बाहर

गया/फतेहपुर: बिहार के गया जिले के फतेहपुर प्रखंड अंतर्गत रघुनगर गांव में एक ऐसी घटना घटी जिसने पूरे देश की सांसें थाम दीं। खेलते-खेलते एक 3 वर्षीय मासूम बच्चा पीयूष कुमार 300 फीट गहरे खुले बोरवेल के काल में समा गया। घटना की सूचना आग की तरह फैली और देखते ही देखते मौत के उस अंधेरे कुएं के चारों तरफ प्रशासनिक अमला और रेस्क्यू टीमों का जमावड़ा लग गया। हर तरफ बस एक ही दुआ थी कि बच्चा सुरक्षित बाहर आ जाए। रात भर चले सांसें रोक देने वाले इस महा-ऑपरेशन के बाद आखिरकार मौत हार गई और मासूम पीयूष कुमार को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

मौत को मात देकर मां की आगोश में मासूम: गया के रघुनगर में 300 फीट गहरे बोरवेल से सुरक्षित निकाले जाने के बाद अपनी मां से लिपटा 3 वर्षीय पीयूष कुमार, पास में मौजूद रेस्क्यू टीम के सदस्य।

40 फीट की गहराई पर फंसा था मासूम : 300 फीट गहरा यह बोरवेल किसी बड़ी अनहोनी को दावत दे रहा था। खेलते समय जब पीयूष कुमार इसमें गिरा, तो वह करीब 40 फीट की गहराई पर जाकर एक मोड़ पर फंस गया। अगर वह और नीचे चला जाता तो उसे बचाना बेहद मुश्किल हो जाता। घटना की जानकारी मिलते ही एनडीआरएफ की 9वीं वाहिनी बिहटा और एसडीआरएफ की टीमें अत्याधुनिक उपकरणों के साथ तुरंत मौके पर पहुंचीं और मोर्चा संभाल लिया।

कैमरे से मिली सटीक लोकेशन, मां की आवाज ने बांधा ढांढस:  रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करते ही सबसे पहले बोरवेल के अंदर विशेष रूप से डिजाइन किए गए कैमरे डाले गए। कैमरे की मदद से पीयूष कुमार की सटीक स्थिति का पता लगाया गया, जिससे यह साफ हुआ कि वह 40 फीट पर अटका हुआ है। इसके बाद रेस्क्यू टीम ने आधुनिक संचार प्रणाली (कम्युनिकेशन सिस्टम) का उपयोग करते हुए बोरवेल के भीतर माइक और स्पीकर के जरिए पीयूष कुमार की उसकी मां से बातचीत कराई। मां की ममता भरी आवाज जब बोरवेल के अंधेरे में बच्चे के कानों तक पहुंची, तो उसका मनोबल बना रहा और उसने हिम्मत नहीं हारी।

सुनियोजित रणनीति से जीता रात भर चला ऑपरेशन : एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने बिना एक पल गंवाए एक बेहद सुनियोजित रणनीति तैयार की। आधुनिक रेस्क्यू उपकरणों और हाइड्रोलिक सिस्टम की मदद ली गई। पूरी रात रेस्क्यू कर्मी बिना सोए, बेहद सावधानी से एक-एक इंच आगे बढ़ते रहे, क्योंकि एक छोटी सी चूक भी बच्चे की जान पर भारी पड़ सकती थी। आखिरकार, भोर होते-होते रेस्क्यू टीम को बड़ी कामयाबी मिली और पीयूष कुमार को सकुशल अंधेरे गड्ढे से बाहर खींच लिया गया।

रात भर चला जिंदगी बचाने का महा-अभियान: बोरवेल के मुहाने पर आधुनिक उपकरणों की मदद से बेहद सतर्कता के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देते एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जांबाज जवान।

कमांडेंट ने दी जानकारी, परिजनों की आंखों में आए खुशी के आंसू : एनडीआरएफ के कमांडेंट हितेंद्र पाल सिंह कंडारी ने सफल ऑपरेशन के बाद प्रेस ब्रीफिंग में पूरी रेस्क्यू प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि टीम की सजगता और आधुनिक तकनीक के सटीक इस्तेमाल से इस जटिल ऑपरेशन को अंजाम दिया जा सका। बाहर निकालते ही डॉक्टरों की टीम द्वारा बच्चे की गहन चिकित्सा जांच की गई। पूर्ण रूप से स्वस्थ पाए जाने के बाद पीयूष कुमार को उसके माता-पिता और परिजनों को सौंप दिया गया। अपने लाडले को दोबारा गोद में पाकर माता-पिता की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। पूरे रघुनगर गांव में जश्न का माहौल है और लोग रेस्क्यू टीमों को देवदूत मानकर उनका आभार जता रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह बड़ा संदेश दिया है— “बोरवेल सील करें। जीवन बचाएं।”

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