Sunday, June 7, 2026

लूट का धंधा बंद! बिहार सरकार का प्राइवेट स्कूलों पर नकेल: स्कूलों को अब किताबों की सूची ,एवं छात्रों से लिए जाने वाले शुल्‍क के पाई-पाई का हिसाब नोटिस बोर्ड एवं वेबसाइट पर डालना जरूरी, वरना रद्द होगी मान्यता!

बिहार में निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक; शिक्षा विभाग ने जारी किया कड़ा दिशा-निर्देश। अब फीस, ड्रेस या किताबों के लिए अभिभावकों पर नहीं बना सकेंगे दबाव। नियम तोड़े तो रद्द होगी निजी स्कूलों की मान्यता, लगेगा भारी आर्थिक जुर्माना।

विशेष ब्यूरो, पटना/मुजफ्फरपुर । 18 मई 2026

बिहार के लाखों अभिभावकों को चूसने वाले निजी स्कूलों के ‘लूट तंत्र’ पर सम्राट सरकार के शिक्षा विभाग ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा प्रहार किया है। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्द्र द्वारा जारी एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक आधिकारिक आदेश (ज्ञापांक संख्या: 08 / RTE 15-14 / 2026-661) ने राज्य के सभी प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर पूरी तरह से नकेल कस दी है।

सरकार ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि स्कूल कोई ‘मुनाफा कमाने की दुकान’ नहीं हैं, बल्कि यह एक समाज सेवा है। अगर किसी भी स्कूल ने अब नियमों का उल्लंघन किया, तो उसकी मान्यता सीधे रद्द कर दी जाएगी और भारी आर्थिक जुर्माना ठोंका जाएगा।

वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर खोलनी होगी कुंडली

नए फरमान के मुताबिक, अब कोई भी प्राइवेट स्कूल गुप्त तरीके से या बीच सत्र में फीस नहीं बढ़ा सकेगा। सभी निजी स्कूलों को अपनी हर प्रकार की फीस का एक-एक विवरण स्कूल के नोटिस बोर्ड और अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने वाले स्कूलों को सरकार बख्शने के मूड में नहीं है।

नो प्रॉफिट, नो लॉसपर चलेंगे स्कूल:

फीस बढ़ाने और दोबारा एडमिशन के नाम पर वसूली बंद: शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि स्कूल ‘नो प्रॉफिट नो लॉस ‘ (न लाभ, न हानि) के सिद्धांत पर चलेंगे। सामान्यतः फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। यदि फीस बढ़ाना अनिवार्य है, तो वह ‘बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2019’ के तहत तय सीमा के भीतर ही होगी। सबसे बड़ी राहत यह है कि अब री-एडमिशन (दोबारा नामांकन) के नाम पर कोई भी शुल्क नहीं लिया जा सकेगा।

शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्द्र द्वारा जारी एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिआधिकारिक आदेश की तस्‍वीर

फीस बकाया होने पर बच्चों को नहीं कर सकेंगे प्रताड़ित : अक्सर देखा जाता था कि फीस बाकी होने पर बच्चों को परीक्षा देने से रोक दिया जाता था या मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। सरकार ने इस पर सख्त रोक लगाते हुए कहा है कि किसी भी छात्र की फीस बकाया होने पर उसे क्लास करने, परीक्षा देने या रिजल्ट प्राप्त करने से वंचित नहीं किया जा सकता।

कॉपी-किताब और यूनिफॉर्म के कमीशन खेलपर ताला: स्कूल अब किसी खास दुकान, वेंडर या विशिष्ट ब्रांड से ही किताबें, कॉपियां या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर नहीं कर सकते। अभिभावक खुले बाजार से कहीं से भी सामान खरीदने के लिए पूरी तरह आजाद हैं।

 स्कूलों को किताबों की सूची पहले ही नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर डालनी होगी । साथ ही, हर साल किताबों और ड्रेस का पैटर्न बदलने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। बहुत जरूरी होने पर ‘शिक्षक-अभिभावक संघ’ (PTA) की अनुमति लेनी होगी। निर्धारित सिलेबस से अलग कोई भी अतिरिक्त सामग्री खरीदने का दबाव नहीं बनाया जाएगा।

सांकेतिक (प्रतीकात्‍मक) तस्‍वीर

प्रकाशक का नाम और दाम बताना जरूरी; किताबों के ‘कमीशन-खेल’ पर पर कड़ा प्रहार!

निजी स्कूलों और चुनिंदा प्रकाशकों के बीच चलने वाले अरबों रुपये के ‘कमीशन-खेल’ को ध्वस्त करने के लिए शिक्षा विभाग ने अचूक चक्रव्यूह रचा है। नए नियमों के मुताबिक, स्कूलों को शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले ही किताबों की पूरी सूची अपने नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर अनिवार्य रूप से अपलोड करनी होगी। इस सूची में सिर्फ किताबों के नाम नहीं, बल्कि उनके प्रकाशक का नाम, छपी हुई कीमत  और उस पर मिलने वाली छूट  का पूरा विवरण साफ-साफ  दर्ज करना होगा, ताकि अभिभावक खुले बाजार में ठगे न जाएं। इसके साथ ही, हर साल मोटी कमाई के चक्कर में जानबूझकर किताबें बदलने के धंधे पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है। अब स्कूल हर साल अपनी मर्जी से पाठ्यपुस्तकें नहीं बदल सकेंगे, जिससे अभिभावकों को हर साल नई और महंगी किताबें खरीदने के आर्थिक बोझ से बहुत बड़ी राहत मिलेगी।

वेबसाइट बंदरखने वाले संचालाक स्कूलों पर गिरेगी गाज!

बिहार के कई निजी स्कूलों ने कागजों पर दिखाने के लिए अपनी वेबसाइट तो बना रखी है, लेकिन हकीकत में वे सालों से बंद पड़ी हैं या ‘अंडर मेंटेनेंस’ का बोर्ड टांगे रखती हैं। इस चालाकी के कारण अभिभावकों को कभी पता ही नहीं चल पाता कि स्कूल किस मद में क्या और कितनी फीस वसूल रहा है। स्कूल प्रशासन जानबूझकर डिजिटल पारदर्शिता से बचता रहा है और जानकारी अपडेट नहीं करता। लेकिन अब शिक्षा विभाग के इस नए आदेश के बाद ऐसी हेराफेरी करने वाले स्कूलों की खैर नहीं है। अगर सरकार के निर्देश के बाद भी किसी स्कूल की वेबसाइट चालू नहीं पाई गई या उस पर फीस का पूरा ब्यौरा अपडेट नहीं मिला, तो इसे आदेश की खुली अवहेलना माना जाएगा। सूत्रों की मानें तो ऐसे ‘वेबसाइट बंद’ रखने वाले चालाक स्कूलों की मान्यता सबसे पहले रद्द करने और उन पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाने की तैयारी कर ली गई है।

डिजिटल कुंडली से आएगी पारदर्शिता: अब हर बुनियादी जानकारी होगी पब्लिक!

शिक्षा विभाग के इस क्रांतिकारी आदेश का सीधा और साफ मतलब यह है कि अब कोई भी निजी स्कूल अपनी मनमानी को परदे के पीछे नहीं छिपा सकेगा। स्कूलों को अपनी मान्यता  का स्टेटस, फीस का पाई-पाई का विवरण, लागू किताबों की सूची और यहाँ तक कि यूनिफॉर्म (ड्रेस) का मॉडल जैसी तमाम बुनियादी जानकारियां पूरी तरह सार्वजनिक करनी होंगी। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यह सब सिर्फ स्कूल के नोटिस बोर्ड पर चिपका देने भर से काम नहीं चलेगा, बल्कि इसे हर हाल में लाइव वेबसाइट पर भी अपलोड करना होगा। इस कदम से आने वाले समय में राज्य के हर छोटे-बड़े निजी स्कूल के लिए एक एक्टिव और अपडेटेड वेबसाइट रखना कानूनी रूप से अनिवार्य हो जाएगा। जब स्कूल की पूरी ‘डिजिटल कुंडली’ इंटरनेट पर हर किसी के सामने होगी, तो व्यवस्था में शत-प्रतिशत पारदर्शिता आ जाएगी और अभिभावकों को दफ्तरों के चक्कर काटे बिना, एक क्लिक पर सारी सच्चाई पता चल जाएगी।

नियम तोड़ा तो कमिश्नर के यहाँ होगी सीधी शिकायत

अगर कोई स्कूल सरकार के इस आदेश को ठेंगे पर रखता है, मनमानी फीस वसूलता है या किसी खास दुकान से सामान लेने का दबाव बनाता है, तो अभिभावक चुप न बैठें। अभिभावकों को यह अधिकार दिया गया है कि वे ऐसी किसी भी मनमानी के खिलाफ  प्रमंडलीय आयुक्त (Divisional Commissioner) कार्यालय में अपनी लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जहाँ त्वरित कार्रवाई की जाएगी।

कानूनी शिकंजे में स्कूल प्रशासन (तकनीकी जानकारी):

यह ऐतिहासिक आदेश राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट 2009, बिहार राज्य के बच्चों की मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा नियमावली 2011, और बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम 2019 के कानूनी प्रावधानों के तहत जारी किया गया है। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्द्र के हस्ताक्षर से जारी यह आदेश 12 मई 2026 से ही पूरे सूबे में प्रभावी हो चुका है। विभाग ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को आदेश का सख्ती से पालन कराने और औचक निरीक्षण करने का निर्देश दिया है।

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लूटखोर स्कूलों पर IAS का महा-ऐक्शन! 310 निजी स्कूलों की मनमानी पर चला प्रमंडलीय आयुक्त का डंडा; 5 नामी स्कूलों पर ₹1-1 लाख का भारी जुर्माना

अभिभावकों को मिली बड़ी राहत: जांच के घेरे में आए प्रमंडल के 3200 से अधिक स्कूल, मनमानी फीस बढ़ाने वाले 310 स्कूलों को नोटिस; कइयों ने टेके घुटने, वापस ली बढ़ी फीस


मुजफ्फरपुर (तिरहुत प्रमंडल)। तिरहुत प्रमंडल के निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों की जेब पर डाका डालने के खेल का प्रमंडलीय आयुक्त (IAS) गिरिवर दयाल सिंह ने बड़ा भंडाफोड़ किया है। प्रमंडल के 3200 से अधिक स्कूलों की सघन जांच के बाद ‘बिहार निजी विद्यालय शिक्षा विनियमन अधिनियम 2019’ की धज्जियां उड़ाने वाले 310 स्कूलों पर प्रशासन का तगड़ा चाबुक चला है।

कड़ा रुख अख्तियार करते हुए आयुक्त ने सुनवाई से नदारद रहने और सरकारी नियमों को ठेंगा दिखाने वाले पश्चिम चंपारण के 5 बड़े और नामी स्कूलों पर एक-एक लाख रुपये का भारी अर्थदंड (जुर्माना) ठोक दिया है। प्रशासन की इस ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ से प्रमंडल के शिक्षा माफियाओं और मनमानी करने वाले स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया है।

प्राइवेट स्‍कूल संचालको को निर्देश देते प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह       

इन 5 ‘अहंकारीस्कूलों पर लगा 1-1 लाख का जुर्माना

प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने साफ किया कि जिन स्कूलों ने सरकार के नोटिस को गंभीरता से नहीं लिया, न जवाब दिया और न सुनवाई में आए, उनके खिलाफ अधिनियम की कंडिका 7 (सेक्शन 7) के तहत 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इन स्कूलों में शामिल हैं:

  1. सेंट कैरेंस स्कूल (बेतिया प्रखंड, पश्चिम चंपारण)
  2. सेंट थॉमस स्कूल (चनपटिया, पश्चिम चंपारण)
  3. सिद्धार्थ पब्लिक स्कूल (नौतन, पश्चिम चंपारण)
  4. एसएन इंटरनेशनल स्कूल (नरकटियागंज, पश्चिम चंपारण)
  5. हॉली मिशन स्कूल (बगहा, पश्चिम चंपारण)

अगर ये स्कूल अब भी नहीं सुधरे और दोबारा यही कृत्य दोहराया, तो जुर्माना राशि बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी जाएगी। इसके बाद भी यदि ये आदतन (Habitual) नियमों का उल्लंघन करते रहे, तो इन विद्यालयों की मान्यता हमेशा के लिए समाप्त (रद्द) कर दी जाएगी।” > गिरिवर दयाल सिंह, प्रमंडलीय आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल

पश्चिमी चंपारण, वैशाली और ये शिवहर में थोड़ी स्थिति खराब है, खैर अभी तो आगे इस चीज को हम लोग सुनेंगे। लेकिन अच्छी बात है कि पश्चिमी चंपारण के जिला पदाधिकारी ने बहुत प्रोएक्टिव काम किया, वहां के जिला शिक्षा पदाधिकारी ने अच्छा काम किया,


जुर्माने की कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है और हम लोग ₹1,00,00,00 जुर्माना लगा रहे हैं। वो सिर्फ इसलिए लगा रहे हैं ताकि सभी विद्यालय जो हैं, इस बात को सजग हो जाएं कि सरकार की जो मंशा है, सरकार का जो आदेश है, सरकार का जो नियम है, उसका अक्षरशः अनुपालन करना है। हम लोग सब लोग ये प्रयास करते हैं कि विद्यालय अच्छे ढंग से चलें और इसमें बहुत जरूरी है कि जो भी सरकार की नियमावली है, उसका अक्षरशः अनुपालन किया जाए।


अभिभावकों की जेब पर डाका: किताबों, ड्रेस और ट्रांसपोर्ट में अप्रत्याशितलूट

लोक संवाद और विभिन्न माध्यमों से प्रमंडलीय आयुक्त को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि सत्र 2025-26 और 2026-27 के लिए निजी स्कूलों ने शिक्षण शुल्क (ट्यूशन फीस), ट्रांसपोर्ट, परीक्षा शुल्क और पोशाक शुल्क में अप्रत्याशित वृद्धि कर दी है। इसके बाद आयुक्त के निर्देश पर जिला पदाधिकारियों (DM) और जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) की टीम ने प्रमंडल के कुल 3,212 निजी स्कूलों का औचक निरीक्षण किया। जांच में 310 स्कूल सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन करते दोषी पाए गए, जिनमें अकेले पश्चिम चंपारण के सबसे अधिक 72 स्कूल शामिल हैं। इसके बाद पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी और मुजफ्फरपुर के दोषी स्कूलों पर भी गाज गिरनी तय है।

कमिश्नर की सख्ती के आगे झुके स्कूल: वापस करनी होगी वसूली गई पाई-पाई

सुनवाई के पहले ही दिन कमिश्नर की सख्ती का बड़ा असर देखने को मिला। पश्चिम चंपारण के 72 दोषी स्कूलों में से अधिकांश ने घुटने टेकते हुए अपनी बढ़ी हुई फीस को तत्काल वापस लेने का लिखित हलफनामा दे दिया है।

  • वसूली गई फीस होगी एड्जस्ट: आयुक्त ने कड़ा आदेश दिया है कि जो स्कूल निर्धारित सीमा से अधिक शुल्क वसूल चुके हैं, वे या तो अभिभावकों को कैश वापस करेंगे या आगे की फीस में उसे समायोजित (Adjust) करेंगे।
  • नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर डालनी होगी लिस्ट: पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी स्कूलों को अपने सूचना पट्ट और ऑफिशियल वेबसाइट पर संशोधित (कम की गई) फीस का ब्योरा सार्वजनिक करना होगा ताकि अभिभावक गुमराह न हों।

अब किसी खास दुकानसे सामान खरीदने की मजबूरी नहीं, कमिश्नर के कड़े निर्देश:

  • दुकान-ब्रांड की बाध्यता खत्म: स्कूल प्रबंधन किसी भी अभिभावक को किसी विशेष दुकान या ब्रांड से ही किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। अभिभावक खुले बाजार से कहीं से भी सामग्री ले सकते हैं।
  • पैटर्न बदलने पर रोक: सिर्फ कमाई और कमीशन खोरी के उद्देश्य से स्कूल हर साल यूनिफॉर्म और किताबों का पैटर्न नहीं बदल सकेंगे।
  • अभिभावकों से अपील: आयुक्त ने जनता से अपील की है कि यदि कोई भी स्कूल अब भी नियम विरुद्ध फीस वसूलता है या दबाव बनाता है, तो तुरंत जिला प्रशासन को इसकी सूचना दें, त्वरित ऐक्शन लिया जाएगा।

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डेढ़ साल से लापता सकरा की नाबालिग कानपुर में मिली! पुलिस ने जाल बिछाकर आशिक को दबोचा

मुजफ्फरपुर (सकरा): मुजफ्फरपुर पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। सकरा थाना क्षेत्र से करीब डेढ़ साल पहले रहस्यमय तरीके से गायब हुई एक नाबालिग लड़की को पुलिस ने उत्तर प्रदेश के कानपुर से सकुशल बरामद कर लिया है। इसके साथ ही इस पूरे अपहरण कांड में संलिप्त मुख्य आरोपी (प्रेमी) को भी पुलिस ने कानपुर में ही धर दबोचा है। पकड़ा गया आरोपी बालिग बताया जा रहा है, जिसने नाबालिग को अपने जाल में फंसाया था।

कानपुर से अपहृत नाबालिग लड़की की सकुशल बरामदगी और आरोपी की गिरफ्तारी के संबंध में प्रेस वार्ता कर पूरी घटना की जानकारी देते पूर्वी-2 के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) मनोज कुमार सिंह।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के स्पेशल 20′ अभियान का बड़ा असर

मामले की पूरी जानकारी देते हुए पूर्वी-2 के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) मनोज कुमार सिंह ने प्रेस वार्ता में बताया कि वर्तमान में वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP), मुजफ्फरपुर के कड़े निर्देशन में जिले भर में अपहृत युवक-युवतियों की बरामदगी के लिए एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत पुलिस की एक विशेष टीम लगातार तकनीकी इनपुट खंगाल रही थी।

क्या है पूरा मामला?

घटना की शुरुआत साल 2024 के आखिर में हुई थी। दिनांक 18 दिसंबर 2024 को सकरा थाना क्षेत्र के एक गांव से नाबालिग लड़की अचानक अपने घर से गायब हो गई थी। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने सकरा थाना कांड संख्या 635/24 दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया था।

वक्त बीतता गया और मामला करीब डेढ़ साल पुराना हो गया, लेकिन पुलिस ने हार नहीं मानी। तकनीकी अनुसंधान और मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस को सटीक इनपुट मिला कि अपहृत लड़की और उसे भगा ले जाने वाला युवक दोनों उत्तर प्रदेश के कानपुर में अपनी पहचान छिपाकर रह रहे हैं।

कानपुर में पुलिस की सर्जिकल स्ट्राइक

सटीक सूचना मिलते ही सकरा थाने की पुलिस टीम ने बिना वक्त गंवाए उत्तर प्रदेश के कानपुर में छापेमारी की। पुलिस ने वहां घेराबंदी कर न सिर्फ नाबालिग लड़की को सकुशल बरामद किया, बल्कि मौके से आरोपी युवक को भी गिरफ्तार कर लिया।

प्रेस वार्ता के दौरान जब पत्रकारों ने सवाल किया कि क्या दोनों नाबालिग हैं? तो SDPO मनोज कुमार सिंह ने साफ किया कि लड़की नाबालिग है जबकि उसे भगाकर ले जाने वाला लड़का बालिग है। पुलिस अब आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजने की तैयारी कर रही है, वहीं नाबालिग को कोर्ट में बयान दर्ज कराने के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस कामयाबी के बाद से पीड़िता के परिवार ने राहत की सांस ली है।


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बिहार के ‘टॉपरों की फैक्ट्री’ सिमुलतला में 11वीं के लिए मची होड़, 104 सीटों के लिए काउंटडाउन शुरू; 24 मई तक आखिरी मौका!

सत्र 2026-2028 के लिए ऑनलाइन आवेदन जारी, सीमित सीटों पर एडमिशन के लिए देश भर के बिहारी छात्रों में जबरदस्त क्रेज।


विशेष संवाददाता, जमुई। बिहार में शिक्षा के क्षेत्र का सिरमौर कहे जाने वाले सिमुलतला आवासीय विद्यालय (जमुई) में कक्षा 11वीं (सत्र 2026-2028) में दाखिले की जंग शुरू हो चुकी है। हर साल मैट्रिक परीक्षा में टॉपर्स की झड़ी लगाने वाले इस प्रतिष्ठित संस्थान में दाखिला पाकर अपना भविष्य संवारने के लिए छात्रों और अभिभावकों के बीच जबरदस्त होड़ मची है।

विद्यालय प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, इस बार 11वीं कक्षा में नामांकन के लिए कुल रिक्त सीटों की संख्या मात्र 104 है। इन सीमित सीटों पर सर्वश्रेष्ठ मेधावी छात्रों का चयन किया जाएगा। एडमिशन के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया तेजी से चल रही है।

समय कम, मुकाबला कड़ा: 24 मई अंतिम तिथि

अगर आप भी अपने बच्चे को सिमुलतला के कड़े और अनुशासित माहौल में पढ़ाकर भविष्य का टॉपर या प्रशासनिक अधिकारी बनाना चाहते हैं, तो बिल्कुल भी देर न करें। ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 24 मई 2026 तय की गई है। सीटें बेहद सीमित होने के कारण आखिरी दिनों में वेबसाइट पर भारी ट्रैफिक होने की संभावना है, इसलिए विद्यालय प्रबंधन ने इच्छुक अभिभावकों और विद्यार्थियों से जल्द से जल्द आवेदन करने की अपील की है।

यहाँ करें आवेदन:

कक्षा 11वीं में नामांकन से जुड़ी विस्तृत जानकारी, पात्रता और ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए छात्र सीधे आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं: 👉 www.biharsimultala.com


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आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हुई धर्मनगरी राजगीर: राजकीय मलमास मेला 2026 का भव्य शंखनाद

  • मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ब्रह्मकुंड परिसर में किया पवित्र मेले का विधिवत उद्घाटन
  • महाआरती और पूजन से गूंजा परिसर; मुख्यमंत्री ने की प्रदेश की सुख, समृद्धि और शांति की कामना
  • जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति ने बढ़ाया आयोजन का गौरव

राजगीर। सनातन परंपरा और अगाध आस्था के वैश्विक केंद्र धर्मनगरी राजगीर के ऐतिहासिक ब्रह्मकुंड परिसर में रविवार को ‘राजकीय राजगीर मलमास मेला 2026’ का अत्यंत भावपूर्ण और भक्तिमय माहौल में भव्य शुभारंभ हुआ। इस पावन अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री  सम्राट चौधरी ने दीप प्रज्वलित कर और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजन व महाआरती कर एक महीने तक चलने वाले इस आध्यात्मिक महाकुंभ का उद्घाटन किया।

आस्था और सनातनी गौरव का संगम: राजगीर के ऐतिहासिक ब्रह्मकुंड परिसर में आयोजित ‘राजकीय राजगीर मलमास मेला 2026’ के भव्य उद्घाटन समारोह के मंच पर विराजमान बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, अयोध्या के पूज्य जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर जी महाराज, नालंदा के जिलाधिकारी कुंदन कुमार एवं पंडा कमेटी के अन्य गणमान्य अतिथिगण।

मेले के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए भावुक स्वर में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, “मलमास मेला सनातन परंपरा में विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। यह केवल एक मेला नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। यहाँ आने वाले करोड़ों श्रद्धालु पुण्य अर्जित कर अपने जीवन को दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण करते हैं।” मुख्यमंत्री ने पवित्र ब्रह्मकुंड की महत्ता को नमन करते हुए संपूर्ण बिहार परिवार की सुख-समृद्धि, शांति, प्रगति एवं जनकल्याण की मंगलकामना की।

अतिथियों का भव्य अभिनंदन और संतों का सान्निध्य इस ऐतिहासिक धार्मिक अनुष्ठान में अयोध्या से पधारे जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर जी महाराज की उपस्थिति मुख्य आकर्षण रही, जो देश-दुनिया में सनातन की धर्म ध्वजा को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं। समारोह के दौरान श्री राजगीर तपोवन तीर्थ रक्षा पंडा कमेटी के अध्यक्ष नीरज उपाध्याय, सचिव विकास उपाध्याय और अश्विनी उपाध्याय ने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री  विजय कुमार चौधरी सहित मंचासीन सभी विशिष्ट मंत्रियों व अतिथियों का अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंट कर भव्य अभिनंदन किया। तत्पश्चात, नालंदा के जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने जिला प्रशासन की ओर से मुख्यमंत्री  का स्वागत किया। सनातन के मूल मंत्र को रेखांकित करते हुए कहा कि सबकी सुरक्षा, सबकी रक्षा और सबका कल्याण ही सनातन की सोच है, और इसी जन-कल्याण की भावना से बिहार सरकार भी निरंतर कार्य कर रही है।

राजगीर मलमास मेला में सुरक्षा व्‍यवस्‍था का जायजा लेते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, व अन्‍य,

श्रद्धालुओं के लिए पलक-पावड़े बिछाए बैठी है बिहार सरकार एक महीने तक चलने वाले इस अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) मेले में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को लेकर बिहार सरकार ने अभूतपूर्व प्रबंध किए हैं। मुख्यमंत्री ने स्वयं व्यवस्थाओं का बारिकी से अवलोकन किया। श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए आधुनिक टेंट सिटी का निर्माण कराया गया है। साथ ही शुद्ध पेयजल के रूप में पवित्र ‘गंगा जल’ की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। सुरक्षा के लिहाज से पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी तीसरी आँख (सीसीटीवी कैमरों) से की जा रही है। जगह-जगह अत्याधुनिक मेडिकल कैंप और स्वास्थ्य शिविर लगाए गए हैं ताकि किसी भी तीर्थयात्री को कोई असुविधा न हो।

राजगीर में धार्मिक अनुष्ठानों के उपरांत विकास और प्रकृति के  संगम का जायजा लेते हुए  मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी

विकास और प्रकृति का अनूठा संगम धार्मिक अनुष्ठानों के उपरांत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राजगीर में चल रही विभिन्न विकासात्मक योजनाओं की उच्च स्तरीय समीक्षा भी की। उन्होंने राजगीर जू-सफारी, विश्व प्रसिद्ध ग्लास ब्रिज और नेचर सफारी का भ्रमण कर वहाँ विकसित आधुनिक सुविधाओं एवं जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों को देखा। उन्होंने कहा कि राजगीर का यह आधुनिक स्वरूप न केवल इको-टूरिज्म (पर्यटन) को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति और पर्यावरण से जोड़ने का एक सशक्त व सराहनीय माध्यम बन रहा है।

इस भव्य उद्घाटन समारोह में ग्रामीण विकास मंत्री, पर्यटन मंत्री, स्थानीय सांसद, विधायकगण, पंडा कमेटी के पदाधिकारी सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। पूरा राजगीर क्षेत्र ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय पुरुषोत्तम भगवान’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा है।

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मुजफ्फरपुर  में भी  पुलिस महकमे में बड़ा उलटफेर: जानें कौन आया और किसका हुआ ट्रांसफर, यहाँ देखें पूरी डिटेल!

मुजफ्फरपुर। बिहार सरकार के गृह विभाग द्वारा राज्य पुलिस सेवा के 54 डीएसपी (DSP) स्तर के अधिकारियों के किए गए बड़े पैमाने पर तबादले का असर मुजफ्फरपुर जिले पर भी व्यापक रूप से पड़ा है । इस नए आदेश के तहत मुजफ्फरपुर जिले में नए पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई है, जबकि यहाँ पूर्व से पदस्थापित अधिकारियों को नई ज़िम्मेदारियों के साथ दूसरे जिलों या विभागों में भेजा गया है ।

सांकेतिक (प्रतीकात्‍मक)  तस्‍वीर

मुजफ्फरपुर जिले से जुड़े पुलिस अधिकारियों के फेरबदल की पूरी कुंडली इस प्रकार है:

मुजफ्फरपुर में किसका हुआ नया पदस्थापन (कौन यहाँ आया)?

गृह विभाग की सूची के अनुसार मुजफ्फरपुर जिले में कानून व्यवस्था और यातायात को सुदृढ़ करने के लिए दो नए अधिकारियों की तैनाती की गई है:

  1. अभिजीत अलकेश: आर्थिक अपराध इकाई (EOU), बिहार, पटना के पद पर तैनात रहे अभिजीत अलकेश को मुजफ्फरपुर का नया पुलिस उपाधीक्षक (यातायात/Traffic DSP) बनाया गया है ।
  2. सुबोध कुमार सिंह: बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (बि०वि०स०पु०-12), भीमनगर, सुपौल में पदस्थापित रहे सुबोध कुमार सिंह को मुजफ्फरपुर का नया पुलिस उपाधीक्षक (रक्षित/Reserve DSP) नियुक्त किया गया है ।

मुजफ्फरपुर से कौन कहाँ गया (किसका हुआ ट्रांसफर)?

इस फेरबदल में मुजफ्फरपुर में पहले से तैनात दो अधिकारियों को नई पोस्टिंग देकर यहाँ से भेजा गया है:

  1. महेश चौधरी: मुजफ्फरपुर में पुलिस उपाधीक्षक (यातायात) के पद पर तैनात रहे महेश चौधरी का तबादला कर उन्हें पटना भेजा गया है। वे अब पुलिस उपाधीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई (EOU), बिहार, पटना की जिम्मेदारी संभालेंगे ।
  2. मदन कुमार: मुजफ्फरपुर में पुलिस उपाधीक्षक (रक्षित) के पद पर तैनात रहे मदन कुमार को भी पटना स्थानांतरित कर दिया गया है। उन्हें अब पुलिस उपाधीक्षक, अपराध अनुसंधान विभाग (CID), बिहार, पटना के पद पर तैनात किया गया है ।

इस फेरबदल से मुजफ्फरपुर में ट्रैफिक व्यवस्था और रक्षित पुलिस बल की कमान अब पूरी तरह से नए अधिकारियों के हाथों में सौंप दी गई है, जिससे प्रशासनिक कार्यों में तेज़ी आने की उम्मीद है ।

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बिहार पुलिस महकमे में भारी फेरबदल, 54 डीएसपी और पुलिस अधिकारियों का एक साथ तबादला!

पटना। बिहार प्रशासनिक और कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए नीतीश सरकार के गृह विभाग ने शनिवार को एक बहुत बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है । राज्य सरकार ने पुलिस महकमे में एक साथ भारी फेरबदल करते हुए बिहार पुलिस सेवा के 54 पुलिस पदाधिकारियों (DSP स्तर के अधिकारियों) का बड़े पैमाने पर तबादला और नई जगहों पर पदस्थापन कर दिया है ।

सांकेतिक (प्रतीकात्‍मक)  तस्‍वीर

गृह विभाग (आरक्षी शाखा) द्वारा जारी की गई ताज़ा अधिसूचना के मुताबिक, इस बड़े बदलाव का सबसे ज्यादा असर राज्य की विशेष जांच एजेंसियों पर पड़ा है । सरकार ने इस ट्रांसफर लिस्ट के जरिए आर्थिक अपराध इकाई (EOU), साइबर क्राइम (Cyber Crime) और अपराध अनुसंधान विभाग (CID) जैसी महत्वपूर्ण विंग्स को पूरी तरह से री-शफल (पुनर्गठित) कर दिया है, ताकि अपराधियों और साइबर ठगों पर नकेल कसी जा सके ।

तबादले की सूची: जानें कौन सा अधिकारी अब कहाँ संभालेगा कमान?

गृह विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार स्थानांतरित किए गए सभी 54 पुलिस पदाधिकारियों के नामों और उनके नए तैनाती स्थलों की पूरी सूची नीचे दी जा रही है:

क्र० सं०अधिकारी का नामवर्तमान पदस्थापननया पदस्थापन
1अली अंसारीसहायक पुलिस महानिरीक्षक, रेल, बिहार, पटनासहायक पुलिस महानिरीक्षक, यातायात, बिहार, पटना
2असफाक अंसारीपुलिस उपाधीक्षक, बि०वि०स०पु०-3, बोधगयापुलिस उपाधीक्षक, मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, बिहार, पटना
3मनोज रामअनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-II, सदर, मधुबनीअपर पुलिस अधीक्षक, अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटना
4वंदनाअनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-II, डिहरी, रोहतासअपर पुलिस अधीक्षक, मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, बिहार, पटना
5अजय प्रसादअनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-II, शेरघाटी, गयाजीवरीय पुलिस उपाधीक्षक, बिहार पुलिस अकादमी, राजगीर
6रेशु कृष्णापुलिस उपाधीक्षक, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (महिला), सासारामपुलिस उपाधीक्षक, अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटना
7मंगलेश कुमार सिंहअनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-II, किशनगंजपुलिस उपाधीक्षक (साईबर क्राईम), औरंगाबाद
8महेश चौधरीpolice उपाधीक्षक (यातायात), मुजफ्फरपुरपुलिस उपाधीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना
9विप्लव कुमारपुलिस उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटनाअनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-I, सासाराम, रोहतास
10धीरज कुमारपुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय), शेखपुराअनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, इमामगंज, गयाजी
11राजू रंजन कुमारपुलिस उपाधीक्षक (साईबर क्राईम), भभुआ, कैमूरअनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-II, डिहरी, रोहतास
12नीलाभ कृष्णवरीय पुलिस उपाधीक्षक, मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, बिहार, पटनावरीय पुलिस उपाधीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना
13कमलेश कुमारपुलिस उपाधीक्षक, पदस्थापन की प्रतीक्षा में, बिहार पुलिस मुख्यालय, पटनावरीय पुलिस उपाधीक्षक (कमजोर वर्ग), अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटना
14प्रिया ज्योतिपुलिस उपाधीक्षक, साईबर क्राईम, नवादावरीय पुलिस उपाधीक्षक, सैन्य पुलिस प्रशिक्षण केन्द्र, डुमराँव
15अशोक कुमारपुलिस उपाधीक्षक, (मुख्यालय), किशनगंजवरीय पुलिस उपाधीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना
16पूनम कुमारीपुलिस उपाधीक्षक, अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटनापुलिस उपाधीक्षक (साईबर क्राईम), सीतामढ़ी
17प्रदीप कुमारअनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, मोहनिया, कैमूरवरीय पुलिस उपाधीक्षक, पदस्थापन की प्रतीक्षा में, बिहार पुलिस मुख्यालय, पटना
18देवेन्द्र प्रसादपुलिस उपाधीक्षक, पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) कार्यालय, बिहार, पटनापुलिस उपाधीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना
19आशीष कुमार सिंहपुलिस उपाधीक्षक (रक्षित), गयाजीपुलिस उपाधीक्षक, यातायात, पटना
20मदन कुमारpolice उपाधीक्षक (रक्षित), मुजफ्फरपुरपुलिस उपाधीक्षक, अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटना
21मनोज कुमारपुलिस उपाधीक्षक, बि०वि०स०पु०-5, पटनापुलिस उपाधीक्षक (रक्षित), कटिहार
22अनुराग कुमारपुलिस उपाधीक्षक (साईबर क्राईम), औरंगाबादपुलिस उपाधीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना
23साक्षी रायपुलिस उपाधीक्षक, साईबर क्राईम, गयाजीपुलिस उपाधीक्षक, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-8, बेगूसराय
24राजन कुमारपुलिस उपाधीक्षक (साईबर क्राईम), जमुईअनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-II, शेरघाटी, गयाजी
25कामिनी कौशलपुलिस उपाधीक्षक, अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटनाअनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-II, सदर, मधुबनी
26सदानन्द कुमारपुलिस उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटनाअनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, जयनगर, मधुबनी
27आलोक कुमारपुलिस उपाधीक्षक (साईबर क्राईम), सीतामढ़ीपुलिस उपाधीक्षक, आतंकवाद निरोधक दस्ता, बिहार, पटना
28दयानंद कुमारपुलिस उपाधीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटनापुलिस उपाधीक्षक, यातायात, कैमूर
29माधुरी कुमारीपुलिस उपाधीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटनापुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय), शेखपुरा
30आसिफ आलमपुलिस उपाधीक्षक, अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटनापुलिस उपाधीक्षक (साईबर क्राईम), कटिहार
31संतोष कुमार पोद्दारपुलिस उपाधीक्षक, अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटनापुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय), अररिया
32नीतू सिंहपुलिस उपाधीक्षक, मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, बिहार, पटनापुलिस उपाधीक्षक (साईबर क्राईम), भभुआ, कैमूर
33अपूर्वापुलिस उपाधीक्षक, वि०स्व०वि०स०पु० बल, वाल्मीकिनगर, बगहापुलिस उपाधीक्षक, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-13, दरभंगा
34अभिजीत अलकेशपुलिस उपाधीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटनापुलिस उपाधीक्षक (यातायात), मुजफ्फरपुर
35मनोज कुमार सिंहपुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय), अररियाअनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-II, किशनगंज
36संजय कुमार झापुलिस उपाधीक्षक, बि०वि०स०पु०-11, जमुईपुलिस उपाधीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना
37विजय कुमार गुप्तापुलिस उपाधीक्षक, यातायात, कैमूरपुलिस उपाधीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना
38नरेन्द्र शर्मापुलिस उपाधीक्षक (रक्षित), समस्तीपुरपुलिस उपाधीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना
39मिथिलेश कुमार जायसवालपुलिस उपाधीक्षक (रक्षित), भागलपुरपुलिस उपाधीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना
40सुनील कुमारपुलिस उपाधीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटनापुलिस उपाधीक्षक (रक्षित), समस्तीपुर
41ललित मोहन सिंहपुलिस उपाधीक्षक, यातायात, पटनापुलिस उपाधीक्षक (रक्षित), गयाजी
42हरिनारायण सिंहपुलिस उपाधीक्षक (रक्षित), कटिहारपुलिस उपाधीक्षक, सिपाही प्रशिक्षण विद्यालय, नाथनगर
43सतीश चन्द्र माधव प्रसाद रायपुलिस उपाधीक्षक, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-7, कटिहारपुलिस उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना
44बिन्देश्वर प्रसादपुलिस उपाधीक्षक, विशेष निगरानी इकाई, बिहार, पटनापुलिस उपाधीक्षक, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-14, पटना
45अखिलेश कुमारपुलिस उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटनापुलिस उपाधीक्षक, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-1, पटना
46रवि भूषणपुलिस उपाधीक्षक (रक्षित), मधेपुरापुलिस उपाधीक्षक, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-2, डिहरी
47मंजू कुमारीपुलिस उपाधीक्षक, बि०वि०स०पु०-4, बेगूसरायपुलिस उपाधीक्षक (कमजोर वर्ग), अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटना
48उमेश लाल रजकपुलिस उपाधीक्षक, बि०वि०स०पु०-8, बेगूसरायपुलिस उपाधीक्षक (रक्षित), भागलपुर
49गजेन्द्र प्रसादपुलिस उपाधीक्षक, बि०वि०स०पु०-6, मुजफ्फरपुरपुलिस उपाधीक्षक (रक्षित), मधेपुरा
50सुशील कुमारपुलिस उपाधीक्षक, बि०वि०स०पु०-13, दरभंगापुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय), किशनगंज
51सुबोध कुमार सिंहपुलिस उपाधीक्षक, बि०वि०स०पु०-12, भीमनगर, सुपौलपुलिस उपाधीक्षक (रक्षित), मुजफ्फरपुर
52शाहनवाज अख्तरपरिवीक्ष्यमान पुलिस उपाधीक्षक, रोहतासपुलिस उपाधीक्षक, साईबर क्राईम, नवादा
53अब्दुर रहमान दानिशपरिवीक्ष्यमान पुलिस उपाधीक्षक, सारणपुलिस उपाधीक्षक, साईबर क्राईम, गयाजी
54अभिषेक कुमारपुलिस उपाधीक्षक परिवीक्ष्यमान, औरंगाबादपुलिस उपाधीक्षक (साईबर क्राईम), जमुई

नीमचक बथानी SDPO का ट्रांसफर रद्द

इस महा-तबादले की सूची के साथ ही गृह विभाग ने एक शुद्धिपत्र भी जारी किया है । विभाग ने पूर्व में 15 मई 2026 को जारी आदेश (संख्या-6409) के क्रमांक 50 पर अंकित सुरेन्द्र कुमार सिंह (अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, नीमचक बथानी, गयाजी) के ट्रांसफर आदेश को तत्काल प्रभाव से विलोपित (रद्द) कर दिया है । वे अगले आदेश तक अपने पुराने पद पर बने रहेंगे ।

यह आदेश राज्यपाल के निर्देश पर सरकार के अवर सचिव रत्नेश कुमार के हस्ताक्षर से जारी किया गया है, तथा पुलिस महानिदेशक को इन अधिकारियों का गत्यादेश (मूवमेंट ऑर्डर) तुरंत जारी करने को कहा गया है ।


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महाखुलासा:जब पूरे बिहार में महज 5 और मुजफ्फरपुर में सिर्फ 1 ‘ओरिजिनल’ DPS, तो जिले में कहाँ से आ गए 17? शिक्षा के नाम पर ‘ब्रांड’ की बड़ी डकैती!

रिर्पोट :- एस. एस. कुमार ‘पंकज’

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में शिक्षा के नाम पर ‘ब्रांड’ की एक ऐसी संगठित डकैती चल रही है, जिसने न सिर्फ हजारों अभिभावकों को धोखे में रखा, बल्कि मासूम बच्चों के भविष्य को भी दांव पर लगा दिया है। एक तरफ दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) सोसाइटी, नई दिल्ली का स्पष्ट आधिकारिक आंकड़ा है, तो दूसरी तरफ मुजफ्फरपुर के शहरी और ग्रामीण इलाकों में कुकुरमुत्ते की तरह उगे फर्जी स्कूलों की बाढ़ है।

आइए इस पूरे ‘लूट तंत्र’ की परत-दर-परत विवेचना करते हैं कि आखिर यह पूरा खेल क्या है, जांच की नौबत क्यों आई और इस पर देश की सर्वोच्च अदालतों का क्या फैसला है।


जब बिहार में कुल 5 और मुजफ्फरपुर में 1 दिल्ली पब्लिक स्कूल, तो 17 कहाँ से आए?

दिल्ली पब्लिक स्कूल सोसाइटी (नई दिल्ली) की आधिकारिक वेबसाइट dpsfamily.org और मुजफ्फरपुर DPS के प्राचार्य डा. के. बिनू कुमार के बयानों के अनुसार, पूरे बिहार राज्य में केवल 5 (पाँच) ही वास्तविक  DPS संचालित हैं:

  1. DPS पटना
  2. DPS पटना EAST
  3. DPS गया
  4. DPS मुजफ्फरपुर (तुर्की)
  5. DPS आरा (भोजपुर)

तकनीकी और कानूनी रूप से पूरे मुजफ्फरपुर जिले (शहरी और ग्रामीण मिलाकर) में केवल 1 (एक) ही अधिकृत और प्रमाणित DPS है, जो तुर्की में स्थित है।

तो फिर मुजफ्फरपुर में ये 17 DPS कहाँ से आ गए? यह सबसे बड़ा सुलगता हुआ सवाल है। असल में, जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग द्वारा जारी की गई संदिग्ध सूची में कुल 16 स्कूल शामिल हैं, और तुर्की वाले एकमात्र असली DPS को मिलाकर जिले में कुल 17 स्कूल ‘DPS’ नाम का बोर्ड टांगकर चल रहे हैं। जब मूल सोसाइटी ने जिले में सिर्फ एक ही स्कूल को अपनी फ्रेंचाइजी या संबद्धता दी है, तो बाकी के 16 संस्थान सीधे तौर पर ब्रांड की चोरी” और अवैध दुकानें” हैं।

ये स्थानीय स्तर पर अलग कमिटी, ट्रस्ट या निजी स्वार्थ के लिए खोले गए स्वतंत्र स्कूल हैं, जिनका नई दिल्ली की मूल DPS सोसाइटी से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। ये फर्जी स्कूल नहीं तो और क्या हैं? ये सिर्फ मिलते-जुलते नाम और प्रतिष्ठित ‘लोगो’ (Logo) का सहारा लेकर अभिभावकों में भ्रम पैदा करते हैं ताकि उनसे मोटी फीस वसूली जा सके।


आखिर क्यों आई जांच की नौबत? क्या है पूरा मामला?

इस महाफ़र्ज़ीवाड़े की जांच की नौबत अचानक नहीं आई, बल्कि इसके पीछे ‘ग्राउंड जीरो’ पर चल रही बेहद कड़वी और चौंकाने वाली हकीकत है।

  1. मासूमों की सुरक्षा से खिलवाड़: ग्राउंड जीरो से आई तस्वीरों में देखा गया कि इन संदिग्ध स्कूलों द्वारा एक साथ दर्जनों बच्चों को स्कूल बसों में भेड़-बकरियों की तरह लादकर ले जाया जा रहा था। कुछ बच्चों को पैदल ही एक ‘अस्पताल’ जैसी जगह से निकलते देखा गया, जिसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। आखिर इन स्कूलों के पास अस्पताल जैसी व्यवस्था के नाम पर क्या छुपाया जा रहा है?
  2. बच्चों ने खुद खोली पोल: स्कूल के मासूम बच्चों ने ही कैमरे और अधिकारियों के सामने प्रबंधन के ऐसे खेल को जगजाहिर किया, जिससे जिला प्रशासन अब तक पूरी तरह अनजान था। बंद कमरों के पीछे चल रहे इस मैनेजमेंट के खेल की वजह से प्रशासन को कड़ा कदम उठाना पड़ा।
  3. अभिभावकों के साथ धोखाधड़ी: ‘DPS’ एक बहुत बड़ा और विश्वसनीय ब्रांड नाम है। अभिभावक सोचते हैं कि उनका बच्चा देश के सबसे प्रतिष्ठित स्कूल नेटवर्क में पढ़ रहा है, लेकिन हकीकत में वे अपनी गाढ़ी कमाई इन फर्जी ‘ब्रांडेड दुकानों’ के संचालकों की जेब भरने में लुटा रहे होते हैं। इसी लूट तंत्र को बेनकाब करने के लिए जांच शुरू की गई है।

जांच के आदेश किसने दिए और क्या है प्रशासनिक कार्रवाई?

मुजफ्फरपुर में इस ‘लूट तंत्र’ की जड़ों को उखाड़ने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में है:

  • डीएम का हंटर: जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन के पत्र संख्या 1622 (दिनांक 08.05.2026) के बाद शिक्षा विभाग ने युद्ध स्तर पर कार्रवाई शुरू की है।
  • 3 दिन का कड़ा अल्टीमेटम: जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कुमार अरविंद सिन्हा ने नोटिस जारी कर साफ कह दिया है कि यदि ये संदिग्ध स्कूल 3 दिनों के भीतर अपनी प्रामाणिकता, मान्यता (CBSE Affiliation) और बिहार सरकार द्वारा जारी NOC के पुख्ता साक्ष्य पेश नहीं करते हैं, तो उन पर तुरंत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
  • तस्वीरों से मिलान: जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) सुजीत कुमार दास ने पत्र संख्या 1047 के माध्यम से जिले के विभिन्न प्रखंडों में चल रहे 16 संदिग्ध स्कूलों की सूची जारी की है। उन्होंने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि 2 दिनों के अंदर इन स्कूलों के मुख्य गेट की रंगीन फोटो और उनके कागजात मुख्यालय को सौंपे जाएं ताकि उनकी सत्यता जांची जा सके।

इस विवाद पर अदालतों का ऐतिहासिक फैसला: कानूनी रूप से पूरी तरह अवैध हैं ये स्कूल

‘DPS’ नाम, मार्क और उसके विशिष्ट लोगो (Logo) के अनधिकृत उपयोग को लेकर माननीय न्यायालयों द्वारा समय-समय पर कड़े और ऐतिहासिक फैसले दिए गए हैं, जो यह साबित करते हैं कि मूल सोसाइटी के अलावा किसी भी अन्य संस्था द्वारा इस नाम का इस्तेमाल करना सीधे तौर पर ‘क्रिमिनल फ्रॉड’ है।

1. दिल्ली उच्च न्यायालय का फैसला (वर्ष 2008)

  • मामला: दिल्ली पब्लिक स्कूल सोसाइटी बनाम डीपीएस ट्रस्ट व अन्य (CS(OS) No. 1518/2008)
  • न्यायालय का आदेश: माननीय न्यायाधीश एच.आर. मल्होत्रा की अदालत ने 28 अगस्त 2008 को इस पर अंतरिम रोक (Stay Order) लगाई थी।
  • अदालत की सख्त टिप्पणी: कोर्ट ने पाया कि प्रतिवादियों ने साल 2003 में ट्रस्ट बनाया, लेकिन अपने विज्ञापनों में ’54 वर्षों की उत्कृष्टता’ का झूठा दावा कर रहे थे। जब कोर्ट ने दोनों पक्षों के लोगो (Logo) की तुलना की, तो माना कि यह प्रथम दृष्टया एक धोखाधड़ी (Fraudulent act)” है। कोर्ट ने साफ कहा कि प्रतिवादियों ने शिक्षाविदों, अभिभावकों और बच्चों को भ्रमित करने की गलत मंशा से इस मार्क पर अतिक्रमण किया है।

2. भारत का सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) का ऐतिहासिक फैसला (वर्ष 2018)

  • मामला: दिल्ली पब्लिक स्कूल सोसाइटी बनाम डीपीएस वर्ल्ड फाउंडेशन व अन्य (SLP (Civil) Diary No. 17216/2018)
  • न्यायालय का आदेश: 24 जुलाई 2018 को माननीय मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति आर. भानुमती और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ ने इस मामले पर अंतिम मुहर लगा दी।
  • अदालत का फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने रेखांकित किया कि ‘DPS’, ‘Delhi Public School’ शब्द और उसका लोगो ट्रेड मार्क्स एक्ट, 1999 के तहत क्लास 42 में मूल पेटिशनर (DPS Society, New Delhi) के पक्ष में कानूनी रूप से पंजीकृत (Registered) है। सुप्रीम कोर्ट ने सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के ऑर्डर 39, रूल 1 और 2 के तहत मांगी गई अंतरिम रोक को पूरी तरह मंजूर करते हुए प्रतिवादियों को इस नाम और लोगो के उपयोग से पूरी तरह प्रतिबंधित (Restrain) कर दिया।

प्रशासन की रडार पर मौजूद 16 संदिग्ध स्कूलों की पूरी सूची:

बिहार शिक्षा परियोजना द्वारा जारी सूची के अनुसार इन 16 ‘दुकानों’ पर बहुत जल्द स्थायी रूप से ताला लटकना तय माना जा रहा है:

  1. दिल्ली इंटरनेशनल स्कूल – मुशहरी
  2. दिल्ली पब्लिक स्कूल (A-विंग) – औराई
  3. दिल्ली पब्लिक स्कूल (H-विंग) – बरुराज (मोतीपुर)
  4. दिल्ली पब्लिक स्कूल इंटरनेशनल, गरहां – बोचहाँ
  5. दिल्ली पब्लिक स्कूल इंटरनेशनल, जाफरपुर – पारू
  6. दिल्ली पब्लिक स्कूल इंटरनेशनल, कांटी – कांटी
  7. दिल्ली पब्लिक स्कूल, झपहाँ – मुशहरी
  8. दिल्ली पब्लिक स्कूल, लखनपुर, कटरा – कटरा
  9. दिल्ली पब्लिक स्कूल, मिठनपुरा – मुशहरी
  10. दिल्ली पब्लिक स्कूल, मुजफ्फरपुर – कुढ़नी
  11. दिल्ली पब्लिक स्कूल, सरैया – सरैया
  12. दिल्ली पब्लिक स्कूल, यजुआर – कटरा
  13. दिल्ली पब्लिक स्कूल, शर्फुद्दीनपुर – बोचहाँ
  14. डी.पी.एस. किड्स, भगवानपुर – मुशहरी
  15. सीनियर सेकेंडरी डी.पी.एस. ढोली (एन.एच.-28) – सकरा
  16. डी.पी.एस. जूनियर इंटर स्कूल, बेरिया – कांटी

प्रशासनिक हंटर का खौफ: नाक के नीचे से रातों-रात गायब हुए ‘DPS’ के बोर्ड, प्रशासन बेखबर और अंधी चकाचौंध में सोए अभिभावक!

इसी बीच मुरौल प्रखंड से इस वक्त की सबसे बड़ी और शर्मनाक तस्वीर सामने आ रही है। जिला प्रशासन के कड़े तेवरों और ‘चार सौ बीसी’ (जालसाजी) के खुलासे के बाद, खुद को ‘दिल्ली पब्लिक स्कूल’ बताने वाले इस तथाकथित विद्यालय के प्रबंधकों में कानूनी कार्रवाई का ऐसा खौफ पसरा है कि उन्होंने रातों-रात स्कूल के मुख्य द्वार और पूसा-मुजफ्फरपुर मुख्य सड़क से ‘DPS’ नाम वाले अपने चमचमाते बोर्ड हटा लिए। माफियाओं को डर था कि कहीं प्रशासन की टीम आकर उनके इस अवैध किले को सील न कर दे, इसलिए रात के अंधेरे में ही बोर्ड नोच लिए गए।

लेकिन सबसे हैरान और विचलित कर देने वाली बात यह है कि इस पूरे खेल से स्थानीय प्रशासन पूरी तरह बेखबर रहा और उससे भी बड़ा अफसोस उन अभिभावकों पर है जिनकी आंखों पर इन फर्जी ‘ब्रांडेड दुकानों’ के नाम की पट्टी बंधी हुई थी। उन्हें सुबह स्कूल के गेट और सड़क से बोर्ड का अचानक गायब होना भी समझ में नहीं आया! सुबह होते ही उन्होंने बिना सोचे-समझे, बिना किसी सच्चाई को जाने, अपने मासूम बच्चों को वापस उसी जालसाज के यहाँ पढ़ने के लिए भेज दिया।

अपनी पहचान छुपाने के लिए मुरौल प्रखंड के पिलखी में रातों-रात गायब हुए ‘DPS’ के बोर्ड (फाइल फोटो)

समझ में नहीं आता कि ये अभिभावक अपने बच्चों का कैसा भविष्य बना रहे हैं? जब स्कूल प्रबंधन खुद को कानूनी रूप से सही साबित करने के बजाय अपनी पहचान छुपाने के लिए रात के अंधेरे में गिद्ध की तरह बोर्ड उखाड़ रहा हो, तो क्या ऐसे डरपोक और धोखेबाज माफियाओं के साए में बच्चों का भविष्य कभी सुरक्षित रह सकता है? यह आंखें मूंदकर अपने ही बच्चों को दलदल में धकेलने जैसा है। मुरौल की यह घटना साबित करती है कि नौनिहालों के भविष्य के साथ हो रहे इस घिनौने खिलवाड़ में जितनी गलती इन शिक्षा माफियाओं की है, उतनी ही हिस्सेदार अभिभावकों की यह घोर लापरवाही भी है।

इंटरनेशनलबोर्ड के पीछे एस्बेस्टस की भट्टी, जहाँ सुलग रहा है नौनिहालों का बचपन!

मुशहरी, बोचहाँ, पारू, कांटी और सकरा के ग्रामीण अंचलों से ‘ग्राउंड जीरो’ की जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे शिक्षा व्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा हैं। इन इलाकों में बड़े-बड़े होर्डिंग्स और चमचमाते बोर्ड टांगकर खुद को ‘इंटरनेशनल’ स्तर का घोषित करने वाले ये तथाकथित विद्यालय अपने नाम के आगे-पीछे ‘दिल्ली पब्लिक स्कूल’ (DPS) का ठप्पा बड़े रसूख और शान से लगाए बैठे हैं। खुद को प्रखंड, जिला या राज्य ही नहीं, बल्कि देश और विदेशों के स्कूलों को टक्कर देने वाला बताने वाले इन शिक्षा माफियाओं का सच अंदर से बेहद घिनौना और खोखला है। सुविधा, शिक्षा और संस्कार के नाम पर यहाँ ‘शून्य’ का सन्नाटा पसरा है।

इस महाफर्जीवाड़े की सबसे डरावनी और दिल दहला देने वाली बानगी सकरा प्रखंड के बरियारपुर में देखने को मिली, जहाँ एक तथाकथित ‘इंटरनेशनल स्कूल’ लोहे और एस्बेस्टस के कमरों में धड़ल्ले से चलाया जा रहा है। मई-जून की इस जानलेवा और झुलसा देने वाली गर्मी में, जहाँ तपते एस्बेस्टस के नीचे बैठना तो दूर, कोई जानवर भी खड़ा होना पसंद न करे, वहाँ सूबे के अबोध और मासूम बच्चे सुबह से दोपहर तक पसीने से लथपथ होकर तपने और घुटने के लिए मजबूर हैं। यह स्कूल नहीं, बल्कि मासूमों को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का एक ‘यातना गृह’ बन चुका है। लेकिन इस कड़वे सच के लिए जितने दोषी ये निर्दयी शिक्षा माफिया हैं, उतने ही जिम्मेदार वे अभिभावक भी हैं, जो सिर्फ ‘DPS’ और ‘इंटरनेशनल’ जैसे बड़े-बड़े विदेशी नामों के चकाचौंध में अंधा होकर बिना किसी जांच-पड़ताल, बिना किसी ‘सर्टिफिकेशन’ (प्रमाणीकरण) या मान्यता के कागजात देखे, अपने जिगर के टुकड़ों को इन कसाइयों के हाथों में सौंप आते हैं। क्या एक तथाकथित बड़े नाम की झूठी शान के लिए मासूम बच्चों के जीवन को इस तरह भट्टी में झोंक देना सही है? आखिर प्रशासन की नाक के नीचे ‘इंटरनेशनल’ का बोर्ड टांगकर चल रहे इस अमानवीय खेल पर जिला शिक्षा विभाग अब तक कुंभकर्णी नींद क्यों सो रहा था?

यह खबर अभी खत्म नहीं हुई है!यह तो सिर्फ टेलर है –  हम जल्द ही सकरा थाना क्षेत्र यानी सकरा एवं मुरौल प्रखंड के तथाकथित दिल्ली पब्लिक स्कूल के उस ‘चार सौ बीसी’ (420) और जालसाजी का ऐसा सनसनीखेज चिट्ठा खोलने जा रहे हैं, जिसके पुख्ता सबूत और तस्वीरें देखकर जिला प्रशासन से लेकर आम जनता तक दांतों तले उंगलियां दबा लेगी। इन सफेदपोश शिक्षा के सौदागरों का असली चेहरा बहुत जल्द बेनकाब होने वाला है। बने रहें हमारे साथ, क्योंकि इसकी तीसरी रिपोर्ट आपके होश उड़ा देगी!

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बिहार में ‘कानून का हथौड़ा’: 4 महीने में 70,624 अपराधियों का ‘द एंड’, 2 को फांसी और 453 को उम्रकैद!

उपन्यास जैसी खौफनाक मर्डर मिस्ट्री के गुनहगारों को फांसी का फंदा‘; बेगूसराय के तिहरे हत्याकांड और पत्नी की लाश के टुकड़े करने वाले दरिंदे को रेयरेस्ट ऑफ रेयर सजा


पटना। बिहार में अपराधियों की अब खैर नहीं है। सूबे में ‘कानून का राज’ स्थापित करने के लिए बिहार पुलिस ने कोर्ट के साथ मिलकर अपराधियों के खिलाफ ऐसा चक्रव्यूह रचा है कि महज 4 महीनों के भीतर ही अपराधियों का साम्राज्य ताश के पत्तों की तरह ढह गया। जनवरी 2026 से अप्रैल 2026 के बीच त्वरित विचारण  के जरिए रिकॉर्ड 70,624 अपराधियों को दोषी सिद्ध कराकर जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया गया है।

कड़क अंदाज़, कड़े तेवर: पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बिहार में अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजने का ब्योरा देते बिहार पुलिस के अपर पुलिस महानिदेशक (विधि-व्यवस्था) सुधांशु कुमार।

बिहार पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंकड़ों का यह सनसनीखेज और खौफनाक ब्योरा खुद अपर पुलिस महानिदेशक (विधि-व्यवस्था) सुधांशु कुमार ने साझा किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, कानून का राज स्थापित करने में कांडों के त्वरित विचारण की महत्वपूर्ण भूमिका है। पुलिस मुख्यालय से लेकर जिला स्तर तक इस पर चौबीसों घंटे फोकस किया जा रहा है।”

रूह कंपा देने वाले दो मामलों में मिली फांसी

एडीजी विधि-व्यवस्था सुधांशु कुमार ने बताया कि कोर्ट ने दो जघन्य मामलों को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (दुर्लभ से दुर्लभतम) मानते हुए दो दरिंदों को फांसी की सजा सुनाई है:

  1. बेगूसराय का तिहरा हत्याकांड: इस खौफनाक मामले में अभियुक्त विकास कुमार ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए वादी के माता, पिता और बहन की गोली मारकर हत्या कर दी थी। 12 फरवरी को कोर्ट ने उसे दोषी मानते हुए फांसी का फंदा मुकर्रर किया।
  2. पत्नी की लाश के कर दिए थे टुकड़े: महेंदिया थाना (कांड संख्या 148/24) के तहत एक कसाई पति बीरबल साहू ने अपनी ही पत्नी सुमंती सिन्हा की निर्मम हत्या कर दी। हैवानियत यहीं नहीं रुकी, उसने लाश को कई टुकड़ों में काट डाला। कोर्ट ने त्वरित सुनवाई करते हुए इस कसाई पति को फांसी की सजा सुनाई।

सजा का सुनामीआंकड़ा: कंपकंपा उठेंगे अपराधी

पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 120 दिनों में सजा पाने वाले अपराधियों की सूची लंबी और खौफनाक है:

  • फांसी की सजा: 02 अभियुक्त
  • आजीवन कारावास (उम्रकैद): 453 अभियुक्त
  • 10 वर्ष या उससे अधिक की जेल: 253 अभियुक्त
  • 10 वर्ष से कम की सजा: 651 अभियुक्त
  • 2 वर्ष से कम की सजा: 981 अभियुक्त
  • जुर्माना या बांड (शराबबंदी व अन्य मामले): 68,284 अभियुक्त

क्राइम फाइल: किस अपराध में कितने नपे?

बिहार पुलिस ने अलग-अलग अपराधों की धाराओं के तहत जो जाल बुना, उसमें बड़े-बड़े शातिर शिकारी फंस गए। आंकड़ों पर एक नजर:

अपराध का प्रकारकुल कांडदोषी सिद्ध अपराधी
बलात्कार एवं पोक्सो (POCSO)218267
हत्या (Murder)213506
आर्म्स एक्ट (Arms Act)252318
लूट (Loot)5966
अपहरण (Kidnapping)5162
डकैती (Dacoity)1734

पुलिस मुख्यालय की पैनी नजर

एडीजी सुधांशु कुमार ने सख्त लहजे में कहा कि स्पीडी ट्रायल के इस कड़े रुख से अपराधियों के मन में खौफ बैठना तय है। पुलिस केवल केस दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपराधियों को उनकी आखिरी मंजिल यानी जेल के सींखचों और फांसी के फंदे तक पहुंचाने के लिए वैज्ञानिक साक्ष्य और गवाहों को समय पर कोर्ट में पेश कर रही है। बिहार पुलिस का यह ‘मिशन क्लीन’ आगे भी इसी रफ्तार से जारी रहेगा।

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घूसखोर इंजीनियर पर ‘निगरानी’ का एक्शन: ₹1.45 लाख रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा, सीतामढ़ी में हड़कंप!

मुजफ्फरपुर भ्रष्टाचार के खिलाफ सूबे की सरकार और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए एक बड़ी मछली को जाल में फंसाया है। सीतामढ़ी जिले के पुपरी, जनकपुर रोड स्थित नगर परिषद कार्यालय में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब पटना से आई निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की विशेष टीम ने छापेमारी कर कनीय अभियंता (Junior Engineer) विजय कुमार शर्मा को 1,45,000 रुपये (एक लाख पैंतालीस हजार) की मोटी घूस लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।


 कानून के शिकंजे में घूसखोर: ₹1,45,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार सीतामढ़ी (पुपरी) नगर परिषद के कनीय अभियंता विजय कुमार शर्मा (लाल घेरे में) को अपनी गिरफ्त में लेकर जाते निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के पुलिसकर्मी।

 काम के बदले मांग रहा था कमीशन

मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी जूनियर इंजीनियर विजय कुमार शर्मा एक कार्य आवंटित करने के एवज में लगातार रिश्वत की मांग कर रहा था। पीड़ित की शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने मामले का कड़ाई से सत्यापन कराया। जैसे ही सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगे जाने के पुख्ता प्रमाण मिले, विभाग ने तुरंत एक्शन प्लान तैयार किया।

डीएसपी पवन कुमार के नेतृत्व में बिछाया गया जाल

निगरानी ब्यूरो, पटना के पुलिस उपाधीक्षक (DSP)  पवन कुमार-I के नेतृत्व में एक विशेष धावादल  का गठन किया गया। टीम ने पूरी गोपनीयता बरतते हुए नगर परिषद कार्यालय परिसर की घेराबंदी की। जैसे ही पीड़ित ने कनीय अभियंता को ₹1,45,000 की रकम थमाई, घात लगाए बैठी निगरानी की टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया। अचानक हुई इस कार्रवाई से कार्यालय में मौजूद अन्य अधिकारी और कर्मचारियों के बीच अफरा-तफरी मच गई।

मुजफ्फरपुर विशेष कोर्ट में होगी पेशी

निगरानी ब्यूरो की टीम आरोपी कनीय अभियंता को गिरफ्तार कर अपने साथ पटना ले गई है। ब्यूरो के अधिकारियों ने बताया कि आरोपी से सघन पूछताछ की जा रही है, जिसके बाद उसे मुजफ्फरपुर स्थित माननीय विशेष न्यायालय (निगरानी) में पेश किया जाएगा। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से जिले के भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है।

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