समस्तीपुर, 20 जुलाई 2026: देश में लगातार हो रहे पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में गहरी पैठ बना चुके भ्रष्टाचार और परीक्षा संचालन में व्याप्त गंभीर अनियमितताओं के खिलाफ आज समस्तीपुर शहर में अभूतपूर्व जनाक्रोश देखने को मिला। छात्र-युवा आक्रोश दिवस के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर भारी संख्या में छात्र, नौजवान और आम नागरिक सड़कों पर उतर आए। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी (भाकपा माले) और रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (आरवाईए) के संयुक्त बैनर तले आयोजित आक्रोश मार्च ने केंद्र सरकार की नीतियों और शिक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली के खिलाफ तीखा विरोध दर्ज कराया। नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे ऐतिहासिक छात्र आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत पद से इस्तीफे की मांग की।

सोमवार को समस्तीपुर शहर के प्रतिष्ठित स्टेडियम गोलंबर से प्रारंभ हुआ यह आक्रोश मार्च एक जनसैलाब में तब्दील हो गया। जुलूस में शामिल छात्र-युवाओं के हाथों में लाल झंडे, बैनर और तख्तियां थीं, जिन पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार करने, परीक्षा प्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा भविष्य को अंधकार में धकेलने वाली पेपर लीक की घटनाओं पर अविलंब रोक लगाने की मांगें अंकित थीं। शहर के मुख्य मार्गों से गुजरते समय प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की जनविरोधी और छात्र-विरोधी नीतियों के खिलाफ गगनभेदी नारेबाजी की। आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना था कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) जैसी संस्थाओं की विफलता और परीक्षाओं में लगातार हो रही धांधली के कारण देश के लाखों होनहार छात्रों का भविष्य पूरी तरह से बर्बाद हो रहा है, जबकि सरकार इस अत्यंत संवेदनशील और गंभीर समस्या पर अंकुश लगाने में पूरी तरह विफल साबित हुई है।

शिक्षा व्यवस्था में बढ़ता भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं: प्रो0 उमेश कुमार
सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले के जिला सचिव प्रो0 उमेश कुमार ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश की समूची शिक्षा व्यवस्था भ्रष्टाचार की दलदल में डूब चुकी है। परीक्षा संचालन में हर स्तर पर भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं, जिससे मेहनत करने वाले गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के साथ घोर अन्याय हो रहा है। उन्होंने चेताया कि छात्रों के अधिकारों पर डाका डालने वाली इस व्यवस्था के खिलाफ कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक देशव्यापी आंदोलन खड़ा हो चुका है, जिसे किसी भी दमनकारी नीति से दबाया नहीं जा सकता।
नैतिक जिम्मेदारी लें शिक्षा मंत्री, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बंद हो: रौशन कुमार
सभा की अध्यक्षता करते हुए आरवाईए के जिला सचिव रौशन कुमार ने वर्तमान सत्ता पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार सोची-समझी रणनीति के तहत देश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। वर्षों तक तैयारी करने के बाद जब छात्र परीक्षा देने जाते हैं, तो उन्हें पता चलता है कि प्रश्नपत्र पहले ही बिक चुका है। उन्होंने सीधे तौर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस विफलता का जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि उन्हें अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है और उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।

निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की गारंटी तक संघर्ष रहेगा जारी
सभा का कुशल संचालन करते हुए भाकपा माले जिला स्थाई समिति के सदस्य तथा आइसा-आरवाईए के जिला प्रभारी सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने उपस्थित जनसमूह को संकल्प दिलाते हुए कहा कि जब तक छात्रों और युवाओं की मूलभूत समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो जाता, जब तक देश में एक पूर्णतः निष्पक्ष व पारदर्शी परीक्षा प्रणाली लागू नहीं होती और हर नागरिक के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कानूनी गारंटी नहीं मिलती, तब तक यह संघर्ष सड़कों से लेकर संसद तक अनवरत जारी रहेगा।
इस बड़े राजनीतिक और सामाजिक विरोध प्रदर्शन में विपक्षी एकजुटता भी देखने को मिली। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता शाहिद हुसैन ने भी कार्यक्रम में शामिल होकर छात्रों की मांगों का पुरजोर समर्थन किया। उनके साथ राम विनोद पासवान, डा0 सुरज कुमार दास, पूर्व पार्षद अर्जुन राय, भाकपा माले जिला स्थाई समिति के सदस्य ललन कुमार, महावीर पोद्दार, जीबछ पासवान ने भी व्यवस्था के खिलाफ आवाज बुलंद की।

इसके अलावा माले जिला कमिटी के सम्मानित सदस्यों में अनील कुमार चौधरी, रामचंद्र पासवान, डा0 खुर्शीद खैर, उपेंद्र राय, दीनबंधु प्रसाद, दिनेश साह, आफताब आलम सहित आरवाईए के जुझारू नेता तनंजय प्रकाश, ललन कुमार उर्फ कुंदन राय समेत बहुत बड़ी संख्या में भाकपा माले, आरवाईए और आइसा के समर्पित कार्यकर्ता और आम नागरिक उपस्थित थे।
इन रास्तों से गुजरा जनसैलाब: शहर के स्टेडियम गोलंबर से शुरू होकर यह आक्रोश मार्च समाहरणालय, ओवरब्रीज चौराहा, महिला कॉलेज, नगर थाना एवं मुफस्सिल थाना होते हुए आगे बढ़ा। अंत में यह जुलूस ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) द्वारा कर्पूरी स्थल पर पहले से जारी सभा स्थल पर पहुंचकर एक महा-सभा में तब्दील हो गया, जहां आगे के उग्र आंदोलन की रणनीति की घोषणा की गई।
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