मुजफ्फरपुर में ‘मौत के सौदागर’ बने निजी अस्पताल! प्रसाद हॉस्पिटल का निबंधन सस्पेंड; दर्जन भर नर्सिंग होम सील, मंचा हड़कंप!

अग्निकांड के बाद जिला प्रशासन का महा-एक्शन: बिना लाइसेंस और मानकों को ताक पर रखकर चल रहे थे स्वास्थ्य केंद्र, भर्ती मरीजों को आधी रात सुरक्षित निकाल SKMCH में कराया गया भर्ती!

मुजफ्फरपुर (विशेष प्रतिनिधि): शहर के अखाड़ाघाट रोड स्थित ‘प्रसाद अस्पताल’ में हुए भीषण अग्निकांड के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह से ‘रौद्र रूप’ और एक्शन मोड में आ गया है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी और मरीजों की जान को जोखिम में डालने वाली आपराधिक लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन, मुजफ्फरपुर ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। सिविल सर्जन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रसाद हॉस्पिटल का निबंधन  तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। इसके साथ ही अस्पताल प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए निर्देश दिया है कि वे सात दिनों के भीतर सभी आवश्यक साक्ष्यों, दस्तावेजों और तथ्यपरक स्पष्टीकरण के साथ अपना पक्ष रखें। यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो अस्पताल का निबंधन हमेशा के लिए रद्द कर उस पर परमानेंट ताला लगा दिया जाएगा।

मुजफ्फरपुर का वह विवादित ‘प्रसाद हॉस्पिटल’ जहाँ अग्निकांड के बाद मची भारी अफरा-तफरी के बीच आग बुझाने और राहत कार्य में जुटी ‘बिहार अग्निशमन सेवा’ की गाड़ियां और डरी-सहमी जनता की भारी भीड़। (दाएं): हादसे के तुरंत बाद ग्राउंड जीरो पर भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे पदाधिकारी, जो खुद खड़े होकर अवैध अस्पताल को सील करने की बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई का नेतृत्व कर रहे हैं।

खौफनाक सच: न दस्तावेज, न फायर सेफ्टी; सीधे यमराज को न्योता!

जिलाधिकारी के सख्त आदेश पर अनुमंडल पदाधिकारी (पूर्वी) तुषार कुमार के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग ने श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (SKMCH) के आसपास और पूरे शहर में एक महा-अभियान छेड़ा। इस औचक छापेमारी के लिए प्रशासन द्वारा तीन अलग-अलग विशेष जांच टीमों का गठन किया गया था, जिसमें मुशहरी, मीनापुर, गायघाट और औराई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के वरिष्ठ चिकित्सा पदाधिकारियों को शामिल किया गया।

जांच के दौरान जो हकीकत सामने आई, उसने अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए। दर्जनों नामी निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के पास संचालन के लिए आवश्यक वैध लाइसेंस और सरकारी दस्तावेज तक उपलब्ध नहीं थे। कई जगहों पर स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में सरकारी मानकों और फायर सेफ्टी नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं।

प्रशासन के इस ताबड़तोड़ हंटर से पूरे जिले के अवैध नर्सिंग होम और मेडिकल माफियाओं में हड़कंप मच गया है। पिछले दो दिनों के भीतर चले इस विशेष अभियान के तहत कुल 1दर्जन निजी स्वास्थ्य संस्थानों और अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्रों को पूरी तरह से सील कर बंद कर दिया गया है।

कार्रवाई के दौरान सबसे बड़ी चुनौती इन अस्पतालों में वेंटिलेटर और आईसीयू में भर्ती बेबस मरीजों की सुरक्षा की थी। प्रशासन ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए भारी पुलिस बल की मौजूदगी में सभी गंभीर और सामान्य मरीजों को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू किया और एम्बुलेंस के जरिए सरकारी अस्पताल (SKMCH) में शिफ्ट कराया, जहां डॉक्टरों की विशेष टीम उनका मुफ्त और बेहतर इलाज कर रही है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अभी यह कार्रवाई थमने वाली नहीं है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक अन्य निजी स्वास्थ्य संस्थानों की सघन जांच जारी है। स्वास्थ्य के नाम पर जनता की जेब काटने वाले और उनकी जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले एक दर्जन से ज्यादा अन्य अस्पतालों को भी बहुत जल्द बंद करने का फरमान जारी हो सकता है।

चेहरे और पते बदलकर फिर मौत का धंधाशुरू करने की फिराक में शातिर माफिया!

प्रशासनिक कार्रवाई से बचने के लिए ये पेशेवर और शातिर अपराधी नया रास्ता निकालने में माहिर हैं; सील होने के बाद ये लोग नए नाम, नए पते और किसी दूसरे छद्म चेहरे को आगे कर दोबारा अवैध नर्सिंग होम का धंधा चमका लेते हैं। स्वास्थ्य के नाम पर इंसानी जिंदगियों से खिलवाड़ करने वाले इन सफेदपोश अपराधियों के इस खतरनाक चक्रव्यूह को तोड़ने का एकमात्र रास्ता यही है कि सिर्फ अस्पतालों की बिल्डिंग को सील न किया जाए, बल्कि इन अवैध संचालकों की व्यक्तिगत पहचान (जैसे आधार, पैन और फिंगरप्रिंट ट्रैक कर) सुनिश्चित की जाए। जिला प्रशासन को इन शातिर माफियाओं के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं और जालसाजी (420) के तहत नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर इन्हें सलाखों के पीछे भेजना होगा, ताकि कानून के खौफ से दोबारा कोई मासूम मरीजों की जान का सौदा करने की हिम्मत न कर सके।

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