नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार समेत एनडीए उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत तय; राष्ट्रीय लोक मोर्चा में टिकट कटने से भारी खलबली, उपेंद्र कुशवाहा के पास बचे अब अंतिम तीन विकल्प, राजद से महज एक ने किया पर्चा दाखिल।
पटना। बिहार विधानमंडल परिसर में बिहार विधान परिषद द्विवार्षिक चुनाव-2026 और उपचुनाव को लेकर राजनैतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। सोमवार को नामांकन के अंतिम दिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सभी 9 उम्मीदवारों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की गरिमामयी उपस्थिति में अपने-अपने पर्चे दाखिल किए। इस महा-नामांकन के साथ ही बिहार विधान परिषद की सीटों का पूरा समीकरण साफ हो गया है। एनडीए के सभी 9 कैंडिडेट की जीत पूरी तरह तय मानी जा रही है, जिससे राजनैतिक गलियारों में जश्न का माहौल है। वहीं दूसरी ओर, गठबंधन के भीतर सीटों के गणित और चेहरों के बदलाव ने कई दिग्गजों के समीकरण पूरी तरह बिगाड़ दिए हैं।

पावर स्टार पवन सिंह की एंट्री और एनडीए का सामाजिक समीकरण
इस बार के चुनाव में सबसे बड़ा धमाका भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने भोजपुरी सिनेमा के पावर स्टार पवन सिंह की विधिवत सदन में एंट्री कराकर किया है। बीजेपी ने इस चुनाव में सामाजिक और जातीय संतुलन को बेहद बारीकी से साधने की रणनीति अपनाई है। बीजेपी के कोटे से कुल 4 उम्मीदवारों ने नामांकन किया है, जिसमें पवन सिंह, संजय मयूख, अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित शामिल हैं। इनमें अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित अति पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिससे बीजेपी ने अपने कोर वोटर बेस को मजबूत संदेश दिया है।
जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के कोटे से भी 4 उम्मीदवारों ने पर्चा भरा है, जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे और राज्य सरकार में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का नाम सबसे प्रमुख है। वहीं लोक जनशक्ति पार्टी-रामविलास (एलजेपी-आर) की तरफ से कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अशरफ अंसारी ने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की मौजूदगी में अपना पर्चा भरा।

मंत्री दीपक प्रकाश का कटा पत्ता, कुर्सी जाने का खतरा
इस चुनाव की सबसे सनसनीखेज और चौंकाने वाली खबर राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के खेमे से आई है। आरएलएम के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की तरफ से इस बात का संकेत पहले से ही मिल गया था कि उनके बेटे और सम्राट चौधरी सरकार के कैबिनेट मंत्री दीपक प्रकाश कुशवाहा को विधान परिषद चुनाव में नहीं भेजा जाएगा। सोमवार को नामांकन की समय सीमा समाप्त होने तक दीपक प्रकाश कुशवाहा ने पर्चा दाखिल नहीं किया, जिससे उनका पत्ता पूरी तरह कट चुका है।
दीपक प्रकाश कुशवाहा के एमएलसी नहीं बनने से अब सरकार में उनका मंत्री पद जाना तय माना जा रहा है। राजनैतिक नियमों के अनुसार, बिना सदन का सदस्य रहे कोई भी व्यक्ति अधिकतम छह महीने तक ही मंत्री पद पर रह सकता है। इस विपरीत परिस्थिति में अब उपेंद्र कुशवाहा के पास दीपक प्रकाश के हटने की सूरत में दो मुख्य विकल्प बचे हैं:
- रालोमो कोटे से दीपक प्रकाश की पत्नी साक्षी मिश्रा कुशवाहा को मंत्री बनवाया जाए।
- या फिर राष्ट्रीय लोक मोर्चा विधायक दल के कद्दावर नेता माधव आनंद को मंत्री पद की शपथ दिलाई जाए।

विपक्ष का हाल: राजद से महज एक नामांकन, निर्विरोध निर्वाचन तय
विधानसभा के मौजूदा संख्या बल के हिसाब से एक उम्मीदवार को विधान परिषद पहुंचने के लिए कम से कम 25 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता है। विधानसभा में एनडीए के पास प्रचंड बहुमत है, जिसके कारण एनडीए के सभी 9 उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित है। विपक्षी खेमे की बात करें तो राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेतृत्व वाले महागठबंधन के पास केवल इतनी ही संख्या है कि वे एक सीट आसानी से जीत सकें। इसी गणित के तहत राजद की तरफ से केवल एक प्रत्याशी ने अपना नामांकन दाखिल किया है।
चूंकि कुल 10 खाली सीटों पर एनडीए के 9 और राजद का केवल 1 नामांकन ही आया है, इसलिए किसी भी सीट पर मतदान या वोटिंग की नौबत नहीं आएगी। स्क्रूटनी के बाद सभी 10 उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना पूरी तरह तय है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सभी एनडीए प्रत्याशियों को बधाई देते हुए इसे विकास की जीत बताया है।


