Thursday, July 30, 2026

महाशक्ति भारत के महानायक: 4399 दिनों के अखंड राज से नरेंद्र मोदी ने रचा इतिहास, तोड़ा नेहरू का रिकॉर्ड!

लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बन दुनिया को झुकाया, कैबिनेट ने खड़े होकर बजाईं तालियां;

नितिन नवीन बोले- “25 करोड़ लोगों को गरीबी से निकाला, अब भारत बनेगा विश्वगुरु”

ब्यूरो, नई दिल्ली :  भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। नरेंद्र मोदी देश के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं। उन्होंने देश के शासन और विकास की दिशा को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। 4399 दिनों की यह निरंतर सेवा, दूरदर्शी नेतृत्व और निर्णायक नीतिगत फैसलों का प्रमाण है। लगातार तीसरी बार देश की कमान संभालने वाले नरेंद्र मोदी ने न केवल भारत को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि वैश्विक मंच पर देश की प्रतिष्ठा को उस ऊँचाई पर पहुँचाया है जहाँ आज पूरी दुनिया भारत का लोहा मान रही है। इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में एक अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला, जब पूरी कैबिनेट ने खड़े होकर (स्टैंडिंग ओवेशन) तालियों की गड़गड़ाहट के साथ अपने नेता का अभिनंदन किया।

तस्‍वीर में बदलाव के 4399 दिन! विकास के अचूक आंकड़ों के साथ नया भारत। जनधन खातों से लेकर आयुष्मान कार्ड, एक्सप्रेसवे और पर कैपिटा जीडीपी (प्रति व्यक्ति आय) में हुई रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि नरेंद्र मोदी के ट्रांसफॉर्मेटिव लीडरशिप (परिवर्तनकारी नेतृत्व) की कहानी बयां कर रही है।

140 करोड़ जनता का अटूट विश्वास, विकास की आंधी में उड़े विरोधी

भारतीय जनता पार्टी के नेता नितिन नवीन ने इस ऐतिहासिक क्षण पर हुंकार भरते हुए कहा कि आज नरेंद्र मोदी के यशस्वी नेतृत्व ने एक नया इतिहास लिख दिया है। देश की 140 करोड़ जनता का जो आशीर्वाद, स्नेह और विश्वास उन्हें मिला है, यह उसी की ताकत और ऊर्जा है जिसके बल पर पूरी दुनिया में भारत का स्थान सर्वोच्च हुआ है। नितिन नवीन ने बड़े आंकड़े उजागर करते हुए कहा कि पिछले 12 सालों में जो कीर्तिमान बने हैं, उनमें सबसे बड़ा कीर्तिमान यह है कि आज 25 करोड़ परिवार गरीबी रेखा से बाहर आ चुके हैं। समाज के हर वर्ग, चाहे वह किसान हो, मज़दूर हो या रेहड़ी-पटरी वाला, नरेंद्र मोदी ने सबकी चिंता की है। यह दिन हर भारतवासी के लिए गर्व का दिन है। पार्टी का एक-एक कार्यकर्ता उन्हें अपने आदर्श के रूप में देखता है।

ऐतिहासिक स्टैंडिंग ओवेशन! देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्यों ने खड़े होकर और तालियां बजाकर उनका भव्य अभिनंदन किया।

केंद्रीय कैबिनेट ने जताया आभार: 2047 तक विकसित भारतका संकल्प

ऐतिहासिक उपलब्धि पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक विशेष प्रस्ताव पारित कर नरेंद्र मोदी को बधाई दी। कैबिनेट ने गरीब कल्याण और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण के लिए प्रधानमंत्री की नीतियों की सराहना की। प्रस्ताव में कहा गया कि राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने और भारत के हितों की रक्षा करने में नरेंद्र मोदी का कोई सानी नहीं है। कैबिनेट ने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भर, सुरक्षित, समृद्ध और गौरवशाली राष्ट्र के रूप में नई ऊंचाइयों को छुएगा और साल 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का मार्ग पूरी तरह सशक्त होगा।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और संजय सरावगी ने कहा- “यह जनशक्ति की विजय है”

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि लगातार निर्वाचित होकर भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री बनने का गौरव नरेंद्र मोदी को प्राप्त हुआ है। केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा दिया गया स्टैंडिंग ओवेशन उनके दूरदर्शी नेतृत्व और निर्णायक नीतियों का सम्मान है। वहीं, संजय सरावगी ने पोस्ट करते हुए लिखा कि जनविश्वास से जनकल्याण तक की 4399 दिनों की यह यात्रा नए भारत की पहचान बन चुकी है। यह उपलब्धि केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों के सामूहिक आत्मविश्वास और उज्ज्वल भविष्य का आंदोलन है।

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मर्डर के 25 दिन बाद भी हत्यारे खुलेआम आजाद! खौल उठा जनता का खून, 22 जून को ताजपुर थाने की ईंट से ईंट बजायेंगे आक्रोशित ग्रामीण !

मोटरसाइकिल मिस्त्री संजीव सहनी हत्याकांड में पुलिसिया नाकामियों के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का भयंकर आक्रोश, भाकपा माले के नेतृत्व में होगा महा-घेराव

ताजपुर/समस्तीपुर, 10 जून 2026: मोटरसाइकिल मिस्त्री संजीव कुमार सहनी की नृशंस हत्या के पूरे 25 दिन बीत जाने के बाद भी हत्यारों को दबोचने में नाकाम रही पुलिस प्रशासन के खिलाफ पूरे इलाके में जबरदस्त उबाल आ गया है। अपराधियों की खुलेआम घूमती टोली और खाकी की निष्क्रियता से गुस्साए ग्रामीणों का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका है। इसी भड़कती आग के बीच ताजपुर नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 27 स्थित मोतीपुर में बुधवार को मृतक के आवास पर आक्रोशित ग्रामीणों की एक आपात बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और सर्वसम्मति से यह महा-निर्णय लिया गया कि अगर अपराधियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो आगामी 22 जून को भाकपा माले के बैनर तले हजारों की संख्या में लोग ताजपुर थाना का घेराव कर ऐतिहासिक और उग्र आंदोलन करेंगे।

मृतक संजीव कुमार सहनी के मोतीपुर स्थित निवास पर न्याय की मांग को लेकर एकजुट हुए आक्रोशित ग्रामीणों एवं भाकपा माले नेताओं की बैठक, जहां सर्वसम्मति से 22 जून को ताजपुर थाना घेराव का आर-पार का फैसला लिया गया।

बैठक में उमड़े जनसैलाब और भाकपा माले के कद्दावर नेताओं ने स्थानीय पुलिस प्रशासन पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। वक्ताओं ने सीधे तौर पर कहा कि पुलिस की कथित सुस्ती और अपराधियों के साथ अंदरूनी सांठगांठ के कारण ही हत्यारे आज खुलेआम घूम रहे हैं और पीड़ित परिवार को जान का खतरा बना हुआ है। आरोप है कि ताजपुर थाना क्षेत्र में इन दिनों अपराध का ग्राफ रॉकेट की रफ्तार से बढ़ा है। चाहे दिन-दहाड़े हुआ भीषण सोना चोरी कांड हो या फिर लगातार हो रही हत्या और लूट की वारदातें, पुलिस हर मोर्चे पर पूरी तरह फेल साबित हुई है। इस नाकामी का सीधा फायदा बेखौफ अपराधी उठा रहे हैं, जिससे आम जनता के बीच भारी दहशत और चिंता का माहौल व्याप्त है। स्थानीय नेताओं ने दहाड़ते हुए कहा कि पुलिस जानबूझकर संजीव कुमार सहनी हत्याकांड के मुख्य आरोपियों को बचाने का खेल खेल रही है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बयान:– “थानाध्यक्ष और पुलिस उपाधीक्षक ने 4 दिनों के अंदर हत्यारों की गिरफ्तारी का जो लिखित-मौखिक आश्वासन दिया था, वह आखिर खोखला क्यों साबित हुआ? पुलिस अपराधियों को संरक्षण देना बंद करे, वरना 22 जून को जनता खुद इंसाफ के लिए थाना घेरेगी।” — सुरेन्द्र प्रसाद सिंह (प्रखंड सचिव, भाकपा माले)

गैरेज में घुसकर बरसाई थीं ताबड़तोड़ गोलियां: गौरतलब है कि बीते 15 मई को ताजपुर के व्यस्त गांधी चौक के पास स्थित रमजान अली स्कूल के समीप मोटरसाइकिल सवार शातिर अपराधियों ने मोटरसाइकिल मिस्त्री संजीव कुमार सहनी पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई थीं। अपराधियों ने गैरेज के अंदर ही संजीव कुमार सहनी को गोलियों से छलनी कर दिया था, जिससे मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई थी। इस दुस्साहसिक वारदात के बाद मृतक के लाचार पिता देवकी सहनी ने न्याय की गुहार लगाते हुए ताजपुर थाना में कांड संख्या 98/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी। घटना के तुरंत बाद जब जनता सड़कों पर उतरी थी, तब थानाध्यक्ष से लेकर पुलिस उपाधीक्षक तक ने रोष से भरी जनता को शांत करने के लिए 4 दिनों के भीतर हत्यारों को गिरफ्तार करने का बड़ा आश्वासन दिया था। लेकिन आज करीब 1 महीना बीतने को है, और नतीजा सिफर है। पुलिस के पास मृतक का मोबाइल और कई ठोस सुराग मौजूद होने के बावजूद जांच की सुई एक कदम भी आगे नहीं बढ़ी है, जिससे पुलिसिया कार्यशैली पर गहरे सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।

आंदोलनकारियों और पीड़ित परिवार की मुख्य मांगें:

  1. संजीव कुमार सहनी के हत्यारों की अविलंब और त्वरित गिरफ्तारी हो।
  2. पीड़ित और बेसहारा परिवार को प्रशासन की तरफ से उचित मुआवजा मिले।
  3. मृतक के परिवार के 1 सदस्य को तत्काल सरकारी नौकरी दी जाए।
  4. थाना क्षेत्र में बढ़ती आपराधिक घटनाओं और चोरी पर तुरंत लगाम लगे।

बैठक में मुख्य रूप से उपस्थित रहे: भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह, प्रखंड कमिटी सदस्य ललन दास, जीतेंद्र कुमार सहनी, मृतक के पिता देवकी सहनी, मृतक की पत्नी रवीना देवी, मृतक का भाई सुशील सहनी, कुशी सहनी, सोनिया देवी, बबिता देवी, सुदामा देवी, राजकुमारी देवी, सरयुग कुमार, सीटू कुमार, रघुनाथ सहनी, चंदन सहनी समेत सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ता एवं ग्रामीण।

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बिहार यूनिवर्सिटी में ‘ऑपरेशन वाइस-चांसलर’! एक झटके में बदले गए नए कॉलेजों के चेहरे, वित्तीय ताला-चाबी पर कड़ा पहरा

मुजफ्फरपुर: बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर बिहार यूनिवर्सिटी (बीआरएबीयू) से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है । चांसलर और वाइस-चांसलर के कड़े रुख के बीच यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशों को जमीन पर उतारने के लिए ताबड़तोड़ तीन बड़े आदेश जारी कर दिए हैं । नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 को सुचारू रूप से शुरू करने और कॉलेज फंड में होने वाली हेराफेरी पर पूरी तरह से नकेल कसने के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक फेरबदल माना जा रहा है ।

बिहार सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के संकल्प संख्या 15/पी/5-03/2026-633 और 19/पी/2/01/2026-872 के आलोक में वाइस-चांसलर ने दो नवनिर्मित राजकीय डिग्री कॉलेजों में तत्काल प्रभाव से प्रोफेसर-इन-चार्ज यानी प्राचार्यों की तैनाती कर दी है । यूनिवर्सिटी ने आदेश दिया है कि ये शिक्षक तुरंत योगदान देंगे ताकि नए सत्र की पढ़ाई में कोई बाधा न आए ।

  • पश्चिम चंपारण के पिपरासी स्थित राजकीय डिग्री महाविद्यालय में टीपी वर्मा कॉलेज, नरकटियागंज के पॉलिटिकल साइंस विभाग के चंद्र भूषण बैठा को कमान सौंपी गई है ।
  • पश्चिम चंपारण के ही भितहा स्थित राजकीय डिग्री महाविद्यालय में आरएलएसवाई कॉलेज, बेतिया के इकोनॉमिक्स विभाग के सुरेश कुमार को नया प्रोफेसर-इन-चार्ज बनाया गया है ।

भ्रष्टाचार पर चोट: 39 कॉलेजों में बर्सरतैनात, संभालेंगे तिजोरी

प्रशासनिक और वित्तीय अनुशासन को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए वाइस-चांसलर ने एक और चौंकाने वाला फैसला लेते हुए 39 शिक्षकों को अलग-अलग कॉलेजों में बर्सर (अर्थपाल) के पद पर प्रतिनियुक्त कर दिया है । अब ये बर्सर कॉलेजों के वित्तीय कामकाज पर पैनी नजर रखेंगे ।

इनमें पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली और पश्चिम चंपारण के कॉलेज शामिल हैं । मुख्य रूप से मनोहर कुमार श्रीवास्तव (संग्रामपुर), पवन कुमार (बनकरिया), रितेश पासवान (मेहसी), सरोज कुमार (औरई), विनोद कुमार आजाद (सुगौली), अनीता कुमारी (तुरकौलिया), वलिउर रहमान (तेतरिया), मोहम्मद एजाज अनवर (नानपुर), अर्धेंदु (गायघाट), कमलेश कुमार (रामगढ़वा), शशि कुमार पासवान (अदापुर), प्रभाकर सिंह (छौड़ादानो) और कुमारी रंजना (बनकटवा) जैसे कई नामों को इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से नवाजा गया है । इसके अलावा राजेश कुमार चंदेल को पिपरासी और संतोष आनंद को भितहा का बर्सर बनाया गया है ।

एकतरफा चालाकी खत्म! अब ज्वॉइंट सिग्नेचर के बिना बैंक से नहीं निकलेगा एक भी रुपया

तीसरे और सबसे कड़े फैसले के तहत रजिस्ट्रार समीर कुमार शर्मा ने एक सख्त अधिसूचना जारी की है । अब नव-स्थापित राजकीय महाविद्यालयों के सभी बैंक खातों (सेविंग और करंट) का संचालन केवल प्राचार्य और बर्सर के संयुक्त हस्ताक्षर (ज्वॉइंट सिग्नेचर) से ही हो सकेगा । छात्र शुल्क, परीक्षा शुल्क, सरकारी या गैर-सरकारी अनुदान या दान से आने वाली हर एक पाई इसी संयुक्त खाते में जमा होगी । दोनों के हस्ताक्षर के बिना न तो कोई चेक जारी होगा, न ऑनलाइन ट्रांसफर और न ही कोई निकासी होगी ।

यूनिवर्सिटी ने अल्टीमेटम दिया है कि सभी कॉलेज 5 दिनों के भीतर बैंक की ये औपचारिकताएं पूरी कर रिपोर्ट दें और 30 दिनों के भीतर बैंक पासबुक, स्टेटमेंट और ज्वॉइंट मैंडेट की कॉपी कुलसचिव कार्यालय में जमा करें । नियमों की अनदेखी करने पर सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है ।

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रक्त की एक बूंद से बचेगी जिंदगी, सुजावलपुर में कल सजेगा ‘महादान’ का सबसे बड़ा मंच, उमड़ेगा युवाओं का सैलाब!

धड़कनों को थमने से रोकने के लिए सकरा (सुजावलपुर) मुजफ्फरपुर में महाअभियान, तैयारियों को लेकर युवाओं में भारी उत्साह।

सकरा (मुजफ्फरपुर): मानवता की सेवा और किसी की थमती हुई सांसों को नई जिंदगी देने के लिए ढोली मुजफ्फरपुर के सुजावलपुर में कल एक ऐतिहासिक महाअभियान की शुरुआत होने जा रही है। इलाके के सजग और जागरूक युवाओं द्वारा आयोजित यह मेगा ब्लड डोनेशन कैंप (रक्तदान शिविर) क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा और प्रभावी शिविर साबित होने वाला है। इस पूरे आयोजन को लेकर क्षेत्र के युवाओं और आम जनता में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

11 जून 2026 को ढोली मुजफ्फरपुर के सुजावलपुर में आयोजित होने वाले मेगा ब्लड डोनेशन कैंप (रक्तदान शिविर) को लेकर जारी किया गया विशेष पोस्टर, जिसमें भावेश भाई सोलंकी की स्मृति में केवल 1 दिन शेष (1 डे टू गो) रहने की घोषणा के साथ युवाओं से महादान में शामिल होने का आह्वान किया गया है।

कल सुबह 9 बजे से शुरू होगा महादान : प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह विशाल रक्तदान शिविर 11 जून 2026 को सुबह 9:00 बजे से लेकर शाम 5:00 बजे तक अनवरत चलेगा। आयोजन के लिए सुजावलपुर स्थित पप्पू सिनेमा हॉल के निकट मैक्स डायग्नोसिस सेंटर को मुख्य केंद्र बनाया गया है। शिविर की तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं और डॉक्टरों व चिकित्सा कर्मियों की विशेष टीम भी मुस्तैद रहेगी, ताकि रक्तदाताओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

भावेश भाई सोलंकी की याद में समर्पित है यह शिविर यह पूरा आयोजन भावेश भाई सोलंकी की पावन स्मृति में किया जा रहा है। ‘इन मेमोरी ऑफ भावेश’ के संकल्प के साथ आयोजित इस मेगा ब्लड डोनेशन कैंप का मुख्य उद्देश्य अस्पतालों में रक्त की कमी से जूझ रहे मरीजों, थैलेसीमिया पीड़ितों और आपातकालीन स्थिति में फंसे लोगों तक समय पर मदद पहुंचाना है। आयोजकों का कहना है कि अगर आपके रक्त की कुछ बूंदें किसी के दिल की धड़कन बन सकती हैं, तो मानव जीवन में इससे बड़ा पुण्य और सौभाग्य का काम दूसरा कोई नहीं हो सकता।

आयोजन समिति ने की बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन के इरशाद आलम (मोबाइल नंबर: 9934073740) और मोबाइल केयर के विकास कुमार (मोबाइल नंबर: 9955100888) पूरी ताकत से जुटे हुए हैं। उन्होंने क्षेत्र के तमाम युवाओं, समाजसेवियों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे कल 11 जून को मैक्स डायग्नोसिस सेंटर पहुंचकर इस महादान का हिस्सा बनें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। विस्तृत जानकारी या किसी भी प्रकार के सहयोग के लिए जारी किए गए मोबाइल नंबरों पर सीधे संपर्क किया जा सकता है।

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नोटबंदी पार्ट-3 की उड़ी अफवाह: 30 जून से कागज के नोट बंद होने का दावा पूरी तरह फर्जी, सरकार और आरबीआई ने खोला सच!

विशेष संवाददाता :  सोशल मीडिया पर इन दिनों भारतीय मुद्रा (करेंसी) को लेकर एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो में यह दावा किया जा रहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) आगामी 30 जून 2026 से देश में चल रहे सभी कागजी नोटों को पूरी तरह से बंद (डिस्कंटीन्यू) करने जा रहा है। वीडियो में आगे दावा किया गया है कि इन कागजी नोटों की जगह अब बाजार में पूरी तरह से नए प्लास्टिक के नोट जारी किए जाएंगे। इस खबर के सामने आते ही आम जनता के बीच हड़कंप मच गया और लोग असमंजस की स्थिति में आ गए।

पीआईबी फैक्ट चेक ने किया भंडाफोड़, बताया पूरी तरह से फेक जब इस वायरल दावे की सच्चाई जानने के लिए भारत सरकार की आधिकारिक एजेंसी प्रेस इनफॉरमेशन ब्यूरो (पीआईबी) के ‘पीआईबी फैक्ट चेक’ विंग ने इसकी गहनता से जांच की, तो यह दावा पूरी तरह से झूठा और बेबुनियाद पाया गया। पीआईबी फैक्ट चेक ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि सोशल मीडिया पर किया जा रहा यह दावा पूरी तरह से ‘फेक’ (फर्जी) है। डिजिटल रूप से छेड़छाड़ (डिजिटली आल्टरड) कर बनाए गए इस वीडियो का सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है।

सोशल मीडिया पर 30 जून से कागज के नोट बंद होने और प्लास्टिक नोट आने का जो दावा किया जा रहा है, उसे पीआईबी फैक्ट चेक ने पूरी तरह फर्जी (फेक) और डिजिटली एडिटेड करार दिया है।

आरबीआई की ऐसी कोई योजना नहीं: आधिकारिक बयान भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अनुसार, वर्तमान में कागजी मुद्रा नोटों को वापस लेने या उन्हें 30 जून 2026 तक प्लास्टिक के नोटों से बदलने की ऐसी कोई योजना नहीं है। देश की बैंकिंग प्रणाली और मुद्रा व्यवस्था पहले की तरह ही सुचारू रूप से काम करती रहेगी। आरबीआई ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस तरह की किसी भी भ्रामक और डराने वाली खबरों पर विश्वास न करें।

साझा करने से पहले करें पुष्टि, संदिग्ध खबरों की यहां करें रिपोर्ट सरकार ने जनता को सचेत करते हुए कहा है कि किसी भी सोशल मीडिया पोस्ट को आगे शेयर या फॉरवर्ड करने से पहले हमेशा आधिकारिक स्रोतों से जानकारी की पुष्टि (वेरिफिकेशन) अवश्य कर लें। प्रामाणिक और सही जानकारी के लिए हमेशा आधिकारिक आरबीआई वेबसाइट आरबीआई डॉट ओआरजी डॉट इन (rbi.org.in) पर ही भरोसा करें। इसके अलावा, यदि आपको भारत सरकार या देश की व्यवस्था से जुड़ी कोई भी संदिग्ध सामग्री या संदेश मिलता है, तो उसे तुरंत पीआईबी फैक्ट चेक को रिपोर्ट करें ताकि सही समय पर अफवाहों पर लगाम लगाई जा सके।

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अग्निकांड के बीच मरीजों को मरता छोड़ भागा डॉक्टर सस्पेंड: जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन का महा-एक्शन, 24 घंटे में 25 अस्पताल सील!

प्रसाद हॉस्पिटल आईसीयू त्रासदी में ड्यूटी से गायब रहने वाले बंदरा पीएचसी प्रभारी पंकज कुमार पर गिरी गाज, निजी अस्पतालों में मचा हड़कंप

ब्यूरो रिपोर्ट: स्वास्थ्य व्यवस्था में संवेदनहीनता और लापरवाही बरतने वाले सफेदपोशों के खिलाफ जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन की तीखी अनुशंसा पर स्वास्थ्य विभाग ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) बंदरा के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर पंकज कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर 4 जून को प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू (इंटेन्सिव केयर यूनिट) में लगी भीषण और डरावनी आग के दौरान, तड़पते और जिंदगी की भीख मांगते मरीजों को भगवान भरोसे छोड़कर अस्पताल परिसर से रफूचक्कर होने का बेहद गंभीर और शर्मनाक आरोप है।

मरीजों को छोड़ भागने का संगीन आरोप

प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रसाद हॉस्पिटल में जब आग की लपटें वीभत्स रूप ले रही थीं, तब डॉक्टर पंकज कुमार वहां ड्यूटी पर तैनात थे। संकट की उस बेहद संवेदनशील घड़ी में जब एक चिकित्सक की भूमिका देवदूत जैसी होनी चाहिए थी, तब वह अपनी नैतिक और सेवा संबंधी जिम्मेदारियों को ताक पर रखकर वहां से फरार हो गए। जिला प्रशासन ने इस कृत्य को कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही और मरीजों के प्रति अमानवीय संवेदनहीनता की पराकाष्ठा माना है।

जांच में खुले डॉक्टर के तीन बड़े काले चिट्ठे:

जांच टीम की रिपोर्ट में डॉक्टर पंकज कुमार के खिलाफ तीन बेहद गंभीर मामले सामने आए हैं:

1. 4 जून को प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू में हुए भीषण अग्निकांड के समय मरीजों की जान बचाने के बजाय ड्यूटी छोड़कर भाग जाना।

2. सरकारी सेवा के नियमों की धज्जियां उड़ाकर निजी अस्पताल में अपनी सेवाएं देना।

3. अपने मूल पदस्थापन स्थल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) बंदरा से अनधिकृत रूप से लगातार अनुपस्थित रहना।

सिर्फ जीवन-निर्वाह भत्ता मिलेगा, होगी विस्तृत जांच

स्वास्थ्य विभाग ने इन आरोपों को बेहद गंभीरता से लेते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 9(1)(क) के तहत यह सख्त निलंबन आदेश जारी किया है। निलंबन की इस पूरी अवधि के दौरान डॉक्टर पंकज कुमार का मुख्यालय स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना द्वारा तय किया जाएगा। इस दौरान उन्हें नियमानुसार सिर्फ जीवन-निर्वाह भत्ता ही नसीब होगा। इसके साथ ही प्रशासन उनके खिलाफ लगे तमाम संगीन आरोपों की विस्तृत विभागीय जांच भी बिठा रहा है, जिससे उनकी बर्खास्तगी तक का रास्ता साफ हो सकता है।

जिले में महा-अभियान: 25 अस्पतालों पर जड़ा ताला

इस भयंकर अग्निकांड की घटना के बाद जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन के तेवर बेहद कड़े हो गए हैं। पूरे जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा मानकों और फायर प्रोटोकॉल की जांच के लिए एक हाई-पावर विशेष टीम का गठन किया गया है। यह टीम बिना किसी पूर्व सूचना के निजी अस्पतालों, नर्सिंग होमों और क्लीनिकों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है। अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई का ब्यौरा देते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि सरकारी प्रोटोकॉल और अनिवार्य सुरक्षा मानकों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन करने के मामले में अब तक २५ स्वास्थ्य संस्थानों को पूरी तरह से सील कर बंद कर दिया गया है। इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से पूरे जिले के निजी मेडिकल माफियाओं और लापरवाह डॉक्टरों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यह महा-जांच अभियान थमने वाला नहीं है, और नियमों को ठेंगा दिखाने वाले हर संस्थान को सील किया जाएगा।

लापरवाही पर सीधे नपेंगे जिम्मेदार: जिलाधिकारी

इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने कहा, “स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी स्तर की ढिलाई या लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मरीजों के जीवन की रक्षा करना जिला प्रशासन की सबसे पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता है। आपातकालीन परिस्थितियों और संकट के समय तैनात डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों से शत-प्रतिशत जवाबदेही और सेवा भाव की अपेक्षा की जाती है। जो भी इस कसौटी पर फेल होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।”

समीक्षा बैठक में अन्य बड़े मुद्दों पर भी कड़े निर्देश

इस बड़ी प्रशासनिक सर्जरी के साथ-साथ जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने समाहरणालय सभागार में एक बेहद महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक भी बुलाई। इस उच्च स्तरीय बैठक में उन्होंने जिले के विकास और लोक कल्याण से जुड़े कई अन्य अहम मुद्दों जैसे किसान निबंधन, राजस्व एवं भूमि सुधार की प्रगति, बड़े पैमाने पर चल रहे टीकाकरण अभियान तथा बच्चों के लिए जानलेवा साबित होने वाले एईएस (चमकी बुखार) की पूर्व तैयारियों की भी बारीकी से समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को मुस्तैद रहने का कड़ा निर्देश दिया।

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बिहार के चार जिलों में बदले डिग्री कॉलेजों के पते: गायघाट, पीरपैंती, सिंघिया एवं थरथरी में खुला डिग्री कॉलेज, देखें अब कहाँ होगी पढ़ाई!

मुजफ्फरपुर के गायघाट को मिला उच्च शिक्षा का सबसे बड़ा तोहफा, राजकीयकृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जारंग में शुरू होगी डिग्री कॉलेज की पढ़ाई

पटना/मुजफ्फरपुर। बिहार के उच्च शिक्षा विभाग से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए बिहार के चार प्रमुख जिलों—मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, भागलपुर और नालंदा के ग्रामीण इलाकों में डिग्री कॉलेजों के संचालन को अंतिम मंजूरी दे दी है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी विभागीय संकल्प संख्या-633, दिनांक 30.04.2026 के तहत इन सभी क्षेत्रों में कॉलेज संचालन के पते बदल दिए गए हैं, यानी अब पहले से तय स्कूलों की जगह नए संशोधित संस्थानों में कॉलेज की कक्षाएं लगेंगी।

इस पूरे फैसले में मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट प्रखंड के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है। गायघाट में डिग्री कॉलेज के संचालन को लेकर सरकार ने बड़ा संशोधन किया है। पहले जहाँ ‘मध्य विद्यालय, पीरौँछा, गायघाट’ को इसके लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था, वहीं अब नए और अंतिम आदेश के तहत गायघाट प्रखंड के राजकीयकृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, जारंग में डिग्री कॉलेज का संचालन सुनिश्चित किया गया है। इस फैसले के बाद जारंग और आसपास के दर्जनों गांवों के छात्र-छात्राओं में जश्न का माहौल है, क्योंकि अब उन्हें स्नातक (ग्रैजुएशन) की पढ़ाई के लिए मुजफ्फरपुर शहर या सुदूर इलाकों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

समस्तीपुर के सिंघिया को भी मिला नया ठिकाना, सांसद शाम्भवी चौधरी ने जताया आभार

गायघाट के साथ-साथ समस्तीपुर जिले के सिंघिया प्रखंड के लोगों की भी बरसों पुरानी मांग पूरी हो गई है। समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र (23) की सांसद शाम्भवी चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए इस ऐतिहासिक निर्णय की आधिकारिक जानकारी साझा की।

सांसद शाम्भवी चौधरी ने बताया कि सिंघिया प्रखंड के युवाओं और छात्राओं की लंबे समय से मांग थी कि क्षेत्र में एक डिग्री कॉलेज खोला जाए ताकि उन्हें उच्च शिक्षा के लिए दूर न जाना पड़े। सरकार ने इस मांग को स्वीकार कर लिया है। नए भवन के निर्माण तक इस महाविद्यालय का संचालन अस्थाई रूप से ‘+2 कुमार गंगनंद एकेडमी, सिंघिया में किया जाएगा (जबकि पहले इसके लिए ‘उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय, बसुआ’ को चिन्हित किया गया था)। सांसद ने इस महत्वपूर्ण कदम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम कर रही बिहार की डबल इंजन सरकार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का विशेष धन्यवाद किया है।

भागलपुर और नालंदा में भी बदले पते, यहाँ देखें पूरी संशोधित लिस्ट

उच्च शिक्षा विभाग के इस नए आदेश से भागलपुर के पीरपैंती और नालंदा के थरथरी प्रखंड के कॉलेजों के पते भी पूरी तरह बदल गए हैं। चारों जिलों की पूरी और स्पष्ट सूची इस प्रकार है:

  1. मुजफ्फरपुर (गायघाट प्रखंड): पहले यहाँ ‘मध्य विद्यालय, पीरौँछा’ तय था, जिसे अब बदलकर राजकीयकृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, जारंग कर दिया गया है।
  2. समस्तीपुर (सिंघिया प्रखंड): पहले यहाँ ‘उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय, बसुआ’ चिन्हित था, जिसे अब संशोधित कर ‘+2 कुमार गंगनंद एकेडमी, सिंघिया कर दिया गया है।
  3. भागलपुर (पीरपैंती प्रखंड): पहले यहाँ ‘राजकीय बुनियादी विद्यालय, पंचरुखी’ का चयन हुआ था, जिसे अब निरस्त कर मध्य विद्यालय सिमानपुर, पीरपैंती में संचालित किया जाएगा।
  4. नालंदा (थरथरी प्रखंड): पहले यहाँ ‘+2 उच्च विद्यालय पमारा, त्रिभुवनबिघा’ तय था, जिसे अब बदलकर मध्य विद्यालय, भटहर, थरथरी कर दिया गया है।

ग्रामीण इलाकों के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की ओर बड़ा कदम

सरकार के इस कड़कदार फैसले से बिहार के ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में उच्च शिक्षा का बुनियादी ढांचा बेहद मजबूत होने जा रहा है। विशेषकर गायघाट और सिंघिया जैसे बाढ़ प्रभावित व ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है। स्थानीय शिक्षाविदों और प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि इन संशोधित और बेहतर बुनियादी ढांचे वाले स्कूलों में कॉलेज की पढ़ाई शुरू होने से इलाके का शैक्षणिक स्तर तेजी से सुधरेगा और ड्राप आउट रेट पर पूरी तरह से लगाम लगेगी।

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उद्योगपतियों के लिए बिहार ने बिछाया रेड कारपेट: 30 दिनों में ‘क्लीयरेंस’ की गारंटी, एसआईपीबी सचिवालय बना ‘सुपरपावर’!

प्रशासनिक सुस्ती और लालफीताशाही पर सरकार का आखिरी प्रहार: सिंगल विंडो प्रणाली से दूर होंगी सारी अड़चनें, समयबद्ध तरीके से खुलेंगे रोजगार के महा-द्वार

पटना। बिहार को देश का अगला बड़ा इंडस्ट्रियल हब बनाने और राज्य की अर्थव्यवस्था की रफ्तार को सातवें आसमान पर पहुंचाने के लिए सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़क फैसला लिया है। नए कारखाने और उद्योग स्थापित करने की राह में रोड़ा बनने वाली तमाम प्रशासनिक अड़चनों को पूरी तरह से ध्वस्त करते हुए बिहार सरकार ने देश और दुनिया के उद्योगपतियों के लिए ‘रेड कारपेट’ (लाल कालीन) बिछा दिया है। सरकार ने ऐतिहासिक नीतिगत बदलाव करते हुए गारंटी दी है कि अब राज्य में नया उद्योग लगाने के लिए आवश्यक सभी सरकारी मंजूरियां और क्लीयरेंस मात्र 30 दिनों के भीतर प्रदान कर दी जाएंगी। इसे बिहार के औद्योगिक इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा ‘मास्टर स्ट्रोक’ माना जा रहा है।

इस क्रांतिकारी व्यवस्था को धरातल पर उतारने और निवेशकों को विभागों के चक्कर काटने की मानसिक प्रताड़ना से मुक्ति दिलाने के लिए ‘सिंगल विंडो’ (एकल खिड़की) प्रणाली को पूरी तरह से री-डिजाइन किया गया है। इसके तहत राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद (एसआईपीबी) सचिवालय को एकमात्र एकल नोडल एजेंसी के रूप में अधिकृत करने की मंजूरी दे दी गई है। इस बड़े बदलाव के बाद एसआईपीबी सचिवालय अब एक ‘सुपरपावर’ एजेंसी के रूप में उभरा है, जिसके पास उद्योगों को जल्द से जल्द हरी झंडी दिलाने की पूरी कमान होगी।

फाइलों को अटकाने वाले अधिकारियों की अब खैर नहीं

इस नई व्यवस्था के लागू होने से विभिन्न विभागों के बीच होने वाली अंतहीन कागजी देरी और फाइलों की सुस्ती के दौर का पूरी तरह से अंत हो गया है। नई नीति के तहत विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और अनुमोदन प्रक्रिया को न केवल तेज किया गया है, बल्कि इसे पूरी तरह से पारदर्शी और समयबद्ध (टाइम-बाउंड) बना दिया गया है। अगर कोई विभाग तय समय सीमा के भीतर अपनी आपत्ति या स्वीकृति दर्ज नहीं कराता है, तो उसे ‘स्वतः स्वीकृत’ (डीम्ड अप्रूवल) मान लिया जाएगा। इस कड़े कदम से अधिकारियों की मनमानी और फाइलों को दबाकर बैठने की प्रवृत्ति पर पूरी तरह से रोक लगेगी।

पलायन की समस्या पर लगेगी अंतिम रोक, रोजगार की आएगी बाढ़

सरकार के इस कड़े और दूरदर्शी निर्णय का सीधा असर राज्य के युवाओं पर पड़ने वाला है। नए उद्योगों की स्थापना के रास्ते साफ होने से राज्य में बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश होगा, जिससे लाखों की संख्या में रोजगार के नए अवसरों का सृजन होगा। उद्योगपतियों को 30 दिनों के भीतर क्लीयरेंस मिलने से कारखाने तेजी से ऑन-ग्राउंड चालू होंगे, जिससे बिहार से होने वाले प्रतिभा और श्रम के पलायन पर हमेशा के लिए रोक लगाने में मदद मिलेगी।

निवेश, उद्योग और रोजगार के इन त्रिकोणीय अवसरों के साथ बिहार विकास की एक ऐसी नई ऊंचाई की ओर अग्रसर हो चुका है, जिसकी कल्पना दशक भर पहले तक असंभव लगती थी।

इस नई व्यवस्था की 5 सबसे बड़ी और कड़क बातें:

  • 30 दिनों की डेडलाइन‘: आवेदन करने के ठीक एक महीने के भीतर उद्योगपतियों के हाथ में होगी स्थापना की अंतिम मंजूरी।
  • एसआईपीबी बना सुपरपावर‘: अब अलग-अलग विभागों के दफ्तरों के चक्कर काटने के दिन लदे, एक ही नोडल एजेंसी संभालेगी पूरा जिम्मा।
  • प्रशासनिक जटिलताओं का अंत: नियमों को बेहद सरल और सुगम बनाया गया ताकि निवेशकों को बिहार में काम करना सबसे आसान लगे।
  • पारदर्शिता की गारंटी: पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन और ट्रैक करने योग्य बनाया गया है, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म होगी।
  • आर्थिक प्रगति को नई धार: नए कारखाने खुलने से स्थानीय व्यापार चमकेगा और राज्य के राजस्व में भारी बढ़ोतरी दर्ज होगी।

बिहार सरकार का यह कदम राज्य के औद्योगिक और सामाजिक ढांचे में एक युगांतरकारी तब्दीली लाने वाला साबित होने जा रहा है। अब देखना यह है कि इस बेहतरीन नीति के लागू होने के बाद देश के बड़े कॉर्पोरेट घराने बिहार की धरती पर अपनी फैक्ट्रियां लगाने के लिए कितनी तेजी से कदम बढ़ाते हैं।

बिहार में कोचिंग माफियाओं पर सीएम सम्राट चौधरी का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, स्कूल-कॉलेज संचालित किये जाने के समय में कोचिंग चलाने पर पूरी तरह पाबंदी

कोचिंग संचालकों की मनमानी पर लगा ब्रेक‘, सभी छात्रों का ब्योरा जिला प्रशासन को सौंपना होगा अनिवार्य; शिक्षा विभाग को नियमावली तैयार करने का अल्टीमेटम

पटना: बिहार में शिक्षा व्यवस्था में सुधार के नाम पर कोचिंग सेंटरों की मनमानी और लूट-खसोट पर अब सरकार का कड़ा चाबुक चलने वाला है। सीएम सम्राट चौधरी ने कोचिंग संचालकों को सीधी और सख्त चेतावनी दी है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा के मंदिर में अब अनुशासन और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सीएम सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राज्य के कोचिंग संचालकों के लिए नई नियमावली का बिगुल फूंक दिया है, जिससे कोचिंग माफियाओं में हड़कंप मच गया है।

सोशल मीडिया पर नई गाइडलाइन जारी करते हुए सीएम सम्राट चौधरी

स्कूल-कॉलेज समय में कोचिंग पर पूर्ण प्रतिबंध सरकार के इस नए फैसले के तहत, अब कोई भी कोचिंग संस्थान स्कूल और कॉलेज के निर्धारित शिक्षण समय के दौरान संचालित नहीं किया जा सकेगा। यह फैसला उन विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है, जो अपनी नियमित पढ़ाई के समय को छोड़कर कोचिंग सेंटरों में व्यस्त रहते हैं। हालांकि, इस व्यवस्था से उन विद्यार्थियों को राहत दी गई है जिन्होंने अपनी नियमित स्कूली या महाविद्यालयी शिक्षा पूरी कर ली है, ताकि उनकी उच्च शिक्षा या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी बाधित न हो।

जिला प्रशासन को सौंपना होगा छात्रों का पूरा ब्योरा सरकार ने पारदर्शिता बरतने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। अब प्रत्येक कोचिंग संस्थान के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे अपने यहाँ अध्ययनरत सभी विद्यार्थियों का विवरण संबंधित जिला प्रशासन को उपलब्ध कराएं। इस कदम से प्रशासन की नजर उन छात्रों पर भी रहेगी जो नियमित शिक्षा के दौरान कोचिंग सेंटरों में अपना समय बिताते हैं।

शिक्षा विभाग को मिला नियमावली का टास्क इस पूरे मामले को अमलीजामा पहनाने के लिए सीएम सम्राट चौधरी ने शिक्षा विभाग को तत्काल प्रभाव से नई नियमावली तैयार करने का निर्देश दिया है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन, पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित करना ही राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। माना जा रहा है कि बहुत जल्द कोचिंग सेंटरों के लिए सख्त दिशा-निर्देश लागू कर दिए जाएंगे, जिसका पालन न करने वाले संस्थानों पर भारी जुर्माना या लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई हो सकती है।

बिहार सरकार द्वारा कोचिंग संस्थानों के संचालन को लेकर बनाए गए नियमों के तहत, यदि कोई कोचिंग सेंटर स्कूल या कॉलेज के निर्धारित शिक्षण समय (जैसे सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक) के दौरान कक्षाएं संचालित करता पाया जाता है, तो उसे नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है। ऐसे मामलों में पहली बार पकड़े जाने पर संस्थान पर भारी आर्थिक दंड (जुर्माना) लगाने का प्रावधान है, और यदि संचालक बार-बार इस नियम की अनदेखी करता है या अवहेलना जारी रखता है, तो जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के पास उस कोचिंग संस्थान का निबंधन (रजिस्ट्रेशन) रद्द करने और उसे पूरी तरह से ब्लैकलिस्ट करने का विधिक अधिकार है।

अब देखना यह होगा कि सरकार के इस धमाकेदार फैसले के बाद कोचिंग सेंटरों की मनमानी पर कितनी जल्दी लगाम लगती है।

मौत की स्याही: अखबार में लिपटा समोसा दे रहा है कैंसर को खुला न्योता, एफएसएसएआई ने लगाया तत्काल कड़ा बैन!

सावधान! जिसे आप चाव से खा रहे हैं वह असल में धीमा जहर है; होटल, ठेले और रेस्टोरेंट में समाचार पत्रों के इस्तेमाल पर अब होगी सीधी कार्रवाई

विशेष संवाददाता  : क्या आप भी सुबह-सुबह नुक्कड़ के ठेले या रेस्टोरेंट से अखबार में लिपटा हुआ गरमा-गरम समोसा, वड़ा पाव, जलेबी, पोहा या कचौड़ी बड़े चाव से खाते हैं? या फिर सुबह दफ्तर जाते समय और बच्चों का स्कूल टिफिन पैक करते समय डिब्बे के नीचे अखबार बिछा देते हैं? अगर हाँ, तो तुरंत संभल जाइए! जिसे आप महज एक साधारण कागज समझ रहे हैं, वह असल में एक खतरनाक साइलेंट किलर (धीमा जहर) है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने इस पर बेहद कड़ा संज्ञान लिया है। प्राधिकरण ने देश के सभी खाद्य व्यवसाय संचालकों, जिनमें छोटे-बड़े होटल, सड़क किनारे लगने वाले ठेले, और रेस्टोरेंट शामिल हैं, को तत्काल प्रभाव से खाद्य पदार्थों को अखबार में पैक करने या उसमें परोसने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि कैसे समोसा, वड़ा पाव और जलेबी जैसे तैलीय व गर्म खाद्य पदार्थों को सीधे अखबार के पन्नों पर परोसा जा रहा है। अखबार की छपाई में प्रयुक्त घातक रासायनिक स्याही और सीसा (लेड) इस गर्म भोजन के संपर्क में आकर पिघल जाते हैं, जिससे यह भोजन जहरीला हो जाता है और सीधे कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों को आमंत्रण देता है।
 

स्याही नहीं, यह सीसाऔर भारी धातुका कॉकटेल है!

एफएसएसएआई के पश्चिमी क्षेत्र द्वारा जारी देशव्यापी चेतावनी में कहा गया है कि अखबार की छपाई में इस्तेमाल होने वाली काली और रंगीन स्याही बेहद खतरनाक रसायनों का मिश्रण होती है। इसमें मुख्य रूप से सीसा (लेड) और कई तरह की भारी धातुएं (हेवी मेटल्स) शामिल होती हैं। जब कड़ाही से उतरा हुआ अत्यधिक गर्म या तैलीय खाना अखबार के सीधे संपर्क में आता है, तो उसकी गर्मी से यह जहरीली स्याही पिघल जाती है और भोजन में पूरी तरह मिल जाती है। जाने-अनजाने में यह स्याही आपके पेट में प्रवेश कर जाती है।

चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि यह दूषित भोजन तुरंत भले ही कोई बुरा असर न दिखाए, लेकिन लंबे समय तक इसका सेवन करने से यह आपके शरीर के आंतरिक अंगों को पूरी तरह डैमेज कर सकता है। भोजन के साथ पेट में लगातार जाने वाले सीसे और रसायनों के कारण कैंसर, लिवर की गंभीर बीमारियां, किडनी का खराब होना और पेट के असाध्य रोग होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए तो यह और भी अधिक जानलेवा साबित हो सकता है।

लंच बॉक्स पैक करने वाले भी रहें सावधान!

एफएसएसएआई ने सिर्फ दुकानदारों के लिए ही नहीं, बल्कि घरेलू स्तर पर परिवारों के लिए भी विशेष गाइडलाइन जारी की है। घरों में अक्सर लोग रोटी या पराठे को गर्म रखने के लिए अखबार में लपेट देते हैं। प्राधिकरण ने साफ कहा है कि सुरक्षित भोजन के लिए केवल स्वच्छ और फूड-ग्रेड पैकेजिंग सामग्री (जैसे बटर पेपर या एल्युमिनियम फॉइल पेपर) का ही उपयोग करें।

इन जरूरी बातों का विशेष ध्यान रखें:

  1. हमेशा पूरी तरह साफ और सूखे लंच बॉक्स का ही इस्तेमाल करें।
  2. भोजन को थोड़ा ठंडा होने के बाद ही पैक करें, क्योंकि अत्यधिक भाप से स्याही तेजी से छूटती है।
  3. अखबार या किसी भी छपे हुए कागज़ का इस्तेमाल खाने-पीने की चीजों के आसपास भी कतई न करें।

सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी

एफएसएसएआई ने स्पष्ट कर दिया है कि इस आदेश का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों और फूड स्टॉल्स पर भारी जुर्माने के साथ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्राधिकरण का सीधा संदेश है—”जनता की सेहत से खिलवाड़ अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” अगली बार जब आप किसी दुकान पर जाएं और दुकानदार अखबार में खाना दे, तो खुद भी रुकें और उसे भी कानूनन टोकें!