मुजफ्फरपुर: बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर बिहार यूनिवर्सिटी (बीआरएबीयू) से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है । चांसलर और वाइस-चांसलर के कड़े रुख के बीच यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशों को जमीन पर उतारने के लिए ताबड़तोड़ तीन बड़े आदेश जारी कर दिए हैं । नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 को सुचारू रूप से शुरू करने और कॉलेज फंड में होने वाली हेराफेरी पर पूरी तरह से नकेल कसने के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक फेरबदल माना जा रहा है ।

बिहार सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के संकल्प संख्या 15/पी/5-03/2026-633 और 19/पी/2/01/2026-872 के आलोक में वाइस-चांसलर ने दो नवनिर्मित राजकीय डिग्री कॉलेजों में तत्काल प्रभाव से प्रोफेसर-इन-चार्ज यानी प्राचार्यों की तैनाती कर दी है । यूनिवर्सिटी ने आदेश दिया है कि ये शिक्षक तुरंत योगदान देंगे ताकि नए सत्र की पढ़ाई में कोई बाधा न आए ।
- पश्चिम चंपारण के पिपरासी स्थित राजकीय डिग्री महाविद्यालय में टीपी वर्मा कॉलेज, नरकटियागंज के पॉलिटिकल साइंस विभाग के चंद्र भूषण बैठा को कमान सौंपी गई है ।
- पश्चिम चंपारण के ही भितहा स्थित राजकीय डिग्री महाविद्यालय में आरएलएसवाई कॉलेज, बेतिया के इकोनॉमिक्स विभाग के सुरेश कुमार को नया प्रोफेसर-इन-चार्ज बनाया गया है ।

भ्रष्टाचार पर चोट: 39 कॉलेजों में ‘बर्सर‘ तैनात, संभालेंगे तिजोरी
प्रशासनिक और वित्तीय अनुशासन को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए वाइस-चांसलर ने एक और चौंकाने वाला फैसला लेते हुए 39 शिक्षकों को अलग-अलग कॉलेजों में बर्सर (अर्थपाल) के पद पर प्रतिनियुक्त कर दिया है । अब ये बर्सर कॉलेजों के वित्तीय कामकाज पर पैनी नजर रखेंगे ।
इनमें पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली और पश्चिम चंपारण के कॉलेज शामिल हैं । मुख्य रूप से मनोहर कुमार श्रीवास्तव (संग्रामपुर), पवन कुमार (बनकरिया), रितेश पासवान (मेहसी), सरोज कुमार (औरई), विनोद कुमार आजाद (सुगौली), अनीता कुमारी (तुरकौलिया), वलिउर रहमान (तेतरिया), मोहम्मद एजाज अनवर (नानपुर), अर्धेंदु (गायघाट), कमलेश कुमार (रामगढ़वा), शशि कुमार पासवान (अदापुर), प्रभाकर सिंह (छौड़ादानो) और कुमारी रंजना (बनकटवा) जैसे कई नामों को इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से नवाजा गया है । इसके अलावा राजेश कुमार चंदेल को पिपरासी और संतोष आनंद को भितहा का बर्सर बनाया गया है ।

एकतरफा चालाकी खत्म! अब ज्वॉइंट सिग्नेचर के बिना बैंक से नहीं निकलेगा एक भी रुपया
तीसरे और सबसे कड़े फैसले के तहत रजिस्ट्रार समीर कुमार शर्मा ने एक सख्त अधिसूचना जारी की है । अब नव-स्थापित राजकीय महाविद्यालयों के सभी बैंक खातों (सेविंग और करंट) का संचालन केवल प्राचार्य और बर्सर के संयुक्त हस्ताक्षर (ज्वॉइंट सिग्नेचर) से ही हो सकेगा । छात्र शुल्क, परीक्षा शुल्क, सरकारी या गैर-सरकारी अनुदान या दान से आने वाली हर एक पाई इसी संयुक्त खाते में जमा होगी । दोनों के हस्ताक्षर के बिना न तो कोई चेक जारी होगा, न ऑनलाइन ट्रांसफर और न ही कोई निकासी होगी ।
यूनिवर्सिटी ने अल्टीमेटम दिया है कि सभी कॉलेज 5 दिनों के भीतर बैंक की ये औपचारिकताएं पूरी कर रिपोर्ट दें और 30 दिनों के भीतर बैंक पासबुक, स्टेटमेंट और ज्वॉइंट मैंडेट की कॉपी कुलसचिव कार्यालय में जमा करें । नियमों की अनदेखी करने पर सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है ।
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