प्रसाद हॉस्पिटल आईसीयू त्रासदी में ड्यूटी से गायब रहने वाले बंदरा पीएचसी प्रभारी पंकज कुमार पर गिरी गाज, निजी अस्पतालों में मचा हड़कंप
ब्यूरो रिपोर्ट: स्वास्थ्य व्यवस्था में संवेदनहीनता और लापरवाही बरतने वाले सफेदपोशों के खिलाफ जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन की तीखी अनुशंसा पर स्वास्थ्य विभाग ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) बंदरा के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर पंकज कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर 4 जून को प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू (इंटेन्सिव केयर यूनिट) में लगी भीषण और डरावनी आग के दौरान, तड़पते और जिंदगी की भीख मांगते मरीजों को भगवान भरोसे छोड़कर अस्पताल परिसर से रफूचक्कर होने का बेहद गंभीर और शर्मनाक आरोप है।

मरीजों को छोड़ भागने का संगीन आरोप
प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रसाद हॉस्पिटल में जब आग की लपटें वीभत्स रूप ले रही थीं, तब डॉक्टर पंकज कुमार वहां ड्यूटी पर तैनात थे। संकट की उस बेहद संवेदनशील घड़ी में जब एक चिकित्सक की भूमिका देवदूत जैसी होनी चाहिए थी, तब वह अपनी नैतिक और सेवा संबंधी जिम्मेदारियों को ताक पर रखकर वहां से फरार हो गए। जिला प्रशासन ने इस कृत्य को कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही और मरीजों के प्रति अमानवीय संवेदनहीनता की पराकाष्ठा माना है।
जांच में खुले डॉक्टर के तीन बड़े काले चिट्ठे:
जांच टीम की रिपोर्ट में डॉक्टर पंकज कुमार के खिलाफ तीन बेहद गंभीर मामले सामने आए हैं:
1. 4 जून को प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू में हुए भीषण अग्निकांड के समय मरीजों की जान बचाने के बजाय ड्यूटी छोड़कर भाग जाना।
2. सरकारी सेवा के नियमों की धज्जियां उड़ाकर निजी अस्पताल में अपनी सेवाएं देना।
3. अपने मूल पदस्थापन स्थल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) बंदरा से अनधिकृत रूप से लगातार अनुपस्थित रहना।

सिर्फ जीवन-निर्वाह भत्ता मिलेगा, होगी विस्तृत जांच
स्वास्थ्य विभाग ने इन आरोपों को बेहद गंभीरता से लेते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 9(1)(क) के तहत यह सख्त निलंबन आदेश जारी किया है। निलंबन की इस पूरी अवधि के दौरान डॉक्टर पंकज कुमार का मुख्यालय स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना द्वारा तय किया जाएगा। इस दौरान उन्हें नियमानुसार सिर्फ जीवन-निर्वाह भत्ता ही नसीब होगा। इसके साथ ही प्रशासन उनके खिलाफ लगे तमाम संगीन आरोपों की विस्तृत विभागीय जांच भी बिठा रहा है, जिससे उनकी बर्खास्तगी तक का रास्ता साफ हो सकता है।
जिले में महा-अभियान: 25 अस्पतालों पर जड़ा ताला
इस भयंकर अग्निकांड की घटना के बाद जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन के तेवर बेहद कड़े हो गए हैं। पूरे जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा मानकों और फायर प्रोटोकॉल की जांच के लिए एक हाई-पावर विशेष टीम का गठन किया गया है। यह टीम बिना किसी पूर्व सूचना के निजी अस्पतालों, नर्सिंग होमों और क्लीनिकों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है। अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई का ब्यौरा देते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि सरकारी प्रोटोकॉल और अनिवार्य सुरक्षा मानकों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन करने के मामले में अब तक २५ स्वास्थ्य संस्थानों को पूरी तरह से सील कर बंद कर दिया गया है। इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से पूरे जिले के निजी मेडिकल माफियाओं और लापरवाह डॉक्टरों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यह महा-जांच अभियान थमने वाला नहीं है, और नियमों को ठेंगा दिखाने वाले हर संस्थान को सील किया जाएगा।

लापरवाही पर सीधे नपेंगे जिम्मेदार: जिलाधिकारी
इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने कहा, “स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी स्तर की ढिलाई या लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मरीजों के जीवन की रक्षा करना जिला प्रशासन की सबसे पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता है। आपातकालीन परिस्थितियों और संकट के समय तैनात डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों से शत-प्रतिशत जवाबदेही और सेवा भाव की अपेक्षा की जाती है। जो भी इस कसौटी पर फेल होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।”
समीक्षा बैठक में अन्य बड़े मुद्दों पर भी कड़े निर्देश
इस बड़ी प्रशासनिक सर्जरी के साथ-साथ जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने समाहरणालय सभागार में एक बेहद महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक भी बुलाई। इस उच्च स्तरीय बैठक में उन्होंने जिले के विकास और लोक कल्याण से जुड़े कई अन्य अहम मुद्दों जैसे किसान निबंधन, राजस्व एवं भूमि सुधार की प्रगति, बड़े पैमाने पर चल रहे टीकाकरण अभियान तथा बच्चों के लिए जानलेवा साबित होने वाले एईएस (चमकी बुखार) की पूर्व तैयारियों की भी बारीकी से समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को मुस्तैद रहने का कड़ा निर्देश दिया।
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