सरायरंजन (समस्तीपुर): शिक्षा से दूर हाशिए पर जी रहे मुसहर और कुरेड़ी समुदाय के बच्चों के लिए अब शिक्षा की नई राह खुल गई है। सरायरंजन नगर पंचायत के वार्ड संख्या 21 (नरघोघी मुशहर टोला) में ‘जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र, अख्तियारपुर’ द्वारा एक निशुल्क शिक्षा केंद्र का भव्य उद्घाटन किया गया। यह पहल बच्चों को विद्यालय छोड़ने (छिजित होने) की समस्या से बचाने और उन्हें शिक्षित समाज की मुख्यधारा में लाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
वार्ड संख्या 21 स्थित मुसहर टोले में दीप प्रज्वलित कर शिक्षा केंद्र का उद्घाटन करते मुख्य अतिथि और गणमान्य लोग।
उद्घाटन समारोह में उमड़ा उत्साह
शिक्षा केंद्र के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सरायरंजन की मुख्य पार्षद पूजा कुमारी ने शिरकत की। उनके साथ स्थानीय वार्ड पार्षद सविता कुमारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रूपम कुमारी, शिक्षिका कृष्णा, जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र की कोषाध्यक्ष वीणा कुमारी, पुनीता कुमारी, सीनियर रिसर्च कंसल्टेंट ललिता कुमारी, सामुदायिक शिक्षिका रुखसाना नूर, बलराम चौरसिया और दिनेश प्रसाद चौरसिया ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर केंद्र का विधिवत शुभारंभ किया।
‘शिक्षा शेरनी का दूध है, जो पिएगा वह दहाड़ेगा‘
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य पार्षद पूजा कुमारी ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “शिक्षा शेरनी का दूध है, जो पिएगा वह दहाड़ेगा।” उन्होंने अभिभावकों से पुरजोर आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से इस केंद्र में भेजें ताकि उनका भविष्य उज्ज्वल हो सके। उन्होंने घोषणा की कि जो बच्चे केंद्र के साथ-साथ अपने विद्यालय में भी नियमित उपस्थिति दर्ज कराएंगे, उन्हें पठन-पाठन की सामग्री वे अपनी तरफ से उपलब्ध कराएंगी।
वहीं, जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र के सदस्य दिनेश प्रसाद चौरसिया ने केंद्र की गतिविधियों पर चर्चा करते हुए बताया कि मुख्य पार्षद पूजा कुमारी की विशेष मांग पर ही नरघोघी मुशहर टोला में इस शिक्षा केंद्र की स्थापना की गई है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह केंद्र मुसहर और कुरेड़ी समुदाय के बच्चों के लिए शिक्षा का बड़ा जरिया बनेगा।
सरायरंजन में आयोजित उद्घाटन समारोह के दौरान बच्चों के बीच पोषण सामग्री का वितरण करते संस्था के सदस्य।
पोषण और पाठ्य सामग्री का वितरण
उद्घाटन के तुरंत बाद संस्था द्वारा बच्चों के बीच पोषण सामग्री का वितरण किया गया, जिसे पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे। इसके साथ ही, अख्तियारपुर में संचालित बालिका ट्यूशन सेंटर की छात्राओं को पाठ्य पुस्तकें प्रदान कर उन्हें प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम में संस्था के अध्यक्ष गौरीशंकर चौरसिया, कार्यकारी सदस्य रामप्रित चौरसिया, अमित कुमार, रामदयाल दास, रामनारायण पासवान और रामेश्वर सदा ने अपने विचार व्यक्त किए। समारोह के अंत में धन्यवाद ज्ञापन नवनीत कुमार और हर्ष मोहन कुमार द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
मुजफ्फरपुर: सोशल मीडिया पर ‘दबंगई’ दिखाने के लिए हथियारों का प्रदर्शन करना अब मुजफ्फरपुर में युवाओं को महंगा पड़ रहा है। हाल ही में वायरल हुए दो अलग-अलग वीडियो के मामलों में मुजफ्फरपुर पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए एक तरफ जहां अवैध हथियार रखने वालों को सलाखों के पीछे भेजा है, वहीं दूसरी तरफ भ्रम फैलाने वाली अफवाहों का भी खंडन किया है।
प्रेस वार्ता के दौरान मामले का खुलासा करते पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) और पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपी।
बोचहां में ‘रील‘ बनी काल, गिरफ्तार हुए तीन युवक
मुजफ्फरपुर (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षक, श्री राजेश कुमार सिंह प्रभाकर ने प्रेस वार्ता में बताया कि बोचहां थाना क्षेत्र का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था, जिसमें कुछ युवक अवैध हथियारों के साथ प्रदर्शन कर रहे थे। जानकारी मिलते ही मुजफ्फरपुर के सीनियर एसपी के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया।
डीआईयू और बोचहां पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में वीडियो में दिख रहे आरोपियों की पहचान की गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संजीव कुमार, रूपेश कुमार और गुड्डू कुमार नामक तीन युवकों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने इनके पास से अवैध देशी पिस्टल और मैगजीन बरामद की है। पूछताछ के दौरान यह बात सामने आई कि गुड्डू कुमार का पुराना आपराधिक इतिहास भी रहा है। फिलहाल, तीनों आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब इस मामले के ‘फॉरवर्ड-बैकवर्ड लिंकेज’ की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि हथियार कहां से आए और इनकी क्या मंशा थी।
कांटी वाला वीडियो निकला ‘फेक‘, मामला पुराना और हथियार था ‘खिलौना‘
एक तरफ जहां बोचहां में पुलिस ने असली हथियारों के साथ आरोपियों को पकड़ा, वहीं कांटी थाना क्षेत्र से संबंधित एक अन्य वायरल वीडियो की सच्चाई कुछ और ही निकली।
इस मामले में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (पश्चिमी-01), श्रीमती सुचित्रा कुमारी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि निहाल कुमार नाम के युवक का जो वीडियो वायरल हुआ था, उसकी गहन जांच कराई गई। जांच में पाया गया कि वह वीडियो सात-आठ साल पुराना है। वीडियो में युवक द्वारा जिस हथियार का प्रदर्शन किया जा रहा था, वह कोई असली हथियार नहीं बल्कि एक ‘लाइटर गन‘ थी। पुलिस ने पुष्टि की है कि इस मामले में निहाल कुमार के विरुद्ध थाना में कोई आपराधिक शिकायत दर्ज नहीं है।
मुजफ्फरपुर (सकरा): सकरा थाना क्षेत्र के जहांगीपुर चौक से गंडक प्रोजेक्ट ऑफिस तक की मुख्य सड़क (पूसा मुजफ्फपुर मार्ग ) इन दिनों एक ऐसी ‘अवैध मंडी’ में तब्दील हो गई है, जिसे देखकर कोई भी कह दे कि यहां कानून का राज नहीं, माफियाओं का बोलबाला है। सुबह के पांच बजते ही यहां ट्रकों का रेला लग जाता है। साठ से सत्तर ट्रकें सड़क किनारे कतारबद्ध होकर खड़ी हो जाती हैं। लेकिन यह कोई आम ट्रकों की कतार नहीं, बल्कि एक सुनियोजित ‘बालू का काला बाजार’ है। सुबह 7 बजे तक यहां लाखों का कारोबार बिना किसी रसीद, बिना किसी बही-खाते और बिना किसी सरकारी टैक्स चुकाए निपटा दिया जाता है।
सकरा के जहांगीपुर चौक (पूसा मुजफ्फपुर मार्ग ) पर सुबह-सुबह अवैध बालू मंडी का नजारा। कतार में खड़ी ये ट्रकें बिना किसी चालान या टैक्स के सरकारी राजस्व को चूना लगा रही हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
सुबह के दो घंटे, लाखों का कारोबार
यहां का नियम बिल्कुल अनोखा है। सुबह 5 बजते ही 60 से 70 ट्रकों का काफिला सड़क पर आकर खड़ा हो जाता है। ग्राहक आते हैं, अपनी जरूरत बताते हैं और चंद मिनटों में सौदा पट जाता है। सुबह 7 बजते-बजते यह पूरा ‘बालू मेला’ समाप्त हो जाता है। खास बात यह है कि सारा धंधा ‘जुबानी’ चलता है—न कोई रसीद, न कोई एडवांस। पैसा तब लिया जाता है जब बालू ग्राहक के दरवाजे पर गिर जाता है।
‘हुंडा‘ डील का खेल और ओवरलोडिंग
ट्रक ड्राइवरों की मानें तो वे ‘हुंडा’ (लंप सम) रेट पर बालू बेचते हैं। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए वे ओवरलोड गाड़ियों का लालच देते हैं, जिससे ग्राहकों को बाजार भाव से प्रति सीएफटी (CFT) 1000 से 1500 रुपये तक की बचत होती है। यहाँ कोइलवर के बालू के साथ-साथ स्थानीय गंडक नदी के सफेद बालू की भी भारी डिमांड है।
संरक्षण में फली-फूली माफियागिरी
यह अवैध धंधा सकरा, मुरौल, बंदरा और पूसा क्षेत्र के लोगों के लिए सस्ती बालू पाने का जरिया बन चुका है, लेकिन इसके पीछे पनप रहा बालू माफियाओं का नेटवर्क कानून के लिए एक बड़ी चुनौती है। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ दिन के उजाले में हो रहा है, लेकिन खनिज एवं खनन विभाग, परिवहन विभाग और आयकर विभाग के अधिकारी या तो इस ‘सुपरफास्ट’ धंधे से अनजान हैं या फिर मिलीभगत के कारण मूकदर्शक बने हुए हैं।
चूंकि यह पूरा खेल मात्र दो घंटे (सुबह 5 से 7) में सिमट जाता है, इसलिए माफियाओं को पकड़ना विभाग के लिए भी एक बहाना बन गया है। अब सवाल यह है कि कब तक प्रशासन इस ‘सड़कछाप’ माफियागिरी के आगे नतमस्तक रहेगा और कब तक सरकारी राजस्व को यूं ही चूना लगता रहेगा?
प्रशासन की नाक के नीचे पनपता माफिया राज
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह पूरा अवैध ‘बालू मेला’ मुरौल प्रखंड मुख्यालय से महज 500 मीटर की दूरी पर जहांगीपुर चौक पर सजता है। यानी, स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की नाक के नीचे, दिन के उजाले में यह खुला खेल चल रहा है। जिस प्रखंड मुख्यालय से पूरे क्षेत्र के प्रशासन और कानून-व्यवस्था का संचालन होना चाहिए, उसी की दहलीज के ठीक बाहर माफियाओं का यह समानांतर साम्राज्य यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर किसकी शह पर यह गोरखधंधा फल-फूल रहा है? जब चंद कदमों की दूरी पर बैठे अधिकारियों को यह अवैध गतिविधि नहीं दिख रही है, तो इसे केवल प्रशासनिक लापरवाही कहें या फिर मिलीभगत का मौन समर्थन? यह स्थिति न केवल कानून का मखौल उड़ा रही है, बल्कि आम लोगों के बीच प्रशासन की विश्वसनीयता पर भी गहरा सवाल खड़ा कर रही है।
कानून की धज्जियां: कैसे फल-फूल रहा है यह अवैध कारोबार?
यह पूरा सिंडिकेट कानूनी प्रक्रियाओं को पूरी तरह दरकिनार कर चलता है। कानूनन, बालू के परिवहन के लिए ऑनलाइन ई-चालान और संबंधित खदान का वैध दस्तावेज होना अनिवार्य है। लेकिन यहां ‘हुंडा’ (लंप सम) का खेल चलता है।
ई-चालान की चोरी: सरकार को मिलने वाला रॉयल्टी टैक्स सीधे तौर पर हड़प लिया जाता है, क्योंकि यहां कोई चालान ही नहीं काटा जाता।
ओवरलोडिंग का जहर: ये ट्रकें अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा बालू ढोती हैं, जो न केवल सड़क को बर्बाद कर रही हैं, बल्कि हादसों को भी खुला निमंत्रण दे रही हैं।
अघोषित व्यापार: बिना किसी व्यापारिक पंजीयन के, ये माफिया सरकारी राजस्व को हर रोज चूना लगा रहे हैं। माल सीधा ग्राहक के दरवाजे पर गिरता है, जिससे सरकारी तंत्र को भनक तक नहीं लगती।
यदि अधिकारी ‘एक्शन‘ में आएं, तो क्या होगा?
यदि प्रशासन की नींद टूटे और संबंधित विभाग सख्ती बरतें, तो इस सिंडिकेट की कमर तोड़ना कोई बड़ी बात नहीं है। यदि जिला प्रशासन का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ होता है, तो निम्नलिखित परिणाम हो सकते हैं:
भारी जुर्माना और जब्ती: नियमों का उल्लंघन करने पर ट्रकों को तत्काल जब्त किया जा सकता है, जिससे माफियाओं को भारी वित्तीय नुकसान होगा।
अवैध संपत्ति की जांच: इस तरह के अवैध धंधों से अर्जित की गई बेनामी संपत्ति की पहचान कर उसे कुर्क (जब्त) किया जा सकता है।
चेन का टूटना: एक बार यदि सप्लायर और ट्रक मालिक के बीच का यह नेटवर्क टूट गया और एफआईआर दर्ज हुई, तो दोबारा इस सड़क पर बालू का मेला लगाने की हिम्मत कोई नहीं करेगा।
अधिकारियों की भूमिका और उन पर उठते सवाल
1. जिला खनिज एवं खनन अधिकारी (Mining Department): खनन विभाग की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि बिना चालान के बालू का परिवहन न हो। इस अवैध मंडी का अस्तित्व ही यह साबित करता है कि विभाग की गश्त या तो शून्य है, या मिलीभगत है। यदि खनन अधिकारी औचक छापेमारी करें, तो ट्रकों के दस्तावेजों की जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा कि ये गाड़ियां किस खदान से निकली हैं और बिना ई-चालान के कैसे चल रही हैं। मौके पर मौजूद गाड़ियों की जब्ती और संचालकों पर खनन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करना पहला कदम होना चाहिए।
2. जिला परिवहन अधिकारी (Transport Department): सड़क सुरक्षा और परिवहन नियमों का पालन सुनिश्चित करना परिवहन विभाग का काम है। रोजाना 60-70 ओवरलोड ट्रकों का सड़क पर चलना परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सीधा सवाल उठाता है। यदि विभाग एक्शन मोड में आए, तो इन सभी गाड़ियों का फिटनेस, परमिट और ओवरलोडिंग के लिए भारी जुर्माना काटा जा सकता है। बार-बार पकड़े जाने पर इन ट्रकों का लाइसेंस और परमिट स्थायी रूप से रद्द करने की कार्रवाई इस पूरे धंधे को सड़क से गायब कर सकती है।
3. आयकर अधिकारी (Income Tax Department): यह धंधा पूरी तरह ‘कैश’ पर आधारित है, जहां हर रोज लाखों रुपयों का लेन-देन हो रहा है। यह स्पष्ट रूप से ‘ब्लैक मनी’ का मामला है। आयकर विभाग यदि इस ‘अवैध मंडी’ को रडार पर ले, तो इन माफियाओं के खातों की जांच की जा सकती है। जब बालू के इस धंधे में भारी मुनाफा है और इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है, तो यह ‘टैक्स चोरी’ का बड़ा मामला बनता है। रेड और सर्वे के जरिए इस काले धन के स्रोत का पता लगाकर इन पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई संभव है।
मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर पुलिस ने ‘ऑपरेशन मुस्कान’ के तहत एक शानदार उपलब्धि हासिल की है, जिसने न केवल 106 नागरिकों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरी है, बल्कि पुलिस के प्रति विश्वास को और भी मजबूत किया है। जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से गुम और चोरी हुए लगभग 34 लाख रुपये मूल्य के 106 मोबाइल फोन पुलिस ने न केवल बरामद किए, बल्कि उन्हें उनके वास्तविक मालिकों तक सफलतापूर्वक पहुँचा दिया है।
“मुजफ्फरपुर पुलिस के ‘ऑपरेशन मुस्कान’ अभियान के तहत एसएसपी कान्तेश कुमार मिश्र और अन्य पुलिस अधिकारियों द्वारा मोबाइल मालिकों को उनके खोए हुए फोन सुपुर्द करते हुए।”
पुलिस की तत्परता और ‘ऑपरेशन मुस्कान‘ की सफलता
वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP), मुजफ्फरपुर, कान्तेश कुमार मिश्र ने प्रेस वार्ता के दौरान इस अभियान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के आलोक में समय-समय पर पुलिस त्वरित कार्रवाई करती रहती है, और इसी क्रम में आज नागरिकों को उनके खोए हुए कीमती फोन सौंपे गए।
इस वर्ष अब तक मुजफ्फरपुर पुलिस ने कुल 337 मोबाइल फोन बरामद कर उनके मालिकों को सौंप दिए हैं, जो पुलिस की सक्रियता का एक बड़ा प्रमाण है।
नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण सलाह
एसएसपी कान्तेश कुमार मिश्र ने नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति का मोबाइल गुम हो गया है या चोरी हो गया है, तो वे घबराएं नहीं और निम्नलिखित कदम उठाएं:
जिला नियंत्रण कक्ष: मोबाइल गुम होने की सूचना तुरंत जिला नियंत्रण कक्ष में दें।
CEIR पोर्टल: नागरिक केंद्रीय उपकरण पहचान रजिस्टर (CEIR) पोर्टल पर भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जो मोबाइल ट्रैकिंग में अत्यंत प्रभावी है।
कानूनी कार्रवाई: पुलिस ने आश्वासन दिया है कि कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ बरामदगी के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
मुजफ्फरपुर पुलिस का यह मानवीय और त्वरित कदम समाज में सुरक्षा की भावना को बढ़ाता है। उम्मीद है कि यह अभियान भविष्य में भी ऐसे ही लोगों की समस्याओं का समाधान करता रहेगा।
पटना। बिहार के मोकामा वासियों के लिए आज का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। पटना जिला अंतर्गत नगर परिषद मोकामा क्षेत्र के प्रसिद्ध परशुराम स्थान परिसर में विकास की नई इबारत लिखी गई। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 18.11 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली अत्याधुनिक ‘कमर्शियल बिल्डिंग’ निर्माण योजना का शिलान्यास किया। इसके साथ ही, उन्होंने परशुराम मेले का विधिवत उद्घाटन कर श्रद्धालुओं को बड़ी सौगात दी।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मोकामा के परशुराम स्थान परिसर में 18.11 करोड़ की कमर्शियल बिल्डिंग का शिलान्यास करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी।
विकास की नई दिशा- मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस अवसर पर कहा कि परशुराम स्थान परिसर में यह कमर्शियल बिल्डिंग न केवल इलाके की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देगी, बल्कि श्रद्धालुओं की सुविधाओं में भी चार चांद लगाएगी। उन्होंने इस प्रोजेक्ट को क्षेत्र के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि वे कमर्शियल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करें, ताकि अगले वर्ष आयोजित होने वाले मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय नागरिक सुविधाएं मिल सकें।
2025 के निरीक्षण का संकल्प हुआ पूरा – मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विजन को याद करते हुए कहा कि वर्ष 2025 में जब उन्होंने उपमुख्यमंत्री रहते हुए इस परिसर का निरीक्षण किया था, तभी उन्होंने श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने और मेले के विस्तार का संकल्प लिया था। आज उस संकल्प को धरातल पर उतारते हुए विकास कार्यों का शिलान्यास किया गया है।
मोकामा के परशुराम मेले की सांस्कृतिक और धार्मिक महत्ता
मोकामा का परशुराम मेला केवल एक व्यापारिक आयोजन नहीं, बल्कि यह इस क्षेत्र की गहरी धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में विख्यात यह स्थल सदियों से श्रद्धालुओं के लिए श्रद्धा का केंद्र रहा है। यहाँ आयोजित होने वाला मेला न केवल आसपास के जिलों बल्कि सुदूर क्षेत्रों से भी भारी संख्या में पर्यटकों और भक्तों को आकर्षित करता है। यह मेला ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा है, जहाँ पारंपरिक हस्तकलाओं से लेकर स्थानीय उत्पादों का बड़े स्तर पर व्यापार होता है। परशुराम स्थान का विकास इस मेले को न केवल और अधिक व्यवस्थित बनाएगा, बल्कि मोकामा को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर एक नई पहचान भी दिलाएगा, जिससे स्थानीय संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन सुनिश्चित हो सकेगा।
फुलवारी शरीफ: राजधानी पटना में बाइक चोरों का एक ऐसा गिरोह सक्रिय था जिसने पुलिस की नाक में दम कर रखा था। दिनांक 15 अप्रैल 2026 को फुलवारी शरीफ थाना क्षेत्र में एक मोटरसाइकिल चोरी की घटना सामने आई, जिसने पुलिस को एक बड़े ऑपरेशन के लिए मजबूर कर दिया।
‘बाइक चोर गैंग’ के भंडाफोड़ की जानकारी देते नगर पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी), पटना
कैसे धरा गया शातिर गैंग? मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए नगर पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी), पटना के कुशल निर्देशन में एक विशेष टीम गठित की गई। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-1, फुलवारी शरीफ के नेतृत्व में पुलिस की टीम ने सीसीटीवी फुटेज और मानवीय अनुसंधान के आधार पर जाल बिछाया।
मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी: छापेमारी के दौरान गिरोह के सरगना मो० अरशद उर्फ शदाब को दबोचा गया, जिसके पास से एक चोरी की बाइक बरामद हुई।
साले के घर से खुला खजाना: अरशद की निशानदेही पर जब पुलिस ने उसके साले के घर दबिश दी, तो वहां से 6 और मोटरसाइकिलें बरामद हुईं।
कुल 9 बाइकें बरामद: इस कार्रवाई में कुल 9 चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद की गईं और गिरोह के 4 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया।
दागी है मास्टरमाइंड: मुख्य अभियुक्त मो० अरशद उर्फ शदाब का आपराधिक इतिहास काफी पुराना है और उसके खिलाफ विभिन्न थानों में 20 से अधिक मामले दर्ज हैं।
अन्य गिरफ्तार अभियुक्तों में मो० आमिर (पुत्र असगर), साहिल (पुत्र नसीम), मो० नौशाद (पुत्र निजाम) शामिल हैं, जो सभी फुलवारी शरीफ क्षेत्र के ही रहने वाले हैं।
नौबतपुर में पुलिस की बड़ी कार्रवाई: फर्जी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगाकर फर्राटा भर रहे 6 शातिर गिरफ्तार, जब्त हुईं संदिग्ध बाइक्स!
नौबतपुर: वाहन चेकिंग के दौरान पटना पुलिस ने एक ऐसे फर्जीवाड़े का खुलासा किया है जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर है। दिनांक 19-20 अप्रैल 2026 की रात्रि में नौबतपुर थाना क्षेत्र में चलाए गए विशेष वाहन चेकिंग अभियान के दौरान पुलिस ने 6 लोगों को गिरफ्तार किया है।
क्या था पुलिस का एक्शन? पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि क्षेत्र में कुछ लोग बाइकों के ओरिजिनल रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं। चेकिंग के दौरान पुलिस ने जब दस्तावेजों की जांच की, तो बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पाई गई।
फर्जीवाड़े का पर्दाफाश: 2 बाइकों के नंबर प्लेट्स से छेड़छाड़ की पुष्टि होने के बाद तुरंत एक्शन लेते हुए पुलिस ने मौके से 2 बाइकें जब्त कर लीं।
6 गिरफ्तार: इस मामले में कुल 6 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है और पुलिस अब उनसे कड़ी पूछताछ कर रही है।
पटना पुलिस की आमजन से अपील: इस घटना के बाद पुलिस ने जनता से सख्ती से अपील की है कि वे अपने वाहन के रजिस्ट्रेशन और अन्य दस्तावेज हमेशा सही और अपडेट रखें। फर्जी दस्तावेजों या नंबर प्लेट के साथ वाहन चलाना न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि यह किसी बड़े आपराधिक घटना का संकेत भी हो सकता है।
पटना: पटना पुलिस ने कानून व्यवस्था को मजबूत करते हुए अपराधियों के खिलाफ एक बड़ी जीत हासिल की है। पुलिस द्वारा प्रस्तुत ठोस साक्ष्यों और समयबद्ध तरीके से दाखिल की गई चार्जशीट के दम पर, माननीय न्यायालयों ने दो अलग-अलग मामलों में दोषियों को कड़ी सजा सुनाई है। इस कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि पटना में अपराध करने वाले किसी भी हाल में कानून के शिकंजे से बच नहीं पाएंगे।
पॉक्सो एक्ट के आरोपी को 12 साल की कठोर कैद
NTPC थाना काण्ड (संख्या 42/24) के मामले में, न्यायालय (ADJ- 22 CUM SPL. RAPE & POCSO PATNA) ने अभियुक्त राजीव कुमार को गंभीर धाराओं में दोषी ठहराया है। अदालत ने पुलिस द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों को आधार मानते हुए बड़ा फैसला सुनाया:
POCSO एक्ट की धारा 4(2): 12 वर्ष का कठोर कारावास और 50,000 रुपये का अर्थदण्ड। (जुर्माना न भरने पर 01 वर्ष की अतिरिक्त सजा)।
IPC की धारा 366: 06 वर्ष का कठोर कारावास और 10,000 रुपये का अर्थदण्ड। (जुर्माना न भरने पर 06 माह की अतिरिक्त सजा)।
अवैध हथियार के खिलाफ सख्त कार्रवाई
वहीं, दूसरे मामले में नेउरा थाना काण्ड (संख्या 148/24) के तहत, माननीय न्यायालय (ACJM- IV, DANAPUR) ने अभियुक्त हरेन्द्र कुमार को अवैध हथियार रखने और इस्तेमाल के जुर्म में सजा सुनाई है:
Arms Act की धारा 25(1-b) a: 03 वर्ष का साधारण कारावास और 5,000 रुपये का अर्थदण्ड। (जुर्माना न भरने पर 03 माह की अतिरिक्त सजा)।
Arms Act की धारा 26: 02 वर्ष का साधारण कारावास और 3,000 रुपये का अर्थदण्ड। (जुर्माना न भरने पर 02 माह की अतिरिक्त सजा)।
पटना पुलिस की ‘जीरो टॉलरेंस‘ नीति का असर
पटना पुलिस की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, इन मामलों में पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को मजबूती से न्यायालय के समक्ष रखा। इसी मजबूत पैरवी का परिणाम है कि कम समय में ही आरोपियों को कड़ी सजा मिल सकी। यह कार्रवाई उन सभी लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो कानून को अपने हाथ में लेने की कोशिश करते हैं।
पुलिस प्रशासन ने एक बार फिर दोहराया है कि समाज में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपराधियों पर लगातार कार्रवाई जारी रहेगी।
पटना। राजधानी पटना में सरकारी जमीन पर कब्जा जमाने वालों की अब खैर नहीं है। गंगा नदी के किनारे बसे अवैध कब्जेदार प्रशासन के रडार पर आ गए हैं। जिलाधिकारी, पटना की अगुवाई में प्रशासन ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए एक बड़े अतिक्रमण-उन्मूलन अभियान को अंजाम दिया है। इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि जनहित और सरकारी नियमों के आगे किसी की भी मनमानी नहीं चलेगी।
अतिक्रमण पर ‘महाबैठक’: डीएम पटना ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा—दोबारा अतिक्रमण करने वालों पर दर्ज हो FIR, कानून का उल्लंघन अब बर्दाश्त नहीं।
ताबड़तोड़ कार्रवाई: दो दिनों में ‘सफाई‘
जिलाधिकारी के सख्त निर्देश के बाद पटना में लगातार दूसरे दिन विशेष अभियान चलाया गया। पटना सिटी से लेकर पटना सदर तक प्रशासन का बुलडोजर पूरी ताकत के साथ गरजा।
पटना सिटी का इलाका: भद्र घाट से कंगन घाट तक प्रशासन का दस्ता पहुँचा और वहां जमा अवैध कब्जों को ध्वस्त कर दिया। इस दौरान 17 अस्थायी संरचनाओं (9 झोपड़ी और 8 स्टॉल) को मिट्टी में मिला दिया गया। इसके अलावा 2 टीपर बालू भी जब्त किए गए। प्रशासनिक सख्ती इतनी थी कि मौके पर ही अतिक्रमणकारियों से 10,000 रुपये का भारी जुर्माना वसूला गया।
पटना सदर का इलाका: दीघा के पास का क्षेत्र ‘हॉटस्पॉट’ बना रहा। पटना-दीघा मुख्य सड़क और सुरक्षा बांध के गेट नंबर 79 से 83 के बीच 35 अवैध पक्की स्थायी संरचनाओं को जमींदोज कर दिया गया। यह क्षेत्र विकास की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है, जहाँ सरकारी योजनाओं में कोई बाधा स्वीकार्य नहीं है।
डीएम की दो टूक: “नियम तोड़ोगे, तो सलाखों के पीछे जाओगे”
जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में चेताया है कि गंगा के किनारे की असर्वेक्षित भूमि पर किसी व्यक्ति विशेष का दावा कतई मान्य नहीं है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अब केवल अतिक्रमण हटाएं नहीं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करें कि वहां दोबारा कब्जा न हो।
प्रशासन के सख्त फरमान:
FIR अनिवार्य: यदि कोई दोबारा अतिक्रमण करता पाया गया, तो बिना किसी रियायत के सीधे प्राथमिकी (FIR) दर्ज होगी।
आदतन अपराधियों की पहचान: ऐसे लोगों को चिन्हित किया जा रहा है जो आदतन अतिक्रमणकारी हैं। इनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का चाबुक चलेगा।
NGT और सुप्रीम कोर्ट का डंडा: जिलाधिकारी ने याद दिलाया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, फ्लड प्लेन एरिया में किसी भी तरह का निर्माण अवैध है। चाहे जमीन निजी ही क्यों न हो, निर्माण की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।
गंगा किनारे चला प्रशासन का बुलडोजर: पटना सिटी और दीघा के इलाकों में अवैध कब्जों को धराशायी करते प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस बल।
असामाजिक तत्वों के स्वार्थ पर कड़ा प्रहार
प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, गंगा किनारे की असर्वेक्षित सरकारी जमीनों पर असामाजिक तत्वों द्वारा निहित स्वार्थों के तहत कब्जा किया जा रहा था। जिलाधिकारी ने इसे ‘खेदजनक’ करार देते हुए अनुमंडल पदाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे इस अभियान को और प्रभावी बनाएं। उन्होंने कहा कि नदी क्षेत्र की जमीन सरकारी है और इस पर किसी का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पटना प्रशासन की इस आक्रामक कार्रवाई ने साफ संकेत दिया है कि अब सरकारी जमीन पर ‘कब्जा राज’ का अंत हो चुका है और कानून तोड़ने वालों के लिए अब केवल जेल का रास्ता बचा है।
पंडित, हलवाई और डेकोरेटर तक पर होगी कानूनी कार्रवाई, प्रशासन और जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र का संयुक्त महाअभियान
समस्तीपुर: अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ समस्तीपुर जिला प्रशासन और जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र ने कमर कस ली है। जिले के प्रमुख मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर ‘सतर्कता दिवस’ मनाते हुए संस्था ने स्पष्ट किया है कि बाल विवाह एक संगठित अपराध है और इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
खुदनेश्वर स्थान मंदिर परिसर में बाल विवाह मुक्त भारत का संकल्प लेते जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र के पदाधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता।
कानून की नज़र में सब अपराधी जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र के सचिव सुरेंद्र कुमार ने प्रेस वार्ता में चेतावनी दी कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (PCMA), 2006 के तहत यह एक दंडनीय अपराध है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “केवल अभिभावक ही नहीं, बल्कि इसमें सहयोग करने वाले पंडित, मौलवी, बाराती, हलवाई, डेकोरेटर, बैंड-बाजा वाले और मैरेज हॉल के मालिक भी बराबर के मुजरिम माने जाएंगे। इसमें शामिल होने वाले हर व्यक्ति को दो साल की सजा और भारी जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।”
25,000 बाल विवाह रोकने की ऐतिहासिक सफलता जिले में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता का असर अब ज़मीन पर दिखने लगा है। संस्था के सतत प्रयासों से अब तक जिले में 25,000 से अधिक बाल विवाहों को समय रहते रोका गया है। सचिव सुरेंद्र कुमार ने विश्वास जताया कि जिस तरह आम जनता अब खुद आगे आकर सूचना दे रही है, उससे हम 2030 से पहले जिले को पूरी तरह ‘बाल विवाह मुक्त’ बना लेंगे।
अक्षय तृतीया के अवसर पर “बाल विवाह अपराध है, चुप्पी भी अपराध है” का संदेश देते हुए अभियान की टीम। पोस्टर पर हेल्पलाईन नंबर 1800-102-7222 अंकित है।
इस अभियान में इनकी रही सक्रिय भागीदारी
अक्षय तृतीया के अवसर पर जिले के प्रसिद्ध धर्म स्थलों—विद्यापति धाम, खुदनेश्वर स्थान, थानेश्वर स्थान, शिवालय और श्रीराम जानकी मंदिर में जागरूकता अभियान का नेतृत्व निम्नलिखित पदाधिकारियों ने किया:
प्रमुख नेतृत्व: डॉ. दीप्ति कुमारी (जिला कार्यक्रम प्रबंधक), काजल राज (जिला कार्यक्रम समन्वयक), पप्पू यादव (लेखा पदाधिकारी)।
संस्था के पदाधिकारी व सदस्य: वीणा कुमारी (कोषाध्यक्ष), रवि कुमार मिश्र (परियोजना समन्वयक), मयंक कुमार सिन्हा (डोक्युमेंटेशन समन्वयक)।
मुरौल में करोड़ों की सरकारी इमारतें बदहाल, नगर पंचायत मुरौल का कार्यालय किराये के भवन में चलाने पर अड़ा,जवाब कौन देगा?
मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर जिले के मुरौल और सकरा प्रखंडों में इन दिनों प्रशासनिक निर्णयों को लेकर हलचल तेज है। प्रशासन की ओर से पुलिस व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए दो अलग-अलग कवायदें चल रही हैं—मुरौल में ‘पुलिस ओपी’ (OP) खोलने की कोशिश और सकरा बाजिद पंचायत में ‘एस.डी.पी.ओ. कार्यालय’ की स्थापना। न्यूज़ भारत टीवी की पड़ताल में जहाँ मुरौल में विरोध के बाद प्रशासन को कदम पीछे खींचने पड़े हैं, वहीं सकरा में ग्राम कचहरी कार्यालय को बगल में शिफ्ट कर जगह खाली करवाई जा रही है।
तस्वीर: सकरा स्थित कार्यालय का दृश्य जहाँ पुलिस दफ्तर के लिए रंग रोगन की चल रही हैंतैयारियां
मुरौल: जन-विरोध के आगे प्रशासन का रुख बदला
मुरौल में ‘सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन’ को पुलिस ओपी में तब्दील करने की प्रशासनिक योजना को स्थानीय लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों का तर्क था कि पंचायत सरकार भवन जन-सेवा के लिए है, न कि पुलिस चौकी के लिए। जनता की नाराजगी और विरोध को देखते हुए, प्रशासन अब मुरौल में ओपी के लिए ‘पंचायत सरकार भवन’ के बजाय अन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है।
सकरा: ग्राम कचहरी शिफ्ट, एस.डी.पी.ओ. कार्यालय की राह साफ
दूसरी ओर, सकरा प्रखंड के अंतर्गत ‘सकरा बाजिद पंचायत’ में स्थिति कुछ अलग है। यहाँ प्रशासन ने एस.डी.पी.ओ. कार्यालय खोलने के लिए पूरी तैयारी कर रही है। सरपंच कुंदन तिवारी ने पुष्टि की है कि एस.डी.पी.ओ. कार्यालय के लिए जगह बनाने हेतु ‘ग्राम कचहरी कार्यालय’ को बगल में ही शिफ्ट किया जा रहा है, ताकि प्रशासनिक कार्य बिना बाधा के शुरू हो सके।
अधिकारियों का पक्ष: क्या बोले ज़िम्मेदार?
न्यूज़ भारत टीवी ने जब प्रशासनिक अधिकारियों से इस पूरे घटनाक्रम पर स्पष्टीकरण मांगा, तो उनके बयानों में दो अलग तरह की स्थितियां दिखीं।
1. सकरा थानाध्यक्ष का बयान: जब हमने उनसे मुरौल में ओपी खुलने की चर्चा और स्थल चयन के बारे में पूछा, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी कोई आधिकारिक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। थानाध्यक्ष ने कहा:
“अभी मुरौल में थाना (ओपी) के लिए स्थल चिन्हित नहीं हुआ है। फिलहाल कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। संभवतः जब ऊपर से कोई आधिकारिक आदेश आएगा, तभी हम इस पर कोई ठोस कार्रवाई कर पाएंगे। फिलहाल स्थिति यथावत है।”
2. एस.डी.पी.ओ.-2 (पूर्वी) का बयान: एस.डी.पी.ओ. ने इस बात की पुष्टि की है कि कार्यालयों को लेकर योजनाएं चल रही हैं। उन्होंने कहा:
“मुरौल में जो ओपी खोलने की बात है, उसके लिए फिलहाल स्थल की तलाश की जा रही है। अभी दो-तीन जगह देखी गई है, अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। उम्मीद है कि एक सप्ताह के भीतर सब तय हो जाएगा। वहीं, जहाँ तक एस.डी.पी.ओ. कार्यालय की बात है, तो उसका स्थल सकरा में ही चिह्नित कर लिया गया है और उसे वहीं शिफ्ट किया जा रहा है।”
“सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन “वर्सेज नगर पंचायत मुरौल कार्यालय
खबर का एक अन्य कानूनी और नैतिक सवाल जनहित की अनदेखी औरनगर पंचायत मुरौल कीप्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है –
इस पूरे मामले में केवल प्रशासनिक मनमानी ही नहीं, बल्कि सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाने और जन-धन की बर्बादी के गंभीर प्रश्न भी खड़े हो रहे हैं। नगर पंचायत मुरौल के वार्ड संख्या 3 के पार्षद आनंद कंद साह ने नगर पंचायत मुरौल के प्रशासनिक कार्यशैली पर सीधा प्रहार करते हुए एक बड़ा खुलासा किया है।
नगर पंचायत मुरौल के कार्यालय संचालन और सरकारी नियमों की अनदेखी को लेकर वार्ड पार्षद आनंद कंद साह ने नगर विकास एवं आवास विभाग के स्पष्ट निर्देशों का हवाला देते हुए प्रशासन को घेरा है। पार्षद आनंद कंद साह ने नगर विकास एवं आवास विभाग की अधिसूचना (पत्रांक 15/अभि०-10-01/2025-1284, दिनांक 03.04.2025) का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी नियमों के अनुसार, यदि किसी नवगठित नगर निकाय में ‘पंचायत सरकार भवन’ उपलब्ध है, तो कार्यालय को अनिवार्य रूप से उसी भवन में स्थानांतरित किया जाना चाहिए । पार्षद का तर्क है कि विभाग का यह स्पष्ट दिशानिर्देश राजकोषीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए जारी किया गया था, ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग न हो । इसके बावजूद, अधिकारियों द्वारा राज्य सरकार के स्वामित्व वाले उपलब्ध बुनियादी ढांचे (पंचायत सरकार भवन) को छोड़कर निजी किराये के भवन में कार्यालय जारी रखना सरकारी नीतियों की खुली अवहेलना और ‘शक्ति का दुरुपयोग’ है । उन्होंने पुलिस प्रशासन से आग्रह किया है कि “सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन, नगर पंचायत मुरौल के कार्यालय के लिए एक आवश्यक एवं महत्वपूर्ण विकल्प है ।
आनंद कंद साह का कड़ा बयान:
“सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन नगर पंचायत मुरौल के वार्ड संख्या 2 में स्थित है और यह हमारे नगर पंचायत के अधिकारिक पोषक क्षेत्र के अर्न्तगत है। नियम और सरकारी प्रावधानों के अनुसार, नगर पंचायत मुरौल का कार्यालय इसी सरकारी भवन में संचालित होना चाहिए था। लेकिन विडंबना देखिए कि यहां जनता के टैक्स के पैसों की बर्बाद हो रहा है और नगर पंचायत मुरौल का कार्यालय किराये के भवन में चलाया जा रहा है। क्या प्रशासन यह जवाब देगा कि खाली सरकारी भवन रहते हुए किराया पर भवन लिए जाने की क्या जरूरत है?”
पार्षद आनंद कंद साह ने इसके कानूनी पहलुओं पर जोर देते हुए आगे कहा:
“इतना ही नहीं, वर्तमान में जो कार्यालय किराये पर चल रहा है, वह किसी भी तरह से दिव्यांग-अनुकूल नहीं है। यह ‘द राइट टू पर्सन विद डिसेबिलिटी एक्ट 2016′ का सीधा उल्लंघन है। हम लगातार मांग कर रहे हैं कि सरकारी भवन में कार्यालय शिफ्ट किया जाए, जिससे जनता को भी सुविधा मिले और दिव्यांगजन भी आसानी से सरकारी लाभ ले सकें। प्रशासन नियमों को धता बताकर क्या साबित करना चाहता है?”
दानदाताओं की भावना का अपमान: इस मामले में सबसे ज्यादा आहत वे लोग हैं जिन्होंने लोक-कल्याण के लिए अपनी जमीन दी थी। स्वर्गीय सत्यनारायण प्रसाद के परिवार के सदस्यों ने इस पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है:
“हमने यह जमीन ‘सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन‘ के लिए दी थी, ताकि क्षेत्र के निवासियों को प्रशासनिक और जन-सुविधाएं मिल सकें। आज जब भवन खाली पड़ा है और प्रशासन इसे जन-सेवा के बजाय अन्य कार्यों में लाने की कोशिश कर रहा है, तो यह दानदाताओं की मूल मंशा के साथ-साथ लोक-कल्याणकारी भावना का भी घोर अपमान है। जमीन जिस प्रयोजन के लिए दी गई थी, उसे उसी उद्देश्य के लिए उपयोग में लाया जाना चाहिए, न कि प्रशासनिक मनमानी का केंद्र बनाकर।”
न्यूज़ भारत टीवी की विशेष टिप्पणी:“सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन “वर्सेज नगर पंचायत मुरौल कार्यालय के मामले में प्रशासन का यह रवैया न केवल सरकारी निर्देशों का उल्लंघन है, बल्कि यह क्षेत्र की जनता के हितों के साथ खिलवाड़ भी है। जब नगर पंचायत का अपना कार्यालय किराये पर चल रहा है, तो प्रशासन द्वारा सरकारी भवन को पुलिस दफ्तर बनाने की जिद कई सवालों को जन्म देती है। प्रशासन को जवाब देना होगा कि वह जनता के हित को सर्वोपरि रखेगा या अपनी मनमानी चलाएगा?