Friday, October 30, 2026

यूपीआई पर डाका बर्दाश्त नहीं! 2 अक्टूबर को क्यूआर कोड पर काला कपड़ा बांधकर डिजिटल क्रांति के खिलाफ गरजेंगे मोबाइल व्यापारी

एमडीआर शुल्क के प्रस्ताव से देश भर के कारोबारियों में कोहराम, ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन के आह्वान पर मुजफ्फरपुर से उठेगी विरोध की आंधी

मुजफ्फरपुर / ढ़ोली: देशभर में डिजिटल लेन-देन की रीढ़ बन चुकी यूपीआई व्यवस्था अब एक बड़े भूचाल की मुहाने पर खड़ी है। सरकार और वित्तीय नियामक तंत्र द्वारा यूपीआई के पात्र व्यापारियों के लेन-देन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लागू करने की सुगबुगाहट ने खुदरा कारोबारियों की नींद उड़ा दी है। इस अन्यायपूर्ण आर्थिक बोझ और जबरन लादे जा रहे शुल्कों के खिलाफ ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन यानी एआईएमआरए बिहार इकाई ने बिगुल फूंक दिया है। विरोध की इसी कड़ी में आगामी 2 अक्टूबर 2026 को देशव्यापी ‘नो-यूपीआई-डे’ मनाने का निर्णय लिया गया है, जिसके तहत बिहार समेत मुजफ्फरपुर और इसके ग्रामीण अंचलों में भी व्यापारी अपनी दुकानों पर लगे यूपीआई क्यूआर कोड पर काला कपड़ा लगाकर अनोखा और कड़ा विरोध दर्ज कराएंगे।

सांकेतिक (प्रतीकात्‍मक) तस्‍वीर

डिजिटल क्रांति के नाम पर व्यापारियों की जेब पर डाका

एक समय देश में कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए जिस यूपीआई को पूरी तरह से मुफ्त और सुगम माध्यम के रूप में जनता के बीच लोकप्रिय बनाया गया था, अब उसी पर शुल्क लगाने की तैयारी ने व्यापारियों को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। जानकारों और व्यापारिक संगठनों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव अमलीजामा पहनता है, तो यह केवल एक शुल्क नहीं बल्कि डिजिटल इंडिया के उस सपने पर करारा तमाचा होगा, जिसमें छोटे दुकानदारों और आम जनता को सहूलियत देने का दावा किया जाता था।

इरशाद आलम, जोनल उपाध्यक्ष ,एमरा

सरकार और संबंधित तंत्र की ओर से 2,000 रुपये से अधिक के पात्र लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर प्रस्तावित किया गया है। इतना ही नहीं, यदि लेन-देन 75,000 रुपये या उससे अधिक का होता है, तो इसके लिए अधिकतम 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन शुल्क तय किया गया है। मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक कारोबार की प्रकृति ऐसी है जहां अधिकांश खरीदारी और बिक्री 2,000 रुपये से काफी ऊपर की होती है। ऐसे में यह अतिरिक्त एमडीआर शुल्क सीधे तौर पर छोटे और मझोले खुदरा व्यापारियों की रीढ़ तोड़ने का काम करेगा और उनके मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा हड़प जाएगा – इरशाद आलम, जोनल उपाध्यक्ष ,एमरा ।

ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन बिहार के जोनल उपाध्यक्ष इरशाद आलम ने इस मसले पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट किया है। ढ़ोली, मुजफ्फरपुर से खबर की पुष्टि करते हुए इरशाद आलम ने बताया कि सरकार और संबंधित तंत्र की ओर से 2,000 रुपये से अधिक के पात्र लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर प्रस्तावित किया गया है। इतना ही नहीं, यदि लेन-देन 75,000 रुपये या उससे अधिक का होता है, तो इसके लिए अधिकतम 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन शुल्क तय किया गया है। मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक कारोबार की प्रकृति ऐसी है जहां अधिकांश खरीदारी और बिक्री 2,000 रुपये से काफी ऊपर की होती है। ऐसे में यह अतिरिक्त एमडीआर शुल्क सीधे तौर पर छोटे और मझोले खुदरा व्यापारियों की रीढ़ तोड़ने का काम करेगा और उनके मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा हड़प जाएगा।

क्या है एमडीआर और क्यों सुलग रही है व्यापारियों की आग?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर वह शुल्क है जो बैंक या पेमेंट एग्रीगेटर व्यापारी से मर्चेंट ट्रांजैक्शन के एवज में वसूलते हैं। जब ग्राहक अपने बैंक खाते से सीधे मर्चेंट के क्यूआर कोड पर भुगतान करता है, तो अब तक यह सेवा उपभोक्ताओं और व्यापारियों दोनों के लिए पूरी तरह से शून्य शुल्क यानी जीरो एमडीआर पर संचालित हो रही थी। इसी नीति ने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल भुगतान बाजार बनाने में केंद्रीय भूमिका निभाई।

लेकिन जैसे ही इस मुफ्त व्यवस्था को खत्म कर इस पर 0.4 प्रतिशत का भारी-भरकम टैक्स या शुल्क थोपने की बात सामने आई, वैसे ही देश का खुदरा व्यापारी समुदाय बिदक उठा। मोबाइल रिटेलर्स का कहना है कि आज के दौर में स्मार्टफोन और महंगे गैजेट्स की बिक्री अमूमन 2,000 रुपये से शुरू होकर लाखों तक जाती है। यदि प्रत्येक बड़े लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत की कटौती बैंक या कंपनियां करने लगेंगी, तो व्यापारी का पहले से ही मार्जिन पर चल रहा मुनाफा पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा। आज खुदरा बाजार में प्रतिस्पर्धा इतनी अधिक है कि व्यापारी हर ग्राहक को अपने पास बनाए रखने के लिए न्यूनतम मार्जिन पर काम कर रहा है। ऐसे में एमडीआर का यह अतिरिक्त वित्तीय बोझ दुकानों के शटर गिराने की कगार पर ला खड़ा कर सकता है।

2 अक्टूबर को काले कपड़े से रंगे जाएंगे डिजिटल कोड

गांधी जयंती के पवित्र दिन यानी 2 अक्टूबर 2026 को देश भर के मोबाइल रिटेलर्स ने कालेधन या भ्रष्टाचार के खिलाफ नहीं, बल्कि डिजिटल लूट के खिलाफ अनूठा प्रतिरोध दर्ज कराने का मन बना लिया है। एआईएमआरए(एमरा) के आह्वान पर मुजफ्फरपुर और बिहार के तमाम जिलों में व्यापारी अपनी दुकानों, शोरूमों और काउंटर पर सजे क्यूआर कोड स्टैंड पर काला कपड़ा लपेट देंगे। यह काला कपड़ा इस बात का प्रतीक होगा कि व्यापारी इस एकतरफा थोपे गए वित्तीय बोझ को कतई स्वीकार नहीं करेंगे।

यह सांकेतिक विरोध सरकार और वित्तीय सेवा प्रदाताओं को एक साफ संदेश देने के लिए काफी है कि यदि उनकी नीतियों में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और अधिक आक्रामक रूप ले सकता है। व्यापारियों का यह स्पष्ट कहना है कि डिजिटल इंडिया की सफलता का पूरा श्रेय छोटे दुकानदारों और खुदरा विक्रेताओं को जाता है, जिन्होंने घर-घर और गली-मोहल्ले में जाकर ग्राहकों को क्यूआर कोड से पेमेंट करना सिखाया। आज जब बाजार पूरी तरह से डिजिटल हो चुका है और लोग कैश लेकर चलना भूल चुके हैं, ऐसे समय में अचानक एमडीआर का भूत खड़ा करना सरासर विश्वासघात है।

अर्थव्यवस्था और खुदरा बाजार पर पड़ने वाले दूरगामी प्रभाव

इस पूरे प्रकरण का गहराई से विश्लेषण किया जाए तो इसके परिणाम बेहद चिंताजनक नजर आते हैं। जब छोटे खुदरा व्यापारी डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने पर भारी शुल्क चुकाने के लिए बाध्य होंगे, तो वे या तो ग्राहकों से अतिरिक्त शुल्क वसूलने की कोशिश करेंगे या फिर धीरे-धीरे डिजिटल पेमेंट से मुंह मोड़कर फिर से कैश ट्रांजैक्शन की तरफ लौटने लगेंगे। दोनों ही स्थितियां देश की आधुनिक वित्तीय अर्थव्यवस्था के लिए घातक सिद्ध होंगी। एक तरफ जहां कैशलेस इकॉनमी का सरकारी सपना धूमिल होगा, वहीं दूसरी तरफ महंगाई का एक नया दौर शुरू हो जाएगा क्योंकि व्यापारी इस अतिरिक्त लागत को अंततः उपभोक्ता की ही जेब से निकालेंगे।

मुजफ्फरपुर के स्थानीय बाजारों में भी इस प्रस्ताव को लेकर भारी रोष व्याप्त है। छोटे से लेकर बड़े मोबाइल विक्रेता इस बात से खफा हैं कि नीति निर्माताओं ने कोई भी निर्णय लेने से पहले जमीन स्तर के व्यापारियों की समस्याओं को समझने की जहमत नहीं उठाई। मोबाइल कारोबार में स्टॉक की कीमत बहुत अधिक होती है, और जब एक डीलर अपने डिस्ट्रीब्यूटर को या ग्राहक अपने डीलर को बड़ी रकम यूपीआई के जरिए ट्रांसफर करता है, तो उस पर लगने वाला 0.4 प्रतिशत शुल्क किसी भी छोटे व्यापारी के महीने के बजट को हिला कर रख सकता है।

प्रशासन और नीति निर्माताओं को चेतावनी

एआईएमआरए बिहार के जोनल नेतृत्व ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इस प्रस्ताव को तत्काल वापस नहीं लिया गया, तो 2 अक्टूबर के इस सांकेतिक विरोध के बाद प्रदेश स्तर पर पुन: बैठक के उपरान्‍त आगामी रणनीतियों पर विचार किया जाएगा। व्यापारी अब चुप बैठने वाले नहीं हैं। अपनी रोजी-रोटी और व्यापारिक अस्तित्व की इस लड़ाई को वे सड़क से लेकर संसद तक ले जाने के लिए तैयार हैं।

अब सबकी निगाहें आगामी 2 अक्टूबर 2026 पर टिकी हैं, जब मुजफ्फरपुर सहित पूरे बिहार और देश भर के मोबाइल रिटेलर्स अपनी दुकानों पर क्यूआर कोड को काले कपड़े से ढंककर सरकार की एमडीआर नीति के खिलाफ अपनी पहली और कड़कदार सांकेतिक हुंकार भरेंगे। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि देश के नीति निर्माता व्यापारियों के इस रोष और आक्रोश के आगे झुकते हैं या फिर डिजिटल लेन-देन के रास्ते में यह काला कानून खुदरा व्यापार की कब्र खोदने का काम करता है।

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जसम के राज्य सम्मेलन में राजनीतिक प्रस्ताव पारित, सड़क को आंदोलन से आबाद करने का एलान

चुनावी सत्र में नई कमिटी का गठन, जीतेंद्र अध्यक्ष और दीपक बने सचिव

समस्तीपुर, 27 सितंबर 2026: समस्तीपुर कॉलेज के प्रांगण में जन संस्कृति मंच (जसम) के दो दिवसीय बिहार राज्य सम्मेलन के दूसरे दिन रविवार को सांगठनिक सत्र और चुनाव प्रक्रिया के दौरान कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। सम्मेलन में राजनीतिक प्रस्ताव पारित किया गया और राष्ट्रीय महासचिव मनोज सिंह ने दो टूक शब्दों में ऐलान किया कि अब वक्त आ चुका है जब सड़क को आंदोलन से पूरी तरह आबाद किया जाए।

समस्तीपुर कॉलेज में आयोजित जन संस्कृति मंच के राज्य सम्मेलन के दौरान मंच पर मौजूद पदाधिकारी एवं नवनिर्वाचित कमिटी के सदस्य।

सांगठनिक सत्र और रिपोर्ट पर लंबी बहस

रविवार सुबह आयोजित सांगठनिक सत्र की शुरुआत में मंच पर बतौर पर्यवेक्षक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कौशल किशोर और राष्ट्रीय महासचिव मनोज कुमार समेत कई दिग्गज उपस्थित रहे। इस महत्वपूर्ण सत्र की अध्यक्षता जीतेंद्र कुमार, तबस्सुम फरहाना, अनील अंशुमन, सुरेंद्र प्रसाद सुमन और रामबाबू आर्य की अध्यक्षमंडली ने संयुक्त रूप से की।

प्रतिनिधियों के बीच कॉपियों के वितरण के बाद राज्य सचिव दीपक सिन्हा ने “कामकाज की रिपोर्ट” सदन के पटल पर रखी। इस रिपोर्ट पर सुमन कुमार सिंह, प्रभात कुमार, समता राय, कृष्ण कुमार निर्मोही, निर्मल नयन, राजेश कमल और विन्देश्वरी सिंह सहित दर्जनभर से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और खुलकर अपने विचार रखे। प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण सुझावों को रिपोर्ट में शामिल करने का आश्वासन राज्य सचिव द्वारा दिए जाने के बाद, अध्यक्षमंडली के प्रस्ताव पर हाउस ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ रिपोर्ट को सर्वसम्मति से पास कर दिया।

चुनावी सत्र में नई कमिटी का गठन, जीतेंद्र अध्यक्ष और दीपक बने सचिव

सांगठनिक सत्र के दूसरे चरण में चुनावी प्रक्रिया शुरू हुई। पर्यवेक्षक कौशल किशोर ने विदाई राज्य कमिटी की ओर से 125 सदस्यीय नई राज्य परिषद के गठन का प्रस्ताव हाउस के समक्ष रखा, जिसे डेलीगेट्स ने तालियों की गड़गड़ाहट के बीच मंजूर कर लिया। इसके बाद 45 सदस्यीय राज्य कार्यकारिणी गठन का प्रस्ताव भी ध्वनिमुद्रित रूप से पास किया गया।

तत्पश्चात नवगठित राज्य परिषद की बैठक में सर्वसम्मति से शीर्ष पदों पर चुनाव संपन्न हुआ:

  • अध्यक्ष: जीतेंद्र कुमार
  • सचिव: दीपक सिन्हा
  • उपाध्यक्ष: सुरेंद्र प्रसाद सुमन, प्रभात कुमार, रामबाबू आर्य, निर्मल नयन, कृष्ण कुमार निर्मोही, प्रमोद यादव, शंभू भारतीय, अनील अंशुमन, अहमद सगीर, विजय और स्नेहलता।
  • सह सचिव: पुनीत पाठक, सुमन कुमार सिंह, रंजन कुमार बमबम, समीर कुमार, संजय कुमार और अशोक पासवान।

गीतों के साथ ऐतिहासिक सम्मेलन का समापन

सम्मेलन के अंतिम चरण में समस्तीपुर कॉलेज की ओर से दिनेश्वर यादव ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके पश्चात पुनीत पाठक, प्रमोद यादव और अनील अंशुमन के नेतृत्व में “हम होंगे कामयाब” गीत के सामूहिक गायन के साथ इस भव्य सम्मेलन के समापन की आधिकारिक घोषणा की गई।

इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में विजय नंदन, रूपा कुमारी, लोकेश राज, सुनील कुमार, दीपक यदुवंशी, जीतेंद्र सहनी, रंजीत राम, बंदना सिंह, उमेश कुमार और रवि कुमार दूबे की भूमिका बेहद सराहनीय रही, जिसके लिए जसम की तरफ से सभी को विशेष रूप से धन्यवाद दिया गया।

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क्रांतिकारी नारों और कविताओं से गूंज उठा समस्तीपुर कॉलेज! जन संस्कृति मंच के सम्मेलन में आधी रात तक बंधी रही शेरो-शायरी की महफिल

समस्तीपुर, 27 सितंबर 2026 : जन संस्कृति मंच (जसम) के बिहार राज्य सम्मेलन के अवसर पर शनिवार की देर शाम समस्तीपुर कॉलेज भवन में आयोजित कवि गोष्ठी और मुशायरे ने शहर के सांस्कृतिक और वैचारिक माहौल में एक नया भूचाल ला दिया। फासीवादी सत्ताओं और जनविरोधी नीतियों पर तीखे प्रहार करती कविताओं, गज़लों और शेरो-शायरी की गूंज से पूरा सभागार आधी रात तक गूंजता रहा। इस भव्य और धमाकेदार सांस्कृतिक संध्या ने उपस्थित सभी साहित्य प्रेमियों, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं और प्रतिनिधियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

समस्तीपुर कॉलेज भवन में आयोजित सम्मेलन के दौरान कविता पाठ और विचार रखते हुए जसम के अनिल अंशुमन ।

सुमन कुमार सिंह की अध्यक्षता में सजा गोष्ठी का मंच

कार्यक्रम की अध्यक्षता जसम के राज्य सह सचिव सुमन कुमार सिंह ने की। उनकी देखरेख में आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या ने यह साबित कर दिया कि वैचारिक संघर्षों की धार तेज करने में कला, कविता और साहित्य की भूमिका सबसे अहम होती है। कार्यक्रम का संचालन और संयोजन भी बेहद प्रभावी रहा, जिसने श्रोताओं को अपनी सीटों से हिलने नहीं दिया।

फासीवादी सत्ता पर प्रहार: बुलडोजर वाली कविता ने बटोरी सुर्खियां

कवि गोष्ठी के दौरान एक से बढ़कर एक क्रांतिकारी और विद्रोही रचनाएं पेश की गईं। गोष्ठी का सबसे बड़ा आकर्षण डॉ. प्रभात कुमार की वह कविता रही, जिसमें उन्होंने मौजूदा फासीवादी सत्ता पर अत्यंत करारा प्रहार किया। उनकी इन पंक्तियों—

“इसके पहले कि तेरा घर टूटे / चोर हत्यारा तुमको लूटे / तोड़ दो इसका अंजर-पंजर / नहीं हो तुम मदारी के बंदर।”

—ने श्रोताओं के रोंगटे खड़े कर दिए और पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

इसके अलावा, मदन कश्यप की चर्चित कविता “चांद क्यों नज़्म”, अनिल अंशुमन की झकझोर देने वाली रचना “क्यों जल रहे हैं रोज मकानात शहर में”, और कौशल किशोर की भावुक कर देने वाली प्रस्तुति “एक पिता का ब्यान” ने लोगों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। वहीं दूसरी ओर, मो. सगीर के मुशायरे और बेहतरीन कलाम ने श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया और उनकी प्रस्तुति को उपस्थित जनसमूह से जबरदस्त सराहना मिली।

समस्तीपुर कॉलेज भवन में आयोजित जन संस्कृति मंच के बिहार राज्य सम्मेलन के दौरान सांस्कृतिक संध्या में उपस्थित श्रोता, साहित्य-प्रेमी और प्रतिनिधि।

25 से अधिक कवियों और शायरों ने दी प्रस्तुतियां

इस वृहद आयोजन में बिहार भर से आए 25 से अधिक नामचीन कवियों, शायरों और गीतकारों ने अपनी-अपनी रचनाओं का पाठ किया। कविता, गजल और शेरो-शायरी की इस बहुआयामी और विविध प्रस्तुति ने सम्मेलन की सांस्कृतिक संध्या को अविस्मरणीय और एतिहासिक बना दिया। इस सत्र में भारी संख्या में साहित्य-प्रेमी, क्रांतिकारी सांस्कृतिक कार्यकर्ता एवं सम्मेलन के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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भारत-नेपाल सीमा पर बढेगा सुरक्षा का पहरा! घुसपैठ, फर्जी दस्तावेजों और नकली नोटों के काले कारोबार पर कसेगा शिकंजा, केंद्र और बिहार सरकार मिलकर लेगी  एक्शन

पटना, 26 सितंबर 2026: बिहार की सीमा पर मंडरा रहे खतरों से निपटने के लिए अब केंद्र और राज्य सरकार ने पूरी तरह कमर कस ली है। पटना स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय के ‘संवाद’ कक्ष में भारत-नेपाल सीमा से जुड़े विभिन्न संवेदनशील विषयों पर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में घुसपैठ, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल, नकली मुद्रा, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों पर पूर्ण रोक लगाने के लिए भारत सरकार और बिहार सरकार के मिलकर काम करने का बड़ा निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में भारत-नेपाल सीमा सुरक्षा को लेकर चल रही उच्चस्तरीय बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े सीमावर्ती जिलों के अधिकारी एवं अन्य गणमान्य।

सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सख्त निर्देश

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत-नेपाल सीमा की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा और प्रबंधन को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है। सीमा क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए सशस्त्र सीमा बल यानी एस०एस०बी०, बिहार पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों को आपसी तालमेल के साथ काम करने का निर्देश दिया गया है।

इन मुख्य बिंदुओं पर रही विशेष नजर:

  • अवैध घुसपैठ और फर्जी दस्तावेज: नेपाल सीमा पर होने वाली अवैध घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों के जरिए पहचान छिपाने वाले तत्वों पर प्रभावी रोक लगाने का कड़ा निर्देश दिया गया है।
  • फर्जी बैंक खातों की पहचान: सीमावर्ती क्षेत्रों में संदिग्ध एवं फर्जी म्यूल बैंक खातों की पहचान कर उन पर तुरंत आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है। इसके अलावा सीमावर्ती बैंकों में नकली नोटों की पहचान के लिए आवश्यक मशीनें उपलब्ध कराने और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं।
  • नशा मुक्त भारत अभियान: केंद्र सरकार के ‘नशा मुक्त भारत 2029’ के लक्ष्य के अनुरूप मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया ताकि सीमा क्षेत्र से नशीले पदार्थों की आवाजाही को पूरी तरह रोका जा सके।
  • नियमित मासिक बैठकें: सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारी और पुलिस अधिकारियों को केंद्रीय सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों के साथ नियमित रूप से मासिक समन्वय बैठकें करने का निर्देश दिया गया है।
  • धार्मिक स्थलों और शिक्षा पर फोकस: सीमावर्ती क्षेत्रों में गैर-पंजीकृत धार्मिक स्थलों की पहचान कर प्रचलित कानूनों के तहत कार्रवाई करने तथा शिक्षा की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
पटना में मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित ‘संवाद’ कक्ष में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में शामिल केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी एवं अन्य अधिकारी।

बैठक में इन दिग्गजों की रही मौजूदगी

इस उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी विशेष रूप से शामिल हुए। इसके अलावा बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पुलिस महानिदेशक प्रीता वर्मा, गृह विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार, पुलिस महानिदेशक, स्पेशल ब्रांच कुंदन कृष्णन, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह सहित विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, अन्य वरीय पुलिस पदाधिकारीगण और संबंधित केंद्रीय एजेंसियों के वरीय अधिकारी उपस्थित थे। वहीं, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीमावर्ती जिलों के तमाम जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक भी जुड़े हुए थे।

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अगले वर्ष से राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में छात्रों के लिए कंप्यूटर शिक्षा अनिवार्य : सीएम

पटना, 26 सितंबर 2026 — बिहार की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव और क्रांतिकारी कदम उठाने की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दानापुर के बाटागंज स्थित राजकीय मध्य विद्यालय रामजीचक में आयोजित अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी (पीटीएम)-2026 के दौरान एक घोषणा करते हुए निर्देश दिया कि अगले वर्ष से राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षा को अनिवार्य रूप से शुरू किया जाए। आधुनिक तकनीक से बच्चों को लैस करने के लिए प्रत्येक दो-तीन स्कूलों पर एक इंस्ट्रक्टर की तैनाती की जाएगी ताकि छात्र तकनीकी शिक्षा में पीछे न रहें।

दानापुर के बाटागंज स्थित राजकीय मध्य विद्यालय रामजीचक में आयोजित अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी (पीटीएम) के दौरान ‘मेरे सपनों का भारत-सेवा चित्र’ प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और अन्य गणमान्य लोग, साथ में अपने प्रोजेक्ट की जानकारी देती छात्रा।

रामजीचक स्कूल में उमड़ी भीड़, अभिभावकों और छात्रों से सीधा संवाद

राजकीय मध्य विद्यालय रामजीचक में आयोजित इस मेगा इवेंट के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘निपुण पथ – पढ़ना, लिखना एवं गणना’ थीम के तहत विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, पठन-पाठन और बच्चों की उपस्थिति का जायजा लिया। कार्यक्रम में छात्रों और अभिभावकों की भारी भीड़ देखने को मिली। मुख्यमंत्री ने कक्षा सातवीं के परीक्षा परिणाम लेने पहुंचे विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को सुना और स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने का कड़ा संदेश दिया।

छात्रों को दी कड़ी नसीहत, मोबाइल और कोचिंग के मोह से बाहर निकलें

छात्रों से संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने उन्हें कड़े शब्दों में सलाह दी कि वे अनावश्यक रूप से मोबाइल फोन का उपयोग करने से बचें और स्मार्टफोन का इस्तेमाल सिर्फ पढ़ाई के लिए करें। उन्होंने कहा कि छात्र 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने का लक्ष्य रखें और निरंतर मेहनत करें। सातवीं और आठवीं कक्षा से ही विद्यार्थियों के करियर की मजबूत नींव तैयार होती है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि विशेष परिस्थिति में ही कोचिंग का सहारा लें, अधिकांश पढ़ाई स्कूल और घर पर नियमित होमवर्क व अभ्यास से ही पूरी करें।

दानापुर के बाटागंज स्थित राजकीय मध्य विद्यालय रामजीचक में आयोजित अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी (पीटीएम) के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और अन्य गणमान्य लोग,

‘मेरे सपनों का भारत‘ प्रदर्शनी ने मोहा मन

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘मेरे सपनों का भारत-सेवा चित्र’ अभियान के तहत आयोजित राज्यव्यापी प्रतियोगिता का बारीकी से अवलोकन किया। इस दौरान एक छात्रा ने माइक पर अपने बनाए प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी दी, जिसे मुख्यमंत्री ने बेहद गौर से सुना। छात्रों द्वारा ‘विकसित भारत-2047’, सोलर एनर्जी, मेट्रो ट्रेन, रोबोट और ‘सपनों का भारत’ जैसे विषयों पर बनाए गए शानदार चित्रों और प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग (पढ़िये, समझिये, करिये, सीखिये) प्रदर्शनी की सभी ने जमकर सराहना की। इस दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों और उनके माता-पिता को ‘पेरेंट्स ऑफ द मंथ’ के रूप में सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में इन दिग्गजों की रही मौजूदगी

इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रोशन, शिक्षा विभाग के विशेष सचिव धर्मेंद्र कुमार, जिलाधिकारी कुंदन कुमार, वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के० शर्मा सहित कई अन्य वरीय अधिकारी, शिक्षक, छात्र-छात्राएं और उनके अभिभावक प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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फासीवादी ताकतों की खैर नहीं! समस्तीपुर में जन संस्कृति मंच के 7वें राज्य सम्मेलन का शंखनाद, जेनजी के उभार से सहमी सत्ता!

समस्तीपुर, 26 सितंबर 2026: बिहार की धरती पर तानाशाही और फासीवादी ताकतों के खिलाफ बगावत का बिगुल बज चुका है। समस्तीपुर कॉलेज के सभागार (जिसे अब जन कवि महेश्वर सभागार का नाम दिया गया है) में शनिवार को जन संस्कृति मंच (जसम) का 7वां बिहार राज्य सम्मेलन बेहद जोश और खरोश के साथ शुरू हुआ। सम्मेलन की शुरुआत शहीद-ए-आजम भगत सिंह और संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण और क्रांतिकारी शहीद गीतों के गूंज के साथ हुई। इस दो दिवसीय महाकुंभ का मुख्य आकर्षण ‘रामचंद्र राय-रामचंद्र आरसी नगर’ बनाया गया है, जहाँ पूरे राज्य से पहुंचे साहित्यकारों, विचारकों और कलाकारों का सैलाब उमड़ पड़ा है।

समस्तीपुर कॉलेज सभागार में आयोजित जन संस्कृति मंच (जसम) के 7वें राज्य सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के दौरान मंच पर मौजूद वक्ता, अध्यक्ष मंडली और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देते कलाकार।

जेनजी के उभार से डरी फासीवादी सत्ता: मनोज सिंह

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और जसम के राष्ट्रीय महासचिव मनोज सिंह ने अपने आक्रामक तेवर दिखाते हुए कहा कि देश के नौजवानों यानी ‘जेनजी’ ने अब फासीवादी सत्ता को सीधे तौर पर डराना और चुनौती देना शुरू कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा वक्त की सबसे बड़ी मांग है कि सड़क पर संघर्ष को और अधिक तेज किया जाए, ताकि तानाशाही ताकतों के मंसूबे पर पानी फेरा जा सके।

फासीवाद के खिलाफ जनता का आंदोलन ही एकमात्र विकल्प: मदन कश्यप

सम्मेलन का  उद्घाटन करते हुए प्रसिद्ध जन कवि मदन कश्यप ने देश के लेखकों और विचारकों का आह्वान किया कि वे चुप न बैठें। उन्होंने कहा कि फासीवादी प्रवृत्तियों का विरोध जीवन के हर स्तर पर होना चाहिए। समाज में पनप रही ‘सुप्रीमों संस्कृति’ को खारिज करते हुए लोकतांत्रिक और जनवादी परंपराओं को मजबूत करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। आज के राजनीतिक-सामाजिक संकट से निपटने का एकमात्र जरिया केवल और केवल जनता का संगठित आंदोलन है।

फासीवाद के खिलाफ भगत सिंह हमारे सबसे बड़े पथप्रदर्शक: कौशल किशोर

मुख्य वक्ता के रूप में लखनऊ से पहुंचे जसम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रसिद्ध कवि-आलोचक कौशल किशोर ने सत्ता के खिलाफ संघर्ष का शंखनाद किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्करण के फासीवाद से मुकाबला करने के लिए भगत सिंह हमारे सबसे बड़े प्रेरणास्त्रोत और पथप्रदर्शक हैं, जो हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूमने से ठीक पहले भी लेनिन के विचारों का अध्ययन कर रहे थे।

चेतना को प्रगतिशील बनाए बिना फासीवाद का खात्मा नामुमकिन: सियाराम शर्मा

विशिष्ट अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ से आए जसम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रसिद्ध आलोचक सियाराम शर्मा ने कहा कि आज का भारतीय फासीवाद एक ‘टेक्स्टबुक फासीवाद’ की तरह काम कर रहा है। जब तक आम जनता की चेतना को वैज्ञानिक और प्रगतिशील नहीं बनाया जाता, तब तक इस आसुरी ताकत का खात्मा संभव नहीं है। ऐसे में ‘जन संस्कृति मंच’ जैसे संगठनों की जिम्मेदारी और कार्यभार कई गुना बढ़ गया है।

लेखक और कलाकार जनसाधारण के पक्ष में खड़े हों: प्रभात कुमार

जसम के समस्तीपुर जिलाध्यक्ष और प्रसिद्ध कवि प्रभात कुमार ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि आज देश का जनतंत्र चौतरफा खतरे में है। सत्ता में बैठे लोग इसे सुनियोजित तरीके से नेस्तनाबूद करना चाहते हैं। ऐसे दौर में कलाकारों, लेखकों और बुद्धिजीवियों का फर्ज बनता है कि वे इस साजिश को शिकस्त देने के लिए सीधे जनसाधारण के साथ खड़े हों।

समस्तीपुर कॉलेज सभागार में आयोजित सम्मेलन में हिस्सा लेते हुए राज्यभर से आए डेलीगेट, पर्यवेक्षक, रंगकर्मी, साहित्यकार और प्रगतिशील विचारक।

दिग्गजों की मौजूदगी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम

इस दो दिवसीय ऐतिहासिक सम्मेलन में राज्यभर से 125 से अधिक डेलीगेट, पर्यवेक्षक, रंगकर्मी, साहित्यकार, चित्रकार और जनगायक हिस्सा ले रहे हैं। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता जितेंद्र कुमार, सुरेंद्र प्रसाद सुमन, संतोष कुमार और अहमद सगीर की संयुक्त अध्यक्ष मंडली ने की। मंच पर कृष्ण कुमार निर्मोही, अनिल अंशुमान, प्रमोद यादव, रामबाबू आर्य और तबस्सुम फरहाना की गरिमामयी उपस्थिति रही। संचालन वरिष्ठ रंगकर्मी-कवि दीपक सिन्हा ने किया।

इस विशेष अवसर पर दीपक सिन्हा के नए बहुचर्चित काव्य-संग्रह “ब्लैक स्पॉट” का लोकार्पण भी किया गया। सम्मेलन स्थल पर एक भव्य आर्ट गैलरी और एक प्रगतिशील पुस्तक स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है, जहाँ जनवादी कलाकृतियां और किताबें प्रदर्शित की गई हैं।

शाम ढलते ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दौर शुरू हुआ, जिसमें वरिष्ठ कवि शंभु भारतीय के संचालन में शानदार काव्य-गोष्ठी सह मुशायरा का आयोजन किया गया। इसके साथ ही बेगूसराय की प्रसिद्ध नाट्य टीम ‘रंगनायक-द लेफ्ट थियेटर’ ने धमाकेदार नाटक पेश किया। मधुबनी की जनगायन टीम ‘नवतुरिया’, रोहतास की टीम ‘ललकार’ और आरा की चर्चित युवा टीम ‘युवानीति’ के सुरों से पूरा समस्तीपुर गूंज उठा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संचालन प्रमोद यादव, विजय सिन्हा और पुनीत पाठक संयुक्त रूप से कर रहे हैं। सम्मेलन अभी पूरी ऊर्जा के साथ जारी है।

फोटो कोलाज ,  समस्तीपुर कॉलेज सभागार में आयोजित सम्मेलन  को सम्‍बोधित करते वक्‍तागण

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वैश्विक मंच पर भारत का धमाकेदार डंका! न्यूयॉर्क में स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने खोला बड़ा राज, कहा– देश में स्वास्थ्य सेवाओं का हो रहा है कायापलट!

विस्तार से खबर:

न्‍यूयॉर्क में आयोजित 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए81) के दौरान आयोजित दो प्रमुख वैश्विक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में भारत ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति को दुनिया के सामने रखा। इस वैश्विक मंच पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने शिरकत की और देश की स्वास्थ्य प्रणालियों के कायल पूरी दुनिया को कर दिया।

 न्‍यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा 81 के दौरान बैठक में भाग लेते हुए और विचार रखतीं पुण्य सलिला श्रीवास्तव।

पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑफ यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (यूएचसी) और ग्लोबल हेल्थ’ की सातवीं वार्षिक मंत्रिस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए देश की बड़ी उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने बताया कि भारत में 1.8 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का एक विशाल नेटवर्क काम कर रहा है, जो समुदायों के बिल्कुल करीब जाकर प्रजनन और बाल स्वास्थ्य, गैर-संचारी रोगों की जांच, मानसिक स्वास्थ्य और पैलिएटिव केयर जैसी जरूरी सेवाएं मुहैया करा रहा है।

गरीबों और वंचितों के लिए वरदान साबित हो रही आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना ने मरीजों पर से आर्थिक बोझ को पूरी तरह कम कर दिया है। इसके अलावा ‘निशुल्क दवा और डायग्नोस्टिक्स सेवा पहल’ और ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम’ भी स्वास्थ्य क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।

डिजिटल क्रांति का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि भारत के डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम के तहत 90 करोड़ से ज़्यादा नागरिकों के पास यूनिक हेल्थ आइडेंटिटी (आभा) मौजूद है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की राह बेहद आसान हो गई है। भौगोलिक दूरियों को पाटने के लिए ई-संजीवनी के ज़रिए 49.7 करोड़ से ज़्यादा टेली-कंसल्टेशन, टेली-रेडियोलॉजी और एआई-इनेबल्ड एक्स-रे जैसी आधुनिक तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है।

हेपेटाइटिस और सिकल सेल एनीमिया को लेकर बड़ा संकल्प

हेपेटाइटिस पर आयोजित सत्र में भारत का पक्ष रखते हुए पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने साल 2030 तक हेपेटाइटिस बी और सी को जड़ से खत्म करने के दृढ़ संकल्प को दोहराया। उन्होंने बताया कि नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम के तहत अब तक लगभग 22.5 करोड़ लाभार्थियों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।

इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भारत ने ‘वनएससीडी’ (सिकल सेल केयर में समानता और बदलाव लाने के लिए ग्लोबल पार्टनरशिप) की शुरुआत में सह-मेजबानी की। इस दौरान नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में साल 2023 में शुरू किए गए ‘नेशनल सिकल सेल एनीमिया एलिमिनेशन मिशन’ के तहत हो रहे कामों की सराहना की गई। इस मिशन के अंतर्गत अब तक 7.29 करोड़ से ज़्यादा लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, 20 लाख से ज़्यादा कैरियर की पहचान हुई है और 4.93 करोड़ से ज़्यादा सिकल सेल कार्ड बांटे गए हैं। भारत की इन क्रांतिकारी पहलों ने यह साबित कर दिया है कि देश ग्लोबल हेल्थ के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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प्रशांत किशोर का एनडीए को खुला चैलेंज, जन सुराज ने विधान परिषद चुनाव के लिए उतारे तीन और धाकड़ उम्मीदवार!

पटना: बिहार की राजनीति में लगातार हलचल मचा रहे जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने एक बार फिर विरोधी दलों पर जोरदार हमला बोला है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रशांत किशोर ने एनडीए और अन्य राजनीतिक दलों को खुली चुनौती देते हुए हुंकार भरी कि जैसे बाकीपुर में परिवर्तन, बदलाव और सुधार साफ दिख रहा है, ठीक उसी तरह अब पूरे बिहार के अन्य क्षेत्रों में भी ऐसा ही बदलाव नजर आएगा। प्रशांत किशोर के इस बड़े बयान के बाद राज्य की सियासी सरगर्मी काफी तेज हो गई है।

आगामी बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर जन सुराज पार्टी ने अपने समर्थित उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज कुमार भारती द्वारा जारी पत्र के अनुसार, विधान परिषद चुनाव के लिए विभिन्न क्षेत्रों से मजबूत चेहरों को मैदान में उतारा गया है।

नए और पुराने प्रत्याशियों की पूरी सूची

जन सुराज पार्टी की ओर से अब तक कुल 8 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया जा चुका है। ताजा प्रेस विज्ञप्ति और पहले से घोषित उम्मीदवारों की सूची निम्नलिखित है:

  • पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: अनुज सिंह
  • तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: विमोहन कुमार
  • तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: भूषण झा
  • दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: एस.पी. राय
  • दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: रविंद्र यादव
  • सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: अफफाक अहमद
  • पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: दिव्या ज्योति
  • कोशी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: रजनीश रंजन

पार्टी सूत्रों के अनुसार, जन सुराज के इन उम्मीदवारों के चुनावी मैदान में उतरने से मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है और पारंपरिक राजनीतिक दलों की नींद उड़ गई है।

पहले से घोषित पांच उम्‍मीदवार के नामों की सूची   

  • दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: एस.पी. राय
  • दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: रविंद्र यादव
  • सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: अफफाक अहमद
  • पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: दिव्या ज्योति
  • कोशी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: रजनीश रंजन

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बिहार में क्राइम पर आर-पार! मुख्य सचिव का अल्टीमेटम – ‘जीरो टॉलरेंस’ से होगा अपराधियों का सफाया, फील्ड में उतरेंगे सभी अफसर!

पटना: बिहार में कानून-व्यवस्था और जन सुरक्षा को पूरी तरह दुरुस्त करने के लिए पटना में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई । मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई इस हाईलेवल बैठक में राज्य के सभी जिलों के डीएम (जिला मजिस्ट्रेट) और एसपी (पुलिस अधीक्षक) शामिल हुए । बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने अपराध के मामलों में किसी भी प्रकार की कोताही न बरतने और जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत सख्त कार्रवाई करने के स्पष्ट निर्देश दिए।

पटना में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कानून-व्यवस्था की समीक्षा करते डीन, एसपी और अन्य प्रशासनिक अधिकारी।

फील्ड मॉनिटरिंग बढ़ाने और रात्रि विश्राम के निर्देश

बैठक में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे केवल कार्यालयों तक सीमित न रहें, बल्कि पुलिस की फील्ड मॉनिटरिंग को और अधिक प्रभावी बनाएं। सभी जिलों के एसपी को अपने-अपने क्षेत्र की कानून-व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी लेते हुए गश्त (पेट्रोलिंग) और फील्ड विजिट बढ़ाने को कहा गया है। इसके साथ ही, मुख्यालय स्तर के पुलिस अधिकारियों को विभिन्न जिलों से टैग किया गया है, जो फील्ड विजिट करने के साथ-साथ रात्रि विश्राम भी करेंगे ताकि जमीनी हकीकत और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा सके।

आगामी त्योहारों को लेकर अलर्ट, फेक न्यूज पर कड़ी नजर

आगामी त्योहारों के मद्देनजर राज्य में शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय इंटेलिजेंस (खुफिया तंत्र) को पूरी तरह मजबूत करने और अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सामाजिक सद्भाव और शांति भंग करने की कोशिश करने वालों तथा फेक न्यूज फैलाने वालों पर तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार के इस कड़े रुख से अपराधियों और असामाजिक तत्वों में हड़कंप मच गया है।

बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर हाईलेवल बैठक, मुख्य सचिव ने दिए सख्त निर्देश पटना में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कानून-व्यवस्था और जन सुरक्षा को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई। बैठक में सभी जिलों के DM और SP शामिल हुए। मुख्य सचिव ने अपराध पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई और पुलिस की फील्ड मॉनिटरिंग बढ़ाने के निर्देश दिए। SP को अपने-अपने जिलों की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी लेते हुए गश्त और फील्ड विजिट बढ़ाने को कहा गया। मुख्यालय के पुलिस अधिकारियों को जिलों से टैग कर फील्ड विजिट और रात्रि विश्राम के जरिए जमीनी स्थिति की निगरानी करने को कहा गया। आगामी त्योहारों को देखते हुए स्थानीय इंटेलिजेंस मजबूत करने और अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। वहीं, सामाजिक सद्भाव और शांति भंग करने वाली फेक न्यूज पर त्वरित कानूनी कार्रवाई करने को कहा गया।

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वायरल वीडियो पर समस्तीपुर पुलिस का ताबड़तोड़ एक्शन: नाबालिग से अभद्र व्यवहार करने वाले 4 दरिंदे 6 घंटे के भीतर गिरफ्तार!

समस्तीपुर: बिहार के समस्तीपुर जिले से एक बेहद शर्मनाक और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। कर्पूरीग्राम थाना क्षेत्र के जगत सिंहपुर बांध के पास कुछ मनचलों द्वारा एक नाबालिग लड़की के साथ अभद्र व्यवहार करने का मामला प्रकाश में आया है। घटना करीब एक सप्ताह पुरानी (संभवतः 15 सितंबर 2026) बताई जा रही है, जिसका वीडियो कल दिनांक 23 सितंबर 2026 की संध्या में अचानक सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा।

समस्तीपुर के पुलिस अधीक्षक अरविन्द प्रताप सिंह प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया को मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए।

मामले की संवेदनशीलता को भांपते हुए समस्तीपुर पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और महज 6 घंटे के भीतर सभी 4 आरोपियों को धर दबोचा। यह त्वरित कार्रवाई कानून व्यवस्था के प्रति पुलिस की सख्ती और मुस्तैदी का एक बड़ा उदाहरण पेश करती है।

पुलिस अधीक्षक का तीखा बयान: “सभ्य समाज में ऐसी मानसिकता के लिए कोई जगह नहीं”

मामले का खुलासा करते हुए समस्तीपुर के पुलिस अधीक्षक अरविन्द प्रताप सिंह ने मीडिया को संबोधित किया और पूरी घटना की परतें खोलीं। एसपी ने बताया कि कल रात्रि लगभग 10 बजे के आसपास, सोशल मीडिया पेट्रोलिंग के दौरान यह वीडियो उनकी नजर में आया। वीडियो में 3-4 लोग एक लड़की के साथ अभद्र व्यवहार करते नजर आ रहे थे।

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बिना वक्त गंवाए तकनीकी सर्विलांस और सत्यापन का काम शुरू किया। जांच में पता चला कि घटना स्थल कर्पूरीग्राम थाना क्षेत्र के जगत सिंहपुर स्थित बांध के पास की सड़क है। चूंकि वीडियो में दिख रही पीड़िता प्रथम दृष्टया नाबालिग प्रतीत हो रही थी, इसलिए पुलिस ने बिना किसी औपचारिकता के इंतजार किए त्वरित कदम उठाया। पीड़िता की पहचान तत्काल स्पष्ट न हो पाने के कारण पुलिस पदाधिकारी के बयान पर ही कर्पूरीग्राम थाना कांड संख्या 117-26, दिनांक 24 सितंबर 2026 दर्ज किया गया। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), पॉक्सो एक्ट और आईटी एक्ट की सुसंगत धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।

महज 6 घंटे में शिकंजे में आए चारों आरोपी

समस्तीपुर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए जगत सिंहपुर और बिजौलिया गांवों में छापेमारी की और वीडियो में दिख रहे सभी आरोपियों की पहचान कर ली। घटना की सूचना मिलने के मात्र 6  घंटे के भीतर चारों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम निम्नलिखित हैं:

  1. विकास कुमार, पिता – रामसुंदर शर्मा (निवासी – जगत सिंहपुर)
  2. राहुल कुमार, पिता – अरुण पासवान (निवासी – जगत सिंहपुर)
  3. रामबाबू सहनी, पिता – महेश्वर सहनी (निवासी – जगत सिंहपुर)
  4. अवधेश पासवान, पिता – नेवालाल पासवान (निवासी – बिजौलिया)

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इनमें से एक आरोपी पूर्व में शराब से जुड़े मामलों में भी जेल जा चुका है। पुलिस अब इन सभी आरोपियों और उनके परिवार के अन्य सदस्यों के आपराधिक इतिहास का भी सत्यापन कर रही है ताकि इनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी शिकंजा कसा जा सके। इसके अलावा, जिस मोबाइल फोन से यह वीडियो रीसर्विस होकर वायरल हुआ था, उसे भी पुलिस ने सीज कर लिया है।

सोशल मीडिया यूजर्स के लिए कड़ी चेतावनी और अपील

इस पूरी घटना के बाद समस्तीपुर पुलिस ने समाज और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के लिए एक सख्त संदेश जारी किया है। पुलिस का स्पष्ट कहना है कि इस प्रकार के कृत्य आज के सभ्य समाज में कतई क्षम्य नहीं हैं।

पुलिस ने आम जनता और सोशल मीडिया यूजर्स से अपील की है कि वे भूलकर भी ऐसा कोई वीडियो, फोटो या कंटेंट शेयर न करें जिससे पीड़िता की पहचान उजागर हो या उसे भविष्य में मानसिक व सामाजिक क्षति का सामना करना पड़े। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और पॉक्सो एक्ट के तहत इस तरह के वीडियो को फॉरवर्ड या शेयर करना भी एक गंभीर और संघीय अपराध की श्रेणी में आता है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि यदि कोई भी व्यक्ति इस प्रकार की सामग्री को प्रसारित करता पाया गया, तो उस पर भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना न केवल सोशल मीडिया के दुरुपयोग और बढ़ती आपराधिक प्रवृत्तियों पर एक करारा तमाचा है, बल्कि पुलिस प्रशासन की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई यह भी साबित करती है कि अपराधियों के लिए कानून के लंबे हाथों से बचना नामुमकिन है।

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