Monday, June 8, 2026

ताजपुर को ‘शहर’ का टैक्स, पर सुविधाएं ‘गांव’ वाली! रसोई गैस के लिए हाहाकार, माले ने दी आंदोलन की चेतावनी

ताजपुर/समस्तीपुर : ताजपुर नगर परिषद क्षेत्र में इन दिनों रसोई गैस की किल्लत ने आम जनता के घरों का चूल्हा ठंडा कर दिया है। शहर के उपभोक्ता पिछले काफी समय से इस दोहरी मार को झेल रहे हैं—जहाँ उनसे टैक्स की वसूली तो ‘शहर’ के हिसाब से की जा रही है, लेकिन उन्हें मिलने वाली बुनियादी सुविधाएं ‘गांव’ के स्तर की भी नहीं हैं। इसी प्रशासनिक उपेक्षा और गैस एजेंसियों की मनमानी के खिलाफ भाकपा माले ने मोर्चा खोलते हुए जिलाधिकारी को अल्टीमेटम दिया है।

“इंतजार की इंतेहा: ताजपुर में रसोई गैस की भारी किल्लत के बीच एजेंसियां और उपभोक्ता आमने-सामने। जहां एक ओर गोदामों में गैस की उपलब्धता के दावे किए जाते हैं, वहीं आम जनता को 45 दिन की लंबी प्रतीक्षा सूची में धकेल दिया गया है।”

दोहरी मार: शहर का दर्जा, लेकिन गैस में गांववाली देरी

ताजपुर के निवासियों के लिए यह स्थिति किसी दुस्वप्न से कम नहीं है। भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में इस विसंगति को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने बताया कि ताजपुर वर्ष 2021 से ही ‘नगर परिषद’ के रूप में अस्तित्व में है। सरकारी नियमों के मुताबिक, यहाँ होल्डिंग टैक्स, बिजली बिल और जमीन रजिस्ट्री जैसे सभी महत्वपूर्ण शुल्क शहरी दरों पर वसूले जा रहे हैं।

लेकिन, जब बात रसोई गैस आपूर्ति की आती है, तो गैस एजेंसियां खुद को प्रशासनिक भूल या अस्पष्टता की आड़ में बचा लेती हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के प्रावधानों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को 25 दिनों के भीतर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराना अनिवार्य है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह सीमा 45 दिन है। ताजपुर नगर परिषद क्षेत्र होने के बावजूद, यहां की गैस एजेंसियां उपभोक्ताओं को 45 दिनों का इंतजार करवा रही हैं।

एजेंसियों का पल्ला झाड़ने वाला तर्क

जब इस देरी पर एजेंसी संचालकों से सवाल पूछा जाता है, तो उनका जवाब बेहद चौंकाने वाला होता है। उनका तर्क होता है कि पेट्रोलियम मंत्रालय ने ताजपुर को अभी तक अपनी आधिकारिक सूची में ‘शहरी क्षेत्र’ के रूप में अपडेट नहीं किया है। माले नेता ने इसे स्थानीय जनता के साथ सरासर अन्याय और प्रशासन की लापरवाही करार दिया है।

आम गृहणियों और परिवारों पर संकट

45 दिनों के लंबे इंतजार के कारण आम परिवारों का बजट पूरी तरह चरमरा गया है। एक सिलेंडर के भरोसे रहने वाले घरों में गैस खत्म होने पर उन्हें या तो महंगे दामों पर कालाबाजारी से गैस खरीदने को मजबूर होना पड़ता है, या फिर वैकल्पिक ईंधन के रूप में लकड़ी या कोयले पर निर्भर होना पड़ता है। विशेष रूप से कामकाजी महिलाओं और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह स्थिति बेहद कष्टकारी बनी हुई है।

माले का अल्टीमेटम: सुधार नहीं, तो आंदोलन

भाकपा माले के प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी है कि अब इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने स्पष्ट कहा है:

ताजपुर नगर परिषद से शहरी टैक्स तो वसूला जा रहा है, लेकिन सुविधा देने के वक्त उसे गांव बता दिया जाता है। यह प्रशासनिक विफलता है। प्रशासन तत्काल गैस एजेंसियों की जांच करे और यह सुनिश्चित करे कि बुकिंग के अधिकतम 25 दिनों के भीतर हर उपभोक्ता को सिलेंडर मिल जाए। यदि जल्द ही इस व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो हम आम उपभोक्ताओं को साथ लेकर सड़कों पर उतरेंगे और उग्र जनांदोलन शुरू करेंगे।”

मुख्य मांगें:

  • 25-दिवसीय चक्र: गैस बुकिंग के 25 दिन के भीतर सिलेंडर की होम डिलीवरी सुनिश्चित हो।
  • स्थिति स्पष्ट करें: प्रशासन पेट्रोलियम मंत्रालय से समन्वय कर ताजपुर को शहरी क्षेत्र की सूची में शामिल कराए।
  • एजेंसियों की जांच: गैस एजेंसियों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए नियमित निगरानी हो।

अब सबकी निगाहें जिलाधिकारी कार्यालय पर टिकी हैं कि क्या इस विरोध के बाद प्रशासन गैस एजेंसियों पर नकेल कसता है या जनता को अभी और लंबा इंतजार करना पड़ेगा।

शिक्षा के दम पर बदलेंगे मुसहर टोले की तकदीर: सरायरंजन में खुला ज्ञान का नया अध्याय, प्रमुख वीणा कुमारी ने कहा—”कोई जाति से नहीं, कर्म से होता है बड़ा”

सरायरंजन (समस्तीपुर), 24 अप्रैल 2026: सरायरंजन प्रखंड के मुसहर बाहुल्य इलाकों में शिक्षा की अलख जगाने की दिशा में एक बड़ी पहल हुई है। ‘जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र’ और ‘क्राई (CRY-Child Rights and You)’ के संयुक्त तत्वाधान में प्रखंड के दो महत्वपूर्ण मुसहर टोलों—ग्राम पंचायत राज अख्तियारपुर बलभद्र (वार्ड-12, भोजपुर) और रायपुर बुजुर्ग (वार्ड-9)—में नए सामुदायिक शिक्षा केंद्रों का भव्य उद्घाटन किया गया।

“सरायरंजन में सामुदायिक शिक्षा केंद्र का उद्घाटन करती प्रखंड प्रमुख वीणा कुमारी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति; इस दौरान उन्होंने बच्चों के बीच पोषण सामग्री का भी वितरण किया।”

फीता काटकर खोला शिक्षा का द्वार

इस उद्घाटन समारोह का नेतृत्व प्रखंड प्रमुख वीणा कुमारी ने किया। उनके साथ वार्ड सदस्य बेचनी देवी, सामुदायिक लीडर रामउमेद राम, सामाजिक कार्यकर्ता अजय कुमार राय, शिक्षिका संगीता कुमारी, मुस्कान कुमारी, कोषाध्यक्ष वीणा कुमारी, दिनेश प्रसाद चौरसिया और बलराम चौरसिया ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर और फीता काटकर केंद्र का शुभारंभ किया।

शिक्षा ही एकमात्र विकल्प”

समारोह को संबोधित करते हुए सीनियर रिसर्च कंसल्टेंट दिनेश प्रसाद चौरसिया ने बताया कि जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र पिछले 8 वर्षों से 9 मुसहर बाहुल्य गांवों में नि:शुल्क शिक्षा केंद्र चला रहा है। उन्होंने कहा, हमारा मुख्य उद्देश्य उन बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ना है जो स्कूल से दूर हो गए हैं या जिनका नामांकन अब तक नहीं हो पाया है।”

इस मौके पर प्रखंड प्रमुख वीणा कुमारी ने भावुक अपील करते हुए कहा, माता-पिता बच्चों को नियमित स्कूल भेजें। अगर कहीं कोई बाधा आती है, तो सीधा हमसे संपर्क करें, हम समाधान करेंगे।” उन्होंने बिहार के गौरव दशरथ मांझी और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी का उदाहरण देते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति जन्म या जाति से बड़ा नहीं होता, वह अपने नेक कर्तव्यों और शिक्षा से बड़ा बनता है।”

भीषण गर्मी में मिली राहत, डाबर इंडिया का साथ

उद्घाटन के बाद, जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र द्वारा डाबर इंडिया लिमिटेड के सीएसआर (CSR) कार्यक्रम के तहत बच्चों के बीच पोषण सामग्री का वितरण किया गया। भीषण गर्मी को देखते हुए सचिव सुरेन्द्र कुमार और अध्यक्ष गौरीशंकर चौरसिया ने बच्चों को जूस और ग्लूकोज वितरित किए, जिससे बच्चों के चेहरे खिल उठे।

कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन सामुदायिक शिक्षक संदीप कुमार सादा ने किया। साथ ही, दामोदरपुर महुली और अख्तियारपुर बेदौलिया की अल्पसंख्यक एवं अनुसूचित जाति बस्तियों में भी लगभग 200 परिवारों के बीच राहत सामग्री का वितरण किया गया।

इस अवसर पर विद्यानंद राय, ललित कुमार झा, संदीप कुमार राम, सोहन कुमार, सुरज राम, राजकुमार राम, अकलु सादा, संजु देवी, नीतू देवी सहित दर्जनों गणमान्य लोग उपस्थित थे।


‘तिवारी गैंग’ का बड़ा खेल नाकाम, हथियार और कारतूस के साथ पटना के दो शातिर गिरफ्तार; बैंक लूट का भी हुआ खुलासा

Muzaffarpur: The Sakra police in the district have achieved a major success against criminal elements. During an intensive vehicle checking campaign conducted under the direction of the Senior Superintendent of Police, Muzaffarpur, police arrested two active members of the notorious “Tiwari Gang.” Illegal weapons, live cartridges, and mobile phones were recovered from the accused. The arrested criminals also confessed to snatching 50,000 rupees from a bank customer two days ago.

सकरा थाना परिसर में गिरफ्तार ‘तिवारी गैंग’ के सदस्य (चेहरे ढके हुए)। मौके पर मौजूद पुलिस पदाधिकारी और बरामद अवैध हथियार, कारतूस व अन्य सामग्री के साथ थाना परिसर का दृश्य।

क्या है पूरा मामला?

एसडीपीओ (पूर्वी-02) मनोज कुमार सिंह ने प्रेस वार्ता में बताया कि बीते 23 अप्रैल 2026 की रात वरीय पुलिस अधीक्षक के आदेशानुसार जिले भर में विशेष वाहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान सकरा पुलिस की टीम मुरौल बांध के पास तिरहुत नगर नहर के निकट वाहनों की जांच कर रही थी। तभी लौतन की ओर से एक मोटरसाइकिल पर सवार तीन संदिग्ध युवक आते हुए दिखे। पुलिस को देख वे हड़बड़ा गए और बाइक घुमाकर भागने की कोशिश करने लगे। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उनका पीछा किया, जिसमें दो को दबोच लिया गया, जबकि तीसरा अपराधी बाइक लेकर अंधेरे का फायदा उठाकर फरार होने में सफल रहा।

पटना से नाता, अपराध का पुराना इतिहास

पकड़े गए अपराधियों की पहचान छोटू मिश्रा और विकास कुमार के रूप में हुई है, जो पटना के रहने वाले हैं। तलाशी लेने पर इनके पास से एक देशी पिस्टल, तीन जिंदा कारतूस और एक मोबाइल बरामद हुआ। पुलिसिया पूछताछ में पता चला कि गिरफ्तार छोटू कुमार का आपराधिक इतिहास काफी लंबा है। वह पूर्व में भी छपरा जिले के मुढ़ौरा थाना कांड संख्या 811/25 में आर्म्स एक्ट और डकैती की योजना बनाने के आरोप में जेल जा चुका है।

तिवारी गैंगका आतंक, बैंक लूट की वारदात का खुलासा

पुलिस की पूछताछ में गिरफ्तार बदमाशों ने बड़ा राज उगला है। उन्होंने स्वीकार किया कि वे कुख्यात ‘तिवारी गैंग’ से जुड़े हैं। यह गिरोह मुख्य रूप से बैंक ग्राहकों को निशाना बनाता है और पैसा-मोबाइल झपटकर फरार हो जाता है। बदमाशों ने दो दिन पहले ही एक बैंक ग्राहक से 50,000 रुपये झपटने की घटना में अपनी संलिप्तता कबूल की है। हालांकि, लूट की रकम वे खर्च कर चुके हैं, लेकिन उनकी निशानदेही पर पुलिस ने लूटा गया बैग बरामद कर लिया है।

एसडीपीओ का बयान

एसडीपीओ मनोज कुमार सिंह ने बताया, “ये शातिर अपराधी ‘तिवारी गैंग’ के सदस्य हैं, जो इलाके में छिनतई और लूट की वारदातों को अंजाम देते हैं। फिलहाल लूटी गई नकदी की रिकवरी का प्रयास जारी है और फरार तीसरे साथी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। इनका पूरा नेटवर्क खंगाला जा रहा है और इनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”


सनसनी की भूख, पत्रकारिता का पतन: मासूम को बदनाम करने वाले यूट्यूबर्स बेनकाब!

पटना | डिजिटल डेस्क | आज के डिजिटल दौर में ‘ब्रेकिंग न्यूज़’ की अंधी दौड़ ने पत्रकारिता की मर्यादा को तार-तार कर दिया है। व्यूज बटोरने और सनसनी फैलाने के चक्कर में कुछ तथाकथित यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया चैनलों ने (न्‍यूज भारत टीवी नहीं ) संवेदनशीलता की सभी हदें पार कर दी हैं। पटना के कदमकुआं थाना क्षेत्र से आई एक घटना ने इस कड़वे सच को उजागर किया है कि कैसे बिना किसी पुष्टि के, एक मासूम छात्रा की तस्वीर के साथ छेड़खानी की फर्जी खबर फैलाकर पूरे शहर में दहशत का माहौल बनाया गया।

तथाकथित चैनलों के द्वारा गलत खबर चलाये जाने की जानकारी रखते हुए  सुश्री दिक्षा, नगर पुलिस अधीक्षक (मध्य) पटना,

क्या थी फेक न्यूज़की साजिश?

दिनांक 22 अप्रैल 2026 को सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर एक सनसनीखेज खबर प्रसारित की गई कि कदमकुआं इलाके में एक नाबालिग लड़की के साथ छेड़खानी हुई है। इस खबर के साथ छात्रा की फोटो भी वायरल कर दी गई, जिससे समाज में न केवल आक्रोश फैला, बल्कि पीड़ित परिवार की प्रतिष्ठा को भी गहरी चोट पहुंची। यह उस पत्रकारिता का चेहरा है, जहाँ सच से ज्यादा सनसनी को प्राथमिकता दी जा रही है।

पुलिस की जांच में खुला झूठ का पुलिंदा

मामले की गंभीरता को देखते हुए पटना पुलिस ने त्वरित संज्ञान लिया। नगर पुलिस अधीक्षक (मध्य), सुश्री दिक्षा ने स्वयं जांच का नेतृत्व किया। जब पुलिस ने घटनास्थल के आसपास के लोगों, विद्यालय प्रबंधन और स्वयं छात्रा से पूछताछ की, तो सच्चाई सामने आई। पुलिस के अनुसार, किसी प्रकार की छेड़खानी नहीं हुई थी। सच्चाई यह थी कि एक मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति राहगीरों पर ईंट-पत्थर फेंक रहा था, जिससे छात्रा डर गई थी। स्थानीय लोगों ने उसे सुरक्षित घर पहुंचाया। छात्रा और परिजनों ने स्पष्ट रूप से छेड़खानी की घटना को नकार दिया है।

मीडिया की जिम्मेदारी

नगर पुलिस अधीक्षक सुश्री दिक्षा ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, सोशल मीडिया और यूट्यूब चैनलों से अनुरोध है कि मामले की पुष्टि किए बिना कोई खबर आगे न बढ़ाएं। इस तरह की भ्रामक खबरों से आम जन में असुरक्षा का माहौल बनता है।” एक मीडिया चैनल के लिए अपनी ही खबर का खंडन करना बेहद शर्मनाक होता है। पत्रकारिता का सिद्धांत कहता है कि यदि कोई चैनल या पत्रकार गलत खबर प्रसारित करता है, तो उसे सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि कोई बार-बार ऐसी गलती करता है, तो ऐसे पत्रकारों और मीडिया चैनलों को प्रतिबंधित (बैन) कर देना चाहिए ताकि पत्रकारिता की गरिमा बनी रहे।

भ्रामक खबर फैलाने वालों पर कानूनी कार्रवाई

सोशल मीडिया पर गलत सूचना या भ्रामक खबरें फैलाने वाले ‘डिजिटल अपराधियों’ पर कानून का शिकंजा कसना तय है। भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट के तहत, सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने (Section 505), मानहानि, और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग के लिए ऐसे व्यक्तियों/चैनलों पर कठोर कार्रवाई की जा सकती है। दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति को कारावास (जेल) के साथ-साथ भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। साथ ही, ऐसी सामग्री को हटाने के निर्देश के साथ-साथ उन चैनलों या सोशल मीडिया हैंडल्स को स्थायी रूप से ब्लॉक (Ban) करवाने की प्रक्रिया भी पुलिस प्रशासन द्वारा अपनाई जाती है ताकि समाज में अफवाहों और भय का वातावरण समाप्त किया जा सके।


बिहार पंचायत चुनाव 2026: कहीं कट न जाए आपका नाम! 27 अप्रैल से शुरू हो रहा ‘महा-मिलान’ अभियान, 11 मई तक ही मिलेगा मौका!

राज्य निर्वाचन आयोग ने जारी की समय-सारणी; मतदाता सूची के प्रारूप (प्रपत्र-1) में नाम चेक करना अब हुआ अनिवार्य, ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प खुले।

पटना, बिहार: बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 की सुगबुगाहट तेज  है। राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार ने चुनाव की तैयारियों का बिगुल फूंकते हुए मतदाता क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण और मतदाता सूची के प्रारूप (प्रपत्र-1) के प्रकाशन की तारीख घोषित कर दी है। यदि आप भी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं या एक जागरूक मतदाता हैं, तो यह खबर आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण है।

राज्य निर्वाचन आयोग ने साफ कर दिया है कि 27 अप्रैल 2026 को प्रपत्र-1 का प्रकाशन होगा। इसके साथ ही, आपत्तियां दर्ज कराने का सिलसिला शुरू हो जाएगा।


तारीखों का कैलेंडर: कब क्या होगा?

आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस चुनावी प्रक्रिया का शेड्यूल इस प्रकार है:

कार्यमहत्वपूर्ण तिथियां
प्रपत्र-1 का प्रारूप प्रकाशन27 अप्रैल 2026
दावा/आपत्ति दर्ज करने की अवधि27 अप्रैल से 11 मई 2026
आपत्तियों का निष्पादन27 अप्रैल से 14 मई 2026
अपील वादों का निष्पादन18 मई से 22 मई 2026
प्रपत्र-1 का अंतिम प्रकाशन25 मई 2026
जिला गजट में प्रकाशन29 मई 2026

सावधान! प्रारूप सूचीही अंतिम नहीं है

राज्य निर्वाचन आयोग ने सोशल मीडिया के माध्यम से सभी मतदाताओं को आगाह किया है कि “प्रारूप मतदाता सूची” केवल एक कच्चा मसौदा है। कई बार लोग इसे ही अंतिम मानकर बैठ जाते हैं, जो कि सबसे बड़ी गलती हो सकती है। आयोग का स्पष्ट निर्देश है कि मतदाता सूची में अपना नाम, वार्ड संख्या और अन्य विवरणों की अनिवार्य रूप से जांच करें ताकि अंतिम प्रकाशन से पहले गलतियों को सुधारा जा सके।

कैसे चेक करें और कहां करें आवेदन?

यदि आपको सूची में कोई त्रुटि मिलती है या नाम दर्ज नहीं है, तो आप इन दो माध्यमों से अपना दावा या आपत्ति दर्ज कर सकते हैं:

  • ऑनलाइन: आप सीधे राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट sec.bihar.gov.in पर जाकर अपनी आपत्ति दर्ज कर सकते हैं।
  • ऑफलाइन: प्रपत्र-1 से संबंधित दावा/आपत्ति के लिए एक लिखित आवेदन अपने संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) या अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) के कार्यालय में जमा कर सकते हैं।
    • नोट: आवेदन जमा करने के बाद पावती रसीद (Acknowledgment Receipt) लेना न भूलें।

प्रकाशन स्थल:

प्रारूप प्रपत्र-1 का प्रकाशन निम्नलिखित स्थानों पर किया जाएगा:

  1. ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति पद हेतु: ग्राम पंचायत कार्यालय एवं प्रखंड कार्यालय।
  2. जिला परिषद सदस्य पद हेतु: अनुमंडल कार्यालय एवं जिला पदाधिकारी कार्यालय।
  3. आयोग की वेबसाइट पर।

चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए सलाह: यह समय आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अपने क्षेत्र की मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की विसंगति को समय रहते दूर करवाएं। 11 मई के बाद कोई भी नया दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा, इसलिए अंतिम तिथि का इंतजार न करें।

जागरूक बनें, अपना अधिकार निभाएं!


किसी भी सहायता के लिए राज्य निर्वाचन आयोग के हेल्पलाइन नंबर 1800 3457 243 पर संपर्क करें।

बिहार में जमीन की खरीद-बिक्री पर ‘ब्रेक’: 11 बड़े शहरों में निर्माण कार्यों पर सरकार की पाबंदी, जानें क्या है सरकार का ‘मास्टर प्लान’

पटना: बिहार सरकार ने राज्य के शहरी विकास को लेकर एक बेहद साहसी और बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई हालिया कैबिनेट बैठक में कुल 22 एजेंडों पर मुहर लगी, जिसमें सबसे चर्चित निर्णय “11 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप” के विकास का रहा। सरकार ने राज्य के 11 प्रमुख शहरों में जमीन की खरीद-बिक्री, हस्तांतरण और नए निर्माण कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

यह निर्णय न केवल प्रॉपर्टी मार्केट में हलचल मचाने वाला है, बल्कि बिहार के भविष्य के शहरीकरण की दिशा भी तय करेगा।

क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?

नगर विकास एवं आवास विभाग के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, राज्य में अनियोजित शहरीकरण (Haphazard Urbanization) को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। ‘सात निश्चय-3’ के विजन को आगे बढ़ाते हुए सरकार का मुख्य उद्देश्य इन 11 शहरों को आधुनिक और व्यवस्थित टाउनशिप के रूप में विकसित करना है।

सरकार के इस कदम के मुख्य लाभ:

  • सुनियोजित शहरीकरण: मास्टर प्लान के तहत शहर का विकास, ताकि गलियां, सड़कें और जल निकासी जैसी समस्याएं न हों।
  • दबाव में कमी: सैटेलाइट टाउनशिप बनने से पुराने शहरों (Existing Cities) पर आबादी का दबाव कम होगा।
  • आर्थिक विकास: नए आर्थिक केंद्रों (Economic Activity Centers) का निर्माण होगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
  • विश्वस्तरीय सुविधाएं: नागरिकों को बेहतर और आधुनिक शहरी सुविधाएं मिल सकेंगी।

किन शहरों पर लगा ताला‘? (सूची और समय-सीमा)

सरकार ने इन शहरों को दो समूहों में बांटकर अलग-अलग डेडलाइन तय की है। इन तिथियों तक इन क्षेत्रों में भूमि विकास या निर्माण कार्य पर प्रतिबंध प्रभावी रहेगा:

चरणशहर (टाउनशिप)डेडलाइन (रोक की अवधि)
प्रथम चरणपटना, सोनपुर, गयाजी, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया, मुंगेर31 मार्च, 2027 तक
द्वितीय चरणमुजफ्फरपुर, छपरा, भागलपुर, सीतामढ़ी (सीतापुरम)30 जून, 2027 तक

आम जनता के लिए क्या हैं मायने?

इस फैसले का सीधा असर रियल एस्टेट सेक्टर और उन लोगों पर पड़ेगा जो इन चिन्हित शहरों के ‘कोर एरिया’ या ‘विशेष क्षेत्र’ में जमीन खरीदने या घर बनाने की योजना बना रहे हैं।

  1. जमीन की रजिस्ट्री/हस्तांतरण पर रोक: चिन्हित टाउनशिप क्षेत्रों के मास्टर प्लान और जोनल प्लान लागू होने तक यहां भूमि हस्तांतरण और खरीद-बिक्री प्रभावित रहेगी।
  2. निर्माण पर पाबंदी: बिना मास्टर प्लान की स्वीकृति के नए भवनों का निर्माण या भूमि विकास के कार्य (जैसे प्लाटिंग या कमर्शियल निर्माण) अब संभव नहीं होंगे।
  3. सावधानी जरूरी: सरकार का स्पष्ट संकेत है कि अब बिहार में बिना योजना (Master Plan) के कोई भी निर्माण नहीं होगा। यदि आप इन क्षेत्रों में निवेश करना चाहते हैं, तो स्थानीय नगर विकास कार्यालय से संपर्क करना उचित होगा।

सरकार का विजन: सात निश्चय-3

यह कवायद सरकार के बहुप्रतीक्षित ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम का हिस्सा है। सरकार चाहती है कि जिस तरह देश के कुछ बड़े राज्यों ने सैटेलाइट टाउनशिप के जरिए शहरों का विस्तार किया है, उसी तर्ज पर बिहार के इन 11 शहरों को विकसित किया जाए। यह प्राइवेट और संस्थागत निवेश को आकर्षित करने के लिए भी एक बड़ी पहल मानी जा रही है।

निष्कर्ष: भले ही यह रोक अस्थायी है, लेकिन यह बिहार के शहरी परिदृश्य को बदलने वाला एक दूरगामी फैसला है। सरकार अब “पहले योजना, फिर निर्माण” की नीति पर काम कर रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए व्यवस्थित और सुविधापूर्ण शहर तैयार किए जा सकें।


(अस्वीकरण: यह खबर सरकारी प्रेस नोट और कैबिनेट के निर्णयों पर आधारित है। अधिक जानकारी के लिए स्थानीय जिला प्रशासन या नगर विकास विभाग की आधिकारिक वेबसाइट देखें।)

बिहार कैबिनेट का महा-फैसला: सोनपुर का ‘काशी कॉरिडोर’ जैसा कायाकल्प और 22 बड़े एजेंडों पर मुहर, सीएम सम्राट चौधरी ने दिया युवाओं और सुरक्षा को बड़ा तोहफा!

पटना, 22 अप्रैल 2026: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आज हुई बिहार कैबिनेट की बैठक राज्य के भविष्य को नई दिशा देने वाली साबित हुई। इस ऐतिहासिक बैठक में कुल 22 महत्वपूर्ण एजेंडों पर सरकार ने अपनी मुहर लगाई है। बैठक के बाद मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि शिक्षा, पर्यटन, बुनियादी ढांचे और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने खजाना खोल दिया है।

कैबिनेट के इन फैसलों से न केवल बिहार की तस्वीर बदलेगी, बल्कि आम जनता के लिए सरकारी सेवाओं की सुलभता भी बढ़ेगी।

1. पर्यटन: धार्मिक स्थलों का कायाकल्प

  • सोनपुर कॉरिडोर: काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर सोनपुर के बाबा हरिहर नाथ मंदिर का समग्र विकास होगा। इसके लिए ₹680 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।
  • तारापुर (मुंगेर): तारापुर में धार्मिक और पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए 15 एकड़ से अधिक भूमि पर्यटन विभाग को निशुल्क सौंपी गई है। यहाँ ईशा फाउंडेशन द्वारा सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

2. सुरक्षा और फॉरेंसिक व्यवस्था: बिहार बनेगा स्मार्ट

  • राष्ट्रीय फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी: पटना के पुनपुन में इस यूनिवर्सिटी और केंद्रीय फॉरेंसिक लैब के लिए 50 एकड़ भूमि और ₹287.16 करोड़ से अधिक की स्वीकृति दी गई है।
  • डायल 112 का स्थाई ठिकाना: पटना के राजीव नगर में डायल 112 (ERSS) के लिए 7 मंजिला (2 बेसमेंट सहित) अत्याधुनिक भवन बनेगा। इसके लिए ₹172.80 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
  • पुलिस बल का आधुनिकीकरण: महिला पुलिसकर्मियों के लिए 1500 स्कूटी और पुलिस बल के लिए 3200 मोटरसाइकिलें खरीदी जाएंगी। इसके लिए ₹66.75 करोड़ मंजूर हुए हैं।
  • अग्नि सुरक्षा: बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा हेतु 62 मीटर ऊंचा हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म (सीढ़ी) खरीदने के लिए ₹18 करोड़ की मंजूरी मिली है।
बिहार कैबिनेट की बैठक  के उपरान्‍त मिडिया को फैसले की जानकारी देते हुए मंत्रिमंडल सचिवालय के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी

3. युवाओं, शिक्षा और तकनीकी विकास

  • आईटीआई का कायाकल्प: ‘पीएम सेतु’ के तहत 75 आईटीआई संस्थानों को अत्याधुनिक कौशल प्रशिक्षण केंद्रों में बदला जाएगा। इस पर कुल ₹3615 करोड़ खर्च होंगे, जिसमें राज्य का हिस्सा ₹1192.95 करोड़ है।
  • IIT पटना को बड़ी सौगात: आईआईटी पटना रिसर्च पार्क की स्थापना हेतु ₹305 करोड़ और इसके इनक्यूबेशन सेंटर फेज-2 के लिए ₹39.01 करोड़ की स्वीकृति दी गई।
  • NIFT की स्थापना: बेगूसराय के बरौनी में ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी’ के लिए 20 एकड़ जमीन उद्योग विभाग को निशुल्क हस्तांतरित की गई है।
  • विधि शिक्षा: चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (CNLU), पटना के विस्तार के लिए 7 एकड़ भूमि निशुल्क सौंपी गई है।

4. नगर विकास और नागरिक सुविधाएं

  • सैटेलाइट टाउनशिप: राज्य में 11 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना को हरी झंडी दी गई है।
  • वरिष्ठ नागरिकों को सम्मान: 80 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को घर बैठे निबंधन (Registration) की सुविधा मिलेगी। बायोमेट्रिक टीम उनके घर जाकर यह कार्य संपन्न करेगी।
  • सहयोग हेल्पलाइन: राज्य में ‘सहयोग हेल्पलाइन’ के लिए ₹72.76 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।

5. आपदा प्रबंधन और अन्य प्रशासनिक निर्णय

  • सड़क दुर्घटना मुआवजा: सामूहिक सड़क दुर्घटनाओं को राज्य की आपदा श्रेणी में शामिल किया गया है। अब मृतकों के परिजनों और घायलों को ‘राज्य आपदा रिस्पॉन्स फंड’ से तुरंत अनुग्रह राशि मिलेगी।
  • बीता मुआवजा: 15 सितंबर 2021 से 31 मार्च 2022 के बीच सामूहिक सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को भी अब नियमानुसार अनुदान दिया जाएगा।
  • कृषि: शहरी क्षेत्रों से बीज गुणन प्रक्षेत्रों को ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानांतरित करने की नीति को मंजूरी।
  • जल संसाधन: * बानसागर समझौते के तहत जल आवंटन के प्रारूप को स्वीकृति।
    • कैमूर में ‘जमानिया से ककरैत गंगाजल सिंचाई योजना’ के लिए उत्तर प्रदेश में जमीन खरीद की मंजूरी।
  • हवाई अड्डा विकास: सोनपुर और अजगैबीनाथ धाम में नए हवाई अड्डों के लिए डीपीआर तैयार करने हेतु मेसर्स राईट्स लिमिटेड को कार्य सौंपा गया (शुल्क ₹5.06 करोड़)।
  • जमीन हस्तांतरण: * दरभंगा हवाई अड्डा के स्थायी सिविल एन्क्लेव के लिए 1.35 एकड़ भूमि निशुल्क हस्तांतरण।
    • राष्ट्रीय उच्च पथ परियोजनाओं हेतु वन विभाग को 873.6 एकड़ के बदले भूमि उपलब्ध कराने की स्वीकृति।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में आज लिए गए ये 22 फैसले बिहार के चहुंमुखी विकास का ‘ब्लूप्रिंट’ हैं। चाहे वह फॉरेंसिक यूनिवर्सिटी हो, सोनपुर कॉरिडोर हो या युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण, सरकार ने हर वर्ग को साधते हुए विकास को जमीन पर उतारने का स्पष्ट संदेश दिया है।

ऑपरेशन रिश्वतखोर: मधुबनी के बेनीपट्टी अंचल कार्यालय में निगरानी का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, 10 हजार घूस लेते लिपिक और दलाल धराये

आम आदमी की मजबूरी का फायदा उठा रहे थे भ्रष्ट तंत्र के ये प्यादे; सतर्कता विभाग की कार्रवाई से जिले के अधिकारियों में मचा हड़कंप

पटना/मधुबनी: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को मधुबनी जिले में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। बेनीपट्टी अंचल कार्यालय में तैनात लिपिक और उनके निजी दलाल को 10,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई ने सरकारी कार्यालयों में पनप रहे ‘दलाली तंत्र’ की कलाई खोल कर रख दी है।

रिश्वत का ‘खेल’ हुआ बेनकाब: मधुबनी के बेनीपट्टी अंचल कार्यालय में 10,000 रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार लिपिक साकेत कुमार सिंह और बिचौलिया परमानंद झा, जिन्हें निगरानी ब्यूरो की टीम ने दबोचा है।

क्या था पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला भूमि विवाद और अतिक्रमण से जुड़ा है। परिवादी रविंद्र यादव, जो दहिला (अरेर, मधुबनी) के निवासी हैं, पिछले काफी समय से अपनी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे। सरकारी नियमानुसार, अतिक्रमण हटाना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन बेनीपट्टी अंचल कार्यालय में बैठे लिपिक साकेत कुमार सिंह ने इसे अपनी कमाई का जरिया बना लिया था।

पीड़ित रविंद्र यादव का आरोप है कि लिपिक साकेत कुमार सिंह ने इस काम को अंजाम तक पहुँचाने के एवज में रिश्वत की मांग की थी। इसमें उनका साथ दे रहा था बिचौलिया परमानंद झा, जो सरकारी और आम जनता के बीच ‘सेटिंग’ करने का काम करता था।

जाल बिछाकर की गई कार्रवाई

परेशान होकर पीड़ित ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना का दरवाजा खटखटाया। ब्यूरो ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पहले इसका सत्यापन (Verification) कराया। सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि हुई। इसके बाद, निगरानी ब्यूरो के पुलिस उपाधीक्षक (DSP) समीर चंद्र झा के नेतृत्व में एक विशेष ‘धावा दल’ (Raid Team) का गठन किया गया।

22 अप्रैल की सुबह, जैसे ही लिपिक साकेत कुमार सिंह और दलाल परमानंद झा ने 10,000 रुपये की घूस की राशि ली, निगरानी की टीम ने उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया। कार्यालय परिसर में उस वक्त मौजूद अन्य कर्मी और लोग यह सब देखकर दंग रह गए।

मुजफ्फरपुर विशेष अदालत में होगी पेशी

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने इस मामले में कांड संख्या- 048/26 दर्ज किया है। पूछताछ की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, दोनों आरोपियों को मुजफ्फरपुर स्थित विशेष निगरानी न्यायालय (Special Vigilance Court) में पेश किया जाएगा। इस गिरफ्तारी के बाद से मधुबनी जिले के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा हुआ है।

भ्रष्टाचार पर चोट, जनता में राहत

यह गिरफ्तारी एक बार फिर यह संदेश देती है कि सरकारी कार्यालयों में काम के बदले ‘सुविधा शुल्क’ देने की संस्कृति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निगरानी विभाग की इस मुस्तैदी से उन आम लोगों को उम्मीद बंधी है जो दलालों और भ्रष्ट बाबुओं के कारण सालों से सरकारी दफ्तरों में धक्के खा रहे हैं।


हरे भरे पौधे ही हमारी ताकत है : MDDM कॉलेज की छात्राओं ने पोस्टर और वृक्षारोपण से छेड़ी जागरूकता की जंग

मुजफ्फरपुर: धरती की घटती उम्र और बढ़ते तापमान के दौर में मुजफ्फरपुर के महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय (MDDM College) से एक सशक्त संदेश निकलकर सामने आया है। बुधवार 22 अप्रैल 2026 को जंतु विज्ञान विभाग में ‘पृथ्वी दिवस’ (Earth Day) के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में छात्राओं ने न केवल अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की कमान खुद अपने हाथों में थाम ली।

“हमारी शक्ति, हमारी पृथ्वी” थीम पर छात्राओं द्वारा बनाई गई पोस्टर प्रदर्शनी, जो पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही है।

हमारी शक्ति, हमारी पृथ्वी” का लिया संकल्प कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय का पूरा परिसर पर्यावरण के नारों से गूंज उठा। छात्राओं ने पोस्टर प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर यह स्पष्ट कर दिया कि “हरे भरे पौधे ही हमारी ताकत है।” कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्या डॉ. (प्रो.) अलका जायसवाल ने छात्राओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि, “पृथ्वी हम सबकी मां है और इसे बचाने की जिम्मेदारी हम सभी की है। विकास की दौड़ में हमें प्रकृति को भूलना नहीं चाहिए।”

विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम की संयोजक डॉ. अर्चना गुप्ता ने बेहद संजीदगी के साथ कहा कि, “पृथ्वी की रक्षा ही वास्तव में हमारी अपनी रक्षा है।” उन्होंने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि आज लगाए गए पौधे ही कल की असली पूंजी हैं।

MDDM कॉलेज परिसर में वृक्षारोपण अभियान के दौरान प्राचार्या डॉ. (प्रो.) अलका जायसवाल और अन्य शिक्षकगण के साथ उत्साह दिखाती छात्राएं।

“पृथ्वी दिवस के उपलक्ष्य में एमडीडीएम कॉलेज परिसर में आयोजित वृक्षारोपण अभियान के दौरान एक अत्यंत प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला। कार्यक्रम में प्राचार्या डॉ. (प्रो.) अलका जायसवाल के कुशल नेतृत्व में अन्य शिक्षकगण और छात्राओं में अभूतपूर्व उत्साह नजर आया। सभी ने मिलकर न केवल परिसर में नए पौधे रोपे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता को भी दर्शाया। यह दृश्य न केवल धरती को हरा-भरा बनाने के संकल्प को प्रदर्शित करता है, बल्कि कॉलेज के सामूहिक प्रयास और पर्यावरण के प्रति युवा पीढ़ी की जागरूकता का भी प्रमाण है।”

कार्यक्रम के दौरान जंतु विज्ञान विभाग की सभागार में मौजूद विभाग के शिक्षक और छात्राएं।

छात्राओं के जोश ने भरा रंग :  प्रतियोगिता और वृक्षारोपण के दौरान पीजी और यूजी की छात्राओं का जोश देखते ही बन रहा था। उन्होंने पोस्टर के माध्यम से पर्यावरण प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग और वृक्षारोपण के महत्व को बेहद प्रभावी तरीके से पेश किया। इस विशेष अवसर पर डॉ. देवश्रुति, डॉ. वर्षा, डॉ. स्मिता समेत महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, शिक्षिकाएं और शिक्षकेतर कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. पल्लवी कुमारी ने किया।


ताज़पुर में भाकपा-माले का ‘शक्ति प्रदर्शन’: 58वें स्थापना दिवस पर बुल्डोजर राजनीति, महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ फूंक दिया बिगुल

ताजपुर (समस्तीपुर): भाकपा-माले के 58वें स्थापना दिवस के अवसर पर बुधवार को ताजपुर में पार्टी कार्यकर्ताओं ने न केवल अपनी ताकत दिखाई, बल्कि मौजूदा राजनीतिक हालातों पर तीखा हमला भी बोला। स्थानीय कमिटी के बैनर तले आयोजित इस भव्य समारोह में वक्ताओं ने एक स्वर में देश की वर्तमान ‘जनविरोधी’ नीतियों के विरुद्ध निर्णायक आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया।

ताजपुर में भाकपा-माले के 58वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल कार्यकर्ता। इस दौरान उन्होंने पार्टी विस्तार और जनसंघर्ष को और अधिक तेज करने का संकल्प लिया।

शहीदों को नमन, संघर्ष का संकल्प कार्यक्रम की शुरुआत पार्टी के झंडोत्तोलन और पार्टी के उन तमाम शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई, जिन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए। कार्यकर्ताओं ने पार्टी के संस्थापक नेताओं की विचारधारा को दोहराते हुए कहा कि आज देश जिस मोड़ पर खड़ा है, वहां कम्युनिस्टों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

बुल्डोजर और महंगाई पर बरसे नेता मुख्य वक्ता और भाकपा-माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि, “आज देश में जो स्थितियाँ बनी हैं, वे अत्यंत चिंताजनक हैं। आम जनता महंगाई की मार झेल रही है, युवा बेरोजगारी से त्रस्त हैं और दूसरी ओर बुल्डोजर की राजनीति के जरिए लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचला जा रहा है।” उन्होंने दो टूक कहा कि धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य के सही मायनों में निर्माण के लिए अब हर संभव प्रतिरोध विकसित करना ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे पार्टी की विचारधारा को जनता के बीच लेकर जाएं और जनविरोधी नीतियों का मुखर विरोध करें।

गांव-गांव तक फैलेगा आंदोलन पार्टी ने आगामी रणनीति पर चर्चा करते हुए निर्णय लिया कि अब गांव-गांव में जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। नए सदस्यों को पार्टी से जोड़कर संगठन को अभेद्य बनाया जाएगा। सभा में यह निर्णय लिया गया कि जनसमस्याओं को लेकर स्थानीय स्तर पर आंदोलन और तेज किया जाएगा, ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके।

दरभंगा सम्मेलन की तैयारी का शंखनाद कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित कर आगामी 16-18 मई को दरभंगा में होने वाले ‘भाकपा माले राज्य सम्मेलन’ की तैयारियों पर चर्चा की गई। इस सम्मेलन को ऐतिहासिक बनाने के लिए जी-बी बैठकें करने, बड़े पैमाने पर कोष संग्रह करने और जन-जन तक पार्टी की नीतियों को प्रचारित-प्रसारित करने की जिम्मेदारी कार्यकर्ताओं को सौंपी गई।

प्रमुख उपस्थिति कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रखंड कमिटी सदस्य ब्रहमदेव प्रसाद सिंह ने की। इस अवसर पर प्रखंड कमिटी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की भारी मौजूदगी रही, जिनमें शंकर महतो, मोतीपुर लाल सिंह, कैलाश सिंह, रंधीर कुमार, वीरेंद्र सिंह, विणुदेव राय, महेश्वर शर्मा, रामसागर राय, हीरालाल सिंह, संजय शर्मा, दिनेश साह सहित दर्जनों कार्यकर्ता शामिल रहे। अंत में गगनभेदी नारों के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।