बड़ी खबर: नए डिग्री कॉलेजों में तबादला चाहने वाले प्रिंसिपलों और बर्सरों को लगा तगड़ा झटका, राजभवन ने कड़ाई से लगाई रोक!

बिहार के 211 नए डिग्री कॉलेजों में नहीं होगा कोई ट्रांसफर, एडिशनल चीफ सेक्रेटरी दीपक कुमार सिंह का सख्त आदेश

पटना: बिहार के नव-निर्मित डिग्री कॉलेजों में मलाईदार पोस्टिंग या पसंदीदा जगहों पर तबादले की उम्मीद लगाए बैठे प्रिंसिपलों और बर्सरों को राजभवन ने बड़ा झटका दिया है । राजभवन सचिवालय से जारी एक बेहद सख्त आदेश के अनुसार, नए स्थापित किए गए 211 डिग्री कॉलेजों में हाल ही में तैनात किए गए प्रिंसिपलों और बर्सरों के तबादले या स्थान परिवर्तन के किसी भी आवेदन (रिप्रेजेंटेशन) पर किसी भी स्तर पर विचार नहीं किया जाएगा । यह रोक अगले आदेश तक पूरी तरह से प्रभावी रहेगी ।

राजभवन बिहार की ओर से एडिशनल चीफ सेक्रेटरी दीपक कुमार सिंह के हस्ताक्षरसे  वाइस-चांसलरों को जारी किया गया आधिकारिक पत्र (लेटर नंबर 78/एसीएस), जिसमें तबादलों पर पूर्ण रोक लगाने का आदेश दिया गया है ।

1 जुलाई से शुरू हो रहा है सत्र, लापरवाही बर्दाश्त नहीं

राज्यपाल के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी दीपक कुमार सिंह ने बिहार के सभी विश्वविद्यालयों के वाइस-चांसलरों को पत्र लिखकर इस फैसले से अवगत कराया है । पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इन 211 नए डिग्री कॉलेजों का शैक्षणिक सत्र 01 जुलाई 2026 से शुरू होने जा रहा है । इस तय समय-सीमा के भीतर सत्र को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता और संस्थागत देखभाल की अत्यंत आवश्यकता है ।

तबादले की अर्जी लगाने पर जताई गहरी नाराजगी

दीपक कुमार सिंह ने तबादले के लिए पैरवी और अर्जी लगाने वाले अधिकारियों के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है । उन्होंने पत्र में कहा कि यह वास्तव में बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जैसे ही इन कॉलेजों में पोस्टिंग की गई, वैसे ही अधिकारियों द्वारा तबादले या स्थान बदलने के लिए आवेदन मिलने शुरू हो गए । राजभवन ने इसे अनुशासन और समय-सीमा के उल्लंघन के रूप में देखा है ।

सभी वाइस-चांसलरों को सख्त निर्देश

राजभवन ने सभी विश्वविद्यालयों के वाइस-चांसलरों को यह निर्देश दिया है कि वे अपने अंतर्गत आने वाले कॉलेजों के इन नवनियुक्त प्रिंसिपलों और बर्सरों को यह कड़ा संदेश तुरंत कम्युनिकेट कर दें ताकि किसी भी प्रकार का भ्रम न रहे ।

इस आदेश की प्रतिलिपियां (कॉपी) आवश्यक जानकारी और आगे की कार्रवाई के लिए हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी, हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट के डायरेक्टर और चांसलर के ओएसडी को भी भेज दी गई हैं । इस फैसले से यह साफ हो गया है कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की ढिलाई या पैरवी को राजभवन अब कतई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

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