खेतों में डिजिटल क्रांति! खाद के लिए नहीं लगानी होगी लंबी कतारें, वैशाली में लागू हुई देश की सबसे अनूठी क्यूआर कोड व्यवस्था!

बिहार सरकार के कृषि विभाग का पाइलट प्रोजेक्‍ट : एफएसएएस पोर्टल से घर बैठे बुक होगी खाद, कालाबाजारी पर लगेगा पूर्ण विराम

वैशाली, 15 जून: बिहार के कृषि क्षेत्र में आज एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत हो गई है। वैशाली जिले में 15 जून 2026 से क्यूआर कोड आधारित ऑनलाइन उर्वरक बुकिंग एवं वितरण प्रणाली को पूरी तरह से लागू कर दिया गया है। कृषि विभाग, बिहार सरकार की इस अभिनव और अति-आधुनिक पहल से अब किसानों को खाद की किल्लत और दुकानों पर लगने वाली लंबी-लंबी कतारों से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी। इस नई पारदर्शी व्यवस्था के तहत किसान अब अपने घर पर आराम से बैठकर ही एफएसएएस (फर्टिलाइजर सेल्स एप्लीकेशन System) के माध्यम से अपनी जरूरत के अनुसार उर्वरक की ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे और एक साधारण क्यूआर कोड दिखाकर अपने नजदीकी रिटेलर से बेहद सुगमता से खाद प्राप्त कर सकेंगे।

कृषि विभाग, बिहार सरकार द्वारा जारी किसानों के लिए 4-चरण वाली आसान ऑनलाइन उर्वरक बुकिंग मार्गदर्शिका। इसमें आधार सत्यापन, फसल चयन, रिटेलर मैपिंग और क्यूआर कोड/टोकन जनरेशन के साथ T+2 समय-सारणी के नियमों को विस्तार से समझाया गया है।

इस अत्यधिक महत्वाकांक्षी पायलट परियोजना के लिए पूरे बिहार में केवल दो जिलों का चयन किया गया है, जिसमें वैशाली और शेखपुरा शामिल हैं। वैशाली जिले में इस महा-अभियान की कमान खुद जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने संभाली है। वर्षा सिंह के कुशल नेतृत्व में पूरे जिले के ग्रामीण इलाकों में किसानों को इस डिजिटल और आधुनिक व्यवस्था के प्रति जागरूक करने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस प्रणाली के लागू होने से खाद के वितरण में शत-प्रतिशत पारदर्शिता आएगी, समय पर उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और सबसे बड़ी बात यह है कि बिचौलियों तथा कालाबाजारी करने वालों का पूरी तरह से सफाया हो जाएगा। अब किसानों को उनकी फसल और भूमि की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरक का आवंटन किया जाएगा।

उर्वरक डीलरों और रिटेलरों के लिए तैयार किया गया नया पीओएस (पॉइंट ऑफ सेल) मशीन प्रक्रिया चार्ट, जिसके माध्यम से क्यूआर कोड को स्कैन कर और बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा कर किसानों को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल रसीद के साथ खाद का वितरण सुनिश्चित किया जाएगा।

बुकिंग की आसान 4-चरण प्रक्रिया:

कृषि विभाग द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस नई व्यवस्था को बेहद सरल और किसान-अनुकूल बनाया गया है। इसमें 4 आसान चरणों की प्रक्रिया निर्धारित की गई है:

  1. आधार से सत्यापन: पहले चरण में किसान को अपने आधार कार्ड के माध्यम से ओटीपी या ई-केवाईसी द्वारा सत्यापन करना होगा।
  2. फसल और खाद का चयन: दूसरे चरण में किसान को अपनी फसल (जैसे धान, गेहूं, मक्का या गन्ना) का चयन करना होगा और फिर भूमि के अनुसार उचित खाद जैसे यूरिया (46 प्रतिशत नाइट्रोजन) या डीएपी (18-46-0 एनपीके) की मात्रा चुननी होगी।
  3. रिटेलर का चयन: तीसरे चरण में किसान को अपने क्षेत्र के उन रिटेलरों या कृषि सेवा केंद्रों की सूची दिखाई देगी जहां स्टॉक उपलब्ध है, जिसमें से वे अपनी पसंद के रिटेलर का चयन कर सकते हैं।
  4. क्यूआर कोड और खाद प्राप्ति: चौथे और अंतिम चरण में सिस्टम द्वारा एक विशिष्ट क्यूआर कोड और टोकन नंबर जनरेट किया जाएगा, जिसे दिखाकर किसान रिटेलर के पास जाकर अपनी खाद प्राप्त कर सकते हैं।
वैशाली जिला मुख्यालय में डिजिटल उर्वरक वितरण प्रणाली की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक करतीं जिलाधिकारी वर्षा सिंह। वर्षा सिंह के नेतृत्व में 15 जून 2026 से जिले में पायलट प्रोजेक्ट के तहत क्यूआर कोड आधारित ऑनलाइन खाद बुकिंग व्यवस्था को पूरी तरह अनिवार्य और प्रभावी बना दिया गया है।

नया पीओएस सिस्टम और खरीद समय-सारणी (T+2 नियम):

रिटेलरों के लिए भी अब नया पीओएस (पॉइंट ऑफ सेल) मशीन प्रोसेस लागू किया गया है। रिटेलर मशीन में लॉगिन, क्यूआर कोड स्कैन, आधार सत्यापन (बायोमेट्रिक या ओटीपी), स्टॉक ट्रैकिंग, उत्पाद चयन और बिक्री की पुष्टि के बाद सीधे रसीद प्रिंट होगी तथा आधार-लिंक मोबाइल नंबर पर एसएमएस रसीद भेजी जाएगी।

इस व्यवस्था में T+2 दिनों की समय-सीमा तय की गई है। बुकिंग के दिन (T0) खाद खरीदने की अनुमति नहीं होगी। बुकिंग के अगले दिन (T1) और उसके अगले दिन (T2) ही खाद खरीदी जा सकती है। यदि किसान ने बुकिंग के 2 दिनों के भीतर खाद नहीं उठाई, तो बुकिंग स्वतः रद्द हो जाएगी।

यह सुविधा व्यक्तिगत किसान, परिवार के प्रतिनिधि या किसी भी जरूरतमंद किसान के लिए पारदर्शी रूप से उपलब्ध है। कृषि विभाग का मुख्य उद्देश्य है: खाद हर किसान के लिए है – गति, सरलता, पारदर्शिता और निष्पक्षता।” स्मार्ट और डिजिटल खेती की दिशा में यह बिहार सरकार का अब तक का सबसे बड़ा और साहसिक कदम माना जा रहा है।

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