आधी दुनिया, एक फैसला: इंदौर डिक्लेरेशन से बदलेगा वैश्विक कृषि का भूगोल, बीज विरासत और छोटे किसानों को मिला ‘ग्लोबल‘ सुरक्षा कवच!
विशेष रिपोर्ट (एस. एस. कुमार ‘पंकज’) : वैश्विक अशांति, भू-राजनीतिक तनाव, ईरान-इराक क्षेत्र में बढ़ते सैन्य संकट और अल नीनो के खतरनाक साये के बीच भारत की पावन सरजमीं ने एक बार फिर दुनिया को नई राह दिखाई है। भारत के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में ब्रिक्स (BRICS) समूह के कृषि मंत्रियों की 16वीं बैठक किसी ब्लॉकबस्टर घटनाक्रम से कम नहीं रही। इस महा-मंथन के समापन पर जो ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ (संयुक्त घोषणा पत्र) सर्वसम्मति से पारित हुआ है, उसने न केवल वैश्विक कृषि का भूगोल बदल दिया है, बल्कि दुनिया की आधी आबादी के पेट (खाद्य सुरक्षा) और अन्नदाता की जेब (आजीविका) को सुरक्षित करने के लिए अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक ढांचा तैयार कर दिया है।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पूरी दुनिया खाद्यान्न संकट, उर्वरकों की आसमान छूती कीमतों और जलवायु परिवर्तन की मार से कराह रही है। इस वैश्विक हाहाकार के बीच, ब्रिक्स देशों—जो दुनिया की 50% आबादी, 42% कृषि भू-भाग, 68% कृषि जोत और 42% वैश्विक खाद्यान्न उत्पादन का प्रतिनिधित्व करते हैं—ने भारत के नेतृत्व में एकजुट होकर एक ऐसा चक्रव्यूह रचा है, जो सीधे तौर पर छोटे किसानों और पारंपरिक कृषि व्यवस्था को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के एकाधिकार से बचाएगा।
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बेहद आक्रामक और विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस महा-सफलता का ऐलान किया। मंच पर उनके साथ कृषि और किसान कल्याण विभाग के दोनों सहयोगी मंत्री रामनाथ ठाकुर, भागीरथ चौधरी, कृषि सचिव अतीश चंद्रा, आईसीआर के महानिदेशक एवं सचिव डेयर एम एल जाट सहित वरिष्ठ नीति निर्माता प्रमोद और अजीत मौजूद थे। शिवराज सिंह चौहान ने साफ शब्दों में कहा कि जब चारों तरफ अनिश्चितता का माहौल है, तब भारत की अध्यक्षता में हुए इस इंदौर डिक्लेरेशन के परिणाम पूरी दुनिया को एक नई उम्मीद और अटूट विश्वास का संदेश देंगे।
इंदौर डिक्लेरेशन का महा-स्तंभ: केंद्र में सिर्फ और सिर्फ किसान
इस जॉइंट डिक्लेरेशन की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) यह है कि इसके केंद्र में किसी कॉर्पोरेट एजेंडे को जगह नहीं दी गई है, बल्कि इसका केंद्र बिंदु शुद्ध रूप से ‘किसान’ है। सदस्य देशों ने यह माना है कि जब तक खेत को संभालने वाले हाथ आर्थिक रूप से सुदृढ़ नहीं होंगे, तब तक वैश्विक खाद्य सुरक्षा की बात करना बेमानी है।
इस बैठक में सदस्य देशों और सहयोगी देशों के लगभग 60 विदेशी प्रतिनिधियों सहित 100 शीर्ष रणनीतिकारों ने भाग लिया। इस महा-बैठक में मुख्य रूप से चार प्राथमिकताओं पर रणनीतिक मुहर लगाई गई:

- वैश्विक खाद्य सुरक्षा और पोषण युक्त आहार सुनिश्चित करना।
- कृषि व्यापार में पारदर्शिता और आपसी सहयोग को आक्रामक बढ़ावा देना।
- जलवायु परिवर्तन के खतरों के बीच ‘रीजेनरेटिव फार्मिंग‘ (पुनर्योजी खेती) को मुख्यधारा में लाना।
- कृषि तंत्र में आधुनिक नवाचार, एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और युवाओं की भागीदारी को संस्थागत रूप देना।
डिजिटल और प्राकृतिक खेती का ग्लोबल हब बना भारत: आईआईटी दिल्ली और मोदीपुरम को कमान
भारत के प्राचीन पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीकी कौशल का लोहा अब पूरी दुनिया ने मान लिया है। ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ के तहत दो ऐसे विशाल और अभूतपूर्व नेटवर्कों की स्थापना का खाका तैयार किया गया है, जो आने वाले समय में वैश्विक कृषि की दिशा तय करेंगे:
1. ब्रिक्स नेटवर्क ऑफ सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस ऑन एग्रोइकोलॉजी एंड रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर
रसायनों और फर्टिलाइजर के अंधाधुंध इस्तेमाल से दुनिया भर की भूमि बंजर हो रही है। इस बंजर धरती को पुनर्जीवित करने के लिए यह नेटवर्क प्राकृतिक, जैविक और जलवायु सहिष्णु कृषि को बढ़ावा देगा। भारत के लिए यह अत्यंत गौरव का विषय है कि इस पूरे नेटवर्क के तहत ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन नेचुरल फार्मिंग’ के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की जिम्मेदारी भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मिंग सिस्टम रिसर्च), मोदीपुरम को सौंपी गई है। यह संस्थान अब संयुक्त अनुसंधान, क्षमता निर्माण और एक देश से दूसरे देश में प्राकृतिक खेती की सर्वोत्तम प्रथाओं को ट्रांसफर करने का वैश्विक हेडक्वार्टर बनेगा।

2. ब्रिक्स नेटवर्क ऑन डिजिटल एग्रीकल्चर
कृषि को चौथी औद्योगिक क्रांति से जोड़ने के लिए इस नेटवर्क का गठन किया गया है। यह नेटवर्क एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी (जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा आधारित कृषि समाधानों के क्षेत्र में क्रांतिकारी काम करेगा। इस महा-नेटवर्क के समन्वय (कोऑर्डिनेशन) की पूरी जवाबदारी आईआईटी दिल्ली को मिली है। यह संस्थान आधुनिक अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और एग्रीकल्चर इनोवेशन के बीच एक ऐसा सशक्त सेतु स्थापित करेगा, जो वैश्विक स्तर पर होने वाले बड़े अनुसंधानों को सीधे छोटे किसानों के मोबाइल और खेतों तक पहुंचाएगा।
देशी बीजों पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों का कब्जा रोकने के लिए ‘ग्लोबल फोरम‘ का गठन
इस सम्मेलन का सबसे संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसला पारंपरिक बीज विरासत और जैव-विविधता की सुरक्षा से जुड़ा है। भारत जैसे देशों में हजारों सालों से खेती की जा रही है और हमारे पास पारंपरिक बीजों का एक असीमित खजाना है, जो आज बहुराष्ट्रीय बीजों के बाजारवाद के कारण विलुप्त होने की कगार पर है।
इसे रोकने के लिए ब्रिक्स देशों ने ‘Global Forum on Farmers’ Rights in Seed Systems’ (सीड सिस्टम्स में किसानों के अधिकारों पर वैश्विक मंच) की स्थापना पर सर्वसम्मति से मुहर लगा दी है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बेहद गंभीरता से कहा कि नई किस्मों के बीजों की जरूरत तो है, लेकिन हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत और जैव-विविधता के प्रतीक देसी बीजों को हर हाल में बचाना होगा। ऐसा न हो कि भविष्य में हमारे पास ‘शरबती’ गेहूं जैसी महान किस्में बचे ही ना। यह फोरम देसी बीजों की विविधता बनाए रखने, किसानों के पारंपरिक ज्ञान को सुरक्षित रखने और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ फसलों को प्रतिरोधी बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।
इसके साथ ही, ‘BRICS Agrin’ (एग्रो इनपुट जेनेटिक रिसोर्सेज एंड Information Network) की स्थापना की गई है। यह नेटवर्क सदस्य देशों के बीच कृषि आदानों, बीजों और आनुवंशिक संसाधनों के क्षेत्र में सूचनाओं का आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और तकनीकी साझेदारी को सुदृढ़ करेगा।

लैब से लैंड का फॉर्मूला: ब्राजील से इंदौर तक का सफर
अनुसंधान अक्सर प्रयोगशालाओं (लैब) में बंद रह जाते हैं और उन्हें खेतों (लैंड) तक पहुंचने में सालों लग जाते हैं। इस दूरी को मिटाने के लिए ब्राजील में बने ‘ब्रिक्स एग्रीकल्चरल रिसर्च प्लेटफॉर्म’ को और अधिक सुदृढ़ करते हुए उसे एक सशक्त ‘Knowledge to Action Hub’ के रूप में विकसित करने पर सहमति बनी है। इसके तहत कोई भी नई कृषि तकनीक या नवाचार किसी एक देश या कुछ अमीर कॉर्पोरेट्स के पास सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसका तेजी से प्रसार कर व्यावहारिक समाधान सीधे किसानों को दिए जाएंगे।
कटाई से लेकर बाजार तक जाने के बीच होने वाले ‘फूड लॉस’ (खाद्य हानि) और खाद्यान्न की बर्बादी को रोकने के लिए भी कड़े कदम उठाए गए हैं। खाद्यान्न की बर्बादी न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाती है, बल्कि इसके सड़ने से भारी मात्रा में कार्बन गैसों का उत्सर्जन होता है जो पर्यावरण को तबाह कर रहा है। ब्रिक्स देश अब इस बर्बादी को शून्य पर लाने के लिए संयुक्त तकनीकी मिशन चलाएंगे।
आर्थिक युद्ध के बीच ‘ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज‘ और पारदर्शी व्यापार की नींव
वैश्विक व्यापार में जारी खींचतान और प्रतिबंधों की राजनीति के बीच ब्रिक्स समूह ने एक निष्पक्ष, समतामूलक, समावेशी और पारदर्शी बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। व्यापार को सरल बनाने, कस्टम की अड़चनों को दूर करने और एक-दूसरे के बाजारों तक आसान पहुंच बनाने के लिए सदस्य देशों के बीच द्विपक्षीय (वन-टू-वन) बैठकें हुईं।
इसी क्रम में, भारत द्वारा आयोजित विशेष संवाद ने ‘ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज‘ (अनाज विनिमय) की पहल पर विचार-विमर्श को एक नई और निर्णायक गति दी है। यह एक्सचेंज आने वाले समय में डॉलर के प्रभुत्व और पश्चिमी देशों के बाजार नियंत्रण को सीधी चुनौती देने की क्षमता रखता है। इसके अलावा, दक्षिण-दक्षिण सहयोग, तकनीकी साझेदारी, कौशल विकास और कृषि क्षेत्र में अनुभवों के आदान-प्रदान को इस डिक्लेरेशन में स्पष्ट रूप से परिलक्षित किया गया है।

पशुधन प्रबंधन, मत्स्य पालन और अल नीनो का रक्षा कवच
जलवायु परिवर्तन के कारण जब प्रशांत महासागर में ‘अल नीनो’ का खतरा मंडरा रहा है और एशिया-पैसिफिक देशों की फसलें सूखने की कगार पर हैं, तब इंदौर बैठक में इससे निपटने के लिए एक संयुक्त आपदा प्रबंधन प्रणाली और सूचना तंत्र विकसित करने पर सहमति बनी है।
इसके साथ ही, पशुधन प्रबंधन के क्षेत्र में नए टीकों का विकास, संक्रामक बीमारियों से मुकाबले की तैयारी और पशुओं के लिए उन्नत चारे (फीड) की व्यवस्था पर तकनीकी सहयोग बढ़ाया जाएगा। एडवांस्ड फिशरीज और एक्वा कल्चर डेवलपमेंट (मत्स्य पालन और झींगा पालन) के क्षेत्र में भी आधुनिक तकनीकों को साझा करने की प्रतिबद्धता जताई गई है।
खाद की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर भारत सरकार का महा-ऐलान
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब एक पत्रकार ने यूक्रेन-रूस संकट और ईरान-इराक क्षेत्र के तनाव के कारण सल्फ्यूरिक एसिड, पेस्टिसाइड और फर्टिलाइजर की डेढ़ से दो गुना बढ़ती कीमतों और किसानों की बढ़ती लागत पर सवाल उठाया, तो कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बेहद कड़ा और लोक-कल्याणकारी रुख अपनाया।
उन्होंने देश के करोड़ों किसानों को आश्वस्त करते हुए बड़ा एलान किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें चाहे जो भी हों, भारत सरकार अपनी जेब से अतिरिक्त भार उठाएगी, लेकिन किसानों को महंगी खाद नहीं बिकने देगी। भारत में यूरिया की बोरी 266 रुपये में और डीएपी (DAP) की बोरी 1350 रुपये में ही मिलती रहेगी। इस संकट की स्थिति में अपने किसानों के साथ मजबूती से खड़ा रहना सरकार का धर्म है और इसके लिए हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार भारत सरकार पूरी तरह खुद वहन कर रही है। देश में खरीफ की फसल के लिए पर्याप्त मात्रा में फर्टिलाइजर स्टॉक मौजूद है और रबी के लिए भी पुख्ता व्यवस्था की जा रही है।
कम रकबे में बंपर पैदावार और 3000 से ज्यादा एग्री स्टार्टअप्स का कमाल
बढ़ती आबादी और शहरीकरण के कारण लगातार कम हो रहे कृषि के रकबे और कॉलोनियां कटने से सिकुड़ते खेतों पर चिंता जताते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि अब कम रकबे पर ज्यादा और पोषण युक्त उत्पादन कैसे हो, इसके लिए ‘इंटीग्रेटेड फार्मिंग’ और आधुनिक वर्टिकल व डिजिटल कृषि नवाचारों पर काम किया जा रहा है।
खेती को युवाओं के लिए आकर्षक और मुनाफे का सौदा बनाने के लिए भारत सरकार ‘रफ्तार’ जैसी अनेक प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है। इसी का परिणाम है कि आज भारत में 3000 से ज्यादा कृषि स्टार्टअप्स काम कर रहे हैं, जिन्हें देश के युवा वैज्ञानिक और उद्यमी चला रहे हैं। छोटे किसानों तक ड्रोन, रोबोटिक्स और महंगी कंबाइन मशीनें पहुंचाने के लिए देश भर में 64,000 कस्टम हायरिंग सेंटर्स और सहकारी समितियां सफलतापूर्वक काम कर रही हैं, जिससे छोटा किसान भी बहुत कम किराए पर आधुनिकतम तकनीक का लाभ उठाकर अपनी लागत कम कर रहा है।
इंदौर के मेघदूत गार्डन में स्थापित हुई ‘ब्रिक्स वाटिका‘
ग्लोबल पार्क और यूरो-रशियन पार्क की ऐतिहासिक कड़ियों में एक और नया अध्याय जोड़ते हुए, इंदौर के प्रसिद्ध मेघदूत गार्डन में सुबह 09:00 बजे सभी सदस्य देशों के कृषि मंत्रियों और विदेशी डेलीगेट्स ने मिलकर व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैश्विक आह्वान “एक पेड़ मां के नाम” की पावन भावना को आगे बढ़ाते हुए यहां एक भव्य ‘ब्रिक्स वाटिका‘ की स्थापना की गई, जो इस ऐतिहासिक बैठक की स्मृतियों को हमेशा जीवंत रखेगी।
शिवराज सिंह चौहान ने मालवा की समृद्ध और आत्मीय परंपरा के अनुरूप मेहमानों का सत्कार करने के लिए इंदौर की जनता, मुख्यमंत्री और मध्य प्रदेश सरकार की पूरी टीम को हृदय से धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इंदौर की ‘छप्पन दुकान’ का स्वाद, ‘राजवाड़ा’ की भव्यता और ‘मांडू’ का ऐतिहासिक भ्रमण विदेशी मेहमानों के दिलों में हमेशा के लिए अंकित हो गया है। यह पूरा आयोजन भारत सरकार के विदेश विभाग, पशुपालन-मछली पालन विभाग, कॉमर्स, फूड प्रोसेसिंग और नीति आयोग के ‘होल ऑफ गवर्नमेंट अप्रोच‘ (संपूर्ण सरकार का दृष्टिकोण) की अभूतपूर्व सफलता का प्रतीक है, जिसने एक साथ इतने बड़े और सर्वसम्मत फैसले दुनिया के सामने रखकर इतिहास रच दिया है।
अन्य खबरों के लिए नीचे ’न्यूज भारत टीवी ’के लिंक पर क्लिक करें,
|| https://newsbharattv.in ||

