Wednesday, July 29, 2026

नाबालिग से रेप के 5 दिन बाद भी आरोपी फरार, पुलिस पर लगा ‘मैनेज’ का आरोप; भड़के माले नेताओं ने कहा— थाना भी घेरेंगे और खेत भी बचाएंगे!

ताजपुर/मुसरीघरारी/समस्तीपुर (19 जून 2026): समस्तीपुर जिले में कानून व्यवस्था और जन-सरोकारों को लेकर भाकपा माले और अखिल भारतीय किसान महासभा ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। जिले के मुसरीघरारी थाना क्षेत्र के फतेहपुर गांव में एक गरीब और बेसहारा नाबालिग लड़की के साथ हुई दरिंदगी के मामले में पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना के 5 दिन बीत जाने के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से पूरे इलाके के ग्रामीणों में भारी उबाल है। इस गंभीर मामले को लेकर शुक्रवार को भाकपा माले की एक विशेष जांच टीम पीड़िता के गांव फतेहपुर पहुंची और ग्रामीणों से मिलकर पूरी स्थिति की जानकारी ली।

ताजपुर के बरतल्ला में खेत-खलिहानों के बीच किसानों को एकजुट कर सदस्यता अभियान चलाते किसान महासभा के प्रखंड अध्यक्ष ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह व अन्य नेता।

जांच टीम का नेतृत्व कर रहे भाकपा माले के ताजपुर प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने मुसरीघरारी थानाध्यक्ष की कार्यशैली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस इस जघन्य अपराध को दबाने और मामले को ‘मैनेज’ कराने का प्रयास कर रही है। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी:

“मुसरीघरारी थानाध्यक्ष मामले को मैनेज कराने का खेल बंद करें और आरोपी को अविलंब गिरफ्तार करें। अगर शीघ्र ही आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो महिला संगठन ऐपवा और भाकपा माले मिलकर ऐसा उग्र आंदोलन खड़ा करेगी, जिसकी गूंज पूरे सूबे में सुनाई देगी।” — सुरेंद्र प्रसाद सिंह (प्रखंड सचिव, भाकपा माले)

सांकेतिक (प्रतीकात्‍मक) तस्‍वीर

इधर खेतों में गूंजी अधिकार की हुंकार: किसान महासभा का महा-अभियान

एक तरफ जहां पुलिसिया निष्क्रियता के खिलाफ गुस्सा भड़क रहा है, वहीं दूसरी तरफ शुक्रवार को ही अखिल भारतीय किसान महासभा द्वारा प्रखंड क्षेत्र के बरतल्ला, चकहैदर समेत विभिन्न गांवों एवं खेत-खलिहानों में व्यापक सदस्यता अभियान चलाकर व्यवस्था को ललकारा गया। इस अभियान का नेतृत्व किसान महासभा के प्रखंड अध्यक्ष ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह एवं भाकपा माले प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह, मो० नसीम, रामबृक्ष राय, अरुण राय, विपीन कुमार आदि नेताओं ने संयुक्त रूप से किया।

नेताओं ने सीधे खेतों और खलिहानों में जाकर किसानों से संपर्क किया और बड़ी संख्या में उन्हें संगठन का सदस्य बनाया। इस मौके पर नेताओं ने कहा कि आज कृषि लागत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिल पा रहा है, जिससे खेती लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही है।

मुफ्त बिजली-पानी और संसाधन देने की उठी मांग

किसान महासभा के प्रखंड अध्यक्ष ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह ने सरकार से जोरदार मांग की कि किसानों को:

  • नि:शुल्क खाद, बीज, बिजली और पानी उपलब्ध कराया जाए।
  • कृषि यंत्र मुफ्त दिए जाएं ताकि खेती की लागत कम हो और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो।

उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि किसानों के खेतों तक विद्युत पहुंचाने की पुख्ता व्यवस्था सरकार को हर हाल में करनी होगी, अन्यथा इसके लिए बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

22 और 30 जून को महा-संग्राम की तैयारी, थानों का होगा घेराव

माले और किसान महासभा के नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे जनता के अधिकारों और बहन-बेटियों की सुरक्षा के लिए पीछे नहीं हटने वाले हैं। आंदोलन की कड़ियों को जोड़ते हुए नेताओं ने बड़े आंदोलनों का खाका खींच दिया है:

  1. 22 जून को थाना घेराव: मुसरीघरारी और ताजपुर पुलिस की मनमानी के खिलाफ 22 जून को भाकपा माले द्वारा ताजपुर थाना का घेराव किया जाएगा, जिसका किसान महासभा ने सक्रिय समर्थन करने का ऐलान किया है।
  2. 30 जून को प्रखंड पर प्रदर्शन: गरीबों के रद्द किए गए राशनकार्डों की पुनर्बहाली की मांग को लेकर 30 जून को प्रखंड मुख्यालय पर एक विशाल प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें किसान और आम जनता अपनी ताकत दिखाएगी।

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अपराधियों को हर हाल में छोड़ना होगा बिहार, अब खैर नहीं! गांधी मैदान में 5000 जांबाज होमगार्ड जवानों ने ली सुरक्षा की कसम, भव्य परेड में दिखे हैरतअंगेज कारनामे

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ली दीक्षांत और पारण परेड की सलामी; महिला वाहिनी का दिखा बेमिसाल शौर्य, नीतीश कुमार के समृद्ध बिहार के सपने को साकार करेंगे जवान; मानदेय बढ़कर हुआ 1121 रुपये

पटना। बिहार की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में 5000 नए गृह रक्षकों (होमगार्ड) का भव्य दीक्षांत एवं पारण परेड समारोह अत्यंत उत्साह और राष्ट्रभक्ति के माहौल में आयोजित किया गया। इस ऐतिहासिक गरिमामयी समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर परेड का निरीक्षण किया और जांबाज जवानों की सलामी ली। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी सहित गृह विभाग और पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी उपस्थित रहे।

पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित गृह रक्षा वाहिनी के पारण परेड समारोह के मुख्य मंच पर आसीन मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उनके साथ उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, बिहार के डीजीपी विनय कुमार एवं गृह विभाग के अन्य गणमान्य अधिकारीगण।

परेड के दौरान नवनियुक्त होमगार्ड जवानों ने जिस उत्कृष्ट अनुशासन और हुनर का प्रदर्शन किया, उसने उपस्थित जनसैलाब को मंत्रमुग्ध कर दिया। विशेष रूप से जवानों द्वारा जलते हुए छल्ले (अग्नि चक्र) के बीच से छलांग लगाने के हैरतअंगेज और जांबाज प्रदर्शन ने मैदान में मौजूद सभी लोगों के रोंगटे खड़े कर दिए। महिला टुकड़ियों ने भी कंधे से कंधा मिलाकर अपने अदम्य साहस का परिचय दिया, जिसे देखकर मुख्य मंच पर बैठे अतिथियों ने खड़े होकर तालियां बजाईं।

अपराधियों को छोड़ना होगा बिहार, मिली खुली छूट: सम्राट चौधरी

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हुंकार भरी कि बिहार में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा, “बिहार के लोगों को सुरक्षित रखना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। चाहे वह पुलिस के जवान हों या होमगार्ड के, सबका दायित्व बिहार को सुरक्षित रखना है। सरकार ने पुलिस प्रशासन को पूरी खुली छूट दे रखी है, अपराधियों को हर हालत में बिहार छोड़ना ही होगा। कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।”

ऐतिहासिक गांधी मैदान में खुली जीप पर सवार होकर नवनियुक्त 5000 होमगार्ड जवानों की भव्य पारण परेड का निरीक्षण करते मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी। जीप पर उनके साथ उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और सुरक्षा बल के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद हैं।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में वरिष्ठ अधिकारियों को यथास्थान नमन करते हुए कहा, “समारोह में उपस्थित बिहार के माननीय उपमुख्यमंत्री, वरिष्ठ साथी आदरणीय विजय चौधरी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, बिहार के डीजीपी विनय कुमार, इस पूरे कार्यक्रम का आयोजन करने वाली डीजी शोभा ओहतकर, गृह सचिव कुंदन कुमार, एडीजी सुरक्षा संजय कुमार सिंह और यहां उपस्थित तमाम होमगार्ड के साथी गण। यह अपने आप में एक अनोखा प्रदर्शन था। जिस तरह गृह रक्षा वाहिनी के स्ट्रेंथनिंग (मजबूतीकरण) का काम लगातार चल रहा है, उससे स्पष्ट है कि बिहार लगातार आगे बढ़ रहा है।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री चाहते हैं कि विकसित भारत बने और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समृद्ध बिहार का सपना देखा था, इस सपने को साकार करने में बिहार पुलिस और होमगार्ड के जवानों का सबसे महत्वपूर्ण रोल होने जा रही है। उन्होंने कहा कि 45000 गांवों वाले इस बिहार में 13 करोड़ जनता की सुरक्षा के लिए 1 लाख से अधिक होमगार्ड और लाखों पुलिस बल पूरी मुस्तैदी से काम कर रहे हैं। वर्तमान में होमगार्ड जवानों को दी जा रही ट्रेनिंग अब अर्धसैनिक बलों (पैरामिलिट्री फोर्सेस), बीसैफ और कमांडो के समकक्ष पहुंच चुकी है, जो एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।

 दीक्षांत समारोह के दौरान मुख्य अतिथि के समक्ष अदम्य साहस और उत्कृष्ट प्रशिक्षण का मुजाहिरा करते गृह रक्षा वाहिनी के जांबाज जवान। जलते हुए अग्नि चक्र (फायर रिंग) के बीच से अत्यंत सटीकता और निडरता के साथ छलांग लगाकर कमांडो स्तर की ट्रेनिंग का प्रदर्शन करता एक जांबाज होमगार्ड जवान।

चुनावी हिंसा का खात्मा और मानदेय में बंपर वृद्धि

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पहले चुनावों में सिर्फ हिंसा ही हिंसा होती थी, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में रिकॉर्ड 110000 के आसपास सिर्फ होमगार्ड को लगाया गया था और बिहार में एक भी रिपोल (पुनर्मतदान) नहीं हुआ। बिहार विधानसभा चुनाव में भी लगभग 44000 होमगार्ड को तैनात कर अर्धसैनिक बलों को सहयोग दिया गया। जवानों के कल्याण पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि 3 सितंबर 2025 के पहले बिहार में होमगार्ड जवान को प्रतिदिन मात्र 734 रुपये दिया जाता था, जिसे नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार और तत्कालीन वित्त विभाग (जो स्वयं सम्राट चौधरी देखते थे) ने बढ़ाकर 1121 रुपये प्रतिदिन करने का काम किया ताकि जवानों के परिवारों में खुशहाली आ सके।

एनडीए सरकार तीन चीजों से कभी समझौता नहीं करती: विजय चौधरी

समारोह को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने जवानों की मेधा और अनुशासन की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा, “हमारी एनडीए सरकार की घोषित नीति है कि वह तीन चीजों से कभी समझौता नहीं करती—अपराध, भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता। इन तीनों को नियंत्रित रखने में पुलिस और उसके सहायक के रूप में गृह रक्षा वाहिनी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।” उन्होंने आगे कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गृह रक्षा वाहिनी में रिक्तियों को पारदर्शी प्रक्रिया से भरने और प्रशिक्षण के स्तर को ऊंचा उठाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था, जिसका परिणाम आज गांधी मैदान में साफ दिख रहा है। महिला टुकड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि अब बिहार में अपराधियों की खैर नहीं है।

डीजी शोभा ओहतकर ने दिलाई कर्तव्य निष्ठा की शपथ

समारोह के दौरान गृह रक्षा वाहिनी की महानिदेशक (डीजी) शोभा ओहतकर ने सभी 5000 नवनियुक्त होमगार्ड जवानों को देश सेवा, अनुशासन और कर्तव्य निष्ठा की गोपनीयता की शपथ दिलाई। जवानों ने शपथ ली कि वे अपने वरीय अधिकारियों के आदेशों का अक्षरों में पालन करेंगे और कर्तव्य पथ पर कभी भी पीछे नहीं हटेंगे।

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समस्तीपुर में खौफ का राज! अपराधियों के आगे बेबस पुलिस के खिलाफ ‘माले’ की आर-पार की जंग, 22 जून को ताजपुर थाना हिलाएंगे हजारों लोग!

  • फाइलों में दफन न्याय: थाना कांड संख्या 98/26 के तहत संजीव सहनी हत्याकांड के एक महीने बाद भी पुलिस के हाथ खाली, अपराधियों को मिल रहा राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण?
  • खाकी पर दाग: नीम चौक सोना लूटकांड में तीन पुलिस अधिकारियों के निलंबन के बाद भी नहीं बदला ढांचा, लूटा गया सोना और डकैत अब भी कानून की पहुंच से दूर।
  • व्यापारियों में हाहाकार: कोठिया मोड़ पर किराना दुकानदार नरेश चौधरी गोलीकांड ने तोड़ी ताजपुर के व्यवसायियों की कमर, शाम ढलते ही बाजारों में पसर जाता है सन्नाटा।
  • माले की हुंकार: प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा— “देर से न्याय मिलना, असल में न्याय की हत्या है, 22 जून को जनता मैदान से थमेगी समस्तीपुर की रफ्तार।”

ताजपुर/समस्तीपुर, 18 जून 2026: बिहार का समस्तीपुर जिला इस समय एक अभूतपूर्व सुरक्षा संकट और प्रशासनिक शून्यता के दौर से गुजर रहा है। जिले का ताजपुर थाना क्षेत्र, जो कभी अपने शांत वातावरण और प्रगतिशील किसान-व्यापारी संस्कृति के लिए जाना जाता था, आज अपराधियों की खुली चरागाह बन चुका है। हत्या, दिनदहाड़े डकैती, राहजनी, रंगदारी और अंधाधुंध गोलीबारी की सिलसिलेवार घटनाओं ने आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों और उनके जीने की स्वतंत्रता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। क्षेत्र की जनता इस बात से बेहद आक्रोशित है कि जब अपराधी सरेआम वारदातों को अंजाम देकर सुरक्षित निकल जाते हैं, तब स्थानीय पुलिस केवल कागजी खानापूर्ति और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के इंतजार में बैठी रहती है।

इस प्रशासनिक विफलता, खाकी की अकर्मण्यता और अपराधियों के बढ़ते दुस्साहस के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) यानी भाकपा माले ने अब सीधे तौर पर सत्ता और व्यवस्था के खिलाफ आर-पार की जंग का बिगुल फूंक दिया है। क्षेत्र में पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने और सोए हुए पुलिस तंत्र को जगाने के लिए भाकपा माले आगामी 22 जून 2026 को ताजपुर थाना का ऐतिहासिक महाघेराव करने जा रही है। इस कार्यक्रम की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी ने पुलिस अधीक्षक (एसपी), अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) और अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) को लिखित पत्र भेजकर साफ शब्दों में अल्टीमेटम दे दिया है कि यदि कानून का राज स्थापित नहीं हुआ, तो उत्पन्न होने वाली किसी भी कानून-व्यवस्था की स्थिति की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

समस्तीपुर के ताजपुर में बेकाबू हो चुके अपराधियों और थानों की निष्क्रियता के खिलाफ आर-पार की जंग का एलान करते भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह। वे हाथ में पुलिस अधीक्षक (एसपी), अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीओ) को भेजा गया वह अल्टीमेटम पत्र दिखा रहे हैं, जिसमें 22 जून 2026 को हजारों की संख्या में ताजपुर थाना घेरने और व्यवस्था को हिला देने की पूरी रणनीति और चेतावनी दर्ज है।

कांड संख्या 98/26: संजीव सहनी हत्याकांड और पुलिस के झूठे वादे

ताजपुर में पुलिसिया नाकामी का सबसे क्रूर और ज्वलंत उदाहरण मोटरसाइकिल मिस्त्री संजीव सहनी की हत्या है। 15 मई 2026 को मोतिपुर वार्ड-27 निवासी संजीव कुमार सहनी की गांधी चौक के पास बेखौफ अपराधियों ने दिनदहाड़े गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। गांधी चौक जैसे व्यस्ततम इलाके में दोपहर के समय हुई इस दुस्साहसिक वारदात से पूरा समस्तीपुर दहल उठा था। घटना के तुरंत बाद जब स्थानीय लोगों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया, तो जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को शांत कराया था।

पुलिस अधिकारियों ने उस समय जनता के सामने सार्वजनिक रूप से यह आश्वासन दिया था कि 4 दिनों के भीतर अपराधियों को न सिर्फ चिन्हित कर लिया जाएगा, बल्कि उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा। लेकिन आज इस घटना को बीते एक महीने से अधिक का समय हो चुका है, और तफ्तीश की सुई एक इंच भी आगे नहीं बढ़ी है।

भाकपा माले के नेताओं का आरोप है कि संजीव सहनी एक बेहद गरीब परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य था। उसकी हत्या के पीछे किसी गहरे आपराधिक सिंडिकेट का हाथ है, जिसे स्थानीय स्तर पर कुछ रसूखदार लोगों का संरक्षण प्राप्त है। यही कारण है कि पुलिस दबाव में आकर मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करने से कतरा रही है। एक गरीब की जान की कीमत समस्तीपुर पुलिस के लिए केवल एक फाइल नंबर—कांड संख्या 98/26 बनकर रह गई है।

नीम चौक सोना लूटकांड: निलंबन की कार्रवाई केवल आईवॉश?

ताजपुर पुलिस की कार्यशैली पर दूसरा सबसे बड़ा धब्बा नीम चौक पर हुआ सनसनीखेज सोना लूटकांड है। इस वारदात ने समस्तीपुर ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर बिहार के आभूषण व्यापारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। अपराधियों ने योजनाबद्ध तरीके से, अत्याधुनिक हथियारों के बल पर लाखों  रुपये मूल्य के सोने और नकदी की डकैती की थी। इस घटना के बाद स्थानीय व्यापारियों के भारी दबाव और चौतरफा किरकिरी के बाद पुलिस मुख्यालय ने कर्तव्य में घोर लापरवाही बरतने के आरोप में तीन पुलिस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया था।

लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस अधिकारियों का निलंबन पीड़ित व्यापारियों को उनका खोया हुआ धन वापस दिला सकता है? भाकपा माले और स्थानीय व्यवसाई संघ का स्पष्ट मानना है कि यह निलंबन केवल जनता के गुस्से को शांत करने के लिए किया गया एक ‘आईवॉश’ (दिखावा) था। महीनों बीत जाने के बाद भी पुलिस न तो लूटे गए सोने का एक कतरा बरामद कर पाई है और न ही इस डकैत गिरोह के मास्टरमाइंड का पता लगा सकी है। अधिकारी बदल जाते हैं, लेकिन ताजपुर थाने की कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं होता। डकैत आज भी खुलेआम घूम रहे हैं और संभवतः अगली बड़ी डकैती की योजना बना रहे हैं।

नरेश चौधरी गोलीकांड और व्यापारियों का पलायन

ताजपुर बाजार और इसके आसपास के इलाके समस्तीपुर के प्रमुख व्यापारिक केंद्र हैं। लेकिन पिछले कुछ महीनों में व्यापारियों को जिस तरह से निशाना बनाया गया है, उससे यहां के व्यापार जगत की कमर टूट गई है। अभी संजीव सहनी और सोना लूटकांड की आग ठंडी भी नहीं हुई थी कि बीते 12 जून 2026 को कोठिया मोड़ चौक पर एक और दुस्साहसिक वारदात को अंजाम दिया गया। यहां के  किराना दुकानदार नरेश चौधरी की दुकान पर अपराधियों ने धावा बोला और उन्हें सीधे तौर पर गोली मार दी।

नरेश चौधरी गोलीकांड ने व्यापारियों के भीतर के बचे-खुचे हौसले को भी समाप्त कर दिया है। रंगदारी न देने या अपराधियों के सामने न झुकने का परिणाम आज सीधे तौर पर गोली के रूप में सामने आ रहा है। व्यवसाई संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि ताजपुर के बाजारों में अब शाम के 8:00 बजते ही सन्नाटा पसर जाता है। कोई भी व्यापारी देर रात तक दुकान खुली रखने का जोखिम नहीं उठाना चाहता। अगर यही स्थिति रही, तो ताजपुर से व्यापारियों का बड़े पैमाने पर पलायन शुरू हो जाएगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह तबाह हो जाएगी।

लंबित हत्याकांडों की लंबी फेहरिस्त: दर्जिनिया चौर से हरपुर भिंडी तक

ताजपुर थाना क्षेत्र में केवल एक या दो घटनाएं नहीं हुई हैं, बल्कि यहां अपराध का एक व्यवस्थित पैटर्न बन चुका है। भाकपा माले द्वारा जारी किए गए मांगपत्र में कई ऐसे लंबित मामलों का जिक्र है जिन पर पुलिस ने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है:

  1. दर्जिनिया चौर हत्याकांड: इस सुनसान इलाके में हुई हत्या के मामले में पुलिस आज तक यह भी साफ नहीं कर पाई है कि हत्या का मुख्य मकसद क्या था और इसमें कौन से पेशेवर शूटर शामिल थे।
  2. हरपुर भिंडी पीट-पीटकर हत्याकांड: सामाजिक न्याय और मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली इस घटना में एक नागरिक को पीट-पीटकर मार डाला गया था। इस मामले में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने कोई ठोस छापेमारी नहीं की, जिससे पीड़ित परिवार आज भी खौफ के साए में जीने को मजबूर है।

इन सभी मामलों में एक बात सामान्य है—अपराधियों में कानून का कोई डर नहीं है। उन्हें पता है कि ताजपुर की पुलिस केवल घटना के बाद मौका-ए-वारदात पर पहुंचकर औपचारिकता निभाना जानती है, अपराधियों का पीछा करना उसके बस की बात नहीं है।

“देर से न्याय मिलना, न्याय न मिलने के बराबर है” — सुरेंद्र प्रसाद सिंह

भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने समस्तीपुर के मौजूदा हालातों पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने राजनीतिक और प्रशासनिक दर्शन का हवाला देते हुए कहा कि “देर से न्याय मिलना, असल में न्याय न मिलने के बराबर है।” जब एक पीड़ित परिवार अपने मुखिया या अपने प्रियजन को खो देता है, और महीनों तक पुलिस के चक्कर काटने के बाद भी उसे केवल आश्वासन मिलता है, तो वह न्याय प्रणाली से अपना विश्वास खो बैठता है।

सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने साफ कहा कि ताजपुर पुलिस केवल सत्ताधारी दल के नेताओं की सुरक्षा और अवैध उगाही में व्यस्त है। आम जनता की सुरक्षा रामभरोसे छोड़ दी गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि 22 जून का आंदोलन केवल एक साधारण प्रदर्शन नहीं होगा, बल्कि यह समस्तीपुर पुलिस के खिलाफ जनता का निर्णायक विद्रोह होगा।

22 जून का महासंग्राम: कैसे थमेगी ताजपुर की रफ्तार?

भाकपा माले ने 22 जून 2026 के थाना घेराव कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अपनी पूरी संगठनात्मक ताकत झोंक दी है। पार्टी के शीर्ष और जमीनी नेताओं की फौज पिछले एक हफ्ते से ताजपुर के कोने-कोने में कैंप कर रही है।

  • जमीनी स्तर पर तैयारियां: माले नेता ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, आसिफ होदा, मो० एजाज, प्रभात रंजन गुप्ता, शंकर महतो, ललन दास और राजदेव प्रसाद सिंह जैसे कद्दावर कार्यकर्ता लगातार गांवों, टोलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में जाकर ‘जनता बैठकें’ (नुक्कड़ सभाएं) कर रहे हैं। इन बैठकों में आम लोगों का अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है।
  • आंदोलन का रूट मैप: तय योजना के अनुसार, 22 जून को सुबह 11:00 बजे समस्तीपुर और ताजपुर के हजारों लोग, व्यवसाई, किसान और नौजवान ताजपुर के ऐतिहासिक जनता मैदान में एकत्रित होंगे। यहां से एक विशाल और आक्रामक आक्रोश महाजुलूस निकाला जाएगा।
  • बाजारों का भ्रमण: यह महाजुलूस जनता मैदान से निकलकर ताजपुर के मुख्य बाजार, गोलंबर और विभिन्न संवेदनशील चौराहों से होते हुए गुजरेगा। इस दौरान पूरे बाजार क्षेत्र के व्यापारियों ने स्वतः स्फूर्त रूप से अपनी दुकानें बंद रखकर आंदोलन को समर्थन देने का फैसला किया है।
  • थाने पर दस्तक: बाजार का भ्रमण करने के बाद यह जनसैलाब सीधे ताजपुर थाना पहुंचेगा और वहां चारों तरफ से घेराव कर प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं पर एक लंबी विरोध सभा होगी, जिसमें पुलिस के आला अधिकारियों को बुलाकर सीधे जनता के सामने जवाबदेही तय करने के लिए मजबूर किया जाएगा।

भाकपा माले और व्यवसाई संघ की मुख्य मांगें (मांगपत्र के मुख्य बिन्‍दु ) :

पार्टी ने स्पष्ट किया है कि जब तक निम्नलिखित मांगों पर लिखित और समयबद्ध आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा:

  • मांग 1: ताजपुर थाना कांड संख्या 98/26 (संजीव सहनी हत्याकांड) का अविलंब उद्भेदन किया जाए और मुख्य शूटरों तथा इसके पीछे के साजिशकर्ताओं को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
  • मांग 2: नीम चौक सोना लूटकांड के दोषियों को दबोचा जाए और लूटे गए आभूषणों की शत-प्रतिशत बरामदगी सुनिश्चित की जाए ताकि पीड़ित व्यापारियों को राहत मिल सके।
  • मांग 3: किराना दुकानदार नरेश चौधरी पर जानलेवा हमला करने वाले और रंगदारी मांगने वाले गिरोह का समूल नाश किया जाए।
  • मांग 4: दर्जिनिया चौर हत्याकांड और हरपुर भिंडी पीट-पीटकर हत्याकांड सहित थाना क्षेत्र के सभी लंबित मामलों में फरार चल रहे अपराधियों की संपत्तियों की कुर्की-जब्ती की जाए।
  • मांग 5: पूरे ताजपुर थाना क्षेत्र में पुलिस गश्त (पेट्रोलिंग) को चौबीस घंटे सक्रिय किया जाए, मुख्य चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे चालू किए जाएं और व्यापारियों तथा आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए विशेष टास्क फोर्स का गठन किया जाए।

समस्तीपुर का यह संकट अब केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह आम इंसान के अस्तित्व और गरिमा की लड़ाई बन चुका है। जब कानून के रखवाले ही पंगु हो जाएं, तो जनता को सड़कों पर उतरना ही पड़ता है। भाकपा माले ने क्षेत्र की समस्त न्यायप्रिय जनता, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और सभी लोकतांत्रिक संगठनों से अपील की है कि वे 22 जून को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर, जाति और धर्म की सीमाओं को तोड़कर, अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य और अपराधियों के सफाए के लिए इस थाना घेराव कार्यक्रम में शामिल हों। 22 जून को ताजपुर की सड़कों पर उतरने वाला एक-एक कदम समस्तीपुर के प्रशासनिक गलियारों में बैठे भ्रष्ट और अकर्मण्य अधिकारियों की कुर्सी हिलाने का काम करेगा।

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आसमान से जमीन तक चमकेगा बिहार, कैबिनेट बैठक में 29 बड़े फैसलों पर लगी ऐतिहासिक मुहर!

हेलीकॉप्टर से सैर करेंगे पर्यटक, सड़कों पर दौड़ेंगे डिजिटल कैमरे, और 5 बड़ी नदियों का होगा कायाकल्प – करोड़ों के बजट से बदलेगी राज्य की सूरत

विशेष ब्यूरो, पटना: बिहार में विकास, सुरक्षा और प्रशासनिक सुधारों के मोर्चे पर एक नया अध्याय शुरू हो गया है। राजधानी पटना में आयोजित राज्य मंत्रिपरिषद की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक में  सरकार ने कुल 29 एजेंडों पर अपनी ऐतिहासिक स्वीकृति दे दी है। इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने की। बैठक में लिए गए फैसले साफ तौर पर यह संकेत देते हैं कि राज्य सरकार अब पारंपरिक ढर्रे से अलग हटकर आधुनिक तकनीक, पर्यटन और वैज्ञानिक संसाधनों के उचित दोहन पर पूरा ध्यान केंद्रित कर रही है। बैठक समाप्त होने के बाद मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने मीडियाकर्मियों को फैसलों की बारीकियों और बजटीय आवंटन से अवगत कराया।

यह केवल सरकारी प्रस्तावों की मंजूरी नहीं है, बल्कि बिहार को आर्थिक और सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का एक बड़ा खाका है।

पटना में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित बिहार कैबिनेट की उच्चस्तरीय बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी।

 सड़क सुरक्षा में डिजिटल क्रांति: 622.04 करोड़ का आईटीएमएस प्रोजेक्ट

कैबिनेट का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला फैसला परिवहन विभाग की ओर से आया है। राज्य की सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं और दम तोड़ती यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सरकार ने 622.04 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट के साथ इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्‍टम  (आईटीएमएस) की स्थापना को हरी झंडी दी है।

  • पीपीपी मॉडल पर काम: यह पूरा प्रोजेक्ट पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर संचालित होगा, जिससे इसके क्रियान्वयन में निजी क्षेत्र की दक्षता का लाभ मिल सके।
  • क्या होगा असर: इसके तहत राज्य के प्रमुख राजमार्गों और शहरी चौराहों पर स्वचालित कैमरे, स्पीड डिटेक्टर और इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन उपकरण लगाए जाएंगे। इसका सीधा उद्देश्य मानवीय हस्तक्षेप को कम करके यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सीधे डिजिटल नकेल कसना और दुर्घटनाओं की दर में भारी कमी लाना है।

पर्यटन को लगे पंख: आसमान से दिखेगा बदलता बिहार

बिहार के पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कैबिनेट ने एक साथ तीन नई दूरगामी योजनाओं को मंजूरी दी है, जो राज्य में विदेशी और घरेलू पर्यटकों की आमद को कई गुना बढ़ा सकती हैं:

  • मुख्यमंत्री बिहार हेली-टूरिज्म एवं एयर टूरिज्म सेवा योजना 2026: इसके तहत राज्य के प्रमुख धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों (जैसे बोधगया, राजगीर, वैशाली और भागलपुर) को आपस में जोड़ने के लिए हेलीकॉप्टर और छोटे विमानों की सेवाएं शुरू की जाएंगी। इससे पर्यटकों का समय बचेगा और वीआईपी टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।
  • मुख्यमंत्री होमस्टे प्रोत्साहन योजना 2026: ग्रामीण और स्थानीय इलाकों में पर्यटकों को ठहरने के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं देने और स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार पैदा करने के लिए इस योजना के नीतिगत दिशा-निर्देशों को मंजूरी दी गई है।
  • सिंधु दर्शन तीर्थ यात्रा वित्तीय सहायता योजना 2026: इसके जरिए राज्य के उन श्रद्धालुओं को वित्तीय मदद दी जाएगी जो सिंधु दर्शन जैसी पवित्र और कठिन यात्राओं पर जाना चाहते हैं।

नदियों का वैज्ञानिक अध्ययन: अवैध खनन पर लगेगी अंतिम रोक

खान एवं भूतत्व विभाग के अंतर्गत राज्य की 5 जीवनदायिनी नदियों – सोन, किऊल, फल्गु, मोरहर और चानन नदी का पुनर्भरण अध्ययन (रेप्लेनिशमेंट स्टडी) कराने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया है।

  • करोड़ों का बजट: इस वैज्ञानिक शोध के लिए सरकार ने 2.32 करोड़ रुपये (2,32,69,600 रुपये) स्वीकृत किए हैं।
  • रणनीति का विश्लेषण: यह काम नामांकन के आधार पर सेंट्रल माइन प्लानिंग एण्ड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (सीएमडीपीआई) को सौंपा गया है। इस अध्ययन से यह पता चलेगा कि मानसून के बाद इन नदियों में कितनी मात्रा में बालू का प्राकृतिक रूप से पुनर्भरण होता है। इससे न केवल पर्यावरण की रक्षा होगी, बल्कि बालू माफियाओं द्वारा किए जाने वाले अवैध और अंधाधुंध खनन पर भी पूरी तरह से रोक लगाई जा सकेगी।

 बंपर भूमि अधिग्रहण: उद्योगों के लिए बिछेगा कालीन

राज्य में कल-कारखानों की स्थापना और निवेश को आकर्षित करने के लिए उद्योग विभाग के माध्यम से तीन महत्वपूर्ण जिलों में बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण के वित्तीय प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है:

  • कैमूर जिला: वाराणसी-राँची-कोलकाता एक्सप्रेसवे के नजदीक अंचल-चाँद एवं चैनपुर के विभिन्न मौजों में कुल 781.18 एकड़ भूमि के अधिग्रहण और बुनियादी ढांचा विकास प्राधिकरण (बियाडा) के माध्यम से विकास के लिए 2,30,64,97,009 रुपये की विशाल राशि मंजूर की गई है।
  • पूर्णिया जिला: अंचल-कृत्यानन्द नगर के विभिन्न मौजों में कुल 687 एकड़ रैयती भूमि के अधिग्रहण हेतु 1,25,32,38,925 रुपये स्वीकृत हुए हैं।
  • सहरसा जिला: अंचल-कहरा, मौजा-वनगाँव, देवनागोपाल तथा बलहर अराजी में कुल 420.62 एकड़ भूमि के लिए 88,01,13,847 रुपये के व्यय को हरी झंडी मिली है।

 प्रशासनिक और शैक्षणिक सुधार: खत्म हुआ इंटरव्यू का दौर

कैबिनेट ने सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता लाने के लिए एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। पथ निर्माण विभाग के तहत बिहार तकनीकी सेवा नियमावली 1999 में संशोधन करते हुए शोध सहायक के पद पर चयन के लिए पूर्व से चली आ रही अंतर्वीक्षा (इंटरव्यू) की व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। अब यह चयन पूरी तरह से प्रतियोगिता परीक्षा और शैक्षणिक मेधा के आधार पर बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) के माध्यम से पारदर्शी तरीके से होगा।

इसके साथ ही, भवन निर्माण विभाग के अंतर्गत राज्य के तमाम कार्य विभागों के सामान्य लिपिकीय संवर्ग के पदों पर भर्ती प्रक्रिया और सेवा शर्तों को विनियमित करने के लिए ‘कार्य विभाग क्षेत्रीय सामान्य लिपिकीय संवर्ग नियमावली 2026’ के गठन को भी स्वीकृति दी गई है।

संक्षिप्त : अन्य महत्वपूर्ण फैसले

  • एससी-एसटी कल्याण: बिहार राज्य अनुसूचित जाति सहकारिता विकास निगम लिमिटेड को राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (एनएसकेएफडीसी), नई दिल्ली के पुराने बकाये टर्म लोन के एकमुश्त भुगतान के लिए 21,95,00,000 रुपये जारी करने की मंजूरी दी गई।
  • संस्कृति का संरक्षण: कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के अधीन “बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप समिति” के गठन और इसके सोसायटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत निबंधन के प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई।
  • न्यायिक सुदृढ़ीकरण: पटना उच्च न्यायालय में सिविल जज (वरीय कोटि) के समकक्ष विशेष कार्य पदाधिकारी का 1 पद और मधुबनी न्यायमंडल के बेनीपट्टी में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय की स्थापना के लिए 1 पद के सृजन को स्वीकृति मिली।

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बिहार में जमीन विवादों का होगा परमानेंट खात्मा! राजस्व महा-अभियान की अवधि 21 जून तक बढ़ी; 46 लाख फाइलों को खंगालने में जुटी सरकार, सुस्त अफसरों पर गिरेगी गाज!

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल का कड़ा फैसला: 17 जून तक 95.73% स्कैनिंग और 60.27% पोर्टल अपलोडिंग पूरी, लापरवाही बरतने वाले अंचल और राजस्व अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय!

पटना, 17 जून 2026: बिहार में भूमि सुधार और जमीन संबंधी समस्याओं से आम जनता को बड़ी राहत देने के लिए सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा दांव खेल दिया है। बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा चलाए जा रहे ‘राजस्व महा-अभियान’ को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। प्राप्त 46 लाख से अधिक लंबित आवेदनों के त्वरित निष्पादन के लिए चलाया जा रहा विशेष अभियान अब 21 जून 2026 तक जारी रहेगा। सरकार का मुख्य लक्ष्य सभी 46 लाख आवेदनों की स्कैनिंग और डिजिटल पोर्टल पर अपलोडिंग के कार्य को शत-प्रतिशत पूरा करना है, ताकि रैयतों को सीधे और पारदर्शी तरीके से लाभ मिल सके।

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि इस अवधि में सभी लंबित आवेदनों की शत-प्रतिशत स्कैनिंग और संबंधित ऑनलाइन पोर्टलों पर अपलोडिंग सुनिश्चित की जाए। इस डिजिटल क्रांति का सीधा उद्देश्य भूमि अभिलेख सुधार, उत्तराधिकार नामांतरण (म्यूटेशन) और पारिवारिक बंटवारा आधारित नामांतरण से जुड़े मामलों का बहुत ही तेजी और पारदर्शिता के साथ निष्पादन करना है।

एक सप्ताह में दर्ज हुई ऐतिहासिक प्रगति (मुख्य आंकड़े):

विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 11 जून से 17 जून तक चलाए गए इस विशेष अभियान के दौरान राज्यभर में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।

  • महा-अभियान के तहत प्राप्त कुल 46,25,957 आवेदनों में से 95.73 प्रतिशत आवेदनों की स्कैनिंग पूरी कर ली गई है, जबकि अभियान शुरू होने से पहले यह आंकड़ा मात्र 81.91 प्रतिशत था।
  • इसके अलावा, 60.27 प्रतिशत आवेदन संबंधित ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके हैं, जो अभियान से पहले सिर्फ 26.43 प्रतिशत पर सिमटा हुआ था। एक सप्ताह के भीतर स्कैनिंग और अपलोडिंग दोनों में यह एक बड़ी छलांग है।

शानदार प्रदर्शन करने वाले अग्रणी जिले:

दिलीप कुमार जायसवाल ने बेहतरीन काम करने वाले जिलों की सराहना करते हुए कहा कि कई जिलों ने इस महा-अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। स्कैनिंग के मामले में खगड़िया जिला 99.92 प्रतिशत कार्य पूरा करके सबसे आगे चल रहा है। इसके ठीक पीछे दरभंगा में 99.72 प्रतिशत, पूर्णिया और वैशाली में 99.67 प्रतिशत, रोहतास में 99.53 प्रतिशत तथा समस्तीपुर और सुपौल में 99 प्रतिशत से अधिक स्कैनिंग का कार्य पूरा हो चुका है।

वहीं, पोर्टल अपलोडिंग के मामले में शिवहर जिला 89.92 प्रतिशत के साथ शीर्ष पायदान पर बना हुआ है। इसके अलावा किशनगंज (86.47 प्रतिशत), खगड़िया (84.83 प्रतिशत), दरभंगा (80.61 प्रतिशत), पूर्णिया (77.82 प्रतिशत) और वैशाली (75.17 प्रतिशत) भी अग्रणी जिलों में शामिल हैं।

सुस्त अफसरों को मंत्री की दो टूक चेतावनी:

हालांकि, मंत्री ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि अभी भी कुछ जिलों में अपलोडिंग और मामलों के निष्पादन की गति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी है। उन्होंने ऐसे जिलों के अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने और अतिरिक्त मानव संसाधन (मैनपावर) लगाकर कार्यों को समयबद्ध रूप से पूरा करने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभियान की सफलता के लिए अंचल अधिकारियों (सीओ), राजस्व अधिकारियों और अन्य संबंधित कर्मियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की गई है तथा विभागीय मुख्यालय स्तर पर प्रतिदिन प्रगति की कड़ाई से निगरानी (मॉनिटरिंग) की जा रही है।

सचिव जय सिंह ने सभी जिलाधिकारियों को दिए कड़े निर्देश:

विभाग के सचिव जय सिंह ने भी राज्य के सभी जिलाधिकारियों (डीएम), अपर समाहर्ताओं (एडीएम), भूमि सुधार उप समाहर्ताओं (डीसीएलआर), बंदोबस्त पदाधिकारियों, अंचल अधिकारियों और राजस्व अधिकारियों को इस अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता देने तथा निर्धारित लक्ष्य हर हाल में पूरा करने का निर्देश दिया है। विभागीय मुख्यालय से इसकी लगातार समीक्षा और अनुश्रवण का काम मॉनिटरिंग टीम द्वारा जारी है।

दिलीप कुमार जायसवाल ने भरोसा जताया है कि माननीय मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार भूमि प्रशासन को पूरी तरह से पारदर्शी, डिजिटल और जनोन्मुखी बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 21 जून तक सभी लंबित आवेदनों की स्कैनिंग एवं पोर्टल अपलोडिंग का लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा, जिससे निष्पादन प्रक्रिया और तेज होगी तथा बिहार के लाखों रैयतों को सीधे तौर पर इसका बड़ा लाभ मिलेगा।

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भू-अर्जन में सुस्ती दिखाई तो नपेंगे अधिकारी: मंत्री दिलीप जायसवाल का अल्टीमेटम, एमआईएस पोर्टल पर दर्ज होगी एक-एक इंच जमीन की कुंडली!

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री की राज्यव्यापी हाई-लेवल समीक्षा बैठक; राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे और पथ निर्माण की परियोजनाओं में बाधा बनने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

विशेष ब्यूरो, पटना | दिनांक: 17 जून 2026

पटना, 17 जून। बिहार में विकास योजनाओं की कछुआ चाल पर नीतीश सरकार ने अब बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। राज्य में चल रही विभिन्न बुनियादी ढांचा और विकासात्मक परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण (भू-अर्जन) की सुस्त रफ्तार पर नाराजगी जताते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने अधिकारियों को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है। बुधवार को विभाग की एक अत्यंत महत्वपूर्ण राज्यव्यापी समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि भू-अर्जन कार्यों में किसी भी स्तर पर ढिलाई या लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस मैराथन बैठक में राज्य के सभी जिलों के जिला भू-अर्जन अधिकारियों (डीएलएओ) को लंबित मामलों का समयबद्ध निपटारा करने का सख्त निर्देश दिया गया है।

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), रेलवे, पथ निर्माण विभाग, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्ट) तथा अन्य प्रमुख तकनीकी विभागों से जुड़ी महात्वाकांक्षी परियोजनाओं की जिलावार वर्तमान स्थिति पर बेहद विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि बिहार की तरक्की के लिए बुनियादी ढांचे का मजबूत होना अनिवार्य है, और इसमें भूमि की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रही है। उन्होंने निर्देश दिया कि विकास परियोजनाओं के रास्ते में आने वाली किसी भी प्रकार की कानूनी, प्रशासनिक या प्रक्रियात्मक बाधा को पूरी तरह से प्राथमिकता के आधार पर तत्काल दूर किया जाए, ताकि करोड़ों-अरबों रुपये की ये योजनाएं अपने निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी हो सकें और जनता को इनका लाभ मिल सके।

पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए मंत्री ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी जिला भू-अर्जन अधिकारियों को आदेश दिया कि वे अपने-अपने कार्यालयों के बाहर अनिवार्य रूप से एक बड़ा सूचना बोर्ड (डिस्प्ले बोर्ड) स्थापित करें। इस बोर्ड पर जिले में संचालित होने वाली सभी भू-अर्जन परियोजनाओं की सूची, अधिग्रहित की जाने वाली जमीन का रकबा और उसकी अद्यतन (करंट) स्थिति साफ-साफ अक्षरों में लिखी होनी चाहिए। मंत्री ने कहा कि इस कदम से न केवल कार्यों को अभूतपूर्व गति मिलेगी, बल्कि आम जनता और जमीन मालिकों को भी यह पता रहेगा कि उनकी फाइलों की स्थिति क्या है। इसके साथ ही, उन्होंने सभी परियोजनाओं की नवीनतम और सटीक जानकारी को अनिवार्य रूप से विभाग के एमआईएस (प्रबंधन सूचना प्रणाली) पोर्टल पर दर्ज करने का हुक्म दिया, ताकि मुख्यालय स्तर पर इसकी हर दिन प्रभावी मॉनिटरिंग की जा सके।

तस्वीर: पटना स्थित मुख्य सचिवालय में बुधवार 17 जून 2026 को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते माननीय मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल। बैठक में विभाग के सचिव जय सिंह, सचिव सीमा त्रिपाठी, अपर सचिव प्रशांत सीएच, निदेशक भू-अर्जन कमलेश कुमार सिंह समेत अन्य आला अधिकारी उपस्थित हैं, जबकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के जिला भू-अर्जन पदाधिकारी जुड़े हुए हैं।

इस उच्चस्तरीय बैठक में प्रशासनिक अमले के कई दिग्गज मौजूद रहे। मुख्य रूप से राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह, सचिव सीमा त्रिपाठी, अपर सचिव प्रशांत सीएच, निदेशक भू-अर्जन कमलेश कुमार सिंह, सहायक निदेशक सह अपर सचिव आजीव वत्सराज, सहायक निदेशक सह जनसंपर्क पदाधिकारी जूही कुमारी, सहायक भू-अर्जन पदाधिकारी कमल नयन कश्यप, पंकज कुमार झा, मनोज गुप्ता, और अवर सचिव शिव जी सहित अन्य विभागीय उच्चाधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से जुड़े रेलवे, एनएचएआई और पथ निर्माण विभाग के शीर्ष इंजीनियरों एवं वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया और अपनी-अपनी परियोजनाओं में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को साझा किया, जिसके आपसी समन्वय से तत्काल निष्पादन का रास्ता निकाला गया।

मंत्री के कड़े निर्देश: बैठक के मुख्य बिंदु

  • समय सीमा का कड़ाई से पालन: भू-अर्जन के सभी लंबित मामलों, मुआवजा भुगतान और अवार्ड घोषणा की प्रक्रिया को एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरा करने का अल्टीमेटम दिया गया है।
  • टीम भावना से होगा काम: जहां कहीं भी जिला प्रशासन या अन्य तकनीकी एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी है, वहां टीम भावना के साथ समन्वय स्थापित कर समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने की हिदायत दी गई है।
  • गति और पारदर्शिता दोनों जरूरी: बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए भू-अर्जन की प्रक्रिया में रफ्तार के साथ-साथ पूरी पारदर्शिता का होना अत्यंत आवश्यक है।
  • मुनावजा वितरण में तेजी: रैयतों (जमीन मालिकों) के मुआवजे से जुड़े विवादों को त्वरित गति से सुलझाने और सही हकदार को अविलंब भुगतान करने का निर्देश दिया गया।

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बिहार में 1 जुलाई से वी बी जी आर ए एम जी योजना पूरी तरह लागू, मखानों और फलों को मिलेगा इंटरनेशनल मार्केट, जीविका दीदियां बनेंगी लखपति!

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की हाई-लेवल बैठक में तगड़ा फैसला; 30 जून से पहले मनरेगा का सारा बकाया होगा साफ, बक्सर और लखीसराय में खुलेंगे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस!

विशेष संवाददाता, पटना 17 जून 2026

पटना: बिहार के चौतरफा विकास को एक नई और अभूतपूर्व ऊंचाई पर ले जाने के लिए केंद्र और राज्य की डबल-इंजन सरकार ने पूरी तरह से कमर कस ली है । पटना के लोक सेवक आवास स्थित संकल्प सभागार में एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया । इस महाबैठक में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण सह ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संयुक्त रूप से राज्य के कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े हुए अत्यंत संवेदनशील और गंभीर विषयों पर विस्तृत विमर्श किया । बैठक में दोनों नेताओं ने साफ तौर पर कहा कि केंद्र और राज्य का यह मजबूत नीतिगत सहयोग बिहार को प्रगति के एक ऐसे नए शिखर पर स्थापित करेगा, जिसकी कल्पना पहले कभी नहीं की गई थी ।

पटना स्थित लोक सेवक आवास के संकल्प सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में नीतिगत चर्चा करते केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण सह ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी । बैठक में कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत सहित केंद्र और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास की योजनाओं को रफ्तार देने के लिए गंभीर विमर्श में शामिल हैं ।

मनरेगा बकाए का होगा पूर्ण भुगतान, 1 जुलाई से मचेगी धूम

इस ऐतिहासिक बैठक के दौरान ग्रामीण श्रमिकों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए एक अत्यंत साहसिक और बड़ा निर्णय लिया गया है । केंद्र सरकार के पूर्ण सहयोग से मनरेगा की तमाम लंबित और बकाया राशियों का भुगतान आगामी 30 जून से पहले हर हाल में सुनिश्चित कर दिया जाएगा । इसके साथ ही, राज्य के ग्रामीण विकास को बिल्कुल नई और आधुनिक दिशा देने वाली महत्वाकांक्षी वी बी जी आर ए एम जी योजना को आगामी 1 जुलाई से पूरे बिहार में पूरी तरह से धरातल पर लागू कर दिया जाएगा ।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 की प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया कि बिहार में कुल 1 करोड़ 4 लाख लोगों को चिन्हित किया गया था, जिनमें से गहन जांच के बाद 60 लाख लोग पूरी तरह से योग्य पाए गए हैं । उन्होंने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि इन सभी 60 लाख गरीब परिवारों को जल्द से जल्द पक्का मकान मुहैया कराया जाए । नए वित्तीय वर्ष में इस योजना के अंतर्गत देश का पहला मकान बिहार को मिलना पूरी तरह से तय हो चुका है, जो राज्य के लिए गौरव की बात है ।

लखपति दीदी अभियान में बिहार देश में नंबर 1

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार की आजीविका योजना के तहत जीविका दीदी को लखपति दीदी बनाने की योजना पर बिहार सरकार तेजी से काम कर रही है । इस अभियान में बिहार पूरे देश में नंबर 1 स्थान पर कायम है । राज्य सरकार इस गति को और आगे बढ़ाएगी । बिहार में आयोजित होने वाले सरस मेलों में ग्रामीण क्षेत्र की बहनें अपना उत्पाद बेचती हैं । इसमें ग्रामीण बहनों की आजीविका को प्रोत्साहित करने और सरस मेलों के सफल आयोजन में केंद्र सरकार पूरा सहयोग देगी ।

बक्सर और लखीसराय में टमाटर-प्याज के आदर्श केंद्र

कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए राज्य में विशेष रूप से प्याज, टमाटर, और आम जैसे महत्वपूर्ण कृषि उत्पादों के लिए अत्याधुनिक ‘आदर्श केंद्रों’ की स्थापना की जाएगी । मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय मंत्री के समक्ष विशेष तौर पर बक्सर एवं लखीसराय में टमाटर तथा प्याज के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना का मजबूत प्रस्ताव रखा, जिस पर केंद्रीय मंत्री ने सहर्ष सहमति जताई । इसके अतिरिक्त, बिहार के मेहनती किसानों को उनकी फसलों और उपज का वैश्विक स्तर पर सही और लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए राज्य के विशिष्ट फलों को सीधे अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से जोड़ा जाएगा । वैश्विक स्तर पर मखाना की लगातार बढ़ती हुई भारी मांग को देखते हुए राज्य में एक स्वतंत्र मखाना बोर्ड के निर्माण की प्रक्रिया को भी बहुत जल्द पूरा करने पर बल दिया गया ।

एकीकृत खेती का मॉडल बनेगा बिहार

बिहार देश का वह पहला गौरवशाली राज्य रहा है जिसने सबसे पहले कृषि रोड मैप को पूरी तत्परता से अपनाया था । इसी शानदार ऐतिहासिक गौरव को आगे बढ़ाते हुए अब राज्य सरकार द्वारा एकीकृत खेती पर विशेष रूप से जोर दिया जाएगा, ताकि बिहार को पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय मॉडल राज्य के रूप में विकसित किया जा सके । पर्यावरण के संतुलन को अक्षुण्ण रखने और कृषि भूमि की लगातार घटती उर्वरता को दोबारा बहाल करने के लिए विभिन्न वॉटरशेड परियोजनाओं तथा मिट्टी संरक्षण कार्यक्रमों को प्रशासनिक स्तर पर पूरी तेजी के साथ धरातल पर उतारा जाएगा ।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी सरकार सुशासन और ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मूल संकल्प के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है । समय की महत्ता को समझते हुए पूरी प्रशासनिक टीम बिना किसी समझौते के और पूर्ण पारदर्शिता के साथ इन जनकल्याणकारी योजनाओं को सीधे आम जनता तक पहुंचाएगी ।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पटना आगमन पर हवाईअड्डे पर उनका भव्य और आत्मीय अभिनंदन करते संगठन महामंत्री भीखूभाई दलसानिया, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, सांसद रामकृपाल यादव, विधायक संजीव चौरसिया, नितिन अभिषेक, सरोज रंजन पटेल, प्रीति शेखर एवं अन्य वरिष्ठ नेतागण।

हवाईअड्डे पर हुआ केंद्रीय मंत्री का भव्य स्वागत

इससे पूर्व, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पटना हवाईअड्डे पर आगमन पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उनका बेहद आत्मीय और गर्मजोशी से स्वागत किया। हवाईअड्डे पर केंद्रीय मंत्री के भव्य अभिनंदन के लिए संगठन महामंत्री भीखूभाई दलसानिया, उपमुख्यमंत्री सह मंत्री विजय कुमार सिन्हा, मंत्री रामकृपाल यादव, विधायक संजीव चौरसिया, विधायक रत्नेश कुशवाहा, महामंत्री नितिन अभिषेक, सरोज रंजन पटेल, प्रीति शेखर सहित कई अन्य वरिष्ठ और सम्मानित पदाधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में ये दिग्गज रहे मौजूद

संकल्प सभागार में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल, ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह सहित भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग तथा ग्रामीण विकास विभाग के कई वरीय और उच्चाधिकारी भी मुख्य रूप से उपस्थित थे ।

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खौफ में माफिया! बिहार की नदियों में बालू खनन पर 15 अक्टूबर तक लगा पूर्ण लॉकडाउन, अवैध कदम रखा तो सीधे जेल और भारी जुर्माना!

विकास कार्य नहीं होंगे प्रभावित: पर्याप्त भंडारण का दावा, खान एवं भूतत्व मंत्री प्रमोद कुमार की अवैध खनन पर शून्य सहनशीलता नीति लागू

पटना/संवाददाता। बिहार सरकार ने पर्यावरण संरक्षण, नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने और जनसुरक्षा के मद्देनजर एक बड़ा और बेहद सख्त फैसला लिया है। राज्य में मानसून की अवधि को देखते हुए 15 जून से 15 अक्टूबर 2026 तक सभी नदियों से बालू एवं मिट्टी के खनन, लोडिंग, परिवहन तथा भंडारण पर पूरी तरह से प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। राज्य सरकार ने दो टूक चेतावनी दी है कि इस अवधि के दौरान यदि किसी भी प्रकार का खनन या परिवहन किया गया, तो उसे पूरी तरह अवैध माना जाएगा और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फाइल फोटो: खान एवं भूतत्व मंत्री प्रमोद कुमार।

खान एवं भूतत्व मंत्री प्रमोद कुमार ने इस संबंध में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। वर्षा ऋतु के दौरान नदियों की जलधारा और उनके प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए यह रोक एक अनिवार्य पर्यावरणीय आवश्यकता है। उन्होंने जनता और निर्माण एजेंसियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि इस चार महीने के प्रतिबंध के दौरान राज्य में चल रही विकास योजनाओं या आम लोगों के निजी गृह निर्माण कार्यों पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ेगा। सरकार के पास बालू का पर्याप्त स्टॉक और भंडारण पहले से उपलब्ध है।

मंत्री प्रमोद कुमार ने बताया कि विभाग ने पहले ही स्टॉकिस्ट लाइसेंसधारियों और बालू घाटों के सेकेंडरी लोडिंग पॉइंट्स के माध्यम से भारी मात्रा में बालू का सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित कर लिया है। आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन का सहारा लिया जा रहा है। इसी कड़ी में सोन, किऊल, फल्गु,

मोरहर और चानन जैसी प्रमुख नदियों में सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट (सीएमपीडीआई) के माध्यम से बालू पुनर्भरण का वैज्ञानिक अध्ययन कराया जा रहा है। इस व्यापक अध्ययन की रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में खनन प्रबंधन को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी तथा पर्यावरण-अनुकूल बनाया जाएगा।

अवैध खनन पर सख्ती जारी: तस्‍वीर में पटना जिला में खान एवं भूतत्व विभाग की टीम द्वारा छापेमारी के दौरान बालू से लदे 03 ट्रैक्टर जप्‍त ,  

कानून तोड़ने वालों पर गिरेगी गाज: नियम उल्लंघन पर सख्त एक्शन

जिला प्रशासन ने अवैध खनन के विरुद्ध शून्य सहनशीलता (जीरो टॉलरेंस) नीति अपनाई है। इस प्रतिबंध अवधि में नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ निम्नलिखित सख्त कदम उठाए जाएंगे:

  • प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज: प्रतिबंधित अवधि में अवैध खनन या परिवहन करने वालों पर तुरंत मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
  • वाहन और मशीनें होंगी जब्त: अवैध कार्य में शामिल सभी गाड़ियों, नावों और पोकलेन मशीनों को तुरंत जब्त कर लिया जाएगा।
  • भारी शमन शुल्क: दोषियों से भारी आर्थिक जुर्माना (शमन शुल्क) वसूला जाएगा और कठोर कानूनी कार्रवाई के तहत उन्हें जेल भेजा जाएगा।

प्रशासन की चौबीसों घंटे पैनी नजर

अवैध खनन को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने के लिए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। पूरे राज्य में नियमित गश्ती, औचक छापेमारी और सघन संयुक्त जांच अभियान चलाए जाएंगे। सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को हर छोटे-बड़े बालू घाट पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

सतर्क नागरिक बनें: यहाँ दें सूचना, नाम रहेगा गुप्त

विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे अवैध खनन या खनिज परिवहन से जुड़ी किसी भी शिकायत या संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साझा करें। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं:

  • हेल्पलाइन नंबर: 9472238821 या 112 (नोट: सूचना देने वाले सभी नागरिकों की पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी।)

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बेतिया में बड़ी कार्रवाई: 15,000 की घूस लेते रंगे हाथ धराया डेटा एंट्री ऑपरेटर  राज कुमार मिश्र  

जमाबंदी का लॉक खोलने के एवज में मांग रहा था रिश्वत, पटना से पहुंची टीम ने बिछाया जाल

बेतिया/पटना। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ नीतीश सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। मंगलवार, 16 जून 2026 को पटना से आई निगरानी ब्यूरो की मुख्यालय टीम ने बेतिया अंचल कार्यालय में छापेमारी कर डेटा एंट्री ऑपरेटर राज कुमार मिश्र को 15,000 रुपये की घूस लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। इस अचानक हुई कार्रवाई से अंचल कार्यालय और पूरे जिले के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

निगरानी के शिकंजे में घूसखोर: बेतिया अंचल कार्यालय से 15,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार डेटा एंट्री ऑपरेटर राज कुमार मिश्र (लाल घेरे में) निगरानी ब्यूरो के पुलिसकर्मियों की गिरफ्त में।

ताला खोलने के नाम पर मांग रहा था मोटी रकम

मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई एक पीड़ित की शिकायत पर की गई है। मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बरवत पससाईन (बेतिया, पश्चिम चम्पारण) के रहने वाले बालेश्वर कुमार (पिता: कृपा नारायण महतो) ने पटना स्थित निगरानी ब्यूरो के कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। बालेश्वर कुमार का आरोप था कि उनकी जमीन की जमाबंदी लॉक थी, जिसे खोलने के एवज में डेटा एंट्री ऑपरेटर राज कुमार मिश्र द्वारा लगातार रिश्वत की मांग की जा रही थी। बिना पैसे दिए काम करने से साफ मना किया जा रहा था।

निगरानी ने बिछाया जाल, रंगे हाथों दबोचा

शिकायत मिलने के बाद निगरानी ब्यूरो ने मामले को गंभीरता से लिया और गुप्त रूप से इसका सत्यापन कराया। जांच में ऑपरेटर द्वारा रिश्वत मांगे जाने का प्रमाण सही पाया गया। इसके बाद 15 जून 2026 को निगरानी थाना कांड संख्या 073/26 के तहत मामला दर्ज किया गया।

मामले की कमान पुलिस उपाधीक्षक श्याम बाबू प्रसाद को सौंपी गई। उनके नेतृत्व में एक विशेष धावा दल (रेडिंग टीम) का गठन किया गया। मंगलवार को जैसे ही परिवादी बालेश्वर कुमार ने अंचल कार्यालय बेतिया में राज कुमार मिश्र को केमिकल लगे 15,000 रुपये थमाए, वैसे ही पहले से घात लगाए बैठी निगरानी की टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया। टीम ने उसके पास से घूस की रकम बरामद कर ली है।

मुजफ्फरपुर कोर्ट में होगी पेशी

निगरानी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आरोपी डेटा एंट्री ऑपरेटर राज कुमार मिश्र से कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपी को मुजफ्फरपुर स्थित माननीय विशेष न्यायालय (निगरानी) में पेश किया जाएगा। विभाग ने साफ किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ यह अभियान आगे भी इसी तरह जारी रहेगा और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

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15 अगस्‍त के बाद जिला अस्‍पतालों से मरीज रेफर किए तो खैर नहीं! सी एम सम्राट चौधरी की डॉक्‍टरों को दो-टूक, सीवान में चीनी मिल का भी एलान!

30 दिन में फाइल क्‍लीयर वरना 31वें दिन नपेंगे अफसर! सी एम सम्राट चौधरी का बड़ा एलान, कहा- अपराधियों के लिए बिहार में कोई जगह नहीं!

सीवान/कैमूर: बिहार की प्रशासनिक और कानून व्यवस्था को पूरी तरह पटरी पर लाने के लिए सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। कैमूर और सीवान में आयोजित विशाल जनकल्याण सहयोग शिविरों को संबोधित करते हुए सी एम सम्राट चौधरी ने राज्य के स्वास्थ्य ढांचे, नौकरशाही (ब्यूरोक्रेसी) और अपराधियों को लेकर बेहद कड़े और सीधे निर्देश जारी किए हैं। सरकार का यह नया तेवर साफ संकेत देता है कि बिहार में अब ढुलमुल रवैये और अकर्मण्यता के दिन खत्म हो चुके हैं।

 कैमूर  में आयोजित जन कल्याण सहयोग शिविर में सी एम सम्राट चौधरी।

स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यवस्‍था पर सख्‍त हंटर: रेफरल खेल पर लगेगी पूरी रोक

बिहार के सरकारी जिला अस्पतालों से मरीजों को मामूली वजहों या संसाधनों की कमी का बहाना बनाकर बाहर (पटना या अन्य बड़े शहरों में) रेफर करने की प्रवृत्ति पर सी एम सम्राट चौधरी ने गहरी नाराजगी जताई है। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और विधायक मंगल पांडे की मौजूदगी में उन्होंने डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधकों को चेतावनी देते हुए कहा:

“जब सरकार अस्पतालों में पर्याप्त दवाइयां पहुंचा रही है, नई और आधुनिक बिल्डिंगें खड़ी कर दी गई हैं, तो फिर मरीजों को बाहर क्यों रेफर किया जा रहा है? डॉक्टरों को अब थोड़ी और मेहनत और ईमानदारी दिखानी होगी।”

 सीवान में आयोजित जन कल्याण सहयोग शिविर में  सी एम सम्राट चौधरी।

सी एम ने इसके लिए 15 अगस्त की अंतिम समय-सीमा (डेडलाइन) तय की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 15 अगस्त के बाद जिला और अनुमंडल अस्पतालों से मरीजों को बिना किसी बेहद गंभीर और अपरिहार्य कारण के रेफर किया गया, तो संबंधित डॉक्टरों और सिविल सर्जनों की खैर नहीं होगी। इस व्यवस्था की सीधी मॉनिटरिंग खुद मुख्य सचिव और जिलाधिकारियों को सौंप दी गई है। इसके साथ ही 31 दिसंबर तक राज्य के सभी अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (एडिशनल PHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) की सूरत बदलने का भी लक्ष्य रखा गया है।

सुशासन का नया फॉर्मूला: ’30 दिन में काम नहीं तो 31वें दिन सीधे सस्‍पेंशन

बिहार की अफसरशाही को जनता के प्रति जवाबदेह बनाने के लिए सरकार ने एक क्रांतिकारी प्रशासनिक व्यवस्था लागू की है। सहयोग शिविरों की सफलता का जिक्र करते हुए सी एम ने बताया कि अब तक प्राप्त 3.03 लाख आवेदनों में से 2.61 लाख से अधिक आवेदनों का निष्पादन कर लगभग 90% सफलता हासिल की गई है। इस प्रक्रिया को और पारदर्शी और तेज बनाने के लिए नया नियम तय किया गया है:

  • 11वां दिन: आवेदन के बाद 10 दिन तक आदेश न निकलने पर अफसर को पहला नोटिस।
  • 21वां दिन: 20 दिन पूरे होने पर दूसरा नोटिस और जवाब-तलब।
  • 26वां दिन: 25 दिनों तक काम न होने पर अंतिम चेतावनी के साथ आखिरी नोटिस।
  • 31वां दिन: अगर 30 दिनों के भीतर जनता की फाइल पर दस्तखत नहीं हुए, तो 31वें दिन संबंधित कर्मचारी या अधिकारी को सीधे निलंबित (सस्पेंड) कर दिया जाएगा।

सी एम ने अधिकारियों को काम करने की अपनी शैली बदलने को कहा है और नारा दिया कि अब 10 या 12 घंटे नहीं, बल्कि 20 घंटे काम करना होगा; ना खुद सोना है और ना अफसरों को सोने देना है, सिर्फ जनता का काम करना है।

अपराधियों को खुली चुनौती: “बिहार छोड़ो या श्‍मशान जाओ”

राज्य में उद्योग-धंधों को बढ़ावा देने और निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए सुशासन को पहली शर्त बताते हुए सम्राट चौधरी ने अपराधियों को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अपराध करने वाला किसी भी जाति या धर्म का हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। बिहार के बगल में उत्तर प्रदेश में ‘बाबा’ और दूसरी तरफ सुवेंदु अधिकारी के होने का जिक्र करते हुए उन्होंने मजाकिया लेकिन सख्त लहजे में कहा कि अपराधियों के पास अब सिर्फ नेपाल भागने का रास्ता बचा है, नहीं तो उनका सीधा ठिकाना श्‍मशान होगा।

सीवान में चीनी मिल और 25 लाख घरों को मुफ्त सोलर बिजली की सौगात

सीवान की आर्थिक प्रगति को रफ्तार देने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर सी एम ने मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और स्थानीय प्रशासन को तुरंत जमीन चिन्हित कर सीवान में नई चीनी मिल खोलने की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया।

इसके साथ ही, राज्य सरकार के बड़े आर्थिक संकल्पों की घोषणा करते हुए उन्होंने बताया कि:

  • मुफ्त सोलर बिजली: अगले दो वर्षों के भीतर बिहार के 25 लाख गरीब और बीपीएल परिवारों के घरों पर मुफ्त सोलर प्लांट लगाए जाएंगे। इससे जनता को बिजली तो मुफ्त मिलेगी ही, साथ ही 125 यूनिट से अधिक उत्पादित बिजली का पैसा सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाएगा।
  • 1 करोड़ रोजगार: विकसित भारत और समृद्ध बिहार के संकल्प के तहत वर्ष 2030 तक राज्य के 1 करोड़ युवाओं को नौकरी और रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।
  • प्रखंडों में डिग्री और मॉडल स्कूल: इसी जुलाई महीने से उन सभी प्रखंडों में डिग्री कॉलेज शुरू किए जाएंगे जहां कॉलेज नहीं हैं। साथ ही, हर प्रखंड में मॉडल स्कूल बनेंगे जहां नीट,जेईई और आईआईटी  की उच्च स्तरीय कोचिंग मुफ्त मिलेगी।
कैमूर  में माँ मुंडेश्वरी धाम से पूजा अर्चना कर निकलते सी एम सम्राट चौधरी।

कैमूर के विकास और मुंडेश्‍वरी धाम का कायाकल्‍प

इस महा-अभियान के तहत कैमूर की धरती को 196.06 करोड़ रुपये की 60 विकास योजनाओं की सौगात मिली, जबकि सीवान को 180 करोड़ रुपये की 38 योजनाओं का तोहफा मिला। कैमूर के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक माँ मुंडेश्वरी धाम का जीर्णोद्धार कर वहां श्रद्धालुओं के लिए रोपवे का निर्माण किया जाएगा। साथ ही, पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्र में एयरपोर्ट के विकास और हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने की महत्वपूर्ण पहल की जाएगी।

गरिमामयी उपस्थिति

सीवान में इस ऐतिहासिक आयोजन के गवाह सीवान की सांसद विजय लक्ष्मी, महाराजगंज के सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, पूर्व मंत्री व विधायक मंगल पांडे, विधायक इंद्रदेव सिंह पटेल, अमरनाथ शाह, देवेश कांत सिंह, कर्णजीत सिंह व्यास, भीष्म प्रताप सिंह, विष्णुदेव पासवान, विधान परिषद सदस्य वीरेंद्र नारायण यादव, पूर्व सांसद ओमप्रकाश यादव, पूर्व सांसद कविता सिंह, पूर्व विधान परिषद सदस्य मनोज सिंह बने। प्रशासनिक स्तर पर सी एम के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, डीजीपी विनय कुमार, सचिव संजय सिंह, राहुल तिवारी, विकास कुमार, महादेव पासवान, अभय सिंह, रिज़वान, चंद्रकेतु सिंह और संजय पांडे सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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