राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल का कड़ा फैसला: 17 जून तक 95.73% स्कैनिंग और 60.27% पोर्टल अपलोडिंग पूरी, लापरवाही बरतने वाले अंचल और राजस्व अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय!
पटना, 17 जून 2026: बिहार में भूमि सुधार और जमीन संबंधी समस्याओं से आम जनता को बड़ी राहत देने के लिए सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा दांव खेल दिया है। बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा चलाए जा रहे ‘राजस्व महा-अभियान’ को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। प्राप्त 46 लाख से अधिक लंबित आवेदनों के त्वरित निष्पादन के लिए चलाया जा रहा विशेष अभियान अब 21 जून 2026 तक जारी रहेगा। सरकार का मुख्य लक्ष्य सभी 46 लाख आवेदनों की स्कैनिंग और डिजिटल पोर्टल पर अपलोडिंग के कार्य को शत-प्रतिशत पूरा करना है, ताकि रैयतों को सीधे और पारदर्शी तरीके से लाभ मिल सके।

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि इस अवधि में सभी लंबित आवेदनों की शत-प्रतिशत स्कैनिंग और संबंधित ऑनलाइन पोर्टलों पर अपलोडिंग सुनिश्चित की जाए। इस डिजिटल क्रांति का सीधा उद्देश्य भूमि अभिलेख सुधार, उत्तराधिकार नामांतरण (म्यूटेशन) और पारिवारिक बंटवारा आधारित नामांतरण से जुड़े मामलों का बहुत ही तेजी और पारदर्शिता के साथ निष्पादन करना है।
एक सप्ताह में दर्ज हुई ऐतिहासिक प्रगति (मुख्य आंकड़े):
विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 11 जून से 17 जून तक चलाए गए इस विशेष अभियान के दौरान राज्यभर में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।
- महा-अभियान के तहत प्राप्त कुल 46,25,957 आवेदनों में से 95.73 प्रतिशत आवेदनों की स्कैनिंग पूरी कर ली गई है, जबकि अभियान शुरू होने से पहले यह आंकड़ा मात्र 81.91 प्रतिशत था।
- इसके अलावा, 60.27 प्रतिशत आवेदन संबंधित ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके हैं, जो अभियान से पहले सिर्फ 26.43 प्रतिशत पर सिमटा हुआ था। एक सप्ताह के भीतर स्कैनिंग और अपलोडिंग दोनों में यह एक बड़ी छलांग है।

शानदार प्रदर्शन करने वाले अग्रणी जिले:
दिलीप कुमार जायसवाल ने बेहतरीन काम करने वाले जिलों की सराहना करते हुए कहा कि कई जिलों ने इस महा-अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। स्कैनिंग के मामले में खगड़िया जिला 99.92 प्रतिशत कार्य पूरा करके सबसे आगे चल रहा है। इसके ठीक पीछे दरभंगा में 99.72 प्रतिशत, पूर्णिया और वैशाली में 99.67 प्रतिशत, रोहतास में 99.53 प्रतिशत तथा समस्तीपुर और सुपौल में 99 प्रतिशत से अधिक स्कैनिंग का कार्य पूरा हो चुका है।
वहीं, पोर्टल अपलोडिंग के मामले में शिवहर जिला 89.92 प्रतिशत के साथ शीर्ष पायदान पर बना हुआ है। इसके अलावा किशनगंज (86.47 प्रतिशत), खगड़िया (84.83 प्रतिशत), दरभंगा (80.61 प्रतिशत), पूर्णिया (77.82 प्रतिशत) और वैशाली (75.17 प्रतिशत) भी अग्रणी जिलों में शामिल हैं।
सुस्त अफसरों को मंत्री की दो टूक चेतावनी:
हालांकि, मंत्री ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि अभी भी कुछ जिलों में अपलोडिंग और मामलों के निष्पादन की गति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी है। उन्होंने ऐसे जिलों के अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने और अतिरिक्त मानव संसाधन (मैनपावर) लगाकर कार्यों को समयबद्ध रूप से पूरा करने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभियान की सफलता के लिए अंचल अधिकारियों (सीओ), राजस्व अधिकारियों और अन्य संबंधित कर्मियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की गई है तथा विभागीय मुख्यालय स्तर पर प्रतिदिन प्रगति की कड़ाई से निगरानी (मॉनिटरिंग) की जा रही है।

सचिव जय सिंह ने सभी जिलाधिकारियों को दिए कड़े निर्देश:
विभाग के सचिव जय सिंह ने भी राज्य के सभी जिलाधिकारियों (डीएम), अपर समाहर्ताओं (एडीएम), भूमि सुधार उप समाहर्ताओं (डीसीएलआर), बंदोबस्त पदाधिकारियों, अंचल अधिकारियों और राजस्व अधिकारियों को इस अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता देने तथा निर्धारित लक्ष्य हर हाल में पूरा करने का निर्देश दिया है। विभागीय मुख्यालय से इसकी लगातार समीक्षा और अनुश्रवण का काम मॉनिटरिंग टीम द्वारा जारी है।
दिलीप कुमार जायसवाल ने भरोसा जताया है कि माननीय मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार भूमि प्रशासन को पूरी तरह से पारदर्शी, डिजिटल और जनोन्मुखी बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 21 जून तक सभी लंबित आवेदनों की स्कैनिंग एवं पोर्टल अपलोडिंग का लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा, जिससे निष्पादन प्रक्रिया और तेज होगी तथा बिहार के लाखों रैयतों को सीधे तौर पर इसका बड़ा लाभ मिलेगा।
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