आसमान से जमीन तक चमकेगा बिहार, कैबिनेट बैठक में 29 बड़े फैसलों पर लगी ऐतिहासिक मुहर!

हेलीकॉप्टर से सैर करेंगे पर्यटक, सड़कों पर दौड़ेंगे डिजिटल कैमरे, और 5 बड़ी नदियों का होगा कायाकल्प – करोड़ों के बजट से बदलेगी राज्य की सूरत

विशेष ब्यूरो, पटना: बिहार में विकास, सुरक्षा और प्रशासनिक सुधारों के मोर्चे पर एक नया अध्याय शुरू हो गया है। राजधानी पटना में आयोजित राज्य मंत्रिपरिषद की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक में  सरकार ने कुल 29 एजेंडों पर अपनी ऐतिहासिक स्वीकृति दे दी है। इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने की। बैठक में लिए गए फैसले साफ तौर पर यह संकेत देते हैं कि राज्य सरकार अब पारंपरिक ढर्रे से अलग हटकर आधुनिक तकनीक, पर्यटन और वैज्ञानिक संसाधनों के उचित दोहन पर पूरा ध्यान केंद्रित कर रही है। बैठक समाप्त होने के बाद मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने मीडियाकर्मियों को फैसलों की बारीकियों और बजटीय आवंटन से अवगत कराया।

यह केवल सरकारी प्रस्तावों की मंजूरी नहीं है, बल्कि बिहार को आर्थिक और सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का एक बड़ा खाका है।

पटना में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित बिहार कैबिनेट की उच्चस्तरीय बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी।

 सड़क सुरक्षा में डिजिटल क्रांति: 622.04 करोड़ का आईटीएमएस प्रोजेक्ट

कैबिनेट का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला फैसला परिवहन विभाग की ओर से आया है। राज्य की सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं और दम तोड़ती यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सरकार ने 622.04 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट के साथ इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्‍टम  (आईटीएमएस) की स्थापना को हरी झंडी दी है।

  • पीपीपी मॉडल पर काम: यह पूरा प्रोजेक्ट पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर संचालित होगा, जिससे इसके क्रियान्वयन में निजी क्षेत्र की दक्षता का लाभ मिल सके।
  • क्या होगा असर: इसके तहत राज्य के प्रमुख राजमार्गों और शहरी चौराहों पर स्वचालित कैमरे, स्पीड डिटेक्टर और इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन उपकरण लगाए जाएंगे। इसका सीधा उद्देश्य मानवीय हस्तक्षेप को कम करके यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सीधे डिजिटल नकेल कसना और दुर्घटनाओं की दर में भारी कमी लाना है।

पर्यटन को लगे पंख: आसमान से दिखेगा बदलता बिहार

बिहार के पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कैबिनेट ने एक साथ तीन नई दूरगामी योजनाओं को मंजूरी दी है, जो राज्य में विदेशी और घरेलू पर्यटकों की आमद को कई गुना बढ़ा सकती हैं:

  • मुख्यमंत्री बिहार हेली-टूरिज्म एवं एयर टूरिज्म सेवा योजना 2026: इसके तहत राज्य के प्रमुख धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों (जैसे बोधगया, राजगीर, वैशाली और भागलपुर) को आपस में जोड़ने के लिए हेलीकॉप्टर और छोटे विमानों की सेवाएं शुरू की जाएंगी। इससे पर्यटकों का समय बचेगा और वीआईपी टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।
  • मुख्यमंत्री होमस्टे प्रोत्साहन योजना 2026: ग्रामीण और स्थानीय इलाकों में पर्यटकों को ठहरने के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं देने और स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार पैदा करने के लिए इस योजना के नीतिगत दिशा-निर्देशों को मंजूरी दी गई है।
  • सिंधु दर्शन तीर्थ यात्रा वित्तीय सहायता योजना 2026: इसके जरिए राज्य के उन श्रद्धालुओं को वित्तीय मदद दी जाएगी जो सिंधु दर्शन जैसी पवित्र और कठिन यात्राओं पर जाना चाहते हैं।

नदियों का वैज्ञानिक अध्ययन: अवैध खनन पर लगेगी अंतिम रोक

खान एवं भूतत्व विभाग के अंतर्गत राज्य की 5 जीवनदायिनी नदियों – सोन, किऊल, फल्गु, मोरहर और चानन नदी का पुनर्भरण अध्ययन (रेप्लेनिशमेंट स्टडी) कराने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया है।

  • करोड़ों का बजट: इस वैज्ञानिक शोध के लिए सरकार ने 2.32 करोड़ रुपये (2,32,69,600 रुपये) स्वीकृत किए हैं।
  • रणनीति का विश्लेषण: यह काम नामांकन के आधार पर सेंट्रल माइन प्लानिंग एण्ड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (सीएमडीपीआई) को सौंपा गया है। इस अध्ययन से यह पता चलेगा कि मानसून के बाद इन नदियों में कितनी मात्रा में बालू का प्राकृतिक रूप से पुनर्भरण होता है। इससे न केवल पर्यावरण की रक्षा होगी, बल्कि बालू माफियाओं द्वारा किए जाने वाले अवैध और अंधाधुंध खनन पर भी पूरी तरह से रोक लगाई जा सकेगी।

 बंपर भूमि अधिग्रहण: उद्योगों के लिए बिछेगा कालीन

राज्य में कल-कारखानों की स्थापना और निवेश को आकर्षित करने के लिए उद्योग विभाग के माध्यम से तीन महत्वपूर्ण जिलों में बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण के वित्तीय प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है:

  • कैमूर जिला: वाराणसी-राँची-कोलकाता एक्सप्रेसवे के नजदीक अंचल-चाँद एवं चैनपुर के विभिन्न मौजों में कुल 781.18 एकड़ भूमि के अधिग्रहण और बुनियादी ढांचा विकास प्राधिकरण (बियाडा) के माध्यम से विकास के लिए 2,30,64,97,009 रुपये की विशाल राशि मंजूर की गई है।
  • पूर्णिया जिला: अंचल-कृत्यानन्द नगर के विभिन्न मौजों में कुल 687 एकड़ रैयती भूमि के अधिग्रहण हेतु 1,25,32,38,925 रुपये स्वीकृत हुए हैं।
  • सहरसा जिला: अंचल-कहरा, मौजा-वनगाँव, देवनागोपाल तथा बलहर अराजी में कुल 420.62 एकड़ भूमि के लिए 88,01,13,847 रुपये के व्यय को हरी झंडी मिली है।

 प्रशासनिक और शैक्षणिक सुधार: खत्म हुआ इंटरव्यू का दौर

कैबिनेट ने सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता लाने के लिए एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। पथ निर्माण विभाग के तहत बिहार तकनीकी सेवा नियमावली 1999 में संशोधन करते हुए शोध सहायक के पद पर चयन के लिए पूर्व से चली आ रही अंतर्वीक्षा (इंटरव्यू) की व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। अब यह चयन पूरी तरह से प्रतियोगिता परीक्षा और शैक्षणिक मेधा के आधार पर बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) के माध्यम से पारदर्शी तरीके से होगा।

इसके साथ ही, भवन निर्माण विभाग के अंतर्गत राज्य के तमाम कार्य विभागों के सामान्य लिपिकीय संवर्ग के पदों पर भर्ती प्रक्रिया और सेवा शर्तों को विनियमित करने के लिए ‘कार्य विभाग क्षेत्रीय सामान्य लिपिकीय संवर्ग नियमावली 2026’ के गठन को भी स्वीकृति दी गई है।

संक्षिप्त : अन्य महत्वपूर्ण फैसले

  • एससी-एसटी कल्याण: बिहार राज्य अनुसूचित जाति सहकारिता विकास निगम लिमिटेड को राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (एनएसकेएफडीसी), नई दिल्ली के पुराने बकाये टर्म लोन के एकमुश्त भुगतान के लिए 21,95,00,000 रुपये जारी करने की मंजूरी दी गई।
  • संस्कृति का संरक्षण: कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के अधीन “बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप समिति” के गठन और इसके सोसायटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत निबंधन के प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई।
  • न्यायिक सुदृढ़ीकरण: पटना उच्च न्यायालय में सिविल जज (वरीय कोटि) के समकक्ष विशेष कार्य पदाधिकारी का 1 पद और मधुबनी न्यायमंडल के बेनीपट्टी में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय की स्थापना के लिए 1 पद के सृजन को स्वीकृति मिली।

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