Monday, June 8, 2026

निगरानी की ‘हाफ सेंचुरी’: 2026 में भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे तेज स्ट्राइक, कापें रिश्वतखोर!

ऐतिहासिक रफ्तार: 29 अप्रैल 2026 को इस साल का 50वां कांड दर्ज किया गया, जो पिछले 6 वर्षों में सबसे तेज है।

पटना | विशेष संवाददाता

बिहार में भ्रष्टाचार के दानव पर लगाम कसने के लिए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (VIB) ने इस वर्ष ‘सुपरफास्ट’ मोड में काम शुरू किया है। राज्य में जीरो टॉलरेंस की नीति को चरितार्थ करते हुए निगरानी ब्यूरो ने वर्ष 2026 के शुरुआती चार महीनों में ही कार्रवाई का ‘अर्धशतक’ जड़ दिया है। ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, 29 अप्रैल 2026 को इस साल का 50वां कांड दर्ज किया गया, जिसने पिछले 6 वर्षों के सभी रिकॉर्ड्स को ध्वस्त कर दिया है।

पिछले 6 वर्षों में सबसे प्रचंड प्रहार

निगरानी ब्यूरो द्वारा जारी तुलनात्मक आंकड़ों पर नजर डालें तो भ्रष्टाचार के विरुद्ध यह अब तक की सबसे तेज स्ट्राइक है। साल 2025 में 50वां मामला दर्ज होने में जुलाई तक का समय लगा था, जबकि 2024 में पूरे साल में केवल 12 और 2023 में महज 36 मामले ही सामने आए थे। ब्यूरो की इस सक्रियता ने सचिवालय से लेकर प्रखंड कार्यालयों तक बैठे घूसखोरों की नींद उड़ा दी है।

ट्रैप का जाल: राजस्व और पुलिस विभाग में हड़कंप

इस साल अब तक हुए कुल कांडों में से 45 मामले ‘रंगे हाथ गिरफ्तारी’ (Trap) के हैं। विभागवार आंकड़ों के मुताबिक:

  • राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग: 08 ट्रैप (सबसे ज्यादा)
  • पुलिस विभाग: 07 ट्रैप
  • पंचायती राज विभाग: 04 ट्रैप
  • स्वास्थ्य विभाग: 03 ट्रैप इसके अलावा शिक्षा, खनन, कृषि और विश्वविद्यालय स्तर पर भी भ्रष्ट अधिकारी ब्यूरो के चंगुल में फंसे हैं।

बड़ी मछलियां भी नहीं बच पाईं

इस साल के अभियान की खास बात यह रही कि ब्यूरो ने सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि ‘बड़ी मछलियों’ पर भी शिकंजा कसा है। 45 ट्रैप कांडों में से 8 मुख्य मामले ऐसे हैं जहाँ रिश्वत की राशि 50,000 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक थी:

  1. परमजय सिंह (सहायक निदेशक, युवा रोजगार): 5,00,000 रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार।
  2. मो. सनाउल्लाह खान (सहायक कुल सचिव, पटना): 2,50,000 रुपये घूस लेते धरे गए।
  3. मुकेश कुमार (प्रशाखा पदाधिकारी, मुंगेर): 1,70,000 रुपये लेते रंगे हाथ गिरफ्तार।
  4. देवकांत कुमार (पु.अ.नि., राजगीर): 90,000 रुपये लेते होटल से पकड़े गए।

जनता से सीधी अपील

निगरानी ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई जनता के सहयोग से ही संभव है। यदि कोई सरकारी सेवक रिश्वत की मांग करता है, तो आम नागरिक बेझिझक ब्यूरो के टोल-फ्री नंबरों, व्हाट्सएप नंबर (9473494167) या ईमेल पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। ब्यूरो ने आश्वासन दिया है कि शिकायतकर्ताओं की पहचान गुप्त रखी जाएगी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

मुरौल नगर पंचायत में ‘गैस’ पर घमासान! उप-मुख्य पार्षद बोले- ‘चुप’ है पद, मुख्य पार्षद ने झाड़ा पल्ला, पार्षद जाएंगे अनशन पर!

मुद्दे की बात पर बकलोलीका ठप्पा! मुरौल में गैस संकट पर भिड़े माननीय, जनता पूछ रहीहमारा हक कहाँ है?”

मुरौल (मुजफ्फरपुर): नगर पंचायत मुरौल में जनता की मूलभूत सुविधाओं को लेकर सियासत का पारा चढ़ गया है। एक तरफ वार्ड संख्या 3 के पार्षद आनंद कंद साह ने गैस आपूर्ति की समस्या को लेकर 30 अप्रैल से ‘आमरण अनशन’ का बिगुल फूंक दिया है, तो दूसरी तरफ नगर सरकार के शीर्ष पदों पर बैठे जनप्रतिनिधियों के बयानों ने इस विवाद में घी डालने का काम किया है। न्यूज़ भारत टीवी के पत्रकार कुमार ‘पंकज’ ने जब इस मुद्दे पर ‘नगर सरकार’ के कर्ता-धर्ताओं से सीधी बात की, तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई।


प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

मुख्य पार्षद की बेरुखी: सवाल सुनते ही काटा फोन

नगर पंचायत के अध्यक्ष (मुख्य पार्षद) नरेश मेहता का रवैया इस गंभीर मुद्दे पर पूरी तरह उदासीन दिखा। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उन्हें इस अनशन या पार्षद आनंद कंद साह से कोई लेना-देना नहीं है। हद तो तब हो गई जब पत्रकार ने उनसे जनता से जुड़ा वाजिब सवाल पूछा— “नगर पंचायत घोषित होने के बाद भी जनता को शहरी गैस सुविधा क्यों नहीं मिल रही?” इस सवाल का जवाब देने के बजाय मुख्य पार्षद ने फोन ही काट दिया। उनका यह मौन, इशारा करता है कि जैसे क्षेत्र में कोई समस्या ही नहीं है।

उप-मुख्य पार्षद का बकलोलीवाला तंज और लाचारी

उपाध्यक्ष (उप-मुख्य पार्षद) अजय कुमार ने इस पूरे आंदोलन को ही ‘बकलोली’ करार दे दिया। उन्होंने कहा कि यह आनंद कंद साह की ‘स्पेशल राजनीति’ है। हालांकि, जब उनसे किये गये कागजी कार्रवाई पर सवाल हुआ, तो उन्होंने अपनी लाचारी जाहिर करते हुए यहाँ तक कह दिया कि— “उप मतलब ‘चुप’ होता है।” उन्होंने अधिकारियों (EO) पर असहयोग का ठीकरा फोड़ते हुए कहा कि वे लिखकर थक चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं होती।

पार्षदों का मिला-जुला रुख: कोई साथ, कोई अनजान

जहाँ वार्ड 2 के पार्षद श्याम कुमार और वार्ड 6 की पार्षद गुड़िया देवी ने आनंद कंद साह के अनशन का खुला समर्थन किया है और साथ बैठने का दावा किया है, वहीं वार्ड 1 के पार्षद राजीव कुमार, वार्ड 5 के पार्षद विजय पासवान और वार्ड 7 की पार्षद संजू देवी के प्रतिनिधि विजय राय ने बताया कि उन्हें इस अनशन की जानकारी व्यक्तिगत तौर पर नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से मिली है। हालांकि, सभी ने माना कि गैस आपूर्ति का मुद्दा जायज है।


इन जनप्रतिनिधियों से नहीं हो सका संपर्क

जनता की आवाज बुलंद करने की इस कोशिश में कई पार्षदों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। वार्ड संख्या 8 के पार्षद संजय कुमार के बारे में पता चला कि वे बीमार हैं। वार्ड संख्या 9 की पार्षद जुबैदा खातून को कई बार (शाम 4:17 और 4:27 बजे) कॉल किया गया, लेकिन उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। वहीं वार्ड संख्या 10 की पार्षद सरस्वती देवी एवं उनके प्रतिनिधी संतोष कुमार के नंबर पर संपर्क नहीं हो सका। ऐसे में इन वार्डों की जनता की राय इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सामने नहीं आ पाई।


 टैक्स शहरी, सुविधा ग्रामीण! आखिर क्यों?

नगर पंचायत मुरौल की जनता आज दोहरी मार झेल रही है। नियमतः नगर निकाय बनने के बाद गैस सिलेंडर की होम डिलीवरी 25 दिनों के भीतर होनी चाहिए, लेकिन यहाँ आज भी 45 दिनों का ग्रामीण नियम लागू है। पार्षद बबलू कुमार (वार्ड 4) ने सही सवाल उठाया है कि सरकार होल्डिंग टैक्स तो शहरी दर पर वसूल रही है, लेकिन राशन, बिजली और गैस जैसी बुनियादी सुविधाओं के समय हमें ‘ग्रामीण’ मानकर छोड़ दिया जाता है।

30 अप्रैल का अनशन यह तय करेगा कि मुरौल की नगर सरकार जनता के प्रति जवाबदेह है या फिर यह आपसी गुटबाजी और ‘चुप’ रहने के खेल में ही उलझी रहेगी।


ब्यूरो रिपोर्ट: न्यूज़ भारत टीवी।

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आरक्षण का रण: ‘90% कोटा नहीं तो राज नहीं’, पटना की सड़कों पर पिछड़ों का सैलाब, पुलिस से भारी भिड़ंत!

पटना | विशेष संवाददाता बिहार की राजधानी पटना आज एक बार फिर बड़े आंदोलन की गवाह बनी। अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ के आह्वान पर आयोजित ‘विराट महारैली’ ने आज पटना की सड़कों पर ऐसा सैलाब लाया कि प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। गांधी मैदान के गेट नंबर 1 से शुरू हुआ यह जनसैलाब जब डाकबंगला चौराहे की ओर बढ़ा, तो पूरा सड़क ‘आरक्षण हमारा हक है’ के नारों से गूंज उठा।

राजभवन की ओर बढ़ते राष्ट्रीय अध्यक्ष इंद्र कुमार सिंह चंद्रपुरी एवं डाकबंगला चौराहे पर पुलिस के घेरे को चुनौती देते अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ के कार्यकर्ता।

पुलिसिया घेराबंदी और तीखी झड़प

महारैली जैसे ही डाकबंगला चौराहे पर पहुँची, पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की। देखते ही देखते शांतिपूर्ण प्रदर्शन रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। प्रदर्शनकारियों ने जब राजभवन कूच के लिए बैरिकेडिंग लांघने का प्रयास किया, तो पुलिस के साथ उनकी तीखी झड़प और धक्का-मुक्की हुई। घंटों तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा, जिसके बाद प्रशासन ने पाँच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को राज्यपाल से मिलने की अनुमति दी।

डाकबंगला चौराहे पर पुलिस के घेरे को चुनौती देते अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ के कार्यकर्ता।

वही राज करेगा, जो 90% आरक्षण की बात करेगा

संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंद्र कुमार सिंह चंद्रपुरी ने मीडिया को संबोधित करते हुए दो-टूक शब्दों में कहा, अब याचक बनकर नहीं, बल्कि हकदार बनकर लड़ाई लड़ी जाएगी। जो सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में 90% आरक्षण की बात करेगा, वही अब बिहार और भारत पर राज करेगा।” उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार को सीधी चेतावनी दी कि बहुसंख्यक आबादी की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

डाकबंगला चौराहे पर पुलिस के द्वारा की गई बैरेकेडिंग को धकेल कर आगे बढतें अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ के कार्यकर्ता।

आंदोलन की 4 मुख्य धुरी:

  1. न्यायपालिका में आरक्षण: संघ ने मांग की है कि उच्च न्यायपालिका (SC/HC) में जजों की नियुक्ति में SC, ST और OBC को प्राथमिकता दी जाए।
  2. 65% से 90% का सफर: बिहार में लागू 65% आरक्षण की सीमा को बढ़ाकर 90% करने की मांग बुलंद की गई।
  3. महिला आरक्षण में कोटा के भीतर कोटा‘: वक्ताओं ने कहा कि 33% महिला आरक्षण में केवल पिछड़ी, दलित और अल्पसंख्यक महिलाओं को जगह मिले, क्योंकि सवर्ण महिलाएं पहले से ही सशक्त हैं।
  4. UGC बिल: यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में वंचित वर्ग के छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यूजीसी बिल को अविलंब लागू करने की मांग की गई।
आरक्षण की सीमा को बढ़ाने को लेकर पटना की सड़को पर प्रदर्शन करती महिलायें  

मुजफ्फरपुर से लेकर पटना तक एकजुटता

इस महारैली में सिर्फ पटना ही नहीं, बल्कि मुजफ्फरपुर, गया और दरभंगा जैसे जिलों से हजारों की संख्या में छात्र, युवा, महिलाएं और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। मुजफ्फरपुर से आए संतोष कुमार कुशवाहा के नेतृत्व में हजारों लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। आंदोलन में अनिमेष कुमार मलिक, शशि गुप्ता और आनंद सिंह जैसे नेताओं ने साफ किया कि यह लड़ाई तब तक थमेगी नहीं, जब तक संवैधानिक अधिकारों को पूरी तरह से लागू नहीं कर दिया जाता।

“जुझारू नेतृत्व” – तपती धूप में भी अपने अधिकारों के लिए डटे हुए विभिन्न जिलों से आए युवा और महिलाएं।

राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

प्रतिनिधिमंडल ने राजभवन जाकर महामहिम राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि यदि इन मांगों पर जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले चुनाव में बहुजन समाज अपनी ताकत का अहसास करा देगा। देर शाम तक पटना की सड़कों पर आंदोलनकारियों की भीड़ जमी रही, जिससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।

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118 दिनों से जारी ‘मनरेगा वॉच’ का महा-आंदोलन फिलहाल स्थगित; सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम, वरना फिर भड़केगा जन-आक्रोश!

मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर समाहरणालय परिसर में बीते 118 दिनों से मनरेगा मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ रहे ‘मनरेगा वॉच’ के आंदोलन ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे मजदूरों का आक्रोश फिलहाल थम गया है, लेकिन इसके पीछे एक बड़ी शर्त और सरकार को दिया गया सख्त अल्टीमेटम छिपा है।

मुजफ्फरपुर समाहरणालय परिसर में अपनी मांगों को लेकर माइक थामे आंदोलन का नेतृत्व करते संजय सहनी और उनके साथ मौजूद मनरेगा वॉच के सदस्य।

पटना से सकारात्मक वार्ता के बाद फैसला मनरेगा वॉच के मुख्य कार्यकर्ता संजय सहनी ने जानकारी दी कि पटना में ग्रामीण विकास विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ हुई सकारात्मक वार्ता के बाद इस आंदोलन को फिलहाल 15 दिनों के लिए स्थगित किया गया है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि अगले पखवाड़े में मजदूरों की सभी लंबित समस्याओं का निराकरण कर दिया जाएगा।

क्यों सुलग रहा था आंदोलन? बता दें कि मनरेगा में ‘कैंपिंग एक्जम्पशन’ और प्रशासनिक जटिलताओं के कारण मजदूरों को लंबे समय से काम नहीं मिल रहा था, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट गहरा गया था। इसी मुद्दे को लेकर मुजफ्फरपुर के समाहरणालय पर 118 दिनों से निरंतर धरना प्रदर्शन चल रहा था।

‘वादा खिलाफी हुई तो फिर सड़कों पर उतरेंगे’ संजय सहनी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यह पूर्ण विराम नहीं, बल्कि एक अल्पविराम है। यदि 15 दिनों के भीतर सरकार ने अपनी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की, तो मनरेगा वॉच फिर से उग्र आंदोलन शुरू करेगा। इस धरना प्रदर्शन में बबीता देवी, जीनत प्रवीण, पिंकी देवी, मुन्नी देवी और रेखा देवी समेत दर्जनों कार्यकर्ताओं ने अपनी आवाज बुलंद की।

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दिल्ली पुलिस की ‘गुंडागर्दी’ का शिकार हुआ बिहारी युवक: समस्तीपुर में फूटा जनता का गुस्सा, फूंका गृहमंत्री का पुतला

समस्तीपुर, 29 अप्रैल 2026 | देश की राजधानी दिल्ली में बिहारी पहचान को निशाना बनाकर की गई एक जघन्य हत्‍या ने बिहार के समस्तीपुर में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। दिल्ली के द्वारका इलाके में एक डिलीवरी बॉय की दिल्ली पुलिस के जवान द्वारा गोली मारकर हत्या किए जाने के विरोध में आज समस्तीपुर की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। आइसा (AISA) और नागरिक समाज के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने जोरदार प्रतिरोध मार्च निकाला और दिल्ली पुलिस की ‘गुंडागर्दी’ के खिलाफ अपना गुस्सा जताते हुए गृहमंत्री अमित शाह का पुतला फूंका।

समस्तीपुर की सड़कों पर गृहमंत्री अमित शाह का पुतला फूंकते आइसा और नागरिक समाज के कार्यकर्ता, घटना के प्रति गहरे आक्रोश में दिख रहे हैं प्रदर्शनकारी।

सड़कों पर गूंजे न्याय के नारे

शहर के सर्किट हाउस से शुरू हुआ यह प्रतिरोध मार्च मुख्य मार्गों से होता हुआ गायत्री कॉम्प्लेक्स तक पहुंचा। हाथों में ‘क्‍या बिहारी होना गुनाह है?’ और दोषियों को फांसी देने की मांग वाली तख्तियां लिए प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यह मार्च देखते ही देखते एक  सभा में तब्दील हो गया, जिसकी अध्यक्षता आइसा जिला अध्यक्ष लोकेश राज ने की और मंच का संचालन जिला सचिव सुनील कुमार सिंह ने किया।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार की रात दिल्ली के द्वारका इलाके में खगड़िया जिले का निवासी और डिलीवरी बॉय का काम करने वाला पांडव कुमार अपने एक दोस्त के साथ पार्टी से घर लौट रहा था। आरोप है कि दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल नीरज बलहारा ने उन्हें रोककर अभद्र भाषा का प्रयोग किया। जब पांडव ने इस ‘गुंडागर्दी’ का विरोध किया, तो पुलिसकर्मी ने उसे सीने में गोली मार दी। गोली पांडव के सीने को भेदते हुए पीछे बैठे उसके दोस्त को भी जा लगी। अस्पताल ले जाने के दौरान पांडव की मौत हो गई, जबकि उसका साथी अभी भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।

‘क्या बिहारी होना गुनाह है?’ के पोस्टर और तख्तियां लिए प्रदर्शनकारी। ये तस्वीरें दिल्ली पुलिस की बर्बरता के खिलाफ समस्तीपुर के लोगों के भारी गुस्से को बयां कर रही हैं।

नेताओं ने की तीखी आलोचना, रखीं मांगें

सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले जिला स्थाई समिति सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने घटना को ‘बिहारियों का अपमान’ करार दिया। उन्होंने प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग करते हुए कहा:

  • घटना की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पुलिसकर्मी पर बिहार में एफआईआर दर्ज कर ‘स्पीडी ट्रायल’ के जरिए फांसी दी जाए।
  • मृतक के परिजनों को 20 लाख रुपए का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिले।
  • देश के अन्य राज्यों में काम कर रहे बिहारियों की सुरक्षा सरकार सुनिश्चित करे।
  • बिहार में ही कल-कारखाने लगाकर रोजगार के साधन पैदा किए जाएं ताकि बिहारियों को जान जोखिम में डालकर पलायन न करना पड़े।

माले नेता ने इस संवेदनशील मुद्दे पर चुटकी लेने वाले नेताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने ‘मार दिया तो क्या हुआ’ का बयान देने वाले जीतन राम मांझी और ‘बिहार फर्स्ट-बिहारी फर्स्ट’ का नारा देने वाले चिराग पासवान की कड़े शब्दों में आलोचना की।

पुतला दहन के साथ खत्म हुआ प्रदर्शन

सभा के अंत में आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने गृहमंत्री अमित शाह का पुतला फूंका और चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शन में नागरिक समाज के दीनबंधु प्रसाद, रामबली सिंह, राजद नेता शाहीद हुसैन, मो० सगीर, मनोज कुमार सिंह, मनोज शर्मा, मो० सोनू, राजू झा और दीपक यदुवंशी समेत भारी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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PM आवास योजना बनी कमाई का जरिया: जमुई में रिश्वत लेते नगर कार्यपालक पदाधिकारी समेत दो गिरफ्तार!

जमुई/पटना: गरीबों के उत्थान के लिए चलाई जा रही प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) अब बिहार के जमुई जिले में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिख रही है। सिकंदरा नगर पंचायत में आवास योजना के नाम पर अवैध वसूली का एक बड़ा मामला सामने आया है। विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नगर कार्यपालक पदाधिकारी संतोष कुमार और उनके साथ काम करने वाले स्वच्छता साथी सोनू कुमार को 50,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया है।

विशेष निगरानी इकाई (SVU) द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर 50,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किए गए सिकंदरा नगर पंचायत के नगर कार्यपालक पदाधिकारी संतोष कुमार (चश्‍मा में ) और स्वच्छता साथी सोनू कुमार।

गरीबों का हक मारकर भर रहे थे तिजोरी

मामले की शुरुआत तब हुई जब नगर पंचायत सिकंदरा के वार्ड-03 के निवासी और शिकायतकर्ता राजेश कुमार मिश्रा ने विशेष निगरानी इकाई के समक्ष अपनी आपबीती सुनाई। शिकायतकर्ता का आरोप था कि नगर कार्यपालक पदाधिकारी संतोष कुमार और उनके सहयोगी स्वच्छता साथी सोनू कुमार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना की स्वीकृति के लिए 1 लाख रुपये से अधिक की घूस मांगी जा रही थी।

आरोपियों का लालच इतना बढ़ गया था कि उन्होंने साफ शब्दों में कह दिया था कि जब तक 50,000 रुपये (रिश्वत की पहली किश्त) नहीं दी जाएगी, तब तक आवास योजना का आवेदन स्वीकृत नहीं किया जाएगा। गौरतलब है कि सिकंदरा के वार्ड-03 में लगभग 60 आवेदकों ने आवास योजना के लिए आवेदन किया था, और अधिकारियों ने प्रति आवेदक 2,500 रुपये रिश्वत देने का दबाव बनाया था।

SVU के मिशनके आगे फेल हुए घूसखोर

शिकायत मिलते ही विशेष निगरानी इकाई, पटना हरकत में आई। मामले का सत्यापन किया गया, जिसमें घूसखोरी की पुष्टि हुई। इसके बाद, पुलिस उपाधीक्षक (DSP) सुधीर कुमार के नेतृत्व में SVU की एक विशेष टीम और धावा-दल का गठन किया गया।

28 अप्रैल 2026 को SVU की टीम ने पूरी सतर्कता के साथ नगर पंचायत कार्यालय पर धावा बोला। जैसे ही आरोपियों ने घूस की रकम (50,000 रुपये) स्वीकार की, टीम ने उन्हें रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में लिया और पूछताछ के लिए SVU कार्यालय ले गई।

कानूनी शिकंजा: दर्ज हुआ मुकदमा

इस गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। SVU थाना कांड संख्या- 16/2026, दिनांक 28.04.2026 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (यथा संशोधित 2018) की धारा-7 और भारतीय न्याय संहिता की धारा- 61(2)(a) के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। SVU के अपर पुलिस महानिदेशक पंकज कुमार दारद के अनुसार, पकड़े गए आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

जनहित में अपील: भ्रष्टाचार को ना कहें

विशेष निगरानी इकाई ने आम जनता से अपील की है कि यदि कोई भी सरकारी कर्मी या अधिकारी किसी भी कार्य के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो कार्यालय अवधि के दौरान विशेष निगरानी इकाई से तुरंत संपर्क करें। आप अपनी शिकायतें इन नंबरों पर दर्ज करा सकते हैं:

  • दूरभाष: 0612-2506253
  • मोबाइल: 9031633644

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बिहार में ‘मौसम का डबल अटैक’: 50 किमी/घंटा की आंधी और बिजली गिरने का ‘हाई अलर्ट’, अगले 3 दिनों तक संभलकर रहें!

पटना: बिहार में मौसम का मिजाज एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर आ गया है। बिहार मौसम सेवा केंद्र (Bihar Mausam Seva Kendra) ने राज्यभर के लिए चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि अगले कुछ घंटे प्रदेशवासियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। राज्य के अधिकतर हिस्सों में अब आंधी-तूफान के साथ आकाशीय बिजली का खतरा मंडरा रहा है।

50 किमी की रफ्तार से चलेगी हवा मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, बिहार के कई इलाकों में मौसम में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और इस दौरान 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग ने आम लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है।

बारिश और वज्रपात की चेतावनी अगले 24 घंटों के लिए जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य के कई स्थानों पर बहुत हल्की से लेकर हल्की बारिश होने की संभावना है। हालांकि, चिंता का विषय ‘वज्रपात’ (आकाशीय बिजली) है। विभाग ने चेतावनी दी है कि खराब मौसम के दौरान खुले में रहने से बचें और सुरक्षित स्थानों पर शरण लें।

अगले 3 दिनों का तापमान का हाल तापमान के लिहाज से देखें तो अगले 3 दिनों तक लोगों को गर्मी का मिला-जुला अहसास होगा:

  • अधिकतम तापमान: 28°C से 39°C के बीच रहने की संभावना।
  • न्यूनतम तापमान: 20°C से 26°C के बीच रहने का अनुमान है।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि भले ही तापमान बहुत अधिक नहीं है, लेकिन हवा की गति और वज्रपात की संभावनाओं को देखते हुए सतर्क रहना बेहद जरूरी है।

बिहार मौसम सेवा केंद्र द्वारा जारी आगामी 3 दिनों का वेदर अलर्ट मैप, जिसमें राज्य के विभिन्न जिलों में संभावित अधिकतम तापमान और मौसमी बदलावों (तेज हवा व बारिश) को दर्शाया गया है।

सावधानी ही बचाव है: वज्रपात और आंधी से निपटने के लिए जरूरी टिप्स

मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग की गाइडलाइंस के अनुसार, खराब मौसम के दौरान निम्नलिखित सुरक्षा उपायों का पालन करें:

वज्रपात (आकाशीय बिजली) से बचाव:

  • घर के अंदर रहें: बिजली कड़कने की आवाज सुनाई दे तो तुरंत सुरक्षित पक्के घर में चले जाएं। खिड़की-दरवाजों से दूर रहें।
  • पेड़ों के नीचे न छिपें: कभी भी अकेले खड़े पेड़ या ऊंचे खंभों के नीचे शरण न लें। यह बिजली को आकर्षित करते हैं।
  • पानी से दूर रहें: यदि आप बाहर हैं, तो तालाब, नदी या किसी भी जलस्रोत से तुरंत दूर हट जाएं।
  • खुले मैदान में: यदि आप किसी खुले मैदान में हैं, तो सिमटकर बैठ जाएं (उकड़ू बैठें) और अपने सिर को दोनों हाथों से ढक लें। कभी भी जमीन पर न लेटें।
  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरण: बिजली कड़कने के दौरान टीवी, फ्रिज, या कंप्यूटर जैसे बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल न करें।

तेज आंधी (आंधी-तूफान) से बचाव:

  • कमजोर ढांचों से दूर रहें: तेज हवाओं के दौरान टीन के शेड, कच्चे मकान, और जर्जर दीवारों से दूर रहें।
  • सामान को सुरक्षित करें: घर की छतों या बालकनी पर रखे ढीले सामान (गमले, टीन, प्लास्टिक) को हटा दें ताकि वे हवा में उड़कर किसी को चोट न पहुंचाएं।
  • वाहन न चलाएं: यदि आंधी बहुत तेज हो, तो गाड़ी को सड़क किनारे सुरक्षित स्थान पर खड़ी कर दें। चलते हुए पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे गाड़ी न रोकें।
  • बिजली के तारों से बचें: आंधी के कारण गिरे हुए बिजली के तारों से दूर रहें और तुरंत स्थानीय प्रशासन को सूचित करें

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मुजफ्फरपुर में भीषण गर्मी और आग से निपटने को प्रशासन ‘अलर्ट मोड’ पर: डीएम का स्पष्ट निर्देश, पेयजल और अग्नि सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन जारी

मुजफ्फरपुर, 28 अप्रैल 2026

भारतीय मौसम विभाग द्वारा जारी भीषण गर्मी के पूर्वानुमान के बीच, मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। समाहरणालय सभागार में जिलाधिकारी (DM) सुब्रत कुमार सेन की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जिले की कार्ययोजना को लेकर सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। पेयजल संकट से लेकर आगजनी की घटनाओं तक, प्रशासन ने आम नागरिकों के लिए युद्धस्तर पर तैयारी करने का निर्णय लिया है।

“जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन की अध्यक्षता में समीक्षात्मक बैठक”- समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों को कड़े शब्दों में निर्देश देते हुए जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन (तस्वीर के केंद्र में)। उन्होंने स्पष्ट किया कि भीषण गर्मी के बीच निर्बाध पेयजल की आपूर्ति प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

पेयजल संकट: 7 दिनों में दुरुस्त हों सभी चापाकल और नल-जल

जिलाधिकारी ने पीएचईडी (PHED) विभाग को सख्त लहजे में निर्देश दिया है कि जिले में कोई भी चापाकल या नल-जल योजना बंद नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कार्यपालक अभियंता से लेकर कनीय अभियंताओं तक को ‘मिशन मोड’ में काम करने को कहा है।

  • डेडलाइन: सभी खराब चापाकलों और नल-जल योजनाओं को एक सप्ताह के भीतर हर हाल में दुरुस्त करना अनिवार्य है।
  • मोतीपुर पर नाराजगी: समीक्षा के दौरान मोतीपुर क्षेत्र में पेयजल की लचर व्यवस्था पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताई और तुरंत सुधार के निर्देश दिए।
  • निगरानी: अनुमंडल अधिकारियों (पूर्वी एवं पश्चिमी) को प्रखंड स्तर पर नियमित समीक्षा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मुजफ्फरपुर: समाहरणालय सभागार में जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जिले भर से आए अधिकारी और जन प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक में बढ़ती गर्मी, निर्बाध पेयजल आपूर्ति और अगलगी (आग लगने) की घटनाओं की रोकथाम पर गंभीरता से चर्चा की गई और डीएम द्वारा कड़े दिशा-निर्देश दिए गए।

📞 आम नागरिकों के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर

पेयजल और अन्य संबंधित समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए जिला प्रशासन ने निम्नलिखित हेल्पलाइन्स जारी की हैं। नागरिक इन नंबरों पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं:

सेवा का प्रकारहेल्पलाइन नंबर
मुजफ्फरपुर कार्य प्रमंडल0621-2242445
मोतीपुर कार्य प्रमंडल0622-3291255
टोल फ्री हेल्पलाइन (1)1800-123-1121
टोल फ्री हेल्पलाइन (2)1800-345-1121

अगलगी (आग लगने) से बचाव पर प्रशासन का अलर्ट

बढ़ती गर्मी के साथ आगजनी की घटनाओं के प्रति जिलाधिकारी ने अंचलाधिकारियों और एडीएम आपदा को पूरी तरह अलर्ट रहने का निर्देश दिया है। आपदा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने के साथ ही, प्रशासन ने बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) की गाइडलाइन को आम जनता के लिए साझा किया है।

सावधानी बरतें, सुरक्षित रहें (मुख्य बिंदु):

  • घर पर रखें तैयारी: अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguisher), बालू और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करें।
  • गैस सुरक्षा: गैस रिसाव होने पर रेगुलेटर बंद कर दें और तुरंत खिड़की-दरवाजे खोलें; इस दौरान बिजली का कोई भी स्विच न छुएं और माचिस/लाइटर का प्रयोग न करें।
  • आपातकाल: आग लगने पर तुरंत 101 (फायर ब्रिगेड) या 112 (आपातकालीन सेवा) पर सूचना दें।
  • क्या न करें: खुले में कचरा या पराली न जलाएं। बिजली के एक ही सॉकेट पर कई उपकरण लगाकर लोड न बढ़ाएं।

अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय

1. जनगणना कार्य (2 मई से 31 मई तक): जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि मकान गणना कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। बुधवार तक सभी प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को नियुक्ति पत्र जारी कर दिए जाएंगे। उप विकास आयुक्त और एडीएम (विभागीय जांच) को इस कार्य की कमान सौंपी गई है। जिले में अब तक 80,456 लोगों ने स्व-गणना पूरी कर ली है।

2. जन-शिकायत निवारण: प्रशासन ने जनता की समस्याओं के समाधान के लिए एक निश्चित समय-सारणी तय की है। अधिकारी प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को अपने कार्यालय में जनसुनवाई करेंगे, जबकि शनिवार को अंचल स्तर पर बैठकें होंगी। लंबित मामलों को एक सप्ताह में निपटाना होगा।

3. सामाजिक सुरक्षा पेंशन: सभी छह पेंशन योजनाओं के लिए अब आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है। जिन लाभार्थियों के पास आधार नहीं है, उनके तत्काल पंजीकरण के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना से सहमति पत्र की बाध्यता समाप्त कर दी गई है।

4. पीएम सूर्य घर योजना: इस योजना के तहत जिले में 1708 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 569 का निष्पादन हो चुका है। शेष आवेदनों के लिए बैंकर्स के साथ समन्वय कर ऋण स्वीकृति प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है।


जिला प्रशासन की अपील: भीषण गर्मी में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में पेयजल की उपलब्धता पर विशेष नजर है। नागरिकों से अपील है कि वे सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और किसी भी प्रकार की समस्या होने पर जारी हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें।

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पटना में ‘घूसखोर’ रजिस्ट्रार का गेम ओवर: छात्रों के भविष्य के बदले 2.50 लाख मांग रहे थे साहब, अब सलाखों के पीछे।

पटना। राजधानी पटना में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Bureau) ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए मौलाना मजहरूल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय के सहायक कुल सचिव (Assistant Registrar) मो. सनाउल्लाह खान को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया है। छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर घूस की मांग करने वाले इस अधिकारी का ‘गेम’ उस वक्त ओवर हो गया, जब निगरानी की टीम ने उन्हें उनके कार्यालय कक्ष से ही ढाई लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए दबोच लिया।

‘रिश्वतखोर’ की तस्वीर: मौलाना मजहरूल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय, मीठापुर, पटना के सहायक कुल सचिव मो. सनाउल्लाह खान को ढाई लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार करने के बाद निगरानी ब्यूरो की टीम के साथ।

क्या था पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, समस्तीपुर के रोसड़ा निवासी शिकायतकर्ता रामानंद महतो ने निगरानी ब्यूरो में एक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, आरोपी सहायक कुल सचिव मो. सनाउल्लाह खान ने विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित KRC-402 और 403 में नामांकित छात्रों के प्रैक्टिकल मार्क्स चढ़ाने और उनके लंबित परीक्षा फल (Result) को प्रकाशित करने के एवज में भारी-भरकम रिश्वत की मांग की थी।

फिल्मी अंदाज में बिछाया गया जाल

शिकायतकर्ता की आपबीती सुनने के बाद निगरानी ब्यूरो ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसका सत्यापन कराया। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए गए। इसके बाद, डीएसपी श्याम बाबू प्रसाद के नेतृत्व में एक विशेष ‘धावा दल’ का गठन किया गया।

28 अप्रैल, 2026 को जैसे ही आरोपी ने अपने कार्यालय कक्ष में ढाई लाख रुपये की रिश्वत राशि ली, निगरानी ब्यूरो की टीम ने उन्हें रंगे हाथों धर दबोचा। आरोपी को फिलहाल हिरासत में ले लिया गया है और पूछताछ के बाद उन्हें पटना की विशेष निगरानी अदालत में पेश किया जाएगा। इस गिरफ्तारी के बाद से ही विश्वविद्यालय परिसर में हड़कंप मचा हुआ है।

निगरानी ब्यूरो: 2026 का ट्रैक रिकॉर्ड

इस कार्रवाई के साथ ही निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने साल 2026 में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी मुहिम को और तेज कर दिया है। ब्यूरो द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:

विवरणआंकड़े
कुल प्राथमिकी (Cases Registered)49
ट्रैप के मामले (Trap Cases)44
गिरफ्तार अभियुक्त42
बरामद कुल राशि₹16,41,000

भ्रष्टाचार के खिलाफ आपकी जागरूकता ही हथियार है

यदि आपसे या आपके आसपास कोई सरकारी सेवक (सरकारी अधिकारी/कर्मचारी) किसी भी काम के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो चुप न बैठें। सीधे निगरानी ब्यूरो से संपर्क करें:

  • हेल्पलाइन: 0612-2215344
  • मोबाइल/व्हाट्सएप: 7765953261, 9473494167
  • ईमेल: spvig-bih@nic.in
  • पता: निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, 6 सर्कुलर रोड, पटना।

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पटना में कल ‘सियासी महासंग्राम’: गांधी मैदान में हुंकार भरने को तैयार बिहार, मुजफ्फरपुर की बैठक से आंदोलन को मिली नई धार!

मुजफ्फरपुर/पटना: कल 29 अप्रैल, 2026 का दिन बिहार की राजनीति का ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हो सकता है। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान से उठने वाली दलित, पिछड़े और अति-पिछड़े वर्ग की हुंकार को रोकने की ताकत शायद ही किसी सरकार में हो। केशोपुर स्थित गाइडलाइन विद्याश्रम स्कूल में मुजफ्फरपुर इकाई की समीक्षा बैठक के बाद, नेताओं ने जो तेवर दिखाए हैं, वह स्पष्ट संकेत हैं कि सरकार के लिए ‘चेतावनी का समय’ समाप्त हो चुका है और अब ‘संघर्ष का समय’ आ गया है।

“क्रांति का ब्लूप्रिंट: अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ द्वारा जारी किए गए विरोध प्रदर्शन का रूट चार्ट। 29 अप्रैल को 10,000 से अधिक कार्यकर्ता गांधी मैदान से निकलकर सरकार को ज्ञापन सौंपेंगे और शिक्षा से लेकर न्यायपालिका तक में हिस्सेदारी की मांग करेंगे।”

नेताओं की ललकार: सत्ता की चूलें हिलाने को तैयार

आगामी प्रदर्शन को लेकर जो बातें प्रमुख नेताओं ने कहीं, वे इस आंदोलन की गंभीरता को दर्शाती हैं:

 संतोष कुशवाहा (जगदेव विचार मंच): “यह आंदोलन नहीं, वैचारिक क्रांति है”

बैठक को संबोधित करते हुए संतोष कुशवाहा ने पूरे आंदोलन को एक वैचारिक पृष्ठभूमि दी। उन्होंने कहा:

“बिहार की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आने वाला है। यह केवल एक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि ‘शहीद जगदेव प्रसाद’, ‘महात्मा ज्योतिबा फुले’ और ‘संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. अम्बेडकर’ की विरासत को पुनर्जीवित करने का संकल्प है। हमारा कारवां जब गांधी मैदान के गेट नंबर 1 से निकलेगा, तो वह सत्ता के गलियारों में बैठे हर उस शख्स को सोचने पर मजबूर कर देगा, जो पिछले कई वर्षों से उपेक्षित वर्गों के अधिकारों को दबाए बैठा है। 29 अप्रैल का दिन इस बात का गवाह बनेगा कि जब शोषित वर्ग अपनी अस्मिता के लिए खड़ा होता है, तो बड़े-बड़े सिंहासन डोलने लगते हैं।”

 शशि गुप्ता: “मांगें नहीं, ये हमारे अधिकार हैंसरकार के पास कोई विकल्प नहीं”

आंदोलन के एजेंडे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए शशि गुप्ता ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने साफ कहा:

“हमारी मांगें अब केवल कागजों पर नहीं, बल्कि सड़कों पर उतर चुकी हैं। ‘UGC बिल’ को लागू न करना शिक्षा जगत के साथ अपराध है। हमने बिहार में 65% आरक्षण और OBC महिलाओं के लिए 33% हिस्सेदारी की मांग रखी है, जो कि न्यायसंगत है। सबसे गंभीर मुद्दा ‘जातिगत जनगणना’ में ‘OBC कॉलम’ जोड़ने का है—आखिर सरकार इस सच्चाई को दर्ज करने से क्यों डर रही है? यह प्रदर्शन स्पष्ट करता है कि अब समाज का हर वर्ग जाग चुका है। अगर सरकार ने इन मांगों को अनदेखा किया, तो इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम भुगतने के लिए उन्हें तैयार रहना होगा।”

अनिल अकेला: “यह अंतिम चेतावनी है, 29 अप्रैल तय करेगा भविष्य”

आंदोलन की धार को तेज करते हुए अनिल अकेला ने सरकार को ‘अंतिम चेतावनी’ दी:

“यह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक ‘आर-पार की लड़ाई’ का शंखनाद है। हम सप्तमूर्ति (शहीद स्मारक) तक मार्च करेंगे और मुख्यमंत्री व राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर यह संदेश देंगे कि अब और इंतजार नहीं किया जाएगा। 29 अप्रैल को गांधी मैदान में जो भीड़ उमड़ेगी, वह पूरे देश की राजनीति की दिशा तय करेगी। यह आंदोलन केवल बिहार की सड़कों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसकी गूंज केंद्र सरकार तक पहुंचेगी। क्या सत्ता इन मांगों के आगे झुककर न्याय करेगी, या यह एक नए, लंबे और व्यापक टकराव की शुरुआत होगी? जवाब अब सरकार को देना है।”

समीक्षा बैठक में दिखी एकता

गाइडलाइन विद्याश्रम स्कूल के प्रांगण में हुई इस समीक्षा बैठक में ममता जायसवाल, श्याम नंदन महतो, मुकेश कुमार, विजय कुमार और संजय कुमार यादव सहित कई प्रमुख कार्यकर्ताओं ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

  • प्रदर्शन का समय: 29 अप्रैल, 2026 | सुबह 11:00 बजे
  • स्थान: गांधी मैदान, गेट नंबर 1
  • मार्ग: डाकबंगला चौराहा → आयकर गोलंबर → सप्तमूर्ति (शहीद स्मारक)

कल 29 अप्रैल को पटना की सड़कों पर जनसैलाब का उमड़ना तय है। मुजफ्फरपुर इकाई की यह बैठक आंदोलन को एक संगठित और सशक्त रूप दे चुकी है। अब सबकी नजरें कल के प्रदर्शन पर टिकी हैं, जो बिहार के भविष्य की इबारत लिखने जा रहा है।