Wednesday, July 29, 2026

समस्तीपुर आगमन से पहले सम्राट चौधरी पर विपक्ष का सीधा वार: 11 तीखे सवालों से थर्राया सियासी गलियारा, संजीव सहनी हत्याकांड के अपराधियों पर मांगा जवाब!

खानपुर दौरे से पहले भाकपा माले का बड़ा सवाल, मनरेगा में करोड़ों के बंदरबांट और 60000 रद्द राशन कार्डों को लेकर सरकार को पूरी तरह घेरा, जिले के बंद पड़े कल-कारखानों पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग

समस्तीपुर : बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के समस्तीपुर जिला अंतर्गत खानपुर में होने वाले संभावित आगमन को लेकर सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। उनके कदम रखने से पहले ही समस्तीपुर के राजनीतिक गलियारे में जबरदस्त भूचाल आ गया है। विपक्षी दल भाकपा माले ने मुख्यमंत्री के आगमन की भनक लगते ही मीडिया के माध्यम से चौतरफा घेराबंदी शुरू कर दी है। भाकपा माले के जिला स्थाई समिति सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने 11 सुलगते और तीखे सवालों का एक ऐसा मांग-पत्र जारी किया है, जिसने प्रशासनिक महकमे से लेकर सत्ता पक्ष के नेताओं तक के पसीने छुड़ा दिए हैं। भाकपा माले ने साफ लहजे में कहा है कि मुख्यमंत्री समस्तीपुर में विकास के थोथे दावे करने से पहले इन 11 बुनियादी जनसरोकारों का हिसाब दें।

अपराध और खौफ के साए में समस्तीपुर: संजीव सहनी हत्याकांड पर उबाल

इस पूरे मांग-पत्र में सबसे बड़ा और संवेदनशील मुद्दा समस्तीपुर की चरमराती कानून व्यवस्था का है। भाकपा माले ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि पूरे बिहार सहित समस्तीपुर जिला इस समय हत्या, लूट, डकैती, छिनतई और बलात्कार जैसी जघन्य वारदातों का गढ़ बन चुका है। सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने ताजपुर थाना अंतर्गत हुए बहुचर्चित संजीव सहनी हत्याकांड (कांड संख्या 98/26) का मामला उठाकर सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इसके साथ ही महिला थाना में दर्ज फतेहपुर नाबालिग दुष्कर्म कांड (कांड संख्या 61/26) का हवाला देते हुए पूछा है कि आखिर इन संगीन मामलों के दरिंदे और अपराधी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर क्यों हैं? विपक्ष ने अल्टीमेटम दिया है कि मुख्यमंत्री के आगमन से पहले अपराधियों की गिरफ्तारी और जिले में अमन-चैन की लिखित गारंटी दी जाए।

मनरेगा में करोड़ों की लूट और 60000 राशन कार्डों का कत्लेआम

विकास योजनाओं के नाम पर प्रशासनिक स्तर पर चल रहे भ्रष्टाचार को लेकर भी बड़ा विस्फोट किया गया है। भाकपा माले का आरोप है कि आवास योजना, मनरेगा और प्रखंड स्तर की तमाम कल्याणकारी योजनाओं में बिना भारी कमीशनखोरी और अफसरशाही के पत्ता तक नहीं हिल रहा है। सबसे चौंकाने वाला दावा जिले के भीतर करीब 60000 गरीब परिवारों के राशन कार्ड रद्द किए जाने को लेकर किया गया है। विपक्ष ने इसे खाद्य सुरक्षा पर सीधा हमला बताते हुए इसे तुरंत पुनर्बहाल करने की मांग की है। साथ ही मनरेगा में करोड़ों रुपए के बंदरबांट की उच्च स्तरीय जांच कराने और मजदूरों को साल में 200 दिनों का रोजगार सुनिश्चित करने की बात कही है।

बंद पड़े उद्योग और खंडहर बनता समस्तीपुर का गौरव

आर्थिक और औद्योगिक मोर्चे पर सरकार को घेरते हुए भाकपा माले ने समस्तीपुर के उन जख्मों को फिर हरा कर दिया है, जिससे यहाँ का नौजवान आज भी बेरोजगार घूम रहा है। मांग-पत्र में वर्षों से बंद पड़ी समस्तीपुर चीनी मिल, ठाकुर पेपर मिल और मुक्तापुर स्थित रामेश्वर जूट मिल के विकास एवं विस्तार की सरकारी गारंटी मांगी गई है। इसके अलावा लंबे समय से खंडहर में तब्दील हो चुके दूधपुरा हवाई अड्डे को चालू करने के लिए इस बार के बजट में विशेष प्रावधान करने की कड़क मांग उठाई गई है।

भाकपा माले द्वारा मुख्यमंत्री के सामने खड़े किए गए 11 यक्ष प्रश्न:

  1. अपराध राज पर कब लगेगा लगाम? ताजपुर के संजीव सहनी हत्याकांड (कांड संख्या 98/26) और फतेहपुर नाबालिग दुष्कर्म (कांड संख्या 61/26) के अपराधी अब तक आजाद क्यों घूम रहे हैं?
  2. अफसरशाही और कमीशनखोरी पर रोक कब? आवास योजना और प्रखंड स्तर के कामों में खुलेआम चल रही लूट पर सरकार की चुप्पी का राज क्या है?
  3. 60000 गरीबों का निवाला क्यों छीना? समस्तीपुर सहित पूरे बिहार में रद्द किए गए राशन कार्डों को वापस कब बहाल किया जाएगा?
  4. मनरेगा में करोड़ों का बंदरबांट क्यों? मनरेगा की उच्च स्तरीय जांच कराकर साल में 200 दिन का रोजगार और समय पर मजदूरी भुगतान की गारंटी कब मिलेगी?
  5. दूधपुरा हवाई अड्डा खंडहर क्यों? इस ऐतिहासिक हवाई अड्डे को चालू करने के लिए बजटीय प्रावधान क्यों नहीं किया गया?
  6. चीनी मिल और ठाकुर पेपर मिल कब खुलेंगे? स्थानीय युवाओं को पलायन के लिए मजबूर करने के बजाय इन उद्योगों को ताले से कब आजाद किया जाएगा?
  7. रामेश्वर जूट मिल का भविष्य क्या है? मुक्तापुर स्थित इस मिल के विस्तार और निरंतर संचालन की सरकारी गारंटी दी जाए।
  8. किसानों के साथ वादाखिलाफी क्यों? खाद, बीज, बिजली और कृषि यंत्रों पर रियायत तथा फसलों का लाभकारी समर्थन मूल्य कब मिलेगा?
  9. बदहाल शिक्षा-स्वास्थ्य का जिम्मेदार कौन? जनवितरण प्रणाली, स्कूलों और अस्पतालों में खाली पड़े पदों पर कर्मियों की नियुक्ति कब होगी?
  10. जननायक की कर्मभूमि की उपेक्षा क्यों? जननायक कर्पूरी ठाकुर की कर्मभूमि ताजपुर को पुनः विधानसभा और अनुमंडल का दर्जा वापस कब मिलेगा?
  11. रेल परियोजनाओं पर फाइलों की धूल कब हटेगी? कर्पूरी ग्राम-ताजपुर-पातेपुर-महुआ-भगवानपुर, केबल स्थान-कर्पूरीग्राम, मुक्तापुर-कुशेश्वरस्थान नई रेल लाइन और मुक्तापुर रेल गुमटी व अटेरन चौक पर ओवरब्रिज का निर्माण कार्य कब शुरू होगा?

सुरेंद्र प्रसाद सिंह (जिला स्थायी समिति सदस्य, भाकपा माले) का सीधा और कड़ा बयान:

“मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के समस्तीपुर के खानपुर आगमन की सुगबुगाहट पर भाकपा माले ने पहले ही 11 सवालों का जाल बिछा दिया है। समस्तीपुर का हवाई अड्डा, चीनी मिल और ठाकुर पेपर मिल बंद पड़े हैं, मनरेगा में करोड़ों रुपए की खुली लूट मची हुई है, जिसकी संपूर्ण जिला स्तर पर उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। संजीव सहनी के हत्यारों और नाबालिग से रेप के आरोपियों को अविलंब जेल भेजा जाए। अभी हमने मीडिया के जरिए यह सवाल दागे हैं, इसके बाद जैसे ही मुख्यमंत्री यहाँ पहुँचेंगे, हमारी एक उच्च स्तरीय टीम उनसे मुलाकात करने की कोशिश करेगी और उन्हें यह स्मार पत्र सौंपकर मांग पूरी करने का आग्रह करेगी। अगर इन पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो समस्तीपुर की धरती पर एक बड़ा जन-आंदोलन भड़केगा।”

इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम से मुख्यमंत्री के आने से पहले ही खानपुर का माहौल पूरी तरह गरमा गया है। अब देखना यह है कि समस्तीपुर की सीमा में दाखिल होने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भाकपा माले के इन तीखे और सीधे सवालों का सामना कैसे करते हैं या फिर जनता को एक बार फिर केवल आश्वासनों का झुनझुना थमाकर लौट जाते हैं।

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कागजों पर ‘जर्जर’ लेकिन हकीकत में आलीशान: मुरौल का महाघोटाला: चमचमाते सरकारी भवन को बताया ‘जर्जर’, किराए की इमारत में चल रहा 30,000 का गुप्त खेल ?

नगर पंचायत या ‘नरक पंचायत’! तीन वर्षों से सरकारी तिजोरी में सेंधमारी, अधिकारियों की जेब में जा रहा क्या जनता का पैसा

रिपोर्ट: एस. एस. कुमार ‘पंकज’

नवगठित नगर पंचायत मुरौल (मुजफ्फरपुर) इन दिनों स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बीच तीव्र आक्रोश का केंद्र बन चुका है। ग्राम पंचायत से नगर निकाय के रूप में अपग्रेड हुए इस क्षेत्र के लोगों को उम्मीद थी कि शहरीकरण के साथ यहाँ विकास की नई गंगा बहेगी, नागरिक सुविधाएं सुदृढ़ होंगी और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता आएगी। परंतु, हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। आज मुरौल नगर पंचायत विकास के बजाय प्रशासनिक भ्रष्टाचार, वित्तीय विलासिता और बंदरबांट का एक ऐसा मॉडल बन चुका है, जिसे स्थानीय उप मुख्य पार्षद ने खुले तौर पर ‘नरक पंचायत’ की संज्ञा दे दी है।

इस महाघोटाले की जड़ें नगर पंचायत कार्यालय को संचालित करने के नाम पर किए जा रहे वित्तीय अपराध से जुड़ी हैं। पिछले 36 महीनों (3 वर्षों) से अधिक समय से नगर पंचायत मुरौल का प्रशासनिक कार्यालय एक निजी भवन की पहली मंजिल पर चलाया जा रहा है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि इस निजी भवन के किराए के नाम पर सरकारी तिजोरी में हर महीने सीधी सेंधमारी की जा रही है। जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा, जिसे क्षेत्र की सड़कों, नालियों, लाइटिंग और स्वच्छता पर खर्च होना चाहिए था, वह हर महीने अधिकारियों और रसूखदारों की मिलीभगत से निजी जेबों में जा रहा है।

इस खेल का गणित समझाते हुए स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र रॉय बताते हैं कि इस निजी मकान का किराया कागजों पर मोटी राशि के रूप में दिखाया जाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि इसमें से एक बड़ा हिस्सा कमीशन के तौर पर कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) और मुख्य पार्षद के बीच गुप्त रूप से बंट जाता है। यह सीधे तौर पर राजकीय कोष के दुरुपयोग और ‘आर्थिक अपराध’ का मामला है। 3 साल से चल रहे इस किराए के खेल ने मुरौल के विकास को 30 साल पीछे धकेल दिया है। जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है, और अधिकारी एसी कमरों में बैठकर किराए की रसीदों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं।

 पाखंड का लाइव मॉडल: कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) मैडम की कलम से लोक शिकायत निवारण में ‘असुरक्षित’ घोषित किए जा चुके इसी तथाकथित ‘जर्जर’ भवन की मजबूत छत के नीचे वीआईपी कुर्सियां लगाकर इत्मीनान से आयोजित किया गया सरकारी ‘सहयोग शिविर’।

मुरौल की प्रशासनिक जादूगरी और “पाखंड का लाइव मॉडल” देखना हो, तो बीते दिनों आयोजित वार्ड स्तरीय सहयोग शिविर की इन तस्वीरों और दस्तावेजों को देख लीजिए। सरकारी फाइलों और लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के टेबल पर जो सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) मैडम की कलम से “जर्जर और जानलेवा” घोषित हो चुका है, उसी तथाकथित ‘जर्जर’ भवन की मजबूत छत के नीचे उपर के दृृृश्‍य में मैडम खुद अपनी वीआईपी कुर्सी लगाए बेहद इत्मीनान से मुस्कुराते हुए बैठी हैं। गजब का हौसला है मैडम आपका! जो छत किसी भी पल गिर सकती है (कम से कम आपकी लोक शिकायत निवारण में दी गई सरकारी रिपोर्ट तो यही कहती है), उसी छत के नीचे आप खुद बैठी हैं, आपके बगल में पूरा प्रशासनिक अमला बैठा है, सामने नगर पंचायत की भोली-भाली जनता बैठी है और दीवारों पर बड़े-बड़े अक्षरों में “समाधान शिविर” का बैनर टंगा है। अब जनता यह नहीं समझ पा रही है कि मैडम वहाँ जनता की समस्याओं का ‘समाधान’ करने आई थीं या साक्षात ‘काल’ के साए में अपनी बहादुरी का प्रदर्शन करने? अगर यह भवन वाकई जर्जर है, तो क्या मैडम ने अपनी और वहाँ जुटे सैकड़ों ग्रामीणों की जान दांव पर लगाकर कोई सुसाइड मिशन प्लान किया था? और अगर मैडम की जान इतनी सस्ती नहीं है, तो फिर फाइलों में इस खूबसूरत आलीशान भवन को ‘जर्जर’ लिखकर  किराये पर हजारो रुपये खर्च करके  कौन सा वित्तीय अलादीन का चिराग जलाया जा रहा है? साफ है मैडम, जनता सब देख रही है—जब खुद बैठना हो तो भवन ‘आलीशान’ और ‘सुरक्षित’ है, और जब जनता के हित में दफ्तर शिफ्ट करना हो तो भवन ‘जर्जर’ है; इस अद्भुत और पाखंड से भरे विरोधाभास पर तो मुजफ्फरपुर प्रशासन को आपको ‘विशेष प्रशासनिक अभिनय पुरस्कार’ देना चाहिए!

 प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार: दाता परिवार द्वारा दान की गई मुख्य सड़क की कीमती 50 डिसमिल जमीन पर बना भव्य दो मंजिला मॉडल ‘सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन’। इसी आलीशान इमारत को फाइलों में ‘जर्जर और जानलेवा’ बताकर बंद रखा गया है।

 IAS अफसरों की ट्रेनिंग का केंद्र रहा भवन दो दिन में कैसे हुआ जर्जर? मुरौल के प्रशासनिक पाखंड की खुली पोल!

इस पूरे मामले का सबसे सनसनीखेज और हैरान करने वाला पहलू सादिकपुर मुरौल के वार्ड संख्या 2 में स्थित ‘सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन’ से जुड़ा है। करोड़ों रुपये की सरकारी लागत से निर्मित यह भव्य और सुसज्जित 2  मंजिला इमारत आज प्रशासनिक पाखंड का जीता-जागता सबूत बनी हुई है। वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा पूर्व में जारी पत्र संख्या 452 के माध्यम से इस शानदार भवन को महज 12 वर्षों के भीतर ही ‘जर्जर और असुरक्षित’ घोषित कर दिया गया, ताकि निजी भवन में कार्यालय चलाने के खेल को जारी रखा जा सके।

प्रशासन के इस दावे की हवा तब पूरी तरह निकल जाती है, जब इसके गौरवशाली इतिहास और हालिया प्रशासनिक गतिविधियों पर नजर डाली जाती है। जमीनदाता परिवार के सदस्य सोनू कुशवाहा बताते हैं कि यह भवन कोई साधारण निर्माण नहीं है। जब इस क्षेत्र में 7 आईएएस (IAS) अधिकारी अपनी विलेज ट्रेनिंग के लिए मुजफ्फरपुर आए थे, तब उनके रहने, सहने और खाने-पीने की पूरी व्यवस्था इसी पंचायत सरकार भवन में की गई थी। इन अधिकारियों में मुजफ्फरपुर के पूर्व जिला पदाधिकारी सुब्रत सेन भी शामिल थे, जिन्होंने यहाँ रहकर ग्रामीण परिवेश का अध्ययन किया था। यह जिला का पहला ऐसा मॉडल पंचायत भवन था, जिसकी सुदृढ़ बनावट और बेहतरीन स्पेस को देखने दूसरे जिलों से प्रशासनिक अधिकारी और मुखिया आते थे।

विरोधाभास और पाखंड की पराकाष्ठा देखिए कि जिस भवन को अधिकारी कागजों पर ‘जर्जर’ बताकर आम जनता के प्रवेश के लिए असुरक्षित कह रहे हैं, उसी भवन में अभी हाल ही में, 2 जून 2026 को सरकार के निर्देश पर आधिकारिक ‘सहयोग शिविर’ का सफल आयोजन किया गया था। इतना ही नहीं, इस शिविर से करीब दो माह  पहले तक स्थानीय थाना (ओपी) को यहाँ शिफ्ट करने के लिए प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में पूरे भवन का रंग-रोगन और पुलिस वेरिफिकेशन कराया गया था। वार्ड पार्षद आनंद कन्द साह और अन्‍य पार्षदगण  सवाल उठाते हैं कि जो भवन 2  जून 2026 को सरकारी सहयोग शिविर के लिए सुरक्षित था, जिसमें सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ जुटी, और जो भवन थाना खोलने के लिए पूरी तरह मुफीद है , वह नगर पंचायत कार्यालय के लिए ‘जर्जर’ कैसे हो गया? किस इंजीनियर ने बिना किसी वैज्ञानिक जांच के इसे असुरक्षित घोषित करने का सर्टिफिकेट दे दिया? यह विरोधाभास साफ तौर पर दर्शाता है कि जर्जर भवन नहीं, बल्कि इस व्यवस्था को चलाने वाले अधिकारियों की नीयत हो चुकी है।

नियमों की धज्जियां: (बीच में) नगर विकास एवं आवास विभाग के संयुक्त सचिव मनोज कुमार का वह सख्त आदेश (पत्रांक 1284), जिसके तहत दुरुस्त पंचायत भवन में तत्काल दफ्तर शिफ्ट करना था। इसके दोनों तरफ वे आलीशान सरकारी और निजी भवन हैं, जिन्हें लेकर अधिकारियों की नीयत पर सवाल उठ रहे हैं।

सरकारी आदेश की उड़ी धज्जियाँ: संयुक्त सचिव की चिट्ठी को दबाकर निजी भवन को फायदा पहुँचाने का खेल!

मुरौल नगर पंचायत में चल रहा यह खेल सिर्फ स्थानीय स्तर की मनमानी नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर राज्य सरकार के शीर्ष सचिवालय के आदेशों की खुली अवहेलना और प्रशासनिक विद्रोह है। बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा नवगठित नगर निकायों में प्रशासनिक भवनों के सुचारू संचालन और अनावश्यक राजस्व व्यय को रोकने के लिए समय-समय पर कड़े और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

इस संबंध में सबसे महत्वपूर्ण पत्राचार 3 अप्रैल 2025 को हुआ था। नगर विकास एवं आवास विभाग के संयुक्त सचिव मनोज कुमार द्वारा पत्र संख्या 15/अभि० (को०) प्र० भवन-10-01/2025/1284 के माध्यम से राज्य के सभी नवगठित नगर परिषदों और नगर पंचायतों के कार्यपालक पदाधिकारियों को एक अत्यंत स्पष्ट मार्गदर्शिका भेजी गई थी। इस विभागीय पत्र के मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे:

प्रतिनिधि भी अंधेरे में: वार्ड संख्या 4 के पार्षद बबलू कुमार उर्फ दिलीप कुमार सहित अन्य जनप्रतिनिधि ‘न्यूज भारत टीवी’ से बातचीत में यह स्वीकार करते हुए कि नगर पंचायत के पार्षदों  से भी दफ्तर का असली किराया और नेमोपुर की फाइलें छुपा कर रखी गई हैं।

 अनिवार्य स्थानांतरण (शिफ्टिंग): पत्र के पहले ही बिंदु में साफ तौर पर निर्देश दिया गया था कि यदि नवगठित नगर निकाय क्षेत्र के अंतर्गत पूर्व का कोई ‘पंचायत सरकार भवन’ दुरुस्त अवस्था में उपलब्ध है, तो नगर पंचायत के कार्यालय को तत्काल प्रभाव से उसी पंचायत सरकार भवन में शिफ्ट किया जाए, ताकि निजी भवनों पर होने वाले अनावश्यक किराए के खर्च को रोका जा सके।

मरम्मत और विस्तार: पत्र के दूसरे बिंदु में स्पष्ट था कि यदि पंचायत सरकार भवन में कमरों की संख्या 2 से अधिक है और उसका ढांचा ठीक है, तो मामूली मरम्मती कराकर उसी का विस्तार किया जाए और नए प्रशासनिक कार्यों को वहीं से संचालित किया जाए।

नई भूमि का चयन: नई भूमि का चयन और अंचलाधिकारी (सीओ) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त करने की प्रक्रिया केवल और केवल उसी परिस्थिति में की जानी है, जब निकाय क्षेत्र में कोई भी सरकारी भवन या पंचायत सरकार भवन उपलब्ध न हो।

मुरौल के कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) और मुख्य पार्षद की जुगलबंदी ने संयुक्त सचिव मनोज कुमार के इस महत्वपूर्ण आदेश (पत्र संख्या 1284) को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इस चिट्ठी को दबाकर, नियमों को ताक पर रखते हुए निजी भवन के मालिक को फायदा पहुँचाने का खेल बदस्तूर जारी रखा गया। इस आदेश के खिलाफ जाकर, वर्तमान में ईओ द्वारा क्षेत्र के एक सुदूर कोने (नेमोपुर में, जो भौगोलिक रूप से नगर पंचायत का एकतरफा किनारा है) में एक दलदली और जलजमाव वाली भूमि (खेसरा नंबर 1426) पर नया प्रशासनिक भवन बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इस साजिश का एकमात्र उद्देश्य यह है कि नए भवन के निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपये का ठेका निकाला जा सके, जिसमें से भारी-भरकम कमीशन डकारा जा सके और तब तक वर्तमान किराए के खेल को अनवरत जारी रखा जा सके।

 भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा: वार्ड पार्षद आनंद कन्द साह द्वारा लिखा गया पत्र (पत्रांक 20) और उप मुख्य पार्षद अजय कुमार राय सहित अन्य पार्षदों के हस्ताक्षर युक्त वह मांग पत्र, जिसमें  पूर्व मुखिया कीर्तिनारायण प्रसाद द्वारा सत्‍यनारायण प्रसाद पंचायत सरकार भवन में नगर पंचायत कार्यालय को संचालित किए जाने  की मांग की गई है ,

तू डाल-डाल, मैं पात-पात: ईओ मैडम का नया ‘कागजी घोड़ा’ और अंतहीन बहानेबाजी!

मुरौल नगर पंचायत में ‘किराए के खेल’ को अनवरत जारी रखने के लिए प्रशासनिक पाखंड किस कदर “तू डाल-डाल, मैं पात-पात” की तर्ज पर आगे बढ़ रहा है, इसका नया सुबूत ईओ मैडम की ताजातरीन चिट्ठी बयां करती है। जब मामला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के पाले में पहुंचा, तो मैडम ने आनन-फानन में कुछ दिन पहले पत्रांक 732, दिनांक 17/06/2026 को एक पत्र लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को भेज दिया । इस पत्र में ईओ मैडम अचानक ‘पंचायती राज विभाग’ के नियमों और आदेशों की खोज में लग गई हैं, ताकि यह साबित किया जा सके कि जब तक वहां से हस्तांतरण का कोई विशेष फरमान नहीं आता, तब तक वे कुछ नहीं कर सकतीं। गजब का विरोधाभास है! कभी भवन को ‘जर्जर’ बताकर पल्ला झाड़ा जाता है, कभी ‘पुलिस  और सुरक्षा बल’ का बहाना बनाया जाता है, और अब तीन साल बीत जाने के बाद पंचायती राज विभाग का आदेश ढूंढा जा रहा है। लोक शिकायत में गर्दन फंसती देख अब दाएं-बाएं की जादुई कलाकारी दिखाई जा रही है।

कागजों का मायाजाल: लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी और जिला प्रशासन को भेजे गए कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) के वे आधिकारिक पत्र, जिनमें कभी सुरक्षा बल, कभी जर्जर भवन तो कभी तकनीकी नियमों की आड़ लेकर सरकारी भवन में दफ्तर शिफ्ट करने के फैसले को टाला गया।

कागजी चक्रव्यूह और बहानों की तिकड़ी: एक ही मुद्दे पर तीन पत्रों का लाइव पाखंड!

मुरौल नगर पंचायत की कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) मैडम द्वारा लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को लिखे गए इन तीन आधिकारिक पत्रों का क्रमवार विश्लेषण व्यवस्था के उस शातिर खेल को बेनकाब करता है, जहाँ जनहित के एक सीधे सवाल को कागजी भूलभुलैया में दफन करने की हरसंभव कोशिश की गई है। इस सिलसिलेवार पाखंड की कड़ियाँ कुछ इस प्रकार खुलती हैं:

  • पहला दांवसुरक्षा और जर्जरता का ढोंग (पत्रांक 543, दिनांक 13/05/2026): इस पहले पत्र में ईओ मैडम ने शिकायत को खारिज करने के लिए अपने पुराने पत्रांक 452 (दिनांक 16.04.2026) का हवाला देते हुए लिखा कि उक्त पंचायत सरकार भवन में पुलिस बल का पड़ाव होने और जर्जरता के कारण कार्यालय का संचालन संभव नहीं है। साथ ही, पहली मंजिल पर स्थित निजी दफ्तर की लोहे की सीढ़ियों से वृद्धों और विकलांगों को होने वाली परेशानी वाले आरोप पर गोलमोल जवाब देते हुए इसे आगामी बोर्ड बैठक का विषय बताकर पल्ला झाड़ लिया।
  • दूसरा दांवखुद के बुने जाल में फंसी प्रशासनिक व्यवस्था (पत्रांक 654, दिनांक 05/06/2026): ठीक 23 दिन बाद लिखे गए इस दूसरे पत्र में मैडम ने खुद ही अपने ‘जर्जर और जानलेवा’ वाले दांव की हवा निकाल दी। इसमें वे बड़े गर्व से स्वीकार करती हैं कि विभाग के पत्रांक 1284 (दिनांक 03.04.2025) के आलोक में उसी ‘जर्जर’ सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन के भीतर 2 जून 2026 को बकायदा एक भव्य “अस्थायी सहयोग शिविर” का सफल आयोजन किया गया था! यानी जब अपनी सुविधा के लिए वीआईपी कुर्सी लगानी हो, तब वह भवन पूरी तरह महफूज हो जाता है।
  • तीसरा दांव—पंचायती राज विभाग की आड़ में नई बहानेबाजी (पत्रांक 732, दिनांक 17/06/2026): जब दोनों पत्रों के विरोधाभास से लोक शिकायत निवारण में गर्दन फंसती दिखी, तो मैडम ने “तू डाल-डाल, मैं पात-पात” की तर्ज पर यह तीसरा पत्र दाग दिया। इसमें प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी के पत्र (पत्रांक 119, दिनांक 17.06.2026) का नया बहाना खोजा गया है कि पंचायती राज विभाग की तरफ से ग्राम पंचायत द्वारा निर्मित भवनों को नगर विकास विभाग को हस्तांतरित करने का कोई स्पष्ट आदेश ही नहीं है, और वर्तमान में वहां पंचायत एवं ग्राम कचहरी चल रही है यह पत्र में साफ साफ लिखा , अब यह तो वे ही जाने कि यहां कौन सी ग्राम कचहरी चल रही है ।

 कभी जर्जरता का खौफ, कभी पुलिस बल की मजबूरी, और जब दोनों बहानों की पोल खुली तो पंचायती राज विभाग के नियमों की आड़! जो प्रशासनिक सक्रियता 3 साल पहले दिखानी चाहिए थी, वह आज लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी की टेबल पर परिवाद की कार्रवाई को किसी भी तरह बंद कराने (नस्तीबद्ध करने) की छटपटाहट में बदल चुकी है। साफ है कि इन पत्रों का मकसद समस्या का समाधान करना नहीं, बल्कि निजी भवन के मालिक को फायदा पहुँचाने वाले उस ‘गुप्त किराए’ के खेल को कानूनी दांव-पेचों के जरिए अनवरत जिंदा रखना है।

सबसे बड़ा झोल तो इस खेल के ‘सीक्रेट बजट’ में है। इस तथाकथित नगर पंचायत में गोपनीयता का आलम यह है कि खुद वार्ड पार्षदों तक को यह नहीं पता कि जनता की गाढ़ी कमाई से निजी भवन का असली किराया कितना भरा जा रहा है। वार्ड संख्या 3 के पार्षद आनंद कन्द साह ने बहुत पहले पत्रांक 20, दिनांक 15/06/2024 को लिखे अपने पत्र में अंदाज़ से ‘लगभग तीस हजार रुपया’ अंकित किया था। यानी जनता का पैसा पानी की तरह बह रहा है, लेकिन उसका सटीक हिसाब पार्षदों तक से छुपा कर रखा गया है।

मामला सिर्फ यहीं नहीं थमता; कागजी घोड़ों की दौड़ इससे भी एक कदम आगे निकल चुकी है। नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार के स्पष्ट निर्देश पत्रांक 1284, दिनांक 03/04/2025 की खुली अवहेलना करते हुए, जिसमें साफ कहा गया था कि दुरुस्त पंचायत सरकार भवन होने पर तत्काल शिफ्टिंग की जाए, ईओ मैडम ने जिलाधिकारी को पत्रांक 184, दिनांक 11/07/2025 को एक पत्र प्रेषित कर दिया। इस पत्र में नेमोपुर/920 मौजा के खाता संख्या 342, खेसरा संख्या 1426 और रकबा 28.78 डी० की एक सुदूर, जलजमाव वाली विवादित भूमि को प्रशासनिक भवन के लिए प्रस्तावित कर पूरा ब्योरा अंकित कर दिया गया है। अपने ही मूल विभाग (नगर विकास एवं आवास विभाग) के जनहित वाले सख्त आदेश को ठंडे बस्ते में दबाकर, सुदूर कोने में नए निर्माण का एस्टीमेट बनाने की यह हड़बड़ी साफ दर्शाती है कि अधिकारियों की नजर विकास पर नहीं, बल्कि उस भारी-भरकम बजट और कमीशन के खेल पर है जो नए टेंडर से पैदा होगा। जनता आज भी बुनियादी सुविधाओं को तरस रही है, और दफ्तर के नाम पर कागजों की यह बाजीगरी बदस्तूर जारी है।

जनता पूछे सवाल: ‘न्यूज भारत टीवी’ के माइक पर मुरौल नगर पंचायत की साख मिट्टी में मिलने और विकास का पैसा अधिकारियों की जेबों में जाने का सनसनीखेज आरोप लगाते स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता और मुखर जनप्रतिनिधि बायें से उपमुखिया मुरौल बसंत कुमार , तिमूल के पूर्व चेयरमैन एवं स्‍थानीय सामाजिक कार्यकर्त्‍ता वीरेन्‍द्र राय एवं मुरौल में पंचायत सरकार भवन के लिए जमीन दान करने वाले पूर्व मुखिया कीर्तिनारायण प्रसाद के पुत्र सोनू कुशवाहा  ।

कमीशन का ‘किराया’ या विकास का जनाजा? मुरौल नगर पंचायत के अधिकारियों पर फूटा जनप्रतिनिधियों का गुस्सा!

प्रशासन की इस हठधर्मिता, नियम-विरुद्ध कार्यों और लूट-खसोट की नीति के खिलाफ अब मुरौल नगर पंचायत के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया है। वार्ड पार्षदों से लेकर उप मुख्य पार्षद तक ने अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह कमीशन का ‘किराया’ दरअसल मुरौल के विकास का जनाजा है।

उप मुख्य पार्षद अजय कुमार राय ने सीधे तौर पर व्यवस्था पर प्रहार करते हुए कहा कि नगर पंचायत में लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या की जा रही है। कुछ जनप्रतिनिधि और अधिकारी खुद को कानून से ऊपर समझते हैं। वे वार्ड पार्षदों को सामूहिक बैठकों में बुलाने के बजाय अकेले-अकेले बुलाकर ‘डील’ करने की कोशिश करते हैं। इसी ‘अकेले-अकेले’ समझाने के चक्कर में आज पूरे जिले में मुरौल की साख मिट्टी में मिल चुकी है।

वहीं, वार्ड संख्या 3 के पार्षद आनंद कन्द साह ने इस प्रशासनिक तानाशाही के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। उन्होंने 15 जून 2026 को पत्र संख्या 465  के माध्यम से बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव और मुजफ्फरपुर के जिला पदाधिकारी (डीएम) को एक अंतिम वैधानिक कानूनी नोटिस तामील कराया है। इस वैधानिक नोटिस में उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि नगर पंचायत कार्यालय को अविलंब सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन में स्थानांतरित नहीं किया गया, तो वे पटना उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका/रिट याचिका  दायर करेंगे।

इस आक्रोश में सामाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र रॉय ने एक और बड़ा खुलासा करते हुए अधिकारियों के भ्रष्टाचार की फेहरिस्त जनता के सामने रख दी है। उन्होंने कहा  कि ‘’ नगर पंचायत में सिर्फ किराए का ही घोटाला नहीं है, बल्कि कबाड़ और तेल का भी एक बहुत बड़ा सिंडिकेट चल रहा है। लगभग 35 लाख रुपये की सरकारी लागत से खरीदी गई पैखाना साफ करने वाली वैक्यूम मशीन और ट्रैक्टर पिछले 3 साल से जंग खा रहे हैं। आज तक वह मशीन किसी गरीब जनता के दरवाजे पर सेवा देने नहीं गई, बल्कि उस ट्रैक्टर का उपयोग अधिकारियों के निजी खेतों को जोतने के लिए किया जा रहा है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि उस खड़ी गाड़ी और निजी कार्यों में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर के नाम पर पेट्रोल पंपों से लाखों रुपये के बोगस वाउचर बनवाकर तेल का खेल खेला जा रहा है। इसी सरकारी तेल की चोरी के पैसे से अधिकारी अपनी निजी स्कॉर्पियो गाड़ियों में घूम रहे हैं। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत पिछले ६ महीनों से तेल की खरीद और लॉग-बुक की पर्चियां मांगने पर भी कार्यालय द्वारा टालमटोल किया जा रहा है, जो यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि परदे के पीछे बहुत कुछ काला है।‘’

मुरौल नगर पंचायत के उप मुख्‍य पार्षद अजय कुमार राय बायें से , एवं मध्‍य में पार्षद आनंद कंद साह , दायें से  वार्ड संख्या 4 के पार्षद बबलू कुमार उर्फ दिलीप कुमार  ‘न्यूज भारत टीवी’ के कैमरे पर अपनी बात रखते हुए

गुप्त खेल पर पार्षदों की मुहर: जनता का पैसा स्वाहा, जनप्रतिनिधि खुद अंधेरे में!

प्रशासनिक तानाशाही और वित्तीय गोपनीयता का तमाशा देखिए कि जिस नगर पंचायत को चलाने की जिम्मेदारी जनता ने अपने चुने हुए प्रतिनिधियों को सौंपी है, उन्हें ही व्यवस्था के इस “गुप्त खेल” से कोसों दूर रखा गया है। वार्ड संख्या चार के पार्षद बबलू कुमार उर्फ दिलीप कुमार का बयान इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि मुरौल नगर पंचायत में पारदर्शिता का जनाजा निकल चुका है। पत्रकार से बातचीत में उन्होंने यह सनसनीखेज स्वीकारोक्ति की है कि आज तक जितने भी सम्मानित पार्षद जीत कर आए हैं, उनमें से कुछ ने जब दफ्तर के इस गुप्त किराए का सच जानने का प्रयास किया, तो उन्हें साफ तौर पर टका सा जवाब दे दिया गया और जानकारी छुपा ली गई। पार्षद खुद अंदाजे से किराया 18 या 19 हजार रुपये होने का अनुमान लगा रहे हैं, जिससे यह साफ है कि कागजों पर चल रहे इस असली खेल का वित्तीय ब्योरा बोर्ड के सदस्यों तक के लिए एक अभेद्य ‘गुप्त भेद’ बना हुआ है। इतना ही नहीं, नेमोपुर में दफ्तर ले जाने की ईओ मैडम की एकतरफा प्रशासनिक जिद पर भी पार्षद के बयान ने सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि इस विषय पर सभी सदस्यों का मतैक्य होना और सामूहिक रूप से बैठकर निर्णय लेना जरूरी था, लेकिन यहाँ बोर्ड के सदस्यों की मानसिकता और राय को ताक पर रखकर प्रक्रिया को “अंतिम चरण” में पहुंचा दिया गया है। जब ब्लॉक परिसर के मुख्य भवन में बीडीओ साहब के चेंबर के ठीक ऊपर मीटिंग हॉल और ऑफिशियल कार्य के लिए पर्याप्त सरकारी जगह (स्पेस) उपलब्ध थी, तो फिर सामूहिक बैठकों में उस पर चर्चा करने के बजाय सुदूर कोने में करोड़ों की नई योजना चमकाने की यह जल्दबाजी किस ‘खास’ नीयत का इशारा कर रही है, यह अब किसी से छुपा नहीं है।

मुरौल नगर पंचायत का यह पूरा घटनाक्रम बिहार के नवगठित नगर निकायों में पनप रहे नौकरशाही के भ्रष्टाचार का एक क्लासिक उदाहरण है। करोड़ों रुपये की लागत से बने, 12-13 कमरों वाले, हवादार, वाटर हार्वेस्टिंग और सोलर जैसी उन्नत तकनीकों से सुसज्जित सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन को महज इसलिए छोड़ दिया गया है क्योंकि वह सरकारी है और वहाँ रहने से अधिकारियों को कोई व्यक्तिगत वित्तीय लाभ या कमीशन नहीं मिलेगा।

भूदाता सत्यनारायण बाबू (अधिवक्ता) ने 2010  में अपनी लाखों रुपये मूल्य की 50 डिसमिल कीमती मुख्य सड़क की जमीन इस उद्देश्य से दान की थी कि यहाँ से समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का कल्याण होगा। आज उनकी आत्मा भी इस प्रशासनिक लूट को देखकर कराह रही होगी। जनप्रतिनिधियों द्वारा पूर्व में डीएम, एसडीओ और कार्यपालक पदाधिकारी को दर्जनों आवेदन दिए गए, लेकिन नतीजा शून्य रहा।

अब जब पानी सिर से ऊपर गुजर चुका है, तो वार्ड पार्षद आनंद कन्द साह द्वारा 15 जून 2026 को दिए गए वैधानिक नोटिस ने प्रशासनिक खेमे में हड़कंप मचा दिया है। इस नोटिस में स्पष्ट मांग की गई है कि:

1. कार्यालय को तुरंत सरकारी भवन में शिफ्ट किया जाए। 2. पिछले ३ वर्षों में गलत तरीके से बहाए गए किराए की पाई-पाई की राशि बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 के तहत दोषी अधिकारियों और मुख्य पार्षद के वेतन/निजी संपत्ति से वसूल की जाए। 3. दलदली भूमि पर नए भवन के प्रस्ताव को रद्द कर ब्लॉक परिसर की सुरक्षित भूमि पर पारदर्शी सर्वे कराया जाए।

यदि मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन और नगर विकास विभाग ने इस अंतिम नोटिस के बाद भी कार्यपालक पदाधिकारी की मनमानी पर लगाम नहीं लगाई, तो यह मामला पटना हाई कोर्ट की चौखट पर गूंजेगा। मुरौल की जनता अब जाग चुकी है और वह अपने हक के पैसों से अधिकारियों की विलासिता का अंत करने के लिए सड़कों से लेकर न्यायालय तक संघर्ष करने को तैयार है।

दाता परिवार द्वारा दान की गई मुख्य सड़क की कीमती 50 डिसमिल जमीन पर बना भव्य दो मंजिला मॉडल ‘सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन’। इसी आलीशान इमारत को फाइलों में ‘जर्जर और जानलेवा’ बताकर बंद रखा गया है। पर हकीकत कुछ और है,देखें उपर के दृश्‍य में लाइव विडयो के अंश  

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बिहार में चीनी उद्योग का बिछेगा जाल ,  9 बंद मिलें होंगी जिंदा, 25 नई मिलों से बदलेगी किसानों की तकदीर;

पटना, 22 जून 2026: बिहार की नीतीश-भाजपा सरकार ने राज्य के औद्योगिक विकास और किसानों की किस्मत बदलने के लिए अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है । मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज पटना के लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प सभागार’ में गन्ना उद्योग विभाग की एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक की और अधिकारियों को सीधे कड़े निर्देश जारी किए । मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि बिहार सरकार किसानों की समृद्धि, औद्योगिक तरक्की और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है ।

इस महा-बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य की 9 बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से जीवित करने और रिकॉर्ड 25 नई चीनी मिलों की स्थापना की कार्ययोजना पर युद्ध स्तर पर काम करने का हुक्म दिया है । सरकार के इस फैसले से पूरे बिहार में रोजगार और औद्योगिक क्रांति की नई लहर दौड़ने वाली है ।

चंपारण बनेगा देश का नंबर 1 गन्ना हब मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को विशेष हिदायत दी कि चंपारण क्षेत्र को पूरे देश के प्रमुख गन्ना उत्पादन क्षेत्रों के रूप में विकसित करने के लिए एक स्पेशल कार्ययोजना बनाई जाए । उन्होंने कहा कि गन्ने का उत्पादन बढ़ाने, इसकी उत्पादकता में सुधार करने और किसानों को बेहतरीन मार्केट उपलब्ध कराने के लिए विभाग बिना किसी देरी के तेजी से काम करे ।

फोटो कैप्‍शन (Photo Caption): पटना के ‘संकल्प सभागार’ में आयोजित गन्ना उद्योग विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, साथ में उपस्थित गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार और विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी ।

इन बंद पड़ी मिलों के दिन बहुरेंगे, स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार मुख्यमंत्री ने बैठक में साफ तौर पर निर्देश दिया कि रैयाम, सकरी, सासामुसा, मढ़ौरा, मोतीपुर, समस्तीपुर, चकिया, चनपटिया और मोतिहारी जैसी प्रमुख बंद पड़ी चीनी मिलों वाले क्षेत्रों में इंडस्ट्रियल एक्टिविटीज को दोबारा शुरू किया जाए । इन मिलों के चालू होने से स्थानीय स्तर पर लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और किसानों को उनकी फसल का सीधा लाभ मिल सकेगा ।

बिहार गन्ना उद्योग प्रोत्साहन नीति-2026 से आएगा भारी निवेश बैठक के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि ‘बिहार गन्ना उद्योग प्रोत्साहन नीति-2026’ के तहत राज्य में ज्यादा से ज्यादा निवेश आकर्षित करने, बड़े निवेशकों को प्रोत्साहित करने और पूरी चीनी इंडस्ट्री के मॉडर्नाइजेशन यानी आधुनिकीकरण पर विशेष फोकस किया जाए । सरकार इस पूरे क्षेत्र के चौमुखी विकास के लिए हर संभव सहयोग देने को तैयार है ।

इस महत्वपूर्ण बैठक में गन्ना उद्योग विभाग के सचिव धर्मेन्द्र सिंह ने एक प्रजेंटेशन के माध्यम से विभाग की वर्तमान योजनाओं, चीनी मिलों की ताजा स्थिति, गन्ना उत्पादन के आंकड़ों और नई प्रोत्साहन नीति के बारे में विस्तार से जानकारी दी ।

बैठक में यह सभी आलाधिकारी रहे मौजूद इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, ऊर्जा विभाग के सचिव अजय यादव, उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार और गन्ना उद्योग विभाग के सचिव धर्मेन्द्र सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे ।

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किसानों के लिए खुशखबरी: बिहार सरकार ने 3.96 लाख किसानों के खातों में भेजे 200 करोड़!

संकल्प सभागार में बटन दबाकर सम्राट चौधरी ने किया राशि का सीधा हस्तांतरण, आपदा प्रबंधन और कृषि विभाग ने मिलकर खोला खजाना

पटना, 22 जून: बिहार की डबल इंजन सरकार ने राज्य के अन्नदाताओं को अब तक की सबसे बड़ी राहत देते हुए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मार्च 2026 के आखिरी हफ्तों में आए विनाशकारी आंधी-तूफान, बेमौसम बारिश और भीषण ओलावृष्टि की मार झेलने वाले किसानों के जख्मों पर सरकार ने मरहम लगाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प सभागार’ में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में राज्य के 3.96 लाख से अधिक प्रभावित किसानों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से 200 करोड़ रुपये से अधिक की कृषि इनपुट अनुदान राशि का ऑनलाइन हस्तांतरण कर दिया है । इस धमाकेदार फैसले से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं और खेती-किसानी के लिए उन्हें एक नया संबल मिला है ।

पटना के संकल्प सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान डीबीटी के माध्यम से प्रभावित किसानों के खातों में 200 करोड़ रुपये से अधिक की कृषि इनपुट अनुदान राशि का डिजिटल हस्तांतरण करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी। मंच पर साथ में मौजूद उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सादा एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी।

आपदा से तबाह हुए थे 13 जिले, सरकार ने माना 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान

मार्च 2026 के दौरान प्रकृति के बदले मिजाज ने बिहार के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई थी । सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, राज्य के 13 प्रमुख जिलों—सहरसा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, मधेपुरा, अररिया, बेगूसराय, पूर्णिया, दरभंगा, किशनगंज, खगड़िया, मधुबनी, सुपौल एवं भागलपुर में 33 प्रतिशत से अधिक फसल क्षति दर्ज की गई थी । इस संकट की घड़ी में सरकार ने तत्परता दिखाते हुए कागजी कार्रवाई को दरकिनार कर सीधा किसानों की मदद करने का फैसला किया ।

आपदा और कृषि विभाग का संयुक्त एक्शन: कुल 260.71 करोड़ का तगड़ा प्रावधान

किसानों को त्वरित और प्रभावी राहत पहुंचाने के लिए बिहार सरकार के दो बड़े विभागों ने मिलकर काम किया । शुरुआत में आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा कृषि इनपुट अनुदान के लिए 200 करोड़ रुपये की मोटी रकम उपलब्ध कराई गई थी । इसके बाद कृषि विभाग की मांग और जरूरत को देखते हुए अतिरिक्त 60.71 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि को भी मंजूरी दे दी गई । इस प्रकार प्रभावित किसानों की चौतरफा सहायता के लिए सरकार द्वारा कुल 260.71 करोड़ रुपये की भारी राशि का ऐतिहासिक प्रावधान किया गया है ।

यह सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, किसानों का आत्मविश्वास है” सम्राट चौधरी

इस ऐतिहासिक अवसर पर किसानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में बेमौसम बरसात, आंधी-तूफान और ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाएं किसानों की कमर तोड़ देती हैं । ऐसी हर विषम परिस्थिति में सरकार अपने खजाने का मुंह खोलकर पीड़ितों के साथ मजबूती से खड़ी है । उन्होंने जोर देकर कहा कि बिहार सरकार की यह कृषि इनपुट अनुदान योजना महज एक वित्तीय सहायता नहीं है, बल्कि यह हमारे अन्नदाताओं के भीतर खोए हुए आत्मविश्वास और स्थिरता को दोबारा जगाने का एक सशक्त माध्यम है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार मिलकर किसानों की आय दोगुनी करने, कृषि को सुरक्षित व टिकाऊ बनाने तथा प्राकृतिक नुकसान की पूरी भरपाई करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है । उन्होंने बिहार के किसानों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से बड़े पैमाने पर जुड़ने का भी आह्वान किया ।

कार्यक्रम में मौजूद रहे सरकार के ये दिग्गज चेहरे

इस हाई-प्रोफाइल और महत्वपूर्ण कार्यक्रम में बिहार सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही । मंच पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा और आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सादा मौजूद रहे । इसके अलावा प्रशासनिक अमले से मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल और मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह सहित कृषि एवं आपदा प्रबंधन विभाग के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने ।

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बिहार में पाताल जाएगा पानी! अनियंत्रित दोहन पर सरकार कसेगी शिकंजा, आ रहा नया कड़ा कानून

पटना, 22 जून: बिहार में लगातार गिरते भू-जल स्तर को रोकने और पानी की बर्बादी पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए सरकार ने एक बेहद बड़ा और कड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है कि राज्य में पानी के अंधाधुंध और अनियंत्रित दोहन को रोकने के लिए ‘बिहार भू-जल (प्रबंधन एवं विनियमन) अधिनियम-2026’ लाने की प्रक्रिया को तेज किया जाए । सरकार की इस नई नीति से अब जमीन से पानी निकालने के नियमों में बड़े बदलाव होंगे और लापरवाही बरतने वालों पर शिकंजा कसा जा सकेगा ।

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री के कड़े निर्देश मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प सभागार’ में लघु जल संसाधन विभाग की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की । इस बैठक में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य के जल संसाधनों की सुरक्षा करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना उनकी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है । उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पानी की बढ़ती जरूरतों और भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए एक सुदृढ़, प्रभावी संस्थागत ढांचा और व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाए ।

पटना के लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प सभागार’ में लघु जल संसाधन विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी। बैठक में लघु जल संसाधन मंत्री संतोष कुमार सुमन, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, सचिव बी कार्तिकेय धनजी व अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

सिर्फ नई योजनाएं नहीं, पुरानी परिसंपत्तियों का भी होगा रखरखाव बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संसाधन विभाग का काम केवल नई परियोजनाओं का निर्माण करना ही नहीं है, बल्कि पहले से बनी हुई संरचनाओं और संपत्तियों का बेहतर रखरखाव और सही प्रबंधन करना भी होना चाहिए । विभाग को अपने काम करने के तरीके में बदलाव लाना होगा, जिससे वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग), ग्राउंड वाटर रिचार्ज और जल संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों को जमीन पर बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिल सके । इसके लिए वैज्ञानिक और तकनीकी उपायों को अपनाने पर विशेष जोर दिया गया है ।

बैठक में ये सभी रहे उपस्थित बैठक की शुरुआत में लघु जल संसाधन विभाग के सचिव बी कार्तिकेय धनजी ने एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण (प्रेजेंटेशन) के माध्यम से विभाग की वर्तमान योजनाओं और प्रस्तावित नीति के महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी । इस उच्च स्तरीय बैठक में लघु जल संसाधन मंत्री संतोष कुमार सुमन, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह सहित विभाग के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे ।

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लालू परिवार पर बरसे सम्राट चौधरी, बोले – ‘36% अति-पिछड़ों का अंगरक्षक हूँ, किसी अपराधी को नहीं बख्शूँगा’

श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में बीजेपी का महासम्मेलन: सम्राट चौधरी ने विपक्ष को घेरा, नित्यानंद राय और राजभूषण निषाद सहित दिग्गज नेताओं ने भरी हुंकार, नवनिर्वाचित विधान परिषद सदस्यों और विधायकों का हुआ भव्य अभिनंदन

पटना, 22 जून। बिहार की सियासत के केंद्र बिंदु अति-पिछड़ा वोट बैंक को साधने के लिए सोमवार को राजधानी पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में भारतीय जनता पार्टी की ओर से एक विशाल ‘अति-पिछड़ा सम्मान समारोह’ का आयोजन किया गया। इस महासम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष, खासकर लालू प्रसाद यादव के परिवार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। सम्राट चौधरी ने मंच से गरजते हुए साफ शब्दों में कहा, “मैं बिहार के 36 प्रतिशत अति-पिछड़ों का अंगरक्षक हूँ। इस समाज के हक और अधिकारों पर कोई आंच नहीं आने दी जाएगी। अपराधियों के खिलाफ बिहार में सफाई अभियान लगातार जारी रहेगा और संगीन जुर्म करने वालों को किसी भी सूरत में बक्सा नहीं जाएगा।”

भव्य समारोह के दौरान मंच पर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, कला संस्कृति मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी और अन्य नेताओं का विशाल फूलों की माला पहनाकर अभिनंदन करते कार्यकर्ता।

सुरक्षा और बंगले के खेल पर सम्राट का बड़ा प्रहार

इन दिनों लालू परिवार द्वारा सुरक्षा में कटौती और बंगलों को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर पलटवार करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि उनके आवास के बाहर आज भी करीब 150 पुलिसकर्मी तैनात हैं। उन्हें बुलेटप्रूफ गाड़ी और जरूरत के मुताबिक पूरा पुलिस बल मिला हुआ है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, “क्या अब पूरे बिहार की पुलिस को उनकी सुरक्षा में लगा दें? अगर ऐसा किया तो फिर इस अति-पिछड़ा समाज की सुरक्षा कौन करेगा?”

मुख्यमंत्री ने संपत्ति पर भी बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि पटना से लेकर गोपालगंज और दिल्ली तक लालू परिवार के पास कितने मकान हैं, इसकी कोई गिनती ही नहीं है। इसके बावजूद परिवार के हर सदस्य को अलग-अलग बंगला चाहिए। उन्होंने साफ किया कि एनडीए सरकार में परिवारवाद नहीं, बल्कि जनता का राज चलेगा।

पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित अति-पिछड़ा सम्मान समारोह के मंच पर गदा उठाकर जनता का अभिवादन करते बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी। साथ में कला संस्कृति मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी एवं अन्य वरिष्ठ नेतागण।

केंद्र और राज्य सरकार में अति-पिछड़ों को तवज्जो

समारोह को संबोधित करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश और बिहार के पिछड़े एवं अति-पिछड़े समाज को असली सम्मान, अधिकार और विकास के नए अवसर मिले हैं। सरकार की नीतियों में इस समाज को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है ताकि हर व्यक्ति आत्मविश्वास के साथ शिक्षा और रोजी-रोजगार हासिल कर सके।

भारतीय जनता पार्टी के अति-पिछड़ा महासम्मेलन में उमड़ी भारी भीड़। गगनभेदी नारों के बीच हाथ उठाकर एकजुटता का संकल्प जताते अति-पिछड़ा समाज के हजारों लोग।

मोदी सरकार के 12 वर्षों की उपलब्धियों का गूंजा डंका

कार्यक्रम में पहुंचे केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गरीब कल्याण, सुशासन और जनकल्याण के 12 गौरवशाली वर्ष पूरे हुए हैं। इन 12 वर्षों में अति-पिछड़ा समाज के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए केंद्र सरकार ने कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। योजनाओं का सीधा लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंच रहा है।

दिग्गजों का जुटा जुटान, विधायकों और विधान पार्षदों का अभिनंदन

कला संस्कृति मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी द्वारा आयोजित इस भव्य अभिनंदन समारोह में नवनिर्वाचित विधान परिषद सदस्यों और अति-पिछड़ा समाज के विधायकों को सम्मानित किया गया। मंच पर केंद्रीय मंत्री राजभूषण निषाद, पूर्व मंत्री राधामोहन सिंह सहित भाजपा के तमाम शीर्ष नेता और पदाधिकारी मौजूद रहे। पूरा हॉल अति-पिछड़ा समाज के हजारों लोगों की भारी भीड़ से खचाखच भरा हुआ था, जिन्होंने हाथ उठाकर एनडीए सरकार की नीतियों के प्रति अपना पूरा समर्थन जताया।

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अपराधियों के खौफ से गूंजी समस्तीपुर की धरती: संजीव सहनी के हत्यारों की गिरफ्तारी न होने पर रो पड़ी बूढ़ी मां और बिलख उठी पत्नी

ताजपुर थाना घेराव: भाकपा माले और व्यवसायी संघ ने निकाला जुलूस, पुलिस को दिया 15 दिनों का अल्टीमेटम, मांग पूरी न होने पर पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन आमरण अनशन की दी चेतावनी

ताजपुर/समस्तीपुर, 22 जून 2026 ताजपुर थाना क्षेत्र में लगातार बढ़ रही हत्या, लूट, छिनतई और अन्य आपराधिक घटनाओं ने आम जनता और व्यापारियों की नींद उड़ा दी है। क्षेत्र की बदहाल कानून-व्यवस्था और बढ़ते अपराध के खिलाफ सोमवार को जन-आक्रोश फूट पड़ा। भाकपा माले और बिहार राज्य व्यवसायी संघ के संयुक्त आह्वान पर सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं ने ताजपुर थाना का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और हाल ही में हुए संजीव सहनी हत्याकांड समेत कई बड़ी वारदातों के आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की।

ताजपुर थाना के समक्ष अपराधियों की गिरफ्तारी और बढ़ते अपराध पर रोक लगाने की मांग को लेकर बैनर और लाल झंडों के साथ प्रदर्शन करते भाकपा माले एवं बिहार राज्य व्यवसायी संघ के कार्यकर्ता।

जुलूस की शुरुआत सोमवार को जनता मैदान (कर्बला पोखर) से हुई। हाथों में लाल झंडे और अपनी मांगों की तख्तियां लिए लोग नारेबाजी करते हुए ताजपुर थाना परिसर पहुंचे। वहां करीब एक घंटे तक जोरदार प्रदर्शन हुआ, जिसके बाद प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में एक विरोध सभा का आयोजन किया गया।

मेरे तीन छोटे बच्चों का पेट कौन भरेगा?” – पत्नी और मां का छलका दर्द

प्रदर्शन के दौरान मृतक संजीव सहनी के परिजनों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। संजीव सहनी की बूढ़ी मां ने रोते हुए न्याय की गुहार लगाई। मां ने कहा, “हमारे बेटे को गोली मारकर छीन लिया गया। हमें हत्यारों की गिरफ्तारी चाहिए। जैसे मेरे बेटे को गोली लगी, वैसे ही सजा हत्यारों को मिलनी चाहिए। अब हम इन तीन छोटे-छोटे बच्चों को लेकर कैसे जिएंगे? हमारा पालन-पोषण कौन करेगा? हमारा तो सब कुछ उजाड़ दिया।”

ताजपुर थाने पर प्रदर्शन के दौरान संजीव सहनी के रोते-बिलखते परिजन और गोद में बच्चों को संभालती संजीव सहनी की बेबस पत्नी।

वहीं, गोद में छोटे बच्चे को लिए संजीव सहनी की पत्नी रविना कुमारी का रो-रोकर बुरा हाल था। रविना कुमारी ने बिलखते हुए कहा, “हम किसके सहारे जिएंगे? अब हमारा इस दुनिया में कोई नहीं है।” रोते-बिलखते परिजनों को देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।

वक्ताओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले की राज्य कमिटी सदस्य बंदना सिंह ने कहा कि ताजपुर अब अपराधियों का गढ़ बनता जा रहा है। पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है और जनता खौफ के साए में जीने को मजबूर है। उन्होंने संजीव सहनी हत्याकांड के साथ-साथ किराना व्यवसायी नरेश चौधरी से लूट एवं गोलीकांड, दर्गाहिया चौक हत्याकांड, नीम चौक सोना लूटकांड और महिला थाना कांड संख्या 61/26 के आरोपियों की अविलंब गिरफ्तारी की मांग की।

ताजपुर थाना घेराव के दौरान उपस्थित जनसमूह को संबोधित करतीं भाकपा माले की राज्य कमिटी सदस्य बंदना सिंह और आक्रोशित लोग।

इस सभा को जिला कमिटी सदस्य जीबछ पासवान, उपेंद्र राय, आसिफ होदा, प्रखंड कमिटी सदस्य ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, मो. एजाज, शाद तौहीदी, राजदेव प्रसाद सिंह, जीतेंद्र सहनी, मनोज कुमार सिंह, ललन दास, शंकर महतो, मो. अबुबकर, मो. क्यूम, सुलेखा कुमारी, रंजु कुमारी, मो. कादीर, मो. शकील, रुखसाना खातुन, सुखिया खातुन के अलावा मृतक के पिता देवकी सहनी तथा भाई सुशील सहनी ने भी संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि जब तक व्यापारियों और आम लोगों को सुरक्षा नहीं मिलती, आंदोलन जारी रहेगा।

पुलिस प्रशासन के खिलाफ आक्रोश जताने के लिए लाल झंडे लेकर ताजपुर थाना परिसर के भीतर जमा हुए सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़।

थानाध्यक्ष को सौंपा 7 सूत्री मांगपत्र, आमरण अनशन की चेतावनी

प्रदर्शन के अंत में वहां तैनात मजिस्ट्रेट के माध्यम से थानाध्यक्ष राकेश कुमार शर्मा को एक 7 सूत्री मांगपत्र सौंपा गया। माले नेताओं ने पुलिस प्रशासन को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर संजीव सहनी के हत्यारों और अन्य कांडों के अपराधियों को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो वे समस्तीपुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन आमरण अनशन आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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नीतीश का दबदबा कायम: निर्विरोध चुने गए जद (यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष, उमेश कुशवाहा फिर बने प्रदेश कप्तान,

राष्ट्रीय परिषद और राज्य परिषद की महाबैठक में नीतीश कुमार के नाम पर लगी सर्वसम्मति की मुहर; ललन सिंह, संजय झा और विजय चौधरी सहित दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में  पारित हुआ बड़ा  प्रस्ताव।

पटना। बिहार की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी  खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर जनता दल (यूनाइटेड) का निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिए गए हैं। पटना में आयोजित जद (यू) राष्ट्रीय परिषद की हाई-प्रोफाइल बैठक में नीतीश कुमार के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर निर्वाचन का सर्वसम्मति से अनुमोदन कर दिया गया। इसके ठीक बाद आयोजित राज्य परिषद की बैठक में भी बड़ा फैसला लेते हुए उमेश सिंह कुशवाहा के प्रदेश अध्यक्ष पद पर दोबारा निर्वाचन को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई। इन दो बड़े फैसलों के साथ ही जद (यू) ने आगामी राजनीतिक लड़ाइयों के लिए अपनी कमान पूरी तरह से कस ली है और दिल्ली से लेकर पटना तक गठबंधन सहयोगियों तथा विरोधियों को अपनी एकजुटता का बड़ा संदेश दे दिया है।

जद (यू) का महामंच: पटना में आयोजित जनता दल (यूनाइटेड) की राष्ट्रीय परिषद की बैठक के दौरान मंच पर एकजुटता प्रदर्शित करते नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा, मंत्री लेसी सिंह, श्रवण कुमार तथा अन्य वरिष्ठ नेतागण।

नीतीश के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर दिग्गजों ने जताया भरोसा :  इस बेहद महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परिषद की बैठक में देश और राज्य के तमाम शीर्ष नेताओं का जमावड़ा रहा। मंच पर नीतीश कुमार के साथ पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह तथा केंद्रीय राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर मुख्य रूप से मौजूद रहे। इसके अलावा जद (यू) विधायक दल के नेता सह मंत्री श्रवण कुमार, मंत्री निशांत कुमार, बिहार प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा, लोकसभा में जद (यू) संसदीय दल के नेता दिलेश्वर कामैत, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी, राष्ट्रीय महासचिव सह विधान पार्षद अफाक अहमद खान, मंत्री लेसी सिंह, विधान परिषद में सत्तारूढ़ दल के उपनेता ललन सर्राफ, मुख्य सचेतक संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी जी, अनिल हेगड़े, राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक और राष्ट्रीय महासचिव गुलाम रसूल बलियावी सहित पार्टी के सभी माननीय मंत्री, सांसद और राष्ट्रीय परिषद के सम्मानित सदस्य उपस्थित रहे। बैठक के समापन सत्र में सभी नेताओं का आभार प्रकट करते हुए प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया।

नीतीश का हुंकार: राष्ट्रीय परिषद की बैठक के मुख्य सत्र में मंच से नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते जद (यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार। बगल में मुस्तैद सुरक्षा घेरा और मंच पर बैठे कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, मंत्री अशोक चौधरी सहित पार्टी के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी।

राज्य परिषद में उमेश कुशवाहा की ताजपोशी : राष्ट्रीय परिषद की बैठक के साथ ही बिहार प्रदेश जनता दल (यू) की राज्य परिषद की भी अहम बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में उमेश सिंह कुशवाहा को दोबारा बिहार प्रदेश अध्यक्ष के रूप में सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया। प्रदेश निर्वाचन पदाधिकारी अशोक कुमार मुन्ना की देखरेख में चुनावी प्रक्रिया का अनुमोदन हुआ। इस बैठक में राजनीतिक गलियारों में हलचल मचाने वाला एक बड़ा राजनीतिक प्रस्ताव माननीय मंत्री अशोक चौधरी ने प्रस्तुत किया, जिसका समर्थन मंत्री शीला मंडल ने किया। इस प्रस्ताव में पार्टी की भावी रणनीतियों और बिहार के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल किए गए हैं। बैठक के अंत में मंत्री श्रवण कुमार ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इस राज्य परिषद की बैठक में मुख्य रूप से संजय कुमार झा, ललन सिंह, रामनाथ ठाकुर, विजय कुमार चौधरी, बिजेंद्र प्रसाद यादव, श्रवण कुमार, निशांत कुमार और जमा खान सहित पार्टी के सभी माननीय विधायक, विधान परिषद सदस्य और राज्य परिषद के डेलीगेट्स मौजूद रहे।

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पूरे विश्‍व में गूंजा भारत की सनातन संस्‍कृति का डंका, राष्‍ट्रपति से लेकर पी एम, सी एम और युवाओं ने किया महायोगाभ्‍यास!

20 की उम्र से ज्‍यादा 40 में दिखेगा लचीलापन, बीमारियों की अब खैर नहीं; देश भर में योग की दिखी अद्भुत धूम

विशेष संवाददाता नई दिल्‍ली/पटना/मुजफ्फरपुर, 21 जून 2026

आज पूरे देश सहित विश्‍व भर में 12वें अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस की ऐसी धूम दिखी जिसने हर किसी को ऊर्जा से भर दिया। राष्‍ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्‍यमंत्री से लेकर देश के कोने-कोने में युवाओं और आम जनता ने एक साथ कदम ताल करते हुए योगाभ्‍यास किया। इस बार की थीम ‘365 योग फॉर हेल्‍दी एजिंग’ के तहत उम्र को मात देने और निरोगी काया पाने का महासंकल्‍प लिया गया।

जबलपुर में राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का महासंदेश: ब्रह्मांडीय चेतना से जुड़ने का माध्‍यम है योग

अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मध्‍य प्रदेश के जबलपुर में आयोजित एक विशाल सामूहिक योग प्रदर्शन में भाग लिया। आंखें बंद कर ध्‍यान की मुद्रा में बैठीं राष्‍ट्रपति ने पूरे विश्‍व को शांति का संदेश दिया।

ध्‍यान में लीन राष्‍ट्रपति: अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जबलपुर (मध्‍य प्रदेश) में आंखें बंद कर पूरी तन्‍मयता के साथ सामूहिक योगाभ्‍यास और ध्‍यान लगातीं राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू।

राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा:

“योग व्‍यक्ति को आत्‍मा से, समाज को प्रकृति से, और मानवता को विशाल ब्रह्मांडीय चेतना से जोड़ने का एक शक्तिशाली माध्‍यम है। जब विश्‍व अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब योग मानवता को शांति, संतुलन, सामंजस्‍य और सामूहिक कल्‍याण की ओर निर्देशित करने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।”

उन्‍होंने देश के हर नागरिक से अपील की कि वे योग को अपने दैनिक जीवन का अभिन्‍न अंग बनाएं।

कोलकाता के रेड रोड पर पी एम नरेंद्र मोदी का धमाकेदार आह्वान: 40 की उम्र में 20 जैसा लचीलापन लाएगा योग!

कोलकाता के रेड रोड पर आज सुबह एक असाधारण और अद्भुत नजारा देखने को मिला, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हजारों लोगों के साथ योग किया। विभिन्‍न क्षेत्रों के दिग्‍गजों और आम लोगों के बीच पहुंचे प्रधानमंत्री ने बढ़ती उम्र को थामने और स्‍वस्‍थ रहने का एक नया मंत्र फूंक दिया।

इस बार की थीम ‘योग फॉर हेल्‍दी एजिंग’ पर जोर देते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा:

“हमारा लक्ष्‍य यह होना चाहिए कि 40 वर्ष की आयु में हम 20 वर्ष की आयु की तुलना में अधिक लचीले हों। हमारा लक्ष्‍य यह होना चाहिए कि 50 वर्ष की आयु में हम 30 वर्ष की आयु की तुलना में अधिक ऊर्जावान हों। हमारा लक्ष्‍य यह होना चाहिए कि 70 वर्ष की आयु में हम 50 वर्ष की आयु की तुलना में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के प्रति अधिक प्रतिरोधक क्षमता रखते हों।”

फिट इंडिया का महासंकल्‍प: (बाएं) कोलकाता के रेड रोड पर हजारों की भीड़ के बीच योग की कठिन मुद्रा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और (दाएं) पटना के पाटलिपुत्र खेल परिसर में योग के जरिए शरीर को लचीला बनाते बिहार के मुख्‍यमंत्री सम्राट चौधरी।

पटना में सी एम सम्राट चौधरी का हुंकार: विकसित बिहार के निर्माण के लिए जन-जन का संक‍ल्‍प बने योग

बिहार की राजधानी पटना के पाटलिपुत्र खेल परिसर, कंकड़बाग में राज्‍यस्‍तरीय योग कार्यक्रम का भव्‍य आयोजन किया गया। इसमें बिहार के मुख्‍यमंत्री सम्राट चौधरी ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की और योगासनों का अभ्‍यास किया।

सम्राट चौधरी ने कहा कि योग भारत की सनातन ज्ञान परंपरा का अमूल्‍य उपहार है, जो शरीर, मन और आत्‍मा के समन्‍वय का मार्ग प्रशस्‍त करता है। उन्‍होंने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व में योग को वैश्विक पहचान मिली है और आज संपूर्ण विश्‍व भारतीय संस्‍कृति की इस महान धरोहर को अपनाकर स्‍वस्‍थ एवं संतुलित जीवन की ओर अग्रसर है। उन्‍होंने बिहारवासियों से अपील की, “आइए, योग को जन-जन का संकल्‍प बनाकर स्‍वस्‍थ, समृद्ध एवं विकसित बिहार के निर्माण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।”

एमआईटी मुजफ्फरपुर में युवाओं का महाकुंभ: 150 से अधिक स्‍वयंसेवकों ने लिया 365 दिन योग का संकल्‍प

मुजफ्फरपुर के मुजफ्फरपुर इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी (एमआईटी) परिसर में भी अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस का भव्‍य और ऐतिहासिक नजारा दिखा। मेरा युवा भारत, मुजफ्फरपुर (युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार) एवं एमआईटी कॉलेज के संयुक्‍त तत्‍वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में युवाओं का भारी सैलाब उमड़ा। जिला के विभिन्‍न प्रखंडों से आए माई भारत के 150 से अधिक युवा क्‍लबों के स्‍वयंसेवकों ने पूरे उत्‍साह के साथ योगाभ्‍यास किया।

युवाओं की सजग काया: मुजफ्फरपुर के एमआईटी कॉलेज परिसर में ‘माई भारत’ के स्‍वयंसेवकों और कॉलेज के प्रोफेसरों के साथ हाथ जोड़कर प्रार्थना और योग की शुरुआत करते प्रतिभागीगण ।

प्राचार्य और अधिकारियों ने बढ़ाया उत्‍साह: कार्यक्रम में मुख्‍य अतिथि के रूप में एमआईटी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. मिथिलेश कुमार झा, विशिष्‍ट अतिथि के रूप में सिविल इंजीनियरिंग के असिस्‍टेंट प्रोफेसर डॉ. विजय कुमार, जिला युवा अधिकारी बुशरा रहमान और सहायक प्रशाखा अधिकारी चन्‍देश्‍वर पाण्‍डेय उपस्थित रहे। योग शिक्षक जन्‍मेजय कुमार ने सभी को कठिन और स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक योगासनों एवं प्राणायाम का अभ्‍यास कराया।

एमआईटी के प्राचार्य प्रो. मिथिलेश कुमार झा ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि योग शारीरिक स्‍वास्‍थ्‍य के साथ-साथ मानसिक शांति और एकाग्रता के लिए अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण है। वहीं जिला युवा अधिकारी बुशरा रहमान ने फिट और सकारात्‍मक जीवन के लिए प्रतिदिन योग को जीवनशैली का हिस्‍सा बनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम का समापन एक स्‍वस्‍थ और समृद्ध भारत के सामूहिक संकल्‍प के साथ हुआ, जिसे सफल बनाने में राष्‍ट्रीय युवा स्‍वयंसेवकों ने अपनी पूरी जान लगा दी।

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बिहार (मढ़ौरा)  का बना रेल इंजन अब दुनिया की पटरी पर दौड़ेगा, अफ्रीकी देश गिनी के लिए 51वां इंजन रवाना; छपरा को मिली नई सुपरफास्ट ट्रेन की सौगात

विशेष संवाददाता, छपरा

सारण की ऐतिहासिक धरती ने आज वैश्विक पटल पर एक नया इतिहास रच दिया है। बिहार की बढ़ती औद्योगिक ताकत और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को दर्शाते हुए सारण जिले के मढ़ौरा स्थित डीजल लोकोमोटिव प्लांट से तैयार किया गया 51वां रेल इंजन अफ्रीकी देश गिनी गणराज्य के लिए रवाना कर दिया गया है। इस गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण के साक्षी केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बने, जिन्होंने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर इस स्वदेशी इंजन को वैश्विक सफर पर रवाना किया।

रेलवे प्लेटफॉर्म पर विकास कार्यों का जायजा लेते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और अन्य अधिकारी एवं सुरक्षाकर्मी।

छपरा जंक्शन से दिल्ली के लिए नई सुपरफास्ट ट्रेन को हरी झंडी इस बड़े औद्योगिक धमाके के साथ ही सारण और आसपास के जिलों के लाखों यात्रियों के लिए भी आज का दिन खुशियों की सौगात लेकर आया। छपरा जंक्शन पर आयोजित एक भव्य समारोह में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने छपरा-दिल्ली (आनंद विहार) नई एक्सप्रेस रेल सेवा को हरी झंडी दिखाई। इसके अलावा मऊ-दिल्ली (आनंद विहार) नियमित एक्सप्रेस और दोहरीघाट-औंड़िहार ट्रेन सेवा का वाराणसी तक विस्तार करते हुए कुल 3 नई रेल सेवाओं का शुभारंभ किया गया। यह नई रेल सेवाएं क्षेत्र में रोजगार, शिक्षा और व्यापार के नए अवसरों के द्वार खोलेंगी। इस अवसर पर स्थानीय सांसद राजीव प्रताप रूडी, जनार्दन सिंह सिग्रीवाल समेत कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और रेलवे के उच्चाधिकारी मौजूद रहे।

सारण के ऐतिहासिक विकास को गति देते हुए मंच पर केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, सांसद राजीव प्रताप रूडी, जनार्दन सिंह सिग्रीवाल और अन्य जनप्रतिनिधि हरी झंडी दिखाकर नई रेल सेवाओं तथा मढ़ौरा से निर्मित 51वें वैश्विक रेल इंजन को रवाना करते हुए।

सारण के लिए बड़ी घोषणाएं: 2 नए एयरपोर्ट, 2 टाउनशिप और ड्राई पोर्ट समारोह को संबोधित करते हुए नेताओं ने सारण के समग्र विकास के लिए कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की घोषणा की। अब सारण जिले को केवल नई ट्रेनों की ही नहीं, बल्कि भविष्य में 2 नई टाउनशिप, 2 नए एयरपोर्ट, बेहतर सड़क संपर्क और एक हाई-टेक ड्राई पोर्ट की सौगात भी मिलने जा रही है। रेल, उद्योग, निवेश और आधुनिक आधारभूत संरचना के सहारे बिहार अब विकास की नई पटरी पर बुलेट ट्रेन की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है।

पाटलिपुत्र से छपरा तक रेल में संवाद और एसटीपीआई (STPI) का दौरा इससे पहले केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पाटलिपुत्र से छपरा तक रेल द्वारा सफर किया। इस यात्रा के दौरान दोनों नेताओं के बीच बिहार की रेल परियोजनाओं, कनेक्टिविटी और सूबे की बदलती तस्वीर पर गहन बातचीत हुई। इसके अतिरिक्त, पटना स्थित सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया (STPI) का भी दोनों मंत्रियों ने दौरा किया। इस दौरान डिजिटल इंडिया के संकल्प के तहत बिहार में आईटी एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त बनाकर विकसित बिहार के निर्माण की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

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