चकाई/जमुई: बिहार के विकास और औद्योगीकरण की दिशा में सरकार ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जमुई जिले के चकाई प्रखंड में निर्माणाधीन अंकुर बायोकेम प्राइवेट लिमिटेड एथेनॉल प्लांट का औचक निरीक्षण किया और चल रहे कार्यों का जायजा लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि यह प्लांट अगले वर्ष यानी मार्च 2027 तक हर हाल में शुरू हो जाना चाहिए। जमुई जिले में करीब ₹3,400 करोड़ के बड़े औद्योगिक निवेश से लगभग 10,000 से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, जिससे राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के द्वार खुलेंगे।
जमुई जिले के चकाई में निर्माणाधीन एथेनॉल प्लांट का निरीक्षण करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एवं अन्य अधिकारी व जनप्रतिनिधि।
एशिया के सबसे बड़े ग्रेन-बेस्ड एथेनॉल प्लांट की खासियत
निरीक्षण के पश्चात आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि यह प्लांट एशिया के सबसे बड़े ग्रेन-बेस्ड एथेनॉल प्लांट्स में से एक है। इसे 105 एकड़ भूमि पर विकसित किया जा रहा है, जिसकी उत्पादन क्षमता 1000 किलो लीटर प्रतिदिन होगी। इसके जरिए हर दिन लगभग 10 लाख लीटर एथेनॉल का उत्पादन किया जाएगा। इस परियोजना में 20 मेगावाट की कैप्टिव पावर जेनरेशन सुविधा भी स्थापित होगी, जिससे संयंत्र ऊर्जा के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनेगा। संयंत्र को प्रतिदिन लगभग 30,000 क्विंटल अनाज की आवश्यकता होगी, जिससे स्थानीय किसानों को उनकी उपज का स्थायी और भरोसेमंद बाजार मिलेगा। साथ ही, यह प्लांट जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) प्रणाली पर आधारित होगा, जिससे पर्यावरण और जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
9,000 एकड़ भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र का मेगा प्लान
बैठक के दौरान चकाई में औद्योगिक क्षेत्र के लिए चिह्नित लगभग 9,000 एकड़ भूमि के संबंध में विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। इसमें बताया गया कि चिह्नित भूमि में करीब 5,000 एकड़ भूमि वन विभाग की तथा 4,000 एकड़ भूमि रैयती एवं अन्य श्रेणी की है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि 10 से 12 दिनों के भीतर इस भूमि की मैपिंग सुनिश्चित कराई जाए ताकि वन क्षेत्र की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। साथ ही, 30 अक्टूबर तक भूमि का पूरा ब्यौरा एकत्रित कर आगे की कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है।
पर्यटन और आधारभूत संरचना का विकास
औद्योगीकरण के साथ-साथ क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लछुआर मंदिर और गरही डैम को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, भीम बांध से लक्ष्मीपुर और मुंगेर से गंगटा को जोड़ने वाली सड़कों को दुरुस्त रखने, पुलिसिंग व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने तथा क्षेत्र में बिजली एवं आवागमन की बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
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ताजपुर और समस्तीपुर क्षेत्र में शनिवार को राजनीतिक पारा उस समय सातवें आसमान पर पहुंच गया, जब भाकपा माले की ताजपुर प्रखंड कमिटी के बैनर तले दर्जनों की संख्या में कार्यकर्ता और आम लोग सड़कों पर उतर आए। विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ आयोजित इस जनाक्रोश मार्च के दौरान पूरा इलाका सरकार विरोधी नारों से गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों पर किसी भी प्रकार का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ताजपुर के फतेहपुर चौक से मोतीपुर तक निकले मार्च के बाद सभा में मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला फूंकते और आक्रोश व्यक्त करते भाकपा माले के कार्यकर्ता एवं नेता।
उग्र नारों के साथ निकला मार्च
शनिवार को पूर्वाह्न फतेहपुर चौक पर भारी संख्या में कार्यकर्ता एकत्रित हुए। यहाँ से हाथों में लाल झंडे और तख्तियाँ लेकर प्रदर्शनकारियों ने जोरदार मार्च निकाला। मार्च फतेहपुर चौक से शुरू होकर मोतीपुर सब्जी मंडी तक गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ उग्र नारेबाजी की। “वोट चोर मोदी-शाह गद्दी छोड़”, “ज्ञानेश कुमार मोदी का यार है-देश का गद्दार है”, “विशेष गहन पुनरीक्षण को रद्द करो” और “वोट चोर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो” जैसे नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा।
मोतीपुर सब्जी मंडी में हुई विशाल सभा
मोतीपुर सब्जी मंडी पहुँचकर यह मार्च एक विशाल जनसभा में तब्दील हो गया। सभा की अध्यक्षता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने की। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को चुनावी अधिकारों पर सीधा डाका बताया।
सभा को संबोधित करने वाले प्रमुख वक्ताओं में ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, प्रभात रंजन गुप्ता, शंकर महतो, मनोज कुमार सिंह, संजीव राय, सुलेखा कुमारी, आशा कुमारी एवं सुनीता कुमारी शामिल रहे। इन सभी नेताओं ने एक स्वर में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से तत्काल इस्तीफे की मांग की।
बंदना सिंह नेकेंद्र सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
सभा को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए भाकपा माले राज्य कमिटी सदस्य बंदना सिंह ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने सोची-समझी रणनीति के तहत चुनाव आयोग की संरचना और कार्यप्रणाली में बदलाव किया है ताकि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके।
उन्होंने गंभीर दावा करते हुए कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण के माध्यम से सुनियोजित तरीके से बड़ी संख्या में आम मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, जिससे सीधे तौर पर जनता के संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है। उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा कि उनकी पार्टी इस तानाशाही के खिलाफ चुप नहीं बैठेगी, बल्कि इस मुद्दे को लेकर गांव-गांव तक आंदोलन चलाया जाएगा और जनता को जागरूक किया जाएगा।
चुनाव आयुक्त का पुतला दहन कर जताया कड़ा विरोध
कार्यक्रम के अंतिम चरण में आक्रोशित प्रदर्शनकारियों और कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया। पुतला फूंककर कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और चेतावनी दी कि यदि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को तुरंत रद्द नहीं किया गया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।
मुजफ्फरपुर: बिहार विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। राष्ट्रीय जनता दल द्वारा इन सीटों पर एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में न उतारने पर ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस ए मुशावरत बिहार एवं मानवाधिकार संस्थान बिहार के महासचिव मोहम्मद इश्तेयाक ने राजद नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे मुस्लिम बुद्धिजीवियों और शिक्षित मतदाताओं को फुसलाने वाला एक मात्र “लॉलीपॉप लेटर” और राजनीतिक पाखंड करार दिया है।
क्या है पूरा मामला?
बिहार विधान परिषद के 8 सीटों के चुनाव में राजद द्वारा शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से किसी भी मुस्लिम चेहरे को टिकट न दिए जाने के बाद पूरे बिहार के अल्पसंख्यकों और बुद्धिजीवियों में जबरदस्त आक्रोश देखा जा रहा है। विरोध की यह आग तब और भड़क उठी जब राजद के एक घरेलू कर्मचारी और तथाकथित मुस्लिम नेता ने यह बयान दिया कि “बुद्धिजीवी क्षेत्र से एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं मिला।” इस बयान के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या पूरे बिहार में एक भी शिक्षित, सक्षम और बुद्धिजीवी मुसलमान नहीं है?
मोहम्मद इश्तेयाक ने कड़े शब्दों में सवाल किया कि राष्ट्रीय स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ का गठन सिर्फ सभाओं में मुसलमानों से दरी बिछाने और कुर्सी लगवाने के लिए किया जाता है क्या?
मोहम्मद इश्तेयाक,महासचिव , ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस ए मुशावरत बिहार एवं मानवाधिकार संस्थान बिहार
राष्ट्रीय स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ का गठन सिर्फ सभाओं में मुसलमानों से दरी बिछाने और कुर्सी लगवाने के लिए किया जाता है क्या? तेजस्वी यादव ने अपने सहयोगी संजय और एक गोल टोपी पहने हुए प्यादे को आदेश दिया था कि सभी जिलों में अल्पसंख्यक और सभी वर्गों में एक लिस्टेड बुद्धिजीवी कमेटी बनाई जाए और साल में दो बार बैठक कर फीडबैक लिया जाए। लेकिन कुंभकर्णी राजनीतिक निंद्रा के कारण आज तक न कोई कमेटी बनी और न ही कोई सुधि ली गई- मोहम्मद इश्तेयाक, महासचिव , ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस ए मुशावरत बिहार एवं मानवाधिकार संस्थान बिहार
कुंभकर्णी नींद और मास्टरस्ट्रोक का ढोंग
राज्य स्तर पर सुलग रहे इस आक्रोश को शांत करने और लीपापोती करने के लिए तेजस्वी यादव की ओर से एक लॉलीपॉप लेटर वाला मास्टरस्ट्रोक चलाया गया है। जानकारों का कहना है कि लगभग 5 महीने बाद कुंभकर्णी निंद्रा से जागे तेजस्वी यादव अब पत्रबाजी कर रहे हैं, लेकिन इससे नाराजगी कम होने वाली नहीं है।
मोहम्मद इश्तेयाक ने अपनी पिछली मुलाकातों का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने 16 सितंबर 2024 को हुई मुलाकात के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया था कि पार्टी में एक्टिविस्ट, विद्वान, स्कॉलर, बुद्धिजीवी, लॉ एक्सपर्ट और उच्च शिक्षित लोगों को उचित स्थान दिया जाए। उस मुलाकात के बाद तेजस्वी यादव ने अपने सहयोगी संजय और एक गोल टोपी पहने हुए प्यादे को आदेश दिया था कि सभी जिलों में अल्पसंख्यक और सभी वर्गों में एक लिस्टेड बुद्धिजीवी कमेटी बनाई जाए और साल में दो बार बैठक कर फीडबैक लिया जाए। लेकिन कुंभकर्णी राजनीतिक निंद्रा के कारण आज तक न कोई कमेटी बनी और न ही कोई सुधि ली गई।
उर्दू और फारसी शिक्षकों की नियुक्ति पर भी साधा निशाना
211 डिग्री कॉलेजों में उर्दू, फारसी और अरबी शिक्षकों की नियुक्ति के मुद्दे पर बिहार के तमाम मिली एवं सामाजिक संगठनों, उर्दू बचाओ के क्रांतिकारी संगठनों तथा अल्पसंख्यक विधायकों, विधान पार्षदों और जनप्रतिनिधियों द्वारा राज्यपाल, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के कई चक्कर लगाने और मांग पत्र सौंपने के बाद, लगभग 6 महीने बीत जाने पर अब तेजस्वी यादव की अल्पसंख्यक चेतना जागी है और उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।
मोहम्मद इश्तेयाक ने तेजस्वी यादव को नेक मशविरा देते हुए कहा है कि वे अपने सलाहकार चेतना मंडल में दारू माफिया, बालू माफिया और जमीन माफिया को रखने के बजाए कभी-कभी विद्वानों और बुद्धिजीवियों की भी सुन लिया करें, ताकि समय रहते ज्वलंत और जीवंत मुद्दों पर पिछड़ने से बचा जा सके।
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अहिंसा के पुजारी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती और देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर शुक्रवार को पूरा देश श्रद्धा और भक्ति के सागर में डूब गया। राजधानी नई दिल्ली से लेकर बिहार की राजधानी पटना और समस्तीपुर तक विशेष आयोजनों का तांता लगा रहा। देश के शीर्ष नेतृत्व से लेकर आम जनता तक ने बापू और शास्त्री जी को नमन किया और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने विजय घाट और राजघाट पर दी श्रद्धांजलि
नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर विजय घाट पहुंचकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके पश्चात, प्रधानमंत्री मोदी ने महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर राजघाट पहुंचकर बापू को नमन किया।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि बापू का शाश्वत संदेश हमें एक बेहतर समाज और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में निरंतर मार्गदर्शन देता रहे। प्रधानमंत्री ने सत्य, अहिंसा और प्रेम के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुँचाने पर विशेष जोर दिया।
पटना में आयोजित समारोह के दौरान बापू की प्रतिमा के समक्ष नमन करते गणमान्य अतिथि।
पटना के गांधी मैदान में भव्य राजकीय समारोह, बापू टावर का द्वितीय स्थापना दिवस
पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में गांधी जयंती के अवसर पर एक भव्य राजकीय समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल सैयद अता हसनैन और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम में कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव, भारतीय जनता पार्टी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
समारोह के दौरान परम श्रद्धेय महात्मा गांधी जी की 157वीं जयंती एवं बापू टावर के द्वितीय स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ कर अतिथियों ने संबोधित किया। इस दौरान बापू की आवक्ष प्रतिमा का अनावरण किया गया, ऑनलाइन टिकटिंग प्रणाली का विधिवत शुभारंभ हुआ और विशेष पत्रिका ‘सत्याग्रह’ का विमोचन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि सत्य, अहिंसा और प्रेम के बापू के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुँचाना हम सभी का मुख्य संकल्प है।
समस्तीपुर के स्टेशन चौक पर स्थापित गांधी प्रतिमा के समीप राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि देते हुए मोर्चा के सदस्य एवं गणमान्य नागरिक।
समस्तीपुर में समस्तीपुर जिला विकास संघर्ष मोर्चा और रेल विस्तार-विकास मंच द्वारा श्रद्धासुमन अर्पित
उधर, समस्तीपुर जिला विकास संघर्ष मोर्चा एवं रेल विस्तार-विकास मंच के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को शहर के स्टेशन चौक स्थित गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती बेहद श्रद्धापूर्वक मनाई गई।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने गांधी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी तथा गांधीजी के सबसे प्रिय भजनों में शामिल “रघुपति राघव राजा राम” का सामूहिक गायन किया। पूरा माहौल राष्ट्रभक्ति के रंगों से सराबोर हो गया।
वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा, सद्भाव और सामाजिक न्याय के आदर्श आज के दौर में भी उतने ही प्रासंगिक हैं, और उनके विचार समाज को हमेशा सही दिशा प्रदान करते रहेंगे।
इस गरिमामयी कार्यक्रम में निम्नलिखित लोग प्रमुख रूप से उपस्थित रहे:
राकेश कुमार ठाकुर, शंकर साह, संतोष कुमार निराला, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, विश्वनाथ सिंह हजारी, शत्रुघ्न राय पंजी, शाहीद हुसैन, शत्रुघन यादव, जयलाल राय, रामाशीष राय, राम विनोद पासवान, लक्ष्मण साह एवं बृजनंदन राय सहित अन्य गणमान्य लोग।
दो बार मांगे गए ऑनलाइन आवेदन, फिर भी खाली रहा झोली; सरकारी नौकरी के टोटे के बीच हैरान करने वाला सच आया सामने!
पटना : आज देश और दुनिया में बेरोजगारी का आलम यह है कि चपरासी या क्लर्क की एक-एक छोटी नौकरी के लिए भी लाखों-करोड़ों युवाओं की भीड़ उमड़ रही है। हालात ऐसे हैं कि परीक्षा केंद्रों पर काबू पाने के लिए प्रशासन को कई-कई शिफ्टों में परीक्षाएं आयोजित करानी पड़ रही हैं। लेकिन इसी बीच बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था से एक ऐसा हैरान करने वाला और चौंकाने वाला सच सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई भौचक्का रह जाएगा। जहाँ एक तरफ नौकरी के लिए हाहाकार मचा है, वहीं विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के तहत निकले पदों पर आवेदन करने के लिए एक भी वीर नहीं मिला!
विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, बिहार के अंतर्गत राजकीय पॉलिटेक्निक और राजकीय महिला पॉलिटेक्निक संस्थानों में विभागाध्यक्ष के कुल 218 रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति के लिए बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा विज्ञापन संख्या 91/2025 से 107/2025 तक प्रकाशित किए गए थे। लेकिन हैरानी की हद तब हो गई जब इनमें से कुल 09 विज्ञापनों (विज्ञापन संख्या 96/2025, 97/2025, 98/2025, 99/2025, 101/2025, 102/2025, 103/2025, 104/2025 एवं 107/2025) के लिए एक भी आवेदन प्राप्त नहीं हुआ।
विज्ञापन रिवाइज हुए, फिर भी शून्य रही संख्या मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने इन विज्ञापनों को रिवाइज किया और दोबारा ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए। उम्मीद थी कि शायद अबकी बार बेरोजगार युवाओं या योग्य विशेषज्ञों की भीड़ उमड़ेगी, लेकिन नतीजा सिफर रहा। इन सभी विज्ञापनों के लिए आवेदकों की संख्या पूरी तरह शून्य ही बनी रही।
अधियाचना वापस लौटाई गई जब लाख कोशिशों के बाद भी एक भी आवेदन नहीं आया, तो आयोग के स्तर से आगे की कोई भी कार्रवाई करना संभव नहीं रह गया। परिणामस्वरूप, संबंधित सभी अध्याचनों को विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, बिहार को वापस लौटा दिया गया है।
विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, बिहार के अंतर्गत राजकीय पोलिटेकनिक और राजकीय महिला पोलिटेकनिक संस्थानों में विभिन्न विभागों तथा विषयों के अंतर्गत विभागाध्यक्ष के इन पदों के लिए संबंधित तकनीकी या इंजीनियरिंग विषयों में उच्च शैक्षणिक योग्यता और निर्धारित पठन-पाठन या कार्य अनुभव अनिवार्य होता है। चूँकि ये पद राजकीय तकनीकी संस्थानों में विभागाध्यक्ष जैसे उच्च और विशिष्ट उत्तरदायित्व वाले थे, इसलिए इनके लिए निर्धारित सख्त तकनीकी डिग्रियों एवं अहर्ताओं के कारण इन विज्ञापनों पर एक भी योग्य आवेदक आगे नहीं आया और आवेदन शून्य रहे।
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संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता पर खरी-खरी: घरेलू मांग और 1.4 अरब लोगों की जरूरतों को पूरा कर रही भारत की अर्थव्यवस्था, जी-20 में दिया स्पष्ट संदेश।
पीआईबी : अमेरिका के मिलवॉकी में आयोजित जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में भारत ने वैश्विक व्यापारिक मंच पर एक बार फिर अपनी मजबूत और बेबाक उपस्थिति दर्ज कराई है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बैठक के समापन दिवस पर वैश्विक व्यापार विकृतियों को दूर करने के लिए विश्व व्यापार संगठन यानी डब्ल्यूटीओ के अनुरूप दृष्टिकोण अपनाने की जोरदार वकालत की। इस उच्चस्तरीय बैठक में मंत्री पीयूष गोयल ने दो टूक शब्दों में वैश्विक ताकतों को आईना दिखाते हुए कई अहम मुद्दों पर भारत का पक्ष रखा।
अमेरिका के मिलवॉकी में आयोजित जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के समापन अवसर पर वैश्विक नेताओं के साथ ग्रुप फोटो में शामिल वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल।
वैश्विक व्यापार विकृतियों और डंपिंग पर भारत का कड़ा रुख
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने विस्कॉन्सिन के मिलवॉकी में आयोजित जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के समापन सत्र को संबोधित करते हुए संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता, उत्पादन, सबसे पसंदीदा राष्ट्र सिद्धांत को अद्यतन करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में जबरन श्रम को समाप्त करने जैसे गंभीर विषयों पर अपने विचार रखे।
संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता और उत्पादन पर चर्चा करते हुए मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती हुई बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसकी घरेलू मांग पर आधारित अर्थव्यवस्था 1.4 अरब लोगों की जरूरतों को पूरा करती है। भारत डिजाइन से लेकर तैयार माल तक विनिर्माण मूल्य श्रृंखलाओं का निर्माण कर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एक विश्वसनीय कड़ी के रूप में कार्य कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की विनिर्माण क्षमता उसकी घरेलू और वैश्विक जरूरतों को पूरा करती है और जी20 अध्यक्षता द्वारा चिन्हित क्षेत्रों में भारत के पास कोई संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता नहीं है।
मंत्री पीयूष गोयल ने कई सदस्य देशों की इस चिंता का समर्थन किया कि कुछ अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार को विकृत करने वाला समर्थन डंपिंग और अनुचित मूल्य निर्धारण को जन्म दे सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी चिंताओं का समाधान डब्ल्यूटीओ के अनुरूप उपायों के माध्यम से किया जाना चाहिए, जिनमें साक्ष्य-आधारित और न्यायिक समीक्षा के अधीन एंटी-डंपिंग और काउंटरवेलिंग ड्यूटी शामिल हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखलाओं का विविधीकरण एक वैध उद्देश्य है, लेकिन इसका उपयोग डब्ल्यूटीओ नियमों से बाहर के उपायों के बहाने के रूप में या समायोजन का बोझ विकासशील देशों पर डालने के लिए नहीं किया जाना चाहिए, जिन्हें औद्योगीकरण के लिए नीतिगत स्वतंत्रता बनाए रखनी चाहिए।
सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र सिद्धांत और विवाद निपटान प्रणाली पर जोर
सबसे पसंदीदा राष्ट्र के सिद्धांत को अद्यतन करने के विषय पर मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि जी20 सदस्यों के साथ भारत का व्यापार एक पारदर्शी, गैर-भेदभावपूर्ण और नियम-आधारित व्यापार प्रणाली पर निर्भर करता है। यह सिद्धांत यह सुनिश्चित करता है कि सबसे छोटे व्यापारी से लेकर सबसे बड़े व्यापारी तक सभी पर समान शर्तें लागू हों। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि डब्ल्यूटीओ में आम सहमति सर्वोपरि है और विकासशील देशों को विकसित अर्थव्यवस्थाओं के बराबर लाने में सक्षम बनाने के लिए विशेष और भिन्न व्यवहार को बनाए रखना आवश्यक है। साथ ही, उन्होंने दो-स्तरीय विवाद निपटान प्रणाली को तुरंत बहाल करने का भी आह्वान किया।
जबरन श्रम के उन्मूलन पर पूर्ण प्रतिबद्धता
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में जबरन श्रम को समाप्त करने के मुद्दे पर मंत्री पीयूष गोयल ने दो टूक कहा कि जबरन श्रम के उन्मूलन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पूर्ण और बिना शर्त है। उन्होंने याद दिलाया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 23 जबरन श्रम को एक मौलिक अधिकार के रूप में प्रतिबंधित करता है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लागू किया जा सकता है। भारत ने अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के सम्मेलन 29 और 105 की पुष्टि की है और जुलाई 2026 में जबरन श्रम का उपयोग करके उत्पादित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने के लिए अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन किया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमा पर उठाए जाने वाले कदम संपूर्ण देशों, क्षेत्रों या वर्गों के बारे में अनुमानों के बजाय विशिष्ट और सत्यापन योग्य साक्ष्यों पर आधारित होने चाहिए। मंत्री महोदय ने मिलवॉकी में किए गए आयोजनों और आतिथ्य सत्कार के लिए राजदूत ग्रीर और संयुक्त राज्य अमेरिका की जी20 अध्यक्षता को धन्यवाद दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को दोहराया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस कथन को याद करते हुए कि जिन मुद्दों का समाधान मिलकर नहीं हो सकता, उन्हें उन मुद्दों के मार्ग में बाधा नहीं बनना चाहिए जिनका समाधान मिलकर हो सकता है, मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत ने इसी भावना के साथ बैठक में भाग लिया और अपने बहुमूल्य सुझाव दिए। उन्होंने डब्ल्यूटीओ को केंद्र में रखते हुए एक निष्पक्ष और समावेशी बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई और वर्ष 2027 में जी20 की अध्यक्षता के लिए यूनाइटेड किंगडम को भारत का पूर्ण समर्थन दिया।
बैठक के दौरान, मंत्री पीयूष गोयल ने ऑस्ट्रेलिया के व्यापार और पर्यटन मंत्री, सऊदी अरब के वाणिज्य मंत्री, फ्रांस के विदेश व्यापार और आर्थिक आकर्षण के लिए प्रतिनिधि मंत्री, कोरिया गणराज्य के व्यापार मंत्री और कनाडा के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्री के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें भी कीं।
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गायघाट थाना क्षेत्र के हनुमान नगर में पुलिस और एसडीपीओ की संयुक्त कार्रवाई, एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज।
विस्तार से खबर:
मुजफ्फरपुर : जिले में अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस को एक बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है। गुप्त सूचना के आधार पर मुजफ्फरपुर पुलिस ने गायघाट थाना क्षेत्र के हनुमान नगर में छापेमारी कर भारी मात्रा में अवैध मादक पदार्थ (स्मैक) के साथ दो कुख्यात अभियुक्तों को दबोच लिया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शिवशंकर कुमार और उनकी बहन अंशु कुमारी के रूप में हुई है, जो अपने घर से ही स्मैक के अवैध कारोबार का काला साम्राज्य चला रहे थे।
पुलिस के गिरफ्त में स्मैक तस्कर, एवं 2.435 किलोग्राम अवैध मादक पदार्थ स्मैक, ₹2,10,000 नकद एवं 04 मोबाइल फोन बरामद।
गुप्त सूचना पर हुआ बड़ा एक्शन ग्रामीण पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार प्रभाकर ने मीडिया प्रेस को जानकारी देते हुए बताया कि वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश के आलोक में मुजफ्फरपुर जिला अंतर्गत विभिन्न थाना क्षेत्रों में लगातार छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में दिनांक 01/10/2026 को गायघाट थाना को गुप्त सूचना मिली थी कि हनुमान नगर स्थित एक घर में अवैध मादक पदार्थ की धड़ल्ले से खरीद-बिक्री की जा रही है।
सूचना का तत्काल सत्यापन करते हुए एसडीपीओ ईस्ट-1, एसएचओ गायघाट और गायघाट थाना पुलिस बल की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उक्त संदिग्ध घर को घेर लिया।
2015 पुड़िया में पैक था 2.435 किलोग्राम स्मैक पुलिस की छापेमारी के दौरान घर और उसके आसपास से भारी मात्रा में अवैध मादक पदार्थ बरामद किया गया। पुलिस ने छोटे-छोटे पैकेटों में तैयार की गई कुल 2,015 पुड़िया जब्त कीं, जिनका कुल वजन 2.435 किलोग्राम (लगभग 435 किलोग्राम नहीं बल्कि सटीक मात्रा 2.435 किलोग्राम) है। इसके साथ ही मौके से अवैध कारोबार से कमाए गए ₹2,10,000 नकद और 04 मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं। पुलिस ने सभी सामग्रियों को विधिवत जब्त कर लिया है।
अपराध का पुराना पारिवारिक इतिहास पुलिस पूछताछ में यह सनसनीखेज बात सामने आई है कि इन तस्करों का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। गिरफ्तार अभियुक्तों की मां और उनकी पत्नी का बेनीबाद थाना में एनडीपीएस एक्ट से संबंधित पूर्व में भी मामला दर्ज है (कांड संख्या 25/24), और वे भी पहले न्यायिक हिरासत में भेजी जा चुकी हैं।
पूरा नेटवर्क खंगाल रही है पुलिस गायघाट थाना में इस संदर्भ में नया कांड दर्ज कर लिया गया है और दोनों अभियुक्तों को न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा है। पुलिस अब इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि ये लोग यह अवैध मादक पदार्थ कब से और कहाँ-कहाँ से मंगवा रहे थे तथा इसे किन-किन लोगों को बेचते थे। इस अवैध धंधे से जुड़े पूरे नेटवर्क को बेनकाब करने के लिए पुलिस आगे की कार्रवाई में जुट गई है।
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गुरुवार को ताजपुर के फतेहपुर पंचायत भवन परिसर का नजारा एक जन-अदालत में तब्दील हो गया। अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) के बैनर तले दर्जनों की संख्या में भूमिहीन, गरीब, मजदूर और महिलाएं सड़कों पर उतर आए। सरकार के तमाम दावों और वादों को धत्ता बताते हुए आक्रोशित ग्रामीणों ने पंचायत भवन के मुख्य गेट पर लाल झंडे लहराकर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान पूरा इलाका ‘वासभूमि दो, पर्चा दो’, ‘मनरेगा में काम की गारंटी दो’ और ‘महंगाई पर लगाम लगाओ’ जैसे नारों से गूंज उठा।
ताजपुर के फतेहपुर पंचायत भवन के मुख्य द्वार पर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हाथों में तख्तियां लिए और लाल झंडे फहराते हुए धरना-प्रदर्शन करते खेग्रामस के कार्यकर्ता एवं ग्रामीण।
झूठे दावों और प्रशासनिक लापरवाही पर फूटा गुस्सा
धरना-प्रदर्शन की अध्यक्षता पंचायत सचिव मनोज कुमार सिंह ने की, जबकि मंच का सफल संचालन प्रखंड सचिव प्रभात रंजन गुप्ता ने किया। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला। भाकपा माले राज्य कमिटी सदस्य बंदना सिंह ने गरजते हुए कहा कि सरकार कागजों पर गरीबों के मसीहा होने का ढोंग करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज भी हजारों गरीब परिवार सिर पर छत के लिए दर-दर भटक रहे हैं। सरकार घोषणाएं तो बड़े-बड़े करती है, लेकिन भूमिहीन परिवारों को वासभूमि देने, सरकारी एवं मालिकाना जमीन पर बसे लोगों को पर्चा उपलब्ध कराने और पर्चाधारियों को उनकी जमीन पर कब्जा दिलाने में पूरी तरह विफल साबित हुई है।
आवास योजना में घूसखोरी और मनरेगा पर तीखे सवाल
भाकपा माले प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने प्रधानमंत्री आवास योजना में चल रही कथित बंदरबांट और खुलेआम वसूली जा रही घूसखोरी पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि गरीबों के हक का पैसा बिचौलिए और भ्रष्ट अधिकारी डकार रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने जमाबंदी शुद्धीकरण अभियान के तहत अंचल कर्मियों को सीधे गांवों में कैंप लगाकर आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करने और मनरेगा योजना के तहत हर हाथ को काम देने की पुरजोर मांग उठाई।
बीडीओ से वार्ता के बाद सौंपा गया स्मारपत्र
प्रदर्शन की उग्रता को देखते हुए प्रशासन हरकत में आया। आंदोलन के दौरान प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) रवि भूषण से टेलीफोन पर वार्ता हुई। बीडीओ के निर्देश पर पंचायत सचिव मौके पर पहुंचे, जिन्हें आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों से संबंधित एक सूत्रीय स्मारपत्र सौंपा।
सभा को संबोधित करने वालों में अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रखंड अध्यक्ष ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह के अलावा शंकर महतो, संजीव राय, सुलेखा कुमारी, शिव कुमारी, सुनीता देवी, आशा देवी, रजनी देवी समेत कई अन्य प्रमुख वक्ता भी शामिल रहे। अंत में आंदोलनकारियों ने दो टूक चेतावनी दी कि यदि प्रशासनिक स्तर पर उनकी मांगों पर शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो इस आंदोलन को और अधिक तीव्र व आक्रामक बनाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
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नई दिल्ली : संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने अपनी संस्थागत यात्रा के ऐतिहासिक एक सौ वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर देश की सबसे प्रतिष्ठित चयन संस्था का सफर महज़ एक नौकरी देने वाली एजेंसी का नहीं, बल्कि भारत के प्रशासनिक ढांचे को आकार देने और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का एक जीवंत इतिहास रहा है। एक अक्टूबर 1926 को स्थापित इस संस्थान ने ब्रिटिश राज के एक औपनिवेशिक सलाहकार बोर्ड से लेकर आज के स्वतंत्र और निष्पक्ष संवैधानिक निकाय तक की लंबी दूरी तय की है।
औपनिवेशिक काल और कठिन संघर्ष की दास्तान
सरकारी नौकरियों में नियुक्तियां ‘सिफारिश’ के बजाय ‘योग्यता’ के आधार पर होनी चाहिए, इस सिद्धांत की औपचारिक शुरुआत अठारह सौ पचपन में हुई थी। लंदन में इंडियन सिविल सर्विस (आईसीएस) की परीक्षा शुरू की गई, जिसने ईस्ट इंडिया कंपनी की मनमानी नामांकन व्यवस्था को समाप्त कर खुली प्रतियोगिता की नींव रखी। परंतु, शुरुआती दौर में यह व्यवस्था पूरी तरह से भारतीयों के लिए लगभग असंभव थी क्योंकि परीक्षा केवल लंदन में, अंग्रेजी भाषा में और ग्रीक तथा लैटिन जैसे विषयों पर आधारित होती थी।
इन तमाम बाधाओं को पार करते हुए अठारह सौ बासठ में रवींद्रनाथ टैगोर के बड़े भाई सत्येंद्रनाथ टैगोर ने कलकत्ता से इंग्लैंड की यात्रा की और अठारह सौ तिरेसठ में यह कठिन परीक्षा पास कर इतिहास रच दिया। वे पहले ऐसे भारतीय बने जो ‘हेवन-बॉर्न सर्विस’ (स्वर्ग से आई सेवा) कहे जाने वाले इस प्रशासनिक पद पर पहुंचे। उनके बाद सुरेंद्रनाथ बनर्जी, बिहारी लाल गुप्ता और रमेश चंद्र दत्त जैसे मनीषियों ने इसी कठिन मार्ग का अनुसरण किया। लगातार राष्ट्रवादी दबावों और आंदोलनों के बाद उन्नीस सौ बाईस में लंदन के साथ-साथ देश के इलाहाबाद शहर में भी आईसीएस की परीक्षा आयोजित की जानी शुरू हुई।
मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों और भारत सरकार अधिनियम, उन्नीस सौ उन्नीस के प्रावधानों के अंतर्गत अंततः एक अक्टूबर उन्नीस सौ छब्बीस को लोक सेवा आयोग की स्थापना की गई। यूनाइटेड किंगडम की होम सिविल सर्विस के सदस्य सर रॉस बार्कर इसके पहले चेयरमैन नियुक्त किए गए और दिल्ली का ऐतिहासिक मेटकाफ हाउस इसका पहला कार्यालय बना। सीमित शक्तियों के बावजूद भारत की धरती पर एक स्थायी भर्ती संस्था की स्थापना हो चुकी थी।
संविधान की सुदृढ़ नींव और संवैधानिक प्रावधान
स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात बाईस अगस्त उन्नीस सौ उरचास को संविधान सभा में प्रारूप समिति के चेयरमैन डॉ. बी. आर. अंबेडकर ने संघ और राज्य लोक सेवा आयोगों से संबंधित महत्वपूर्ण मसौदे पेश किए, जो बाद में संविधान के भाग चौदह (अनुच्छेद तीन सौ पंद्रह से तीन सौ तेईस) के रूप में स्थापित हुए। छब्बीस नवंबर उन्नीस सौ उनचास को अपने विदाई भाषण में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इस बात पर विशेष बल दिया था कि सरकारी नियुक्तियों में पक्षपात, भाई-भतीजावाद और धांधली को रोकने के लिए लोक सेवा आयोगों की स्वायत्तता और स्वतंत्रता सर्वोपरि है।
संविधान के अनुच्छेद तीन सौ पंद्रह के अंतर्गत संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग का प्रावधान किया गया, वहीं अनुच्छेद तीन सौ सोलह के तहत अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति का अधिकार देश के राष्ट्रपति को सौंपा गया। आयोग के सदस्यों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए यह नियम बनाया गया कि किसी भी सदस्य को केवल राष्ट्रपति के आदेश से और उच्चतम न्यायालय की विधिवत जांच के बाद ही हटाया जा सकता है।
स्वतंत्रता के बाद प्रशासनिक क्रांति और नए मील के पत्थर
छब्बीस जनवरी उन्नीस सौ पचास को गणतंत्र की स्थापना के साथ ही फेडरल पीएससी का नाम बदलकर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) कर दिया गया और आर. एन. बनर्जी इसके नए चेयरमैन बने। देश की बढ़ती प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली का अभूतपूर्व विस्तार किया। उन्नीस सौ उनहत्तर में सिविल सेवा परीक्षा के निबंध और सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्रों में संविधान की आठवीं अनुसूची की भारतीय भाषाओं को माध्यम के रूप में शामिल किया गया।
समय के साथ बदलाव की बयार बही और प्रशासनिक सुधार समितियों की सिफारिशों को लागू किया गया। उन्नीस सौ नवासी में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन (ओएमआर) तकनीक की शुरुआत की गई। इसके बाद दो हजार ग्यारह में सिविल सेवा अभिरुचि परीक्षा (सीसैट) का प्रावधान लाया गया। दो हजार तेरह में मुख्य परीक्षा के ढांचे में व्यापक बदलाव किए गए, जिसके तहत नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिरुचि से जुड़े विषयों को जोड़ा गया।
समावेशिता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए दो हजार इक्कीस में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) और नौसेना अकादमी की परीक्षा में महिलाओं को शामिल करने का मार्ग प्रशस्त किया गया। इसके अलावा, रेलवे की विभिन्न ग्रुप ए सेवाओं को मिलाकर भारतीय रेलवे प्रबंधन सेवा का गठन किया गया।
आंकड़े गवाह हैं: बदलाव और बढ़ती भागीदारी
आयोग के कार्यक्षेत्र और लोकप्रियता में पिछले दशकों में बेजोड़ वृद्धि हुई है। उन्नीस सौ पचास और इक्यावन में जहां कुल आवेदन मात्र बयालीस हजार सात सौ सत्ताईस थे, वहीं दो हजार बाईस और तेईस में यह आंकड़ा बढ़कर इकतालीस लाख दस हजार चवालीस के ऐतिहासिक शिखर पर पहुंच गया।
परीक्षा केंद्रों की संख्या उन्नीस सौ पचास के आठ केंद्रों से बढ़कर दो हजार छब्बीस में तिरासी तक पहुंच चुकी है।
सिविल सेवा परीक्षा में अनुशंसित महिला उम्मीदवारों की संख्या उन्नीस सौ बावन की मात्र तीन से बढ़कर दो हजार पच्चीस में दो सौ نन्यानवे हो गई है।
अनुसूचित जातियों (एससी) और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के उम्मीदवारों की सफलता दर में भी कई गुना का इजाफा दर्ज किया गया है।
दिव्यांग (पीडब्ल्यूबीडी) उम्मीदवारों के लिए अवसरों को सुगम बनाते हुए दो हजार पच्चीस में बयालीस उम्मीदवारों की अनुशंसा की गई।
तकनीकी आधुनिकीकरण और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
आज का यूपीएससी पूरी तरह से डिजिटल, पारदर्शी और तकनीक-युक्त बन चुका है। राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन के सहयोग से आयोग ने परीक्षाओं में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए एआई-आधारित फेशियल ऑथेंटिकेशन (चेहरे की लाइव पहचान) प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू किया है। सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के दौरान लाखों उम्मीदवारों के दस्तावेजों और पहचान का डिजिटल सत्यापन कुछ ही सेकंड में सुनिश्चित किया जाता है।
इसके अतिरिक्त, परीक्षा संपन्न होने के तुरंत बाद प्रोविजनल आंसर की (अनंतिम उत्तर कुंजी) जारी की जाती है और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से उम्मीदवारों से आपत्तियां व सुझाव आमंत्रित किए जाते हैं। दूर-दराज के छात्रों और युवाओं की सहायता के लिए तीस चैनलों वाला आईपी-आधारित अत्याधुनिक कॉल सेंटर स्थापित किया गया है, जिसके माध्यम से पचास हजार से अधिक कॉलों का समाधान किया जा चुका है।
स्मरणीय प्रसंग और ऐतिहासिक किस्से-कहानियां
स्टील फ्रेम का उद्बोधन: इक्कीस अप्रैल उन्नीस सौ सैंतालीस को सरदार वल्लभभाई पटेल ने ऐतिहासिक मेटकाफ हाउस में सिविल सेवा के पहले बैच को संबोधित करते हुए इसे देश का ‘स्टील फ्रेम’ करार दिया था। तब से प्रतिवर्ष इस तारीख को ‘सिविल सेवा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
अखबारों में छपे आवेदन पत्र: उन्नीस सौ नवासी में जब धीमी डाक सेवा के कारण दूर-दराज के इलाकों तक फॉर्म समय पर नहीं पहुंच पाते थे, तब आयोग ने सीधे समाचार पत्रों में आवेदन पत्र छपवाने की अनूठी पहल की थी।
किरण बेदी की ऐतिहासिक सफलता: वर्ष उन्नीस सौ बहत्तर में किरण बेदी भारतीय पुलिस सेवा के लिए चुनी जाने वाली देश की पहली महिला बनीं, जब अस्सी रिक्तियों में वे अकेली महिला अधिकारी थीं।
प्रतिभा सेतु पहल: जो मेधावी उम्मीदवार अंतिम चयन सूची से मामूली अंतर से चूक जाते हैं, उनके लिए नौ जून दो हजार पच्चीस को नए रूप में ‘प्रतिभा सेतु’ योजना की शुरुआत की गई, जो उन्हें विभिन्न मंत्रालयों, सार्वजनिक उपक्रमों और निजी संगठनों के सत्यापित नियोक्ताओं से जोड़ती है।
वर्तमान स्वरूप और भविष्य की दृष्टि
वर्तमान में इस प्रतिष्ठित आयोग के चेयरमैन डॉ. अजय कुमार हैं, जो पंद्रह मई दो हजार पच्चीस से इस पद को सुशोभित कर रहे हैं। उनके साथ इस संस्था में लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला, सुमन शर्मा, विद्युत बिहारी स्वैन, दिनेश दासा, शील वर्धन सिंह, संजय वर्मा, सुजाता चतुर्वेदी और अनुराधा प्रसाद जैसे प्रबुद्ध सदस्य शामिल हैं। इन आठ सदस्यों में से तीन महिलाओं का होना इस बात का प्रमाण है कि यह संस्था लैंगिक समानता और समावेशिता के मोर्चे पर कितनी दूर तक आ चुकी है।
आयोग के चेयरमैन डॉ. अजय कुमार का यह कथन इस पूरी यात्रा का सार है कि, “कोई संस्था जो सौ सालों से कायम है, वह इसलिए नहीं कि वह बदलाव का विरोध करती है, बल्कि इसलिए कि वह जानती है कि क्या कभी नहीं बदलना चाहिए।”
एक सदी का यह सफर इस बात का प्रतीक है कि योग्यता और निष्पक्षता के बूते किस प्रकार एक राष्ट्र के लोकतंत्र और शासन तंत्र को सशक्त बनाया जा सकता है। आज यूपीएससी महज़ एक परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था नहीं, बल्कि भारत की प्रशासनिक रीढ़ की हड्डी और हर महत्वाकांक्षी युवा के सपनों को पंख देने वाला एक राष्ट्रीय मंच बन चुका है।
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नई दिल्ली: आर्थिक तंगी से जूझ रहे मेधावी विद्यार्थियों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना यानी एनएमएमएसएस के अंतर्गत शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 31 अक्टूबर, 2026 कर दिया है। इस धमाकेदार फैसले से उन तमाम जरूरतमंद विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिली है जो किसी कारणवश अब तक आवेदन नहीं कर पाए थे।
इस बढ़ाई गई तारीख के बाद अब पात्र विद्यार्थी राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल यानी एनएसपी पर आसानी से अपना आवेदन पूरा कर सकेंगे। साथ ही, इससे संबंधित प्राधिकरणों को भी आवेदनों का समय पर सत्यापन करने में पूरी सुविधा मिलेगी।
संशोधित कार्यक्रम इस प्रकार है:
आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि: 31 अक्टूबर, 2026
संस्थान नोडल अधिकारी यानी एल1 द्वारा सत्यापन की अंतिम तिथि: 15 नवंबर, 2026
जिला नोडल अधिकारी यानी एल2 द्वारा सत्यापन की अंतिम तिथि: 30 नवंबर, 2026
राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर विद्यार्थियों के लिए आवेदन की प्रक्रिया 1 जून, 2026 से लगातार जारी है। छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने से पहले सभी विद्यार्थियों के लिए पोर्टल पर वन-टाइम रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य किया गया है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, 30 सितंबर, 2026 तक पूरे देश में 88,522 नए और 1,97,133 नवीनीकरण आवेदन सफलतापूर्व जमा किए जा चुके हैं।
इन बातों का रखना होगा विशेष ध्यान
जिन विद्यार्थियों ने अपना आवेदन पहले ही जमा कर दिया है, उन्हें यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि उनके आवेदनों का संबंधित संस्थान नोडल अधिकारी यानी एल1 द्वारा 15 नवंबर और जिला नोडल अधिकारी यानी एल2 द्वारा 30 नवंबर, 2026 तक अनिवार्य रूप से सत्यापन कर दिया जाए।
योजना का मुख्य उद्देश्य और मिलने वाली राशि
इस योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के मेधावी विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है, ताकि वे कक्षा 8 के बाद अपनी पढ़ाई बीच में न छोड़ें और कक्षा 12 तक अपनी शिक्षा सुचारू रूप से जारी रख सकें।
इस योजना के तहत संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सरकारों द्वारा आयोजित चयन परीक्षा में सफल होने वाले पात्र कक्षा 9 के विद्यार्थियों को प्रति वर्ष 1,00,000 नई छात्रवृत्तियां प्रदान की जाती हैं। इसके अलावा, निर्धारित शैक्षणिक मानदंडों को सफलतापूर्वक पूरा करने पर इस छात्रवृत्ति का लाभ कक्षा 10 से 12 तक नवीनीकरण के माध्यम से लगातार मिलता रहता है।
सरकारी विद्यालयों, सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों और स्थानीय निकायों के विद्यालयों में अध्ययन करने वाले पात्र विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष 12,000 रुपये की छात्रवृत्ति सीधे तौर पर दी जाती है। यह पूरी राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी के माध्यम से सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है।
कौन ले सकता है इस छात्रवृत्ति का लाभ?
चयन परीक्षा में शामिल होने के लिए विद्यार्थियों का कक्षा 7 में कम से कम 55 प्रतिशत अंक या इसके समकक्ष ग्रेड प्राप्त करना अनिवार्य है। हालांकि, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए इसमें 5 प्रतिशत अंकों की विशेष छूट दी गई है। इसके साथ ही, आवेदक के माता-पिता की कुल वार्षिक आय 3,50,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
इस पूरी प्रक्रिया के सफल संचालन में शिक्षा मंत्रालय के अधिकारी पीके, केसी, आरटी, जेके और पीके अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
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