जांच मेंसरकारी गाड़ी निजी क्लिनिक के बाहर खड़ी, छद्म मरीज भेजकर स्वास्थ्य विभाग ने पकड़ा रंगे हाथ!
पटना, 27 जून 2026। स्वास्थ्य विभाग ने 26 जून 2026 को डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए बयानों की धज्जियां उड़ाते हुए एक विस्तृत और बेहद चौंकाने वाला तथ्यात्मक प्रतिवेदन जारी किया है। इस सरकारी रिपोर्ट ने पूरे चिकित्सा जगत में खलबली मचा दी है। विभाग ने डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह के झूठ का पर्दाफाश करते हुए बताया है कि किस तरह कर्तव्यहीनता, लापरवाही और सरकारी संसाधनों का खुला दुरुपयोग किया जा रहा था।
अधीक्षक के फोन को किया नजरअंदाज, मंत्री के स्वागत की थी पूरी जानकारी प्रतिवेदन के अनुसार, डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि 23 जून 2026 को माननीय स्वास्थ्य मंत्री के पटना चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, पटना में निर्धारित कार्यक्रम की उन्हें कोई पूर्व सूचना नहीं थी। लेकिन जांच में यह दावा पूरी तरह झूठा निकला। रिकॉर्ड के मुताबिक, पटना चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के अधीक्षक द्वारा 22 जून 2026 को लगभग 07:00 बजे अपराह्न में ही डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह को मोबाइल पर बातचीत कर इस कार्यक्रम की पूरी सूचना दे दी गई थी। इतना ही नहीं, मोबाइल पर बातचीत के दौरान यह भी तय हुआ था कि माननीय स्वास्थ्य मंत्री का स्वागत अधीक्षक करेंगे और धन्यवाद ज्ञापन प्राचार्य द्वारा किया जाएगा, जिस पर प्राचार्य ने अपनी सहमति भी दी थी।
व्हाट्सएप पर छुट्टी का बहाना, मीडिया के डर से भेजी सूचना! विभाग ने स्पष्ट किया है कि डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह के पुत्र द्वारा विभागीय सचिव, अधीक्षक एवं अन्य पदाधिकारियों को व्हाट्सएप पर सूचना दी गई थी। लेकिन जलने से संबंधित सूचना कार्यक्रम समाप्त होने के कई घंटों बाद दी गई, जिससे साफ है कि मीडिया में खबर आने के बाद केवल अपने बचाव के लिए व्हाट्सएप पर यह सूचना सभी को दी गई थी।
सरकारी गाड़ी के साथ निजी क्लिनिक में चल रहा था मरीजों का धंधा! सबसे बड़ा और सनसनीखेज खुलासा डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह की अनुपस्थिति और उनके निजी क्लिनिक को लेकर हुआ है। कार्यालय अवधि के दौरान उनके गायब रहने की गोपनीय सूचना मिलने पर प्रशासन ने एक जाल बिछाया। विभाग और जिला पदाधिकारी, पटना के स्तर से छद्म मरीज (फर्जी मरीज) बनाकर डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह के निजी क्लिनिक में भेजा गया। जब जांच टीम वहां पहुंची, तो नजारा देखकर दंग रह गई। पटना चिकित्सा महाविद्यालय, पटना की सरकारी वाहन डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह के निजी क्लिनिक के बाहर खड़ी तमाशा देख रही थी। क्लिनिक से बाहर निकल रहे मरीजों ने पुष्टि की कि वे अभी-अभी डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह से इलाज कराकर बाहर आए हैं।
कंपाउंडर ने खोला समय का राज वहीं दूसरी ओर, डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह का दावा था कि वे जल गए थे और मोबाइल पर बातचीत करने में असमर्थ थे। लेकिन जब जांच टीम क्लिनिक के अंदर दाखिल हुई, तो वहां उपस्थित कंपाउंडर ने डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह के क्लिनिक का पूरा समय सारणी ही खोलकर रख दिया। कंपाउंडर ने बताया कि डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह शाम को 07:00 बजे से मरीज देखेंगे। यदि किसी मरीज को अगले दिन दिखाना हो, तो सुबह 09:00 बजे से 10:00 बजे, दोपहर में 02:00 बजे से 03:00 बजे एवं शाम को 07:00 बजे से 09:00 बजे तक का समय तय था। इससे साफ हो गया कि डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह सरकारी ड्यूटी के घंटों में भी अपने निजी क्लिनिक में मरीजों को देखने का काम धड़ल्ले से करते हैं।
गठन हुई उच्चस्तरीय जांच कमेटी, अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं प्रथम दृष्टया अपने कार्यों के प्रति घोर लापरवाही, कर्तव्यहीनता, सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग और अनाधिकृत रूप से गायब रहने का दोषी पाते हुए डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह को प्राचार्य के पद के अतिरिक्त प्रभार से तत्काल मुक्त कर दिया गया है। उन्हें प्राध्यापक, मनोरोग विभाग, राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, बेतिया में पदस्थापित किया गया है। विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अपनी अनाधिकृत अनुपस्थिति के संबंध में विभाग को कोई स्पष्टीकरण या अभ्यावेदन देने के बजाय सीधे प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करना बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के प्रावधानों के पूरी तरह प्रतिकूल है। अब इस पूरे मामले में सक्षम प्राधिकार के अनुमोदन से एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है, जो डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह का पक्ष प्राप्त करते हुए विहित प्रक्रिया के तहत आगे की सख्त कार्रवाई करेगी।
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89.40 करोड़ की लागत से बने अत्याधुनिक मोक्ष धाम के निजीकरण पर मचा बवाल, ‘आध्यात्मिक आउटसोर्सिंग‘ को लेकर विपक्ष ने मुख्यमंत्री पर दागे तीखे सवाल
पटना: राजधानी पटना के ऐतिहासिक बांस घाट श्मशान घाट का कायाकल्प हो चुका है, लेकिन इसके साथ ही बिहार की राजनीति में एक नया और बेहद सनसनीखेज विवाद खड़ा हो गया है। बिहार सरकार ने स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत लगभग 89.40 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से गंगा किनारे इस अत्याधुनिक शवदाह गृह का निर्माण पूरा कराया है। करीब 4.5 एकड़ के विशाल भूभाग में फैले इस परिसर में एक साथ 18 शवों के अंतिम संस्कार की विश्वस्तरीय व्यवस्था की गई है। यहाँ इलेक्ट्रिक क्रेमेटोरियम, लकड़ी आधारित शवदाह स्थल, पारंपरिक चिताएं, वातानुकूलित प्रतीक्षालय, पेयजल और आधुनिक शौचालय जैसी तमाम हाई-टेक सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं।
पटना के ऐतिहासिक बांस घाट के अत्याधुनिक परिसर के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने के बाद कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद आध्यात्मिक संगठन के प्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी।
विवाद तब शुरू हुआ जब इस नवनिर्मित हाई-टेक परिसर के संचालन और रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी सीधे ईशा फाउंडेशन को सौंप दी गई। इस फैसले के सामने आते ही विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राष्ट्रीय जनता दल की नेता रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बेहद तीखा और हमलावर पोस्ट साझा करते हुए इसे ‘श्मशान घाट का निजीकरण’ करार दिया है।
श्मशान घाट का निजीकरण : सरकारी जवाबदेही से मुक्ति का अंतिम संस्कार ..
अब अपने बिहार की राजधानी पटना के श्मशान घाट भी 'आध्यात्मिक आउटसोर्सिंग' के दौर में हैं। लगता है सरकार को अपने और अपने विभागों से ज़्यादा भरोसा बाहरी सरकारी – कारोबारी बाबाओं पर है !!
रोहिणी आचार्य ने सरकार की इस नीति को ‘सरकारी जवाबदेही से मुक्ति का अंतिम संस्कार’ बताते हुए कहा कि अब अपने बिहार की राजधानी पटना के श्मशान घाट भी ‘आध्यात्मिक आउटसोर्सिंग’ के दौर में चले गए हैं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे सरकार को अपने और अपने विभागों से ज़्यादा भरोसा बाहरी सरकारी-कारोबारी बाबाओं पर हो गया है।
विपक्ष ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि जनता के पैसों से बनाई गई जन-सुविधाएं अब सिर्फ निजी हाथों में ट्रांसफर करने के लिए ही बची हैं। रोहिणी आचार्य ने मांग की है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को एक ‘हाफिडिफिट’ के माध्यम से जनता को साफ-साफ बताना चाहिए कि यह शासन का कैसा मॉडल है जिसमें श्मशान घाट का मैनेजमेंट भी एक ‘ब्रांडेड बाबा’ के भरोसे छोड़ दिया गया है। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं सरकार अपनी जिम्मेदारियों का अंतिम संस्कार भी धीरे-धीरे दूसरों के हवाले तो नहीं कर रही है? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बेहतर तो यह होता कि सम्राट सरकार आधिकारिक तौर पर सरकार का यह नया मंत्र ही घोषित कर देती: “जिम्मेदारी कम करो, हस्तांतरण ज़्यादा करो।”
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शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की दोटूक- अब पोर्टल से ऑटोमेटिक होगा पारदर्शी तबादला, महिलाओं और पुरुषों के लिए बना विशेष ब्लूप्रिंट, एनसीईआरटी की सभी किताबें होंगी लागू
विशेष संवाददाता, पटना:
बिहार के शिक्षा महकमे से इस वक्त की सबसे बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने राज्य के लाखों शिक्षकों के हित में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी फैसला लेते हुए बड़ा ऐलान किया है। शिक्षा मंत्री ने साफ कर दिया है कि अब शिक्षकों को अपने ट्रांसफर और पोस्टिंग के लिए दफ्तरों और बाबुओं के चक्कर काटने की कतई जरूरत नहीं होगी। विभाग ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बना दिया है। अब शिक्षा विभाग के विशेष पोर्टल पर केवल एक आवेदन करने के बाद पूरी तरह से पारदर्शी और ऑटोमेटिक तरीके से ट्रांसफर कर दिया जाएगा, जिससे भ्रष्टाचार और पैरवी राज पर हमेशा के लिए ताला लग जाएगा।
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि हमारे शिक्षक ही हमारी व्यवस्था का असली आधार हैं। शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही इस मांग को सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। कैबिनेट से इस नई और बेहद सरल स्थानांतरण नीति को बाकायदा पास करा दिया गया है। इस नीति के लागू होने से अब ट्रांसफर की राह देख रहे शिक्षकों को दर-दर भटकने से मुक्ति मिल जाएगी। सरकार ने इसे शिक्षकों के लिए एक बहुत बड़ा तोहफा करार दिया है, जिससे पूरी व्यवस्था भ्रष्टाचार मुक्त और जवाबदेह बनेगी।
महिलाओं और पुरुषों के लिए विशेष ब्लूप्रिंट
मंत्रालय द्वारा तैयार ब्लूप्रिंट के अनुसार, महिला और पुरुष शिक्षकों के लिए खास तौर पर राहत देने वाली योजना बनाई गई है। नई नीति के तहत महिला शिक्षकों को उनकी अपनी पंचायत के ठीक बगल वाली पंचायत में ही तैनाती दी जाएगी। वहीं दूसरी ओर, पुरुष शिक्षकों को उनके वर्तमान ब्लॉक के बगल वाले ब्लॉक में ट्रांसफर करने की योजना तैयार की गई है। इस नियम से शिक्षकों को अपने घर के नजदीक काम करने का अवसर मिलेगा और उनका मानसिक तनाव दूर होगा। शिक्षा मंत्री ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी अधिकारी या कर्मचारी इस नई व्यवस्था में लापरवाही बरतेगा या किसी भी प्रकार की अनियमितता करने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ सरकार बेहद सख्त एक्शन लेगी।
कोचिंग संस्थानों के लिए आ रही नई नियमावली
राज्य में कुकुरमुत्ते की तरह खुल रहे कोचिंग संस्थानों पर भी सरकार पूरी तरह से नकेल कसने की तैयारी में है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि बिहार में कोचिंग संस्थानों के लिए सुरक्षा मानकों को लेकर एक बेहद सख्त और नई नियमावली लाई जा रही है। इस गाइडलाइन के आने के बाद जो भी कोचिंग संस्थान तय सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करेंगे, उन पर बड़ी कार्रवाई होना तय है। छात्रों की सुरक्षा और पढ़ाई के माहौल से खिलवाड़ करने वाले संस्थानों को बग्श नहीं जाएगा।
इसके साथ ही, शिक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता सुधारने के लिए बिहार सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति को राज्य में बेहद प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। शिक्षा मंत्री ने घोषणा की कि नई शिक्षा नीति का पूरा आधार एनसीईआरटी ही है, इसलिए अब एनसीईआरटी की हर एक पुस्तक को पूरे बिहार के विद्यालयों में सख्ती से लागू किया जाएगा। उन्होंने कक्षा नाइंथ की नई पुस्तक में चुनाव आयोग की पारदर्शी भूमिका और चुनावी प्रक्रिया की प्रशंसा को शामिल किए जाने के फैसले का पुरजोर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह बदलाव हमारे बच्चों के भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक और मील का पत्थर साबित होगा।
संवाददाता के साथ हुई सीधी बातचीत में नियोजित शिक्षकों के भविष्य और उनके तबादलों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि नियोजित शिक्षकों की नियमावली बिल्कुल अलग है और उनकी नियोजन इकाई को ही उनके ट्रांसफर का पूरा अधिकार है, जिसके लिए आगे चलकर एक विस्तृत गाइडलाइन जारी की जाएगी। इसके साथ ही, कक्षा नाइंथ की नई पुस्तक में चुनाव आयोग की पारदर्शी भूमिका को शामिल करने के एनसीईआरटी के फैसले का पुरजोर स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति का पूरा बेस एनसीईआरटी ही है और बिहार में इसकी हर बुक लागू की जाएगी, जो बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए बेहद जरूरी है। वहीं, राज्य में सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले कोचिंग संस्थानों पर सीधे ऐक्शन के सवाल पर उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ किया कि सरकार बहुत जल्द एक नई कोचिंग नियमावली लेकर आ रही है, जिसके आते ही ऐसी संस्थाओं पर कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो जाएगा और उन्हें सरकार द्वारा तय की गई सख्त गाइडलाइन का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा।
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नई दिल्ली: अगर आप भी विदेश घूमने का सपना देख रहे हैं या नौकरी के सिलसिले में बाहर जाने की तैयारी में हैं, तो यह खबर आपके होश उड़ा देगी। सरकार ने पासपोर्ट आवेदन शुल्क में भारी वृद्धि कर आम जनता को एक बड़ा झटका दिया है। विदेश मंत्रालय की नई अधिसूचना के अनुसार, ‘पासपोर्ट संशोधन नियम 2026’ आगामी 1 जुलाई से पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू होने जा रहे हैं। इसके बाद नया पासपोर्ट बनवाना या पुराने को री-इश्यू कराना आपकी जेब पर काफी भारी पड़ने वाला है।
साधारण श्रेणी में नई दरें: जेब होगी ढीली
सरकार द्वारा जारी नए नियमों के मुताबिक, साधारण श्रेणी के तहत मिलने वाली सुविधाओं की कीमतों में सीधे तौर पर इजाफा किया गया है:
36 पृष्ठों वाला पासपोर्ट: 36 पृष्ठों वाले नए पासपोर्ट या इसे फिर से जारी (री-इश्यू) कराने के लिए अब आवेदकों को 2,500 रुपये का भारी-भरकम शुल्क चुकाना होगा।
60 पृष्ठों वाला पासपोर्ट: जिन लोगों को ज्यादा यात्रा करनी होती है और वे 60 पृष्ठों वाले साधारण पासपोर्ट या इसके री-इश्यू के लिए आवेदन करते हैं, तो उन्हें अब इसके लिए 3,500 रुपये का भुगतान करना पड़ेगा।
तत्काल श्रेणी: इमरजेंसी में सफर करना पड़ेगा बहुत महंगा
यदि आपको किसी आपातकालीन स्थिति में तुरंत विदेश जाना है और आप तत्काल श्रेणी में आवेदन करते हैं, तो नई दरें आपको और भी ज्यादा चौंकाएंगी:
तत्काल श्रेणी: इमरजेंसी में सफर करना पड़ेगा बहुत महंगा
यदि आपको किसी आपातकालीन स्थिति में तुरंत विदेश जाना है और आप तत्काल श्रेणी में आवेदन करते हैं, तो नई दरें आपको और भी ज्यादा चौंकाएंगी:
36 पृष्ठों का तत्काल पासपोर्ट: तत्काल श्रेणी के अंतर्गत 36 पृष्ठों वाले नए पासपोर्ट या री-इश्यू की लागत अब सीधे बढ़कर 5,000 रुपये तय की गई है।
60 पृष्ठों का तत्काल पासपोर्ट: इस श्रेणी में सबसे बड़ा झटका 60 पृष्ठों वाले पासपोर्ट के लिए लगा है, जहां आवेदकों को अब पूरे 6,000 रुपये खर्च करने होंगे।
विदेश मंत्रालय के इस अचानक फैसले से उन लोगों में खलबली मच गई है जो आने वाले महीनों में विदेश यात्रा की योजना बना रहे थे। 1 जुलाई से पहले आवेदन न करने वालों को अब इस नई और बढ़ी हुई शुल्क संरचना के अनुसार ही भुगतान करना होगा।
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पटना। बिहार के चिकित्सा जगत से इस वक्त की सबसे बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। राजधानी के सबसे बड़े अस्पताल, पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) के प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को सरकार ने तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटा दिया है। स्वास्थ्य विभाग की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से पूरे चिकित्सा महकमे में हड़कंप मच गया है। सरकार ने डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को हटाकर डॉ. गीता सिन्हा को अगले आदेश तक PMCH के प्राचार्य पद का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है।
मंत्री के दौरे से ‘गायब‘ होना पड़ा भारी
इस पूरी कार्रवाई की पटकथा 23 जून को ही लिख दी गई थी। स्वास्थ्य मंत्री निशांत का PMCH में एक पूर्व निर्धारित आधिकारिक कार्यक्रम और निरीक्षण था। पूरे अस्पताल का स्टाफ मंत्री के स्वागत और मुस्तैदी में लगा था, लेकिन अस्पताल के मुखिया डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह बिना किसी पूर्व सूचना या लिखित जानकारी के इस बेहद महत्वपूर्ण कार्यक्रम से गायब रहे।
विभागीय जांच में हुआ बड़ा भंडाफोड़: सरकारी गाड़ी से पहुंचे थे निजी क्लीनिक
जब स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने प्राचार्य की इस घोर लापरवाही का संज्ञान लिया, तो तुरंत एक गुप्त विभागीय जांच बैठाई गई। इस जांच में जो खुलासे हुए, उसने स्वास्थ्य विभाग के होश उड़ा दिए। जांच रिपोर्ट में यह साफ हुआ कि:
डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह अपने कार्यालय समय (ड्यूटी ऑवर्स) के दौरान अस्पताल में होने के बजाय अपने निजी क्लीनिक में मरीजों को देख रहे थे।
सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि वे अपने निजी क्लीनिक तक जाने और अपनी निजी ‘कमाई’ के लिए बकायदा सरकारी वाहन (गवर्नमेंट वीकल) और ईंधन का दुरुपयोग कर रहे थे।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत का कड़ा बयान: “राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों में अनुशासन, जवाबदेही और सुशासन से कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा। सरकारी पद पर बैठकर निजी स्वार्थ साधने वाले और जनता के पैसों का दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों के लिए इस सरकार में कोई जगह नहीं है। यह कार्रवाई तो बस एक शुरुआत है।”
डॉ. गीता सिन्हा संभालेंगी कमान
पीएमसीएच जैसी बड़ी चिकित्सा संस्था में अव्यवस्था न फैले, इसके लिए सरकार ने त्वरित फैसला लेते हुए डॉ. गीता सिन्हा को नया प्रभार सौंप दिया है। विभाग ने उन्हें तत्काल रूप से अस्पताल की व्यवस्था को पटरी पर लाने और अनुशासन कायम करने का निर्देश दिया है। अब देखना यह है कि डॉ. गीता सिन्हा इस बड़ी जिम्मेदारी को कैसे संभालती हैं और दागी हो चुकी PMCH की छवि को कितना सुधार पाती हैं।
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तनाव भरे परिवेश में योग ही जीवन का असली तारणहार, मुख्य वक्ता निशिकांति ने दिया महामंत्र!
मुजफ्फरपुर (25/06/2026): आज के इस दौर में जहां आधुनिक चिकित्सा पद्धतियां और महंगी रासायनिक दवाएं इंसानी बीमारियों में केवल अस्थाई राहत तो देती हैं, परंतु मानसिक और शारीरिक विकारों को जड़ से खत्म करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही हैं, वहां भारत का प्राचीन सनातन विज्ञान यानी योग ही एकमात्र सच्चा तारणहार बनकर उभरा है। इसी ज्वलंत विषय पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के साप्ताहिक कार्यक्रम के पावन अवसर पर महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय के दर्शन शास्त्र विभाग के तत्त्वावधान में एक वृहद योग परिचर्चा और पोस्टर प्रस्तुतीकरण कार्यक्रम का भव्य आयोजन 25 जून को किया गया। इस दौरान कॉलेज की छात्राओं ने अपने तीखे, कलात्मक और वैचारिक पोस्टरों के जरिए यह पुरजोर तरीके से साबित कर दिया कि आधुनिक जीवनशैली की सभी जटिल बीमारियों का असली और स्थाई इलाज सिर्फ योग में ही छुपा है।
महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय के दर्शन शास्त्र विभाग द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस सप्ताह के समापन अवसर पर “दवाएं फेल, योग पास” का नारा बुलंद करते हुए अपने बेहतरीन और रचनात्मक पोस्टरों को प्रदर्शित करतीं स्नातक द्वितीय सेमेस्टर की विजेता छात्राएं। साथ में खड़ीं कॉलेज की प्राचार्या अलका जायसवाल, विभागाध्यक्ष नेहा रानी, मुख्य वक्ता निशिकांति और अन्य गौरवमयी शिक्षक गण।
इस बेहद महत्वपूर्ण कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रतिष्ठित प्राचार्या अलका जायसवाल ने सत्र का विधिवत उद्घाटन किया और सभी ऊर्जावान प्रतिभागियों का मनोबल बढ़ाते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रमाण पत्र सौंपे। अपने विशेष संबोधन में अलका जायसवाल ने आज की युवा पीढ़ी को सचेत करते हुए कहा कि योग मानव जीवन को बिना किसी साइड इफेक्ट (दुष्प्रभाव) के पूर्ण आरोग्य और सच्ची मानसिक खुशी प्रदान करता है। उन्होंने रेखांकित किया कि छात्राओं के भीतर की यह स्वास्थ्य चेतना कल के एक सशक्त राष्ट्र का आधार बनेगी, क्योंकि योग केवल शारीरिक कसरत नहीं बल्कि कार्यकुशलता बढ़ाने का अचूक फॉर्मूला है।
कार्यक्रम के मुख्य मंच से अपनी बात रखते हुए मुख्य वक्ता निशिकांति ने योग की वैज्ञानिकता को बेहद तार्किक रूप से स्थापित किया। उन्होंने वर्तमान समय की सबसे गंभीर वैश्विक महामारी यानी मानसिक तनाव पर गहरा प्रहार करते हुए बतलाया कि योग आज के इस भागदौड़ भरे, प्रतिस्पर्धात्मक और डिस्टर्बिंग (विचलित करने वाले) परिवेश में मानव जीवन की सबसे बड़ी और अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। हमें इसे केवल साल में एक दिन का सिंबल (प्रतीक) न मानकर अपने प्रतिदिन के 24 घंटे के रूटीन (दिनचर्या) में पूरी तरह से शामिल करना चाहिए, तभी चिकित्सा पर होने वाले भारी-भरकम खर्चों से बचा जा सकता है।
आयोजन की मुख्य धुरी रहीं दर्शन शास्त्र की विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम आयोजक नेहा रानी ने अपने व्याख्यान में पाश्चात्य फिटनेस कल्चर और भारतीय विचारधारा की गहरी तुलना करते हुए स्पष्ट किया कि योग कोई साधारण फिटनेस टूल (शारीरिक कसरत का साधन) नहीं है, बल्कि यह मानव चेतना को जागृत करने वाला एक शाश्वत जीवन दर्शन है। इसे अपनाकर ही हम अपने तन और मन को नियंत्रित कर सकते हैं।
वहीं, डिजिटल माध्यम का बेहतरीन उपयोग करते हुए नवीन कुमार ने एक अत्यंत प्रभावशाली पावर प्लांट प्रेजेंटेशन (डिजिटल प्रस्तुतीकरण) के जरिए योग के विभिन्न व्यावहारिक और प्रायोगिक पहलुओं को सामने रखा। उन्होंने वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ दिखाया कि किस प्रकार नियमित आसन और प्राणायाम करने से मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) शीर्ष पर पहुंच जाती है और रक्तचाप जैसी जानलेवा बीमारियां बिना किसी दवा के स्वतः नियंत्रित हो जाती हैं।
इस पूरे सफल और गरिमामयी आयोजन का कुशल मंच संचालन और धन्यवाद ज्ञापन सुरबाला वर्मा के द्वारा अत्यंत प्रभावी ढंग से किया गया, जिसमें कॉलेज के कई वरिष्ठ शिक्षक और शिक्षिकाओं की सक्रिय उपस्थिति रही। कड़े मुकाबले के बीच पारदर्शी परिणाम तैयार करने वाली निष्पक्ष निर्णायक मंडली में मुख्य रूप से राकेश रंजन, रामदुलार और प्रियम फ्रांसिस जैसे प्रबुद्ध शिक्षाविद् शामिल थे, जिन्होंने कला और वैचारिक ज्ञान का बारीकी से मूल्यांकन किया।
योग सप्ताह के समापन अवसर पर आयोजित पोस्टर प्रस्तुतीकरण और भाषण प्रतियोगिता में छात्राओं के बीच कड़ा मुकाबला हुआ, जिसके अंतिम परिणाम इस प्रकार रहे:
प्रथम स्थान (I): इलशा आलिया (स्नातक द्वितीय सेमेस्टर)
द्वितीय स्थान (II): संयुक्त रूप से ममता कुमारी एवं गीतांजलि कुमारी (स्नातक द्वितीय सेमेस्टर)
तृतीय स्थान (III): रूपांतरित कुमारी (स्नातक द्वितीय सेमेस्टर)
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पटना: बिहार सरकार ने राज्य के विकास और शिक्षा व्यवस्था में एक अभूतपूर्व और क्रांतिकारी कदम उठाते हुए कैबिनेट की बैठक में कुल 47 महत्वपूर्ण एजेंडों को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार, 24 जून 2026 को आयोजित मंत्रिपरिषद की इस बेहद अहम बैठक में कई ऐसे फैसले लिए गए, जो राज्य की सूरत बदल देंगे। उच्च शिक्षा को नए पंख देने से लेकर न्यायिक और शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार ने खजाना खोल दिया है।
बैठक समाप्त होने के बाद मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने मीडियाकर्मियों को इन सभी फैसलों की बिंदुवार और विस्तृत जानकारी दी।
शिक्षा के क्षेत्र में महाक्रांति: बिहार में खुलेंगे 5 नए निजी विश्वविद्यालय
सरकार ने राज्य के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाने से रोकने और बिहार में ही विश्वस्तरीय अवसर प्रदान करने के लिए 5 नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और संचालन को हरी झंडी दे दी है। यह उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा विस्तार माना जा रहा है:
शांजा विश्वविद्यालय, मधुबनी: मिली ट्रस्ट (आरामनगर, नई दिल्ली की शाखा कार्यालय स्टेडियम रोड, मधुबनी) द्वारा प्रायोजित इस विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दी गई है।
वी.बी. गिरी विश्वविद्यालय, दरौंधा (सीवान): आंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा संचालित होने वाले इस नए विश्वविद्यालय का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
एस.ए. विश्वविद्यालय, अशोक नगर (नवादा): एस.ए. फाउंडेशन द्वारा नवादा में इस शानदार शिक्षा केंद्र को स्वीकृति दी गई है।
हिमालय विश्वविद्यालय, पालीगंज (पटना): हिमालय एजुकेशनल ट्रस्ट द्वारा पटना के ग्रामीण इलाके में इस बड़े विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी।
सीतयोग विश्वविद्यालय, जसोइया मोड़ (औरंगाबाद): सीतयोग एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी द्वारा औरंगाबाद में उच्च शिक्षा के इस नए मंदिर को खोलने की मंजूरी मिल गई है।
अदालतों की सूरत बदलने के लिए करोड़ों की प्रशासनिक स्वीकृति
राज्य के न्यायिक ढांचे को हाई-टेक और सुदृढ़ बनाने के लिए विधि विभाग के तहत करोड़ों रुपये के प्रस्ताव पास किए गए हैं:
सीवान (महाराजगंज): नए अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय भवन (G+5), एमेनिटी भवन और हाजत भवन निर्माण के लिए 34.33 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।
मोतिहारी (पूर्वी चंपारण): कोर्ट परिसर में 20 नए कोर्ट भवनों (G+5) के निर्माण के लिए 53.02 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि मंजूर की गई है।
बेगूसराय: परित्यक्त एस.डी.जे.एम. कोर्ट के भू-खण्ड पर 15 नए शानदार कोर्ट भवनों (G+7) के निर्माण के लिए 39.04 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।
रजौली (नवादा): अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय में 10 कोर्ट भवन (G+5), एमेनिटी भवन (G+4) और हाजत भवन (G+1) निर्माण के लिए 38.38 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।
छपरा में सीवरेज नेटवर्क और शहरी विकास पर जोर
बिहार के शहरों को आधुनिक और साफ-सुथरा बनाने के लिए अमृत 2.0 (AMRUT 2.0) योजना के तहत नगर विकास एवं आवास विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। छपरा सीवरेज नेटवर्क परियोजना के लिए 76 करोड़ 48 लाख रुपये की बड़ी प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है, जिससे छपरा शहर की जल निकासी और स्वच्छता व्यवस्था को नया जीवन मिलेगा।
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जमीन दाखिल-खारिज के नाम पर मांग रहा था रिश्वत, रामदेव राम की शिकायत पर पटना से आई विंग ने की बड़ी कार्रवाई
आरा/पटना: भ्रष्टाचार के खिलाफ बिहार में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक बार फिर बड़ी सफलता हासिल की है। भोजपुर जिला अंतर्गत गड़हनी अंचल कार्यालय में तैनात राजस्व कर्मचारी जितेन्द्र कुमार को निगरानी की मुख्यालय टीम ने 3,500 रुपये की घूस लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। यह पूरी कार्रवाई इतनी गोपनीय और त्वरित गति से की गई कि आरोपी कर्मचारी को भनक तक नहीं लगी और वह मौके पर ही धरा गया।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की गिरफ्त में खड़ा घूसखोर राजस्व कर्मचारी जितेन्द्र कुमार, जिसे पुलिस उपाधीक्षक गौतम कृष्ण के नेतृत्व वाले धावा दल ने गड़हनी अंचल कार्यालय परिसर से 3,500 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
दाखिल-खारिज के नाम पर मांगी थी घूस: मिली जानकारी के अनुसार, एड़ौरा ग्राम (थाना उदवंतनगर, जिला भोजपुर) के निवासी रामदेव राम, जिनके पिता का नाम स्वर्गीय राम गोविन्द राम है, ने पटना स्थित निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के कार्यालय में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। परिवादी रामदेव राम ने आरोप लगाया था कि उनकी जमीन का दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) करने के एवज में राजस्व कर्मचारी जितेन्द्र कुमार द्वारा लगातार रिश्वत की मांग की जा रही थी और बिना पैसे दिए काम करने से मना किया जा रहा था।
जांच में सही पाया गया आरोप, बना धावा दल: ब्यूरो द्वारा प्राप्त शिकायत का गुप्त रूप से सत्यापन कराया गया। सत्यापन के क्रम में आरोपी कर्मचारी द्वारा रिश्वत मांगे जाने का पुख्ता प्रमाण मिला। प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने के पश्चात तत्काल प्रभाव से निगरानी थाना कांड संख्या 0-074/26 दिनांक 22.06.2026 दर्ज किया गया। इसके बाद अनुसंधानकर्त्ता सह पुलिस उपाधीक्षक गौतम कृष्ण के नेतृत्व में एक विशेष धावा दल (रेडिंग टीम) का गठन किया गया।
अंचल कार्यालय परिसर में बिछाया जाल: तय रणनीति के तहत निगरानी का धावा दल गड़हनी अंचल कार्यालय परिसर में सादे लिबास में तैनात हो गया। जैसे ही परिवादी रामदेव राम से राजस्व कर्मचारी जितेन्द्र कुमार ने रिश्वत के 3,500 (तीन हजार पाँच सौ) रुपये अपने हाथ में लिए, वैसे ही घात लगाए बैठी निगरानी की टीम ने उसे दबोच लिया। घूस के रूप में लिए गए रुपए उसके पास से बरामद कर लिए गए हैं। इस अचानक हुई कार्रवाई से अंचल कार्यालय में हड़कंप मच गया।
विशेष न्यायालय में किया जाएगा पेश: निगरानी की टीम आरोपी जितेन्द्र कुमार को हिरासत में लेकर तुरंत पटना मुख्यालय आ गई। ब्यूरो के अधिकारियों के अनुसार, अभियुक्त से गहन पूछताछ की जा रही है और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे पटना स्थित माननीय विशेष न्यायालय, निगरानी के समक्ष उपस्थापित किया जाएगा। मामले में आगे की अग्रतर अनुसंधान की कार्रवाई जारी है।
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चकोटी मठ पहुंचे मुख्यमंत्री का पाग और मखाना माला से ऐतिहासिक स्वागत, देश का बड़ा आध्यात्मिक केंद्र बनेगा यह पावन धाम
पटना, 24 जून: बिहार के समस्तीपुर जिले के खानपुर प्रखंड स्थित चकोटी मठ में आज एक ऐतिहासिक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। प्रसिद्ध ’24 अवतार धाम’ में आयोजित भव्य प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव-सह-विष्णु महायज्ञ एवं संत महाकुंभ कार्यक्रम में सूबे के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान पूरा क्षेत्र वैदिक मंत्रोच्चार और जयकारों से गुंजायमान हो उठा। मुख्यमंत्री ने देश और राज्य की सुख, शांति, समृद्धि और कल्याण के लिए विशेष पूजा-अर्चना की। उन्होंने चकोटी मठ परिसर में नवनिर्मित और भव्य ’24 अवतार धाम’ का शिलापट्ट अनावरण कर विधिवत लोकार्पण किया। इस ऐतिहासिक पल के गवाह हजारों श्रद्धालु और देश भर से आए संत-महात्मा बने।
दिव्य पूजा-अर्चना के उपरांत 24 अवतार चकोटी धाम के मुख्य पुजारी द्वारा सम्राट चौधरी के माथे पर विजय और जन-कल्याण का पवित्र तिलक लगाकर महाआशीर्वाद दिए जाने का अलौकिक क्षण।
चकोटी मठ परिसर पहुंचने पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का बेहद पारंपरिक और भव्य स्वागत किया गया। मठ के मुख्य सेवादार और धार्मिक गुरु 1008 महामंडलेश्वर राम सेवक दास शास्त्री जी महाराज ने मुख्यमंत्री को फूलों की विशाल माला और मिथिला की शान ‘पाग’ पहनाकर उनका जोरदार अभिनंदन किया। इसके साथ ही समस्तीपुर की सांसद शांभवी चौधरी, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सेवादारों ने मुख्यमंत्री को मखाना माला, अंगवस्त्र तथा पुष्प गुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने वहां उपस्थित सभी संतों, धार्मिक गुरुओं और श्रद्धालुओं का हाथ जोड़कर अभिवादन स्वीकार किया।
समस्तीपुर के खानपुर स्थित पावन 24 अवतार चकोटी धाम में आयोजित भव्य धार्मिक अनुष्ठान के दौरान हाथों में श्रद्धा के पुष्प लेकर गहरे ध्यान और भक्ति भाव से पुष्पांजलि अर्पित करते सम्राट चौधरी एवं अन्य विशिष्ट जन।
लोकार्पण के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि चकोटी मठ का यह ’24 अवतार धाम’ आने वाले समय में केवल बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आध्यात्मिक चेतना का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे विशाल धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के संरक्षण तथा संवर्धन में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस प्रकार के आयोजनों से पूरे समाज में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो सामाजिक समरसता, अच्छे संस्कार और राष्ट्र निर्माण की नींव को और अधिक मजबूत बनाता है।
इस महायज्ञ और संत महाकुंभ में सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और दिग्गज नेता भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री निशांत, परिवहन मंत्री दामोदर रावत, सांसद शांभवी चौधरी, पूर्व मंत्री सह विधायक महेश्वर हजारी, विधायक राजेश कुमार सिंह और विधायक अश्वमेघ देवी शामिल हुए। सभी नेताओं ने भगवान महाविष्णु के 24 अवतारों और अन्य विग्रहों के सामने माथा टेका और आशीर्वाद लिया।
प्रशासनिक स्तर पर भी कार्यक्रम को लेकर व्यापक तैयारियां की गई थीं। इस ऐतिहासिक अवसर पर दरभंगा प्रमंडल के आयुक्त हिमांशु कुमार राय, दरभंगा प्रक्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक मनोज तिवारी और समस्तीपुर के जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षा और व्यवस्था का जायजा लेने के लिए खुद मुस्तैद रहे। महाकुंभ में उमड़ी लाखों की भीड़ को नियंत्रित करने और यज्ञ की पवित्रता बनाए रखने के लिए प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए थे। संतों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से चकोटी मठ का पूरा इलाका भक्तिमय हो गया है।
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आकर देखिए इंजीनियरिंग का ‘अजूबा’ : टेढ़ा प्लिंथ, खराब चाबियाँ और चाय दुकान में पड़ा है पानी टंकी का ढक्कन!
सरकारी पैसे की डकैती! छुटभैया नेता को रतौंधी , 4 महीने से खुली पड़ी है टंकी, साफ पानी के नाम पर मौत परोस रहा ठेकेदार!
रिपोर्ट : एस. एस. कुमार ‘पंकज’
सकरा (मुजफ्फरपुर): सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना भ्रष्टाचारियों की भेंट चढ़ चुकी है। इसका सबसे जीता-जागता और शर्मनाक नमूना देखना हो तो सकरा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 6 में चले आइए। यहाँ नवनिर्मित नल-जल योजना विकास का नहीं, बल्कि आकंठ भ्रष्टाचार का प्रतीक बन चुका है। लाखों की लागत से बनी पानी टंकी आज सफेद हाथी बनकर खड़ी है, जबकि आम जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है।
नल-जल योजना की असली हकीकत! वार्ड 6 में प्रगति कार्यालय के पीछे स्व. अरूण सहनी के घर के सामने पिछले 4 महीनों से पानी न आने के कारण दरवाजों पर लगे सरकारी नलके अब बकरियाँ बांधने के खूंटे बन चुके हैं।
इस वार्ड में पिछले 4 महीनों से नल-जल योजना की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। दर्जनों ऐसे परिवार हैं जिनके दरवाजों तक पाइप लाइन पहुँचाकर कनेक्शन तो दे दिया गया, लेकिन पिछले 4 महीनों से उन्हें पानी की एक बूंद भी मयस्सर नहीं हुई है। विडंबना देखिए कि जिन नलों से स्वच्छ पेयजल बहना चाहिए था, आज लोग उन नलकों में अपनी बकरियाँ बांधने को मजबूर हैं। ठेकेदार, भ्रष्ट अधिकारियों और क्षेत्र के छुटभैये जनप्रतिनिधियों की तिकड़ी ने मिलकर सारा माल समेट लिया और अपना उल्लू सीधा कर जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया।
घरों के नलके बने बकरी बांधने का खूंटा!:डिजिटल इंडिया का नया ‘खूंटा मॉडल’, इंसानों के हिस्से का पानी तो गायब, अब बकरियाँ चबा रही हैं सुशासन का नलका!
अगर आपको ‘हर घर नल-जल योजना’ की सबसे अनूठी और ऐतिहासिक सफलता देखनी है, तो सकरा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 6 में प्रगति कार्यालय के पीछे स्वर्गीय अरुण सहनी के घर के सामने चले आइए। सरकार ने यहाँ पानी तो नहीं पहुँचाया, लेकिन पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए एक अद्भुत ‘खूंटा’ जरूर गाड़ दिया है। पिछले 4 महीनों से इस पाइप में पानी की एक बूंद भी नहीं टपकी है, जिसके बाद समझदार स्थानीय नागरिकों ने इसका सबसे बेहतरीन उपयोग ढूंढ निकाला है। जैसा कि तस्वीर में साफ दिख रहा है, लाखों रुपये के इस ड्रीम प्रोजेक्ट का नलका आज बकरियाँ बांधने के काम आ रहा है। अधिकारी और ठेकेदार फाइलों में पानी बहाकर अपनी जेबें भर चुके हैं, और यहाँ धरातल पर बेजुबान जानवर इस सूखे पाइप से बंधी रस्सी के सहारे सुशासन के दावों को चबा रहे हैं। इंजीनियरिंग का ऐसा ‘मल्टीपर्पज’ इस्तेमाल शायद ही पूरे देश में कहीं और देखने को मिले, जहाँ इंसान प्यासा है और सरकारी नलका खूंटे का धर्म निभा रहा है!
नीमतल्ला रोड में पानी टंकी के सटे दक्षिण चाय दुकानदार के द्वारा सम्भाल कर रखा गया टंकी का ढक्कन
खुली टंकी से आ रहा दूषित पानी, कौवे और हड्डियों का खतरा!
वार्ड संख्या 6 की जनता पिछले 4 महीनों से एक बड़े खतरे के साए में जी रही है। पानी की टंकी ऊपर से पूरी तरह खुली हुई है। ठेकेदार की लापरवाही का आलम यह है कि टंकी का ढक्कन पास की ही एक चाय दुकान में लावारिस हालत में पड़ा हुआ है। खुली टंकी के ऊपर दिनभर चिड़ियाँ, कौवे और अन्य पक्षी बैठते हैं। स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है कि कोई भी पक्षी उसमें हड्डी या कोई अन्य अनर्गल व जहरीला पदार्थ गिरा सकता है, जिससे पूरे मोहल्ले में महामारी फैल सकती है। इस खुली टंकी के कारण लोगों को दूषित पानी की सप्लाई हो रही है, जो न तो खाना बनाने के योग्य है और न ही पूजा-पाठ के लायक।
सकरा नगर पंचायत के वार्ड 6 में नल-जल योजना के लोहे के टावर एवं टेढ़ा-मेढ़ा और बिना प्लास्टर का सीमेंटेड प्लिंथ, (दायें) जिसे मिट्टी डालकर छिपाने की कोशिश की गई है। (बायें) ढीले नट-बोल्ट साफ बयां कर रहे हैं कि यह टावर कभी भी गिर सकता है।
घटिया निर्माण: रातभर टपकता है पानी, कभी भी गिर सकता है लोहे का टावर!
इस पूरी योजना में निर्माण कार्य की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ किया गया है। लोहे का जो भारी-भरकम टावर खड़ा किया गया है, उसकी प्लेटों को भी ठीक से नहीं कसा गया है। यह कमजोर टावर कभी भी गिर सकता है और जान-माल की बड़ी क्षति हो सकती है। यही नहीं, घटिया निर्माण के कारण रातभर टंकी से पानी टपकता रहता है, जिसकी ‘टप-टप’ की आवाज सीधे नीचे बनी टीन की छत पर गिरती है। इस शोर के कारण टंकी के आस पास के लोग रातभर सो नहीं पाते हैं। आशंका जताई जा रही है कि कुछ ही महीनों में टीन का यह शेड जंग लगकर पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।
वार्ड संख्या 6 में नल जल योजना की गुणवत्ता (नवनिर्मित) जांच करते अधिकारी एवं आपत्ति रखते स्थानीय लोगों की फाइल फोटो,
अफसरशाही का शर्मनाक चेहरा: ठेकेदार के बचाव में उतरे पीएचडी अभियंता राहुल तिवारी, बिना एस्टिमेट देखे ही बांट दिया क्लीन चिट!
इस महाघोटाले को लेकर जब जनस्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) के अभियंता राहुल तिवारी से इसके निर्माण और घटिया गुणवत्ता के संबंध में शिकायत के लहजे में बात की गई, तो उनका रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना और चौंकाने वाला रहा। जनता की तकलीफें सुनने के बजाय अभियंता राहुल तिवारी सीधे तौर पर दागी ठेकेदार के बचाव में उतर आए। जब उनसे पाइप लाइन में चाबियाँ (वाल्व) न होने पर सवाल किया गया, तो उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि इसमें चाबी लगाने की जानकारी इसके एस्टिमेट (प्राक्कलन) में दर्शाई गई होगी। हद तो तब हो गई जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने खुद कभी इस निर्माण से जुड़ी एस्टिमेट की कॉपी देखी है? इस पर उन्होंने साफ इनकार कर दिया। बिना प्लास्टर का टेढ़ा-मेढ़ा सीमेंटेड प्लिंथ, महीनों से खराब पड़ी एकमात्र चाबी और पंप पर संचालक व समय-सीमा की जानकारी न होने जैसे गंभीर सवालों को वे पूरी तरह टाल गए। बिना कागजात देखे और बिना स्थलीय हकीकत जाने ठेकेदार की पैरवी करना यह साफ बयां करता है कि भ्रष्टाचार के इस खेल में इंजीनियर से लेकर ठेकेदार तक का मजबूत गठजोड़ काम कर रहा है।
वार्ड 6 के नीमतल्ला रोड में गंगा इलेक्ट्रॉनिक के सामने पिछले 15 दिनों से खुदा पड़ा लावारिस गड्ढा और सड़क पर बहता लीकेज का पानी, जो आए दिन हादसों को दावत दे रहा है।
नीमतल्ला रोड बना खंडहर , 15 दिनों से खुदा पड़ा है गड्ढा!
घटिया और तीन नंबर के पाइपों के इस्तेमाल के कारण पूरे मोहल्ले में करीब आधा दर्जन जगहों पर पाइप लीकेज की गंभीर समस्या है। वार्ड 6 के ही नीमतल्ला रोड में गंगा इलेक्ट्रॉनिक के सामने पिछले 3 महीनों से लगातार पानी रिसकर सड़क पर बह रहा है। हद तो तब हो गई जब लगभग 15 दिन पहले गंगा इलेक्ट्रॉनिक के सामने मुख्य सड़क को मरम्मत के नाम पर खोद दिया गया और फिर उसे वैसे ही लावारिस छोड़ दिया गया। अब स्थिति यह है कि आते-जाते असावधान राहगीर और स्थानीय लोग इस गहरे गड्ढे में गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
सिर्फ बोर्ड पर वार्ड पार्षद महोदया का नाम,धरातल पर नहीं दिखता काम
चुनाव जीतने के बाद गायब हुईं पार्षद रीता कुमारी, पार्षद पति बोले- ‘मैं पार्षद थोड़े ही हूँ‘
जनता की सुध लेने वाला कोई नहीं है। वार्ड संख्या 6 की निर्वाचित पार्षद रीता कुमारी नगर पंचायत चुनाव में जीत हासिल करने के बाद आज तक कभी मोहल्ले में शक्ल दिखाने भी नहीं आईं। उनके पार्षद पति को काम की कोई समझ नहीं है; वे बस चौबीसों घंटे अपनी पार्टी का झंडा ढोने और राजनीति चमकाने में व्यस्त रहते हैं। मोहल्ले और जनता के विकास से उनका कोई सरोकार नहीं है। जब कोई जागरूक नागरिक उनसे वार्ड की बदहाली के बारे में सवाल करता है, तो पार्षद पति झल्लाकर सीधे कह देते हैं— “हम पार्षद थोड़े ही हैं, जाकर पार्षद महोदया से समझिए।” जनप्रतिनिधियों का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया साफ दिखाता है कि उन्हें जनता की तकलीफों से कोई मतलब नहीं है।
वार्ड संख्या 6 में नल जल के सप्लाई पाइप पर लगा एक मात्र खराब चाबी(वाल्व), एवं जल शुद्धि के लिए शोपीस में रखा उपकरण
15 हजार रुपये डकारने के लिए लगा दी एक ही चाबी(वाल्व) ! वह भी खराब ,
इस पूरी योजना में तकनीकी स्तर पर भी भारी हेराफेरी की गई है। जल वितरण क्षेत्र के पाइप लाइन में चारों ओर कहीं भी ‘चाबी’ (वाल्व) नहीं दी गई है। जानकार बताते हैं कि बाजार में एक अच्छी चाबी की कीमत 3 हजार से 4 हजार रुपये के आसपास होती है। नियमानुसार यहाँ कम से कम 5 चाबियाँ लगनी चाहिए थीं, जिसका कुल खर्च करीब 15 हजार रुपये आता। अगर रूट के हिसाब से चाबियाँ लगी होतीं, तो जिस क्षेत्र में लीकेज होता केवल वहीं का पानी बंद किया जाता। लेकिन ठेकेदार ने पैसे गटकने के चक्कर में पूरे वार्ड में सिर्फ 1 ही चाबी लगाई और वह चाबी भी पिछले कई महीने से खराब पड़ी है। इसके कारण एक जगह की खराबी ठीक करने के लिए पूरे वार्ड का पानी बंद करना पड़ता है। इस पूरी हेराफेरी में जांच दल की सहभागिता साफ उजागर होती है, जो आँखें मूंदे बैठी है।
तस्वीर में पानी टंकी के नीचे का सीमेंटेड प्लिंथ (आधार) टेढ़ा एवं प्लास्टर विहिन
न क्षमता का पता, न ऑपरेटर का नाम; बिना प्लास्टर के ढांचा खड़ा!
गड़बड़ी की शुरुआत शुरुआत से ही हो गई थी। पंप का निर्माण करने वाले अभिकर्ता (एजेंसी), मेंटेनेंस करने वाले अधिकारी या कर्मचारी का कोई नाम-पता और शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर तक कहीं भी प्रदर्शित नहीं किया गया है। यहाँ तक कि पंप ऑपरेटर कौन है और पंप चलाने की समय-सीमा क्या है, इसकी कोई सूचना बोर्ड पर अंकित नहीं है।
इंजीनियरिंग का ऐसा घटिया और नायाब नमूना शायद ही कहीं और देखने को मिले। पानी टंकी के नीचे का सीमेंटेड प्लिंथ (आधार) पूरी तरह से टेढ़ा है और उस पर प्लास्टर तक नहीं किया गया है। अपनी चोरी छिपाने के लिए ठेकेदार ने उसे दोबारा ढालकर सीधा करने की नाकाम कोशिश की, लेकिन जब बात नहीं बनी तो सिर्फ मिट्टी गिराकर उस बदहाली को ढक दिया गया। भ्रष्टाचार की दलदल में डूबे जांच अधिकारियों को यह सब दिखाई नहीं देता, जो इस बात का पक्का सबूत है कि इस दो नम्बरी काम में ऊपर से नीचे तक सभी लिप्त हैं।
अबकी बार जनता कराएगी ‘उठक-बैठक’!
पाइपलाइन बिछाने के नाम पर मुख्य सड़कों और गलियों में घटिया स्तर का तीन नंबर पाइप दौड़ाकर सरकारी बजट को ठिकाने लगा दिया गया है। ठेकेदार, भ्रष्ट अधिकारियों और क्षेत्र के छुटभैया जनप्रतिनिधियों की तिकड़ी ने मिलकर जनता की गाढ़ी कमाई का माल समेट लिया है। चुनाव के समय हाथ जोड़ने वाले छुटभैया नेताओं को मानो दिन में ही ‘रतौंधी’ हो गई है, जिन्हें वार्ड की यह दुर्दशा दिखाई ही नहीं दे रही। चार महीनों से टंकी खुली होने के कारण उस पर कौवे, चील और अन्य पक्षी बैठते हैं। टंकी में कोई हड्डी या अनर्गल जहरीला पदार्थ गिर जाने का डर हर वक्त बना रहता है। इस दूषित और असुरक्षित पानी का सेवन करने को लोग मजबूर हैं, जो न तो खाना बनाने के लायक है और न ही पूजा-पाठ के योग्य। साफ पानी के नाम पर ठेकेदार सीधे तौर पर लोगों को मौत परोस रहा है।
मोहल्ले के लोगों ने इस गड़बड़ी और बदहाली की शिकायत कई बार बड़े अधिकारियों से की, लेकिन भ्रष्ट तंत्र के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। स्थानीय छुटभैये नेताओं को केवल चुनाव के समय ही वार्ड संख्या 6 की जनता याद आती है। लेकिन इस बार जनता का आक्रोश सातवें आसमान पर है। मोहल्ले के लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि ऐसे धोखेबाज़ जनप्रतिनिधियों और नेताओं को आगामी नगर पंचायत चुनाव में मोहल्ले के लोग बीच चौराहे पर ‘उठक-बैठक’ करवाएंगे और उनकी राजनीतिक जमीन को हमेशा के लिए बंजर कर देंगे।
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