जांच में सरकारी गाड़ी निजी क्लिनिक के बाहर खड़ी, छद्म मरीज भेजकर स्वास्थ्य विभाग ने पकड़ा रंगे हाथ!
पटना, 27 जून 2026। स्वास्थ्य विभाग ने 26 जून 2026 को डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए बयानों की धज्जियां उड़ाते हुए एक विस्तृत और बेहद चौंकाने वाला तथ्यात्मक प्रतिवेदन जारी किया है। इस सरकारी रिपोर्ट ने पूरे चिकित्सा जगत में खलबली मचा दी है। विभाग ने डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह के झूठ का पर्दाफाश करते हुए बताया है कि किस तरह कर्तव्यहीनता, लापरवाही और सरकारी संसाधनों का खुला दुरुपयोग किया जा रहा था।
अधीक्षक के फोन को किया नजरअंदाज, मंत्री के स्वागत की थी पूरी जानकारी प्रतिवेदन के अनुसार, डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि 23 जून 2026 को माननीय स्वास्थ्य मंत्री के पटना चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, पटना में निर्धारित कार्यक्रम की उन्हें कोई पूर्व सूचना नहीं थी। लेकिन जांच में यह दावा पूरी तरह झूठा निकला। रिकॉर्ड के मुताबिक, पटना चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के अधीक्षक द्वारा 22 जून 2026 को लगभग 07:00 बजे अपराह्न में ही डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह को मोबाइल पर बातचीत कर इस कार्यक्रम की पूरी सूचना दे दी गई थी। इतना ही नहीं, मोबाइल पर बातचीत के दौरान यह भी तय हुआ था कि माननीय स्वास्थ्य मंत्री का स्वागत अधीक्षक करेंगे और धन्यवाद ज्ञापन प्राचार्य द्वारा किया जाएगा, जिस पर प्राचार्य ने अपनी सहमति भी दी थी।

व्हाट्सएप पर छुट्टी का बहाना, मीडिया के डर से भेजी सूचना! विभाग ने स्पष्ट किया है कि डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह के पुत्र द्वारा विभागीय सचिव, अधीक्षक एवं अन्य पदाधिकारियों को व्हाट्सएप पर सूचना दी गई थी। लेकिन जलने से संबंधित सूचना कार्यक्रम समाप्त होने के कई घंटों बाद दी गई, जिससे साफ है कि मीडिया में खबर आने के बाद केवल अपने बचाव के लिए व्हाट्सएप पर यह सूचना सभी को दी गई थी।
सरकारी गाड़ी के साथ निजी क्लिनिक में चल रहा था मरीजों का धंधा! सबसे बड़ा और सनसनीखेज खुलासा डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह की अनुपस्थिति और उनके निजी क्लिनिक को लेकर हुआ है। कार्यालय अवधि के दौरान उनके गायब रहने की गोपनीय सूचना मिलने पर प्रशासन ने एक जाल बिछाया। विभाग और जिला पदाधिकारी, पटना के स्तर से छद्म मरीज (फर्जी मरीज) बनाकर डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह के निजी क्लिनिक में भेजा गया। जब जांच टीम वहां पहुंची, तो नजारा देखकर दंग रह गई। पटना चिकित्सा महाविद्यालय, पटना की सरकारी वाहन डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह के निजी क्लिनिक के बाहर खड़ी तमाशा देख रही थी। क्लिनिक से बाहर निकल रहे मरीजों ने पुष्टि की कि वे अभी-अभी डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह से इलाज कराकर बाहर आए हैं।

कंपाउंडर ने खोला समय का राज वहीं दूसरी ओर, डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह का दावा था कि वे जल गए थे और मोबाइल पर बातचीत करने में असमर्थ थे। लेकिन जब जांच टीम क्लिनिक के अंदर दाखिल हुई, तो वहां उपस्थित कंपाउंडर ने डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह के क्लिनिक का पूरा समय सारणी ही खोलकर रख दिया। कंपाउंडर ने बताया कि डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह शाम को 07:00 बजे से मरीज देखेंगे। यदि किसी मरीज को अगले दिन दिखाना हो, तो सुबह 09:00 बजे से 10:00 बजे, दोपहर में 02:00 बजे से 03:00 बजे एवं शाम को 07:00 बजे से 09:00 बजे तक का समय तय था। इससे साफ हो गया कि डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह सरकारी ड्यूटी के घंटों में भी अपने निजी क्लिनिक में मरीजों को देखने का काम धड़ल्ले से करते हैं।
गठन हुई उच्चस्तरीय जांच कमेटी, अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं प्रथम दृष्टया अपने कार्यों के प्रति घोर लापरवाही, कर्तव्यहीनता, सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग और अनाधिकृत रूप से गायब रहने का दोषी पाते हुए डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह को प्राचार्य के पद के अतिरिक्त प्रभार से तत्काल मुक्त कर दिया गया है। उन्हें प्राध्यापक, मनोरोग विभाग, राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, बेतिया में पदस्थापित किया गया है। विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अपनी अनाधिकृत अनुपस्थिति के संबंध में विभाग को कोई स्पष्टीकरण या अभ्यावेदन देने के बजाय सीधे प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करना बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के प्रावधानों के पूरी तरह प्रतिकूल है। अब इस पूरे मामले में सक्षम प्राधिकार के अनुमोदन से एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है, जो डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह का पक्ष प्राप्त करते हुए विहित प्रक्रिया के तहत आगे की सख्त कार्रवाई करेगी।
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