मुजफ्फरपुर पुलिस महकमे में हड़कंप: एसएसपी की गाज गिरी पारू और औराई थानाध्यक्ष पर, लापरवाही और स्वेच्छाचारिता के गंभीर आरोप में दोनों सस्पेंड!

मुजफ्फरपुर। जिला पुलिस महकमे से इस वक्त की बेहद बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, स्वेच्छाचारिता, मनमानेपन और वरीय अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने वाले दो थानाध्यक्षों पर वरीय पुलिस अधीक्षक कार्यालय, मुजफ्फरपुर ने कड़ा रुख अपनाते हुए गाज गिराई है। वरीय पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार पारू थानाध्यक्ष पुलिस अवर निरीक्षक आशुतोष कुमार शुक्ला तथा औराई थानाध्यक्ष पुलिस अवर निरीक्षक सुनील कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद से पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

सांकेतिक (प्रतीकात्‍मक) तस्‍वीर

केस 1: पारू थाना कस्टडी से भागे अभियुक्त और बिना बताए संदिग्ध को छोड़ा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सरैया एवं अंचल पुलिस निरीक्षक पारू द्वारा पारू थानाध्यक्ष के विरुद्ध एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी गई थी। इस रिपोर्ट में खुलासा किया गया कि थानाध्यक्ष पारू द्वारा मध्यस्थता के बाद पूछताछ के लिए लाए गए एक व्यक्ति को वरीय अधिकारियों को बिना सूचित किए ही छोड़ दिया गया।

इतना ही नहीं, थानाध्यक्ष की घोर लापरवाही और अविवेकपूर्ण निर्णयों के कारण चुराई हुई संपत्ति, आर्म्स एक्ट तथा बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत पकड़े गए अभियुक्तों को उचित संरक्षण में नहीं रखा गया। इसका नतीजा यह हुआ कि महज 15 दिनों के भीतर 02 अभियुक्त पुलिस की हिरासत से भाग निकले। कर्तव्य में इतनी बड़ी लापरवाही, अनुशासनहीनता और वरीय अधिकारियों के आदेश की नाफरमानी के आरोप में पुलिस अवर निरीक्षक आशुतोष कुमार शुक्ला, थानाध्यक्ष पारू को तत्काल प्रभाव से सामान्य जीवन यापन भत्ता पर निलंबित कर दिया गया है।

केस 2: औराई थाना लूट के मामले को छोटा करने और ई-साक्ष्य ऐप में लापरवाही का आरोप

दूसरा मामला औराई थाने से जुड़ा है। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी पूर्वी-1, मुजफ्फरपुर द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट में औराई थानाध्यक्ष की कारगुजारियों का पर्दाफाश हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक थानाध्यक्ष औराई ने लापरवाही और मनमाने तरीके से काम करते हुए लूट की गंभीर वारदात का न्यूनीकरण (मामले को हल्का) कर दिया। उन्होंने इसे महज गृह अतिचार और गृहभेदन में मामला दर्ज कर वरीय अधिकारियों को गुमराह और दिग्भ्रमित करने का कुत्सित प्रयास किया।

इसके अलावा, अपराध अनुसंधान की अति-अनिवार्य प्रक्रिया जैसे कि ‘ई-साक्ष्य ऐप’ पर घटनास्थल का विवरण दर्ज करने, तलाशी, जब्ती की कार्रवाई और गवाहों के बयान दर्ज करने में भारी शिथिलता बरती गई। साथ ही निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप लंबित कांडों की समीक्षा भी नहीं की जा रही थी। कांडों को दबाने, स्वेच्छाचारिता, घोर लापरवाही और आदेशों के उल्लंघन के आरोप में पुलिस अवर निरीक्षक सुनील कुमार, थानाध्यक्ष औराई को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर सामान्य जीवन यापन भत्ता पर भेज दिया गया है।

वरीय अधिकारियों की इस ताबड़तोड़ और सख्त कार्रवाई से साफ संदेश गया है कि खाकी में किसी भी प्रकार की लापरवाही, भ्रष्टाचार या स्वेच्छाचारिता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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