गोल-मटोल जवाब से भड़का जनाक्रोश: भाकपा माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने खोला मोर्चा, उच्चस्तरीय निष्पक्ष जाँच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की माँग।
ताजपुर (समस्तीपुर):ताजपुर नगर परिषद में सफ़ाई व्यवस्था के नाम पर सरकारी धन की जमकर बंदरबांट और बड़े पैमाने पर वित्तीय घोटाले की आशंका गहरा गई है। भाकपा माले के ताजपुर प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने नगर परिषद प्रशासन और आउटसोर्सिंग एजेंसी की साठगाँठ पर करारा हमला बोलते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जाँच कराने की माँग की है।

मामले की जानकारी देते हुए भाकपा माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि नगर परिषद ताजपुर में सफ़ाई व्यवस्था के नाम पर लाखों रुपये का वारा-न्यारा किया जा रहा है। सच सामने लाने के उद्देश्य से उन्होंने कार्यपालक पदाधिकारी से सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के तहत आवेदन देकर सफ़ाई मजदूरों की वास्तविक संख्या, उनके नाम-पता और भुगतान से जुड़ी बेहद महत्वपूर्ण जानकारियाँ माँगी थीं।

आरटीआई के तहत माँगी गई मुख्य जानकारियाँ:
- नगर परिषद क्षेत्र में कार्यरत सफ़ाई कर्मियों की कुल वास्तविक संख्या।
- सभी सफ़ाई कर्मियों का पूरा नाम एवं स्थायी पता।
- सफ़ाई मद में प्रतिमाह खर्च की जाने वाली सरकारी राशि एवं मानदेय भुगतान का ब्योरा।
निर्धारित समय-सीमा बीत जाने के बावजूद नगर परिषद प्रशासन द्वारा स्पष्ट जानकारी देने के बजाय गोल-मटोल और टालमटोल भरा जवाब थमा दिया गया। अधिकारियों की ओर से लिखित में कहा गया कि “ताजपुर नगर परिषद में आउटसोर्सिंग एजेंसी आरईएस क्लीनिंग सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सफ़ाई कार्य कराया जाता है। संबंधित एजेंसी द्वारा ही सफ़ाई कर्मियों का चयन, संख्या में बदलाव और मानदेय का भुगतान किया जाता है।”

सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने आरोप लगाया कि वास्तविक आँकड़े छुपाना सीधे तौर पर यह दर्शाता है कि ज़मीन पर बेहद कम संख्या में मजदूर रखकर कागज़ों पर भारी संख्या दिखाई जा रही है और हर महीने सरकारी खज़ाने से भारी-भरकम राशि का अवैध उठाव किया जा रहा है।
जब सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने उक्त एजेंसी की आधिकारिक वेबसाइट और कॉरपोरेट डेटा का गहन विश्लेषण किया, तो एक चौंकाने वाला सच सामने आया। एजेंसी “आरईएस क्लीनिंग सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड” का पंजीकृत कार्यालय “केयर ऑफ़ अंजली अपार्टमेंट, ब्लॉक-सी/बी, एम एम दत्ता रोड बाय लेन, डी.बी. पारा, सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल – 734004″ दर्ज है।

हैरानी की बात यह है कि महज 10 लाख रुपये की मामूली शेयर कैपिटल (पूँजी) वाली इस बाहरी एजेंसी को ताजपुर नगर परिषद द्वारा प्रतिमाह लगभग 30 लाख रुपये का भारी-भरकम ठेका दे दिया गया है। कंपनी के ऑनलाइन पोर्टल पर कोई ज़रूरी अपडेट भी मौजूद नहीं हैं, जिससे इसके फर्जी अथवा केवल कागज़ों पर संचालित होने का प्रबल संदेह पैदा होता है।
भाकपा माले नेता ने तल्ख लहजे में कहा कि यदि नगर परिषद में सफ़ाई मद का सारा काम नियमों के अनुकूल और पारदर्शी तरीके से हुआ है, तो फिर जनता के पैसे का ब्योरा सार्वजनिक करने में अधिकारियों के पसीने क्यों छूट रहे हैं? सूचना छुपाने की यह कोशिश साफ़ संकेत देती है कि यहाँ सफ़ाई के नाम पर करोड़ों रुपये का घपला किया जा रहा है।

उन्होंने जिला प्रशासन समस्तीपुर, नगर विकास एवं आवास विभाग तथा राज्य सूचना आयोग से इस गंभीर मामले का तत्काल संज्ञान लेने का अनुरोध किया है। उन्होंने आरटीआई में माँगी गई पूरी जानकारी अविलंब सार्वजनिक करने तथा सफ़ाई मद में हुई वित्तीय अनियमितताओं की उच्चस्तरीय कमेटी से जाँच करवाकर दोषी अधिकारियों एवं फर्जीवाड़ा करने वाली एजेंसी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की पुरज़ोर माँग की है।
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