Sunday, June 7, 2026

बिहार के सियासी इतिहास का वो ‘मसीहा’, जिसने मात्र 110 दिनों में बदल दी थी प्रदेश की तकदीर!

प्रथम प्रधानमंत्री बैरिस्टर मुहम्मद युनूस की जयंती पर गणमान्य लोगों ने दी श्रद्धाजंलि; उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने अर्पित किए पुष्प

पटना/मुजफ्फरपुर। बिहार के गौरवशाली इतिहास के शिल्पकार और प्रदेश के प्रथम ‘प्रधानमंत्री’ (प्रीमियर) बैरिस्टर मुहम्मद युनूस की जयंती राजकीय समारोह के रूप में पूरी गरिमा के साथ मनाई गई। पटना के श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल परिसर में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और महापुरुष की विरासत को नमन किया। इस अवसर पर बिहार के उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने युनूस के तैल चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

राजकीय समारोह के दौरान बैरिस्टर मुहम्मद युनूस के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी।

विकास और सद्भाव का अद्भुत संगम : मानवाधिकार संस्थान के महासचिव मोहम्मद इश्तेयाक ने मीडिया को  संदेश जारी कर , बैरिस्टर युनूस के अद्वितीय योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब भाषाई और सांप्रदायिक मतभेद चर्चा में रहते हैं, युनूस साहब ने 1937 में ही अपनी दूरदर्शिता से इसका समाधान कर दिया था। उन्होंने हिंदी, उर्दू, बंगला और कैथी जैसी भाषाओं को प्रशासनिक और अदालती कार्यों में उचित स्थान देकर समाज को जोड़ने का काम किया था। उनके द्वारा निकाला गया ‘मेल-मिलाप’ रिसाला (पत्रिका) आज भी सामाजिक एकता का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है।

मात्र 110 दिनों में खींची विकास की लंबी लकीर : मोहम्मद इश्तेयाक ने जारी संदेश में जोर देते हुए कहा कि बैरिस्टर युनूस की सरकार का कार्यकाल मात्र 110 दिनों का था, लेकिन उन्होंने वह कर दिखाया जो अक्सर पांच साल की सरकारें भी नहीं कर पातीं। औरंगाबाद में सांप्रदायिक तनाव को शांत करना हो, सीवान को विनाशकारी बाढ़ से बचाना हो, या किसानों के कर्ज को कम कर महाजनों पर लगाम कसना—युनूस साहब का विजन स्पष्ट था। उन्होंने डुमराव में सीमेंट और कागज की फैक्ट्री खोलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाकर बिहार के औद्योगीकरण का सपना देखा था।

जयंती समारोह में उपस्थित प्रबुद्ध नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता, जिन्होंने महापुरुष के विचारों को साझा किया।

इतिहास के पन्नों से: बिहार के पहले ‘प्रीमियर’ बैरिस्टर मुहम्मद युनूस की दास्तां

आधुनिक लोकतंत्र में जिसे हम ‘मुख्यमंत्री’ कहते हैं, 1935 के ‘गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट’ के तहत उस पद को ‘प्रधानमंत्री’ (प्रिमियर) कहा जाता था। बैरिस्टर मुहम्मद युनूस इसी संवैधानिक व्यवस्था के तहत बिहार के पहले प्रधानमंत्री बने।

 संवैधानिक संकट के संकटमोचक 1937 के चुनावों में जब कांग्रेस ने कुछ तकनीकी कारणों से सरकार बनाने से इनकार कर दिया, तब लोकतंत्र की गरिमा बचाते हुए दूसरी सबसे बड़ी पार्टी ‘मुस्लिम इंडिपेंडेंट पार्टी’ के नेता बैरिस्टर युनूस ने 1 अप्रैल 1937 को शपथ ली। उन्होंने अपनी कैबिनेट को ‘समावेशी’ बनाया, जिसमें कुमार राजीव प्रसाद सिंह और बाबू गिरी सहाय जैसे नेताओं को शामिल कर एकता का संदेश दिया।

 एक प्रख्यात बैरिस्टर और पत्रकार लंदन से कानून की पढ़ाई करने वाले युनूस साहब पटना हाई कोर्ट के नामी बैरिस्टर थे। उनकी लेखनी और पत्रकारिता में भी गहरी रुचि थी। उन्होंने ‘द पटना टाइम्स’ अखबार शुरू किया, जो उस समय जन-चेतना का प्रमुख केंद्र बना।

 निस्वार्थ सेवा की मिसाल जब कांग्रेस और ब्रिटिश सरकार के बीच विवाद सुलझ गया, तो उन्होंने बिना किसी मोह के 19 जुलाई 1937 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनका जीवन बताता है कि पद से बड़ा ‘कर्तव्य’ होता है।

बैरिस्टर मुहम्मद युनूस आज भी बिहार के उन बिरले राजनेताओं में गिने जाते हैं, जिन्होंने राजनीति को जनसेवा और सौहार्द का माध्यम बनाया। उनकी विरासत आज के समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।


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शहरी टैक्स की मार, ग्रामीण सप्लाई की लाचारी: मुरौल पार्षद का सिस्टम के खिलाफ बड़ा ऐलान!

मुजफ्फरपुर। नगर पंचायत मुरौल के वार्ड संख्या-03 के पार्षद आनंद कंद साह ने व्यवस्था की दोहरी नीति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सरकार ने मुरौल को शहर तो घोषित कर दिया, लेकिन यहाँ की जनता आज भी सुविधाओं के लिए ग्रामीण व्यवस्था की कतार में खड़ी है। पार्षद साह ने एक वीडियो जारी कर सरकार और प्रशासन को सीधे चेतावनी दी है कि जब तक “शहरी टैक्स” के बदले “शहरी सुविधा” नहीं मिलती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।

अनशन से हटे पर झुके नहीं! पार्षद ने दी चेतावनी- जब तक समाधान नहीं, तब तक चैन नहीं

पार्षद आनंद कंद साह ने हाल ही में जिला कलेक्ट्रेट के समक्ष अनशन किया था। हालांकि, DSO मुजफ्फरपुर के आश्वासन के बाद उन्होंने अनशन स्थगित कर दिया है, लेकिन तेवर अब भी तल्ख हैं। साह का कहना है, “DSO ने इसे पॉलिसी मैटर बताकर पल्ला झाड़ लिया है, लेकिन सवाल यह है कि जब बिजली बिल DS-2 (शहरी) के हिसाब से लिया जा रहा है और जमीन की रजिस्ट्री में भारी MVR वसूला जा रहा है, तो गैस सिलेंडर के लिए 45 दिनों का इंतजार क्यों?”

45 दिन का वनवास‘, सिस्टम पर गंभीर सवाल

सरकारी नोटिफिकेशन के अनुसार शहरी क्षेत्रों में 25 दिनों के भीतर गैस रिफिल की सुविधा होनी चाहिए। लेकिन मुरौल और सकरा जैसी नवगठित नगर पंचायतों में स्थिति भयावह है। पार्षद साह ने तर्क दिया कि अगर हमें ग्रामीण समझकर 45 दिन बाद गैस दी जा रही है, तो हमसे होल्डिंग टैक्स और महंगा बिजली बिल क्यों लिया जा रहा है? उन्होंने बताया कि कंपनियों का तर्क है कि डिस्ट्रीब्यूटरशिप ग्रामीण कोटे से दी गई थी, जो अब जनता के लिए गले की फांस बन गई है।

कौन हैं आनंद कंद साह?

नगर पंचायत मुरौल के वार्ड संख्या-03 के पार्षद आनंद कंद साह अपनी बेबाकी और जमीनी संघर्ष के लिए जाने जाते हैं। पिछले कई महीनों से वे स्थानीय समस्याओं और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे हैं। उनका अनशन न केवल एक विरोध था, बल्कि व्यवस्था को आईना दिखाने की एक साहसिक कोशिश थी।

प्रशासन से क्‍या है मांग“

हमसे सेवा के नाम पर ‘शहरी शुल्क‘ वसूला जा रहा है, होल्डिंग टैक्स से लेकर बिजली बिल (DS-2) तक हम शहरी दर पर दे रहे हैं, लेकिन सुविधा हमें ग्रामीण स्तर की मिल रही है। 45 दिन का रिफिल चक्र हमारी माताओं-बहनों के लिए अभिशाप है। उन्हें लकड़ी बीनने को मजबूर किया जा रहा है। हमारी मांग एक सूत्रीय है—मुरौल को शहरी क्षेत्र का दर्जा मिल चुका है, तो हमें 25 दिन पर गैस रिफिल चाहिए और यह हमें मिलकर रहेगा।”

दिल्ली तक पहुँची गूँज, सांसद से भी संपर्क

यह समस्या सिर्फ मुरौल तक सीमित नहीं है। सकरा, ताजपुर, कांटी, बरूराज, मोतीपुर और मीनापुर की जनता भी इसी “शहरी-ग्रामीण” द्वंद्व में फंसी है। आनंद कंद साह ने इस मामले को दिल्ली के गलियारों तक पहुँचाने के लिए मुजफ्फरपुर सांसद के पीए (PA) से संपर्क कर जरूरी दस्तावेज दिल्ली कार्यालय भेजे हैं।

जनता की प्रखर आवाज बने आनंद कंद साह

आनंद कंद साह केवल एक पार्षद नहीं, बल्कि क्षेत्र में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक सुस्ती के खिलाफ एक मजबूत आवाज बनकर उभरे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे चुप नहीं बैठने वाले हैं। उन्होंने जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “आपकी प्रेरणा से ही आंशिक सफलता मिली है, लेकिन पूर्ण समाधान होने तक मेरा फॉलोअप जारी रहेगा।”

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समस्तीपुर में रेलवे के खिलाफ आर-पार  का ऐलान : 27 मई को DRM दफ्तर पर उपवास, प्रशासन को दी बड़ी चेतावनी

समस्तीपुर | 4 मई 2026 | समस्तीपुर रेल मंडल के विकास में हो रही अनदेखी और लंबित पड़ी योजनाओं को लेकर अब जिले के प्रबुद्ध नागरिकों और राजनीतिक दलों ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। सोमवार को डीआरएम चौक पर ‘समस्तीपुर रेल विस्तार एवं विकास मंच’ की एक महत्वपूर्ण और आपातकालीन बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में क्षेत्र के विकास से जुड़ी वर्षों पुरानी मांगों पर चर्चा की गई और निर्णय लिया गया कि अब सरकार और रेल प्रशासन को जगाने के लिए सड़क पर उतरना ही एकमात्र रास्ता बचा है।

तस्वीर: समस्तीपुर डीआरएम चौक पर आयोजित बैठक में आंदोलन की रणनीति तैयार करते रेल विकास एवं विस्तार मंच के सदस्य।

27 मई को ठप होगा काम: उपवाससे शुरू होगा आंदोलन

संयोजक शत्रुघ्न राय पंजी की अध्यक्षता और शंकर प्रसाद साह के कुशल संचालन में हुई इस बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि आगामी 27 मई को समस्तीपुर रेल मंडल प्रबंधक (DRM) कार्यालय के समक्ष एकदिवसीय विशाल उपवास कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। मंच के नेताओं ने दो टूक कहा कि यह उपवास सिर्फ एक चेतावनी है, यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आगे चलकर रेल चक्का जाम करने से भी परहेज नहीं किया जाएगा।

इन प्रमुख मांगों पर अड़ा मंच:

बैठक के दौरान वक्ताओं ने रेलवे से जुड़ी कई ज्वलंत समस्याओं को प्रमुखता से उठाया, जो लंबे समय से फाइलों में दबी हुई हैं:

  1. ओवरब्रिज निर्माण: अटेरन चौक स्थित रेल गुमटी पर भीषण जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए तत्काल ओवरब्रिज निर्माण की मांग की गई।
  2. रेल कारखाने का विस्तार: समस्तीपुर रेल कारखाना का विस्तार कर यहाँ पूर्ण रूप से पीओपी डब्बा निर्माण शुरू करने पर जोर दिया गया, जिससे स्थानीय रोजगार बढ़ सके।
  3. नई रेल लाइन: कर्पूरीग्राम-ताजपुर-पातेपुर-महुआ-भगवानपुर तथा दलसिंहसराय से पटोरी एवं केबल स्थान से कर्पूरीग्राम तक नई रेल लाइन बिछाने की मांग को क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए अनिवार्य बताया गया।
  4. जीर्णोद्धार और चौड़ीकरण: टुनटुनिया रेल ओवरब्रिज के जीर्णोद्धार और माधुरी चौक स्थित ओवरब्रिज के चौड़ीकरण की तत्काल आवश्यकता जताई गई।

सिर्फ रेलवे ही नहीं, बंद पड़े उद्योगों के लिए भी उग्र आंदोलन

रेलवे के अलावा, बैठक में जिले के सर्वांगीण विकास पर भी चर्चा हुई। ‘जिला विकास संघर्ष मोर्चा’ के बैनर तले निर्णय लिया गया कि जिले में बंद पड़े उद्योगों और सुविधाओं के लिए 15 जून को जिलाधिकारी (DM) के समक्ष शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें दूधपूरा हवाई अड्डा को चालू करने और जिले की जीवनरेखा मानी जाने वाली बंद चीनी मिल व पेपर मिल को पुनः शुरू करने की मांग शामिल है।

नेताओं ने भरी हुंकार:

बैठक में मौजूद भाकपा माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह और राजद नेता राकेश ठाकुर ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा, “समस्तीपुर के साथ अब सौतेला व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनता का धैर्य अब जवाब दे रहा है।” मौके पर राजद नेता शाहीद हुसैन, रामविनोद पासवान, सनोज कुमार राय, कांग्रेस के विश्वनाथ सिंह हजारी, डोमन राय, भाकपा माले के दीनबंधु प्रसाद और अशोक राय सहित दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद थे।

दिवंगत नेता रंभू जी को दी गई श्रद्धांजलि

कार्यक्रम के समापन पर मंच के सक्रिय सदस्य और जितवारपुर-विशनपुर के निवासी राजद नेता रंजीत कुमार रंभू के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया गया। उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया।

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बंदरा में भाजपाइयों का महा-जश्न: विरोधियों के गढ़ में लहराया ‘केसरिया’, जीत की मिठास से गूंजा बैंगरा!

बंदरा (मुजफ्फरपुर)। भारतीय जनता पार्टी द्वारा तीन राज्यों के चुनाव परिणामों में मिली शानदार सफलता ने मुजफ्फरपुर के बंदरा में सियासी पारा बढ़ा दिया है। पश्चिम बंगाल, असम और पांडुचेरी में भाजपा को मिले ‘प्रचंड बहुमत’ के बाद कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।

ऐतिहासिक जीत का जश्न: बंदरा मण्डल पूर्वी की कार्यसमिति बैठक के दौरान प्रचंड बहुमत की खुशी में एक-दूसरे को मिठाई खिलाते भाजपा अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह व अन्य कार्यकर्ता।

सोमवार को बंदरा मण्डल पूर्वी की एक महत्वपूर्ण कार्यसमिति की बैठक मण्डल अध्यक्ष  अशोक कुमार सिंह के बैंगरा स्थित आवास पर आयोजित की गई। बैठक की शुरुआत तो सांगठनिक चर्चा से हुई, लेकिन जैसे ही चुनावी नतीजों की गूंज हुई, पूरा परिसर ‘भारत माता की जय’ और ‘जय श्री राम’ के नारों से गूंज उठा।

मिठाई खिलाकर मनाया जीत का उत्सव संगठन की मजबूती और जनता के अटूट विश्वास का जश्न मनाते हुए मण्डल अध्यक्ष और उपस्थित पदाधिकारियों ने एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया। कार्यकर्ताओं ने साफ संदेश दिया कि यह जीत केवल पार्टी की नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम की जीत है।

आगामी मिशन पर मंथन सिर्फ जश्न ही नहीं, बल्कि बैठक में भविष्य की बिसात भी बिछाई गई। मण्डल अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह ने कार्यकर्ताओं को आगामी जनसंपर्क अभियान और संगठन की नई रणनीतियों को लेकर गुरुमंत्र दिए। बैठक में मण्डल महामंत्री श्याम किशोर और विपराज दास ने संगठन विस्तार पर जोर दिया।

इस गौरवशाली अवसर पर उपाध्यक्ष विनय कुमार सिंह, रणवीर ठाकुर, जितेंद्र ठाकुर, मृत्युंजय कुमार, राम आमिर ठाकुर, लखिंद्र ठाकुर, संतोष कुमार, जितेंद्र मिश्र सहित दर्जनों ऊर्जावान कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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ताजपुर की सड़कों पर उतरे क्रांतिकारी, ‘डब्बा कलेक्शन’ से जुटा रहे जन-समर्थन!

दरभंगा राज्य सम्मेलन को ऐतिहासिक बनाने के लिए मोतीपुर मंडी में गूंजे इंकलाबी नारे, कार्यकर्ताओं ने झोंकी ताकत।

ताजपुर (समस्तीपुर): भाकपा माले के आगामी 12वें बिहार राज्य सम्मेलन की गूंज अब समस्तीपुर की सड़कों पर सुनाई देने लगी है। रविवार को ताजपुर के मोतीपुर सब्जी मंडी में भाकपा माले और उसके विभिन्न जनसंगठनों ने एक बड़ा जनसंपर्क अभियान चलाया। सम्मेलन को सफल बनाने के संकल्प के साथ कार्यकर्ताओं ने डब्बा कलेक्शन कर जनता से आर्थिक और नैतिक समर्थन की अपील की।

हाथों में झंडे और मन में क्रांति का जज्बा अभियान के दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता हाथों में लाल झंडे और सम्मेलन से जुड़े बैनर लेकर सड़कों पर उतरे। कार्यकर्ताओं ने मंडी के हर कोने में जाकर आम जनता, मजदूरों, किसानों और नौजवानों से मुलाकात की। नेताओं ने आह्वान किया कि सम्मेलन को तन-मन-धन से सफल बनाना हर संघर्षशील नागरिक की जिम्मेदारी है।

16 मई से दरभंगा में होगा महामंथन गौरतलब है कि भाकपा माले का यह ऐतिहासिक 12वां बिहार राज्य सम्मेलन 16 से 18 मई 2026 तक दरभंगा के लहेरियासराय प्रेक्षागृह में आयोजित होना तय हुआ है। इस सम्मेलन में संगठन की भविष्य की रणनीति तैयार की जाएगी और जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दों पर व्यापक चर्चा कर आंदोलन की रूपरेखा तय होगी।

नेताओं ने भरी हुंकार इस कार्यक्रम का नेतृत्व प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने किया। उन्होंने संबोधित करते हुए कहा कि यह सम्मेलन शोषितों और वंचितों की आवाज को और बुलंद करेगा। मौके पर प्रखंड कमिटी सदस्य ब्रहमदेव प्रसाद सिंह, शंकर महतो, राजदेव प्रसाद सिंह, संजीव राय, मुकेश कुमार गुप्ता, आसिफ होदा, मो० एजाज, जीतेंद्र सहनी, और मोतीलाल सिंह समेत कई दिग्गज कार्यकर्ता मौजूद थे, जिन्होंने सम्मेलन को ऐतिहासिक बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।

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पुलिस की गुंडागर्दी के खिलाफ भाकपा माले का आक्रोश, ‘हत्‍यारे’ को फांसी देने की उठी मांग!

ताजपुर/समस्तीपुर | 02 मई 2026 : राजधानी दिल्ली के द्वारका इलाके में एक बिहारी डेलीवरी बॉय की दिल्ली पुलिस के जवान द्वारा गोली मारकर हत्या किए जाने की घटना ने बिहार में उबाल पैदा कर दिया है। इस जघन्य हत्याकांड के विरोध में शनिवार को ताजपुर में ‘खेग्रामस’ और ‘भाकपा माले’ के कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार व दिल्ली पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

पूछताछ के बहाने सीने में दाग दी गोली मामले की जानकारी देते हुए वक्ताओं ने बताया कि खगड़िया जिले का निवासी पांडव कुमार दिल्ली में डेलीवरी बॉय का काम कर अपनी आजीविका चला रहा था। आरोप है कि हेड कांस्टेबल नीरज बल्हारा ने पूछताछ के दौरान पांडव के साथ गाली-गलौज की। जब पांडव ने इस दुर्व्यवहार का विरोध किया, तो सत्ता के नशे में चूर कांस्टेबल ने आव देखा न ताव और पांडव के सीने में सटाकर गोली मार दी। इस बर्बरता के कारण निर्दोष युवक की मौके पर ही मौत हो गई।

जनता मैदान से गुदरी चौक तक गूंजा इंसाफका नारा प्रतिरोध मार्च की शुरुआत जनता मैदान से हुई, जो शहर के विभिन्न मुख्य मार्गों से होता हुआ गुदरी चौक पहुँचा। यहाँ आयोजित सभा की अध्यक्षता भाकपा माले प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने की। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था का दिवालियापन है। निर्दोषों का खून बहाने वाली खाकी को समाज कभी माफ नहीं करेगा।”

मुआवजे और फांसी की मांग जिला कमिटी सदस्य आसिफ होदा और खेग्रामस अध्यक्ष प्रभात रंजन गुप्ता ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि दिल्ली में बिहार के लोगों के साथ हो रहा भेदभाव अब बर्दाश्त से बाहर है। माले कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि हत्यारे पुलिसकर्मी नीरज बल्हारा पर तत्काल सख्त कार्रवाई कर उसे फांसी दी जाए और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।

इस विरोध मार्च में ब्रहमदेव प्रसाद सिंह, मो० एजाज, मो० क्यूम, जीतेंद्र सहनी, शंकर महतो, ब्रजकिशोर महतो, मो० रहमान, सूरज कुमार, बिरजू कुमार समेत सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और कार्यकर्ता शामिल हुए।

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मुजफ्फरपुर में गैस एजेंसी की मनमानी: चूल्हा बुझा, परिवार भूखा, DM से गुहार!

गैस सिलेंडर की होम डिलीवरी में बड़ी धांधली की आशंका; चालान कटने के बावजूद उपभोक्ता को दौड़ा रही रोहन गैस एजेंसी

मुजफ्फरपुर। जिला अंतर्गत एलपीजी उपभोक्ताओं के साथ हो रही मनमानी का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। रोहन गैस एजेंसी के एक उपभोक्ता को सिलेंडर के लिए इस कदर परेशान किया जा रहा है कि उनके घर में खाना पकाने का संकट खड़ा हो गया है। जनवादी संघर्ष मोर्चा के तिरहुत प्रमंडल प्रभारी मोहम्मद इश्तियाक ने इस संबंध में जिलाधिकारी (DM) मुजफ्फरपुर को पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।

डिजिटल साक्ष्य: उपभोक्ता मोहम्मद इश्तियाक द्वारा DM मुजफ्फरपुर को व्हाट्सएप और ईमेल के जरिए भेजी गई शिकायत का स्क्रीनशॉट। जिसमें उपभोक्ता ने गैस एजेंसी की मनमानी और परिवार के सामने उत्पन्न हुए भोजन संकट का जिक्र किया है।

क्या है पूरा मामला? पीड़ित मोहम्मद इश्तियाक (उपभोक्ता संख्या 604577) के अनुसार, उनका एलपीजी सिलेंडर पूरी तरह खाली हो चुका है। गैस बुकिंग संख्या 504768 के आधार पर 27 अप्रैल 2026 को ही सुबह 06:44 बजे डिलीवरी चालान जेनरेट हो चुका था। नियमतः चालान कटने के तुरंत बाद आपूर्ति होनी चाहिए थी, लेकिन एजेंसी संचालकों द्वारा कथित रूप से उपभोक्ता का उत्पीड़न किया जा रहा है। एजेंसी अब 8 अप्रैल के बाद डिलीवरी देने की बात कह रही है, जो कि तर्क से परे है。

धांधली की आशंका उपभोक्ता ने जिलाधिकारी को बताया कि हिंदुस्तान पेट्रोलियम के आरा रिफिलिंग प्लांट से एलपीजी की आपूर्ति नियमित और सुचारू रूप से हो रही है। ऐसे में चालान कटने के बावजूद सिलेंडर न देना एजेंसी द्वारा की जा रही किसी बड़ी अनियमितता या हेराफेरी की ओर इशारा करता है। पीड़ित परिवार वर्तमान में भोजन पकाने के भीषण संकट से जूझ रहा है।

एजेंसी ने साधी चुप्पी, नहीं दिया कोई जवाब इस गंभीर मामले में न्यूज भारत टीवी के पत्रकार कुमार पंकज ने रोहन गैस एजेंसी का पक्ष जानने का प्रयास किया। एजेंसी के कार्यालय नंबर पर कॉल करने पर करीब आधे घंटे तक लाइन व्यस्त रही। बाद में कॉल लगने पर भी एजेंसी की ओर से फोन नहीं उठाया गया। इसके उपरांत, व्हाट्सएप पर लिखित संदेश भेजकर गैस की उपलब्धता में देरी का कारण और एजेंसी का पक्ष स्पष्ट करने का अनुरोध किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक एजेंसी की ओर से कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है।

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मुजफ्फरपुर पुलिस का साइबर अपराधियों पर बड़ा प्रहार: डिजिटल अरेस्ट कर 17 लाख की ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़

मुजफ्फरपुर पुलिस ने साइबर अपराधों पर कड़ा नियंत्रण पाने की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने फर्जी अधिकारी बनकर “डिजिटल अरेस्ट” के जरिए लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक शातिर अंतर्राज्यीय गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है।

क्या है पूरा मामला?

मुजफ्फरपुर के रहने वाले वादी भोला प्रसाद महतो को करीब तीन हफ्ते पहले अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय व्हाट्सएप नंबरों से कॉल आए थे। कॉल करने वालों ने खुद को सीबीआई (CBI) और पुलिस अधिकारी बताया। अपराधियों ने पीड़ित को डरा-धमकाकर “डिजिटल अरेस्ट” किया और झांसे में लेकर उनसे 17 लाख रुपये की मोटी रकम ठग ली।

मुजफ्फरपुर नगर पुलिस अधीक्षक मो0 मोहिबुल्लाह अंसारी और साइबर डीएसपी हिमांशु प्रेस वार्ता के दौरान गिरफ्तार साइबर ठगों और बरामद सामान की जानकारी देते हुए।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसका नेतृत्व साइबर डीएसपी हिमांशु कर रहे थे। पुलिस ने तकनीकी जांच और विभिन्न बैंकों के घोस्ट‘ (Ghost) और मयूल‘ (Mule) अकाउंट्स का बारीकी से विश्लेषण किया। इस जांच के आधार पर पुलिस ने गिरोह के तीन मुख्य सदस्यों को धर दबोचा।

गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान :पुलिस ने इस मामले में अब तक तीन आरोपियों ब्रजेश कुमार,कृष्ण कुमार (निवासी: गरौल, जिला वैशाली),एवं विक्रम कुमार (निवासी: मुजफ्फरपुर) को गिरफ्तार किया है:

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इन आरोपियों के बैंक खातों पर देश के विभिन्न राज्यों में पहले से ही साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज हैं। गिरोह का एक अन्य सदस्य फिलहाल फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।

बरामद सामान

गिरफ्तार अभियुक्तों के पास से पुलिस ने ठगी में इस्तेमाल होने वाले कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और उपकरण बरामद किए हैं:

  • 3 मोबाइल फोन (जिनका उपयोग अंतरराष्ट्रीय नंबर निकालकर व्हाट्सएप कॉल करने के लिए किया जाता था)।
  • 13 चेकबुक और पासबुक (विभिन्न बैंकों की)।
  • 3 डेबिट कार्ड
  • बैंकों से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण कागजात।

मुजफ्फरपुर पुलिस की निरंतर कार्रवाई

नगर पुलिस अधीक्षक मो0 मोहिबुल्लाह अंसारी ने बताया कि पुलिस साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है। इससे महज तीन-चार दिन पहले भी 67 लाख रुपये की डिजिटल अरेस्ट ठगी के मामले में दो लोगों को जेल भेजा जा चुका है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात वीडियो कॉल या “डिजिटल अरेस्ट” की धमकी से न डरें और तुरंत पुलिस को सूचित करें।

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कब्र से कागज निकाल कर जमीन पर कब्जा! कटिहार पुलिस ने किया रजिस्ट्री ऑफिस में सेंधमारी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश; 3 मास्टरमाइंड गिरफ्तार

पटना से कटिहार तक फैला था नेटवर्क, पुराने दस्तावेजों में हेराफेरी कर बनाते थे फर्जी म्यूटेशन

कटिहार: कटिहार पुलिस ने जमीन के फर्जीवाड़े और सरकारी दस्तावेजों की चोरी करने वाले एक ऐसे शातिर गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसके तार पटना और भागलपुर तक जुड़े हुए हैं। पुलिस ने इस मामले में गिरोह के तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पटना से मिली थी खुफिया जानकारी सदर-1 के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) अभिजीत कुमार सिंह ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि पुलिस अधीक्षक को सूचना मिली थी कि कटिहार के कुछ अपराधी पटना रजिस्ट्री ऑफिस में सेंधमारी और कागजात चोरी करने की फिराक में हैं। इस सूचना को साझा करते हुए पटना पुलिस की मदद से चार लोगों को वहां रंगे हाथों पकड़ा गया। उनकी निशानदेही पर कटिहार पुलिस ने डंडखोरा और मुफस्सिल सिरसा इलाके में छापेमारी की।

गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान:

  1. मसयूर रहमान उर्फ मुन्ना खान (निवासी: डंडखोरा)
  2. सुरेश कुमार सिंह (निवासी: मुफस्सिल सिरसा)
  3. प्रद्युमन कुमार (निवासी: मुफस्सिल सिरसा)
प्रेस वार्ता के दौरान “कटिहार में रजिस्ट्री कार्यालय से कागजात चोरी और फर्जीवाड़े के बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते एसडीपीओ अभिजीत कुमार सिंह।”

क्या था मोडस ऑपरेंडी‘? SDPO अभिजीत कुमार सिंह ने बताया कि यह गिरोह निबंधन कार्यालयों (रजिस्ट्री ऑफिस) से पुराने दस्तावेज चोरी करता था। चोरी किए गए दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर नई एंट्री की जाती थी और पुराने रजिस्ट्री पेपर को नया स्वरूप देकर तैयार किया जाता था। इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सीओ (CO) कार्यालय से मिलीभगत या झांसा देकर म्यूटेशन कराया जाता था और फिर उस जमीन पर अवैध दावेदारी पेश कर कब्जा कर लिया जाता था।

पुराने कांडों में भी स्वीकारी संलिप्तता पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि कटिहार सहायक थाना क्षेत्र में 19 अक्टूबर 2024 को निबंधन कार्यालय में हुई चोरी (कांड संख्या 766/24) में भी इन्हीं का हाथ था। इसके अलावा, भागलपुर के जोकसर थाना अंतर्गत दर्ज एक मामले (कांड संख्या 170/24) में भी सुरेश कुमार सिंह और प्रद्युमन कुमार वांछित थे।

पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा में संदिग्ध रजिस्ट्री पेपर और म्यूटेशन से जुड़े फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं। फिलहाल पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों और उनसे जुड़े सफेदपोशों की तलाश में जुटी है।

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मजदूरों की हुंकार से कांपा समस्तीपुर: ‘इंकलाब’ के नारों के साथ भाकपा-माले ने फूंका संघर्ष का बिगुल, श्रम कोड के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान!

ताजपुर/समस्तीपुर (रिपोर्टर)। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर आज ताजपुर की धरती लाल झंडों से पट गई और फिजां में ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारों की गूंज सुनाई दी। भाकपा-माले, खेग्रामस और मनरेगा मजदूर सभा के बैनर तले आयोजित विशाल संकल्प सभा में हजारों मजदूरों ने अपनी ताकत का अहसास कराते हुए सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है।

“संघर्ष की नई इबारत: ताजपुर में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर झंडोत्तोलन के बाद एकजुटता प्रदर्शित करते भाकपा-माले के नेता और संघर्षरत मजदूर।”

शहीदों को नमन और झंडोत्तोलन शुक्रवार को ताजपुर स्थित जनता मैदान में सुबह से ही मजदूरों का रेला उमड़ने लगा। कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत वरिष्ठ नेता राजकिशोर महतो द्वारा झंडोत्तोलन के साथ की गई। झंडा फहराने के बाद उपस्थित जनसमूह ने शहीदवेदी पर माल्यार्पण कर उन वीर मजदूरों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने श्रमिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

श्रम कोड और निजीकरण पर तीखा हमला संकल्प सभा को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए भाकपा माले जिला कमिटी सदस्य आसिफ होदा ने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “आज सरकार कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुँचाने के लिए चार नए श्रम कोड लाकर मजदूरों को गुलामी की ओर धकेल रही है। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। हमारी मांग है कि निजीकरण और ठेकेदारी प्रथा पर तुरंत रोक लगे, महंगाई-बेरोजगारी को नियंत्रित किया जाए और हर मजदूर को जीने लायक सम्मानजनक वेतन व सामाजिक सुरक्षा की गारंटी दी जाए।”

एकजुटता ही सबसे बड़ा हथियार सभा की अध्यक्षता कर रहे भाकपा माले प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि मजदूरों का इतिहास संघर्षों का रहा है। आज जो भी अधिकार हमें प्राप्त हैं, वे लंबी लड़ाई के बाद मिले हैं। उन्होंने श्रमिकों से आह्वान किया कि अधिकारों को बचाने के लिए अब गांवों से लेकर शहरों तक आंदोलन को और तेज करना होगा। संचालन करते हुए खेग्रामस के प्रखंड अध्यक्ष प्रभात रंजन गुप्ता ने कहा कि जब तक शोषण मुक्त समाज का निर्माण नहीं हो जाता, हमारा संघर्ष जारी रहेगा।

सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने लिया संकल्प इस मौके पर ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, जीतेंद्र सहनी, मो. एजाज, मो. क्यूम, मो. रहमान, शंकर महतो समेत बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं और श्रमिकों ने हाथ उठाकर संकल्प लिया कि वे मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद रखेंगे।


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