Friday, October 30, 2026

समुद्र में भारत की सबसे बड़ी दहाड़! विशाखापत्तनम में गूंजा आत्मनिर्भरता का डंका, देश के पहले स्वदेशी फ्लीट सपोर्ट शिप ‘सूर्य’ का भव्य जलावतरण!

विशाखापत्तनम (पी आई बी):भारतीय रक्षा क्षेत्र में आज एक ऐतिहासिक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 6 अक्टूबर, 2026 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल) में भारत के पहले स्वदेशी फ्लीट सपोर्ट शिप (एफएसएस-1) ‘सूर्य’ का जल में भव्य रूप से जलावतरण किया। इस ऐतिहासिक पल ने देश की समुद्री ताकत और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के संकल्प को पूरी दुनिया के सामने मजबूती से पेश किया है।

विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल) में आयोजित भव्य समारोह के दौरान देश के पहले स्वदेशी फ्लीट सपोर्ट शिप ‘सूर्य’ के जलावतरण और अन्य विकास कार्यों के लोकार्पण अवसर पर मंच पर मौजूद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णस्वामीनाथन और अन्य गणमान्य अतिथि।

इस मेगा इवेंट के दौरान केवल पहले पोत का ही शुभारंभ नहीं हुआ, बल्कि पांचवें फ्लीट सपोर्ट शिप (एफएसएस-5) की नींव भी रखी गई और उन्नत स्लिपवे-4 तथा 300 टन क्षमता वाली गोलियाथ क्रेन का उद्घाटन भी किया गया। इन तीनों बड़ी उपलब्धियों ने मिलकर यह साबित कर दिया है कि अब भारत बड़े और अत्यधिक महत्वपूर्ण जहाजों के निर्माण में किसी भी देश से पीछे नहीं है।

तीनों उपलब्धियां देश के दृढ़ संकल्प का प्रतीक: राजनाथ सिंह

समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इन तीनों मील के पत्थरों का महत्व व्यक्तिगत उपलब्धियों से कहीं अधिक है। उन्होंने गरजते हुए कहा, “एफएसएस-1 का जलावतरण हमारी सफलता का प्रतीक है, एफएसएस-5 की नींव रखा जाना हमारे अटूट दृढ़ संकल्प का प्रतीक है और नया स्लिपवे हमारी लगातार बढ़ती हुई क्षमता का जीवंत प्रमाण है।” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि स्वतंत्र भारत में निर्मित पहले जहाज ‘जल उषा’ का 1948 में विशाखापत्तनम में ही जलावतरण हुआ था, जो हमारी प्राचीन और दीर्घकालिक समुद्री विरासत की गवाही देता है।

हिंद महासागर में बढ़ेगी नौसेना की ताकत और पहुंच

फस्र्ट फ्लीट सपोर्ट शिप (एफएसएस-1) ‘सूर्य’ और अन्य ऐसे पोतों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि ये पोत हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की पहुंच, क्षमता और परिचालन क्षमता (ऑपरेशनल कैपेबिलिटी) को कई गुना बढ़ा देंगे। सुदूर समुद्री क्षेत्रों में लंबे समय तक ऑपरेशन चलाने वाली नौसेना को केवल युद्धपोतों की ही नहीं, बल्कि रसद, रखरखाव, निरंतर समर्थन और ईंधन आपूर्ति की भारी आवश्यकता होती है। फ्लीट सपोर्ट शिप समुद्री आपूर्ति और नौसैनिक अभियानों को निर्बाध समर्थन देकर नौसेना की इस जरूरत को पूरी तरह पूरा करते हैं।

पारंपरिक सम्मान समारोह संपन्न होने के बाद, नेवी वाइव्स वेलनेस एसोसिएशन (एनडब्ल्यूडब्ल्यूए) की अध्यक्ष लैला स्वामिनाथन द्वारा रस्म निभाए जाने के बाद, ‘सूर्य’ पोत ने उपस्थित लोगों की भारी हर्षध्वनि के बीच बंगाल की खाड़ी में अपनी पहली जल यात्रा शुरू की। इस स्वदेशी पोत में उन्नत कार्गो एवं तरल पदार्थ परिवहन क्षमताएं, अत्याधुनिक रखरखाव कार्यशालाएं, बहु-भूमिका हेलीकॉप्टर संचालन के लिए समर्पित डेक और अत्याधुनिक आत्मरक्षा प्रणालियां शामिल हैं।

अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा और मेक इन इंडिया का कमाल

बड़े जहाजों के निर्माण कार्यक्रमों को और गति देने के लिए एचएसएल में स्लिपवे-4 का विस्तार किया गया है, जिससे अब यहां 45,000 डीडब्ल्यूटी (डेडवेट टन) तक के विशाल जहाजों का निर्माण और जलावतरण किया जा सकेगा। इसके अलावा, स्लिपवे 3 और 4 को जोड़ने वाली 300 टन की विशाल गोलियाथ क्रेन को ‘मेक इन इंडिया’ के तहत मेसर्स एल एंड टी जियोस्ट्रक्चर और कोनेक्रेन्स द्वारा डिजाइन और निर्मित किया गया है। यह क्रेन आधुनिक ब्लॉक निर्माण के लिए भारी-भरकम ब्लॉकों को बेहद तेजी और सटीकता से संभालने में पूरी तरह सक्षम है।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा और आंध्र प्रदेश की बड़ी भूमिका

रक्षा मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब भारत का लक्ष्य केवल ‘आत्मनिर्भरता’ तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हमारा अगला बड़ा कदम ‘वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता’ होना चाहिए। भारतीय शिपयार्डों को गुणवत्ता, लागत, प्रौद्योगिकी, समय पर वितरण और विश्वसनीयता के मामले में दुनिया के अग्रणी शिपयार्डों को टक्कर देनी होगी।

उन्होंने विशाखापत्तनम को एक प्रमुख समुद्री औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा कि इसमें पूर्वी नौसेना कमान, नौसेना डॉकयार्ड, एचएसएल और विशाखापत्तनम बंदरगाह की उपस्थिति एक मजबूत एकीकृत समुद्री तंत्र की नींव रखती है।

समारोह में इन दिग्गजों की रही गरिमामयी उपस्थिति

इस भव्य और ऐतिहासिक कार्यक्रम के दौरान देश के कई शीर्ष सैन्य और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। इनमें नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णस्वामीनाथन, आंध्र प्रदेश के सड़क, भवन, अवसंरचना एवं विकास मंत्री जनार्दन रेड्डी, विशाखापत्तनम के सांसद भारत मथुकुमिल्ली, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय भल्ला, पूर्वी तट के तटरक्षक कमांडर अपर महानिदेशक डोनी माइकल, और एचएसएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक रियर एडमिरल सी रघुराम (सेवानिवृत्त) सहित भारतीय नौसेना और रक्षा मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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एम.डी.डी.एम. कॉलेज में राष्ट्रीय वन्य जीव सप्ताह पर पोस्टर प्रजेंटेशन का आयोजन, वनों के संरक्षण पर दिया गया जोर

मुजफ्फरपुर। महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय के स्नातकोत्तर जंतु विज्ञान विभाग में ‘नेशनल वाइल्ड लाइफ वीक’ (2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर 2026) के तहत मंगलवार को पोस्टर प्रजेंटेशन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए प्राचार्य डॉ. अलका जायसवाल ने कहा कि राष्ट्रीय वन्य जीव सप्ताह वन को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। वन है तो हम हैं।

एम.डी.डी.एम. कॉलेज में राष्ट्रीय वन्य जीव सप्ताह के अवसर पर पोस्टर प्रजेंटेशन प्रस्तुत करती हुईं छात्राएं।

खंडित वनों और आवासों को जोड़ने का उद्देश्य

जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता ने स्वागत भाषण करते हुए कहा कि राष्ट्रीय वन्य जीव सप्ताह का बड़ा महत्व है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य खंडित वनों और आवासों को जोड़ना है, ताकि वन्य जीव सुरक्षित रूप से आ-जा सकें और मानव-वन्य जीव सह-अस्तित्व को बढ़ावा मिल सके। राष्ट्रीय वन्य जीव सप्ताह के तहत 8 अक्टूबर तक विविध कार्यक्रम होंगे और जंतु विज्ञान की छात्राओं की सहभागिता हर प्रतियोगिता में होगी।

छात्राओं ने प्रस्तुत किए आकर्षक पोस्टर

जंतु विज्ञान विभाग की स्नातक और स्नातकोत्तर की छात्राओं ने पोस्टर प्रजेंटेशन किया। विभिन्न विभागों के प्राध्यापकों और प्राध्यापिकाओं ने पोस्टरों को देखा एवं उसकी काफी सराहना की।

पल्लवी कुमारी ने मंच संचालन किया और रचना कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। मौके पर महाविद्यालय की छात्राएं, अन्यान्य विभागाध्यक्ष, शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं शिक्षकेतर कर्मचारीगण मौजूद थे।

कार्यक्रम में उपस्थित , विभागाध्यक्ष, प्राध्यापिकाएं एवं अन्य लोग।

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अब हर साल राजकीय समारोह के रूप में मनेगी कैलाशपति मिश्र की जयंती, मुख्यमंत्री ने आदमकद प्रतिमा पर किया माल्यार्पण!

पटना, 05 अक्टूबर 2026

बिहार की राजनीति और वैचारिक गलियारों से आज एक बेहद बड़ी और ऐतिहासिक घोषणा सामने आई है। महान विचारक, प्रखर राजनेता, गुजरात के पूर्व राज्यपाल तथा बिहार सरकार के पूर्व मंत्री स्वर्गीय कैलाशपति मिश्र की जयंती अब आगामी वर्ष से पूरे राजकीय सम्मान के साथ मनाई जाएगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना के आईसीएआर परिसर में स्वर्गीय कैलाशपति मिश्र की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यह घोषणा की। मुख्यमंत्री के इस ऐलान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है और इसे बिहार के एक महान सपूत के प्रति बहुत बड़ा सम्मान माना जा रहा है।

पटना के आईसीएआर परिसर में स्वर्गीय कैलाशपति मिश्र की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एवं कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य नेतागण।

राष्ट्र निर्माण में समर्पित रहा संपूर्ण जीवन : कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्वर्गीय कैलाशपति मिश्र के कृतित्व और व्यक्तित्व को याद करते हुए कहा कि श्रद्धेय कैलाशपति मिश्र ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र निर्माण, समाज सेवा और संगठन को मजबूत करने के लिए समर्पित कर दिया था। सार्वजनिक जीवन में उनके अमूल्य योगदान, उनके उच्च विचारों और उनकी भूमिका को हमेशा याद रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि आगामी वर्ष से उनकी जयंती को राजकीय समारोह का दर्जा दिया जाएगा, जो इस धरती के महान सपूत के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि और कृतज्ञता का प्रतीक होगा।

दिग्गजों ने दी श्रद्धांजलि, गूंजा भजन-कीर्तन:  इस भव्य और गरिमामयी आयोजन के दौरान राजधानी पटना में राजनीतिक दिग्गजों का तांता लगा रहा। इस अवसर पर भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री भीखूभाई दलसानिया, विधायक संजीव चौरसिया, विधायक संजय कुमार, विधायक मनोज कुमार, विधायक रत्नेश कुमार, विधान पार्षद संजय मयूख, पूर्व विधायक दिलमणी देवी सहित अन्य कई गणमान्य व्यक्तियों ने भी स्वर्गीय कैलाशपति मिश्र की आदमकद प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस पूरे कार्यक्रम के दौरान भक्तिमय माहौल देखने को मिला, जहाँ विशेष रूप से भजन-कीर्तन कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

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वोट चोरी के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग, चुनाव आयुक्त का पुतला फूंककर बर्खास्तगी की मांग!

ताजपुर/समस्तीपुर 5 अक्टूबर 2026

ताजपुर शहर सोमवार को उग्र नारों और भाकपा माले के लाल झंडों से पट गया। विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण के जरिए कथित तौर पर ‘वोट चोरी’ करने की साज़िश के खिलाफ भाकपा माले ताजपुर नगर कमिटी के बैनर तले एक आक्रोशपूर्ण प्रतिरोध मार्च निकाला गया। शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरा यह मार्च जब गांधी चौक पहुंचा, तो जनसभा में तब्दील हो गया, जहाँ सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली गई।

ताजपुर के गांधी चौक पर विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण के जरिए वोट चोरी के विरोध में प्रदर्शन करते माले कार्यकर्ता।

लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला: ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह

गांधी चौक पर आयोजित इस तीखी सभा की अध्यक्षता भाकपा माले प्रखंड कमिटी सदस्य ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि देश के भीतर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमज़ोर करने की सुनियोजित साज़िश रची जा रही है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप

सभा को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए भाकपा माले प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की गहरी साज़िश के तहत चुनाव आयोग की पूरी संरचना में बदलाव किए गए हैं। विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण के माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों में सोची-समझी रणनीति के तहत बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं।

उन्होंने दो टूक कहा कि बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और असम सहित कई राज्यों में सुनियोजित तरीके से मतदाताओं के नाम काटकर लोकतांत्रिक और चुनावी प्रक्रिया को गंभीर रूप से प्रभावित करने का घिनौना प्रयास किया गया है। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की कड़ी आलोचना करते हुए वक्ताओं ने चेतावनी दी कि इस प्रकार की तानाशाहीपूर्ण कार्रवाई सीधे तौर पर लोकतंत्र के ताबूत में आखिरी कील साबित हो रही है। सभा में मांग की गई कि मतदाता सूची से नाम हटाने की इस पूरी धांधली की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और चुनाव आयोग की जवाबदेही तय हो।

चुनाव आयुक्त का पुतला दहन, गूंजे नारे

सभा के समापन पर कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने कथित ‘वोट चोर’ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनका पुतला दहन किया। कार्यकर्ताओं ने कड़े शब्दों में मांग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त तत्काल अपने पद से इस्तीफा दें अथवा सरकार उन्हें तुरंत बर्खास्त करे।

आगामी 8 अक्टूबर को समस्तीपुर में होगा महारैला

सभा के दौरान एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। इसके तहत आगामी 8 अक्टूबर 2026 को ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करने की मांग को लेकर इंडिया गठबंधन के बैनर तले समस्तीपुर जिला मुख्यालय में एक विशाल विरोध मार्च और प्रदर्शन का ऐलान किया गया है। ताजपुर से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता इस प्रदर्शन में शामिल होंगे और इसे ऐतिहासिक बनाएंगे।

इस उग्र प्रदर्शन और सभा के दौरान प्रभात रंजन गुप्ता, संजीव राय, ललन दास, जगदेव सिंह, दिनेश प्रसाद सिंह, मोतीलाल सिंह, संजीव कुमार, मकसुदन सिंह, पुरुषोत्तम कुमार, राजेश कुमार, रंजीत कुमार समेत बड़ी संख्या में भाकपा माले कार्यकर्ता और आम लोग उपस्थित रहे।

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दहशत में मछही गांव: आधी रात को पोखर किनारे पंचायत के दौरान युवक का गला रेता, हालत गंभीर; आरोपी की तलाश में पुलिस की छापेमारी तेज

मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के सकरा थाना क्षेत्र के मछही गांव में बीती रात सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहाँ अपराधियों ने आपसी बातचीत के दौरान एक युवक पर जानलेवा हमला करते हुए उसका गला रेत दिया, जिससे इलाके में कोहराम मच गया है। इस दुस्साहसिक घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है और ग्रामीण सहमे हुए हैं।

सकरा थाना क्षेत्र के मछही गांव स्थित घायल देवन के घर जुटे ग्रामीण  और सहमे हुए लोग, जहाँ बीती रात अपराधियों ने एक युवक का गला रेतकर सनसनी फैला दी थी।

आधी रात को हुई खूनी वारदात घटना के संबंध में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, पूर्वी-02, मुजफ्फरपुर, मनोज कुमार सिंह ने प्रेस मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि कल दिनांक 4/10/26 की रात्रि करीब 11:30 से 12:00 बजे के आसपास सकरा थाना क्षेत्र के मछही गांव स्थित पोखर के पास सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया गया। उस दौरान गांव के ही तीन लड़के—देवन राज (उर्फ गोलू), मुन्ना और सचिन आपस में बैठकर बातचीत कर रहे थे।

इसी दौरान उसी गांव का एक अन्य युवक बमबम, जिसके पिता का नाम अर्जुन महतो है, वहां बाइक पर सवार होकर आया। किसी पुरानी बात या आपसी विवाद को लेकर उसने अचानक देवन राज पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस खूनी संघर्ष में देवन राज की गर्दन पर गंभीर चोट आई और उसका गला रेत दिया गया, जिससे वह लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ा। बीच-बचाव करने के दौरान मुन्ना भी घायल हो गया।

निजी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा युवक घायल अवस्था में देवन राज उर्फ गोलू को तत्काल मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज के लिए लाया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज जारी है। अत्यधिक खून बह जाने और गर्दन पर गंभीर चोट लगने के कारण उसकी हालत बेहद चिंताजनक बनी हुई है। डॉक्टरों द्वारा उसकी जान बचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

आरोपी की गिरफ्तारी के लिए ताबड़तोड़ छापेमारी घटना की सूचना मिलते ही सकरा थाना पुलिस हरकत में आ गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामले की छानबीन शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी बमबम (पिता – अर्जुन महतो) की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही आरोपी को दबोच लिया जाएगा।

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एशियन गेम्स 2026: भारत का ऐतिहासिक तूफान, हॉकी में डबल गोल्ड से लेकर कुल पदकों की आंधी,खिलाड़ियों ने रचा नया इतिहास!

एशियन गेम्स 2026 के महामंच पर भारतीय खिलाड़ियों ने ऐसा गदर मचाया है कि पूरी दुनिया देखती रह गई है। खेल के मैदान से लेकर रिंग और ट्रैक तक, तिरंगे ने बुलंदियों के नए झंडे गाड़ दिए हैं।

नई दिल्ली: एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खेल इतिहास का सबसे स्वर्णिम अध्याय लिखा जा रहा है। देश के जांबाज खिलाड़ियों ने एक के बाद एक रिकॉर्ड तोड़ते हुए पदकों की ऐसी झड़ी लगाई है कि खेल जगत में भारत का डंका बज उठा है। हॉकी के मैदान से लेकर शूटिंग, कुश्ती, एथलेटिक्स और मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (एमएमए) तक, हर जगह भारतीय एथलीटों ने अपने दम पर इतिहास रच दिया है।

भारत की पुरुष हॉकी टीम सौज्‍न्‍य : पीआईबी

हॉकी में डबल गोल्ड, सीधे ओलंपिक का टिकट

भारत की पुरुष और महिला हॉकी टीमों ने महामुकाबले में अपने फौलादी इरादों का प्रदर्शन करते हुए डबल गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। दोनों टीमों ने इस शानदार जीत के साथ सीधे ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया है। मैदान पर खिलाड़ियों का जोश देखने लायक था।

भारत की महिला हॉकी टीम सौज्‍न्‍य : पीआईबी

शूटिंग और आर्चरी में चमके सितारे

निशानेबाजों ने अचूक निशानों से एशियन गेम्स में कई नए रिकॉर्ड कायम किए। कमलजीत और सुरुचि इंदर सिंह ने 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम स्पर्धा में भारत का पहला एशियन गेम्स गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया। इस जोड़ी ने 484.6 के स्कोर के साथ नया एशियाई रिकॉर्ड भी बनाया। इसके अलावा किनान चेनाई और नीरू ने ट्रैप मिक्स्ड टीम स्पर्धा में 34/40 हिट के साथ नया एशियाई रिकॉर्ड बनाते हुए देश को गोल्ड दिलाया।

नीरू ढांडा ने एशियन गेम्स में व्यक्तिगत ट्रैप गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनकर तहलका मचा दिया। उन्होंने 28 हिट के साथ नया एशियाई रिकॉर्ड अपने नाम किया। वहीं, किता भक्त, कीर्ति शर्मा और कुमकुम अनिल मोहोड की तिकड़ी ने महिला रिकर्व टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया। रिकर्व मिक्स्ड टीम स्पर्धा में धीरज बोम्मदेवरा और कुमकुम अनिल मोहोड ने रजत पदक जीता। स्कीट मिक्स्ड टीम स्पर्धा में परिनाज़ धालीवाल और अनंतजीत सिंह नरूका ने कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया।

एथलेटिक्स में तोड़े दशकों पुराने रिकॉर्ड

ट्रैक एंड फील्ड पर भारतीय एथलीटों ने रफ्तार का ऐसा जादू दिखाया कि पुराने सारे रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए। किरण पहल, एम.आर पूवम्मा, प्राची चौधरी और विथ्या रामराज की भारतीय टीम ने 3:29.69 का शानदार समय निकालकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। यह 2026 एशियन गेम्स में एथलेटिक्स में भारत का पहला स्वर्ण पदक है।

लॉन्ग जंप में एंसी सोजन ने 6.88 मीटर की लंबी छलांग के साथ सिल्वर मेडल जीता और नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने साल 2004 में बने अंजू बॉबी जॉर्ज के 6.83 मीटर के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। विथ्या रामराज ने 400 मीटर हर्डल्स में 54.75 सेकंड का समय निकालकर नया भारतीय राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया और 42 वर्षों से चले आ रहे पुराने रिकॉर्ड को चकनाचूर कर दिया। मैराथन में सावन बरवाल ने 2:11:37 के राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ सिल्वर मेडल जीता। एशियन गेम्स के मैराथन इतिहास में 44 वर्षों बाद भारत को यह पहला पदक मिला है। इसके अलावा बारानिका इलंगोवन ने पोल वॉल्ट में कांस्य पदक जीतकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराया।

कुश्ती, बॉक्सिंग और अन्य खेलों में ऐतिहासिक उपलब्धियां

कुश्ती के अखाड़े में अमन सहरावत ने पुरुषों के 57 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में एशियन गेम्स का गोल्ड जीतकर नया इतिहास रच दिया। महिला वर्ग में अंतिम पंघाल ने 53 किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल जीतकर इस स्पर्धा में भारत के लिए पहला एशियन गेम्स रजत पदक हासिल किया। रिंग में लवलीना बोरगोहेन ने 75 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इस वर्ग में भारत का पहला एशियन गेम्स खिताब अपने नाम किया।

वुशु के मैदान पर नाओरेम रोशिबिना देवी ने लगातार तीन एशियन गेम्स में पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनकर एक मिसाल कायम की। स्क्वैश में अनाहत सिंह महिला सिंगल्स के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं और उन्होंने रजत पदक जीता। गोल्फ में प्रणवी शरत उर्स ने भारत के पिछले रजत पदक को ऐतिहासिक स्वर्ण में बदलते हुए महिला इंडिविजुअल स्ट्रोक प्ले स्पर्धा में पहला स्वर्ण पदक अपने नाम किया। अदिति अशोक, प्रणवी शरत उर्स और दीक्षा डागर की महिला टीम ने गोल्फ में कांस्य पदक जीता।

खेल के इन महामुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों के दमदार प्रदर्शन ने साबित कर दिया है कि नया भारत खेल की दुनिया में एक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है। हर जीत के साथ देश का सिर गर्व से ऊंचा हो रहा है।

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बिहार का लाल! सीतामढ़ी के 10वीं के छात्र रुद्रचंद्र मिश्रा ने फ्रांस में लहराया परचम, पौधों की बीमारी बताने वाला चमत्कारी एआई मॉडल किया विकसित; इसरो से भी मिल चुका है बुलावा

सीतामढ़ी: बिहार की प्रतिभा ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी धमक दिखाई है. जिले के नाहर चौक निवासी और सेक्रेड हार्ट स्कूल के 10वीं कक्षा के मेधावी छात्र रुद्रचंद्र मिश्रा (पिता- अधिवक्ता रितेश कुमार) ने एक ऐसा क्रांतिकारी एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) मॉडल तैयार किया है, जो पौधों में बीमारी के बाहरी लक्षण नजर आने से पहले ही उसकी सेहत और उसमें छिपे संक्रमण की सटीक जानकारी दे देता है. इस उल्लेखनीय उपलब्धि से न सिर्फ सीतामढ़ी बल्कि पूरे बिहार और देश का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है. बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इस शानदार सफलता पर छात्र को ढेरों शुभकामनाएं दी हैं और इसे प्रदेश के लिए गौरव का क्षण बताया है.

अपने द्वारा विकसित एआई मॉडल और उपकरणों के साथ मुस्कुराते हुए सीतामढ़ी के मेधावी छात्र रुद्रचंद्र मिश्रा। एवं सीएम सम्राट चौधरी के द्वारा रुद्रचंद्र मिश्रा को एक्‍स पर बधाई ,

कैसे काम करता है यह चमत्कारी एआई मॉडल? (विशेषताएं)

रुद्रचंद्र द्वारा तैयार किए गए इस नवाचार ने कृषि और तकनीक के क्षेत्र में एक नई क्रांति ला दी है:

  1. समय से पहले बीमारी की पहचान: यह एआई मॉडल पौधों में किसी भी बीमारी या फंगस के संक्रमण के लक्षण बाहर से दिखने से पहले ही उसकी आंतरिक स्थिति भांपकर किसानों को सतर्क कर देता है.
  2. पोषक तत्वों और पानी की सटीक निगरानी: इसमें लगे उन्नत सेंसर मिट्टी की नमी, तापमान और पौधे के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखते हैं, जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि पौधे को इस समय किस पोषक तत्व या पानी की आवश्यकता है.
  3. इस्तेमाल किए गए उपकरण: इस मॉडल को बनाने में 8-माइक्रोकंट्रोलर, एयर मॉड्यूल, मिट्टी सेंसर और आधुनिक कैमरा सिस्टम का बेहतरीन संयोजन किया गया है.

प्रेरणा की अनोखी शुरुआत और संघर्ष

रुद्रचंद्र को इस मॉडल को विकसित करने का विचार जिला स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस के दौरान एक सूखे और बीमार पेड़ को देखकर आया था. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में इस पर गहन शोध और काम करना शुरू किया. उन्होंने इंटरनेट के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक्स, कोडिंग और आधुनिक तकनीक की बुनियादी बारीकियां सीखी थीं.

अंतरराष्ट्रीय मंच पर फ्रांस में गाड़े झंडे

गत 16 और 17 सितंबर को फ्रांस के ल्योन शहर में आयोजित प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता ‘इनोरोबो बाई एसआईडीओ 2026′  में रुद्रचंद्र ने अपने इस मॉडल का ऑनलाइन प्रस्तुतिकरण किया था. इस वैश्विक प्रतियोगिता में दुनिया भर के 87 देशों के 1472 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने अपने नवाचार प्रस्तुत किए थे, जिनमें रुद्रचंद्र के एआई मॉडल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 37वां स्थान हासिल किया.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की ओर से जारी आधिकारिक आमंत्रण पत्र, जिसके तहत रुद्रचंद्र को अप्रैल 2026 में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था।

इसरो से भी मिल चुका है बुलावा

यह उपलब्धि पहली बार नहीं मिली है। इससे पहले अप्रैल 2026 में रुद्रचंद्र को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा प्रतिष्ठित युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम (युविका 2026) के तहत बेंगलुरु स्थित यू.आर. राव उपग्रह केंद्र में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था.

लागत और किसानों के लिए वरदान भविष्य की योजना

वर्तमान में इस मॉडल को तैयार करने में लगभग 29 हजार से 45 हजार रुपये तक की लागत आई है। हालांकि, रुद्रचंद्र इसे और अधिक सुलभ बनाने पर काम कर रहे हैं, ताकि इसके छोटे आकार के मॉडल को लगभग 10 से 15 हजार रुपये की कम लागत में किसानों के लिए तैयार किया जा सके। आने वाले दिनों में उनका प्रयास है कि कम बारिश या जलसंकट की स्थिति में यह मॉडल उपलब्ध पानी के आधार पर किसानों को उपयुक्त फसल चुनने में भी मदद करे।

फाइल फोटो – इसरो से आमंत्रण पत्र, मिलने पर अपनी माता और बहन के साथ सफलता की खुशी साझा करते हुए युवा वैज्ञानिक रुद्रचंद्र मिश्रा (बीच में) ।

शिक्षा जगत में खुशी की लहर

शिक्षकों एवं अभिभावकों ने  गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि रुद्रचंद्र ने अपनी जिज्ञासा और लगन को एक उपयोगी वैज्ञानिक प्रयोग में बदला है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली इस सफलता से समाज और परिवार गौरवान्वित है। हमारा उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें व्यावहारिक विज्ञान और नवाचार के नए अवसर प्रदान करना है।

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शराब तस्‍कर को इनाम ! शराब के साथ जेल जा चुके तस्कर को जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने युवा विंग के जिलाध्यक्ष की सौंप दी कमान

सीतामढ़ी: बिहार में पूर्ण शराबबंदी के दावों की एक बार फिर से पोल खुल गई है। एक तरफ राज्य सरकार और सत्ताधारी दल शराबबंदी कानून को अपनी सबसे बड़ी सफलता बताते नहीं थकते, वहीं दूसरी तरफ खुद जनता दल यूनाइटेड ने एक ऐसे व्यक्ति को युवा विंग का जिलाध्यक्ष बना दिया है, जो खुद शराब के मामले में जेल की हवा खा चुका है। यह मामला सीतामढ़ी जिले से सामने आया है, जहां राजनीतिक गलियारों में इस नियुक्ति को लेकर भूचाल आ गया है।

सीतामढ़ी में युवा जनता दल यूनाइटेड के नवनिर्वाचित जिलाध्यक्ष सत्यप्रकाश मंडल और मामले से जुड़ा सोशल मीडिया पोस्टकी तस्‍वीर ।

कार की सीट के अंदर छुपकर आ रही थी शराब की खेप

मामले के मुताबिक, वर्ष 2021 में रून्नीसैदपुर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सत्यप्रकाश मंडल को शराब के साथ गिरफ्तार किया था और जेल भेजा था। उस दौरान वह मारुति सुजुकी कार से कहीं जा रहा था। पुलिस ने जब शक के आधार पर उसकी गाड़ी की तलाशी ली, तो अधिकारियों के होश उड़ गए। कार की सीट के अंदर गुप्त तरीके से अंग्रेजी शराब की बोतलें छुपा कर रखी गई थीं। पुलिस ने वाहन से इंपीरियल ब्लू ब्रांड की दो शराब की बोतलें बरामद की थीं और आरोपी को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया था।

फोन पर सफाई देने से बचते नजर आए नवनियुक्त जिलाध्यक्ष

जब इस पूरे विवाद और पूर्व में हुई गिरफ्तारी के संबंध में मीडिया (न्यूज़ भारत टीवी) की ओर से नवनियुक्त युवा जदयू जिलाध्यक्ष सत्यप्रकाश मंडल से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, तो वे सीधे तौर पर जवाब देने से बचते नजर आए। बातचीत के दौरान जब उनसे 2021 के मामले और राष्ट्रीय जनता दल के ट्वीट के बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने पहले तो अपनी नियुक्ति के लिए पार्टी नेतृत्व का आभार जताया और बधाई दी, लेकिन पुराने आपराधिक मामले से जुड़ा सवाल आते ही वे गोलमोल जवाब देने लगे। उन्होंने यह कहते हुए फोन काट दिया कि वे अभी किसी काम में व्यस्त हैं और इस बारे में बाद में बात करेंगे। बार-बार प्रयास करने के बावजूद उन्होंने इस गंभीर आरोप पर कुछ भी स्पष्ट बोलने से साफ परहेज किया।

कानून की धज्जियां उड़ाने वाले को मिला इनाम

अब इसी सत्यप्रकाश मंडल को जनता दल यूनाइटेड संगठन ने सीतामढ़ी जिले में युवा जनता दल यूनाइटेड का जिलाध्यक्ष मनोनीत कर दिया है। जिस पार्टी के सर्वोच्च नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में शराबबंदी कानून लागू किया था और जिसके कड़े पालन का दावा किया जाता है, उसी पार्टी के भीतर ऐसे शख्स को इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिलना कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

इस नियुक्ति के सामने आने के बाद विपक्ष ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला है। राष्ट्रीय जनता दल ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए इस पर करारा तंज कसा है और तीखे सवाल उठाए हैं। राष्ट्रीय जनता दल ने पोस्ट में लिखा है कि एक तरफ शराब पिएंगे, पिलाएंगे, शराब बेचेंगे और कमाएंगे, तो दूसरी तरफ शराब माफिया को गले लगाकर सर आंखों पर बिठाया जा रहा है। क्या शराबबंदी कानून केवल गरीबों को जेल में बंद करने के लिए ही बचा है?

बहरहाल, शराब तस्करी के आरोप में जेल जा चुके व्यक्ति को खुलेआम राजनीतिक पद से नवाजे जाने के बाद अब यह मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है और आम जनता के बीच भी इस पर तीखी चर्चा शुरू हो गई है।

सीतामढ़ी में युवा जनता दल यूनाइटेड के नवनिर्वाचित जिलाध्यक्ष सत्यप्रकाश मंडल और मामले से जुड़ा सोशल मीडिया पोस्ट।

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देश की पांच प्राचीन भाषाओं के दिन फिरे! शिक्षा मंत्रालय ने पाँच नए उत्कृष्टता केंद्रों पर लगाई मुहर, अब पाँचों भाषाओं के लिए खुले रिसर्च के सबसे बड़े द्वार!

अनुसंधान, संरक्षण और प्रसार के लिए देश के पाँच राज्यों में बनेंगे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, प्राचीन विरासत को मिलेगा नया जीवन!

विशेष संवाददाता

नई दिल्ली: भारत की समृद्ध भाषाई और साहित्यिक विरासत को एक नया जीवन और वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में उच्च शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय ने एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम उठाया है । केंद्र सरकार ने देश की पाँच प्राचीन और गौरवशाली शास्त्रीय भाषाओं—शास्त्रीय असमिया, शास्त्रीय बांग्ला, शास्त्रीय मराठी, शास्त्रीय पाली और शास्त्रीय प्राकृत—के उन्नत अध्ययन, अनुसंधान और संरक्षण के लिए पाँच नए उत्कृष्टता केंद्रों (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) की स्थापना को आधिकारिक मंजूरी दे दी है । इस बड़े फैसले से देश के शैक्षणिक और साहित्यिक जगत में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है, और प्राचीन भाषाओं के शोध के लिए अब संभावनाओं के सबसे बड़े द्वार खुल गए हैं ।

क्या है इस ऐतिहासिक फैसले का उद्देश्य?

शिक्षा मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इन उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना का मुख्य उद्देश्य भारत की अमूल्य भाषाई और साहित्यिक विरासत के अनुसंधान, संरक्षण, डिजिटलीकरण तथा इसके व्यापक प्रसार को पुरजोर तरीके से बढ़ावा देना है । यह पहल इन शास्त्रीय भाषाओं से जुड़े गहन ज्ञान को सहेजने और उसे आधुनिक पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए एक मजबूत संस्थागत सहायता प्रदान करेगी ।

देश के इन पाँच प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों को मिली बड़ी जिम्मेदारी

सरकार ने इन पाँचों उत्कृष्टता केंद्रों को स्थापित करने के लिए देश के चुनिंदा और प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों का चयन किया है, जिनका विवरण इस प्रकार है:

  1. शास्त्रीय असमिया: असम के प्रतिष्ठित तेजपुर विश्वविद्यालय में इस केंद्र की स्थापना की जाएगी, जो पूर्वोत्तर क्षेत्र की साहित्यिक परंपराओं को और मजबूत करेगा ।
  2. शास्त्रीय बांग्ला: पश्चिम बंगाल के ऐतिहासिक विश्वभारती विश्वविद्यालय को इस केंद्र की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे बांग्ला साहित्य और प्राचीन बांग्ला भाषा के शोध को नया आयाम मिलेगा ।
  3. शास्त्रीय मराठी: महाराष्ट्र के पुणे स्थित प्रसिद्ध डेक्कन कॉलेज स्नातकोत्तर एवं अनुसंधान संस्थान (मानद विश्वविद्यालय) में शास्त्रीय मराठी के अध्ययन के लिए उत्कृष्टता केंद्र बनेगा ।
  4. शास्त्रीय पाली: बौद्ध साहित्य और प्राचीन दर्शन से जुड़ी शास्त्रीय पाली भाषा के अध्ययन हेतु ओडिशा के केंद्रीय ओडिशा विश्वविद्यालय का चयन किया गया है ।
  5. शास्त्रीय प्राकृत: जैन आगमों और प्राकृत साहित्य के संरक्षण के लिए गुजरात के केंद्रीय गुजरात विश्वविद्यालय में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित होगा ।

चार प्रमुख स्तंभों पर टिका होगा इन केंद्रों का फोकस

ये सभी उत्कृष्टता केंद्र चार व्यापक और महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर पूरी तरह केंद्रित होकर काम करेंगे:

  • अकादमिक अनुसंधान और छात्रवृत्ति को मजबूती: ये केंद्र संबंधित शास्त्रीय भाषाओं में उन्नत शोध, विद्वतापूर्ण कार्यों और उच्च स्तरीय अकादमिक जुड़ाव के लिए एक समर्पित मंच प्रदान करेंगे ।
  • संरक्षण और डिजिटलीकरण: आज के डिजिटल युग में प्राचीन पाण्डुलिपियों और ग्रंथों को बचाए रखने के लिए ये केंद्र भाषाई और साहित्यिक संसाधनों के प्रलेखन, संरक्षण और अत्याधुनिक डिजिटलीकरण का काम संभालेंगे, जिससे भारत की समृद्ध पाठ्य विरासत सदियों तक सुरक्षित रह सकेगी ।
  • शास्त्रीय भाषा विरासत का व्यापक प्रसार: इन केंद्रों के माध्यम से संबंधित शास्त्रीय भाषाओं से जुड़ी भाषाई, साहित्यिक और प्राचीन ज्ञान परंपराओं को आम जनमानस और शोधार्थियों तक आसान पहुँच के साथ प्रसारित किया जाएगा ।
  • क्षेत्रीय शैक्षणिक इको-सिस्टम का सुदृढ़ीकरण: असम, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, ओडिशा और गुजरात—इन पाँच अलग-अलग राज्यों में इन केंद्रों के फैलने से क्षेत्रीय स्तर पर उच्च शिक्षा, अनुसंधान और छात्रवृत्ति का एक अभूतपूर्व इको-सिस्टम तैयार होगा ।

भविष्य की राह और सांस्कृतिक पुनरुत्थान

शिक्षाविदों और जानकारों का मानना है कि यह कदम केवल भाषाओं के पुनरुद्धार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक जड़ों को और अधिक मजबूत करने का एक दूरदर्शी प्रयास है । उच्च शिक्षा संस्थानों को अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बनाते हुए सरकार का यह कदम देश की प्राचीन थाती को सहेजने में मील का पत्थर साबित होगा ।

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ग्रामीण पुलिस अधीक्षक की ताबड़तोड़ छापेमारी से महकमे में खलबली, लंबित कांडों पर कड़े तेवर!

मुजफ्फरपुर: जिले की कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने और अपराधियों के हौसले पस्त करने के लिए ग्रामीण पुलिस प्रशासन ने अब पूरी तरह से कमर कस ली है। शनिवार को ग्रामीण पुलिस अधीक्षक द्वारा ग्रामीण इलाकों के थानों का औचक और विस्तृत निरीक्षण किया गया, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। इस दौरान थानों की कार्यप्रणाली की एक-एक फाइल खंगाली गई और लापरवाह कर्मियों को कड़ी चेतावनी दी गई।

मुजफ्फरपुर में शनिवार को थानों के निरीक्षण के दौरान अभिलेखों की जांच करते, (बायें से) थाना प्रभारियों को दिशा-निर्देश देते तथा क्षेत्र में गश्ती व्यवस्था का जायजा लेते ग्रामीण पुलिस अधीक्षक।

कथैया थाना में चली घंटों क्लास, अभिलेखों की खुली पोल

शनिवार को ग्रामीण पुलिस अधीक्षक द्वारा कथैया थाना का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान थाना अभिलेखों के अद्यतीकरण की स्थिति बेहद बारीकी से परखी गई। लंबित कांडों के त्वरित निष्पादन, लंबे समय से फरार चल रहे वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी तथा लंबित वारंट और कुर्की-जब्ती के मामलों के निष्पादन को लेकर थाना के पदाधिकारियों को सख्त और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

अधिकारी ने थाने में अवैध शराब की बरामदगी और उसके तत्काल विनष्टीकरण के मामलों की भी समीक्षा की। इसके साथ ही महिला एवं बाल सहायता डेस्क, आगंतुक सहायता डेस्क, क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स  तथा क्लोज सर्किट टेलीविज़न (CCTV) कैमरों की कार्यशीलता की गहन जांच की गई। पुलिस मुख्यालय द्वारा थाना कार्यप्रणाली के संबंध में जारी तमाम निर्देशों का सख्ती से पालन करने का हुक्म सुनाया गया।

कांटी और मोतीपुर में भी गश्ती दल की खुली पोल, सड़कों पर उतरी सख्ती

महज एक थाने तक ही यह अभियान सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण पुलिस अधीक्षक द्वारा कांटी थाना, मोतीपुर थाना और कथैया थाना क्षेत्रों में गश्ती व्यवस्था का भी विस्तृत और कड़ा निरीक्षण किया गया। इस दौरान विभिन्न गश्ती दलों की मैदानी तैनाती, क्षेत्र में उनकी सक्रियता और सतर्कता का मौके पर जाकर जायजा लिया गया।

संवेदनशील और महत्वपूर्ण स्थलों पर नियमित, प्रभावी और चाक-चौबंद गश्ती सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए गए ताकि अपराधियों के दिलों में खाकी का खौफ कायम हो सके।

कड़े तेवर: नहीं बख्शे जाएंगे लापरवाह कर्मी

निरीक्षण के दौरान साफ शब्दों में यह संदेश दिया गया कि अपराध की रोकथाम, संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की सतत निगरानी, किसी भी आपात स्थिति में त्वरित पुलिस प्रतिक्रिया तथा पूरे क्षेत्र में विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस पदाधिकारी और कर्मी पूरी सजगता, ईमानदारी और तत्परता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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