Wednesday, July 29, 2026

सकरा में ग्रामीण चिकित्सकों की गर्जना: ‘कोरोना में हम भगवान थे, अब झोलाछाप बोलने वालों को बर्दाश्त नहीं करेंगे!’

प्रशिक्षण ले लो वरना सरकार की नजर में हो!‘ – ग्रामीण चिकित्सक एसोसिएशन की बैठक में अध्यक्ष का बड़ा अल्टीमेटम!

सकरा (मुजफ्फरपुर): विजन वैली हॉल सकरा में ग्रामीण चिकित्सक एशोसिएशन की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक ग्रामीण चिकित्सक डॉक्टर राजेश कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस बैठक में ग्रामीण डॉक्टरों की समस्याओं, उनके हक की लड़ाई और समाज में उनके सम्मान को लेकर जोरदार चर्चा हुई। बैठक में मौजूद चिकित्सकों ने एक सुर में अपने हक के लिए आवाज बुलंद की और खुद को ‘झोलाछाप’ कहे जाने पर कड़ी आपत्ति जताई।

कोरोना काल में जो भगवान थे, उन्हें झोलाछाप कहना बंद करें लोग

बैठक को संबोधित करते हुए ग्रामीण चिकित्सक डॉक्टर राजेश कुमार बेहद भावुक और आक्रामक नजर आए। उन्होंने तीखे लहजे में कहा कि कुछ बेवकूफ लोग ग्रामीण चिकित्सकों को ‘झोलाछाप’ के नाम से पुकारते हैं। उन्होंने ललकारते हुए कहा, उनसे मैं पूछना चाहता हूं कि कोरोना काल में झोलाछाप बोलकर देख लिए होते, तो आपकी औकात पता चल जाती। कोरोना काल में तो आप भगवान मान रहे थे कि ग्रामीण चिकित्सक ही भगवान हैं। सारे बड़े-बड़े डॉक्टर तो एसी में पैक थे, घरों से निकल नहीं रहे थे, लेकिन यही ग्रामीण चिकित्सक थे जो अपनी जान पर खेलकर लोगों की जान बचा रहे थे।”

हम झोलाछापनहीं, समाज के रात्री दूतहैं

डॉक्टर राजेश कुमार ने कहा कि ग्रामीण चिकित्सक असल में समाज के ‘रात्री दूत’ हैं। रात के 2:00 बजे हो या 4:00 बजे, जब पूरा समाज सोया रहता है, तब कोई डॉक्टर अगर उठकर मरीज के घर जाता है, तो वह केवल ग्रामीण चिकित्सक ही है। अमीर लोगों के लिए तो शहर के बड़े अस्पताल हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब परिवारों का एकमात्र सहारा यही चिकित्सक हैं। वे बिना किसी फीस के, बिना किसी महंगी जांच के, बेहद कम पैसों में और कभी-कभी तो बिना पैसे के भी ‘लिख लो, सवेरे दे देंगे’ की बात मानकर मरीजों का इलाज शुरू कर देते हैं।

प्रशिक्षण नहीं लिया तो सरकार की नजर में आ जाओगे: अध्यक्ष का अल्टीमेटम

बैठक के दौरान अध्यक्ष ने सभी ग्रामीण चिकित्सकों को एक बड़ा और कड़ा अल्टीमेटम भी दिया। उन्होंने कहा कि आज का सबसे पहला और मुख्य मुद्दा प्रशिक्षण का है। जितने भी ग्रामीण चिकित्सक प्रैक्टिस कर रहे हैं, अगर उन्होंने कहीं ना कहीं से प्रशिक्षण यानी ट्रेनिंग ली है, तो यह बहुत अच्छी बात है। लेकिन अगर किसी ने अभी तक प्रशिक्षण नहीं लिया है, तो वे सावधान हो जाएं क्योंकि वे सरकार की नजर में हैं। ऐसे सभी चिकित्सक तुरंत ट्रेनिंग ले लें, यही उनके हक में सबसे ज्यादा अच्छा रहेगा।

हायर सेंटर से लौटे मरीजों का सहारा भी ग्रामीण चिकित्सक ही

बैठक में यह बात भी उठाई गई कि जब मरीज शहर के बड़े अस्पतालों (हायर सेंटर) से वापस घर लौटते हैं, तो वहां के बड़े डॉक्टर सिर्फ दवाइयां, सुई और सलाइन (पानी) लिख देते हैं। लेकिन गांव में जाकर उस मरीज को सुई देने, आईवी लगाने या दवा समझाने के लिए कोई सरकारी कर्मचारी या बड़ा डॉक्टर नहीं आता। अगर ग्रामीण चिकित्सक आज अपनी प्रैक्टिस बंद कर दें, तो शहर के डॉक्टरों की पर्ची धरी की धरी रह जाएगी और मरीजों को पानी कौन चढ़ाएगा? इन्हीं ग्रामीण चिकित्सकों की बदौलत आज ग्रामीण समाज में मरीज पूरी तरह सुरक्षित हैं।

कांवरियों की सेवा के लिए तुर्की में लगेगा निस्वार्थ कैंप

बैठक का दूसरा बड़ा मुद्दा सावन मेला को लेकर था। निर्णय लिया गया कि बाबा गरीबनाथ धाम जाने वाले कांवरियों की सेवा के लिए ग्रामीण चिकित्सकों की एक विशेष टीम का गठन किया जाएगा। ये सभी चिकित्सक तुर्की में एक विशाल कैंप लगाएंगे और कांवरियों की निस्वार्थ और निष्भाव से सेवा करेंगे। इस कैंप में डॉक्टर अपना समय भी देंगे और इलाज का सारा खर्चा भी खुद अपनी जेब से उठाएंगे।

हर महीने की 3 तारीख को होगी मजबूती के लिए बैठक

तीसरे मुद्दे के रूप में संगठन की मजबूती पर विस्तार से चर्चा की गई। डॉक्टर राजेश कुमार ने कहा कि संगठन है तो मजबूती है और हर मजबूती के लिए एक मजबूत संगठन की जरूरत पड़ती है। इसी मजबूती को बनाए रखने के लिए तय किया गया कि आगामी बैठक 3 अगस्त को होगी। टीम के सभी सदस्यों के विचार से यह फैसला लिया गया कि हर महीने की 3 तारीख को ही संगठन की नियमित बैठक रखी जाएगी। हालांकि, यदि किसी सदस्य के साथ कोई आपातकालीन स्थिति या घटना-दुर्घटना होती है, तो आपसी विचार-विमर्श से इस तारीख को आगे-पीछे भी किया जा सकता है।

बैठक में ये मुख्य चिकित्सक रहे उपस्थित

इस गर्जनापूर्ण बैठक में मुख्य रूप से डॉक्टर अखिलेश कुमार, डॉक्टर पप्पू कुमार, डॉक्टर सुनील कुमार, डॉक्टर रंजन कुमार, डॉक्टर चुनमुन कुमार दास, डॉक्टर चुनमुन कुमार और डॉक्टर संजीव कुमार सहित भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीण चिकित्सक मौजूद रहे, जिन्होंने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ अध्यक्ष की बातों का समर्थन किया।

अन्‍य खबरों  के लिए नीचे  ’न्‍यूज भारत टीवी ’के लिंक पर क्लिक करें,

||  https://newsbharattv.in  ||

एरियर भुगतान के नाम पर मांग रहा था रिश्वत, विजिलेंस की टीम ने जाल बिछाकर मिनिस्टर इन्क्लेव मोड़ के पास से दबोचा

पटना, 02 जुलाई 2026: बिहार के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का एक और बड़ा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की मुख्यालय टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए शिक्षा विभाग के वेतन सत्यापन कोषांग में तैनात अवर सचिव अमोद मिश्रा को 20,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। यह धमाकेदार गिरफ्तारी राजधानी पटना के गर्दनीबाग थाना क्षेत्र स्थित मिनिस्टर इन्क्लेव मोड़ के पास से की गई है, जिसके बाद से ही पूरे सचिवालय गलियारे में हड़कंप मचा हुआ है।

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की गिरफ्त में रिश्वतखोर अवर सचिव अमोद मिश्रा। गर्दनीबाग से 20,000 रुपये घूस लेते रंगे हाथों दबोचे जाने के बाद पुलिस अभिरक्षा में आरोपी अधिकारी।

नालंदा के पीड़ित ने की थी शिकायत

निगरानी ब्यूरो से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले की शिकायत नालंदा जिले के बिहार शरीफ थाना क्षेत्र के नई सराय निवासी उमा शंकर उमरेषी (पिता अरुण प्रसाद) द्वारा दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के पटना कार्यालय में आवेदन देकर यह आरोप लगाया था कि उनके बकाया एरियर का भुगतान करने के एवज में अवर सचिव अमोद मिश्रा द्वारा लगातार रिश्वत की मांग की जा रही थी। घूस की रकम न देने पर फाइल को अटका कर रखा गया था।

डीएसपी श्याम बाबू प्रसाद के नेतृत्व में बिछा जाल

शिकायत मिलने के बाद निगरानी ब्यूरो ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गुप्त रूप से इसका सत्यापन कराया। ब्यूरो द्वारा कराए गए सत्यापन के क्रम में आरोपी अधिकारी द्वारा रिश्वत मांगे जाने का पुख्ता प्रमाण पाया गया। प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने के पश्चात तत्काल निगरानी थाना कांड संख्या 079/26 अंकित कर अनुसंधानकर्ता श्याम बाबू प्रसाद (पुलिस उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना) के नेतृत्व में एक विशेष धावा दल का गठन किया गया।

रंगे हाथों दबोचा गया घूसखोर अफसर

योजना के मुताबिक, दिनांक 01.07.2026 को जैसे ही शिकायतकर्ता ने गर्दनीबाग के मिनिस्टर इन्क्लेव मोड़ के पास आरोपी अवर सचिव अमोद मिश्रा को 20,000 (बीस हजार) रुपये की केमिकल युक्त नोटों की गड्डी थमाई, वैसे ही पहले से घात लगाए बैठी निगरानी की धावा दल ने उसे चारों तरफ से घेरकर दबोच लिया। आरोपी के पास से रिश्वत की पूरी रकम बरामद कर ली गई है।

गिरफ्तारी के बाद आरोपी से ब्यूरो मुख्यालय में गहन पूछताछ की गई है, जिसके बाद उसे पटना स्थित माननीय विशेष न्यायालय (निगरानी) में उपस्थित किया जाएगा। ब्यूरो इस मामले में आगे की कानूनी और अनुसंधान की कार्रवाई कर रहा है।

अन्‍य खबरों  के लिए नीचे  ’न्‍यूज भारत टीवी ’के लिंक पर क्लिक करें,

||  https://newsbharattv.in  ||

बिहार के गन्ना किसान बिचौलिए से होंगे मुक्‍त !: अब घर बैठे ऑनलाइन मिलेगी चीनी मिल समिति की सदस्यता,

भ्रष्टाचार के खिलाफ अधिकारियों ने खाई कसम!

पटना : बिहार के लाखों गन्ना किसानों के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब किसानों को प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समिति की सदस्यता लेने के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। बिहार सरकार ने इसके लिए एक बेहद आधुनिक और पारदर्शी ऑनलाइन वेब पोर्टल लॉन्च कर दिया है। इस बड़ी पहल की शुरुआत बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत द्वारा की गई है। इस पोर्टल के सक्रिय होने से गन्ना किसानों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई है।

बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत पटना में लैपटॉप का बटन दबाकर सकरी (मधुबनी) और रैयाम (दरभंगा) के गन्ना किसानों के लिए प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समिति के ऑनलाइन वेब पोर्टल का शुभारंभ करते हुए। इस दौरान विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

सकरी और रैयाम के किसानों को सबसे पहले तोहफा

सरकार की इस डिजिटल क्रांति की शुरुआत मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सकरी (मधुबनी) और रैयाम (दरभंगा) की प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समितियों के लिए ऑनलाइन वेब पोर्टल का शुभारंभ करके की। अब इन क्षेत्रों के साथ-साथ राज्य के तमाम पात्र किसान अपने घर पर बैठकर मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से केवल एक क्लिक में समिति की सदस्यता के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इससे बिचौलियों का खेल पूरी तरह खत्म हो जाएगा और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।

सदस्यता मिलने से होंगे यह बड़े फायदे

समिति का सदस्य बनने वाले गन्ना किसानों को सरकार की ओर से कई बेहतरीन सुविधाएं और लाभ दिए जाएंगे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  1. कृषि आदान की उपलब्धता: उन्नत बीज, खाद और कीटनाशक आसानी से मिलेंगे।
  2. तकनीकी सलाह: आधुनिक खेती के लिए विशेषज्ञों द्वारा उचित मार्गदर्शन दिया जाएगा।
  3. मिट्टी परीक्षण: खेतों की मिट्टी की जांच कराकर सही फसल चक्र की जानकारी मिलेगी।
  4. सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ: सरकार द्वारा गन्ना किसानों के लिए चलाई जा रही सभी सब्सिडी और कल्याणकारी योजनाओं का पैसा सीधे खाते में आएगा।
  5. पारदर्शी गन्ना भुगतान: गन्ना बेचने के बाद किसानों के भुगतान में कोई देरी या गड़बड़ी नहीं होगी, पूरा हिसाब-किताब पारदर्शी तरीके से सीधे बैंक खाते में भेजा जाएगा।
पटना स्थित गन्ना उद्योग विभाग के मुख्यालय में “बिहार सतर्कता जागरूकता दिवस” के अवसर पर ईखायुक्त अनिल कुमार झा के नेतृत्व में भ्रष्टाचार-मुक्त और पारदर्शी प्रशासन की शपथ लेते हुए विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी।

गन्ना उद्योग विभाग में गूंजी भ्रष्टाचार-मुक्ति की गूंज, अधिकारियों ने ली शपथ

इसी कड़ी में एक और बड़ा घटनाक्रम गन्ना उद्योग विभाग के पटना स्थित मुख्यालय में देखने को मिला। “बिहार सतर्कता जागरूकता दिवस” के खास अवसर पर विभाग में एक  कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ईखायुक्त अनिल कुमार झा के नेतृत्व में विभाग के सभी वरिष्ठ अधिकारियों, सहायकों और कर्मियों ने एक सुर में सत्यनिष्ठा, पूर्ण पारदर्शिता तथा भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया।

अनिल कुमार झा ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों की सेवा में किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके बाद उपस्थित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने पूरी ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की सामूहिक शपथ ली। कार्यक्रम में विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

अन्‍य खबरों  के लिए नीचे  ’न्‍यूज भारत टीवी ’के लिंक पर क्लिक करें,

||  https://newsbharattv.in  ||

भ्रष्टाचारियों की अब खैर नहीं! जब्त बंगलों में खुलेंगे स्कूल, हर जिले में खुलेगा निगरानी थाना:सीएम

पटना: बिहार को पूरी तरह से भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है । ‘ट्रिपल टी’ यानी ट्रांसपेरेंसी, टेक्नोलॉजी और ट्रस्ट के मूलमंत्र पर चलते हुए सूबे में सुशासन को एक नई मजबूती दी जाएगी । यह बड़ा ऐलान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ज्ञान भवन में आयोजित बिहार सतर्कता जागरूकता दिवस एवं सतर्कता जागरूकता सप्ताह के भव्य शुभारंभ के दौरान किया । इस दौरान मंत्रियों, अधिकारियों और कर्मियों को पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता से काम करने की सख्त शपथ भी दिलाई गई ।

पटना के ज्ञान भवन में बिहार सतर्कता जागरूकता दिवस के अवसर पर सत्यनिष्ठा और ईमानदारी की शपथ लेते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार,  अन्य वरिष्ठ अधिकारी ।

नेताओं और अफसरों पर सीधा वार, जब्त संपत्तियों पर चलेंगे स्कूल

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि भ्रष्टाचार में लिप्त मंत्रियों, विधायकों से लेकर शीर्ष और निचले स्तर तक के किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सबसे सख्त कार्रवाई की जाएगी । सरकार अब भ्रष्टाचार करने वाले लोगों को चिन्हित कर उनके जब्त किए गए परिसरों और बंगलों को अपने कब्जे में लेगी और वहां बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए सरकारी विद्यालय संचालित करेगी ।

भ्रष्टाचार मुक्त बिहार के संकल्प को दोहराते हुए सतर्कता जागरूकता कार्यक्रम में एक साथ खड़े होकर ईमानदारी और पारदर्शिता की सामूहिक शपथ लेते बिहार पुलिस के आला अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी एवं विभिन्न विभागों के कर्मीगण 。

सभी 9 प्रमंडलों में विशेष कोर्ट और हर जिले में निगरानी थाना

भ्रष्टाचार के मामलों पर त्वरित एक्शन और अपराधियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजने के लिए सूबे के सभी 9 प्रमंडलों में विशेष निगरानी न्यायालय (स्पेशल विजिलेंस कोर्ट) की स्थापना की जाएगी । इसके साथ ही, जीरो टॉलरेंस की नीति को धरातल पर उतारने के लिए बिहार के प्रत्येक जिले में निगरानी थाना और सभी अनुमंडलों में निगरानी ओ.पी. स्थापित करने की मुकम्मल व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है ।

सीबीआई और ईडी को भी लेनी पड़ेगी बिहार पुलिस की मदद

मुख्यमंत्री ने आर्थिक अपराध इकाई और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को निर्देश दिया कि वे अपने साथ विशेषज्ञ व्यक्तियों को जोड़कर ऐसी आधुनिक और स्मार्ट कार्यप्रणाली तैयार करें, जिससे विशेष परिस्थितियों में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी बड़ी केंद्रीय एजेंसियों को भी बिहार की टीमों से सहयोग लेने की आवश्यकता महसूस हो ।

सरकारी गवाहों को मिलेगा परिवहन भत्ता

अक्सर देखा जाता है कि गवाहों के मुकर जाने या समय पर कोर्ट न पहुंचने से भ्रष्टाचारी बच निकलते हैं। इसका तोड़ निकालते हुए सरकार ने फैसला किया है कि अपराध एवं आर्थिक अपराध से जुड़े मामलों में सरकारी गवाहों को गवाही के लिए आने-जाने हेतु सरकार द्वारा परिवहन भत्ता उपलब्ध कराया जाएगा । इसके अलावा, बच्चों में बचपन से ही नैतिक मूल्यों के विकास के लिए अब विद्यालयों में भी भ्रष्टाचार विरोधी जागरूकता अभियान चलाया जाएगा ।

समारोह में इन दिग्गजों की रही मौजूदगी

सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र स्थित ज्ञान भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के नए लोगो का अनावरण किया और विभाग की उपलब्धियों पर बनी लघु फिल्म को भी देखा ।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर मंच पर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी मौजूद रहे, जिन्होंने कार्यक्रम को संबोधित भी किया । इसके अलावा विज्ञान, प्रौद्योगिकी और तकनीकी शिक्षा मंत्री शीला कुमारी, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मो. जमा खान, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री संजय कुमार सिंह, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री लखेन्द्र कुमार रौशन शामिल हुए ।

प्रशासनिक महकमे से मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पुलिस महानिदेशक विनय कुमार, गृह सचिव कुंदन कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह मौजूद थे । कार्यक्रम की रूपरेखा और स्वागत निगरानी विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेंदर तथा निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के महानिदेशक जितेंद्र सिंह गंगवार द्वारा किया गया । वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के तमाम प्रमंडलीय आयुक्त, आईजी, डीआईजी, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक भी इस महा-शपथ कार्यक्रम से सीधे जुड़े रहे ।

अन्‍य खबरों  के लिए नीचे  ’न्‍यूज भारत टीवी ’के लिंक पर क्लिक करें,

||  https://newsbharattv.in  ||

बिहार के सरकारी अस्पतालों में ‘रेफरल राज’ का होगा अंत! 15 अगस्त से बिना ठोस वजह मरीज रेफर किए तो नपेंगे डॉक्टर, मुख्यमंत्री का अल्टीमेटम

स्वास्थ्य व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार की तैयारी: रात्रिकालीन औचक निरीक्षण करेंगे कमिश्नर और डीएम, लापरवाही बरतने वाले स्वास्थ्य केंद्रों पर गिरेगी गाज

पटना, 02 जुलाई 2026: बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी, प्रभावी और जनोन्मुखी बनाने के लिए राज्य सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प सभागार’ में स्वास्थ्य विभाग की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए साफ चेतावनी दी है कि सरकारी अस्पतालों से मरीजों को बिना किसी ठोस कारण के हायर सेंटर या मेडिकल कॉलेज रेफर करने का खेल अब बंद होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने इसके लिए 15 अगस्त 2026 की समय-सीमा तय करते हुए अनुमंडलीय अस्पतालों और जिला अस्पतालों से होने वाले अनावश्यक रेफरल पर पूर्ण रोक लगाने का कड़ा आदेश जारी कर दिया है।

संकल्प सभागार में आयोजित स्वास्थ्य विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने के संबंध में कड़े निर्देश देते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी। साथ में उपस्थित स्वास्थ्य मंत्री निशांत, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी।

इस उच्चस्तरीय बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों की मौजूदा रेफरल व्यवस्था, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और चिकित्सा अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण की भावी कार्य योजना से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट नीति के साथ समयबद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का एकमात्र उद्देश्य बिहार के प्रत्येक नागरिक को समय पर, गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है, और इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रथम चरण में इसे सभी जिला और अनुमंडल अस्पतालों में सख्ती से लागू किया जा रहा है।

कमिश्नर और डीएम करेंगे रात में औचक निरीक्षण

अस्पतालों की जमीनी हकीकत परखने के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रमंडलीय आयुक्त, जिला पदाधिकारी और अन्य वरीय प्रशासनिक पदाधिकारी नियमित रूप से सरकारी अस्पतालों का रात्रिकालीन औचक निरीक्षण करेंगे। इस निरीक्षण से रात के समय ड्यूटी से गायब रहने वाले डॉक्टरों और स्टाफ पर नकेल कसी जा सकेगी। इसके साथ ही जिला अस्पतालों में उपलब्ध सभी आधुनिक उपकरणों का शत-प्रतिशत नियमित उपयोग सुनिश्चित करने और मेडिकल कॉलेजों की सतत निगरानी सीधे संबंधित जिला पदाधिकारियों के माध्यम से कराने का फैसला लिया गया है।

जांच सुविधाओं का विस्तार और ट्रॉमा सेंटरों का सुदृढ़ीकरण

मरीजों की सहूलियत के लिए पैथोलॉजी सेवाओं, एनेस्थीसिया, एमआरआई और मैमोग्राफी जैसी आधुनिक जांच सुविधाओं का बड़े पैमाने पर विस्तार किया जाएगा ताकि आम जनता को निजी सेंटरों के चक्कर न काटने पड़ें। सड़क हादसों और गंभीर चोटों के त्वरित इलाज के लिए हड्डी रोग और न्यूरो से संबंधित बीमारियों के उपचार हेतु विशेष रूप से ट्रॉमा सेंटरों को सुदृढ़ और पूरी तरह क्रियाशील करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। अस्पतालों में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएंगे, जिनके माध्यम से आपातकालीन सेवाओं और एम्बुलेंस सेवाओं से जुड़ी तमाम जानकारियां प्रमुखता से प्रदर्शित की जाएंगी।

नर्सों को मिलेगी राहत, पीपीपी मॉडल पर भी विचार

स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने रोगी कल्याण समिति के सदस्यों का पुनर्गठन कर उसे अधिक सक्रिय बनाने और नए मेडिकल कॉलेजों के सुचारू संचालन के लिए पीपीपी मॉडल (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) के माध्यम से आवश्यक परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार करने को कहा है। इसके अलावा, स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत नर्सों को बड़ी राहत देते हुए उनके गृह जिलों में ही पदस्थापित करने पर विचार करने का निर्देश दिया गया है।

प्रत्येक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की देखरेख के लिए एक जिला स्तरीय अनुश्रवण एवं पर्यवेक्षण समिति बनेगी, जिसकी कमान सीधे संबंधित डीएम के हाथों में होगी। मुख्यमंत्री ने आयुष्मान भारत योजना के शत-प्रतिशत क्रियान्वयन के लिए लाभार्थियों के आयुष्मान कार्ड और आभा आईडी निर्माण कार्य में युद्ध स्तर पर तेजी लाने का आदेश दिया।

बैठक में ये सभी वरीय अधिकारी रहे उपस्थित

इस महत्वपूर्ण और नीतिगत बैठक में स्वास्थ्य मंत्री निशांत, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव डॉ० त्यागराजन एस०एम०, राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय, स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव अरविंद कुमार वर्मा और बिहार स्वास्थ्य सेवायें एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सुब्रत कुमार सेन सहित स्वास्थ्य विभाग के तमाम वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

अन्‍य खबरों  के लिए नीचे  ’न्‍यूज भारत टीवी ’के लिंक पर क्लिक करें,

||  https://newsbharattv.in  ||

मलाही पकड़ी मेट्रो स्टेशन का हुआ भव्य उद्घाटन, अब मिनटों में तय होगा घंटों का सफर!

पटना: बिहार की राजधानी पटना के निवासियों के लिए एक बेहद खुशखबरी सामने आई है। वर्षों से जिस ऐतिहासिक पल का इंतजार पटनावासी कर रहे थे, वह आखिरकार पूरा हो गया है। पटना मेट्रो रेल परियोजना के अंतर्गत बहुप्रतीक्षित मलाही पकड़ी मेट्रो स्टेशन का भव्य फीता काटकर आधिकारिक तौर पर उद्घाटन कर दिया गया है। इस नए रूट और स्टेशन के शुरू होने से अब पटना के लोगों को बाईपास रोड के भीषण ट्रैफिक जाम, धूल और जानलेवा प्रदूषण से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।

 मलाही पकड़ी मेट्रो स्टेशन के भव्य लोकार्पण के अवसर पर  रिबन काटकर मेट्रो सेवा का आधिकारिक शुभारंभ करते मुख्य सीएम सम्राट चौधरी ।  उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, वरिष्ठ मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, विधायक संजीव चौरसिया, नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव आनंद किशोर, दिल्ली मेट्रो के तकनीकी विशेषज्ञ मंगू सिंह एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति।

दिग्गजों का लगा जमावड़ा, जनता में भारी उत्साह

इस ऐतिहासिक उद्घाटन के मौके पर सरकार के वरिष्ठ नेताओं, नगर विकास विभाग के शीर्ष अधिकारियों और मेट्रो के तकनीकी विशेषज्ञों का बड़ा जमावड़ा लगा रहा। उद्घाटन समारोह में मुख्य रूप से उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा, पटना के सांसद रवि शंकर प्रसाद, बिहार विधानसभा के अध्यक्ष नंद किशोर यादव और विधायक संजीव चौरसिया उपस्थित रहे।

(बाएं) मलाही पकड़ी मेट्रो स्टेशन के स्वचालित प्रवेश द्वार (एएफसी गेट) पर स्मार्ट कार्ड को पंच कर तकनीकी व्यवस्था की जांच करते सीएम सम्राट चौधरी  (दाएं) उद्घाटन के बाद स्टेशन के आधुनिक एस्केलेटर से प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ते सीएम सम्राट चौधरी  एवं अन्य प्रशासनिक और सुरक्षा अधिकारी।

प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने वाले नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव सह पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (पीएमआरसी) के प्रबंध निदेशक आनंद किशोर और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के पूर्व प्रबंध निदेशक सह मुख्य सलाहकार मंगू सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। सुरक्षा और व्यवस्था संभालने के लिए पटना के जिलाधिकारी कपिल अशोक और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजीव मिश्रा मुस्तैद दिखे। मेट्रो सेवा की शुरुआत होते ही आम जनता में भारी उत्साह देखा गया। लोगों का कहना है कि अब कंकड़बाग और बाईपास के दमघोंटू जाम में फंसने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

पटना मेट्रो कोच के भीतर सफर का आनंद लेते सीएम सम्राट चौधरी  , उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, वरिष्ठ मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, नगर विकास मंत्री नीतीश मिश्रा, विधायक संजीव चौरसिया और प्रशासनिक अधिकारी। साथ ही कोच में खड़े होकर मेट्रो की बारीकियों और रूट मैप के बारे में जानकारी देते प्रधान सचिव सह प्रबंध निदेशक आनंद किशोर।

वीआईपी नेताओं ने खुद मेट्रो में किया सफर, एस्केलेटर और गेट का किया निरीक्षण

उद्घाटन के तुरंत बाद सभी मुख्य अतिथियों ने खुद मेट्रो ट्रेन में बैठकर यात्रा की और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। नेताओं ने मलाही पकड़ी स्टेशन से भूतनाथ स्टेशन तक का सफर तय किया। इस दौरान प्रबंध निदेशक आनंद किशोर और तकनीकी विशेषज्ञ मंगू सिंह ने उपस्थित मंत्रियों को मेट्रो की सुरक्षा व्यवस्था, सिग्नलिंग प्रणाली और आधुनिक यात्री सुविधाओं के बारे में विस्तार से तकनीकी जानकारी दी। अतिथियों ने स्वचालित टिकट काउंटरों (एएफसी गेट) पर स्मार्ट कार्ड और टोकन प्रणाली का परीक्षण किया तथा स्टेशन पर लगे आधुनिक एस्केलेटर का भी निरीक्षण किया।

पटना मेट्रो से जुड़ी मुख्य बातें:

  • किराया: आम जनता की जेब को ध्यान में रखते हुए इस रूट पर यात्रा करने के लिए न्यूनतम किराया 15 रुपये और अधिकतम किराया 30 रुपये तय किया गया है।
  • दैनिक फेरे: यात्रियों की सुविधा के लिए यह मेट्रो प्रतिदिन 40 से 42 फेरे लगाएगी, जिससे यात्रियों को ट्रेन के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
  • प्रमुख स्टेशन: इस प्रायोरिटी कॉरिडोर रूट पर यात्रियों को मलाही पकड़ी, भूतनाथ, जीरो माइल और न्यू आईएसबीटी (इंटरस्टेट बस टर्मिनल) स्टेशन की अत्याधुनिक सुविधा मिलेगी।
  • कला और संस्कृति: पूरे मेट्रो स्टेशन की दीवारों को बिहार की प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग और गौरवशाली सांस्कृतिक धरोहरों से बेहद खूबसूरत तरीके से सजाया गया है, जो यात्रियों को आकर्षित कर रही है।

इस परियोजना के पूर्ण होने से कंकड़बाग जैसी एशिया की सबसे बड़ी घनी आबादी वाली कॉलोनी और अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (आईएसबीटी) आने-जाने वाले लाखों लोगों को सीधे तौर पर तेज, सुरक्षित और सुगम परिवहन का लाभ मिलेगा।

अन्‍य खबरों  के लिए नीचे  ’न्‍यूज भारत टीवी ’के लिंक पर क्लिक करें,

||  https://newsbharattv.in  ||

बिहार के विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर बनना अब नहीं होगा आसान! राजभवन ने बदली पूरी व्यवस्था, लिखित परीक्षा और वीडियो रिकॉर्डिंग वाली क्लास से खुलेगा नौकरी का रास्ता!

पटना: बिहार के उच्च शिक्षा जगत से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है! राज्य के विश्वविद्यालयों और अंगीभूत कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से बदल दिया गया है । चांसलर सह राज्यपाल की मंजूरी के बाद राजभवन सचिवालय ने इसके लिए बकायदा नया परिनियम यानी ‘द स्टैट्यूट्स फॉर अपॉइंटमेंट ऑफ असिस्टेंट प्रोफेसर्स इन द यूनिवर्सिटीज ऑफ बिहार 2026’ लागू कर दिया है ।

अब केवल इंटरव्यू या एकेडमिक रिकॉर्ड के भरोसे प्रोफेसर बनने का सपना देखने वालों को बहुत बड़ा झटका लगा है । नई नियमावली के तहत अब उम्मीदवारों को पहले 175 अंकों की  लिखित परीक्षा पास करनी होगी और उसके बाद वीडियो कैमरे की निगरानी में लाइव पढ़ाकर अपनी काबिलियत साबित करनी होगी ।

लिखित परीक्षा और लाइव क्लास रूम टेस्ट: ऐसा होगा नया पैटर्न

नए नियमों के अनुसार, रेगुलर असिस्टेंट प्रोफेसरों के चयन के लिए कुल 200 अंकों की परीक्षा का खाका तैयार किया गया है:

  • 175 अंकों की लिखित परीक्षा: यह परीक्षा पूरी तरह से सब्जेक्टिव यानी विषय-आधारित होगी,जिसके लिए 3 घंटे का समय मिलेगा । इसका सिलेबस राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा यानी नेट के समान होगा ।
  • 25 अंकों का इंटरव्यू और लाइव क्लास: इंटरव्यू बोर्ड के सामने कुल 25 अंक होंगे । इसमें से 13 अंक सिर्फ उम्मीदवार के टीचिंग स्किल्स यानी पढ़ाने की कला पर मिलेंगे । सबसे बड़ी बात यह है कि जब उम्मीदवार इंटरव्यू बोर्ड के सामने पढ़ा रहा होगा, तो उसकी अनिवार्य रूप से वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी । बाकी बचे 12 अंक बोर्ड के साथ बातचीत और साक्षात्कार पर तय होंगे ।

पास होने के लिए लाने होंगे इतने प्रतिशत अंक

लिखित परीक्षा में पास होने और इंटरव्यू की रेस में बने रहने के लिए अलग-अलग श्रेणियों के लिए न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स भी तय कर दिए गए हैं:

  • अनारक्षित (जनरल): 40% अंक
  • पिछड़ा वर्ग (बीसी): 36.5% अंक
  • अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी): 34% अंक
  • अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाएं: 32% अंक

इंटरव्यू के लिए एक पद के मुकाबले 3 उम्मीदवारों (1:3 के अनुपात) को उनकी मेरिट के आधार पर बुलाया जाएगा ।

कॉन्ट्रैक्ट बहाली का भी बदला नियम, एपीआई स्कोर और 12 अंकों का इंटरव्यू

यही नहीं, विश्वविद्यालयों में जरूरत पड़ने पर होने वाली कॉन्ट्रैक्ट यानी अनुबंध आधारित नियुक्तियों के नियमों को भी कड़ा कर दिया गया है । अब कांट्रैक्ट टीचरों की बहाली एकेडमिक परफॉर्मेंस इंडिकेटर यानी एपीआई स्कोर और 12 अंकों के इंटरव्यू के आधार पर होगी । इस इंटरव्यू में भी 6 अंक लाइव टीचिंग डिमॉन्स्ट्रेशन के होंगे, जिसकी वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी और 6 अंक बातचीत के होंगे । अनुबंध पर बहाल शिक्षकों को शुरुआत में केवल 1 एकेडमिक सेशन के लिए रखा जाएगा और उनका प्रदर्शन संतोषजनक होने पर ही आगे बढ़ाया जाएगा ।

उम्र सीमा और योग्यता

असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 43 वर्ष तय की गई है, जिसकी गणना विज्ञापन के वर्ष में 1 अगस्त से की जाएगी । राज्य सरकार के नियमों के अनुसार उम्र में छूट भी दी जाएगी । इसके अलावा उम्मीदवार के पास न्यूनतम 55% अंकों के साथ मास्टर डिग्री और नेट, स्लेट या सेट पास होना अनिवार्य है । हालांकि, साल 2009 या 2016 के यूजीसी नियमों के तहत पीएचडी करने वालों को नेट से छूट मिल सकती है ।

राजभवन के राज्यपाल सचिवालय द्वारा जारी इस आदेश को अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह के आदेश से अधिसूचित किया गया है । पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए बिहार स्टेट यूनिवर्सिटी सर्विस कमीशन या सरकार द्वारा अधिकृत किसी अन्य कमीशन को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है ।

अन्‍य खबरों  के लिए नीचे  ’न्‍यूज भारत टीवी ’के लिंक पर क्लिक करें,

||  https://newsbharattv.in  ||

बिहार में 12 आईपीएस अधिकारियों का ताबड़तोड़ तबादला,

पटना, 01 जुलाई: बिहार प्रशासनिक और पुलिस महकमे से इस वक्त की सबसे बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है।  सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के दावों के बीच पुलिस महकमे में अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल कर दिया है। गृह विभाग (आरक्षी शाखा) द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के तहत भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के कुल 12 वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिकारियों का तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण और अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इस बड़े बदलाव से पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

प्रीता वर्मा बनीं महानिदेशक-सह-महासमादेष्टा 1991 बैच की वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी प्रीता वर्मा, जो अब तक महानिदेशक-सह-अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम, पटना के पद पर तैनात थीं, उन्हें अब महानिदेशक-सह-महासमादेष्टा, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशाम सेवाएं, बिहार, पटना के महत्वपूर्ण पद पर तैनात किया गया है।

निर्मल कुमार आजाद को मद्यनिषेध का अतिरिक्त प्रभार 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी निर्मल कुमार आजाद, जो वर्तमान में पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण), बिहार, पटना के पद पर कार्यरत हैं, उन्हें अपने मौजूदा कार्यों के साथ-साथ पुलिस महानिदेशक, मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, बिहार, पटना का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

पंकज कुमार दराद को भवन निर्माण निगम की कमान 1995 बैच के अधिकारी पंकज कुमार दराद, जो अपर पुलिस महानिदेशक, आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस), बिहार, पटना के पद पर थे और जिनके पास अपर पुलिस महानिदेशक, विशेष निगरानी इकाई, बिहार, पटना का अतिरिक्त प्रभार था, उन्हें अब अपर पुलिस महानिदेशक-सह-अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम, पटना के पद पर नई जिम्मेदारी दी गई है।

सुधांशु कुमार बने यातायात विंग के नए बॉस 1996 बैच के आईपीएस सुधांशु कुमार, जो अपर पुलिस महानिदेशक, विधि-व्यवस्था, बिहार, पटना के पद पर तैनात थे और यातायात का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे, उन्हें अब पूर्ण रूप से अपर पुलिस महानिदेशक, यातायात, बिहार, पटना बनाया गया है। साथ ही, उन्हें अपर पुलिस महानिदेशक, विशेष निगरानी इकाई, बिहार, पटना का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।

अमृत राज संभालेंगे एटीएस (ATS) 1998 बैच के तेजतर्रार अधिकारी अमृत राज, जो वर्तमान में अपर पुलिस महानिदेशक, साईबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई, बिहार, पटना के पद पर तैनात थे, उन्हें अब आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस), बिहार, पटना का नया अपर पुलिस महानिदेशक बनाया गया है।

कासे सुहिता अनुपम को विधि-व्यवस्था की जिम्मेदारी 1998 बैच की ही अधिकारी कासे सुहिता अनुपम, जो अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग), अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटना के पद पर थीं, उन्हें अब अपर पुलिस महानिदेशक, विधि-व्यवस्था, बिहार, पटना के पद पर स्थानांतरित किया गया है। वे अपने इस नए पद के साथ-साथ अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग), अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटना का अतिरिक्त प्रभार भी संभालती रहेंगी।

आईजी (IG) स्तर पर भी बड़ा बदलाव

  • 2003 बैच के आईपीएस राजेश कुमार, जो पुलिस महानिरीक्षक, बिहार मानवाधिकार आयोग, पटना के पद पर थे, उन्हें अब पुलिस महानिरीक्षक, एससीआरबी (SCRB), बिहार, पटना के पद पर भेजा गया है।
  • 2006 बैच के पंकज कुमार राज, जो पुलिस महानिरीक्षक, एससीआरबी (SCRB), बिहार, पटना के पद पर थे और रेलवे का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे, उन्हें अब पूर्णकालिक पुलिस महानिरीक्षक, रेलवे, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया गया है।
  • 2006 बैच की ही एस प्रेमलथा, जो पुलिस महानिरीक्षक, मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, बिहार, पटना के पद पर थीं, उन्हें अब पुलिस महानिरीक्षक, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस, बिहार, पटना के पद पर तैनात किया गया है।

जूनियर विंग और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों (SDPO) का भी तबादला

  • 2022 बैच की युवा अधिकारी गरिमा, जो अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-2, कहलगांव, भागलपुर के पद पर थीं, उन्हें समादेष्टा, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-9, जमालपुर के पद पर प्रमोट/स्थानांतरित किया गया है।
  • 2022 बैच के शिवम धाकड़, जो अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-1, दानापुर, पटना के पद पर तैनात थे, उन्हें पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण), मधुबनी के पद पर (अपने ही वेतनमान में) भेजा गया है।
  • 2023 बैच की कोमल मीना, जो अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-1, मसौढ़ी, पटना के पद पर थीं, उन्हें अब अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-1, विधि-व्यवस्था, पटना के पद पर नई जिम्मेदारी दी गई है।

यह आदेश बिहार राज्यपाल के आदेश से सरकार के अवर सचिव दीपक कुमार के हस्ताक्षर से जारी किया गया है। सभी अधिकारियों को जल्द से जल्द अपने नए पदों पर योगदान देने का निर्देश दिया गया है।

अन्‍य खबरों  के लिए नीचे  ’न्‍यूज भारत टीवी ’के लिंक पर क्लिक करें,

||  https://newsbharattv.in  ||

बुस्टा शिक्षक संघ के नए सूरमाओं का एलान, कुमारी सरोज बनीं अध्यक्ष!

मुजफ्फरपुर, 01 जुलाई। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय शिक्षक (सेवा) संघ (बुस्टा) की महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय इकाई की आम सभा संपन्‍न  हुई । पूर्व सचिव कुमारी सरोज द्वारा आहूत इस हाई-वोल्टेज बैठक में नवगठित बुस्टा इकाई के पदाधिकारियों के नामों की जैसे ही आधिकारिक उद्घोषणा हुई, पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। नए सूरमाओं के मंच पर आते ही माला पहनाकर उनका जोरदार स्वागत किया गया।

अधिकारों के लिए आर-पार की लड़ाई का शंखनाद : नवनियुक्त अध्यक्ष प्रो. कुमारी सरोज (राजनीतिशास्त्र विभाग) ने पद संभालते ही हुंकार भरी। उन्होंने अपने तीखे और प्रभावशाली अभिभाषण में शिक्षकों को एकजुट होने का आह्वान किया। कुमारी सरोज ने दो टूक शब्दों में कहा कि शिक्षक संघ की असली मजबूती अधिकारों और कर्तव्यों के निष्ठापूर्वक निर्वहन में है। उन्होंने साफ कर दिया कि शिक्षकों के मान-सम्मान और हक के लिए यह नई टीम किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

किसे मिली कौन सी बड़ी जिम्मेदारी? शिक्षकों की इस नई और कड़क टीम में कई दिग्गज चेहरों को शामिल किया गया है। पूरी सूची इस प्रकार है:

  • अध्यक्ष: प्रो. कुमारी सरोज (राजनीतिशास्त्र विभाग)
  • उपाध्यक्ष: डॉ.सुनीता कुमारी (सहायक प्राध्यापक, गृह विज्ञान विभाग) एवं प्रियम फ्रांसिस (सहायक प्राध्यापक, अंग्रेजी विभाग)
  • सचिव:डॉ. रिंकु कुमारी (सहायक प्राध्यापक, हिंदी विभाग)
  • सहसचिव: डॉ.श्वेता यादव (सहायक प्राध्यापक, वनस्पति विज्ञान विभाग) एवं संगीता कुमारी (सहायक प्राध्यापक, मनोविज्ञान विभाग)
  • कोषाध्यक्ष: डॉ.सुरबाला वर्मा (सहायक प्राध्यापक, दर्शनशास्त्र विभाग)
  • इकाई सचिव: डॉ.सरिता पॉल (सहायक प्राध्यापक, गृह विज्ञान विभाग)
  • विश्वविद्यालय प्रतिनिधि: डॉ.रामदुलार साहनी (सहायक प्राध्यापक, हिंदी विभाग)

शिक्षकों ने दिखाई ताकत, संगठन को मजबूत करने की खाई कसम इस ऐतिहासिक बैठक में महाविद्यालय के शिक्षकों ने अपनी सशक्त सहभागिता दर्ज कराकर अपनी ताकत का अहसास कराया। सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों ने एक सुर में बुस्टा को और अधिक सुदृढ़, आक्रामक और मजबूत बनाने के लिए अपनी पूरी प्रतिबद्धता जताई। इस घोषणा के बाद से ही विश्वविद्यालय की राजनीति में नए समीकरण बनने शुरू हो गए हैं।

अन्‍य खबरों  के लिए नीचे  ’न्‍यूज भारत टीवी ’के लिंक पर क्लिक करें,

||  https://newsbharattv.in  ||

मुजफ्फरपुर पुलिस महकमे में भारी उलटफेर! मुख्यालय डीएसपी का हुआ तबादला, अब इस तेजतर्रार अफसर के हाथ में होगी कमान!

मुजफ्फरपुर, 01 जुलाई 2026: बिहार  सरकार द्वारा पुलिस महकमे में किए गए बड़े प्रशासनिक सर्जिकल स्ट्राइक का असर मुजफ्फरपुर जिले में भी साफ देखने को मिला है। गृह विभाग (आरक्षी शाखा) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या-2/पी01-20-04/2021 गृ0आ0- 8159 के तहत मुजफ्फरपुर के पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) का ट्रांसफर कर दिया गया है, वहीं उनकी जगह पर एक नए पुलिस उपाधीक्षक की पोस्टिंग की गई है।

मुजफ्फरपुर से कौन गए?

  • अशोक कुमार: मुजफ्फरपुर में अब तक पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) के पद पर तैनात थे। सरकार के नए आदेश के तहत इनका तबादला मुजफ्फरपुर से कर दिया गया है। इन्हें अब पुलिस उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना के महत्वपूर्ण पद पर भेजा गया है।

मुजफ्फरपुर में कौन आए?

  • प्रदीप कुमार: मुजफ्फरपुर के नए पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) होंगे। यह इससे पहले बिहार पुलिस मुख्यालय, पटना में पदस्थापन की प्रतीक्षा में (वेटिंग फॉर पोस्टिंग) थे। अब सरकार ने इन्हें मुजफ्फरपुर मुख्यालय की कमान सौंपकर एक बड़ी जिम्मेदारी दी है।

मुजफ्फरपुर से जुड़े अन्य पुलिस पदाधिकारी का ट्रांसफर:

  • शिवानी श्रेष्ठा: मुजफ्फरपुर में पुलिस उपाधीक्षक, परीक्ष्यमान (प्रोबेशनरी डीएसपी) के रूप में अपनी सेवाएं दे रही थीं। ट्रेनिंग और शुरुआती कार्यकाल के बाद अब इन्हें मुजफ्फरपुर से स्थानांतरित कर पुलिस उपाधीक्षक, विशेष अपराध, अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी), बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया गया है।

कानून व्यवस्था को मिलेगी नई रफ्तार: मुजफ्फरपुर में नए मुख्यालय डीएसपी के रूप में प्रदीप कुमार की तैनाती से जिले की पुलिसिंग और कानून व्यवस्था को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है। वहीं, अशोक कुमार द्वारा मुजफ्फरपुर में किए गए कार्यों के बाद अब वे पटना में निगरानी विभाग में अपनी नई पारी की शुरुआत करेंगे। सरकार ने सभी स्थानांतरित अधिकारियों को तुरंत अपने नए स्थान पर योगदान देने का निर्देश दिया है।

अन्‍य खबरों  के लिए नीचे  ’न्‍यूज भारत टीवी ’के लिंक पर क्लिक करें,

||  https://newsbharattv.in  ||