Sunday, June 7, 2026

TRE-4 की जंग: तेजस्वी का प्रहार, चिराग की टीस और मंत्री का आश्वासन… लाठी के साये में शिक्षक अभ्यर्थी!

पटना। बिहार की राजधानी में एक बार फिर नियुक्तियों को लेकर संग्राम छिड़ गया है। बीपीएससी (BPSC) के चौथे चरण की शिक्षक भर्ती (TRE-4) का विज्ञापन जारी करने की मांग कर रहे युवाओं पर पटना पुलिस ने उस वक्त बर्बर लाठीचार्ज किया, जब वे जेपी गोलंबर के पास बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। इस हिंसक झड़प में कई अभ्यर्थियों के घायल होने की सूचना है, जिसके बाद बिहार की सियासत पूरी तरह गर्मा गई है।

जेपी गोलंबर पर पुलिसिया कार्रवाई के बीच नारेबाजी करते TRE-4 अभ्यर्थी। तस्वीर में दिख रहा आक्रोश बिहार के युवाओं के भीतर पनप रहे रोजगार के संकट की गवाही दे रहा है।

मैदान-ए-जंग बना पटना: सड़कों पर बहा लहू

मंगलवार को हजारों की संख्या में अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार जानबूझकर TRE-4 का विज्ञापन अटका रही है, जिससे उनका भविष्य अधर में लटका है। जैसे ही प्रदर्शन उग्र हुआ और युवाओं ने सुरक्षा घेरा लांघा, पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए लाठियां भांजनी शुरू कर दीं। भगदड़ के बीच पुलिसिया कार्रवाई में कई छात्र लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़े।

तेजस्वी का तीखा प्रहार: अपराधी बेखौफ, छात्र लाचार

घटना के तुरंत बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा, आज बीपीएससी TRE-4 के छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया और उनकी सुनवाई करने के बजाय उनकी आवाज दबाई जा रही है। बिहार में अपराधियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, लेकिन अपना हक मांग रहे छात्रों पर लाठियां बरसाई जा रही हैं। यह सरकार केवल अपनों को उपकृत करने में लगी है, जनता की इन्हें परवाह नहीं।”

चिराग की टीस: गठबंधन सरकार के भीतर से उठे सवाल

हैरानी की बात यह रही कि सरकार में सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी इस घटना पर अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने लाठीचार्ज को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताते हुए कहा कि युवाओं की मांगों पर प्रशासन को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी। चिराग का यह रुख साफ करता है कि शिक्षक भर्ती का मुद्दा अब गठबंधन के भीतर भी एक असहज स्थिति पैदा कर रहा है।

शिक्षा मंत्री का आश्वासन: धैर्य रखें, समाधान होगा

इस भारी हंगामे के बीच बिहार के नए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने अभ्यर्थियों से शांति की अपील करते हुए कहा, मैं एक छात्र और शिक्षक, दोनों की समस्याओं को गहराई से समझता हूं। हम विभाग की कार्यप्रणाली को सुव्यवस्थित कर रहे हैं। अगर मांग तार्किक होगी, तो सरकार उस पर बिना किसी विलंब के सकारात्मक निर्णय लेगी। यह शासन के लिए नहीं, बल्कि सेवा के लिए बनी सरकार है।”

मंत्री का 4-सूत्रीय विजन: शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि वे चार स्तरों पर काम करेंगे:

  1. छात्र के हित: समस्याओं का त्वरित समाधान।
  2. शिक्षक का सम्मान: उनकी चुनौतियों का विश्लेषण।
  3. पारदर्शिता: हर निर्णय निष्पक्ष और ओपन होगा।
  4. रोजगार: शिक्षा को सीधे तौर पर रोजगार से जोड़ना।

आंदोलनकारियों की दो टूक: विज्ञापन नहीं तो चैन नहीं

एक तरफ सरकार धैर्य की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ घायल अभ्यर्थी हार मानने को तैयार नहीं हैं। अस्पताल में इलाज करा रहे छात्रों का कहना है कि जब तक TRE-4 का आधिकारिक विज्ञापन जारी नहीं हो जाता, उनका यह संघर्ष जारी रहेगा।

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वादाखिलाफी के खिलाफ माले का मोर्चा: “भाजपा-सम्राट सरकार में युवाओं पर बरसीं लाठियां” प्रदर्शनकारियों पर हुए इस बल प्रयोग की तीखी निंदा करते हुए आइसा (AISA) के जिला प्रभारी  समस्तीपुर सह भाकपा माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने इसे ‘बर्बर और अन्यायपूर्ण’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार बार-बार विज्ञापन निकालने की घोषणा कर पीछे हट रही है और अब परीक्षा पैटर्न में बदलाव कर अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। माले नेता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने अभ्यर्थियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, जिससे दर्जनों युवाओं के सिर और हाथ-पैर टूट गए हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि बिहार के छात्र अब लाठी-गोली की यह राजनीति बर्दाश्त नहीं करेंगे। माले ने सरकार से अविलंब TRE-4 का विज्ञापन जारी करने, दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने और घायलों का मुफ्त इलाज कराने की मांग की है।


बिहार में ‘परिवारवादी’ कैबिनेट: तेजस्वी ने खोली 17 मंत्रियों की पोल, पूछा- PM मोदी अब किसे कहेंगे शहजादा?

 बिहार में ‘जंगलराज’ नहीं, ‘परिवारराज’ का बोलबाला; अपराधियों पर लगाम नहीं, छात्रों पर लाठियां: तेजस्वी यादव का सीधा प्रहार

पटना | विशेष संवाददाता |  बिहार की राजनीति में ‘परिवारवाद’ के मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सत्ताधारी गठबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी ने नीतीश कैबिनेट के उन 17 मंत्रियों की सूची सार्वजनिक कर दी, जो किसी न किसी राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखते हैं। तेजस्वी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके पुराने बयानों पर घेरते हुए पूछा कि जब उनकी अपनी सरकार ‘शहजादों’ से भरी है, तो वे किस मुंह से दूसरों पर उंगली उठाते हैं?

पटना में मीडिया को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव। उनके हाथ में मौजूद मंत्रियों की यह सूची बिहार की राजनीति में नए ‘पोस्टर वॉर’ और सियासी संग्राम की शुरुआत मानी जा रही है।

प्रधानमंत्री अब किसे कहेंगे शहजादा?” तेजस्वी ने सीधे प्रधानमंत्री पर हमला बोलते हुए कहा, ताज्जुब की बात है कि प्रधानमंत्री मोदी जिस वंशवाद को खत्म करने की बात करते थे, आज उसी की बेल में खुद खाद-पानी डाल रहे हैं। बिहार कैबिनेट में 17 ऐसे मंत्री हैं जो परिवारवादी लोग हैं। अब पीएम को जवाब देना चाहिए कि क्या वे इन मंत्रियों को भी शहजादा या युवराज कहकर संबोधित करेंगे?”

अपराधियों को छूट, छात्रों पर लाठियां तेजस्वी ने आरोप लगाया कि पिछले 6 महीनों में सरकार ने केवल अपने परिवार के लोगों को सेट करने में समय बर्बाद किया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ लॉ एंड ऑर्डर पूरी तरह ध्वस्त हो गया है और अपराधियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, वहीं दूसरी तरफ हक मांग रहे BPSC (TRE-4) के छात्रों पर लाठियां बरसाई जा रही हैं और परीक्षाएं रद्द की जा रही हैं।


तेजस्वी की परिवारवादी मंत्रियोंकी पूरी लिस्ट:

तेजस्वी यादव ने आंकड़ों के साथ इन 17 नामों का कच्चा चिट्ठा खोला:

  1. सम्राट चौधरी (उपमुख्यमंत्री): पिता पूर्व मंत्री, माता पूर्व विधायक।
  2. विजय चौधरी (उपमुख्यमंत्री): पिता पूर्व विधायक।
  3. निशांत कुमार (मंत्री): पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र, बिना चुनाव लड़े ‘वाइल्ड कार्ड एंट्री’।
  4. नीतीश मिश्रा (मंत्री): पिता पूर्व मुख्यमंत्री, चाचा पूर्व मंत्री।
  5. संतोष सुमन (मंत्री): पिता पूर्व मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री, पत्नी व सास विधायक।
  6. दीपक प्रकाश (मंत्री): पिता सांसद व पूर्व मंत्री, माता विधायक।
  7. श्रेयसी सिंह (मंत्री): पिता पूर्व मंत्री, माता पूर्व सांसद।
  8. अशोक चौधरी (मंत्री): पिता पूर्व मंत्री, बेटी वर्तमान सांसद।
  9. सुनील कुमार (मंत्री): पिता पूर्व मंत्री, भाई पूर्व सांसद।
  10. रमा निषाद (मंत्री): पति पूर्व सांसद, ससुर पूर्व केंद्रीय मंत्री।
  11. शीला मंडल (मंत्री): ससुर पूर्व मंत्री व पूर्व राज्यपाल।
  12. बुलो मंडल (मंत्री): पत्नी पूर्व विधायक।
  13. लेसी सिंह (मंत्री): पति पूर्व जिला अध्यक्ष।
  14. श्वेता गुप्ता (मंत्री): पति पूर्व लोकसभा प्रत्याशी।
  15. संजय टाइगर (मंत्री): भाई पूर्व विधायक।
  16. भगवान सिंह कुशवाहा (मंत्री): ससुर वामपंथी नेता।
  17. रामकृपाल यादव (मंत्री): पुत्र राजनीति में सक्रिय।

NDA की सभी पार्टियां परिवारवादी तेजस्वी ने अंत में कहा कि प्रधानमंत्री के साथ बिहार में शामिल सभी सहयोगी दल—चाहे वह रामविलास पासवान की पार्टी हो, नीतीश कुमार की हो, जीतनराम मांझी की हो या उपेंद्र कुशवाहा की—सभी परिवारवाद की पोषक हैं। उन्होंने साफ किया कि बिहार में अब जनता की सुनवाई नहीं, बल्कि सिर्फ चहेते परिवारों की भलाई हो रही है।

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बिहार सरकार के ‘सात निश्चय’ से उर्दू गायब: हक के लिए आर-पार के मूड में मुशावरत, आंदोलन की दी चेतावनी!

पटना। बिहार सरकार द्वारा “सात निश्चय-3” के तहत राज्य के 208 प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज खोलने और 6656 शिक्षकों की बहाली की घोषणा ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। सरकार की इस महा-योजना में उर्दू विषय को पूरी तरह नजरअंदाज किए जाने से उर्दू भाषी समुदायों और बुद्धिजीवियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत (बिहार) ने इसे उर्दू के साथ बड़ा अन्याय करार देते हुए सरकार की नीति और नीयत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

नये  डिग्री कॉलेज की सांकेतिक तस्‍वीर के साथ, चित्र में दाएं से नीचे लाल घेरे में अध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) सैयद अबूज़र कमालुद्दीन और राज्य महासचिव मोहम्मद इश्तेयाक संयुक्त बयान जारी करते हुए।

उर्दू के साथ सौतेला व्यवहार बर्दाश्त नहीं: प्रो. अबूज़र

मुशावरत के प्रदेश अध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) सैयद अबूज़र कमालुद्दीन और राज्य महासचिव मोहम्मद इश्तेयाक ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि बिहार में उर्दू को दूसरी राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। इसके बावजूद, उच्च शिक्षा के इस बड़े विस्तार में उर्दू को शामिल न करना यह दर्शाता है कि भाषा के शैक्षणिक आधार को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है। प्रो. अबूज़र ने तत्‍कालीन शिक्षा मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, मंत्री जी ने अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा का आश्वासन दिया था, लेकिन यह निर्णय उनकी कथनी और करनी के अंतर को साफ उजागर करता है।”

एक मंच पर आएं सभी संगठन: मोहम्मद इश्तेयाक की बड़ी अपील

मुशावरत के राज्य महासचिव मोहम्मद इश्तेयाक ने बिहार की तमाम मिल्ली, सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं उर्दू संगठनों से भावुक अपील करते हुए कहा कि अब घर बैठने का वक्त नहीं है। उन्होंने कहा, उर्दू के अस्तित्व को बचाने के लिए राज्य के सभी संगठनों को तुरंत एक मंच पर एकत्र होना होगा। हमें एक संयुक्त और शक्तिशाली प्रतिनिधिमंडल बनाकर राज्यपाल, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और मुख्य सचिव से मिलकर यह मांग करनी चाहिए कि अधिसूचना में तुरंत संशोधन कर उर्दू को शामिल किया जाए।”

6656 पदों में उर्दू का नामोनिशान नहीं

महासचिव मोहम्मद इश्तेयाक ने कहा कि सरकार ने 16 विषयों की सूची जारी की है, जिसमें उर्दू को जगह नहीं मिली है। यदि उर्दू विषय ही नहीं होगा, तो न शिक्षकों की नियुक्ति होगी और न ही छात्र इसे पढ़ पाएंगे। उन्होंने बिहार के सभी सामाजिक, सांस्कृतिक और मिल्ली संगठनों से एकजुट होने की अपील की है।

राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल

मुशावरत ने ऐलान किया है कि जल्द ही एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और मुख्य सचिव से मुलाकात कर अधिसूचना में संशोधन की मांग करेगा। नेताओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो लोकतांत्रिक तरीके से उग्र विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा।

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कटिहार के 4 प्राइवेट स्कूलों पर FIR, गबन और धोखाधड़ी का आरोप: DM ने खुद फोन कर पकड़ी चोरी

सावधान! आपके बच्चे के स्कूल में भी तो नहीं चल रहा फीस का खेल‘? गरीबों का हक और सरकारी खजाने पर प्राइवेट स्कूल डाल रहे डाका!


ब्यूरो रिपोर्ट शिक्षा के पवित्र मंदिर को कमाई का अड्डा बनाने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ कटिहार जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी के कड़े तेवर के बाद जिले के चार प्रतिष्ठित निजी स्कूलों के विरुद्ध धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी राशि के गबन की धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। इस कार्रवाई के बाद से जिले के निजी स्कूल संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है।

तस्‍वीर में जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी

DM बने डिटेक्टिव‘: खुद फोन घुमाया और खुल गई पोल

अक्सर अधिकारी कागजी रिपोर्ट पर भरोसा करते हैं, लेकिन जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने मामले की तह तक जाने के लिए खुद कमान संभाली। शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के तहत गरीब बच्चों (EWS) के मुफ्त नामांकन और उनकी फीस की प्रतिपूर्ति के लिए स्कूलों ने आवेदन दिए थे। जिलाधिकारी ने रैंडम तरीके से आवेदन में दिए गए नंबरों पर अभिभावकों को खुद फोन मिलाया।

बातचीत के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि जिन बच्चों को ‘मुफ्त’ पढ़ाने का दावा कर स्कूल सरकार से लाखों रुपये की मांग कर रहे थे, असल में उन बच्चों के गरीब माता-पिता से स्कूल पहले ही मोटी फीस वसूल चुके थे।

सरकार से भी पैसा और गरीब से भी वसूली: दोहरा मुनाफा

जांच में पाया गया कि यह महज एक चूक नहीं बल्कि सुनियोजित ‘महाफ्रॉड’ है। जिलाधिकारी के अनुसार:

  • स्कूलों ने सरकार को गलत सूचना दी।
  • नियमों के विरुद्ध गरीब बच्चों से फीस वसूली गई।
  • फीस लेने के बावजूद सरकार से उन्हीं बच्चों के नाम पर पैसे (प्रतिपूर्ति) हड़पने की कोशिश की गई।

इन 4 स्कूलों के निदेशकों और प्राचार्यों पर गिरी गाज

जिला प्रशासन ने जांच के बाद निम्नलिखित स्कूलों को दोषी पाते हुए उन पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया:

  1. शिक्षा निकेतन, विनोदपुर
  2. सीमा पब्लिक स्कूल, कटिहार
  3. जेपी पब्लिक स्कूल, कोढ़ा
  4. गॉड्स ग्रेस पब्लिक स्कूल, फलका
सांकेतिक तस्‍वीर

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, आगे भी जारी रहेगी जांच”

मामले की पुष्टि करते हुए जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने कहा:

“सरकार की नीति स्पष्ट है—भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस। ये स्कूल न केवल गरीबों का हक मार रहे थे, बल्कि सरकारी निधि का गबन करने का प्रयास कर रहे थे। यह सीधे-सीधे फ्रॉड का केस है। हमने चार स्कूलों पर एफआईआर दर्ज कराई है और यह जांच आगे भी जारी रहेगी। जो भी नियम तोड़ेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।”

अभिभावकों से अपील

प्रशासन ने आम जनता और अभिभावकों से भी अपील की है कि यदि कोई स्कूल आरटीई (RTE) के तहत नामांकन के बावजूद पैसे की मांग करता है या किसी प्रकार का मानसिक उत्पीड़न करता है, तो इसकी सूचना तुरंत जिला शिक्षा विभाग या जिलाधिकारी कार्यालय को दें।

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नेताओं के घर बंट रही ‘मंत्री की कुर्सी’ और आपके बच्चों के हिस्से आएगी सिर्फ ‘मजदूरी’!

लालू की राह पर चले ‘सुशासन बाबू’, पुत्र-मोह में तोड़ा 20 साल का ‘नैतिकता’ का ढोंग!

एस. एस.कुमार ‘पंकज’ । बिहार की सियासत में आज वह ‘ऐतिहासिक’ विरोधाभास देखने को मिला, जिसकी कल्पना कभी सुशासन के पैरोकारों ने नहीं की थी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जिन्होंने दशकों तक लालू परिवार को ‘परिवारवाद’ के नाम पर घेरा, आज उन्होंने खुद अपने पुत्र निशांत कुमार को कैबिनेट मंत्री की शपथ दिलाकर बिहार की सत्ता का ‘वारिस’ घोषित कर दिया है। इसे लोकतंत्र कहें या राजतंत्र का नया संस्करण, लेकिन पटना की सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक सिर्फ एक ही सवाल गूँज रहा है— “क्या बिहार अब चंद राजनीतिक परिवारों की जागीर बन गया है?”


“दो चेहरों वाली राजनीति: बायें  प्रधानमंत्री के भव्य रोड-शो पर रोहिणी आचार्या का तंज ‘’बिहार को निराश कर गये नीरो जी’’ और दायें राष्ट्रीय जनता दल का  ‘140 करोड़ वोटों’ का दावा करने वाला कार्टून, जो सोशल मीडिया पर उपहास का केंद्र बना हुआ है। बिहार की जनता पूछ रही है—क्या यह लोकतंत्र है या वंशवाद का नया अध्याय?”

विपक्ष का विस्फोटकहमला: “कुर्सी कुमार का असली चेहरा आया सामने”

निशांत कुमार की इस ‘शॉर्टकट’ एंट्री ने विपक्ष को सत्ता पक्ष की धज्जियां उड़ाने का सुनहरा मौका दे दिया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने अपने आधिकारिक बयान में तीखा तंज कसते हुए कहा:

परिवारवाद पर आजीवन लेक्चर देने वाले कुर्सी कुमार के सामाजिक जीवन में संघर्ष का लंबा इतिहास रखने वाले सुयोग्य सुपुत्रको मंत्री पद की शुभकामनाएँ!

कामचोर और नाकारी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के लिए पूरे पटना शहर को बंद कर दिया गया है। जो 5 साल देश के सबसे गरीब राज्य की जनता को चूसकर अपना घर भरेंगे, वो सभी नाकारे भ्रष्ट महाराजशपथ ले रहे हैं और बेचारी प्रजा‘, जिसे बताया जाता है कि यह लोकतंत्र है, वह सड़कों पर धीरे-धीरे रेंग रही है। महाराज के अहंकार को झेल रही जनता अब 5 साल की सुनिश्चित अनदेखी के लिए खुद को तैयार कर रही है।”


रोहिणी आचार्या का वार: “चाचा ने तोड़ा नैतिकता का रिकॉर्ड”

लालू यादव की पुत्री रोहिणी आचार्या ने ट्विटर (X) पर मोर्चा खोलते हुए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री दोनों को घेरा। उन्होंने लिखा:

मणिपुर और बंगाल को जलता छोड़ नीरोपटना आए और रोड-शो का तमाशा खड़ा कर बिहार को निराश कर चले गए। प्रधानमंत्री जी बेवजह रोड-शो के जलसे में शामिल हुए और फोटो-शूट करवाकर चले गए। पूरा बिहार हैरान है कि जो शपथ ग्रहण राजभवन में होना चाहिए था, उसके लिए गाँधी मैदान में सरकारी पैसा क्यों बर्बाद किया गया? बिहार की बेटी होने के नाते मुझे उम्मीद थी कि पीएम पटना गर्ल्स हॉस्टल में हुई दरिंदगी पर कुछ बोलेंगे, लेकिन वे खामोश रहे। बिना चुनाव लड़े चोर दरवाजे से मंत्रिमंडल में एंट्री पाने वाले भाई निशांत को बधाई और उन्हें एंट्री दिलाने वाले असलियत में अनैतिकता के शिखर पुरुष रंगबदलू चाचाको भी ढेरों बधाई। 2005 से पहले ई सब भी नहीं होता था चाचा जी!”


प्रशांत किशोर की चेतावनी: “चेहरा देखकर वोट देने का अंजाम”

जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने इस नियुक्ति को बिहार के युवाओं के भविष्य पर सीधी चोट बताया। उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा:

बिहार के हर परिवार को सोचना चाहिएनेता का लड़का नेता बनेगा और बिहार के सामान्य परिवार के पढ़े-लिखे बच्चे मजदूरी करेंगे। नेता चाहे समाजवादी हों, भाजपाई हों या कांग्रेसी, सबने अपने बच्चों के लिए राजसिंहासन तैयार कर रखा है। नेता और नेता का बच्चा कभी बेरोजगार नहीं होगा, आपके बच्चों को मजदूरी करने जाना पड़ेगा। नीतीश कुमार जो जीवन भर दावा करते रहे कि हमने परिवार के लिए कुछ नहीं किया, आज उनका लड़का सीधे राजनीति में आ रहा है। आप अपने बच्चों की चिंता कीजिए, वरना वे पढ़-लिखकर भी बेरोजगार ही रहेंगे।”


मंत्री निशांत कुमार की सफाई: “यह जनता का आदेश है”

शपथ ग्रहण के बाद भारी सुरक्षा घेरे के बीच नए नवेले मंत्री निशांत कुमार ने मीडिया के कैमरों के सामने अपनी सफाई पेश की। उन्होंने कहा:

सब जनता का प्रेम और विश्वास है। उन्होंने ही मुझे राजनीति में लाया है, मेरे कार्यकर्ताओं ने मुझे यहाँ तक पहुँचाया है। तो जो भी विश्वास जनता और कार्यकर्ताओं ने मुझ पर जताया है, उस उत्तरदायित्व को मैं पूरी सच्चाई और ईमानदारी से निभाने की कोशिश करूँगा।”

‘जनता के आदेश’ : विरोधाभास या हकीकत “निशांत कुमार का यह दावा कि उन्हें ‘जनता के आदेश’ ने राजनीति में लाया है, अपने आप में एक बड़ा विरोधाभास पैदा करता है। हकीकत यह है कि चुनाव और जनादेश नीतीश कुमार के चेहरे पर मिला था, लेकिन सत्ता के शीर्ष पर बैठते ही उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ दी और बिना किसी चुनावी प्रक्रिया के अपने पुत्र को सीधे कैबिनेट में ‘लैंड’ करा दिया। ऐसे में सवाल उठता है कि जिस व्यक्ति ने आज तक पंचायत का चुनाव भी नहीं लड़ा, उसके पास जनता का आदेश कैसे पहुँच गया? क्या ‘जनता का आदेश’ अब सिर्फ महलों के बंद कमरों में तय होता है? राजनीतिक जानकार इसे ‘लोकतंत्र का मखौल’ बता रहे हैं, क्योंकि जनादेश का असली अर्थ जनता द्वारा चुना जाना होता है, न कि पिता द्वारा पुत्र को सत्ता की विरासत सौंपना। नीतीश कुमार का यह कदम साबित करता है कि बिहार में अब ‘जनादेश’ का मतलब केवल एक परिवार की सत्ता को सुरक्षित करना रह गया है।”


राजनीतिक विश्लेषण: नीति बदली या नीयत?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता की मलाई ने उपेन्द्र कुशवाहा और नीतीश कुमार जैसे नेताओं की नैतिकता पर पट्टी बांध दी है। जो नीतीश कुमार कभी लालू परिवार के ‘राजकुमारों’ पर तंज कसते नहीं थकते थे, आज वे खुद उसी घेरे में खड़े हैं। यह घटनाक्रम केवल एक मंत्री की नियुक्ति नहीं, बल्कि बिहार के उस युवा के गाल पर तमाचा है जो सालों-साल परीक्षाओं की तैयारी में सड़कों पर रेंगता है, जबकि ‘साहब’ का बेटा बिना एक भी चुनाव लड़े सीधे ‘राजगद्दी’ पर बैठ जाता है।

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सम्राट कैबिनेट का मेगा विस्तार, 31 मंत्रियों ने ली शपथ, निशांत कुमार का ‘राजतिलक’!

पटना | 07 मई, 2026 बिहार की राजनीति में आज एक नया इतिहास रचा गया। राजधानी के ऐतिहासिक गांधी मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल का भव्य विस्तार हुआ। इस मेगा शो में कुल 31 नए चेहरों ने मंत्री पद की शपथ ली, जिसमें सबसे ज्यादा चौंकाने वाला और चर्चा का विषय नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार का राजनीति में औपचारिक प्रवेश और सीधा कैबिनेट में शामिल होना रहा।

यह मंत्रिमंडल विस्तार केवल सरकार का स्वरूप बदलना नहीं, बल्कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद सूबे में सत्ता के नए संतुलन की बड़ी पटकथा है। 15 मंत्रियों के साथ भाजपा ने कैबिनेट में अपनी बादशाहत कायम की है, जबकि जदयू ने 13 और सहयोगी दलों ने 3 चेहरों के साथ गठबंधन को मजबूती दी है।

बड़ी तैयारी, बड़ी जिम्मेदारी: रामकृपाल यादव, नीतीश मिश्रा और अशोक चौधरी ने प्रधानमंत्री की मौजूदगी में बिहार की प्रगति का हुंकार भरा।

जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों का सुपरडोज

इस कैबिनेट विस्तार में विकास, सुशासन और सोशल इंजीनियरिंग का तगड़ा तालमेल दिखा। भाजपा की ओर से रामकृपाल यादव, विजय कुमार सिन्हा और नीतीश मिश्रा जैसे दिग्गजों ने शपथ ली, वहीं खेल जगत से राजनीति में आई श्रेयसी सिंह को भी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। जदयू की ओर से अशोक चौधरी, श्रवण कुमार और लेसी सिंह जैसे अनुभवी नेताओं पर भरोसा बरकरार रखा गया है।

निशांत कुमार: विरासत के नए उत्तराधिकारी

पूरे समारोह की सुर्खियां निशांत कुमार ने बटोरीं। नीतीश कुमार की विरासत को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने मंत्री पद की शपथ ली, जिसे आगामी चुनावों से पहले जदयू का मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। वहीं जीतन राम मांझी के पुत्र संतोष कुमार सुमन ने भी मंत्री पद की शपथ लेकर एनडीए के कुनबे को एकजुट रखने का संदेश दिया।

महिला शक्ति और कद्दावर नेता: श्रेयसी सिंह, जमा खान, सुनील कुमार और नंद किशोर राम ने संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ ली।

कैबिनेट का नया गणित

भाजपा (15): विजय कुमार सिन्हा, रामकृपाल यादव, नीतीश मिश्रा, श्रेयसी सिंह, दिलीप जायसवाल, संजय सिंह टाइगर, केदार गुप्ता, मिथलेश तिवारी, लखेंद्र कुमार रोशन, अरुण शंकर प्रसाद, प्रमोद चंद्रवंशी, इंजीनियर कुमार शैलेंद्र, नंद किशोर राम, रामचंद्र प्रसाद, रमा निषाद।

जदयू (13): निशांत कुमार, अशोक चौधरी, श्रवण कुमार, लेसी सिंह, मदन सहनी, शीला मंडल, रत्नेश सदा, जमा खान, सुनील कुमार, दामोदर रावत, भगवान सिंह कुशवाहा, श्वेता गुप्ता, बुलो मंडल।

अनुभव और युवा ऊर्जा का संगम: इंजीनियर कुमार शैलेंद्र, शीला कुमारी, केदार गुप्ता, लखेंद्र कुमार रौशन और रत्नेश सदा ने ली बिहार के विकास की शपथ।

सहयोगी दल: संजय पासवान, संजय सिंह (लोजपा-रामविलास), संतोष कुमार सुमन (HAM) और दीपक प्रकाश (RLM)।

सम्राट कैबिनेट मेगा विस्तार समारोह : बिहार की सियासत में एक नए युग की शुरुआत

पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित सम्राट कैबिनेट के इस मेगा विस्तार समारोह ने बिहार की सियासत में एक नए युग की शुरुआत कर दी है। इन चित्रों में सत्ता का वह भव्य गलियारा साफ नजर आ रहा है, जहाँ देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जैसी कद्दावर शख्सियतों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। मंच पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, राज्यसभा जा चुके नीतीश कुमार, भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के साथ एनडीए के दिग्गजों का एक साथ खड़ा होना गठबंधन की अटूट शक्ति को प्रदर्शित कर रहा है। समारोह की विशालता का अंदाजा गांधी मैदान में उमड़ी जनमेदिनी और राष्ट्रगान के सम्मान में खड़े हजारों उत्साही समर्थकों को देखकर लगाया जा सकता है। यह केवल एक शपथ ग्रहण समारोह नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के ‘विकसित भारत’ के सपने को ‘विकसित बिहार’ के संकल्प से जोड़ने वाला एक निर्णायक क्षण रहा, जिसने स्पष्ट कर दिया कि आने वाले समय में बिहार की राजनीति विकास और सुशासन के नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए तैयार है।

मिशन विकसित बिहार: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ मंच पर आसीन दिग्गज, नई जिम्मेदारी के आगाज़ का गवाह बनते हुए।

प्रधानमंत्री ने दी बधाई: समारोह के अंत में प्रधानमंत्री ने सभी नए मंत्रियों से मुलाकात की और कहा कि यह नई टीम “विकसित बिहार” के संकल्प को सिद्ध करेगी। इस विस्तार से स्पष्ट है कि भाजपा अब बिहार की सत्ता में ड्राइविंग सीट पर आ चुकी है।

एकजुट एनडीए: मंच पर जे.पी. नड्डा, नीतीश कुमार, अमित शाह और राजनाथ सिंह की मौजूदगी बिहार में मजबूत गठबंधन का संकेत दे रही है।
जनता का हुजूम: गांधी मैदान में उमड़ा समर्थकों का विशाल जनसैलाब, जो नई सरकार और नई कैबिनेट के प्रति भारी उत्साह और विश्वास को प्रदर्शित करता है।

यह विस्तार न केवल सत्ता का बंटवारा है, बल्कि इसमें सामाजिक समीकरणों और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का पूरा ध्यान रखा गया है ताकि बिहार सुशासन की नई ऊंचाइयों को छू सके।

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बिहार कैबिनेट के 20 बड़े फैसलों से बदलेगी राज्य की सूरत; AI से सुधरेंगी सड़कें और घर बैठे ‘ई-वोटिंग’ करेंगे बुजुर्ग!

पटना | 06 मई, 2026 बिहार की राजनीति और विकास की दिशा में बुधवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण रहा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में कुल 20 महत्वपूर्ण एजेंडों पर मुहर लगाई गई। शाम 5 बजे शुरू हुई इस बैठक में उद्योग, परिवहन, स्वास्थ्य और तकनीक जैसे क्षेत्रों के लिए बड़े वित्तीय प्रावधानों और नीतिगत बदलावों को मंजूरी दी गई। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने बैठक के निर्णयों की विस्तृत जानकारी साझा की।


तस्‍वीर में बायें से : कैबिनेट बैठक के निर्णयों की विस्तृत जानकारी साझा करते ,मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी

सड़कों की सेहत सुधारने के लिए 15,968 करोड़ का भारी निवेश

कैबिनेट के सबसे बड़े फैसलों में से एक पथ निर्माण विभाग से जुड़ा है। राज्य की 19,305 किमी लंबी सड़कों के बेहतर रखरखाव के लिए सरकार ने ₹15,968 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी है। खास बात यह है कि अब सड़कों के निरीक्षण के लिए इंसान ही नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।

स्वास्थ्य क्षेत्र में आस्था का सम्मान: मां सीतामेडिकल कॉलेज

सीतामढ़ी जिले के निवासियों के लिए बड़ी खबर है। वहाँ निर्माणाधीन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल का नाम अब मां सीता चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल होगा। यह निर्णय न केवल जिले की पहचान को नई ऊंचाई देगा, बल्कि स्वास्थ्य सुविधाओं को जन-आस्था से भी जोड़ेगा।

बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए ई-वोटिंगकी सुविधा

लोकतंत्र में सबकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग ने क्रांतिकारी कदम उठाया है। वर्ष 2026 के नगरपालिका निर्वाचनों में वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और असाध्य रोगों से ग्रसित मतदाताओं के लिए ई-वोटिंग सिस्टम का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए हैदराबाद स्थित सी-डैक (C-DAC) को एजेंसी के रूप में चुना गया है, जिस पर ₹31.45 लाख खर्च होंगे।

परिवहन: 400 इलेक्ट्रिक एसी बसों का जाल

पर्यावरण संरक्षण और सुलभ परिवहन की दिशा में PM ई-बस सेवा योजना के तहत बिहार में 400 इलेक्ट्रिक एसी बसें चलाई जाएंगी। इसके लिए कैश गैप सब्सिडी को बढ़ाकर ₹517.16 करोड़ करने की पुनरीक्षित स्वीकृति दी गई है।


अन्य महत्वपूर्ण निर्णय एक नजर में:

  • शिक्षा और रोजगार: अरवल और शेखपुरा जिलों में नए केंद्रीय विद्यालयों के निर्माण के लिए 5-5 एकड़ भूमि महज ₹1 के टोकन मूल्य पर 30 साल की लीज पर देने का फैसला लिया गया है।
  • शहरी विकास: “बिहार अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम” के लिए विश्व बैंक से 500 मिलियन डॉलर के ऋण सहायता की सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई है।
  • कर्मचारी कल्याण: सरकारी सेवकों और पेंशनभोगियों को अब बैंकों के माध्यम से अग्रिम वेतन और ऋण की सुविधा मिल सकेगी।
  • बाढ़ बचाव: गंगा नदी के किनारे विभिन्न क्षेत्रों (बक्सर, कोइलवर, सबलपुर) में कटाव निरोधक कार्यों के लिए करोड़ों रुपये की योजनाओं को मंजूरी मिली है।
  • AI ट्रेनिंग: विधानमंडल सदस्यों और सरकारी कर्मियों को भविष्य की तकनीक से लैस करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।
  • BIT मेसरा: पटना विस्तार केंद्र के संचालन के समझौते को 16 दिसंबर 2030 तक के लिए विस्तार दिया गया है।

इस बैठक ने यह साफ कर दिया है कि बिहार सरकार अब परंपरागत शासन प्रणाली से आगे निकलकर तकनीक (AI) और आधुनिक बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

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बेटियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल: मुजफ्फरपुर से 22 वर्षीय अन्नू रहस्यमयी ढंग से लापता, सुराग देने वाले को मिलेगा नकद इनाम!

मुजफ्फरपुर। शहर के सिकंदरपुर थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। लकड़ीढ़ाही रोड, चंदवारा की रहने वाली 22 वर्षीय युवती अन्नू कुमारी बीते एक साल से अधिक समय से लापता है, लेकिन अब तक उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। पुलिस ने अब आम जनता से मदद की गुहार लगाई है और सूचना देने वाले के लिए इनाम की घोषणा की है।

“कहाँ गई अन्नू? एक साल से अपनी लाडली की राह तक रहे हैं बेबस परिजन, पुलिस ने जारी किया हुलिया।

क्या है पूरा मामला? परिजनों के अनुसार, अन्नू कुमारी 31 मार्च 2025 को अपने घर से किसी काम के लिए निकली थी, जिसके बाद वह वापस नहीं लौटी। काफी खोजबीन के बाद भी जब उसका पता नहीं चला, तो परिजनों ने 4 अप्रैल 2025 को सिकंदरपुर थाने में मामला दर्ज कराया। पुलिस ने इस संदर्भ में कांड सं. 49/25 दर्ज कर जांच शुरू की थी, जो अब तक जारी है।

पुलिस ने घोषित किया इनाम मुजफ्फरपुर पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए घोषणा की है कि जो भी व्यक्ति अन्नू कुमारी के बारे में सटीक और विश्वसनीय जानकारी देगा या उसकी बरामदगी में मदद करेगा, उसे ₹5,000 की नकद पुरस्कार राशि दी जाएगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी।

हुलिया और पहचान:

  • नाम: अन्नू कुमारी
  • उम्र: करीब 22 वर्ष
  • कद: लगभग 5 फीट
  • रंग: गेहुआं
  • पिता का नाम: मन्टु साह
  • पता: लकड़ीढ़ाही रोड चंदवारा, थाना-सिकंदरपुर, जिला-मुजफ्फरपुर।

यहाँ करें संपर्क: यदि आपको अन्नू के बारे में कोई भी जानकारी मिले, तो तुरंत इन नंबरों पर सूचित करें:

  1. पुलिस नियंत्रण कक्ष, मुजफ्फरपुर: 9431896700
  2. थानाध्यक्ष, सिकंदरपुर: 6287999375

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रंगे हाथ दबोची गईं घूसखोर सुपरवाइजर: नालंदा में विजिलेंस का बड़ा एक्शन, ₹3200 की घूस ने बिगाड़ा सरकारी करियर!

पटना/नालंदा: बिहार में भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो का अभियान तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में बुधवार, 06 मई 2026 को ब्यूरो की टीम ने नालंदा जिले के नगरनौसा में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। टीम ने बाल विकास परियोजना कार्यालय की महिला पर्यवेक्षिका सुषमा कुमारी को 3,200 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

सांकेतिक (प्रतीकात्‍मक) तस्‍वीर

पोषाहार पंजी पर हस्ताक्षर के लिए मांगी थी रिश्वत :  जानकारी के अनुसार, नगरनौसा निवासी परिवादिनी बेबी कुमारी (पति-  वाल्मीकि प्रसाद) ने निगरानी ब्यूरो के पटना कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि आरोपी महिला सुपरवाइजर द्वारा अप्रैल माह के सरकार से प्राप्त पोषाहार की राशि से संबंधित ‘पोषाहार पंजी’ पर हस्ताक्षर करने के बदले रिश्वत की मांग की जा रही है।

निगरानी की टीम ने सरकारी आवास पर बिछाया जाल ब्यूरो द्वारा शिकायत का सत्यापन कराया गया, जिसमें रिश्वत मांगे जाने का प्रमाण सही पाया गया। इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक शशि शेखर चौधरी के नेतृत्व में एक विशेष धावादल का गठन किया गया। बुधवार को जैसे ही सुषमा कुमारी ने नगरनौसा प्रखंड परिसर स्थित अपने सरकारी आवास पर बेबी कुमारी से 3,200 रुपये लिए, पहले से मुस्तैद निगरानी की टीम ने उन्हें दबोच लिया। आरोपी अधिकारी के पास से रिश्वत की पूरी राशि बरामद कर ली गई है।

साल 2026 में भ्रष्टाचार के खिलाफ 52वीं कार्रवाई निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध साल 2026 में यह 52वीं प्राथमिकी है। ब्यूरो अब तक इस साल 47 ट्रैप कांड दर्ज कर चुका है, जिसमें कुल 45 अभियुक्तों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। अब तक की कार्रवाई में कुल 17,51,200 रुपये की रिश्वत राशि बरामद की जा चुकी है। ब्यूरो ने स्पष्ट संदेश दिया है कि रिश्वत की राशि चाहे छोटी हो या बड़ी, भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी कर्मी को बख्शा नहीं जाएगा।

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भ्रष्टाचार की शिकायत कहाँ करें?

अगर कोई भी लोक सेवक आपसे रिश्वत की मांग करता है, तो आप इन नंबरों पर बेझिझक शिकायत दर्ज करा सकते हैं:

  • मोबाइल नंबर: 7765953261
  • व्हाट्सएप: 9473494167
  • लैंडलाइन: 0612-2215030 / 2215344
  • ई-मेल: spvig-bih@nic.in
  • पता: निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, 6 सर्कुलर रोड, पटना।

बिहार के सियासी इतिहास का वो ‘मसीहा’, जिसने मात्र 110 दिनों में बदल दी थी प्रदेश की तकदीर!

प्रथम प्रधानमंत्री बैरिस्टर मुहम्मद युनूस की जयंती पर गणमान्य लोगों ने दी श्रद्धाजंलि; उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने अर्पित किए पुष्प

पटना/मुजफ्फरपुर। बिहार के गौरवशाली इतिहास के शिल्पकार और प्रदेश के प्रथम ‘प्रधानमंत्री’ (प्रीमियर) बैरिस्टर मुहम्मद युनूस की जयंती राजकीय समारोह के रूप में पूरी गरिमा के साथ मनाई गई। पटना के श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल परिसर में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और महापुरुष की विरासत को नमन किया। इस अवसर पर बिहार के उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने युनूस के तैल चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

राजकीय समारोह के दौरान बैरिस्टर मुहम्मद युनूस के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी।

विकास और सद्भाव का अद्भुत संगम : मानवाधिकार संस्थान के महासचिव मोहम्मद इश्तेयाक ने मीडिया को  संदेश जारी कर , बैरिस्टर युनूस के अद्वितीय योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब भाषाई और सांप्रदायिक मतभेद चर्चा में रहते हैं, युनूस साहब ने 1937 में ही अपनी दूरदर्शिता से इसका समाधान कर दिया था। उन्होंने हिंदी, उर्दू, बंगला और कैथी जैसी भाषाओं को प्रशासनिक और अदालती कार्यों में उचित स्थान देकर समाज को जोड़ने का काम किया था। उनके द्वारा निकाला गया ‘मेल-मिलाप’ रिसाला (पत्रिका) आज भी सामाजिक एकता का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है।

मात्र 110 दिनों में खींची विकास की लंबी लकीर : मोहम्मद इश्तेयाक ने जारी संदेश में जोर देते हुए कहा कि बैरिस्टर युनूस की सरकार का कार्यकाल मात्र 110 दिनों का था, लेकिन उन्होंने वह कर दिखाया जो अक्सर पांच साल की सरकारें भी नहीं कर पातीं। औरंगाबाद में सांप्रदायिक तनाव को शांत करना हो, सीवान को विनाशकारी बाढ़ से बचाना हो, या किसानों के कर्ज को कम कर महाजनों पर लगाम कसना—युनूस साहब का विजन स्पष्ट था। उन्होंने डुमराव में सीमेंट और कागज की फैक्ट्री खोलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाकर बिहार के औद्योगीकरण का सपना देखा था।

जयंती समारोह में उपस्थित प्रबुद्ध नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता, जिन्होंने महापुरुष के विचारों को साझा किया।

इतिहास के पन्नों से: बिहार के पहले ‘प्रीमियर’ बैरिस्टर मुहम्मद युनूस की दास्तां

आधुनिक लोकतंत्र में जिसे हम ‘मुख्यमंत्री’ कहते हैं, 1935 के ‘गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट’ के तहत उस पद को ‘प्रधानमंत्री’ (प्रिमियर) कहा जाता था। बैरिस्टर मुहम्मद युनूस इसी संवैधानिक व्यवस्था के तहत बिहार के पहले प्रधानमंत्री बने।

 संवैधानिक संकट के संकटमोचक 1937 के चुनावों में जब कांग्रेस ने कुछ तकनीकी कारणों से सरकार बनाने से इनकार कर दिया, तब लोकतंत्र की गरिमा बचाते हुए दूसरी सबसे बड़ी पार्टी ‘मुस्लिम इंडिपेंडेंट पार्टी’ के नेता बैरिस्टर युनूस ने 1 अप्रैल 1937 को शपथ ली। उन्होंने अपनी कैबिनेट को ‘समावेशी’ बनाया, जिसमें कुमार राजीव प्रसाद सिंह और बाबू गिरी सहाय जैसे नेताओं को शामिल कर एकता का संदेश दिया।

 एक प्रख्यात बैरिस्टर और पत्रकार लंदन से कानून की पढ़ाई करने वाले युनूस साहब पटना हाई कोर्ट के नामी बैरिस्टर थे। उनकी लेखनी और पत्रकारिता में भी गहरी रुचि थी। उन्होंने ‘द पटना टाइम्स’ अखबार शुरू किया, जो उस समय जन-चेतना का प्रमुख केंद्र बना।

 निस्वार्थ सेवा की मिसाल जब कांग्रेस और ब्रिटिश सरकार के बीच विवाद सुलझ गया, तो उन्होंने बिना किसी मोह के 19 जुलाई 1937 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनका जीवन बताता है कि पद से बड़ा ‘कर्तव्य’ होता है।

बैरिस्टर मुहम्मद युनूस आज भी बिहार के उन बिरले राजनेताओं में गिने जाते हैं, जिन्होंने राजनीति को जनसेवा और सौहार्द का माध्यम बनाया। उनकी विरासत आज के समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।


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