Wednesday, July 29, 2026

गरीबों के लिए मसीहा बना सकरा का यह अस्पताल! 25 सालों से मुफ्त इलाज कर डॉक्टर ने पेश की मानवता की मिसाल

व्यवसायीकरण के दौर में सेवा का अनोखा मंदिर: हर मंगलवार को बिना एक पैसा लिए होता है सैकड़ो मरीजों  का सफल इलाज, पूसा से लेकर पातेपुर तक के लाचार मरीजों के लिए संजीवनी बना रहा है  सकरा का यह मंगलवारी कैम्‍प !

सकरा (मुजफ्फरपुर)। आज के इस आधुनिक और घोर कलयुगी दौर में जहां चिकित्सा सेवा पूरी तरह से एक बड़ा और मुनाफा कमाने वाला व्यवसाय बन चुकी है, वहीं मुजफ्फरपुर जिले के सकरा इलाके से मानवता को गौरवान्वित करने वाली एक ऐसी कहानी सामने आ रही है जो हर किसी के दिल को छू लेगी। सकरा में एक ऐसा अस्पताल है, जो पिछले 25 वर्षों से लाचार, बेसहारा, वृद्ध और आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर मरीजों के लिए किसी भगवान के घर से कम नहीं साबित हो रहा है। हम बात कर रहे हैं सकरा कॉलेज गेट के ठीक बगल में दक्षिण दिशा स्थित क्षेत्र के प्रतिष्ठित और पुराने चिकित्सालय ‘आर पी मेमोरियल चैरिटेबल हॉस्पिटल’ की। इस अस्पताल में हर मंगलवार की तरह आज भी एक विशाल मुफ्त चिकित्सीय जांच, परामर्श एवं सहायता कैंप का आयोजन किया गया।

एक-एक मरीज की फाइलों और स्वास्थ्य रिपोर्ट की बारीकी से जांच करते  चिकित्सक डॉक्टर अरुण कुमार राय। पास ही मुस्तैदी से खड़े स्वास्थ्य कर्मी और अपनी बारी के इंतजार में उम्मीद भरी नजरों से देखतीं महिला मरीज।

यह महज एक साधारण मेडिकल कैंप नहीं है, बल्कि यह पिछले 25 वर्षों की अटूट श्रद्धा, सेवा और संकल्प का एक जीवंत प्रतीक है। इलाके के प्रसिद्ध और समाजसेवी चिकित्सक डॉक्टर अरुण कुमार राय द्वारा अपने पूज्य पिता की पावन स्मृति में इस आर पी मेमोरियल चैरिटेबल हॉस्पिटल के माध्यम से प्रत्येक मंगलवार को यह अनूठा और पूरी तरह से मुफ्त चिकित्सीय शिविर आयोजित किया जाता है। डॉक्टर अरुण कुमार राय ने चिकित्सा जगत के तमाम ऐशो-आराम और व्यावसायिक फायदों को दरकिनार करते हुए अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह से समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के स्वास्थ्य कल्याण के लिए समर्पित कर दिया है।

दूर-दराज के जिलों और सुदूर देहातों से दौड़े चले आते हैं बेसहारा मरीज

इस मुफ्त चिकित्सीय जांच शिविर की ख्याति और विश्वसनीयता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ केवल सकरा के स्थानीय लोग ही नहीं आते, बल्कि पूसा, पातेपुर, बरियारपुर और चिकनौटा जैसे कई किलोमीटर दूर स्थित सुदूर ग्रामीण और देहाती इलाकों से मरीज अपनी गंभीर से गंभीर बीमारियों का इलाज कराने के लिए सुबह से ही पहॅुचने लगते हैं। ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव और अत्यंत गरीबी के कारण जो लोग बड़े शहरों के महंगे डॉक्टरों की फीस और जांच का खर्च उठाने में असमर्थ हैं, उनके लिए डॉक्टर अरुण कुमार राय का यह अस्पताल किसी वरदान और संजीवनी बूटी की तरह काम कर रहा है। आज के कैंप में भी सुबह से ही मरीजों का आना शुरू हो गया था और देखते ही देखते करीब दो दर्जन से अधिक गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज डॉक्टर साहब से परामर्श लेने पहुंचे।

सकरा के आर पी मेमोरियल चैरिटेबल हॉस्पिटल के मुख्य रजिस्ट्रेशन काउंटर पर कतारबद्ध खड़े ग्रामीण और इलाज का पर्चा हाथ में लेकर चेहरे पर गहरी संतुष्टि और मुस्कान लिए खड़ीं ग्रामीण महिलाएं और बुजुर्ग मरीज,

मुस्तैदी से डटे रहे जांबाज पारा मेडिकल स्टाफ महबूब, अमर और रोशनी

इतनी भारी संख्या में पहुंचे मरीजों की भीड़ को व्यवस्थित करना और उन्हें सही समय पर बेहतर इलाज मुहैया कराना एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था, लेकिन अस्पताल के समर्पित पारा मेडिकल स्टाफ ने अपनी मुस्तैदी से इस काम को बेहद आसान बना दिया। शिविर में पारा मेडिकल स्टाफ के मुख्य स्तंभ महबूब आलम, अमर कुमार और रोशनी खातून पूरी निष्ठा और सक्रियता के साथ अपनी ड्यूटी पर तैनात रहे। इन स्वास्थ्य कर्मियों ने न केवल काउंटर पर आने वाले हर एक मरीज का बेहद शालीनता से स्वागत किया, बल्कि बेहद मुस्तैदी से उनका प्राथमिक चेकअप किया, जिसमें मरीजों का ब्लड प्रेशर, वजन और अन्य जरूरी शुरुआती जांच शामिल थीं। इसके बाद बेहद सुव्यवस्थित तरीके से एक-एक कर सभी मरीजों को डॉक्टर अरुण कुमार राय के केबिन तक पहुंचाया गया ताकि मरीज बिना किसी हड़बड़ाहट के डॉक्टर साहब को अपनी तकलीफ बता सकें।

क्या कहते हैं गरीबों के दुखों को हरने वाले डॉक्टर अरुण कुमार राय?

शिविर की समाप्ति के बाद मीडिया से बेहद आत्मीय बातचीत करते हुए डॉक्टर अरुण कुमार राय भावुक हो गए। उन्होंने अपने इस 25 वर्षों के लंबे और गौरवशाली सफर को याद करते हुए कहा, “जब मैंने इस चैरिटेबल हॉस्पिटल की शुरुआत अपने पिता की याद में की थी, तब मेरा एकमात्र लक्ष्य यही था कि इलाके का कोई भी गरीब व्यक्ति पैसे के अभाव में बिना इलाज के न मरे। आज इस सफर को 25 वर्ष से ज्‍यादा  हो चुके हैं और मुझे यह बताते हुए बेहद आत्मसंतुष्टि और गर्व की अनुभूति हो रही है कि सिर्फ इस मंगलवार वाले विशेष मुफ्त कैंप के माध्यम से अब तक हजारों-हजार मरीज पूरी तरह से ठीक होकर अपने घरों को लौट चुके हैं और खुशहाल जीवन जी रहे हैं।”

डॉक्टर अरुण कुमार राय ने आगे विस्तार से बताते हुए कहा, “आज भी हमारे इस सेवा शिविर में करीब दो दर्जन से अधिक असहाय मरीज इलाज के लिए पहुंचे हैं। मैं समाज को यह विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि आगे भी जीवन की आखिरी सांस तक प्रत्येक मंगलवार को यह मुफ्त चिकित्सीय जांच और परामर्श शिविर इसी तरह पूरी भव्यता और सेवा भाव के साथ चलता रहेगा। हमारा यह संकल्प अटूट है।” डॉक्टर अरुण कुमार राय ने कहा कि, “जो मरीज बहुत ज्यादा वृद्ध हैं, शारीरिक रूप से लाचार हैं, चलने-फिरने में असमर्थ हैं, या फिर ऐसे  मरीज जिनके परिवार में उनकी देखभाल करने वाला कोई दूसरा सदस्य मौजूद नहीं है, उन्हें हमारे इस आर पी मेमोरियल चैरिटेबल हॉस्पिटल की तरफ से न केवल मुफ्त डॉक्टर परामर्श दिया जाता है, बल्कि उन्हें ठीक होने के लिए आवश्यक दवाइयां भी  मुफ्त में उपलब्ध कराई जाती हैं, ताकि वे स्‍वास्‍थ्‍य लाभ प्राप्‍त कर सकें ।”

आज के कैंप में आज ईलाज के लिए आये मरीजों की सूची:

अस्पताल के आधिकारिक और पंजीकृत रिकॉर्ड के अनुसार, दोपहर तक आज के इस शिविर में  गंभीर बीमारियों का सफल इलाज कराने और मुफ्त परामर्श पाने वाले मुख्य मरीजों की सूची इस प्रकार है, जिन्हें डॉक्टर साहब ने खुद अपने हाथों से देखा और दवाइयां लिखीं: अबेदा खातून – निवासी: पातेपुर चौराहा,रिभा कुमारी – निवासी: रायपुरा ,राधा देवी – निवासी: मरीचा, पुतुल कुमारी – निवासी: सादपुर,राजकिशोर ठाकुर – निवासी: कटेसर, लीला देवी – निवासी: सुजावलपुर , सोनम कुमारी – निवासी: जे पी ब्रह्मपुरा, सोनू कुमार – निवासी: लोहारगामा, रामरती देवी – निवासी: शहदउल्लापुर, राबिया खातून – निवासी: खेसराही,कायनात बानो – निवासी: खेसराही, सुधीर कुमार – निवासी: खास पट्टी, जगन्नाथपुर, अनिल कुमार राय – निवासी: मनोहर पट्टी, मंटू देवी – निवासी: रैनी ,अशर्फी देवी – निवासी: रैनी, सहित अन्‍य दर्जनों मरीज को देखा गया ।

निश्चित रूप से, आर पी मेमोरियल चैरिटेबल हॉस्पिटल और डॉक्टर अरुण कुमार राय द्वारा किया जा रहा यह निस्वार्थ कार्य आज के आधुनिक समाज के लिए एक महान प्रेरणा है। इस अस्पताल ने यह साबित कर दिया है कि अगर मन में सच्ची सेवा की भावना हो, तो बिना किसी सरकारी मदद या भारी-भरकम फंड के भी हजारों असहाय लोगों की जिंदगी को संवारा और बचाया जा सकता है।

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किराये का खेल खत्म: पंचायत सरकार भवन में शिफ्ट होगा मुरौल नगर पंचायत कार्यालय, प्रशासन की हरी झंडी

सहयोग पोर्टल पर मची खलबली! मुजफ्फरपुर के सादिकपुर मुरौल मामले में सरकार सख्त, किराये के मकान के खेल में शामिल चेहरे होंगे बेनकाब!

मुजफ्फरपुर, 6 जुलाई 2026: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से सरकारी पैसे के क्रूर दुरुपयोग और प्रशासनिक व्यवस्था की मनमानी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे पंचायती राज विभाग को हिलाकर रख दिया है। नगर पंचायत मुरौल में सभी सुख-सुविधाओं से लैस एक भव्य ‘पंचायत सरकार भवन’ पहले से ही सीना ताने खड़ा है, लेकिन इसके बावजूद जनता की गाढ़ी कमाई को पानी की तरह बहाते हुए नगर पंचायत का दफ्तर एक निजी किराये के मकान में चलाया जा रहा था। इतना ही नहीं, भ्रष्टाचार और लापरवाही की हद तो तब पार हो गई जब इस मजबूत और सर्वसुविधा युक्त सरकारी भवन को कार्यालय संचालन के लिए अनुपयुक्त यानी पूरी तरह से बेकार घोषित कर दिया गया और कागजों पर एक बिल्कुल नये भवन के निर्माण की अनुशंसा तक भेज दी गई। सरकारी खजाने को चूना लगाने की इस सोची-समझी साजिश का भंडाफोड़ तब हुआ जब सादिकपुर मुरौल के रहने वाले एक जागरूक नागरिक एवं मुरौल नगर पंचायत के वार्ड पार्षद आनंद कन्द साह ने इस महाघोटाले के खिलाफ सीधे सरकार के ‘सहयोग पोर्टल’ पर मोर्चा खोल दिया।

सादिकपुर मुरौल के निर्माणाधीन भवन के पूरा होने तक वर्तमान पंचायत सरकार भवन( सत्‍यनारायण पंचायत सरकार भवन)  के केवल 2 कमरों को छोड़कर शेष पूरे परिसर में नवगठित नगर पंचायत मुरौल का कार्यालय तुरंत शिफ्ट कर नियमित रूप से संचालित किया जाने को हरी झंडी

क्या है पूरा खेल और कैसे रची गई साजिश? :  शिकायतकर्ता आनंद कन्द साह, पंजीकरण संख्या REF452154, जो ग्राम पंचायत राज सादिकपुर मुरौल के निवासी हैं, ने विभाग में एक धारदार परिवाद पत्र दाखिल किया था। इस शिकायत में उन्होंने सीधे तौर पर भ्रष्ट तंत्र पर कड़े सवाल दागे कि जब नगर पंचायत मुरौल के अधिकार क्षेत्र में पहले से ही करोड़ों की लागत से बना आलीशान पंचायत सरकार भवन उपलब्ध है, तो फिर जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा एक निजी किराये के मकान पर क्यों लुटाया जा रहा है? इसके साथ ही, वर्तमान के सुदृढ़ और पूरी तरह से सुरक्षित सरकारी भवन को रातों-रात अनुपयुक्त बताकर नये सिरे से नया भवन बनाने की सिफारिश करने के पीछे आखिर अधिकारियों की क्या काली मंशा थी, इस पर भी तीखे सवाल खड़े किए गए। इस एक शिकायत ने दफ्तरों में आराम फरमा रहे अफसरों की नींद उड़ा दी।

पटना से जारी कड़ा फरमान: आनंद कुमार साह की शिकायत सीधे विभागीय स्तर (एल3) पर पहुंचने के बाद पंचायती राज विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी ललित राही द्वारा जारी आधिकारिक आदेश (पत्रांक 9695)। इस पत्र के जरिए मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन को पूरे मामले की जांच कर मात्र 24 घंटे के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने का सख्त अल्टीमेटम दिया गया है।

अधिकारियों के बीच मची खलबली, पत्रों का दौर शुरू  : जैसे ही यह मामला सहयोग पोर्टल के जरिए आला अधिकारियों तक पहुंचा, विभाग के भीतर जबरदस्त खलबली मच गई। पंचायती राज विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी ने इस बेहद गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए तत्काल मुजफ्फरपुर के जिला पंचायत राज पदाधिकारी से पत्रांक 9695/पं0रा0 के जरिए सीधे तौर पर जवाब तलब कर लिया। इसके बाद जांच और पत्राचार की जो कड़ियां सामने आईं, उसने इस पूरे तंत्र के काले कारनामों की पोल खोलकर रख दी:

  • नगर कार्यपालक पदाधिकारी (नगर पंचायत मुरौल) ने पत्रांक 722 के जरिए प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी से नवगठित नगर निकाय के संचालन के लिए पंचायत सरकार भवन उपलब्ध कराने का एक अनुरोध किया था।
  • इसके तुरंत बाद, प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी ने पत्रांक 118 के जरिए इस पूरे मामले की जटिल स्थिति को देखते हुए जिला मुख्यालय से दिशा-निर्देश और मार्गदर्शन मांगा, जिससे साफ है कि परदे के पीछे कुछ बड़ा पक रहा था।
समाहरणालय मुजफ्फरपुर की बड़ी कार्रवाई: पंचायती राज विभाग के निर्देश पर जिला पंचायत राज पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर द्वारा जारी विस्तृत जांच रिपोर्ट (ज्ञापांक 3603)। इस पत्र ने वर्तमान सरकारी भवन को ‘अनुपयुक्त’ बताने वाली साजिश का भंडाफोड़ करते हुए स्पष्ट किया कि भवन पूरी तरह उपयुक्त है और किराये के मकान का खेल अब बंद होगा।
प्रशासन का अंतिम हंटर और आदेश की प्रति: जिला पंचायत राज पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर द्वारा हस्ताक्षरित अंतिम आदेश का मुख्य अंश। इसमें स्पष्ट निर्देश है कि सादिकपुर मुरौल के निर्माणाधीन भवन के पूरा होने तक वर्तमान पंचायत सरकार भवन के केवल 2 कमरों को छोड़कर शेष पूरे परिसर में नवगठित नगर पंचायत मुरौल का कार्यालय तुरंत शिफ्ट कर नियमित रूप से संचालित किया जाए।(उपर के पत्र का कोट किया हुआ हिस्‍सा)

जांच में हुआ महाखुलासा: बिल्कुल सही है सरकारी भवन  लगातार बढ़ते दबाव के बाद जिला पंचायत राज पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर द्वारा इस पूरे मामले की स्थलीय जांच की गई। इस उच्च स्तरीय जांच रिपोर्ट में जो सच सामने आया वह चौंकाने वाला था। जांच में यह पूरी तरह साफ हो गया कि नगर पंचायत मुरौल के क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला यह पंचायत सरकार भवन कार्यालय के नियमित और सुचारू संचालन के लिए शत-प्रतिशत उपयुक्त और मजबूत है। नये भवन के निर्माण की पूरी थ्योरी मनगढ़ंत और पूरी तरह से बेबुनियाद पाई गई, जो केवल बजट खपाने के लिए रची गई थी।

अस्थायी व्यवस्था और प्रशासन का हंटर:  जांच रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में ग्राम पंचायत राज सादिकपुर मुरौल का नया पंचायत सरकार भवन अभी निर्माणाधीन है, जिस कारण सादिकपुर मुरौल का ग्राम पंचायत कार्यालय और ग्राम कचहरी इसी पुराने भवन से अस्थायी रूप से संचालित हो रहे हैं। इस समस्या का त्वरित समाधान निकालते हुए जिला पंचायत राज पदाधिकारी ने बिहार सरकार के नगर आवास एवं आवास विभाग के कड़े नियमों (पत्रांक 1284/न0वि0 एवं आ0वि0) का हवाला देते हुए अपना अंतिम आदेश जारी कर दिया है:

“जब तक ग्राम पंचायत राज सादिकपुर मुरौल के नये भवन का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक वर्तमान पंचायत सरकार भवन के केवल 2 कमरों को ग्राम पंचायत कार्यालय के लिए सुरक्षित छोड़ा जाएगा। इसके अलावा शेष पूरे विशाल पंचायत सरकार भवन में नवगठित नगर पंचायत मुरौल के कार्यालय को तुरंत शिफ्ट कर नियमित रूप से संचालित किया जाएगा।”

इस कड़े फैसले और रिपोर्ट की प्रतिलिपि जिलाधिकारी मुजफ्फरपुर को सादर सूचनार्थ एवं अनुमोदनार्थ भेज दी गई है। साथ ही प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी और नगर कार्यपालक पदाधिकारी को इस पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।

सांकेतिक (प्रतीकात्‍मक) तस्‍वीर

पटना तक हड़कंप, एल3 स्तर पर पहुंची शिकायत: 24 घंटे में मांगी रिपोर्ट! यह पूरा मामला तब और अधिक गरमा गया जब सहयोग पोर्टल पर लंबित यह शिकायत सीधे एल3 (L3) यानी सर्वोच्च विभागीय स्तर पर पहुंच गई। मामले की संवेदनशीलता और सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को देखते हुए पंचायती राज विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी ललित राही ने मुजफ्फरपुर के जिला पदाधिकारी को पत्र जारी कर पूरे मामले पर बिजली की गति से कार्रवाई करने का आदेश दिया है। विभाग ने साफ किया है कि आनंद कुमार साह, पिता-मनोज कुमार की इस शिकायत के सभी बिंदुओं की गहनता से नियमानुसार जांच कर मात्र 24 घंटे के भीतर की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट विभाग को सौंपी जाए। इस मामले को सरकार ने शीर्ष प्राथमिकता पर रखा है।

विशेष कार्य पदाधिकारी ललित राही ने इस संबंध में ज्ञापांक 2प/पं०स०भ०-09-15/2020/9695/पं०रा० दिनांक 01/07/2026 के जरिए मुजफ्फरपुर के जिला पंचायत राज पदाधिकारी को भी सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रतिलिपि भेज दी है, ताकि धरातल पर तुरंत एक्शन लिया जा सके। इसके साथ ही विभागीय गै०स०प्रे०सं-2253 दिनांक 25.06.2026 के आलोक में नोडल पदाधिकारी, सहयोग शिविर कोषांग-सह-विशेष कार्य पदाधिकारी, पंचायती राज विभाग को भी इस संबंध में सूचित कर दिया गया है। अब देखना यह होगा कि विभाग के इस बेहद कड़े और अल्टीमेटम वाले आदेश के बाद मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन इस किराये के मकान के खेल में शामिल जिम्मेदार चेहरों पर अगले 24 घंटे के भीतर क्या कार्रवाई करता है।

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बिहार की राजनीति में सबसे बड़ा टसल ! बांकीपुर से खुद चुनावी मैदान में उतरे प्रशांत किशोर, महावीर मंदिर में टेका माथा!

पटना से आई बड़ी खबर: व्यवस्था बदलने के लिए प्रशांत किशोर ने चली सबसे बड़ी चाल

पटना। बिहार की सियासत में इस वक्त का सबसे बड़ा भूचाल आ चुका है। बांकीपुर विधानसभा उप-चुनाव के लिए जन सुराज पार्टी ने एक ऐसा चौंकाने वाला फैसला लिया है जिसने विरोधियों के होश उड़ा दिए हैं। जन सुराज पार्टी ने किसी और को नहीं, बल्कि खुद पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर के नाम का ऐलान चुनावी उम्मीदवार के रूप में कर दिया है। इस घोषणा के साथ ही बिहार की चुनावी जंग बेहद रोमांचक और हाई-प्रोफाइल हो गई है।

 बांकीपुर विधानसभा उप-चुनाव के लिए जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार घोषित होने के बाद पटना के ऐतिहासिक महावीर मंदिर में पूजा-अर्चना करते प्रशांत किशोर। मंदिर के पुजारी उन्हें तिलक लगाकर और माला पहनाकर आशीर्वाद देते हुए।

महावीर मंदिर पहुंचे प्रशांत किशोर, जीत के लिए मांगा आशीर्वाद

बांकीपुर विधानसभा उप-चुनाव के लिए आधिकारिक तौर पर उम्मीदवार घोषित होने के तुरंत बाद प्रशांत किशोर पटना के प्रसिद्ध महावीर (हनुमान) मंदिर पहुंचे। वहां उन्होंने बजरंगबली की पूजा-अर्चना की, माथा टेका और जीत के लिए आशीर्वाद लिया। मंदिर के पुजारियों ने उन्हें तिलक लगाया और अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया। मंदिर परिसर में प्रशांत किशोर को देखने के लिए समर्थकों और मीडियाकर्मियों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा।

यह चुनाव विधायक चुनने का नहीं, बिहार की तकदीर बदलने का है” – प्रशांत किशोर

महावीर मंदिर में दर्शन करने के बाद मीडिया के कैमरों और माइक के सामने आते ही प्रशांत किशोर ने एक बेहद दमदार और बड़ा बयान दिया। उन्होंने सीधे तौर पर बांकीपुर के मतदाताओं को संबोधित करते हुए इसे केवल एक आम उप-चुनाव मानने से इनकार कर दिया।

महावीर मंदिर परिसर के बाहर भारी संख्या में मौजूद मीडियाकर्मियों से बातचीत करते और बांकीपुर के विकास के लिए अपना विजन रखते जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार प्रशांत किशोर।

प्रशांत किशोर ने कहा:

“बांकीपुर का यह उप-चुनाव किसी व्यक्ति को विधायक बनाने, जिताने या हराने का चुनाव नहीं है। यह सरकार बनाने-बिगाड़ने का भी चुनाव नहीं है। यह बिहार में एक नई राजनीतिक शुरुआत का चुनाव है, बिहार की राजनीति को एक नई दिशा देने का चुनाव है।”

उन्होंने आगे बांकीपुर के मतदाताओं की तारीफ करते हुए कहा कि यह जिम्मेदारी, ऊपर वाले की कृपा से, बिहार के सबसे प्रबुद्ध और सबसे समृद्ध मतदाताओं के कंधों पर है। उनके कंधों पर यह जिम्मेदारी है कि बिहार की राजनीति को एक नई दिशा दी जाए।

जाति-धर्म से ऊपर उठकर वोट करने की अपील

प्रशांत किशोर ने जनता पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि इतने प्रबुद्ध और समृद्ध लोग, अपनी जाति, धर्म, दल, विचारधारा और नेताओं की चिंता किए बगैर सिर्फ और सिर्फ बिहार के भविष्य की चिंता करेंगे। लोग बिहार में एक बेहतर व्यवस्था बने, इसकी चिंता करके वोट देंगे और बांकीपुर से पूरे बिहार में एक बिल्कुल नई और साफ-सुथरी राजनीति की शुरुआत होगी।

जन सुराज के इस बड़े दांव के बाद अब बांकीपुर का उप-चुनाव पूरे देश की नजरों में आ गया है और आने वाले दिनों में यहां की राजनीतिक सरगर्मी और तेज होने वाली है।

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पटना एम्स का होगा विस्‍तार : मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का औचक दौरा, रोगियों के लिए बड़ा ऐलान, 200 नए बेड बढ़ाए जाएंगे , मिलेगी 24 एकड़ जमीन और चमचमाती 4-लेन सड़क!

पटना, 05 जुलाई 2026: बिहार के स्वास्थ्य सिस्टम को सुपरफास्ट और बेहद मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को पटना एम्स का तूफानी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं को बारीकी से परखा और मरीजों की सहूलियत के लिए कई बड़ी घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने साफ तौर पर ऐलान किया कि राज्य सरकार पटना एम्स के विस्तार के लिए जल्द ही 24 एकड़ अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराएगी। इस नई जमीन के मिलने से एम्स में लगभग 200 नए बेड बढ़ाए जाएंगे, जिससे मरीजों को अब बेड के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और अस्पताल की रोगी सेवा क्षमता में भारी इजाफा होगा।

पटना एम्स परिसर में रेड कार्पेट पर सुरक्षाकर्मियों और एम्स के निदेशक प्रो० (ब्रिग०) डॉ० राजू अग्रवाल के साथ निरीक्षण के लिए आगे बढ़ते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी।

गंभीर मरीजों के लिए बनेगी स्किन स्टोरेज व्यवस्था और मिलेगी जाम से मुक्ति

मुख्यमंत्री ने बर्न वार्ड का दौरा कर वहां इलाज करा रहे गंभीर रूप से झुलसे मरीजों से मुलाकात की, उनका हौसला बढ़ाया और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने डॉक्टरों को निर्देश दिया कि गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के समय पर और बेहतर इलाज के लिए यहां जल्द से जल्द स्किन स्टोरेज (त्वचा भंडारण) की आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाए। इसके साथ ही मरीजों और उनके परिजनों को यातायात में होने वाली असुविधा को देखते हुए उन्होंने एम्स से लेकर नाथूपुर तक बनने वाली 4-लेन सड़क के निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूरा करने का सख्त निर्देश दिया ताकि लोगों को जाम से पूरी तरह मुक्ति मिल सके।

पटना एम्स के भीतर चिकित्सा व्यवस्थाओं और सुविधाओं की बेहतरी को लेकर एक महिला डॉक्टर से विस्तृत फीडबैक लेते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी।

एम्स का तालाब बनेगा पर्यटन केंद्र, इन हाई-टेक विभागों का हुआ निरीक्षण

अस्पताल परिसर में मौजूद तालाब को लेकर भी मुख्यमंत्री ने एक अनोखा निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इस तालाब का पूरी तरह से जीर्णोद्धार कर इसे एक खूबसूरत पर्यटन और आकर्षण का केंद्र बनाया जाए, ताकि यह स्थान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लोगों के लिए सुंदर और उपयोगी स्थल बन सके। अपने इस दौरे में मुख्यमंत्री ने न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग के पेट-सिटी रूम, स्पेक्ट सिटी रूम, रेडियो फार्मेसी लैब के साथ-साथ ऑन्कोलॉजी डिविजन, एनॉटोमी विभाग और ओ०पी०डी० का भी गहन निरीक्षण किया और वहां दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली।

एम्स के वार्ड में बेड पर भर्ती एक बीमार बच्चे का हालचाल जानते, उसकी मां का ढांढस बंधाते और डॉक्टर से इलाज की जानकारी लेते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी।

मौके पर मौजूद रहे ये आला अधिकारी

इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि, स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव अरविंद कुमार चौधरी, बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बी०एम०एस०आई०सी०एल०) के प्रबंध निदेशक सुब्रत कुमार सेन, एम्स के निदेशक प्रो० (ब्रिग०) डॉ० राजू अग्रवाल समेत कई वरिष्ठ डॉक्टर और अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

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सकरा श्मशान अतिक्रमण का शिकार: बच्चों की समाधि मिटाकर प्लॉटिंग, बहाया जा रहा गंदा नाला,प्रशासन जल्‍द कराये मापी !  

पूर्व मुखिया सतीश पासवान ने नगर पंचायत अध्यक्ष और संबंधित अधिकारियों से इसे  मुक्ति धामके रूप में विकसित किए जाने की मांग की !

विशेष रिपोर्ट : एस. एस.  कुमार ‘पंकज’

सकरा (मुजफ्फरपुर)  : सकरा प्रखंड मुख्यालय से महज 100 मीटर दक्षिण स्थित श्मशान घाट इन दिनों न सिर्फ भूमाफिया की गिद्ध दृष्टि का शिकार है, बल्कि अब वहां कुछ ऐसा घटित हुआ है जिसने सनसनी फैला दी है। श्मशान की जमीन की अवैध खरीद-बिक्री, बेतरतीब अतिक्रमण और वहां बहाए जा रहे गंदे नाले के कड़वे सच को उजागर करने पहुंचे पत्रकार के कैमरे में एक ऐसी मानव छायाकृति कैद हुई है, जिसे देखकर लोगों में कौतुहल हैं और चर्चा  तरह तरह की हैं। लेकिन न्यूज़ भारत टीवी इस तस्‍वीर को न कोई तूल देती है, और न हीअंधविश्वास को बढ़ावा देने की मंशा रखती है।

शुक्रवार की शाम 4 बजे कैमरे में कैद हुआ यह मंजर

पूरा मामला बीते शुक्रवार का है, जब न्यूज भारत टीवी के पत्रकार कुमार ‘पंकज’ श्मशान की कीमती जमीन को दलालों द्वारा हेराफेरी कर बेचने, अतिक्रमण करने और श्मशान के बीचों-बीच से गंदा नाला चीर कर बहाने के गंभीर मामले की ग्राउंड रिपोर्टिंग (कवरेज) करने गए थे। संध्या के 4 बज रहे थे और पूरा श्मशान परिसर पूरी तरह सुनसान और खाली था और एक चिता जल रही थी । पत्रकार द्वारा वहां की दुर्दशा को दिखाने के लिए कुल 10 तस्वीरें ली गईं। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस समय तस्वीरें खींची जा रही थीं, उस समय वहां  कोई  भी मौजूद नहीं था। लेकिन आज जब पत्रकार कुमार पंकज ने श्मशान की बदइंतजामी और दलालों के कारनामों पर खबर लिखने की शुरुआत की और सबूत के तौर पर तस्वीरों को खंगालना शुरू किया, तो उनके होश उड़ गए। तस्वीरों में से 1 तस्वीर में एक साफ-साफ न दिखने वाली, लेकिन स्पष्ट मानव जैसी बैठी हुई  छायाकृति दिखाई दे रही है, जिसे स्थानीय लोग, अब इसका तरह तरह का मतलब निकाल रहे हैं।

रहस्यमयी आकृति: पत्रकार के कैमरे में कैद हुई एक अस्पष्ट छाया, जिसे लेकर स्थानीय लोग तरह-तरह की चर्चा कर रहे हैं. हालाँकि एक्सपर्ट्स इसे तकनीकी खामी मानते हैं.

क्‍या कहते हैं फोटो कैमरा के एक्‍सपर्ट : कैमरे में कैद हुई इस धुंधली आकृति को किसी अंधविश्वास, अलौकिक शक्ति या रहस्य से जोड़कर देखना पूरी तरह भ्रामक होगा। वैज्ञानिक और तकनीकी दृष्टिकोण से, तेज धूप या शाम के ढलते समय (विशेषकर संध्या 4 बजे) खुले आसमान के नीचे तस्वीरें खींचते समय अक्सर लेंस फ्लेयर , प्रकाश के अपवर्तन  या रोशनी और परछाई के खेल  के कारण ऐसी आकृतियां उभर आती हैं। कैमरे के लेंस पर पड़ने वाली सीधी रोशनी या कैमरे के हिलने  की वजह से भी कई बार तस्वीरों में इंसानी साये जैसी तकनीकी खामियां दर्ज हो जाती हैं। अतः इसे किसी रहस्यमयी घटना के बजाय पूरी तरह से एक सामान्य तकनीकी त्रुटि या कैमरे की खामी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

मुख्य समाचार :

 सकरा में मासूमों के श्मशान पर गिद्ध दृष्टि, ढूह मिटाकर कर दी प्लॉटिंग

सकरा प्रखंड मुख्यालय के आसपास की जमीन की कीमत आसमान छू रही है। यहां लाखों रुपए प्रति कट्टा की दर से जमीन बिकने की बात लगातार सामने आती रहती है। इसी लालच में कई सफेदपोश और दलाल अब श्मशान की जमीन को अपनी पूर्वजों की संपत्ति बताकर हड़पने का दावा कर रहे हैं। श्मशान की चहारदीवारी न होने का पूरा फायदा उठाया जा रहा है, जिससे इसकी सटीक लंबाई-चौड़ाई का पता ही नहीं चल पाता है। मानक के विपरीत जाकर श्मशान के आसपास बेतरतीब ढंग से भारी मिट्टी कटाई भी की गई है।

सकरा के इस श्‍मशान  में दो प्रकार के श्मशान की व्यवस्था रही है। छोटे बच्चों के लिए प्रखंड कार्यालय के दक्षिण पूर्व में महदेईया पोखर के पास सटा हुआ श्मशान है। यहाँ बच्चों के शवों को सीधे मिट्टी में दफनाया जाता था। स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि 8 से 10 वर्ष पहले तक लोग अपने बच्चों के चिता स्थल के ढूह (मिट्टी का टीला) को देखकर पहचान जाते थे कि यहाँ उनके बच्चे की समाधि है। लेकिन दलालों की नजर पड़ते ही बच्चों के श्मशान की मिट्टी को समतल कर दिया गया ताकि कब्रों का नामोनिशान मिटाया जा सके। कुछ नेता किस्म के लोग अपने पावर और पहुंच के कारण बच्चे वाले इस श्मशान पर गिद्ध दृष्टि गड़ाए हुए हैं और वहां बकायदा रास्ता निकालकर और प्लॉटिंग कर जमीन बेचने की पूरी जुगत लगाई जा रही है।यदि समय रहते प्रशासन कारवाई नहीं करती है, तो कुछ माह  में ही यहां, मकान बनते देर नहीं होगी,

श्मशान की पवित्र भूमि पर खुलेआम अतिक्रमण कर नेनुआ (बाएँ), केला और अमरूद (दाएँ) उगाने की शर्मनाक तस्वीरें सामने आई हैं.

चिता स्थल उजाड़कर उगाई जा रही है सब्जी, बह रहा गंदा नाला, बना दिया सोख्‍ता

बच्चों के श्मशान से ठीक पश्चिम , सयाने और वयस्क लोगों के लिए श्मशान स्थित है, जहाँ चिता दहन किया जाता है। स्थिति यहां भी गंभीर है । अब जब भी यहाँ कोई दाह संस्कार करने आता है, तो  अतिक्रमणकारी के साथ  झड़प होने की स्थिति उत्‍पन्‍न हो जाती हैं। हद तो तब हो गई जब श्मशान से सटे एक विद्यालय संचालक द्वारा श्मशान की भूमि पर खुलेआम अतिक्रमण का मामला सामने आया। पूरब एवं उत्‍तर कोण पर विद्यालय संचालक ने श्मशान की पवित्र भूमि को चीरकर बीचों-बीच एक गंदा नाला बहा दिया है, जिससे हर तरफ बदबू और गंदगी पसरी है। इतना ही नहीं, चिता स्थल को उजाड़कर वहाँ केला, अमरूद और सब्जियों की खेती की जा रही है। वर्तमान में बांस का ढाट लगाकर नेनुआ की खेती करने की शर्मनाक तस्वीर भी सामने आई है। श्मशान की भूमि पर एक पक्का सोखता बनाए जाने को लेकर पूर्व में भी  विवाद हुआ था, लेकिन इस टैंक को विद्यालय संचालक ने अब तक नहीं  हटाया है, जो आने वाले समय में यहाँ किसी बड़े संघर्ष का कारण बन सकता है। प्रखंड प्रशासन द्वारा मापी कराए जाने पर यह अतिक्रमण पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगा।

हमारा दायित्व केवल स्कूल की बाउंड्री के भीतर तक सीमित है, बाहर की गतिविधियों से कोई सरोकार नहीं” स्कूल संचालक सपनजीत देव

श्मशान की भूमि के एक हिस्से पर कथित उपभोग, खेती और नाला निर्माण के मामले पर स्कूल संचालक सपनजीत देव ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि उनके विद्यालय की बाउंड्री वॉल पूरी तरह तय है और प्रबंधन का सरोकार केवल अपनी चहारदीवारी के अंदर की व्यवस्था से है। बाउंड्री के बाहर आगे-पीछे क्या गतिविधियां चल रही हैं, इससे स्कूल का कोई लेना-देना नहीं है।

सार्वजनिक भूमि पर उगी फसलों पर प्रतिक्रिया: परिसर के पिछले हिस्से में हो रही केला, अमरूद और अन्य सब्जियों की खेती के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, यह पूरी तरह से एक सार्वजनिक स्थल (श्मशान) है। यदि वहां कोई पेड़-पौधे या फसलें उगी भी हैं, तो वे किसी की निजी संपत्ति नहीं हो सकतीं। श्मशान जैसी जगहों पर उगे फल-सब्जियों पर किसी एक व्यक्ति का एकाधिकार नहीं होता, बल्कि वह सार्वजनिक संपत्ति है जिसे कोई भी उपयोग में ला सकता है।”

पवित्रता पर प्रहार: दो अलग-अलग कोणों से दिखता एक लम्बा, कच्चा नाला: श्मशान की भूमि को चीरकर बीचों-बीच बहाया गया गंदा नाला, जिससे दुर्गंध और गंदगी फैल रही है.

पुराने नाले और कब्ज़े के दावों पर पक्ष: श्मशान के बीच से गुजरने वाले लंबे नाले और अन्य निर्माणों के सवाल पर सपनजीत देव ने कहा कि वह स्वयं यहां साल 2018 में आए थे। यह नाला कोई नया निर्माण नहीं है, बल्कि कम से कम 20 साल पुराना है जो उनके यहां आने के काफी पहले से मौजूद है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि किसी सार्वजनिक स्थल या व्यवस्था में कहीं कोई त्रुटि या दिक्कत है, तो उसे आपसी समझ से ठीक कर लिया जाना चाहिए।

हांलाकि कुछ माह पूर्व फरवरी 2026  में पत्रकार कुमार पंकज के द्वारा उक्‍त स्‍थल पर खबर लिखने के उद्देश्‍य से विडियो कैप्‍चर किया गया था, उसमें उक्‍त नाला कहीं नहीं दिख रहा है, नाला हाल का खुदा है, और इसकी मिट्टी ताजी है  

उन्होंने अंत में दोहराया कि यह एक सामाजिक विषय है जिसका निदान भी सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर होना चाहिए, क्योंकि स्कूल प्रबंधन सिर्फ अपने निर्धारित दायरे के भीतर ही जिम्मेदार है।

विवादित निर्माण: बाएँ ज़मीन में दबा कंक्रीट का हिस्सा (सर्कल में), दाएँ: एक पत्थर को उठाते लोग.श्मशान भूमि पर बनाया गया पक्का सोखता (बाएँ), जिस पर पूर्व में भी विवाद हुआ था. इसे ‘कपड़ा साफ़ करने का पत्थर’ (दाएँ) भी कहा जा रहा है.

श्मशान भूमि पर अतिक्रमण के आरोपों को केके सर ने नकारा, कहा- “वहाँ सब कुछ लावारिस, नापी के बाद ही साफ होगी स्थिति”

कृष्ण कुमार (केके सर का पक्ष): श्मशान की जमीन पर अतिक्रमण, टैंक निर्माण और पेड़-पौधे लगाने के आरोपों पर श्‍मशान  के सटे हॉस्‍टल संचालक  कृष्ण कुमार (के के सर) ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उनका कहना है कि लगाए जा रहे सभी आरोप निराधार हैं और श्मशान में मौजूद चीजें किसी व्यक्ति विशेष की नहीं हैं। उनके बयान के मुख्य अंश इस प्रकार हैं:

अतिक्रमण की बानगी(फाइल फोटो) : एक तरफ खेत में खड़ी गोभी की फसल और दूसरी तरफ भीड़भाड़.आरोप है कि चिता स्थल को उजाड़कर वहाँ सब्जियों की खेती (बाएँ) की जा रही है. ग्रामीणों ने इस पर आपत्ति जताई (दाएँ).
  • सब कुछ लावारिस है, मेरा कोई अधिकार नहीं: श्मशान भूमि पर केला, अमरूद या अन्य चीजें होने के सवाल पर केके सर ने कहा, वहाँ सब कुछ लावारिस है। अमरूद का पेड़ किसी ने रोपा नहीं है, बल्कि बच्चों द्वारा खाकर बीज फेंकने से वह खुद उग आया है।” उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उस जमीन या वहां मौजूद चीजों पर उनका कोई व्यक्तिगत अधिकार नहीं है।
  • टैंक नहीं, कपड़ा साफ करने का पत्थर है: श्मशान में किसी टैंक या टंकी के होने की बात को खारिज करते हुए केके सर ने बताया कि वह कोई टैंक नहीं है। वह केवल एक सोझा पत्थर है, जिसका उपयोग लोग कपड़ा आदि साफ करने के लिए करते हैं। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि कोई भी उसे उठाकर देख सकता है, उसमें कोई टंकी नहीं बनी है।
  • अतिक्रमण के आरोपों पर दी खुली छूट: अतिक्रमण के सवाल पर उन्होंने कहा, मैंने वहाँ कोई अतिक्रमण नहीं किया है। प्रशासन या जनता वहां आ कर उसकी नापी करवा सकती है और उसे उझार (हटा) सकती है, मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है।”
  • जमीन की स्थिति और नापी पर जोर: केके सर के अनुसार, वह श्मशान भूमि अभी भी पूरी तरह सरकारी नहीं हुई है और वह निजी संपत्ति की तरह है। उन्होंने कहा कि जब तक प्रशासनिक स्तर पर इसकी सही नापी नहीं होती, तब तक यह कहना मुश्किल है कि कौन सी जगह किसकी है। नापी के बाद ही पता चलेगा कि जमीन आनंद मार्ग संस्था की है, पब्लिक की है या किसी अन्य की।
  • सकारात्मक पत्रकारिता की अपील: उन्होंने पत्रकार से बातचीत में कहा कि श्मशान जैसी परती जगहों पर प्रकृति द्वारा पेड़-पौधे उगने को सकारात्मक रूप से देखा जाना चाहिए ताकि समाज और बच्चों को इसका लाभ मिल सके।
श्मशान की बदहाली: एक उजाड़, सूखी ज़मीन का दृश्य जहाँ कचरा बिखरा है (सर्कल में शौचालय का नाला )एवं गन्‍दगी के आगोश में स्‍मारक, सकरा प्रखंड मुख्यालय के पास स्थित मुख्य श्मशान घाट, जहाँ सुविधाओं का घोर अभाव है और हर तरफ गंदगी पसरी है.

 कृष्ण कुमार (केके सर) ने स्पष्ट किया है कि श्मशान के मामले में उनका कोई व्यक्तिगत हित या लोभ नहीं है। मामला श्मशान की प्रॉपर्टी और निजी दावों के बीच का है, जिसे उचित मापी के द्वारा ही सुलझाया जा सकता है।

महदेईया पोखर की जमीन भी दलालों ने 14 टुकड़ों में बेची, सिर्फ हवा या सच , जांच है जरूरी,

श्मशान से सटे पूरब महदेईया पोखर को भी भूमाफिया निगल चुके हैं। नाम न छापने की शर्त पर सबहा गांव के एक जमीन के धंधे से जुड़े व्यक्ति ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। उसने बताया कि भूमाफिया ने इस पोखर की जमीन में जबरन रास्ता निकालकर इसे 14 टुकड़ों में बांटकर प्लॉटिंग कर दी है और इसे बेच डाला है।

भूमाफिया के निशाने पर पोखर: श्मशान से सटे महदेईया पोखर (कृषि फॉर्म का हिस्सा), जिसे लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं.

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पहले इस पोखर की देखरेख सकरा कृषि फॉर्म के द्वारा  की जाती थी। लेकिन बीते वर्ष के दौरान सकरा फॉर्म ने अपनी चहारदीवारी (बाउंड्री वाल) के निर्माण के समय इसे बाउंड्री से बाहर छोड़ दिया। बाउंड्री से बाहर होते ही दलालों की नजर इस पर लग गई। पिछले  10 वर्षों के दौरान सकरा फॉर्म के द्वारा पोखर पर से अपना  दावा छोड़ने और उसे माफियाओं के हवाले करने  की भूमिका अत्यंत संदेहास्पद मानी जा रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि प्रखंड प्रशासन और उच्च अधिकारी इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय तफ्तीश और मापी करवाएं, तो करोड़ों रुपए के इस महाघोटाले और श्मशान-पोखर की लूट का पर्दाफाश हो जाएगा।

श्मशान जाने का मार्ग अवरुद्ध!: छठ पूजा के समय छठ व्रती को पोखर पर जाने में अब हो रही है कठिनाई,

भूमाफिया की गिद्ध दृष्टि सिर्फ चिता स्थलों तक ही सीमित है लेकिन यहां रास्‍ता अवरूद्ध होने का कारण प्रशासन के द्वारा नये निर्माण में रास्‍ते  की अनदेखी हैं, गौरतलब है कि सकरा कृषि फॉर्म की चहारदीवारी (बाउंड्री वाल)बनने से पूर्व महदेईया पोखर के बगल से एवं  इस श्मशान के बिल्कुल बीचों-बीच से होकर एक मुख्य रास्ता गुजरता था, जो आज प्रशासनिक उपेक्षा के कारण सिमटकर महज एक संकरी पगडंडी के रूप में तब्दील हो गया है। यह पगडंडी कोई आम रास्ता नहीं, बल्कि दो प्रमुख गांवों— सबहा एवं सकरा फरीदपुर गांव की ऐतिहासिक सीमा रेखा (बाउंड्री लाइन) भी है। अब इस रास्ते को दोनों ओर से सोची-समझी साजिश के तहत बंद कर दिया गया है। श्मशान में पूर्व दिशा से प्रवेश करने वाले मुख्य रास्ते पर सकरा कृषि फॉर्म ने अपनी चहारदीवारी (बाउंड्री वाल) खड़ी करवाकर रास्ता पूरी तरह से अवरुद्ध (ब्लॉक) कर दिया है। वहीं दूसरी ओर, पश्चिम दिशा में ठीक बीच रास्ते पर किसान भवन का निर्माण करा दिया गया है, जिससे श्मशान का अस्तित्व ही संकट में पड़ गया है। वर्तमान में लोग किसी तरह किसान भवन के बगल से श्मशान में प्रवेश करते हैं। सकरा कृषि फॉर्म के द्वारा रास्‍ते पर  ही चहारदीवारी बना दिए जाने के कारण , हाल के वर्षों में छठ पूजा के समय पोखर के पूरब एवं उत्‍तर की दिशा से आने वाले छठ व्रती को अर्घ्‍य देने के लिए पोखर पर जाने में भारी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है,

कृषि फॉर्म की बाउंड्री: सकरा कृषि फॉर्म द्वारा बनाई गई बाउंड्री वाल, जिसने श्मशान के ऐतिहासिक रास्ते को अवरुद्ध (ब्लॉक) कर दिया है.

इस गंभीर और संवेदनशील मामले में अब जिला और प्रखंड प्रशासन को अविलंब दखल देना चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि वह दोनों ओर से श्मशान के इस ऐतिहासिक रास्ते को सरकारी कागजातों के अनुसार पूरी तरह से नियत (चिह्नित) करे, और अतिक्रमणकारियों को खदेड़े ।  दाह संस्कार के लिए आने वाले लोगों की सहूलियत के लिए यहाँ कम से कम एक पक्के सोलिंग युक्त (ईंट सोलिंग) रास्ते का निर्माण जल्द से जल्द करवाए ताकि मृत आत्माओं के अंतिम सफर में अवरोध पैदा न हो।

 4 वर्षों में एक हैंडपंप तक नहीं दे सकी सकरा नगर पंचायत, श्मशान घाट पर सुविधाओं का घोर अभाव

बताते चलें कि यह बदहाल श्मशान घाट सकरा प्रखंड मुख्यालय से महज 100 मीटर दक्षिण में स्थित है। विडंबना देखिए कि जिस प्रखंड मुख्यालय के बंद कमरों में पूरे इलाके के श्मशानों और कब्रिस्तानों की चहारदीवारी (बाउंड्री वाल) निर्माण की  योजनाएं बनती हैं, उसी प्रशासन की नाक के नीचे इस मुख्य श्मशान की हालत आज भी बद से बदतर बनी हुई है। पूर्व में ग्रामीण व्यवस्था के तहत स्थानीय स्तर पर इस श्मशान की देखरेख की जिम्मेदारी पंचायत के जिम्मे थी, लेकिन यहां  वर्तमान नगर पंचायत प्रशासन  और पूर्व मुखियाओं ने कभी इस पवित्र स्थल की सुध लेना मुनासिब नहीं समझा। हद तो तब हो गई जब प्रशासनिक बदलाव के बाद अब यह पूरा इलाका नगर पंचायत के गठन के साथ ही सकरा नगर पंचायत के अंतर्गत आ गया। अब इसके विकास, देखरेख और संपूर्ण प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर नगर पंचायत प्रशासन की है। लेकिन नगर पंचायत सकरा बीते 4 वर्षों के लंबे कार्यकाल में इस अति महत्वपूर्ण श्मशान घाट में दाह संस्कार के लिए आने वाले लोगों के लिए पेयजल हेतु एक अदद हैंडपंप (चापाकल) और धूप-बारिश से बचने के लिए एक अदद शेड (छायादार शेड) तक की व्यवस्था नहीं कर सकी है। जीवित इंसानों के हक को मारने वाली व्यवस्था अब मृत आत्माओं और शोकाकुल परिजनों के बुनियादी अधिकारों पर भी डाका डाल रही है, जो कि अत्यंत शर्मनाक और निंदनीय है।

भूमाफिया के निशाने पर: सकरा प्रखंड मुख्यालय के पास स्थित मुख्य श्मशान घाट का विहंगम दृश्‍य

सकरा नगर पंचायत में एक शव वाहन तक नसीब नहीं; गंडक घाट जाने वाले गरीबों का उड़ाया जा रहा मखौल!

 नगर पंचायत प्रशासन ने कूड़ा उठाने और साफ-सफाई के लिए लाखों रुपए की लागत से बड़े-बड़े टीपर और ठेला गाड़ियों की फौज तो खड़ी कर ली, लेकिन हद दर्जे की संवेदनहीनता देखिए कि इस नगर पंचायत के पास आज तक गरीबों की सहूलियत के लिए एक अदद शव वाहन (एम्बुलेंस/डेड बॉडी वैन) तक की व्यवस्था करने की फुर्सत नहीं मिली। बताते चलें कि इस इलाके के बहुत सारे लोग अपने परिजनों के शवदाह के लिए समीप के पवित्र गंडक घाट पर जाते हैं। ऐसे में जिन संपन्न लोगों के पास अपनी गाड़ियों की व्यवस्था होती है, वे तो आसानी से चले जाते हैं; लेकिन असली मुसीबत उन बेबस और लाचार गरीबों पर टूटती है जिनके पास कोई साधन नहीं होता। संसाधन विहीन गरीब परिवार के लोग अपनों की लाश को ठेले, ऑटो या अन्य निजी साधनों पर लादकर, भारी किराया फूंककर बेहद अपमानजनक स्थिति में गंडक घाट ले जाने को मजबूर हैं,  लेकिन  नगर पंचायत के अधिकारियों को क्या एक अदद शव वाहन की जरूरत कभी महसूस नहीं हुई? यह पूरी व्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा है । नगर पंचायत सकरा के अध्‍यक्ष एवं उपाध्‍यक्ष को संज्ञान लेना चाहिए कि  जिस जनता ने इन्हें मलाईदार कुर्सी पर बैठाया, आज उसी जनता के शवों को अंतिम यात्रा के लिए सम्मानजनक वाहन तक नसीब नहीं हो रहा है।

कब जागेगा सोया हुआ तंत्र?

सकरा प्रखंड मुख्यालय की नाक के नीचे चल रहा यह पूरा खेल महज़ जमीन की अवैध खरीद-बिक्री या अतिक्रमण का मामला नहीं है, बल्कि यह व्यवस्था की संवेदनहीनता और नैतिक पतन की पराकाष्ठा है। जो समाज अपने नौनिहालों की समाधियों को सुरक्षित न रख सके और जो तंत्र मृत आत्माओं के अंतिम सफर को सम्मान न दे सके, उसकी तरक्की और दावों पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा होना लाज़मी है।

कैमरे में कैद हुई वह रहस्यमयी परछाई कोई अंधविश्वास हो या न हो, लेकिन वह इस श्मशान की दुर्दशा पर रोती और इंसाफ मांगती मानवीय संवेदनाओं की चीख ज़रूर है।

क्या सकरा के पूर्व मुखिया और वर्तमान नगर पंचायत अध्यक्ष, उपाध्‍यक्ष महोदय अपनी इस ऐतिहासिक विफलता की ज़िम्मेदारी लेंगे? क्या जिला प्रशासन सकरा कृषि फॉर्म की ऐतिहासिक महदेईया पोखर के 14 टुकड़ों में हुए सौदे और श्मशान की भूमि पर बहते गंदे नाले की उच्च स्तरीय जांच करवाएगा?

सवाल कई हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या गरीबों के शवों को गंडक घाट ले जाने के लिए एक अदद शव वाहन और छठ व्रतियों के लिए रास्ता नसीब होगा? न्यूज़ भारत टीवी इस  पर अपनी पैनी नज़र बनाए हुए है। अब देखना यह है कि इस ग्राउंड रिपोर्ट के बाद भी प्रशासन गहरी नींद में सोया रहता है या फिर इन रसूखदार भूमाफियाओं के खिलाफ कोई सख्त और दंडात्मक कार्रवाई कर मृत आत्माओं और जीवित इंसानों को उनका हक वापस दिलाता है।

जनता की आवाज़: सकरा के पूर्व मुखिया सतीश पासवान, जिन्होंने श्मशान के विकास और रास्ते को बहाल करने की ज़ोरदार माँग की है.

पूर्व मुखिया सतीश पासवान का वक्तव्य: पूर्व मुखिया सतीश पासवान ने बताया कि 2011 से उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने मनरेगा के तहत सड़क किनारे पेड़ लगवाकर और मिट्टीकरण का कार्य शुरू कर इस मार्ग को विकसित करने का प्रयास किया था।

“यह श्मशान सकरा बाजार और आसपास के 5 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले सभी समुदायों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। रास्ता बंद होने के कारण लोगों को शव ले जाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है।” – सतीश पासवान

प्रशासन से मांग: सतीश पासवान ने नगर पंचायत अध्यक्ष और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि:

  1. सरकारी नक्शे के अनुसार 16 फीट चौड़ी सड़क का अविलंब निर्माण कराया जाए।
  2. कृषि बीज गुणन केंद्र के निदेशक से बात कर बाधित मार्ग को खुलवाया जाए।
  3. श्मशान घाट को एक आधुनिक मुक्ति धाम के रूप में विकसित किया जाए जहाँ पानी और बैठने की समुचित व्यवस्था हो।

ब्यूरो रिपोर्ट, न्यूज़ भारत टीवी।

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तेलहाड़ा की मिट्टी ने उगला प्राचीन ज्ञान का खजाना! प्रथम सदी के तिलाधक विश्वविद्यालय के अवशेष, सैकड़ों मूर्तियां और अभिलेख मिले

नालंदा: बिहार की धरती एक बार फिर प्राचीन गौरव के रहस्यों से पर्दा उठा रही है। नालंदा जिला के एकंगरसराय प्रखंड के तेलहाड़ा गांव में चल रही खुदाई ने एक सनसनीखेज खोज की है – प्रथम सदी के तिलाधक विश्वविद्यालय के अवशेष! यह खोज न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश के इतिहास के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है।

अधिकारियों ने लिया जायजा: जिलाधिकारी उदिता सिंह ने खुद इस ऐतिहासिक खोज का संज्ञान लेते हुए तेलहाड़ा गांव स्थित उत्खनन स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने पुरातात्विक अवशेषों का बारीकी से जायजा लिया और उनकी महत्ता को समझा। उनके साथ पुरातात्विक विभाग के विशेषज्ञ और स्थानीय अधिकारी भी मौजूद थे।

तेलहाड़ा गांव में पुरातात्विक अवशेषों का जायजा लेतीं जिलाधिकारी उदिता सिंह, अधिकारी और पुरातात्विक विभाग के विशेषज्ञ।

दुर्लभ खजाना मिला: खुदाई के दौरान मिली सामग्रियों ने विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। तिलाधक विश्वविद्यालय के अवशेषों के साथ-साथ सैकड़ों दुर्लभ मूर्तियां, शिलालेख और अन्य बहुमूल्य पुरातात्विक वस्तुएं मिली हैं। ये अवशेष इस विश्वविद्यालय की भव्यता और प्राचीन काल में ज्ञान और शिक्षा के केंद्र के रूप में इसकी महत्ता को दर्शाते हैं।

दस्तावेजीकरण और संरक्षण के निर्देश: जिलाधिकारी उदिता सिंह ने इस खोज की ऐतिहासिक महत्ता को समझते हुए अधिकारियों को इस दुर्लभ खजाने के संरक्षण के लिए त्वरित कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने इन पुरातात्विक अवशेषों की एक व्यापक डाक्यूमेंट्री तैयार करने का भी आदेश दिया, ताकि इस खोज के बारे में विश्व भर में जानकारी दी जा सके।

बौद्ध सर्किट से जोड़ने की मांग: इस प्राचीन विश्वविद्यालय की खोज ने स्थानीय लोगों में उत्साह भर दिया है। उन्होंने इस स्थल को बौद्ध पर्यटन सर्किट से जोड़ने की मांग उठाई है, जिससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इस ऐतिहासिक धरोहर के महत्व को भी मान्यता मिलेगी। स्थानीय स्तर पर एक संग्रहालय विकसित करने की भी मांग की जा रही है, जहां इन दुर्लभ अवशेषों को प्रदर्शित किया जा सके।

एक नया अध्याय: तेलहाड़ा में मिला तिलाधक विश्वविद्यालय का यह खजाना प्राचीन भारत की समृद्ध संस्कृति और शिक्षा प्रणाली के बारे में नए तथ्यों को सामने लाएगा। यह खोज इतिहास के पन्नों को एक बार फिर पलटने और प्राचीन ज्ञान के भंडार को समझने के लिए प्रेरित करेगी।

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अचानक अमीर बनने वालों पर पैनी नजर, थानों में बनेगी स्पेशल टीम

  • भारत-नेपाल सीमा पर अवैध और आर्थिक अपराधों से जुड़ी गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगाने का सख्त निर्देश।
  • सभी चेकपोस्टों से 15 किलोमीटर के दायरे में होगी ताबड़तोड़ और प्रभावी निगरानी।
  • खाद और नशीले पदार्थों की तस्करी को कुचलने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (एसएसबी) करेंगे मिलकर काम।
  • सीमावर्ती इलाकों में जिन लोगों की संपत्ति अचानक रहस्यमयी ढंग से बढ़ी है, उनका कुंडली खंगालेगी पुलिस।
  • किशनगंज जिले में उर्दू विद्यालयों की स्थापना के लिए 100 उपयुक्त स्थानों को चिन्हित करने का आदेश।

चप्पे-चप्पे पर होगी निगरानी, अपराधियों की खैर नहीं

पटना, 3 जुलाई: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्था और विकास को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री सचिवालय के ‘संवाद’ कक्ष में आयोजित इस बैठक में उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि भारत-नेपाल सीमा पर किसी भी प्रकार का अवैध, अनैतिक या आर्थिक अपराध बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि दोनों देशों के बीच के बेहतर रिश्तों को बरकरार रखते हुए सीमा क्षेत्र की हर गतिविधि पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखी जाए।

बिहार से सटी भारत-नेपाल सीमा की कुल लंबाई 735 किलोमीटर है, जिसके तहत राज्य के 7 जिले, 70 पुलिस थाने और एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) की 194 बीओपी (बॉर्डर आउटपोस्ट) आते हैं। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि सभी चेकपोस्टों से 15 किलोमीटर के दायरे के भीतर सुरक्षा और चौकसी का जाल इस कदर बिछाया जाए कि कोई भी अपराधी बचकर न निकल सके।

अचानक रईस बनने वालों की अब खैर नहीं, थानों में बनेगी स्पेशल टीम

इस बैठक का सबसे बड़ा और कड़ा फैसला आर्थिक अपराधों और संदिग्ध कमाई को लेकर रहा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आदेश दिया है कि सीमावर्ती जिलों के सभी थानों में एक विशेष टीम (स्पेशल टीम) का गठन किया जाए। यह टीम जमीनी स्तर पर ऐसे संदिग्ध लोगों की पहचान और सत्यापन करेगी, जिनकी आय के ज्ञात स्रोतों की तुलना में अचानक बहुत ज्यादा और असामान्य बढ़ोतरी हुई है। ऐसे रडार पर आए लोगों की पूरी जानकारी इकट्ठा की जाएगी और उनके खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इसके साथ ही, उर्वरक (खाद) और मादक पदार्थों की तस्करी को पूरी तरह से नेस्तनाबूद करने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस और सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों को नियमित रूप से समन्वय बैठकें करने के लिए कहा गया है।

डिजिटल डैशबोर्ड और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े 7 जिलों के कप्तान

बैठक में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने भारत-नेपाल सीमा प्रबंधन और इससे जुड़े विभिन्न संवेदनशील मुद्दों पर एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण (प्रेजेंटेशन) दिया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बॉर्डर एरिया के सभी 7 जिलों के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक इस बैठक से लाइव जुड़े हुए थे। किशनगंज, मधुबनी और पश्चिम चम्पारण के जिलाधिकारियों तथा पुलिस अधीक्षकों ने पहले दिए गए निर्देशों पर की गई बड़ी कार्रवाइयों की रिपोर्ट मुख्यमंत्री के सामने रखी और अपने अहम सुझाव साझा किए। इसके अलावा एसएसबी, आईबी, ईडी, एनसीबी, कस्टम्स और इनकम टैक्स के आला अधिकारियों ने भी अपनी-अपनी रिपोर्ट और सुझाव पेश किए।

बैठक में साइबर अपराध, अतिक्रमण, नागरिकता से जुड़े मामले, सीमाई इलाकों के पेंडिंग काम और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर भी लंबी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री के स्तर पर, मुख्यमंत्री के स्तर पर, मुख्य सचिव और डीजीपी के स्तर पर लगातार ऐसी बैठकें होती रही हैं, जिससे कई बड़े कामों को पूरा किया जा चुका है। बचे हुए कामों को भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ तेजी से पूरा करने का लक्ष्य है।

बैठक में ये  रहे मौजूद

इस हाई-प्रोफाइल बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार, योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव एन विजयलक्ष्मी, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर उपस्थित थे।

इनके अलावा मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, गृह विभाग के सचिव कुंदन कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह, पुलिस महानिदेशक (अभियान) कुंदन कृष्णन, गृह विभाग के विशेष सचिव क्षत्रनील सिंह सहित कई अन्य सीनियर पुलिस अधिकारी और केंद्रीय एजेंसियों के आला अफसर मौके पर मौजूद थे। वहीं, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल और सीमावर्ती जिलों के सभी डीएम और एसपी जुड़े रहे।

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बिहार में 1,00,000 करोड़ के मेगा बजट से बदल जाएगी राज्य की सूरत, बनेंगे 12 अत्याधुनिक सैटेलाइट टाउनशिप!

हडको और नगर विकास विभाग के बीच ऐतिहासिक एमओयू पर हस्ताक्षर, 6,00,000 करोड़ का बाहरी निवेश भी आएगा, किसानों को मात्र 30 दिन में मिलेगा जमीन का पूरा मुआवजा

पटना, 03 जुलाई 2026: बिहार के शहरी विकास के इतिहास में आज तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। राज्य में विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे और अत्याधुनिक नागरिक सुविधाओं से लैस 12 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने के लिए एक अभूतपूर्व महा-समझौते पर मुहर लगी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की उपस्थिति में लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प सभागार’ में बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग तथा हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (हडको) के बीच 1,00,000 करोड़ रुपये (एक लाख करोड़ रुपये) के दीर्घकालिक वित्तपोषण के लिए एक महत्वपूर्ण मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) का आदान-प्रदान किया गया। इस ऐतिहासिक समझौते पर नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार और हडको के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक संजय कुलश्रेष्ठ ने हस्ताक्षर किए।

इस महात्वाकांक्षी योजना की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़े आत्मविश्वास के साथ कहा कि यह समझौता बिहार को आधुनिक शहरी विकास के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर देगा। इस विशाल परियोजना के तहत राज्य के लगभग 3 लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में अत्याधुनिक टाउनशिप विकसित किए जाएंगे। इस योजना की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी विशेषता यह है कि इसमें किसानों को लैंड पुलिंग के माध्यम से सीधा भागीदार बनाया जाएगा। किसानों के हितों की रक्षा के लिए सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है, जिसके तहत मुआवजे के लिए आवेदन करने वाले किसी भी किसान को मात्र 30 दिन के भीतर पूरा भुगतान सुनिश्चित कर दिया जाएगा।

6,00,000 करोड़ का अतिरिक्त निवेश और लाखों रोजगार

मुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार सरकार 12 नए टाउनशिप को लेकर हडको के माध्यम से 1,00,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश कर रही है। इसके अलावा, इस परियोजना की साख को देखते हुए 6,00,000 करोड़ रुपये का विशाल निवेश बाहरी और निजी संस्थागत स्रोतों से आकर्षित किया जाएगा। इस बड़े पैमाने पर होने वाली निर्माण गतिविधियों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बिहार के लाखों युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को एक नई और तेज गति मिलेगी। सरकार ने इस ऐतिहासिक पहल के जरिए राज्य में 35 प्रतिशत शहरीकरण के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने का संकल्प लिया है।

विश्वस्तरीय नागरिक सुविधाओं से लैस होंगे नए शहर

इन सभी 12 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप को पूरी तरह अत्याधुनिक और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप प्लान किया गया है। इनमें विश्वस्तरीय आधुनिक चौड़ी सड़कें, निर्बाध 24 घंटे जलापूर्ति, उन्नत और वैज्ञानिक सीवरेज सिस्टम, विद्युत ग्रिड, विशाल हरित क्षेत्र (पार्क), शानदार शैक्षणिक संस्थान, अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं और वाणिज्यिक व सामाजिक अधोसंरचना जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि बिहारवासियों को अपनी ही धरती पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का शहरी जीवन उपलब्ध कराया जा सके।

बैठक में मौजूद रहे राज्य के ये दिग्गज अधिकारी

इस उच्च स्तरीय बैठक और हस्ताक्षर समारोह में राज्य के कई शीर्ष नीति-निर्माता और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे। इस खास मौके पर उप मुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, नगर विकास एवं आवास सह सूचना प्रावैधिकी मंत्री नीतीश मिश्रा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार मौजूद रहे।

इनके अतिरिक्त मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव संदीप कुमार आर पुडकलट्टी, नगर विकास एवं आवास विभाग के विशेष सचिव नीलेश रामचंद्र देवड़े और हडको के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक संजय कुलश्रेष्ठ सहित दोनों विभागों के कई वरीय अधिकारी भी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। कार्यक्रम के प्रारंभ में विनय कुमार और संजय कुलश्रेष्ठ ने मुख्यमंत्री को हरित पौधा, अंग वस्त्र एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर उनका भव्य स्वागत किया।

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राशन कार्ड पर सरकार का बड़ा प्रहार! 10 हजार कमाने वालों का कार्ड कटा, तो 90 फीसदी गरीब हो जाएंगे दाने-दाने को मोहताज

  • चुनाव जीतने के लिए बांटे 32 लाख राशन कार्ड, अब 57 लाख नाम काटने की तैयारी घोर गरीब विरोधी: ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह
  • भूमिहीनों को वासभूमि देने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई सरकार, अधिकारों के लिए अब सड़कों पर उतरेगा खेग्रामस

ताजपुर/समस्तीपुर, 3 जुलाई 2026 बिहार में गरीबों के राशन कार्ड पर सरकार की ओर से बड़ी कैंची चलाने की तैयारी के खिलाफ, अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) ने सरकार की इस नीति को गरीब विरोधी बताते हुए इसके खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। शुक्रवार को ताजपुर प्रखंड के मोतीपुर बांसवाड़ी में खेग्रामस द्वारा एक व्यापक सदस्यता अभियान चलाया गया, जिसके तहत आयोजित बैठक में नेताओं ने सरकार की नीतियों पर जमकर भड़ास निकाली।

90 फीसदी कार्डधारक सूची से हो जाएंगे बाहर: सुरेंद्र बैठक को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए भाकपा (माले) के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने एक चौंकाने वाला और सनसनीखेज दावा किया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार केवल 10 हजार रुपये प्रतिमाह कमाने वाले गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों का राशन कार्ड रद्द करने का आत्मघाती कदम उठाती है, तो इसका सीधा और घातक असर लगभग 90 प्रतिशत राशन कार्डधारकों पर पड़ेगा। महंगाई के इस दौर में 10 हजार रुपये की आय बेहद मामूली है, और ऐसे परिवारों से मुफ्त या सस्ते अनाज का अधिकार छीनना उन्हें भुखमरी की कगार पर धकेलने जैसा है।

वोट बैंक के लिए हुआ इस्तेमाल, अब गरीबों की पीठ में छुरा: ब्रह्मदेव  वहीं दूसरी ओर, किसान नेता ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने और चुनावी लाभ लेने के लिए सरकार ने आनन-फानन में 32 लाख परिवारों को नया राशन कार्ड उपलब्ध कराया था। चुनाव खत्म होते ही अब सरकार का असली चेहरा सामने आ गया है। अब 57 लाख से भी अधिक परिवारों का नाम राशन कार्ड की सूची से जबरन हटाने की तैयारी की जा रही है, जो गरीबों और जरूरतमंदों के साथ एक बड़ा धोखा और घोर अन्याय है।

भूमिहीनों को वासभूमि देने में पूरी तरह विफल रही सरकार नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य में भूमिहीन परिवारों को रहने के लिए वासभूमि (आवास के लिए जमीन) उपलब्ध कराने के स्पष्ट कानून मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक लापरवाही और सरकार की नाकामी के कारण आज भी हजारों गरीब परिवार बिना जमीन के जीने को मजबूर हैं। सरकार भूमिहीनों को उनका हक देने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि गरीबों, खेत मजदूरों और वंचित तबकों के हक और मान-सम्मान की रक्षा के लिए खेग्रामस का यह संघर्ष अब और भी उग्र रूप लेगा।

जनसमस्याओं को लेकर बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार  : मोतीपुर बांसवाड़ी की इस महत्वपूर्ण बैठक में केवल संगठन का विस्तार ही नहीं किया गया, बल्कि राशन कार्ड में कटौती, वासभूमि का संकट, मनरेगा में भ्रष्टाचार, और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी गंभीर जनसमस्याओं को लेकर आने वाले दिनों में एक बड़ा और निर्णायक आंदोलन खड़ा करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया।

इस पूरे अभियान और बैठक का नेतृत्व मुख्य रूप से भाकपा (माले) प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह, प्रखंड कमिटी सदस्य ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, राजदेव प्रसाद सिंह एवं शंकर महतो ने संयुक्त रूप से किया। मौके पर मौजूद सैकड़ों ग्रामीणों ने एक सुर में सरकार की नीतियों का विरोध करते हुए बड़ी संख्या में खेग्रामस की सदस्यता ग्रहण की और संगठन को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।

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सकरा में ग्रामीण चिकित्सकों की गर्जना: ‘कोरोना में हम भगवान थे, अब झोलाछाप बोलने वालों को बर्दाश्त नहीं करेंगे!’

प्रशिक्षण ले लो वरना सरकार की नजर में हो!‘ – ग्रामीण चिकित्सक एसोसिएशन की बैठक में अध्यक्ष का बड़ा अल्टीमेटम!

सकरा (मुजफ्फरपुर): विजन वैली हॉल सकरा में ग्रामीण चिकित्सक एशोसिएशन की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक ग्रामीण चिकित्सक डॉक्टर राजेश कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस बैठक में ग्रामीण डॉक्टरों की समस्याओं, उनके हक की लड़ाई और समाज में उनके सम्मान को लेकर जोरदार चर्चा हुई। बैठक में मौजूद चिकित्सकों ने एक सुर में अपने हक के लिए आवाज बुलंद की और खुद को ‘झोलाछाप’ कहे जाने पर कड़ी आपत्ति जताई।

कोरोना काल में जो भगवान थे, उन्हें झोलाछाप कहना बंद करें लोग

बैठक को संबोधित करते हुए ग्रामीण चिकित्सक डॉक्टर राजेश कुमार बेहद भावुक और आक्रामक नजर आए। उन्होंने तीखे लहजे में कहा कि कुछ बेवकूफ लोग ग्रामीण चिकित्सकों को ‘झोलाछाप’ के नाम से पुकारते हैं। उन्होंने ललकारते हुए कहा, उनसे मैं पूछना चाहता हूं कि कोरोना काल में झोलाछाप बोलकर देख लिए होते, तो आपकी औकात पता चल जाती। कोरोना काल में तो आप भगवान मान रहे थे कि ग्रामीण चिकित्सक ही भगवान हैं। सारे बड़े-बड़े डॉक्टर तो एसी में पैक थे, घरों से निकल नहीं रहे थे, लेकिन यही ग्रामीण चिकित्सक थे जो अपनी जान पर खेलकर लोगों की जान बचा रहे थे।”

हम झोलाछापनहीं, समाज के रात्री दूतहैं

डॉक्टर राजेश कुमार ने कहा कि ग्रामीण चिकित्सक असल में समाज के ‘रात्री दूत’ हैं। रात के 2:00 बजे हो या 4:00 बजे, जब पूरा समाज सोया रहता है, तब कोई डॉक्टर अगर उठकर मरीज के घर जाता है, तो वह केवल ग्रामीण चिकित्सक ही है। अमीर लोगों के लिए तो शहर के बड़े अस्पताल हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब परिवारों का एकमात्र सहारा यही चिकित्सक हैं। वे बिना किसी फीस के, बिना किसी महंगी जांच के, बेहद कम पैसों में और कभी-कभी तो बिना पैसे के भी ‘लिख लो, सवेरे दे देंगे’ की बात मानकर मरीजों का इलाज शुरू कर देते हैं।

प्रशिक्षण नहीं लिया तो सरकार की नजर में आ जाओगे: अध्यक्ष का अल्टीमेटम

बैठक के दौरान अध्यक्ष ने सभी ग्रामीण चिकित्सकों को एक बड़ा और कड़ा अल्टीमेटम भी दिया। उन्होंने कहा कि आज का सबसे पहला और मुख्य मुद्दा प्रशिक्षण का है। जितने भी ग्रामीण चिकित्सक प्रैक्टिस कर रहे हैं, अगर उन्होंने कहीं ना कहीं से प्रशिक्षण यानी ट्रेनिंग ली है, तो यह बहुत अच्छी बात है। लेकिन अगर किसी ने अभी तक प्रशिक्षण नहीं लिया है, तो वे सावधान हो जाएं क्योंकि वे सरकार की नजर में हैं। ऐसे सभी चिकित्सक तुरंत ट्रेनिंग ले लें, यही उनके हक में सबसे ज्यादा अच्छा रहेगा।

हायर सेंटर से लौटे मरीजों का सहारा भी ग्रामीण चिकित्सक ही

बैठक में यह बात भी उठाई गई कि जब मरीज शहर के बड़े अस्पतालों (हायर सेंटर) से वापस घर लौटते हैं, तो वहां के बड़े डॉक्टर सिर्फ दवाइयां, सुई और सलाइन (पानी) लिख देते हैं। लेकिन गांव में जाकर उस मरीज को सुई देने, आईवी लगाने या दवा समझाने के लिए कोई सरकारी कर्मचारी या बड़ा डॉक्टर नहीं आता। अगर ग्रामीण चिकित्सक आज अपनी प्रैक्टिस बंद कर दें, तो शहर के डॉक्टरों की पर्ची धरी की धरी रह जाएगी और मरीजों को पानी कौन चढ़ाएगा? इन्हीं ग्रामीण चिकित्सकों की बदौलत आज ग्रामीण समाज में मरीज पूरी तरह सुरक्षित हैं।

कांवरियों की सेवा के लिए तुर्की में लगेगा निस्वार्थ कैंप

बैठक का दूसरा बड़ा मुद्दा सावन मेला को लेकर था। निर्णय लिया गया कि बाबा गरीबनाथ धाम जाने वाले कांवरियों की सेवा के लिए ग्रामीण चिकित्सकों की एक विशेष टीम का गठन किया जाएगा। ये सभी चिकित्सक तुर्की में एक विशाल कैंप लगाएंगे और कांवरियों की निस्वार्थ और निष्भाव से सेवा करेंगे। इस कैंप में डॉक्टर अपना समय भी देंगे और इलाज का सारा खर्चा भी खुद अपनी जेब से उठाएंगे।

हर महीने की 3 तारीख को होगी मजबूती के लिए बैठक

तीसरे मुद्दे के रूप में संगठन की मजबूती पर विस्तार से चर्चा की गई। डॉक्टर राजेश कुमार ने कहा कि संगठन है तो मजबूती है और हर मजबूती के लिए एक मजबूत संगठन की जरूरत पड़ती है। इसी मजबूती को बनाए रखने के लिए तय किया गया कि आगामी बैठक 3 अगस्त को होगी। टीम के सभी सदस्यों के विचार से यह फैसला लिया गया कि हर महीने की 3 तारीख को ही संगठन की नियमित बैठक रखी जाएगी। हालांकि, यदि किसी सदस्य के साथ कोई आपातकालीन स्थिति या घटना-दुर्घटना होती है, तो आपसी विचार-विमर्श से इस तारीख को आगे-पीछे भी किया जा सकता है।

बैठक में ये मुख्य चिकित्सक रहे उपस्थित

इस गर्जनापूर्ण बैठक में मुख्य रूप से डॉक्टर अखिलेश कुमार, डॉक्टर पप्पू कुमार, डॉक्टर सुनील कुमार, डॉक्टर रंजन कुमार, डॉक्टर चुनमुन कुमार दास, डॉक्टर चुनमुन कुमार और डॉक्टर संजीव कुमार सहित भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीण चिकित्सक मौजूद रहे, जिन्होंने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ अध्यक्ष की बातों का समर्थन किया।

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