सकरा में ग्रामीण चिकित्सकों की गर्जना: ‘कोरोना में हम भगवान थे, अब झोलाछाप बोलने वालों को बर्दाश्त नहीं करेंगे!’

प्रशिक्षण ले लो वरना सरकार की नजर में हो!‘ – ग्रामीण चिकित्सक एसोसिएशन की बैठक में अध्यक्ष का बड़ा अल्टीमेटम!

सकरा (मुजफ्फरपुर): विजन वैली हॉल सकरा में ग्रामीण चिकित्सक एशोसिएशन की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक ग्रामीण चिकित्सक डॉक्टर राजेश कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस बैठक में ग्रामीण डॉक्टरों की समस्याओं, उनके हक की लड़ाई और समाज में उनके सम्मान को लेकर जोरदार चर्चा हुई। बैठक में मौजूद चिकित्सकों ने एक सुर में अपने हक के लिए आवाज बुलंद की और खुद को ‘झोलाछाप’ कहे जाने पर कड़ी आपत्ति जताई।

कोरोना काल में जो भगवान थे, उन्हें झोलाछाप कहना बंद करें लोग

बैठक को संबोधित करते हुए ग्रामीण चिकित्सक डॉक्टर राजेश कुमार बेहद भावुक और आक्रामक नजर आए। उन्होंने तीखे लहजे में कहा कि कुछ बेवकूफ लोग ग्रामीण चिकित्सकों को ‘झोलाछाप’ के नाम से पुकारते हैं। उन्होंने ललकारते हुए कहा, उनसे मैं पूछना चाहता हूं कि कोरोना काल में झोलाछाप बोलकर देख लिए होते, तो आपकी औकात पता चल जाती। कोरोना काल में तो आप भगवान मान रहे थे कि ग्रामीण चिकित्सक ही भगवान हैं। सारे बड़े-बड़े डॉक्टर तो एसी में पैक थे, घरों से निकल नहीं रहे थे, लेकिन यही ग्रामीण चिकित्सक थे जो अपनी जान पर खेलकर लोगों की जान बचा रहे थे।”

हम झोलाछापनहीं, समाज के रात्री दूतहैं

डॉक्टर राजेश कुमार ने कहा कि ग्रामीण चिकित्सक असल में समाज के ‘रात्री दूत’ हैं। रात के 2:00 बजे हो या 4:00 बजे, जब पूरा समाज सोया रहता है, तब कोई डॉक्टर अगर उठकर मरीज के घर जाता है, तो वह केवल ग्रामीण चिकित्सक ही है। अमीर लोगों के लिए तो शहर के बड़े अस्पताल हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब परिवारों का एकमात्र सहारा यही चिकित्सक हैं। वे बिना किसी फीस के, बिना किसी महंगी जांच के, बेहद कम पैसों में और कभी-कभी तो बिना पैसे के भी ‘लिख लो, सवेरे दे देंगे’ की बात मानकर मरीजों का इलाज शुरू कर देते हैं।

प्रशिक्षण नहीं लिया तो सरकार की नजर में आ जाओगे: अध्यक्ष का अल्टीमेटम

बैठक के दौरान अध्यक्ष ने सभी ग्रामीण चिकित्सकों को एक बड़ा और कड़ा अल्टीमेटम भी दिया। उन्होंने कहा कि आज का सबसे पहला और मुख्य मुद्दा प्रशिक्षण का है। जितने भी ग्रामीण चिकित्सक प्रैक्टिस कर रहे हैं, अगर उन्होंने कहीं ना कहीं से प्रशिक्षण यानी ट्रेनिंग ली है, तो यह बहुत अच्छी बात है। लेकिन अगर किसी ने अभी तक प्रशिक्षण नहीं लिया है, तो वे सावधान हो जाएं क्योंकि वे सरकार की नजर में हैं। ऐसे सभी चिकित्सक तुरंत ट्रेनिंग ले लें, यही उनके हक में सबसे ज्यादा अच्छा रहेगा।

हायर सेंटर से लौटे मरीजों का सहारा भी ग्रामीण चिकित्सक ही

बैठक में यह बात भी उठाई गई कि जब मरीज शहर के बड़े अस्पतालों (हायर सेंटर) से वापस घर लौटते हैं, तो वहां के बड़े डॉक्टर सिर्फ दवाइयां, सुई और सलाइन (पानी) लिख देते हैं। लेकिन गांव में जाकर उस मरीज को सुई देने, आईवी लगाने या दवा समझाने के लिए कोई सरकारी कर्मचारी या बड़ा डॉक्टर नहीं आता। अगर ग्रामीण चिकित्सक आज अपनी प्रैक्टिस बंद कर दें, तो शहर के डॉक्टरों की पर्ची धरी की धरी रह जाएगी और मरीजों को पानी कौन चढ़ाएगा? इन्हीं ग्रामीण चिकित्सकों की बदौलत आज ग्रामीण समाज में मरीज पूरी तरह सुरक्षित हैं।

कांवरियों की सेवा के लिए तुर्की में लगेगा निस्वार्थ कैंप

बैठक का दूसरा बड़ा मुद्दा सावन मेला को लेकर था। निर्णय लिया गया कि बाबा गरीबनाथ धाम जाने वाले कांवरियों की सेवा के लिए ग्रामीण चिकित्सकों की एक विशेष टीम का गठन किया जाएगा। ये सभी चिकित्सक तुर्की में एक विशाल कैंप लगाएंगे और कांवरियों की निस्वार्थ और निष्भाव से सेवा करेंगे। इस कैंप में डॉक्टर अपना समय भी देंगे और इलाज का सारा खर्चा भी खुद अपनी जेब से उठाएंगे।

हर महीने की 3 तारीख को होगी मजबूती के लिए बैठक

तीसरे मुद्दे के रूप में संगठन की मजबूती पर विस्तार से चर्चा की गई। डॉक्टर राजेश कुमार ने कहा कि संगठन है तो मजबूती है और हर मजबूती के लिए एक मजबूत संगठन की जरूरत पड़ती है। इसी मजबूती को बनाए रखने के लिए तय किया गया कि आगामी बैठक 3 अगस्त को होगी। टीम के सभी सदस्यों के विचार से यह फैसला लिया गया कि हर महीने की 3 तारीख को ही संगठन की नियमित बैठक रखी जाएगी। हालांकि, यदि किसी सदस्य के साथ कोई आपातकालीन स्थिति या घटना-दुर्घटना होती है, तो आपसी विचार-विमर्श से इस तारीख को आगे-पीछे भी किया जा सकता है।

बैठक में ये मुख्य चिकित्सक रहे उपस्थित

इस गर्जनापूर्ण बैठक में मुख्य रूप से डॉक्टर अखिलेश कुमार, डॉक्टर पप्पू कुमार, डॉक्टर सुनील कुमार, डॉक्टर रंजन कुमार, डॉक्टर चुनमुन कुमार दास, डॉक्टर चुनमुन कुमार और डॉक्टर संजीव कुमार सहित भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीण चिकित्सक मौजूद रहे, जिन्होंने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ अध्यक्ष की बातों का समर्थन किया।

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