- चुनाव जीतने के लिए बांटे 32 लाख राशन कार्ड, अब 57 लाख नाम काटने की तैयारी घोर गरीब विरोधी: ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह
- भूमिहीनों को वासभूमि देने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई सरकार, अधिकारों के लिए अब सड़कों पर उतरेगा खेग्रामस
ताजपुर/समस्तीपुर, 3 जुलाई 2026 बिहार में गरीबों के राशन कार्ड पर सरकार की ओर से बड़ी कैंची चलाने की तैयारी के खिलाफ, अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) ने सरकार की इस नीति को गरीब विरोधी बताते हुए इसके खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। शुक्रवार को ताजपुर प्रखंड के मोतीपुर बांसवाड़ी में खेग्रामस द्वारा एक व्यापक सदस्यता अभियान चलाया गया, जिसके तहत आयोजित बैठक में नेताओं ने सरकार की नीतियों पर जमकर भड़ास निकाली।

90 फीसदी कार्डधारक सूची से हो जाएंगे बाहर: सुरेंद्र बैठक को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए भाकपा (माले) के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने एक चौंकाने वाला और सनसनीखेज दावा किया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार केवल 10 हजार रुपये प्रतिमाह कमाने वाले गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों का राशन कार्ड रद्द करने का आत्मघाती कदम उठाती है, तो इसका सीधा और घातक असर लगभग 90 प्रतिशत राशन कार्डधारकों पर पड़ेगा। महंगाई के इस दौर में 10 हजार रुपये की आय बेहद मामूली है, और ऐसे परिवारों से मुफ्त या सस्ते अनाज का अधिकार छीनना उन्हें भुखमरी की कगार पर धकेलने जैसा है।
वोट बैंक के लिए हुआ इस्तेमाल, अब गरीबों की पीठ में छुरा: ब्रह्मदेव वहीं दूसरी ओर, किसान नेता ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने और चुनावी लाभ लेने के लिए सरकार ने आनन-फानन में 32 लाख परिवारों को नया राशन कार्ड उपलब्ध कराया था। चुनाव खत्म होते ही अब सरकार का असली चेहरा सामने आ गया है। अब 57 लाख से भी अधिक परिवारों का नाम राशन कार्ड की सूची से जबरन हटाने की तैयारी की जा रही है, जो गरीबों और जरूरतमंदों के साथ एक बड़ा धोखा और घोर अन्याय है।

भूमिहीनों को वासभूमि देने में पूरी तरह विफल रही सरकार नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य में भूमिहीन परिवारों को रहने के लिए वासभूमि (आवास के लिए जमीन) उपलब्ध कराने के स्पष्ट कानून मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक लापरवाही और सरकार की नाकामी के कारण आज भी हजारों गरीब परिवार बिना जमीन के जीने को मजबूर हैं। सरकार भूमिहीनों को उनका हक देने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि गरीबों, खेत मजदूरों और वंचित तबकों के हक और मान-सम्मान की रक्षा के लिए खेग्रामस का यह संघर्ष अब और भी उग्र रूप लेगा।
जनसमस्याओं को लेकर बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार : मोतीपुर बांसवाड़ी की इस महत्वपूर्ण बैठक में केवल संगठन का विस्तार ही नहीं किया गया, बल्कि राशन कार्ड में कटौती, वासभूमि का संकट, मनरेगा में भ्रष्टाचार, और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी गंभीर जनसमस्याओं को लेकर आने वाले दिनों में एक बड़ा और निर्णायक आंदोलन खड़ा करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया।
इस पूरे अभियान और बैठक का नेतृत्व मुख्य रूप से भाकपा (माले) प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह, प्रखंड कमिटी सदस्य ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, राजदेव प्रसाद सिंह एवं शंकर महतो ने संयुक्त रूप से किया। मौके पर मौजूद सैकड़ों ग्रामीणों ने एक सुर में सरकार की नीतियों का विरोध करते हुए बड़ी संख्या में खेग्रामस की सदस्यता ग्रहण की और संगठन को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।
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