गरीबों के लिए मसीहा बना सकरा का यह अस्पताल! 25 सालों से मुफ्त इलाज कर डॉक्टर ने पेश की मानवता की मिसाल

व्यवसायीकरण के दौर में सेवा का अनोखा मंदिर: हर मंगलवार को बिना एक पैसा लिए होता है सैकड़ो मरीजों  का सफल इलाज, पूसा से लेकर पातेपुर तक के लाचार मरीजों के लिए संजीवनी बना रहा है  सकरा का यह मंगलवारी कैम्‍प !

सकरा (मुजफ्फरपुर)। आज के इस आधुनिक और घोर कलयुगी दौर में जहां चिकित्सा सेवा पूरी तरह से एक बड़ा और मुनाफा कमाने वाला व्यवसाय बन चुकी है, वहीं मुजफ्फरपुर जिले के सकरा इलाके से मानवता को गौरवान्वित करने वाली एक ऐसी कहानी सामने आ रही है जो हर किसी के दिल को छू लेगी। सकरा में एक ऐसा अस्पताल है, जो पिछले 25 वर्षों से लाचार, बेसहारा, वृद्ध और आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर मरीजों के लिए किसी भगवान के घर से कम नहीं साबित हो रहा है। हम बात कर रहे हैं सकरा कॉलेज गेट के ठीक बगल में दक्षिण दिशा स्थित क्षेत्र के प्रतिष्ठित और पुराने चिकित्सालय ‘आर पी मेमोरियल चैरिटेबल हॉस्पिटल’ की। इस अस्पताल में हर मंगलवार की तरह आज भी एक विशाल मुफ्त चिकित्सीय जांच, परामर्श एवं सहायता कैंप का आयोजन किया गया।

एक-एक मरीज की फाइलों और स्वास्थ्य रिपोर्ट की बारीकी से जांच करते  चिकित्सक डॉक्टर अरुण कुमार राय। पास ही मुस्तैदी से खड़े स्वास्थ्य कर्मी और अपनी बारी के इंतजार में उम्मीद भरी नजरों से देखतीं महिला मरीज।

यह महज एक साधारण मेडिकल कैंप नहीं है, बल्कि यह पिछले 25 वर्षों की अटूट श्रद्धा, सेवा और संकल्प का एक जीवंत प्रतीक है। इलाके के प्रसिद्ध और समाजसेवी चिकित्सक डॉक्टर अरुण कुमार राय द्वारा अपने पूज्य पिता की पावन स्मृति में इस आर पी मेमोरियल चैरिटेबल हॉस्पिटल के माध्यम से प्रत्येक मंगलवार को यह अनूठा और पूरी तरह से मुफ्त चिकित्सीय शिविर आयोजित किया जाता है। डॉक्टर अरुण कुमार राय ने चिकित्सा जगत के तमाम ऐशो-आराम और व्यावसायिक फायदों को दरकिनार करते हुए अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह से समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के स्वास्थ्य कल्याण के लिए समर्पित कर दिया है।

दूर-दराज के जिलों और सुदूर देहातों से दौड़े चले आते हैं बेसहारा मरीज

इस मुफ्त चिकित्सीय जांच शिविर की ख्याति और विश्वसनीयता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ केवल सकरा के स्थानीय लोग ही नहीं आते, बल्कि पूसा, पातेपुर, बरियारपुर और चिकनौटा जैसे कई किलोमीटर दूर स्थित सुदूर ग्रामीण और देहाती इलाकों से मरीज अपनी गंभीर से गंभीर बीमारियों का इलाज कराने के लिए सुबह से ही पहॅुचने लगते हैं। ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव और अत्यंत गरीबी के कारण जो लोग बड़े शहरों के महंगे डॉक्टरों की फीस और जांच का खर्च उठाने में असमर्थ हैं, उनके लिए डॉक्टर अरुण कुमार राय का यह अस्पताल किसी वरदान और संजीवनी बूटी की तरह काम कर रहा है। आज के कैंप में भी सुबह से ही मरीजों का आना शुरू हो गया था और देखते ही देखते करीब दो दर्जन से अधिक गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज डॉक्टर साहब से परामर्श लेने पहुंचे।

सकरा के आर पी मेमोरियल चैरिटेबल हॉस्पिटल के मुख्य रजिस्ट्रेशन काउंटर पर कतारबद्ध खड़े ग्रामीण और इलाज का पर्चा हाथ में लेकर चेहरे पर गहरी संतुष्टि और मुस्कान लिए खड़ीं ग्रामीण महिलाएं और बुजुर्ग मरीज,

मुस्तैदी से डटे रहे जांबाज पारा मेडिकल स्टाफ महबूब, अमर और रोशनी

इतनी भारी संख्या में पहुंचे मरीजों की भीड़ को व्यवस्थित करना और उन्हें सही समय पर बेहतर इलाज मुहैया कराना एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था, लेकिन अस्पताल के समर्पित पारा मेडिकल स्टाफ ने अपनी मुस्तैदी से इस काम को बेहद आसान बना दिया। शिविर में पारा मेडिकल स्टाफ के मुख्य स्तंभ महबूब आलम, अमर कुमार और रोशनी खातून पूरी निष्ठा और सक्रियता के साथ अपनी ड्यूटी पर तैनात रहे। इन स्वास्थ्य कर्मियों ने न केवल काउंटर पर आने वाले हर एक मरीज का बेहद शालीनता से स्वागत किया, बल्कि बेहद मुस्तैदी से उनका प्राथमिक चेकअप किया, जिसमें मरीजों का ब्लड प्रेशर, वजन और अन्य जरूरी शुरुआती जांच शामिल थीं। इसके बाद बेहद सुव्यवस्थित तरीके से एक-एक कर सभी मरीजों को डॉक्टर अरुण कुमार राय के केबिन तक पहुंचाया गया ताकि मरीज बिना किसी हड़बड़ाहट के डॉक्टर साहब को अपनी तकलीफ बता सकें।

क्या कहते हैं गरीबों के दुखों को हरने वाले डॉक्टर अरुण कुमार राय?

शिविर की समाप्ति के बाद मीडिया से बेहद आत्मीय बातचीत करते हुए डॉक्टर अरुण कुमार राय भावुक हो गए। उन्होंने अपने इस 25 वर्षों के लंबे और गौरवशाली सफर को याद करते हुए कहा, “जब मैंने इस चैरिटेबल हॉस्पिटल की शुरुआत अपने पिता की याद में की थी, तब मेरा एकमात्र लक्ष्य यही था कि इलाके का कोई भी गरीब व्यक्ति पैसे के अभाव में बिना इलाज के न मरे। आज इस सफर को 25 वर्ष से ज्‍यादा  हो चुके हैं और मुझे यह बताते हुए बेहद आत्मसंतुष्टि और गर्व की अनुभूति हो रही है कि सिर्फ इस मंगलवार वाले विशेष मुफ्त कैंप के माध्यम से अब तक हजारों-हजार मरीज पूरी तरह से ठीक होकर अपने घरों को लौट चुके हैं और खुशहाल जीवन जी रहे हैं।”

डॉक्टर अरुण कुमार राय ने आगे विस्तार से बताते हुए कहा, “आज भी हमारे इस सेवा शिविर में करीब दो दर्जन से अधिक असहाय मरीज इलाज के लिए पहुंचे हैं। मैं समाज को यह विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि आगे भी जीवन की आखिरी सांस तक प्रत्येक मंगलवार को यह मुफ्त चिकित्सीय जांच और परामर्श शिविर इसी तरह पूरी भव्यता और सेवा भाव के साथ चलता रहेगा। हमारा यह संकल्प अटूट है।” डॉक्टर अरुण कुमार राय ने कहा कि, “जो मरीज बहुत ज्यादा वृद्ध हैं, शारीरिक रूप से लाचार हैं, चलने-फिरने में असमर्थ हैं, या फिर ऐसे  मरीज जिनके परिवार में उनकी देखभाल करने वाला कोई दूसरा सदस्य मौजूद नहीं है, उन्हें हमारे इस आर पी मेमोरियल चैरिटेबल हॉस्पिटल की तरफ से न केवल मुफ्त डॉक्टर परामर्श दिया जाता है, बल्कि उन्हें ठीक होने के लिए आवश्यक दवाइयां भी  मुफ्त में उपलब्ध कराई जाती हैं, ताकि वे स्‍वास्‍थ्‍य लाभ प्राप्‍त कर सकें ।”

आज के कैंप में आज ईलाज के लिए आये मरीजों की सूची:

अस्पताल के आधिकारिक और पंजीकृत रिकॉर्ड के अनुसार, दोपहर तक आज के इस शिविर में  गंभीर बीमारियों का सफल इलाज कराने और मुफ्त परामर्श पाने वाले मुख्य मरीजों की सूची इस प्रकार है, जिन्हें डॉक्टर साहब ने खुद अपने हाथों से देखा और दवाइयां लिखीं: अबेदा खातून – निवासी: पातेपुर चौराहा,रिभा कुमारी – निवासी: रायपुरा ,राधा देवी – निवासी: मरीचा, पुतुल कुमारी – निवासी: सादपुर,राजकिशोर ठाकुर – निवासी: कटेसर, लीला देवी – निवासी: सुजावलपुर , सोनम कुमारी – निवासी: जे पी ब्रह्मपुरा, सोनू कुमार – निवासी: लोहारगामा, रामरती देवी – निवासी: शहदउल्लापुर, राबिया खातून – निवासी: खेसराही,कायनात बानो – निवासी: खेसराही, सुधीर कुमार – निवासी: खास पट्टी, जगन्नाथपुर, अनिल कुमार राय – निवासी: मनोहर पट्टी, मंटू देवी – निवासी: रैनी ,अशर्फी देवी – निवासी: रैनी, सहित अन्‍य दर्जनों मरीज को देखा गया ।

निश्चित रूप से, आर पी मेमोरियल चैरिटेबल हॉस्पिटल और डॉक्टर अरुण कुमार राय द्वारा किया जा रहा यह निस्वार्थ कार्य आज के आधुनिक समाज के लिए एक महान प्रेरणा है। इस अस्पताल ने यह साबित कर दिया है कि अगर मन में सच्ची सेवा की भावना हो, तो बिना किसी सरकारी मदद या भारी-भरकम फंड के भी हजारों असहाय लोगों की जिंदगी को संवारा और बचाया जा सकता है।

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