सहयोग पोर्टल पर मची खलबली! मुजफ्फरपुर के सादिकपुर मुरौल मामले में सरकार सख्त, किराये के मकान के खेल में शामिल चेहरे होंगे बेनकाब!
मुजफ्फरपुर, 6 जुलाई 2026: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से सरकारी पैसे के क्रूर दुरुपयोग और प्रशासनिक व्यवस्था की मनमानी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे पंचायती राज विभाग को हिलाकर रख दिया है। नगर पंचायत मुरौल में सभी सुख-सुविधाओं से लैस एक भव्य ‘पंचायत सरकार भवन’ पहले से ही सीना ताने खड़ा है, लेकिन इसके बावजूद जनता की गाढ़ी कमाई को पानी की तरह बहाते हुए नगर पंचायत का दफ्तर एक निजी किराये के मकान में चलाया जा रहा था। इतना ही नहीं, भ्रष्टाचार और लापरवाही की हद तो तब पार हो गई जब इस मजबूत और सर्वसुविधा युक्त सरकारी भवन को कार्यालय संचालन के लिए अनुपयुक्त यानी पूरी तरह से बेकार घोषित कर दिया गया और कागजों पर एक बिल्कुल नये भवन के निर्माण की अनुशंसा तक भेज दी गई। सरकारी खजाने को चूना लगाने की इस सोची-समझी साजिश का भंडाफोड़ तब हुआ जब सादिकपुर मुरौल के रहने वाले एक जागरूक नागरिक एवं मुरौल नगर पंचायत के वार्ड पार्षद आनंद कन्द साह ने इस महाघोटाले के खिलाफ सीधे सरकार के ‘सहयोग पोर्टल’ पर मोर्चा खोल दिया।

क्या है पूरा खेल और कैसे रची गई साजिश? : शिकायतकर्ता आनंद कन्द साह, पंजीकरण संख्या REF452154, जो ग्राम पंचायत राज सादिकपुर मुरौल के निवासी हैं, ने विभाग में एक धारदार परिवाद पत्र दाखिल किया था। इस शिकायत में उन्होंने सीधे तौर पर भ्रष्ट तंत्र पर कड़े सवाल दागे कि जब नगर पंचायत मुरौल के अधिकार क्षेत्र में पहले से ही करोड़ों की लागत से बना आलीशान पंचायत सरकार भवन उपलब्ध है, तो फिर जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा एक निजी किराये के मकान पर क्यों लुटाया जा रहा है? इसके साथ ही, वर्तमान के सुदृढ़ और पूरी तरह से सुरक्षित सरकारी भवन को रातों-रात अनुपयुक्त बताकर नये सिरे से नया भवन बनाने की सिफारिश करने के पीछे आखिर अधिकारियों की क्या काली मंशा थी, इस पर भी तीखे सवाल खड़े किए गए। इस एक शिकायत ने दफ्तरों में आराम फरमा रहे अफसरों की नींद उड़ा दी।

अधिकारियों के बीच मची खलबली, पत्रों का दौर शुरू : जैसे ही यह मामला सहयोग पोर्टल के जरिए आला अधिकारियों तक पहुंचा, विभाग के भीतर जबरदस्त खलबली मच गई। पंचायती राज विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी ने इस बेहद गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए तत्काल मुजफ्फरपुर के जिला पंचायत राज पदाधिकारी से पत्रांक 9695/पं0रा0 के जरिए सीधे तौर पर जवाब तलब कर लिया। इसके बाद जांच और पत्राचार की जो कड़ियां सामने आईं, उसने इस पूरे तंत्र के काले कारनामों की पोल खोलकर रख दी:
- नगर कार्यपालक पदाधिकारी (नगर पंचायत मुरौल) ने पत्रांक 722 के जरिए प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी से नवगठित नगर निकाय के संचालन के लिए पंचायत सरकार भवन उपलब्ध कराने का एक अनुरोध किया था।
- इसके तुरंत बाद, प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी ने पत्रांक 118 के जरिए इस पूरे मामले की जटिल स्थिति को देखते हुए जिला मुख्यालय से दिशा-निर्देश और मार्गदर्शन मांगा, जिससे साफ है कि परदे के पीछे कुछ बड़ा पक रहा था।


जांच में हुआ महाखुलासा: बिल्कुल सही है सरकारी भवन लगातार बढ़ते दबाव के बाद जिला पंचायत राज पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर द्वारा इस पूरे मामले की स्थलीय जांच की गई। इस उच्च स्तरीय जांच रिपोर्ट में जो सच सामने आया वह चौंकाने वाला था। जांच में यह पूरी तरह साफ हो गया कि नगर पंचायत मुरौल के क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला यह पंचायत सरकार भवन कार्यालय के नियमित और सुचारू संचालन के लिए शत-प्रतिशत उपयुक्त और मजबूत है। नये भवन के निर्माण की पूरी थ्योरी मनगढ़ंत और पूरी तरह से बेबुनियाद पाई गई, जो केवल बजट खपाने के लिए रची गई थी।

अस्थायी व्यवस्था और प्रशासन का हंटर: जांच रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में ग्राम पंचायत राज सादिकपुर मुरौल का नया पंचायत सरकार भवन अभी निर्माणाधीन है, जिस कारण सादिकपुर मुरौल का ग्राम पंचायत कार्यालय और ग्राम कचहरी इसी पुराने भवन से अस्थायी रूप से संचालित हो रहे हैं। इस समस्या का त्वरित समाधान निकालते हुए जिला पंचायत राज पदाधिकारी ने बिहार सरकार के नगर आवास एवं आवास विभाग के कड़े नियमों (पत्रांक 1284/न0वि0 एवं आ0वि0) का हवाला देते हुए अपना अंतिम आदेश जारी कर दिया है:
“जब तक ग्राम पंचायत राज सादिकपुर मुरौल के नये भवन का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक वर्तमान पंचायत सरकार भवन के केवल 2 कमरों को ग्राम पंचायत कार्यालय के लिए सुरक्षित छोड़ा जाएगा। इसके अलावा शेष पूरे विशाल पंचायत सरकार भवन में नवगठित नगर पंचायत मुरौल के कार्यालय को तुरंत शिफ्ट कर नियमित रूप से संचालित किया जाएगा।”
इस कड़े फैसले और रिपोर्ट की प्रतिलिपि जिलाधिकारी मुजफ्फरपुर को सादर सूचनार्थ एवं अनुमोदनार्थ भेज दी गई है। साथ ही प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी और नगर कार्यपालक पदाधिकारी को इस पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।

पटना तक हड़कंप, एल3 स्तर पर पहुंची शिकायत: 24 घंटे में मांगी रिपोर्ट! यह पूरा मामला तब और अधिक गरमा गया जब सहयोग पोर्टल पर लंबित यह शिकायत सीधे एल3 (L3) यानी सर्वोच्च विभागीय स्तर पर पहुंच गई। मामले की संवेदनशीलता और सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को देखते हुए पंचायती राज विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी ललित राही ने मुजफ्फरपुर के जिला पदाधिकारी को पत्र जारी कर पूरे मामले पर बिजली की गति से कार्रवाई करने का आदेश दिया है। विभाग ने साफ किया है कि आनंद कुमार साह, पिता-मनोज कुमार की इस शिकायत के सभी बिंदुओं की गहनता से नियमानुसार जांच कर मात्र 24 घंटे के भीतर की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट विभाग को सौंपी जाए। इस मामले को सरकार ने शीर्ष प्राथमिकता पर रखा है।
विशेष कार्य पदाधिकारी ललित राही ने इस संबंध में ज्ञापांक 2प/पं०स०भ०-09-15/2020/9695/पं०रा० दिनांक 01/07/2026 के जरिए मुजफ्फरपुर के जिला पंचायत राज पदाधिकारी को भी सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रतिलिपि भेज दी है, ताकि धरातल पर तुरंत एक्शन लिया जा सके। इसके साथ ही विभागीय गै०स०प्रे०सं-2253 दिनांक 25.06.2026 के आलोक में नोडल पदाधिकारी, सहयोग शिविर कोषांग-सह-विशेष कार्य पदाधिकारी, पंचायती राज विभाग को भी इस संबंध में सूचित कर दिया गया है। अब देखना यह होगा कि विभाग के इस बेहद कड़े और अल्टीमेटम वाले आदेश के बाद मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन इस किराये के मकान के खेल में शामिल जिम्मेदार चेहरों पर अगले 24 घंटे के भीतर क्या कार्रवाई करता है।
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