WHATSAPP पर लीक हुआ नीट का पेपर! NTA ने घुटने टेके, परीक्षा रद्द—अब होगी ‘मुफ्त’ में दोबारा परीक्षा।
नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET (UG) 2026 को लेकर चल रहा विवाद अब एक निर्णायक मोड़ पर आ गया है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने भारी अनियमितताओं और पेपर लीक की पुष्टि होने के बाद 3 मई 2026 को आयोजित हुई परीक्षा को रद्द करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद अब इस पूरे घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई है।
तस्वीर में नीट महाघोटाले पर कड़ा रुख अपनाते हुए एनटीए महानिदेशक अभिषेक सिंह। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीबीआई जांच के जरिए हर दोषी को सजा दिलाई जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी धांधली न हो।” एवं दायें में जारी प्रेस विज्ञप्ति ।
7 मई की रात और व्हिसलब्लोअर का वो मैसेज
NTA महानिदेशक अभिषेक सिंह ने खुलासा किया कि परीक्षा 3 मई को सुचारू रूप से संपन्न हो गई थी, लेकिन 7 मई की रात को एक व्हिसलब्लोअर के जरिए सनसनीखेज जानकारी मिली। सूचना यह थी कि परीक्षा से पहले ही व्हाट्सएप पर एक पीडीएफ (PDF) वायरल हो रहा था, जिसमें मौजूद प्रश्न असली पेपर से मेल खा रहे थे।
जांच एजेंसियों के सत्यापन में यह पाया गया कि 1 और 2 मई को ही कुछ लोगों के मोबाइल फोन पर यह लीक प्रश्न पत्र मौजूद था। महानिदेशक ने स्पष्ट किया कि 22,69,000 छात्रों की मेहनत और सिस्टम की शुचिता को बचाने के लिए परीक्षा रद्द करना ही एकमात्र विकल्प था。
छात्रों को ‘डबल‘ तोहफा: फीस रिफंड और अगली परीक्षा फ्री
एनटीए ने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए छात्रों के लिए राहत का बड़ा ऐलान किया है:
फीस वापसी: 3 मई की परीक्षा के लिए ली गई पूरी फीस छात्रों को वापस (Refund) की जाएगी।
कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं: दोबारा होने वाली परीक्षा के लिए छात्रों से एक भी पैसा अतिरिक्त नहीं लिया जाएगा।
पुराना डेटा ही मान्य: छात्रों को दोबारा पंजीकरण करने की जरूरत नहीं होगी; पिछला डेटा और केंद्र विकल्प ही आगे बढ़ाए जाएंगे।
आंतरिक संसाधनों से खर्च: दोबारा परीक्षा का पूरा वित्तीय बोझ NTA खुद उठाएगा।
CBI की रडार पर ‘स्कैमस्टर्स‘ और टेलीग्राम माफिया
महानिदेशक ने बताया कि परीक्षा से पहले ही 120 टेलीग्राम चैनलों को ब्लॉक किया गया था, जो फर्जी पेपर बेच रहे थे। अब सीबीआई इस बात की तह तक जाएगी कि व्हाट्सएप पर पेपर लीक करने वाला मास्टरमाइंड कौन है। सरकार ने साफ संदेश दिया है कि हर उस क्रिमिनल और फ्रॉड को जेल भेजा जाएगा जिसने लाखों बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है।
महत्वपूर्ण सूचना:
पुनः परीक्षा की तारीखें और नए एडमिट कार्ड जारी करने का शेड्यूल जल्द ही एनटीए के आधिकारिक चैनलों के माध्यम से अधिसूचित किया जाएगा। अभिभावकों और उम्मीदवारों से अनुरोध है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट खबरों पर ध्यान न दें।
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पटना | मुख्य संवाददाता बिहार में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती घरेलू और लैंगिक हिंसा को रोकने के लिए अब केवल फाइलों में कानून बनाना काफी नहीं होगा, बल्कि पुलिसिंग के नजरिए और समाज की सोच को बदलना होगा। यह सख्त संदेश बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार ने पटना स्थित पुलिस मुख्यालय (सरदार पटेल भवन) के सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला के दौरान दिया।
पटना स्थित पुलिस मुख्यालय (सरदार पटेल भवन) में आयोजित ‘घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण’ विषय पर कार्यशाला का दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन करते बिहार के DGP विनय कुमार। साथ में ADG (कमजोर वर्ग) अमित कुमार जैन, विशेष सचिव (गृह) के.एस. अनुपम व अन्य गणमान्य।
सिस्टम की कमियों को किया उजागर “घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005” तथा “लिंग आधारित हिंसा” विषयों पर आयोजित इस एकदिवसीय प्रशिक्षण-सह-संवेदीकरण कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए DGP विनय कुमार ने पुलिसिया कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बेबाकी से स्वीकार किया कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए अनगिनत योजनाएं और कड़े कानून होने के बावजूद जमीनी स्तर पर वह ‘आउटकम’ (परिणाम) नहीं दिख रहा है, जिसकी उम्मीद थी। उन्होंने कहा, “इतनी कोशिशों के बाद भी अपेक्षित परिणाम न मिलना यह दर्शाता है कि हमारे एटीट्यूड और माइंडसेट (सोच) में आज भी अपेक्षित परिवर्तन नहीं हुआ है।”
अपराधी पकड़ने से आगे बढ़ना होगा DGP ने कार्यशाला में मौजूद पुलिस अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा केवल एक अपराध नहीं, बल्कि उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा, “लॉ एनफोर्समेंट एजेंसी होने के नाते हम न्याय की पहली कड़ी हैं। हमारी भूमिका केवल अपराधी को पकड़कर जेल भेजने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि हमें पीड़ित महिला के मन में यह विश्वास पैदा करना होगा कि कानून पूरी मजबूती के साथ उसके पीछे खड़ा है।” उन्होंने ‘रिएक्टिव’ पुलिसिंग (घटना के बाद कार्रवाई) को छोड़कर ‘प्रो-एक्टिव’ पुलिसिंग (घटना को रोकने के लिए सक्रियता) अपनाने पर जोर दिया।
प्रभावी क्रियान्वयन और पुनर्वास पर जोर कार्यक्रम में उपस्थित डॉ. अमित कुमार जैन (अपर पुलिस महानिदेशक, कमजोर वर्ग) ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए बने कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करना अनिवार्य है। उन्होंने न केवल सुरक्षा बल्कि पीड़ित महिलाओं के पुनर्वास की व्यवस्था को भी प्राथमिकता देने की बात कही ताकि वे समाज की मुख्यधारा में सम्मान के साथ वापस लौट सकें।
इन प्रमुख अधिकारियों की रही मौजूदगी बिहार पुलिस के ‘कमजोर वर्ग प्रभाग’ द्वारा ‘महिला एवं बाल विकास निगम’ के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में राज्य के कई दिग्गज अधिकारी शामिल हुए:
विनय कुमार, पुलिस महानिदेशक (DGP), बिहार
डॉ. अमित कुमार जैन, अपर पुलिस महानिदेशक (ADG), कमजोर वर्ग
के.एस. अनुपम, विशेष सचिव, गृह विभाग
योगेश सागर, प्रबंध निदेशक, महिला एवं बाल विकास निगम
आमिर जावेद, पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG), कमजोर वर्ग
ख्वाजा सादत नूर, राज्य कार्यालय प्रमुख, यूएनएफपीए (UNFPA)
कार्यशाला में तेजाब हमला (Acid Attack) की सर्वाइवर्स भी मौजूद रहीं, जिन्होंने पुलिस और समाज के बीच समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य पुलिस बल को संवेदनशील बनाना था ताकि घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं को थानों में भटकना न पड़े और उन्हें तुरंत न्याय मिल सके।
मुजफ्फरपुर/पटना: बिहार की माटी के सच्चे सपूत, किसानों के मसीहा और ‘लीची के जादूगर’ कहे जाने वाले पद्मश्री डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी अब हमारे बीच नहीं रहे। मंगलवार सुबह करीब 5:30 बजे पटना के मेदांता अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। 90 के दशक में राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति रहे डॉ. त्रिवेदी पिछले कुछ दिनों से सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर फैलते ही मुजफ्फरपुर के मतलूपुर गांव से लेकर देश के कृषि गलियारों तक शोक की लहर दौड़ गई है।
“विद्वता और सादगी का संगम: किसानों की किस्मत बदलने वाले पद्मश्री डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी की एक यादगार तस्वीर।”
खेतों में ढूँढा समाधान, किसानों को दी नई जिंदगी डॉ. त्रिवेदी केवल फाइलों वाले वैज्ञानिक नहीं थे, वे जमीन पर उतरकर काम करने वाले ‘ऋषि’ थे। जब मुजफ्फरपुर की पहचान ‘शाही लीची’ के पुराने बाग दम तोड़ रहे थे, तब उन्होंने ‘कैनोपी मैनेजमेंट’ (पुनर्जीवन तकनीक) के जरिए बूढ़े पेड़ों को नई जवानी दी। उनकी इस तकनीक ने हज़ारों किसानों के उजड़ते बागों को फिर से फलों से लद दिया।
‘बाबा परियोजना‘ से जलजमाव को बनाया वरदान उन्होंने उत्तर बिहार के जलजमाव वाले इलाकों के लिए ‘बाबा परियोजना’ (बिहार एक्वाकल्चर बेस्ड एग्रीकल्चर) की शुरुआत की। जहाँ पानी जमा होने से खेती बर्बाद होती थी, वहां उन्होंने मछली पालन, मखाना और सिंघाड़े की खेती का ऐसा मॉडल पेश किया कि किसानों की आय कई गुना बढ़ गई।
सादगी की प्रतिमूर्ति: कुलपति से प्रगतिशील किसान तक का सफर डॉ. त्रिवेदी का जीवन संघर्षों की मिसाल रहा। पिता के निधन के बाद पढ़ाई बीच में छोड़कर खेती की कमान संभालने वाले इस शख्स ने बाद में कृषि विज्ञान में पीएचडी की और कुलपति के सर्वोच्च पद तक पहुंचे। रिटायरमेंट के बाद वे आराम करने के बजाय वापस अपने गांव मतलूपुर लौटे और 85 एकड़ में खेती का ऐसा आधुनिक मॉडल खड़ा किया जिसे देखने देशभर से लोग आते थे।
भावुक विदाई: उनके करीबी श्याम किशोर सिंह ने भरे गले से कहा, “आज समाज ने एक ऋषितुल्य व्यक्तित्व खो दिया है। शासन-प्रशासन से लेकर राजनीति तक उनकी साख थी, लेकिन उनका दिल हमेशा गांव की पगडंडियों में ही बसता था। यह रिक्त स्थान कभी नहीं भरेगा।”
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पटना। बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही तय करने और आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए आज एक क्रांतिकारी कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री सचिवालय से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ‘सहयोग‘ हेल्पलाइन (1100) और विशेष वेब पोर्टल का भव्य शुभारंभ किया।
ऐतिहासिक शुरुआत: पटना स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय में आयोजित भव्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ‘सहयोग’ हेल्पलाइन और पोर्टल का लोकार्पण करते हुए। साथ में वरिष्ठ मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव व अन्य वरिष्ठ अधिकारी।
इस योजना की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली विशेषता इसकी ‘डेडलाइन‘ है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी शिकायत का समाधान 30 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा। यदि 30 दिन की समय सीमा समाप्त होती है, तो 31वें दिन संबंधित लापरवाह अधिकारी के खिलाफ स्वतः कार्रवाई या सस्पेंशन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
CMO की सीधी नजर, अब फाइलें नहीं अटकेंगी उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अब हर नागरिक की आवाज सीधे सत्ता के गलियारों तक पहुंचेगी। इस पूरे सिस्टम की निगरानी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) द्वारा की जाएगी, जिससे बिचौलियों और लेटलतीफी की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
‘सहयोग‘ की मुख्य बातें:
हेल्पलाइन नंबर: डायल करें 1100 और दर्ज कराएं अपनी समस्या।
गाँव-गाँव पहुंचेगी सरकार: 19 मई 2026 से हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को पंचायत स्तर पर विशेष शिविर लगाए जाएंगे।
कठोर कार्रवाई: 31वें दिन की ‘ऑटो-एक्शन’ पॉलिसी से अफसरों में हड़कंप।
सरकार आपके द्वार: पंचायत स्तर पर लगेगा दरबार प्रशासनिक सुधार की इस कड़ी में अब जनता को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। सरकार खुद चलकर जनता के पास जाएगी। पंचायत स्तर पर लगने वाले शिविरों के जरिए मौके पर ही समस्याओं के निपटारे की कोशिश की जाएगी। इस पहल से बिहार में भ्रष्टाचार पर लगाम लगने और पारदर्शी शासन व्यवस्था कायम होने की उम्मीद है।
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ताजपुर/समस्तीपुर : बिहार की सियासत में हलचल पैदा करने और जनमुद्दों को धार देने के लिए भाकपा-माले ने कमर कस ली है। आगामी 16 से 18 मई 2026 तक लहेरियासराय प्रेक्षागृह में आयोजित होने वाले 12वें बिहार राज्य सम्मेलन को ऐतिहासिक बनाने के लिए रविवार को कार्यकर्ताओं ने ताजपुर की सड़कों पर उतरकर पोस्टर जारी किया और सघन प्रचार अभियान चलाया।
हुंकार: लहेरियासराय में भाकपा-माले के 12वें बिहार राज्य सम्मेलन की सफलता को लेकर पोस्टर जारी करते प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह, आसिफ होदा व अन्य पार्टी कार्यकर्ता।
किसानों-मजदूरों की आवाज बनेगा यह महामंच
अभियान के दौरान पार्टी नेताओं ने हुंकार भरते हुए कहा कि यह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सत्ता की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ एक निर्णायक जंग का आगाज है। सम्मेलन में:
किसानों और मजदूरों के हक की आवाज बुलंद की जाएगी।
नौजवानों के रोजगार और भविष्य पर व्यापक रणनीति बनेगी।
जनसंघर्षों को तेज कर संगठन को फौलादी मजबूती दी जाएगी।
चौक-चौराहों पर गूंजा इंकलाब
प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने बाजार और विभिन्न चौक-चौराहों पर पोस्टर चस्पा कर आम जनता से इस सम्मेलन में बढ़-चढ़कर भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की। नेताओं ने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में यह आंदोलन गांव-गांव तक पहुंचेगा।
इस अभियान में मुख्य रूप से प्रखंड कमिटी सदस्य आसिफ होदा, मो० एजाज, ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, राजदेव प्रसाद सिंह, शंकर महतो, चांद बाबू, शाद तौहीदी, बस्साम तौहीदी, संजीव राय और मो० रहमान सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता जोश के साथ शामिल हुए।
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मुजफ्फरपुर। महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय (MDDM) के रसायन शास्त्र विभाग में सोमवार को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर एक भव्य और ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। छात्राओं ने न केवल विज्ञान के क्षेत्र में भारत की शक्ति को याद किया, बल्कि दुनिया बदलने वाले वैज्ञानिकों को अनूठे अंदाज में श्रद्धांजलि भी दी।
पोखरण की जीत और वैज्ञानिकों का सम्मान 11 मई 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण (ऑपरेशन शक्ति) की सफलता की याद में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्राओं ने विभिन्न प्रसिद्ध रसायनशास्त्रियों, वैज्ञानिकों और नोबेल पुरस्कार विजेताओं के छायाचित्रों के साथ उनके क्रांतिकारी आविष्कारों की प्रस्तुति दी। छात्राओं के हाथों में थमी महान वैज्ञानिकों की तस्वीरें यह संदेश दे रही थीं कि आने वाली पीढ़ी विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए तैयार है।
प्राचार्या ने जगाया छात्राओं में जोश कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर डॉक्टर अलका जायसवाल ने छात्राओं को संबोधित करते हुए इस दिवस की ऐतिहासिक महत्ता समझाई। उन्होंने कहा कि तकनीक ही वह जरिया है जिससे समाज और राष्ट्र का विकास संभव है।
प्रतिभा का प्रदर्शन: अनुपम, आकांक्षा और खुशबू ने मारी बाजी छात्राओं के बीच आयोजित प्रस्तुति प्रतियोगिता में कड़ी टक्कर देखने को मिली। अपने बेहतरीन ज्ञान और प्रस्तुतीकरण के आधार पर अनुपम कुमारी ने प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि आकांक्षा कुमारी को द्वितीय और खुशबू कुमारी को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. वर्षा तिवारी और सहायक प्राध्यापिका डॉ. स्मिता ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया। मौके पर डॉ. अर्चना गुप्ता, डॉ. पल्लवी, डॉ. रचना, डॉ. श्वेता यादव, डॉ. राकेश रंजन और श्री सचिन कुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
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ब्रांड चोरी कर लूट रहे थे अभिभावकों की जेब: जिला प्रशासन ने 16 स्कूलों की सूची जारी कर मांगा जवाब
रिर्पोट :- एस. एस. कुमार ‘पंकज’
मुजफ्फरपुर। जिले में शिक्षा के नाम पर ‘ब्रांड’ की चोरी और अभिभावकों की गाढ़ी कमाई पर डाका डालने का एक बहुत बड़ा सिंडिकेट सक्रिय है। दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) जैसे प्रतिष्ठित नाम का सहारा लेकर गली-कूचों में दुकानें सजाए बैठे शिक्षा माफियाओं के खिलाफ अब जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने सर्जिकल स्ट्राइक शुरू कर दी है। प्रशासन के इस कड़े रुख से जिले के फर्जी स्कूल संचालकों के पसीने छूट रहे हैं।
नाम ‘बड़े‘ और दर्शन ‘फर्जी‘: मुजफ्फरपुर में DPS के नाम पर चल रही दुकानों पर अब लगेगा ताला!
शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक, DPS के मिलते-जुलते नाम और लोगो लगाकर स्कूल खोलना एक मुनाफे का धंधा बन गया था। असली ‘दिल्ली पब्लिक स्कूल सोसाइटी’ (नई दिल्ली) के नाम का दुरुपयोग कर ये स्कूल न केवल कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को भी ठेंगा दिखा रहे हैं। जिलाधिकारी के आदेश पर अब इन सभी संस्थानों की कुंडली खंगाली जा रही है।
शिक्षा के नाम पर धोखाधड़ी? :फलता फूलता सिंडीकेट
यह सिर्फ कॉपीराइट का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह हज़ारों बच्चों के भविष्य के साथ सीधे तौर पर धोखाधड़ी है। एक प्रतिष्ठित ब्रांड का नाम देखकर अभिभावक भारी-भरकम फीस भरते हैं, इस उम्मीद में कि उनके बच्चे को विश्वस्तरीय शिक्षा मिलेगी। लेकिन धरातल पर इन स्कूलों के पास न तो उचित इंफ्रास्ट्रक्चर है और न ही योग्य शिक्षक। प्रशासन की यह कार्रवाई मुजफ्फरपुर में उस ‘ब्रांड कल्चर’ पर गहरी चोट है, जिसके पीछे केवल लूट का काला कारोबार छिपा है।
अभिभावक सावधान! कहीं आपका बच्चा भी तो नहीं पढ़ रहा ‘नकली‘ DPS में? देखिए पूरी लिस्ट
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO), बिहार शिक्षा परियोजना, मुजफ्फरपुर ने पत्र संख्या 1047 के माध्यम से जिले के विभिन्न प्रखंडों में चल रहे निम्नलिखित 16 संदिग्ध स्कूलों की सूची जारी की है और उनकी जांच के आदेश दिए हैं:
क्र.सं.
स्कूल का नाम (अंग्रेजी में)
स्कूल का नाम (हिंदी में)
संबंधित प्रखंड
1
DELHI INTERNATIONAL SCHOOL
दिल्ली इंटरनेशनल स्कूल
मुशहरी
2
DELHI PUBLIC SCHOOL (A-WING) AURAI
दिल्ली पब्लिक स्कूल (A-विंग), औराई
औराई
3
Delhi Public School (H-Wing)
दिल्ली पब्लिक स्कूल (H-विंग)
बरुराज (मोतीपुर)
4
DELHI PUBLIC SCHOOL INTERNATIONAL GARHAN
दिल्ली पब्लिक स्कूल इंटरनेशनल, गरहां
बोचहाँ
5
Delhi public school international jafarpur
दिल्ली पब्लिक स्कूल इंटरनेशनल, जाफरपुर
पारू
6
Delhi Public School International Kanti
दिल्ली पब्लिक स्कूल इंटरनेशनल, कांटी
कांटी
7
DELHI PUBLIC SCHOOL JHAPHAN
दिल्ली पब्लिक स्कूल, झपहाँ
मुशहरी
8
DELHI PUBLIC SCHOOL LAKHANPUR, KATRA
दिल्ली पब्लिक स्कूल, लखनपुर, कटरा
कटरा
9
DELHI PUBLIC SCHOOL MITHANPURA
दिल्ली पब्लिक स्कूल, मिठनपुरा
मुशहरी
10
DELHI PUBLIC SCHOOL MUZAFFARPUR
दिल्ली पब्लिक स्कूल, मुजफ्फरपुर
कुढ़नी
11
DELHI PUBLIC SCHOOL SARAIYA
दिल्ली पब्लिक स्कूल, सरैया
सरैया
12
DELHI PUBLIC SCHOOL, YAJUAR
दिल्ली पब्लिक स्कूल, यजुआर
कटरा
13
DELHI PUBLIC SCHOOL, SHARFUDDINPUR
दिल्ली पब्लिक स्कूल, शर्फुद्दीनपुर
बोचहाँ
14
D.P.S. KIDS, BHAGWANPUR
डी.पी.एस. किड्स, भगवानपुर
मुशहरी
15
SR. SEC. D.P.S. DHOLI (N.H.-28)
सीनियर सेकेंडरी डी.पी.एस. ढोली(एन.एच.-28)
सकरा
16
D.P.S. JUNIOR INTER SCHOOL, BERIYA
डी.पी.एस. जूनियर इंटर स्कूल, बेरिया
कांटी
जिलाधिकारी के तेवर देख संचालकों के छूटे पसीने!
जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन के पत्र संख्या 1622 (दिनांक 08.05.2026) के बाद शिक्षा विभाग ने युद्ध स्तर पर कार्रवाई शुरू की है।
3 दिन का अल्टीमेटम: जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कुमार अरविंद सिन्हा ने नोटिस जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि यदि ये स्कूल 3 दिनों के भीतर अपनी सत्यता के साक्ष्य पेश नहीं करते हैं, तो उन पर प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
तस्वीरों से होगा मिलान: DPO सुजीत कुमार दास ने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि स्कूलों के मुख्य गेट की रंगीन फोटो और उनके मान्यता संबंधी कागजात 2 दिन के अंदर मुख्यालय को सौंपे जाएं।
DPS स्कूल का झोल, प्रशासन ने खोला पोल: अब मुजफ्फरपुर में नहीं चलेगी ब्रांड की चोरी!
प्रशासन की इस कार्रवाई ने यह संदेश साफ कर दिया है कि अब जिले में फर्जी नाम के सहारे बच्चों का भविष्य दांव पर नहीं लगाया जा सकेगा। अगर ये स्कूल अपनी वैधता सिद्ध नहीं कर पाते हैं, तो बहुत जल्द इन 16 दुकानों पर स्थायी रूप से ताला लटकना तय है।
ग्राउंड जीरो से बड़ा खुलासा: अभी तो यह सिर्फ शुरुआत है, खुलेगी और भी कई ‘ब्रांडेड दुकानों‘ की पोल!
मुजफ्फरपुर में शिक्षा के नाम पर जारी यह फर्जीवाड़ा सिर्फ इन 16 स्कूलों तक सीमित नहीं है। जानकारों की मानें तो आने वाले समय में यह सूची और भी लंबी होने वाली है। हमारे मीडियाकर्मियों की टीम लगातार इस ‘लूट तंत्र’ की जड़ों तक पहुँचने का प्रयास कर रही है, जिसमें ग्रामीण इलाकों में संचालित कई ऐसे नामचीन स्कूलों के चेहरे बेनकाब होंगे, जिन्हें जानकर प्रशासन और अभिभावक दोनों ‘शॉक्ड’ रह जाएंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों से ‘ग्राउंड जीरो‘ की ऐसी चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आई हैं, जो दिल दहला देने वाली हैं। एक साथ दर्जनों बच्चों को स्कूल बस में भेड़-बकरियों की तरह लादकर और कुछ को पैदल ‘अस्पताल’ से निकलते देख हर कोई दंग है। पहली नजर में ऐसा लगता है मानो कोई महामारी फैली हो और इतने सारे बच्चे एक साथ बीमार हो गए हों, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा कड़वी है। आखिर इन स्कूलों के पास अस्पताल जैसी व्यवस्था के नाम पर क्या छुपाया जा रहा है?
इतना ही नहीं, उस स्कूल के मासूम बच्चों ने ही प्रबंधन की ऐसी ‘पोल खोल दास्तां’ बयां की है, जिससे जिला प्रशासन अब तक पूरी तरह अनजान रहा है। बच्चों के बयानों ने स्कूल के बंद कमरों के पीछे चल रहे मैनेजमेंट के हेरा फेरी के खेल को जगजाहिर कर दिया है। यह खबर अभी खत्म नहीं हुई है, हम जल्द ही उन तस्वीरों और सबूतों के साथ लौटेंगे जिन्हें देख आप दांतों तले उंगलियां दबा लेंगे। बने रहें हमारे साथ, क्योंकि अगली रिपोर्ट आपके होश उड़ा देगी!
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पटना। बिहार सरकार ने प्रशासनिक तंत्र को नई धार देने के लिए पुलिस महकमे में अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल किया है। गृह विभाग द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के अनुसार, भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 16 वरिष्ठ अधिकारियों को इधर से उधर किया गया है। इस सूची में कई दिग्गज अधिकारियों के नाम शामिल हैं, जिन्हें महत्वपूर्ण नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
इन अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी (पूरी सूची):
डॉ. परेश सक्सेना (1994): महानिदेशक-सह-आयुक्त, असैनिक सुरक्षा, बिहार, पटना।
निर्मल कुमार आजाद (1994): पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण), बिहार, पटना।
सुधांशु कुमार (1996): अपर पुलिस महानिदेशक (विधि-व्यवस्था), बिहार। इसके साथ ही वे अपर पुलिस महानिदेशक (यातायात) के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे।
डॉ. अमित कुमार जैन (1996): अपर पुलिस महानिदेशक (आर्थिक अपराध इकाई), बिहार, पटना।
नैय्यर हसनैन खान (1996): अपर पुलिस महानिदेशक (बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस), बिहार, पटना।
डॉ. कमल किशोर सिंह (1996): अपर पुलिस महानिदेशक (रेलवे), बिहार, पटना।
अजिताभ कुमार (1997): अपर पुलिस महानिदेशक (राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो एवं आधुनिकीकरण), बिहार।
संजय सिंह (1997): अपर पुलिस महानिदेशक (बजट/अपील एवं कल्याण), बिहार। साथ ही अपर पुलिस महानिदेशक (सुरक्षा) का अतिरिक्त प्रभार।
विकास वैभव (2003): पुलिस महानिरीक्षक (IG), मगध क्षेत्र, गया।
क्षत्रनील सिंह (2005): विशेष सचिव, गृह विभाग (विशेष शाखा), बिहार, पटना।
पी. कन्नन (2005): पुलिस महानिरीक्षक (प्रोविजनिंग), बिहार। साथ ही आईजी (आधुनिकीकरण) का अतिरिक्त प्रभार।
रंजीत कुमार मिश्रा (2007): पुलिस महानिरीक्षक (अपराध अनुसंधान विभाग), बिहार। साथ ही आईजी (साइबर अपराध) का अतिरिक्त प्रभार।
संजय कुमार (2008): पुलिस महानिरीक्षक (विशेष शाखा), बिहार, पटना।
क्यों अहम है यह बदलाव?
बिहार सरकार का यह कदम राज्य में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने और पुलिसिंग में आधुनिकता लाने के उद्देश्य से देखा जा रहा है। विशेष रूप से साइबर अपराध और आर्थिक अपराध इकाइयों में अनुभवी अधिकारियों की तैनाती से इन क्षेत्रों में बड़ी कार्रवाई की उम्मीद है।
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पटना: बिहार में नई सरकार के गठन के बाद प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त खलबली मच गई, जब सामान्य प्रशासन विभाग ने एक साथ कई कद्दावर आईएएस (IAS) अधिकारियों के तबादले और अतिरिक्त प्रभार की अधिसूचना जारी कर दी। रविवार को जारी इस लिस्ट में 1996 बैच से लेकर 2014 बैच तक के अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। माना जा रहा है कि सुशासन को रफ्तार देने के लिए मुख्यमंत्री ने अपनी ‘कोर टीम’ को नए सिरे से तैनात किया है।
इन दिग्गजों के बदले विभाग: देखें पूरी लिस्ट
बिहार सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रशासनिक मशीनरी में निम्नलिखित बड़े बदलाव किए गए हैं:
1. आनंद किशोर (1996 बैच): अध्यक्ष, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को अब वित्त विभाग और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है।
2. एच. आर. निवास (1996 बैच): इन्हें समाज कल्याण विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाया गया है। साथ ही, ये पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग और जांच आयुक्त (सामान्य प्रशासन) के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे।
3. संतोष कुमार मल्ल (1997 बैच): जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव रहे मल्ल को अब आपदा प्रबंधन विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया है। वे स्थानीय आयुक्त (बिहार भवन, नई दिल्ली) के अतिरिक्त प्रभार में भी बने रहेंगे।
4. लोकेश कुमार सिंह (2003 बैच): स्वास्थ्य विभाग के सचिव रहे लोकेश कुमार सिंह को अब पर्यटन विभाग के सचिव पद पर भेजा गया है। वे विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग और मुख्यमंत्री सचिवालय के सचिव के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे।
5. कुंदन कुमार (2004 बैच): उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार को स्थानीय आयुक्त (बिहार भवन, नई दिल्ली) और निवेश आयुक्त (मुंबई) के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है।
6. कुमार रवि (2005 बैच): मुख्यमंत्री सचिवालय के सचिव रहे कुमार रवि को अब स्वास्थ्य विभाग जैसे महत्वपूर्ण महकमे की कमान सौंपी गई है। वे संसदीय कार्य विभाग के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे।
7. अजय यादव (2005 बैच): मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के सचिव अजय यादव को अब ऊर्जा विभाग का सचिव बनाया गया है। उनके पास मद्य निषेध और बिहार स्टेट पावर (होल्डिंग) कंपनी के सीएमडी का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा।
8. संजय कुमार सिंह (2007 बैच): वाणिज्य-कर विभाग के सचिव संजय कुमार सिंह को अब वित्त विभाग (सम्पूर्ण प्रभार) का सचिव नियुक्त किया गया है। वे मुख्यमंत्री सचिवालय के सचिव का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे।
9. प्रणव कुमार (2008 बैच): कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार को भवन निर्माण विभाग का नया सचिव बनाया गया है। वे बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम के प्रबंध निदेशक के प्रभार में भी रहेंगे।
10. मनोज कुमार सिंह (2009 बैच): ऊर्जा विभाग के सचिव रहे मनोज कुमार सिंह को अब स्थानीय आयुक्त, बिहार भवन, नई दिल्ली के पद पर तैनात किया गया है। उनके पास निवेश आयुक्त, मुंबई का भी अतिरिक्त प्रभार होगा।
11. चंद्रशेखर सिंह (2010 बैच): मुख्यमंत्री सचिवालय के सचिव चंद्रशेखर सिंह को अब जल संसाधन विभाग का सचिव बनाया गया है। वे सूचना एवं जन-संपर्क विभाग के सचिव और बिहार विकास मिशन के मिशन निदेशक के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।
12. रजनीश कुमार सिंह (2014 बैच): सहयोग समितियों के निबंधक रहे रजनीश कुमार सिंह को अब महानिरीक्षक, कारा एवं सुधार सेवाएं के पद पर पदस्थापित किया गया है।
सरकार के इस व्यापक फेरबदल का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य, वित्त और आपदा प्रबंधन जैसे जन-जुड़ाव वाले विभागों में नई ऊर्जा फूंकना है। इस बदलाव से स्पष्ट है कि नई सरकार विकास कार्यों की मॉनिटरिंग और क्रियान्वयन के लिए अपनी पसंद के अधिकारियों पर भरोसा जता रही है।
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बिहार की राजनीति में अपनी पैठ मजबूत कर रही भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन ने सत्ता की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। आगामी 16 से 18 मई तक दरभंगा के लहेरियासराय स्थित प्रेक्षागृह में आयोजित होने वाले 12वें बिहार राज्य सम्मेलन को पार्टी एक ‘राजनैतिक महाकुंभ’ के रूप में देख रही है। इसी ऐतिहासिक आयोजन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए रविवार को ताजपुर प्रखंड में सघन जनसंपर्क और कोष संग्रह अभियान चलाकर समर्थन जुटाया गया।
हुंकार: ताजपुर के गांधी चौक पर 12वें राज्य सम्मेलन के पोस्टर और लाल झंडे के साथ कोष संग्रह करते भाकपा माले के कार्यकर्ता।
गांधी प्रतिमा से शुरू हुआ संघर्ष का संकल्प
अभियान की शुरुआत भाकपा माले प्रखंड कमिटी, ताजपुर के बैनर तले गांधी चौक स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थल से हुई। पार्टी कार्यकर्ताओं ने बापू को नमन कर भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और दमनकारी नीतियों के खिलाफ लड़ने का संकल्प लिया। हाथों में लाल झंडे और सम्मेलन की सफलता की अपील वाले बैनर लिए कार्यकर्ताओं का जत्था जब बाजार की सड़कों पर निकला, तो आम लोगों ने भी रुक-रुक कर उनकी बातों को सुना और अपना सहयोग दिया।
मजदूर-किसानों के मुद्दों पर होगी ‘सर्जिकल स्ट्राइक‘
कोष संग्रह के दौरान उपस्थित नेताओं ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि दरभंगा में होने वाला यह सम्मेलन केवल एक सांगठनिक बैठक नहीं है, बल्कि यह मजदूर, किसान, छात्र और नौजवानों के उन बुनियादी सवालों का हल ढूँढने का मंच है, जिन्हें सरकार ने हाशिए पर डाल दिया है। नेताओं ने स्पष्ट किया कि इस सम्मेलन के माध्यम से जनसंघर्षों को और अधिक धार देने के लिए एक ठोस एवं निर्णायक रणनीति तैयार की जाएगी।
जनता से मिला भरपूर समर्थन
ताजपुर के व्यापारियों, राहगीरों और स्थानीय निवासियों ने माले के इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यकर्ताओं ने लोगों को सम्मेलन के उद्देश्यों के बारे में बताया और अपील की कि वे तन-मन-धन से इस आयोजन को सफल बनाने में अपना योगदान दें। पार्टी के अनुसार, जनता से मिल रहा यह सहयोग इस बात का प्रमाण है कि लोग बदलाव चाहते हैं।
प्रमुख साथियों की उपस्थिति
इस अभियान को सफल बनाने में पार्टी और विभिन्न जनसंगठनों के वरिष्ठ नेताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। मौके पर मुख्य रूप से: