इंटरनेट के मकड़जाल में फंसा बचपन! समस्तीपुर में सीएनएलयू और क्राई का खुलासा, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिन्‍तित

समस्तीपुर। 09 जुलाई, 2026 । डिजिटल दुनिया की चकाचौंध के बीच मासूम बच्चों का बचपन एक बेहद खतरनाक और अदृश्य जाल में फंसता जा रहा है। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा  को लेकर आज समस्तीपुर नगर निगम क्षेत्र में एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा हुआ है जिसने पूरे इलाके के अभिभावकों और बुद्धिजीवियों की नींद उड़ा दी है।

समस्तीपुर नगर निगम के अंतर्गत कोरबद्धा एवं लगुनिया सूर्यकंठ शहरी समुदाय में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा विषय पर एक विशेष फील्ड विजिट एवं टूल टेस्टिंग का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम  क्राई-चाइल्ड राइट्स एंड यू, कोलकात्ता और जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र के संयुक्त तत्वाधान में चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, पटना के द्वारा संचालित एक महत्वपूर्ण शोध अध्ययन के अंतर्गत किया गया।

समस्तीपुर के शहरी समुदाय में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चलाए गए अभियान के दौरान चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, पटना के चंदन सिंहा, सुगंधा, शिवम् और जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र की डॉ. दीप्ति कुमारी, पप्पु यादव, चंचला कुमारी के साथ आंगनवाड़ी सेविकाएं, शिक्षक और स्थानीय ग्रामीण।

कम उम्र में इंटरनेट का चस्का, मंडरा रहा बड़ा जोखिम

जांच और संवाद के दौरान जो हकीकत सामने आई है, वह बेहद डरावनी है। कार्यक्रम के दौरान 6 से 9 वर्ष और 10 से 17 वर्ष आयुवर्ग के बच्चों तथा किशोरों को टूल टेस्टिंग के दायरे में लिया गया। चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, पटना से आए चंदन सिंहा के नेतृत्व में सुगंधा एवं शिवम् की टीम ने जब बच्चों से इंटरनेट के उपयोग को लेकर सवाल पूछे, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। इस दौरान जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र से डॉ. दीप्ति कुमारी, पप्पु यादव और चंचला कुमारी ने भी मोर्चा संभाला और बच्चों के बीच जाकर जमीनी हकीकत को टटोला।

विद्यालय परिसर में छात्रों के साथ बैठकर इंटरनेट के उपयोग और ऑनलाइन जोखिमों पर व्यक्तिगत साक्षात्कार व टूल टेस्टिंग करते सीएनएलयू पटना और जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र के विशेषज्ञ।

स्कूलों में सीक्रेट इंटरव्यू, अभिभावकों के उड़े होश

जांच टीम केवल समुदाय तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने सीधे स्कूलों का रुख किया। विद्यालय परिसर में छात्रों के साथ आमने-सामने बैठकर व्यक्तिगत साक्षात्कार आयोजित किए गए। बंद कमरों और क्लासरूम में जब बच्चों से ऑनलाइन सुरक्षा, इंटरनेट उपयोग, सोशल मीडिया के खतरों, साइबर जोखिमों एवं सुरक्षा उपायों पर विस्तृत चर्चा की गई, तो बच्चों की बेबाकी देखकर अधिकारी भी दंग रह गए।

इस दौरान सिर्फ बच्चे ही नहीं, बल्कि उनके अभिभावकों, आंगनवाड़ी केंद्र की सेविकाओं, स्थानीय समुदाय के लोगों और विद्यालय के शिक्षकों के साथ भी बेहद गंभीर मंथन किया गया। इस चर्चा के बाद पूरे समुदाय में हड़कंप मच गया है कि कैसे उनके लाडले अनजाने में इंटरनेट के दलदल की तरफ बढ़ रहे हैं। इस शोध और फील्ड विजिट ने यह साफ कर दिया है कि यदि अब भी समाज नहीं जागा, तो बहुत देर हो जाएगी।

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