नालंदा: बिहार की धरती एक बार फिर प्राचीन गौरव के रहस्यों से पर्दा उठा रही है। नालंदा जिला के एकंगरसराय प्रखंड के तेलहाड़ा गांव में चल रही खुदाई ने एक सनसनीखेज खोज की है – प्रथम सदी के तिलाधक विश्वविद्यालय के अवशेष! यह खोज न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश के इतिहास के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है।
अधिकारियों ने लिया जायजा: जिलाधिकारी उदिता सिंह ने खुद इस ऐतिहासिक खोज का संज्ञान लेते हुए तेलहाड़ा गांव स्थित उत्खनन स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने पुरातात्विक अवशेषों का बारीकी से जायजा लिया और उनकी महत्ता को समझा। उनके साथ पुरातात्विक विभाग के विशेषज्ञ और स्थानीय अधिकारी भी मौजूद थे।

दुर्लभ खजाना मिला: खुदाई के दौरान मिली सामग्रियों ने विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। तिलाधक विश्वविद्यालय के अवशेषों के साथ-साथ सैकड़ों दुर्लभ मूर्तियां, शिलालेख और अन्य बहुमूल्य पुरातात्विक वस्तुएं मिली हैं। ये अवशेष इस विश्वविद्यालय की भव्यता और प्राचीन काल में ज्ञान और शिक्षा के केंद्र के रूप में इसकी महत्ता को दर्शाते हैं।
दस्तावेजीकरण और संरक्षण के निर्देश: जिलाधिकारी उदिता सिंह ने इस खोज की ऐतिहासिक महत्ता को समझते हुए अधिकारियों को इस दुर्लभ खजाने के संरक्षण के लिए त्वरित कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने इन पुरातात्विक अवशेषों की एक व्यापक डाक्यूमेंट्री तैयार करने का भी आदेश दिया, ताकि इस खोज के बारे में विश्व भर में जानकारी दी जा सके।
बौद्ध सर्किट से जोड़ने की मांग: इस प्राचीन विश्वविद्यालय की खोज ने स्थानीय लोगों में उत्साह भर दिया है। उन्होंने इस स्थल को बौद्ध पर्यटन सर्किट से जोड़ने की मांग उठाई है, जिससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इस ऐतिहासिक धरोहर के महत्व को भी मान्यता मिलेगी। स्थानीय स्तर पर एक संग्रहालय विकसित करने की भी मांग की जा रही है, जहां इन दुर्लभ अवशेषों को प्रदर्शित किया जा सके।

एक नया अध्याय: तेलहाड़ा में मिला तिलाधक विश्वविद्यालय का यह खजाना प्राचीन भारत की समृद्ध संस्कृति और शिक्षा प्रणाली के बारे में नए तथ्यों को सामने लाएगा। यह खोज इतिहास के पन्नों को एक बार फिर पलटने और प्राचीन ज्ञान के भंडार को समझने के लिए प्रेरित करेगी।
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