स्वास्थ्य व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार की तैयारी: रात्रिकालीन औचक निरीक्षण करेंगे कमिश्नर और डीएम, लापरवाही बरतने वाले स्वास्थ्य केंद्रों पर गिरेगी गाज
पटना, 02 जुलाई 2026: बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी, प्रभावी और जनोन्मुखी बनाने के लिए राज्य सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प सभागार’ में स्वास्थ्य विभाग की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए साफ चेतावनी दी है कि सरकारी अस्पतालों से मरीजों को बिना किसी ठोस कारण के हायर सेंटर या मेडिकल कॉलेज रेफर करने का खेल अब बंद होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने इसके लिए 15 अगस्त 2026 की समय-सीमा तय करते हुए अनुमंडलीय अस्पतालों और जिला अस्पतालों से होने वाले अनावश्यक रेफरल पर पूर्ण रोक लगाने का कड़ा आदेश जारी कर दिया है।

इस उच्चस्तरीय बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों की मौजूदा रेफरल व्यवस्था, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और चिकित्सा अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण की भावी कार्य योजना से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट नीति के साथ समयबद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का एकमात्र उद्देश्य बिहार के प्रत्येक नागरिक को समय पर, गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है, और इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रथम चरण में इसे सभी जिला और अनुमंडल अस्पतालों में सख्ती से लागू किया जा रहा है।
कमिश्नर और डीएम करेंगे रात में औचक निरीक्षण
अस्पतालों की जमीनी हकीकत परखने के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रमंडलीय आयुक्त, जिला पदाधिकारी और अन्य वरीय प्रशासनिक पदाधिकारी नियमित रूप से सरकारी अस्पतालों का रात्रिकालीन औचक निरीक्षण करेंगे। इस निरीक्षण से रात के समय ड्यूटी से गायब रहने वाले डॉक्टरों और स्टाफ पर नकेल कसी जा सकेगी। इसके साथ ही जिला अस्पतालों में उपलब्ध सभी आधुनिक उपकरणों का शत-प्रतिशत नियमित उपयोग सुनिश्चित करने और मेडिकल कॉलेजों की सतत निगरानी सीधे संबंधित जिला पदाधिकारियों के माध्यम से कराने का फैसला लिया गया है।
जांच सुविधाओं का विस्तार और ट्रॉमा सेंटरों का सुदृढ़ीकरण
मरीजों की सहूलियत के लिए पैथोलॉजी सेवाओं, एनेस्थीसिया, एमआरआई और मैमोग्राफी जैसी आधुनिक जांच सुविधाओं का बड़े पैमाने पर विस्तार किया जाएगा ताकि आम जनता को निजी सेंटरों के चक्कर न काटने पड़ें। सड़क हादसों और गंभीर चोटों के त्वरित इलाज के लिए हड्डी रोग और न्यूरो से संबंधित बीमारियों के उपचार हेतु विशेष रूप से ट्रॉमा सेंटरों को सुदृढ़ और पूरी तरह क्रियाशील करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। अस्पतालों में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएंगे, जिनके माध्यम से आपातकालीन सेवाओं और एम्बुलेंस सेवाओं से जुड़ी तमाम जानकारियां प्रमुखता से प्रदर्शित की जाएंगी।
नर्सों को मिलेगी राहत, पीपीपी मॉडल पर भी विचार
स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने रोगी कल्याण समिति के सदस्यों का पुनर्गठन कर उसे अधिक सक्रिय बनाने और नए मेडिकल कॉलेजों के सुचारू संचालन के लिए पीपीपी मॉडल (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) के माध्यम से आवश्यक परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार करने को कहा है। इसके अलावा, स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत नर्सों को बड़ी राहत देते हुए उनके गृह जिलों में ही पदस्थापित करने पर विचार करने का निर्देश दिया गया है।

प्रत्येक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की देखरेख के लिए एक जिला स्तरीय अनुश्रवण एवं पर्यवेक्षण समिति बनेगी, जिसकी कमान सीधे संबंधित डीएम के हाथों में होगी। मुख्यमंत्री ने आयुष्मान भारत योजना के शत-प्रतिशत क्रियान्वयन के लिए लाभार्थियों के आयुष्मान कार्ड और आभा आईडी निर्माण कार्य में युद्ध स्तर पर तेजी लाने का आदेश दिया।
बैठक में ये सभी वरीय अधिकारी रहे उपस्थित
इस महत्वपूर्ण और नीतिगत बैठक में स्वास्थ्य मंत्री निशांत, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव डॉ० त्यागराजन एस०एम०, राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय, स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव अरविंद कुमार वर्मा और बिहार स्वास्थ्य सेवायें एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सुब्रत कुमार सेन सहित स्वास्थ्य विभाग के तमाम वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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