तनाव भरे परिवेश में योग ही जीवन का असली तारणहार, मुख्य वक्ता निशिकांति ने दिया महामंत्र!
मुजफ्फरपुर (25/06/2026): आज के इस दौर में जहां आधुनिक चिकित्सा पद्धतियां और महंगी रासायनिक दवाएं इंसानी बीमारियों में केवल अस्थाई राहत तो देती हैं, परंतु मानसिक और शारीरिक विकारों को जड़ से खत्म करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही हैं, वहां भारत का प्राचीन सनातन विज्ञान यानी योग ही एकमात्र सच्चा तारणहार बनकर उभरा है। इसी ज्वलंत विषय पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के साप्ताहिक कार्यक्रम के पावन अवसर पर महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय के दर्शन शास्त्र विभाग के तत्त्वावधान में एक वृहद योग परिचर्चा और पोस्टर प्रस्तुतीकरण कार्यक्रम का भव्य आयोजन 25 जून को किया गया। इस दौरान कॉलेज की छात्राओं ने अपने तीखे, कलात्मक और वैचारिक पोस्टरों के जरिए यह पुरजोर तरीके से साबित कर दिया कि आधुनिक जीवनशैली की सभी जटिल बीमारियों का असली और स्थाई इलाज सिर्फ योग में ही छुपा है।

इस बेहद महत्वपूर्ण कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रतिष्ठित प्राचार्या अलका जायसवाल ने सत्र का विधिवत उद्घाटन किया और सभी ऊर्जावान प्रतिभागियों का मनोबल बढ़ाते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रमाण पत्र सौंपे। अपने विशेष संबोधन में अलका जायसवाल ने आज की युवा पीढ़ी को सचेत करते हुए कहा कि योग मानव जीवन को बिना किसी साइड इफेक्ट (दुष्प्रभाव) के पूर्ण आरोग्य और सच्ची मानसिक खुशी प्रदान करता है। उन्होंने रेखांकित किया कि छात्राओं के भीतर की यह स्वास्थ्य चेतना कल के एक सशक्त राष्ट्र का आधार बनेगी, क्योंकि योग केवल शारीरिक कसरत नहीं बल्कि कार्यकुशलता बढ़ाने का अचूक फॉर्मूला है।
कार्यक्रम के मुख्य मंच से अपनी बात रखते हुए मुख्य वक्ता निशिकांति ने योग की वैज्ञानिकता को बेहद तार्किक रूप से स्थापित किया। उन्होंने वर्तमान समय की सबसे गंभीर वैश्विक महामारी यानी मानसिक तनाव पर गहरा प्रहार करते हुए बतलाया कि योग आज के इस भागदौड़ भरे, प्रतिस्पर्धात्मक और डिस्टर्बिंग (विचलित करने वाले) परिवेश में मानव जीवन की सबसे बड़ी और अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। हमें इसे केवल साल में एक दिन का सिंबल (प्रतीक) न मानकर अपने प्रतिदिन के 24 घंटे के रूटीन (दिनचर्या) में पूरी तरह से शामिल करना चाहिए, तभी चिकित्सा पर होने वाले भारी-भरकम खर्चों से बचा जा सकता है।

आयोजन की मुख्य धुरी रहीं दर्शन शास्त्र की विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम आयोजक नेहा रानी ने अपने व्याख्यान में पाश्चात्य फिटनेस कल्चर और भारतीय विचारधारा की गहरी तुलना करते हुए स्पष्ट किया कि योग कोई साधारण फिटनेस टूल (शारीरिक कसरत का साधन) नहीं है, बल्कि यह मानव चेतना को जागृत करने वाला एक शाश्वत जीवन दर्शन है। इसे अपनाकर ही हम अपने तन और मन को नियंत्रित कर सकते हैं।
वहीं, डिजिटल माध्यम का बेहतरीन उपयोग करते हुए नवीन कुमार ने एक अत्यंत प्रभावशाली पावर प्लांट प्रेजेंटेशन (डिजिटल प्रस्तुतीकरण) के जरिए योग के विभिन्न व्यावहारिक और प्रायोगिक पहलुओं को सामने रखा। उन्होंने वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ दिखाया कि किस प्रकार नियमित आसन और प्राणायाम करने से मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) शीर्ष पर पहुंच जाती है और रक्तचाप जैसी जानलेवा बीमारियां बिना किसी दवा के स्वतः नियंत्रित हो जाती हैं।
इस पूरे सफल और गरिमामयी आयोजन का कुशल मंच संचालन और धन्यवाद ज्ञापन सुरबाला वर्मा के द्वारा अत्यंत प्रभावी ढंग से किया गया, जिसमें कॉलेज के कई वरिष्ठ शिक्षक और शिक्षिकाओं की सक्रिय उपस्थिति रही। कड़े मुकाबले के बीच पारदर्शी परिणाम तैयार करने वाली निष्पक्ष निर्णायक मंडली में मुख्य रूप से राकेश रंजन, रामदुलार और प्रियम फ्रांसिस जैसे प्रबुद्ध शिक्षाविद् शामिल थे, जिन्होंने कला और वैचारिक ज्ञान का बारीकी से मूल्यांकन किया।

योग सप्ताह के समापन अवसर पर आयोजित पोस्टर प्रस्तुतीकरण और भाषण प्रतियोगिता में छात्राओं के बीच कड़ा मुकाबला हुआ, जिसके अंतिम परिणाम इस प्रकार रहे:
- प्रथम स्थान (I): इलशा आलिया (स्नातक द्वितीय सेमेस्टर)
- द्वितीय स्थान (II): संयुक्त रूप से ममता कुमारी एवं गीतांजलि कुमारी (स्नातक द्वितीय सेमेस्टर)
- तृतीय स्थान (III): रूपांतरित कुमारी (स्नातक द्वितीय सेमेस्टर)
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