लूटखोर स्कूलों पर IAS का महा-ऐक्शन! 310 निजी स्कूलों की मनमानी पर चला प्रमंडलीय आयुक्त का डंडा; 5 नामी स्कूलों पर ₹1-1 लाख का भारी जुर्माना

अभिभावकों को मिली बड़ी राहत: जांच के घेरे में आए प्रमंडल के 3200 से अधिक स्कूल, मनमानी फीस बढ़ाने वाले 310 स्कूलों को नोटिस; कइयों ने टेके घुटने, वापस ली बढ़ी फीस


मुजफ्फरपुर (तिरहुत प्रमंडल)। तिरहुत प्रमंडल के निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों की जेब पर डाका डालने के खेल का प्रमंडलीय आयुक्त (IAS) गिरिवर दयाल सिंह ने बड़ा भंडाफोड़ किया है। प्रमंडल के 3200 से अधिक स्कूलों की सघन जांच के बाद ‘बिहार निजी विद्यालय शिक्षा विनियमन अधिनियम 2019’ की धज्जियां उड़ाने वाले 310 स्कूलों पर प्रशासन का तगड़ा चाबुक चला है।

कड़ा रुख अख्तियार करते हुए आयुक्त ने सुनवाई से नदारद रहने और सरकारी नियमों को ठेंगा दिखाने वाले पश्चिम चंपारण के 5 बड़े और नामी स्कूलों पर एक-एक लाख रुपये का भारी अर्थदंड (जुर्माना) ठोक दिया है। प्रशासन की इस ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ से प्रमंडल के शिक्षा माफियाओं और मनमानी करने वाले स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया है।

प्राइवेट स्‍कूल संचालको को निर्देश देते प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह       

इन 5 ‘अहंकारीस्कूलों पर लगा 1-1 लाख का जुर्माना

प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने साफ किया कि जिन स्कूलों ने सरकार के नोटिस को गंभीरता से नहीं लिया, न जवाब दिया और न सुनवाई में आए, उनके खिलाफ अधिनियम की कंडिका 7 (सेक्शन 7) के तहत 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इन स्कूलों में शामिल हैं:

  1. सेंट कैरेंस स्कूल (बेतिया प्रखंड, पश्चिम चंपारण)
  2. सेंट थॉमस स्कूल (चनपटिया, पश्चिम चंपारण)
  3. सिद्धार्थ पब्लिक स्कूल (नौतन, पश्चिम चंपारण)
  4. एसएन इंटरनेशनल स्कूल (नरकटियागंज, पश्चिम चंपारण)
  5. हॉली मिशन स्कूल (बगहा, पश्चिम चंपारण)

अगर ये स्कूल अब भी नहीं सुधरे और दोबारा यही कृत्य दोहराया, तो जुर्माना राशि बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी जाएगी। इसके बाद भी यदि ये आदतन (Habitual) नियमों का उल्लंघन करते रहे, तो इन विद्यालयों की मान्यता हमेशा के लिए समाप्त (रद्द) कर दी जाएगी।” > गिरिवर दयाल सिंह, प्रमंडलीय आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल

पश्चिमी चंपारण, वैशाली और ये शिवहर में थोड़ी स्थिति खराब है, खैर अभी तो आगे इस चीज को हम लोग सुनेंगे। लेकिन अच्छी बात है कि पश्चिमी चंपारण के जिला पदाधिकारी ने बहुत प्रोएक्टिव काम किया, वहां के जिला शिक्षा पदाधिकारी ने अच्छा काम किया,


जुर्माने की कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है और हम लोग ₹1,00,00,00 जुर्माना लगा रहे हैं। वो सिर्फ इसलिए लगा रहे हैं ताकि सभी विद्यालय जो हैं, इस बात को सजग हो जाएं कि सरकार की जो मंशा है, सरकार का जो आदेश है, सरकार का जो नियम है, उसका अक्षरशः अनुपालन करना है। हम लोग सब लोग ये प्रयास करते हैं कि विद्यालय अच्छे ढंग से चलें और इसमें बहुत जरूरी है कि जो भी सरकार की नियमावली है, उसका अक्षरशः अनुपालन किया जाए।


अभिभावकों की जेब पर डाका: किताबों, ड्रेस और ट्रांसपोर्ट में अप्रत्याशितलूट

लोक संवाद और विभिन्न माध्यमों से प्रमंडलीय आयुक्त को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि सत्र 2025-26 और 2026-27 के लिए निजी स्कूलों ने शिक्षण शुल्क (ट्यूशन फीस), ट्रांसपोर्ट, परीक्षा शुल्क और पोशाक शुल्क में अप्रत्याशित वृद्धि कर दी है। इसके बाद आयुक्त के निर्देश पर जिला पदाधिकारियों (DM) और जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) की टीम ने प्रमंडल के कुल 3,212 निजी स्कूलों का औचक निरीक्षण किया। जांच में 310 स्कूल सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन करते दोषी पाए गए, जिनमें अकेले पश्चिम चंपारण के सबसे अधिक 72 स्कूल शामिल हैं। इसके बाद पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी और मुजफ्फरपुर के दोषी स्कूलों पर भी गाज गिरनी तय है।

कमिश्नर की सख्ती के आगे झुके स्कूल: वापस करनी होगी वसूली गई पाई-पाई

सुनवाई के पहले ही दिन कमिश्नर की सख्ती का बड़ा असर देखने को मिला। पश्चिम चंपारण के 72 दोषी स्कूलों में से अधिकांश ने घुटने टेकते हुए अपनी बढ़ी हुई फीस को तत्काल वापस लेने का लिखित हलफनामा दे दिया है।

  • वसूली गई फीस होगी एड्जस्ट: आयुक्त ने कड़ा आदेश दिया है कि जो स्कूल निर्धारित सीमा से अधिक शुल्क वसूल चुके हैं, वे या तो अभिभावकों को कैश वापस करेंगे या आगे की फीस में उसे समायोजित (Adjust) करेंगे।
  • नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर डालनी होगी लिस्ट: पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी स्कूलों को अपने सूचना पट्ट और ऑफिशियल वेबसाइट पर संशोधित (कम की गई) फीस का ब्योरा सार्वजनिक करना होगा ताकि अभिभावक गुमराह न हों।

अब किसी खास दुकानसे सामान खरीदने की मजबूरी नहीं, कमिश्नर के कड़े निर्देश:

  • दुकान-ब्रांड की बाध्यता खत्म: स्कूल प्रबंधन किसी भी अभिभावक को किसी विशेष दुकान या ब्रांड से ही किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। अभिभावक खुले बाजार से कहीं से भी सामग्री ले सकते हैं।
  • पैटर्न बदलने पर रोक: सिर्फ कमाई और कमीशन खोरी के उद्देश्य से स्कूल हर साल यूनिफॉर्म और किताबों का पैटर्न नहीं बदल सकेंगे।
  • अभिभावकों से अपील: आयुक्त ने जनता से अपील की है कि यदि कोई भी स्कूल अब भी नियम विरुद्ध फीस वसूलता है या दबाव बनाता है, तो तुरंत जिला प्रशासन को इसकी सूचना दें, त्वरित ऐक्शन लिया जाएगा।

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