सावधान अभिभावक! फर्जी स्कूलों में फंसे तो बर्बाद हो जाएगा बच्चों का भविष्य; बिना ‘आधार’ चल रही हैं शिक्षा की दुकानें, ऐसे करें असली-नकली की पहचान!

बड़ी चेतावनी: बिहार में बिना यू-डाइस कोड वाले स्कूलों पर गिरने वाली है गाज, ₹1 लाख जुर्माना और 10,000 रोज का फटका; आपके बच्चे की टीसी और सर्टिफिकेट भी हो जाएंगे रद्दी!

पटना, [25 मई 2026 ]: बिहार में अगर आप अपने बच्चे का एडमिशन किसी आलीशान बिल्डिंग या चमक-दमक वाले प्राइवेट स्कूल में कराने जा रहे हैं, तो रुक जाइए! आपकी एक छोटी सी लापरवाही आपके बच्चे के पूरे भविष्य को अंधकार में धकेल सकती है। बिहार सरकार का शिक्षा विभाग बिना मान्यता और बिना निबंधन (रजिष्‍ट्रेशन ) के चल रहे फर्जी और बेनामी प्राइवेट स्कूलों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करने के मूड में है। सरकार ने साफ कर दिया है कि बिना मान्यता वाले स्कूलों को सील किया जाएगा और उन पर ₹1 लाख का एकमुश्त जुर्माना तथा ₹10,000 रोजाना का फटका लगेगा। लेकिन इस कार्रवाई के बीच सबसे बड़ा नुकसान उन मासूम बच्चों का होगा जो इन अवैध स्कूलों में पढ़ रहे हैं।

शिक्षा विभाग द्वारा जारी सर्कुलर एवं दायें में  सांकेतिक (प्रतीकात्‍मक)  तस्‍वीर

इस पूरी कार्रवाई और चेतावनी के पीछे शिक्षा विभाग का वह आधिकारिक आदेश है, जिसे प्राथमिक शिक्षा निदेशक, विक्रम विरकर (IAS) द्वारा 21 मई 2026 को जारी किया गया है। विभाग द्वारा जारी इस अत्यंत महत्वपूर्ण सर्कुलर (ज्ञापांक- 07/म.1-01/2025/521) के तहत राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DPO) को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे 10 जून 2026 की अंतिम समय-सीमा तक राज्य के सभी गैर-मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों से ई-संबंध पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कराना सुनिश्चित करें। इस पत्र में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि इस तारीख के बाद भी बिना मान्यता चलते पाए जाने वाले स्कूलों के खिलाफ शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 की धाराओं के तहत ₹1 लाख का एकमुश्त जुर्माना और ₹10,000 प्रतिदिन का अर्थदंड लगाते हुए दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जाए, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारियों की होगी।

बिना यू-डाइस (UDISE+) कोड वाले स्कूल हैं पूरी तरह अवैध: यह है स्कूल का आधार कार्ड

शिक्षा विभाग के मुताबिक, बिहार में बिना UDISE+ कोड के चल रहे सभी निजी स्कूल पूरी तरह से गैर-मान्यता प्राप्त (Unrecognized) और गैर-कानूनी हैं।

क्या होता है यू-डाइस कोड? > UDISE का पूरा नाम Unified District Information System for Education है। यह भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी किया जाने वाला 11 अंकों का एक परमानेंट कोड होता है। जैसे हर नागरिक के लिए आधार कार्ड जरूरी है, वैसे ही हर वैध स्कूल के लिए यू-डाइस कोड उसका ‘आधार’ है। इसी कोड से सरकार के पास स्कूल के छात्र, शिक्षक और इंफ्रास्ट्रक्चर की पूरी जन्मकुंडली ऑनलाइन दर्ज रहती है।

सांकेतिक (प्रतीकात्‍मक)  तस्‍वीर

अवैध स्कूलों में बच्चे को पढ़ाने के 5 सबसे घातक नुकसान:   

यदि आप किसी ऐसे स्कूल में अपने बच्चे को पढ़ा रहे हैं जिसके पास वैध कोड या मान्यता नहीं है, तो आपको ये भारी नुकसान उठाने पड़ेंगे:

  • ❌  टीसी (Transfer Certificate) हो जाएगी रद्दी: जब बच्चा उस स्कूल से पढ़कर किसी दूसरे अच्छे या सरकारी स्कूल में जाना चाहेगा, तो उसकी टीसी को अमान्य कर दिया जाएगा क्योंकि छात्र का डेटा सरकारी पोर्टल पर होगा ही नहीं।
  • ❌  सरकारी योजनाओं और स्कॉलरशिप से वंचना: बिहार सरकार या केंद्र सरकार की साइकिल योजना, पोशाक राशि, या स्कॉलरशिप का पैसा सीधे छात्र के बैंक खाते में जाता है। बिना कोड वाले स्कूल के बच्चों को ₹1 का भी सरकारी लाभ नहीं मिलेगा।
  • ❌  बोर्ड परीक्षा (10वीं/12वीं) पर संकट: BSEB या CBSE जैसे बोर्ड से रजिस्ट्रेशन के लिए स्कूल के पास वैध यू-डाइस कोड होना अनिवार्य है। इसके बिना बच्चे बोर्ड परीक्षा का फॉर्म ही नहीं भर पाएंगे।
  • ❌  गरीब बच्चों को मुफ्त एडमिशन (RTE) नहीं: निबंधित न होने के कारण ऐसे स्कूलों में शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के तहत 25% आरक्षित सीटों पर मुफ्त एडमिशन संभव नहीं है।
  • ❌  बीच सत्र में स्कूल बंद होने का खतरा: सरकार की सख्ती के कारण ये स्कूल कभी भी सील हो सकते हैं, जिससे आपके बच्चे का पूरा साल बर्बाद हो सकता है।

असली मान्यता प्राप्त स्कूल की क्या है पहचान? जारी होते हैं ये दस्तावेज:

जब कोई स्कूल शिक्षा विभाग के ई-संबंध पोर्टल (http://edu-online.bihar.gov.in) पर ऑनलाइन आवेदन करता है और जांच में सही पाया जाता है, तो उसे सरकार द्वारा ये प्रामाणिक दस्तावेज जारी किए जाते हैं:

  1. प्रस्वीकृति पत्र (Recognition Certificate – Form II): जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) द्वारा जारी विहित प्रपत्र-2, जिसमें साफ लिखा होता है कि स्कूल को किस कक्षा तक चलाने की मान्यता मिली है।
  2. 11 अंकों का यू-डायस कोड: शिक्षा मंत्रालय द्वारा अलॉटेड यूनिक नंबर।
  3. ई-संबंध पोर्टल रजिस्ट्रेशन नंबर: इसके मिलते ही स्कूल का नाम सरकारी वेबसाइट की “मान्यता प्राप्त स्कूलों की सूची” में लाइव दिखने लगता है।
  4. ज्ञानदीप पोर्टल मैपिंग: आरटीई के तहत गरीब बच्चों के मुफ्त दाखिले के लिए मिलने वाली सरकारी आईडी।

घर बैठे 5 स्टेप्स में खुद चेक करें स्कूल असली है या फर्जी (स्‍टेप बाय स्‍टेप गाइड लाइन ):

अब स्कूल संचालक आपको बेवकूफ नहीं बना पाएंगे। आप अपने मोबाइल से ही मिनटों में स्कूल की सत्यता जांच सकते हैं। इसके लिए किसी पासवर्ड की जरूरत नहीं है:

  • स्टेप 1: अपने मोबाइल ब्राउज़र में शिक्षा मंत्रालय की वेबसाइट https://kys.udiseplus.gov.in खोलें।
  • स्टेप 2: होमपेज पर दिख रहे विकल्पों में से “UDISE Code” वाले टैब पर क्लिक करें।
  • स्टेप 3: स्कूल प्रशासन से मांगकर उनका 11 अंकों का यूडायस कोड और स्क्रीन पर दिख रहा कैप्चा कोड डालकर “Search” बटन दबाएं।
  • स्टेप 4: कोड सही होने पर नीचे स्कूल का नाम आएगा, उस स्कूल के नाम पर क्लिक करें।
  • स्टेप 5: स्कूल की पूरी प्रोफाइल खुल जाएगी। यहाँ ध्यान से देखें कि School Status “Active” हो और Management के आगे “Private Unaided (Recognized)” लिखा हो।

सावधनी : अगर पोर्टल पर कोड डालने के बाद “No Record Found” या स्टेटस “Unrecognized” दिखाई दे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। वह स्कूल अवैध है! दाखिला दिलाने से पहले स्कूल के नोटिस बोर्ड पर DEO द्वारा हस्ताक्षरित प्रस्वीकृति पत्र (Form-II) जरूर देखें। अपने बच्चों का भविष्य दांव पर न लगाएं!

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