वैशाली में मिला इतिहास का महाखजाना! पातेपुर मठ से निकलीं 100 साल पुरानी 52 दुर्लभ पांडुलिपियां, प्रशासन कराएगा डिजिटलीकरण

हाजीपुर (वैशाली)। बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भूमि वैशाली से एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। ज्ञान भारतम् मिशन के तहत वैशाली जिला प्रशासन को एक ऐसी कामयाबी मिली है, जिसे इतिहास का अनमोल खजाना कहा जा रहा है। जिले के पातेपुर मठ से 100 वर्ष से भी अधिक प्राचीन 52 दुर्लभ पांडुलिपियां और ग्रंथ बरामद हुए हैं। इस ऐतिहासिक खोज के बाद से पुरातत्व और इतिहास प्रेमियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

पातेपुर मठ से प्राप्त प्राचीन और दुर्लभ पांडुलिपियों का बारीकी से निरीक्षण करतीं वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह।

यह पूरी कामयाबी वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह के कुशल मार्गदर्शन में जिला प्रशासन की टीम को मिली है। बरामद की गई इन अमूल्य धरोहरों में धार्मिक, आध्यात्मिक, दार्शनिक और पारंपरिक ज्ञान का एक अद्भुत और अकल्पनीय संग्रह सुरक्षित है। जानकारों का मानना है कि यह दुर्लभ ग्रंथ हमारी समृद्ध भारतीय ज्ञान परंपरा और गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत का एक जीवंत प्रमाण हैं, जो अब तक दुनिया की नजरों से ओझल थे।

ऐतिहासिक धरोहरों को सौंपने के लिए पातेपुर मठ के महंत को प्रशस्ति-पत्र और शॉल देकर सम्मानित करतीं जिलाधिकारी वर्षा सिंह।

महंत को किया गया सम्मानित इस ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण योगदान के लिए जिला प्रशासन द्वारा पातेपुर मठ के महंत को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने कलेक्ट्रेट कार्यालय में महंत को प्रशस्ति-पत्र और शॉल भेंट कर उनके इस सराहनीय कदम की सराहना की। इस दौरान सुरक्षित रखी गई प्राचीन पांडुलिपियों को जिला प्रशासन को सौंप दिया गया।

शुरू होगी डिजिटलीकरण की प्रक्रिया  : जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने बताया कि इन अनमोल और ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जिला प्रशासन द्वारा इन सभी 52 दुर्लभ पांडुलिपियों के वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण, सूचीकरण (कैटलॉगिंग) और डिजिटलीकरण की प्रक्रिया तुरंत प्रारंभ की जा रही है। डिजिटलीकरण होने से यह प्राचीन ज्ञान हमेशा के लिए अमर हो जाएगा और आने वाली पीढ़ियों के साथ-साथ शोधकर्ताओं के लिए भी आसानी से उपलब्ध रहेगा।

प्रशासन की जनता से अपील वैशाली जिला प्रशासन ने इस मौके पर आम जनता से भी एक बेहद महत्वपूर्ण अपील की है। जिलाधिकारी ने कहा कि अपनी विरासत को बचाना, आने वाली पीढ़ियों को सच्चे ज्ञान से जोड़ना है। यदि वैशाली जिले के किसी भी नागरिक या परिवार के पास ऐसी कोई प्राचीन पांडुलिपि, ग्रंथ, पुरानी लिपियों में लिखे दस्तावेज या ऐतिहासिक महत्व की वस्तु हो, तो उसकी जानकारी जिला प्रशासन को अवश्य दें, ताकि हमारी साझी संस्कृति को नष्ट होने से बचाया जा सके।

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