मुजफ्फरपुर। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (बीआरए बिहार यूनिवर्सिटी), मुजफ्फरपुर में आज एक बहुत बड़ा प्रशासनिक उलटफेर देखने को मिला है । कुलपति (वाइस-चांसलर) के आदेश से विश्वविद्यालय प्रशासन ने अचानक से कई कड़े फैसले लिए हैं, जिससे पूरे कैंपस में हड़कंप मच गया है । एक तरफ जहाँ पुराने अधिकारी की छुट्टी कर दी गई है, वहीं दूसरी तरफ दो वरिष्ठ प्रोफेसरों को महत्वपूर्ण विभागों की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है ।
प्रशासनिक आधार पर गाज, टी के डे हटाए गए
विश्वविद्यालय द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, कुलपति ने मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और बेहद गंभीर विचार-विमर्श के बाद बड़ा कदम उठाया है । इसके तहत डॉक्टर टी के डे को उनके पदों से तत्काल प्रभाव से मुक्त कर दिया गया है । डॉक्टर टी के डे के पास अब तक दो बेहद महत्वपूर्ण प्रभार थे—वे ‘कोऑर्डिनेटर यूएमआईएस’ (यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम) और ‘सीसीडीसी’ (कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल) के रूप में कार्य कर रहे थे । उन्हें प्रशासनिक आधार पर इन दोनों ही जिम्मेदारियों से पूरी तरह से हटा दिया गया है । इसके साथ ही कुलपति ने निर्देश दिया है कि टी के डे अब पूरी तरह से एल एस कॉलेज, मुजफ्फरपुर में अपनी केवल शैक्षणिक जिम्मेदारियों (पढ़ाने के कार्य) का निर्वहन करेंगे ।

प्रोफेसर रजनीश गुप्ता बने नए सीसीडीसी
डॉक्टर टी के डे को हटाए जाने के तुरंत बाद कुलपति ने खाली हुए पदों को भरने के लिए नए आदेश जारी किए हैं । विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग (साइकोलॉजी डिपार्टमेंट) के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रजनीश गुप्ता को नया ‘सीसीडीसी’ नियुक्त किया गया है । आदेश के मुताबिक, रजनीश गुप्ता अपने विभाग के शैक्षणिक कार्यों को संभालने के साथ-साथ अगले आदेश तक ‘सीसीडीसी’ के कर्तव्यों और कार्यों का पालन करेंगे ।

प्रोफेसर संगीता सिन्हा को कोऑर्डिनेटर यूएमआईएस का प्रभार
इसके अतिरिक्त, ‘यूएमआईएस’ के सुचारू संचालन के लिए कुलपति ने भौतिकी विभाग (फिजिक्स डिपार्टमेंट) की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर संगीता सिन्हा पर भरोसा जताया है । संगीता सिन्हा को नया ‘कोऑर्डिनेटर यूएमआईएस’ अधिकृत किया गया है । वे भी अपनी वर्तमान शैक्षणिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ इस महत्वपूर्ण तकनीकी और प्रशासनिक प्रभाग का काम तत्काल प्रभाव से संभालेंगी ।
कुलसचिव के हस्ताक्षर से आदेश जारी : ये सभी बड़े बदलाव और आदेश कुलसचिव (रजिस्ट्रार) के हस्ताक्षर से जारी किए गए हैं । इन प्रशासनिक ज्ञापनों (मेमो नंबर) की प्रतिलिपियां उच्च शिक्षा विभाग, बिहार सरकार के अपर मुख्य सचिव, सचिव, निदेशक समेत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के सचिव और सभी संबंधित अधिकारियों को सूचना तथा आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी गई हैं । विश्वविद्यालय गलियारे में इस अचानक हुए बदलाव को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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