प्रशासनिक सुस्ती और लालफीताशाही पर सरकार का आखिरी प्रहार: सिंगल विंडो प्रणाली से दूर होंगी सारी अड़चनें, समयबद्ध तरीके से खुलेंगे रोजगार के महा-द्वार
पटना। बिहार को देश का अगला बड़ा इंडस्ट्रियल हब बनाने और राज्य की अर्थव्यवस्था की रफ्तार को सातवें आसमान पर पहुंचाने के लिए सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़क फैसला लिया है। नए कारखाने और उद्योग स्थापित करने की राह में रोड़ा बनने वाली तमाम प्रशासनिक अड़चनों को पूरी तरह से ध्वस्त करते हुए बिहार सरकार ने देश और दुनिया के उद्योगपतियों के लिए ‘रेड कारपेट’ (लाल कालीन) बिछा दिया है। सरकार ने ऐतिहासिक नीतिगत बदलाव करते हुए गारंटी दी है कि अब राज्य में नया उद्योग लगाने के लिए आवश्यक सभी सरकारी मंजूरियां और क्लीयरेंस मात्र 30 दिनों के भीतर प्रदान कर दी जाएंगी। इसे बिहार के औद्योगिक इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा ‘मास्टर स्ट्रोक’ माना जा रहा है।

इस क्रांतिकारी व्यवस्था को धरातल पर उतारने और निवेशकों को विभागों के चक्कर काटने की मानसिक प्रताड़ना से मुक्ति दिलाने के लिए ‘सिंगल विंडो’ (एकल खिड़की) प्रणाली को पूरी तरह से री-डिजाइन किया गया है। इसके तहत राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद (एसआईपीबी) सचिवालय को एकमात्र एकल नोडल एजेंसी के रूप में अधिकृत करने की मंजूरी दे दी गई है। इस बड़े बदलाव के बाद एसआईपीबी सचिवालय अब एक ‘सुपरपावर’ एजेंसी के रूप में उभरा है, जिसके पास उद्योगों को जल्द से जल्द हरी झंडी दिलाने की पूरी कमान होगी।
फाइलों को अटकाने वाले अधिकारियों की अब खैर नहीं
इस नई व्यवस्था के लागू होने से विभिन्न विभागों के बीच होने वाली अंतहीन कागजी देरी और फाइलों की सुस्ती के दौर का पूरी तरह से अंत हो गया है। नई नीति के तहत विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और अनुमोदन प्रक्रिया को न केवल तेज किया गया है, बल्कि इसे पूरी तरह से पारदर्शी और समयबद्ध (टाइम-बाउंड) बना दिया गया है। अगर कोई विभाग तय समय सीमा के भीतर अपनी आपत्ति या स्वीकृति दर्ज नहीं कराता है, तो उसे ‘स्वतः स्वीकृत’ (डीम्ड अप्रूवल) मान लिया जाएगा। इस कड़े कदम से अधिकारियों की मनमानी और फाइलों को दबाकर बैठने की प्रवृत्ति पर पूरी तरह से रोक लगेगी।

पलायन की समस्या पर लगेगी अंतिम रोक, रोजगार की आएगी बाढ़
सरकार के इस कड़े और दूरदर्शी निर्णय का सीधा असर राज्य के युवाओं पर पड़ने वाला है। नए उद्योगों की स्थापना के रास्ते साफ होने से राज्य में बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश होगा, जिससे लाखों की संख्या में रोजगार के नए अवसरों का सृजन होगा। उद्योगपतियों को 30 दिनों के भीतर क्लीयरेंस मिलने से कारखाने तेजी से ऑन-ग्राउंड चालू होंगे, जिससे बिहार से होने वाले प्रतिभा और श्रम के पलायन पर हमेशा के लिए रोक लगाने में मदद मिलेगी।
निवेश, उद्योग और रोजगार के इन त्रिकोणीय अवसरों के साथ बिहार विकास की एक ऐसी नई ऊंचाई की ओर अग्रसर हो चुका है, जिसकी कल्पना दशक भर पहले तक असंभव लगती थी।

इस नई व्यवस्था की 5 सबसे बड़ी और कड़क बातें:
- 30 दिनों की ‘डेडलाइन‘: आवेदन करने के ठीक एक महीने के भीतर उद्योगपतियों के हाथ में होगी स्थापना की अंतिम मंजूरी।
- एसआईपीबी बना ‘सुपरपावर‘: अब अलग-अलग विभागों के दफ्तरों के चक्कर काटने के दिन लदे, एक ही नोडल एजेंसी संभालेगी पूरा जिम्मा।
- प्रशासनिक जटिलताओं का अंत: नियमों को बेहद सरल और सुगम बनाया गया ताकि निवेशकों को बिहार में काम करना सबसे आसान लगे।
- पारदर्शिता की गारंटी: पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन और ट्रैक करने योग्य बनाया गया है, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म होगी।
- आर्थिक प्रगति को नई धार: नए कारखाने खुलने से स्थानीय व्यापार चमकेगा और राज्य के राजस्व में भारी बढ़ोतरी दर्ज होगी।
बिहार सरकार का यह कदम राज्य के औद्योगिक और सामाजिक ढांचे में एक युगांतरकारी तब्दीली लाने वाला साबित होने जा रहा है। अब देखना यह है कि इस बेहतरीन नीति के लागू होने के बाद देश के बड़े कॉर्पोरेट घराने बिहार की धरती पर अपनी फैक्ट्रियां लगाने के लिए कितनी तेजी से कदम बढ़ाते हैं।

