पटना। बिहार की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के भीतर मचे घमासान को सरेआम कर दिया है। आरजेडी के कद्दावर नेता, पूर्व मंत्री और पार्टी के अनुसूचित जाति एवं जनजाति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष शिवचंद्र राम को आगामी एमएलसी (विधान परिषद) चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनाए जाने के बाद उनका दर्द छलक उठा। एक लाइव प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिवचंद्र राम अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए और कैमरे के सामने ही फूट-फूटकर रोने लगे। आंसुओं के इस सैलाब के बीच उन्होंने तेजस्वी यादव और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर वादाखिलाफी का गंभीर आरोप लगाते हुए आरजेडी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है।
“मेरे साथ घोर अन्याय हुआ, पहले विधानसभा और अब एमएलसी से काटा पत्ता”
रुंधे गले और आंखों में आंसू लिए शिवचंद्र राम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा, “पार्टी के लिए सालों तक खून-पसीना बहाने का मुझे यह सिला मिला है। पहले मुझे विधानसभा चुनाव का टिकट नहीं दिया गया, और अब जब एमएलसी चुनाव की बारी आई, तो वहां भी मेरा पत्ता साफ कर दिया गया। मेरे साथ पार्टी के भीतर घोर अन्याय हुआ है।” हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि उन्होंने फिलहाल पार्टी के पदों से इस्तीफा दिया है, लेकिन पार्टी की प्राथमिक सदस्यता नहीं छोड़ी है।

तेज प्रताप यादव ने पार्टी को घेरा, कहा – ‘निराशाजनक और निंदनीय व्यवहार‘
शिवचंद्र राम के इस तरह सरेआम रोने और इस्तीफा देने के बाद आरजेडी के भीतर की गुटबाजी भी खुलकर सामने आ गई है। लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव खुलकर शिवचंद्र राम के समर्थन में उतर आए हैं और उन्होंने अपनी ही पार्टी के फैसले पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तेज प्रताप यादव ने इस घटनाक्रम को बेहद दुखद और पीड़ादायक क्षण बताते हुए कहा, “वर्षों तक संगठन और समाज के लिए समर्पित होकर कार्य करने वाले शिवचंद्र राम ने संत रविदास के आदर्शों पर चलते हुए पूरे बिहार में समाज को जोड़ने का काम किया। मेरा मानना है कि उनके योगदान का सम्मान होना चाहिए था। उनके साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, वह बेहद निराशाजनक और निंदनीय है।”

तेज प्रताप यादव ने आगे कहा कि सामाजिक न्याय, समान भागीदारी और बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के सिद्धांतों की भावना के अनुरूप सभी को सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने इस मुश्किल घड़ी में शिवचंद्र राम के साथ खड़े रहने का एलान किया और कहा कि जनशक्ति जनता दल भी उनके संघर्ष, समर्पण और सम्मान की लड़ाई में पूरी एकजुटता के साथ उनके साथ है।
आरजेडी के ‘दलित कार्ड‘ पर उठ रहे सवाल
शिवचंद्र राम आरजेडी के भीतर अनुसूचित जाति और जनजाति समाज का एक बड़ा चेहरा माने जाते रहे हैं। उनके इस तरह बागी रुख अपनाने और शीर्ष नेतृत्व पर वादाखिलाफी का आरोप लगाने से आरजेडी के दलित वोट बैंक की राजनीति को बड़ा झटका लग सकता है। चुनावी माहौल के बीच एक पूर्व मंत्री का इस तरह कैमरे पर रोना विपक्षी दलों को भी बैठे-बिठाए आरजेडी को घेरने का एक बड़ा मुद्दा दे गया है।


