भागलपुर (विशेष संवाददाता)। बिजली विभाग में जारी भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कौटिल्या नॉर्थ विद्युत उपकेंद्र के कनीय अभियंता (जेई) और एक प्राइवेट कंपनी के तकनीशियन को 4,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई भागलपुर स्थित कचहरी रोड के विद्युत उपकेंद्र परिसर में की गई।
भागलपुर में 4,000 रुपये रिश्वत लेते निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की गिरफ्त में आए कनीय अभियंता अमित कुमार (बाएं, लाल घेरे में) और तकनीशियन सौरभ कुमार (दाएं, लाल घेरे में) टीम के सदस्यों के साथ।
नया कनेक्शन देने के नाम पर मांगी थी घूस
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, झौवा कोठी, खंजरपुर, थाना- बरारी, जिला- भागलपुर के निवासी संतोष कुमार (पिता- श्याम प्रसाद साह) ने पटना स्थित निगरानी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। परिवादी ने आरोप लगाया था कि नया बिजली कनेक्शन देने के बदले कौटिल्या नॉर्थ विद्युत उपकेंद्र के कनीय अभियंता और लाइनमैन द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही है।
सत्यापन में सही पाए गए आरोप
शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने मामले की गुप्त जांच कराई। जांच और सत्यापन के दौरान आरोपी अधिकारियों द्वारा रिश्वत मांगे जाने के पुख्ता प्रमाण मिले। प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने के बाद 17 जुलाई 2026 को निगरानी थाना कांड संख्या 0-086/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
डीएसपी के नेतृत्व में धावादल ने बिछाया जाल
मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुसंधानकर्ता मिथलेश कुमार, पुलिस उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के नेतृत्व में एक विशेष धावादल (ट्रैप टीम) का गठन किया गया। योजना के अनुसार जैसे ही परिवादी ने रिश्वत की राशि सौंपी, निगरानी की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को दबोच लिया।
गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान
निगरानी टीम द्वारा गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में:
सौरभ कुमार: तकनीशियन, जीनस कंपनी (स्मार्ट मीटर अधिष्ठापन कंपनी), सेन्ट्रल गेट, भागलपुर।
विशेष न्यायालय में किया जाएगा पेश
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्तों से पूछताछ के बाद उन्हें भागलपुर स्थित माननीय विशेष न्यायालय, निगरानी में प्रस्तुत किया जाएगा। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और अनुसंधान जारी है।
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22 जुलाई 2026 । विशेष संवाददाता, समस्तीपुर। संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर मंगलवार को समस्तीपुर शहर की सड़कें किसानों के प्रचंड आक्रोश की गवाह बनीं। भारत-अमेरिका कृषि व्यापार समझौते को रद्द करने, कृषि भूमि की कॉरपोरेट लूट पर रोक लगाने तथा किसानों के हितों की रक्षा की मांग को लेकर किसान संगठनों ने शहर में एक विशाल विरोध मार्च निकाला। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने पेपर लीक मामले के जिम्मेवार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और छात्रों पर लाठी-आश्रुगैस चलाने के जिम्मेवार गृह मंत्री अमित शाह से तत्काल इस्तीफे की पुरजोर मांग की।
समस्तीपुर के स्टेशन चौराहे पर भारत-अमेरिका कृषि व्यापार समझौते और कॉरपोरेट नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन करते संयुक्त किसान मोर्चा के नेता एवं कार्यकर्ता और चौराहे पर ट्रंप व मोदी का पुतला दहन करते आक्रोशित किसान।
शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरा विरोध मार्च
यह विरोध मार्च समस्तीपुर शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों और बाजारों से होकर गुजरा। मार्च के दौरान किसान संगठनों के कार्यकर्ता हाथों में लाल झंडे, बैनर और तख्तियां लेकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी कर रहे थे। जुलूस शहर के मुख्य रास्तों से होते हुए अंततः स्टेशन चौराहे पर पहुंचा, जहां एक विरोध सभा का आयोजन किया गया।
खेती और खाद्य सुरक्षा पर मंडराया संकट
सभा को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका कृषि व्यापार समझौता देश की पारंपरिक खेती, किसानों और पूरी कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी साबित होगा। नेताओं ने स्पष्ट किया कि खेती और कृषि भूमि को कॉरपोरेट घरानों के हवाले करने की किसी भी साजिश के खिलाफ किसानों का यह संघर्ष अनवरत जारी रहेगा।
सभा के दौरान वक्ताओं ने 12 सैटेलाइट टाउनशिप और टोपो लैंड के नाम पर कृषि भूमि के लैंड पूलिंग के माध्यम से किए जा रहे कथित भूमि अधिग्रहण की योजनाओं को तुरंत वापस लेने की मांग उठाई। नेताओं ने चेतावनी दी कि देश के अन्नदाताओं की आजीविका और खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करने वाली किसी भी नीति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और किसान संगठन इसका पुरजोर विरोध करेंगे।
नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप का फूंका पुतला
सभा के अंत में आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने स्टेशन चौराहे पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। पुतला दहन के दौरान पूरा स्टेशन परिसर केंद्र सरकार की कृषि एवं आर्थिक नीतियों के खिलाफ नारों से गूंज उठा। उपस्थित सभी किसानों और मजदूरों ने किसान हितों की रक्षा के लिए इस आंदोलन को और तेज करने का संकल्प लिया।
समस्तीपुर के स्टेशन चौराहे पर भारत-अमेरिका कृषि व्यापार समझौते और कॉरपोरेट नीतियों के खिलाफ ट्रंप व मोदी का पुतला लेकर प्रदर्शन करते संयुक्त किसान मोर्चा के नेता एवं कार्यकर्ता
आंदोलन में प्रमुख नेताओं की रही मौजूदगी
इस विरोध सभा की अध्यक्षता बिहार राज्य किसान सभा के जिला संयोजक अनिल प्रसाद ने की। सभा को संबोधित करने वालों में जिला किसान कौंसिल के जिला मंत्री सत्यनारायण सिंह, संयुक्त सचिव उपेंद्र राय, दिनेश राय, भूषण महतो, सुरेंद्र कुमार, बिगन पटेल शामिल थे।
इसके अलावा अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला सचिव ललन कुमार, जिलाध्यक्ष महावीर पोद्दार, सुनील कुमार, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, अनील चौधरी, मो० उस्मान, सोनेलाल पासवान, प्रो० उमेश कुमार तथा बिहार राज्य किसान सभा के महासचिव रामचंद्र महतो, सुरेंद्र कुमार सिंह मुन्ना, रामरतन सिंह राकेश, शंकर साह और शंभू चौधरी समेत भारी संख्या में किसान, खेत मजदूर और ग्रामीण मौजूद रहे।
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न सुरक्षा, न सुविधाएं, ऊपर से होमगार्ड का कब्जा! खेल का मैदान छीना, शौचालय गंदे, प्यास को तरसते बच्चे: सकरा प्रखंड कॉलोनी स्कूल की बदहाली की पूरी कहानी , कौन जवाब देगा?
अधिकारियों के दफ्तर में चकाचौंध, बगल के स्कूल में घोर अंधेरा: बाउंड्री विहीन कैंपस और जर्जर भवन दे रहे हादसों को दावत,
[विशेष रिपोर्ट: एस. एस. कुमार ‘पंकज’]
सकरा(मुजफ्फरपुर) बिहार में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और इसे सर्वसुलभ बनाने के लिए सरकार द्वारा अरबों रुपये का बजट आवंटित किया जाता है। नित नई योजनाओं की घोषणाएं होती हैं, वादे किए जाते हैं और कागजों पर विकास की गंगा बहाई जाती है। लेकिन जब धरातल की कड़वी सच्चाई से सामना होता है, तो ये सारे दावे खोखले और हवा-हवाई साबित होते हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के सकरा प्रखंड में शिक्षा तंत्र की एक ऐसी ही हृदयविदारक और चिंताजनक तस्वीर देखने को मिल रही है, जहाँ प्रशासनिक उदासीनता, अधिकारियों की बेरुखी और व्यवस्था की अकर्मण्यता ने सैकड़ों बच्चों के भविष्य को अंधकार और खतरे में डाल दिया है।
सकरा प्रखंड मुख्यालय से मात्र 200 मीटर की दूरी पर स्थित सकरा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 6 में ‘राजकीय उच्च मध्य विद्यालय, प्रखंड कॉलोनी, सकरा‘ अवस्थित है। भौगोलिक रूप से देखा जाए तो यह विद्यालय किसी सुदूर ग्रामीण इलाके में नहीं, बल्कि प्रखंड प्रशासन के ठीक नाक के नीचे है। यह विद्यालय सकरा के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) के आवास के ठीक बगल में है और सकरा प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) के कार्यालय से इसकी दूरी महज 100 मीटर के करीब है। इसके बावजूद, यह विद्यालय आज भौतिक रूप से अत्यंत दयनीय दुर्दशा का शिकार है। ऐसा लगता है मानो यह विद्यालय किसी प्रशासनिक नक्शे में शामिल ही नहीं है या फिर अधिकारी जानबूझकर इस ओर से अपनी आंखें मूंदे बैठे हैं।
जर्जर और खतरनाक परित्यक्त भवन बन चुका है हादसों का अड्डा इस तस्वीर में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि विद्यालय परिसर के ठीक बीचों-बीच एक पुराना, जीर्ण-शीर्ण और परित्यक्त भवन खड़ा है। वहीं दायें की तस्वीर में व्यवस्था से हारकर आवेदन हाथ में लिए न्याय की गुहार लगाते जनप्रतिनिधि इस तस्वीर में सकरा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 6 के पार्षद पति सह स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता रामबालक शर्मा हाथ में लिखित आवेदन लिए विद्यालय के जर्जर भवन के सामने खड़े हैं। अधिकारियों के चक्कर काटकर और दर्जनों बार मिन्नतें करने के बाद जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो वे खुद इस लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए मैदान में उतरे हैं। उनकी यह तस्वीर प्रशासनिक तंत्र की उस विफलता को उजागर करती है जहाँ एक जनप्रतिनिधि को भी एक बुनियादी समस्या के समाधान के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं।
समस्याओं का अंबार, लेकिन सभी की जड़ एक – चाहारदीवारी का न होना
राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, प्रखंड कॉलोनी, सकरा में समस्याओं की एक लंबी फेहरिस्त है। लेकिन अगर सूक्ष्मता से विश्लेषण किया जाए, तो विद्यालय की शत-प्रतिशत समस्याओं की जड़ एक ही है – विद्यालय की चाहारदीवारी (बाउंड्री वॉल) का न होना।
चाहारदीवारी न होने के कारण विद्यालय की समस्याएं कम होने के बजाय हर रोज बढ़ती ही जा रही हैं। सरकार या प्रशासन की ओर से विद्यालय के विकास या सुविधाओं के लिए जो भी छोटे-मोटे कार्य कराए जाते हैं, वे सब चाहारदीवारी के अभाव में बेकार साबित होते हैं। उन्हें असामाजिक तत्वों द्वारा तुरंत विनष्ट कर दिया जाता है।
इसका सबसे ताजा और ज्वलंत उदाहरण कुछ माह पूर्व देखने को मिला। विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को शुद्ध एवं स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति उपलब्ध कराने के उद्देश्य से परिसर में समरसेबल लगाया गया और बेसीन का निर्माण कराया गया। लेकिन चाहारदीवारी न होने के कारण सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं था। नतीजा यह हुआ कि मात्र 2 माह के भीतर ही असामाजिक और अराजक तत्वों ने रात के अंधेरे में या सुनसान मौके का फायदा उठाकर बेसीन में लगी टाइल्स को बुरी तरह तोड़ दिया और पानी के नलों को नोचकर उखाड़ ले गए। आज स्थिति यह है कि नल गायब हैं और बच्चों को पीने के पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। असामाजिक तत्वों की इस करतूत की सजा उन निर्दोष बच्चों को भुगतनी पड़ रही है जो यहाँ पढ़ने आते हैं।
पीने के पानी का स्थल भी बदहाल , काई युक्त है।तस्वीर में दिख रहा है कि वॉशबेसिन टूटा-फूटा है और उसमें लगे नल गायब हैं।
शौचालय की सफाई, अनुसेवियों की कमी और शिक्षकों की लाचारी
खुली चाहारदीवारी का खामियाजा केवल बच्चों को ही नहीं, बल्कि विद्यालय के शिक्षकों और प्राचार्य को भी उठाना पड़ रहा है। बाउंड्री न होने के कारण रात में या स्कूल की छुट्टी के बाद बाहर के अवांछित लोग विद्यालय के शौचालय में अवैध रूप से प्रवेश कर जाते हैं और उसे गंदा कर देते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल सफाई व्यवस्था को लेकर उठता है। इस विद्यालय में सफाई के लिए अनुसेवी (आदेशपाल) पदस्थापित नहीं है। जब अनुसेवी ही नहीं है, तो विद्यालय में नियमित साफ-सफाई का काम पूरी तरह से ठप रहता है। एजेन्सी के माध्यम से जो सफाई कर्मी हैं, वे केवल खानापूर्ति कर रहे हैं, विद्या के इस मंदिर में साफ सफाई की स्थिति बदतर है।
वर्ग कक्ष की सफाई: कक्षा की कमरों की सफाई का काम मासूम बच्चों को खुद अपने हाथों से करना पड़ता है।
शौचालय की सफाई: बाहर के लोगों द्वारा गंदे किए गए शौचालय की सफाई कराने की पूरी जिम्मेदारी विद्यालय के प्राचार्य के मत्थे आ जाती है। अब प्राचार्य महोदय विद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था को संभालें, या शौचालय साफ कराने का प्रबंध करें?
हैरानी की बात यह है कि प्रखंड मुख्यालय के तमाम आला अधिकारी यहाँ से महज 4 कदम की दूरी पर बैठते हैं, लेकिन किसी भी अधिकारी को आकर झांकने तक की फुर्सत नहीं मिलती कि यहाँ बच्चे और शिक्षक किन परिस्थितियों में दिन गुजार रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, विद्यालय में जो शिक्षक पदस्थापित हैं, वे इस बदहाल व्यवस्था के बीच अपनी नौकरी बचाने और कागजी खानापूर्ति में ही उलझे रहने को मजबूर हैं।
तस्वीर में स्पष्ट है “राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, प्रखंड कॉलोनी, सकरा” लिखा है, लेकिन पास ही लगा हैंडपंप साफ सफाई नहीं होने के कारण बदहाल पड़ा है और चारों तरफ गंदगी पसरी हुई है।दायें की तस्वीर में दूसरा हैंड पंप बन्द कर दिया गया है
जानवरों का डर, मध्याह्न भोजन और सड़क हादसों का खतरा
चाहारदीवारी न होने के दुष्परिणाम यहीं खत्म नहीं होते। परिसर खुला होने के कारण हमेशा आवारा मवेशियों (कुत्ते, गाय, सांड) और असामाजिक तत्वों के किचेन शेड में प्रवेश कर जाने का भय बना रहता है। किचेन शेड में मध्याह्न भोजन का सामान रखा होता है और खाना पकाया जाता है। ऐसे में किसी भी दिन कोई जानवर या अराजक तत्व खाने में कोई जहरीली चीज मिला दे या नुकसान पहुंचा दे, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
इसके अलावा, मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) के समय जब बच्चों की छुट्टी होती है, तो चाहारदीवारी न होने के कारण बच्चे बिना किसी रोक-टोक के विद्यालय परिसर से बाहर निकल जाते हैं। बच्चे विद्यालय कैंपस से लगभग 1-1 किलोमीटर दूर मुख्य बाजार की ओर चले जाते हैं। सकरा का बाजार और मुख्य सड़कें हमेशा व्यस्त रहती हैं, जहाँ तेज रफ्तार गाड़ियां दौड़ती रहती हैं। बाउंड्री के अभाव में बच्चों का इस तरह खुलेआम बाहर निकल जाना किसी बड़ी अनहोनी या गंभीर सड़क दुर्घटना को दावत देने जैसा है।
बच्चों से छीन लिया गया खेल का मैदान: अधिकारियों की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा
किसी भी विद्यालय में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए खेलकूद का मैदान बेहद महत्वपूर्ण होता है। लेकिन इस विद्यालय के बच्चों का दुर्भाग्य देखिए कि उनसे उनका खेल का मैदान भी प्रशासनिक नीतियों की बलि चढ़ाकर छीन लिया गया।
बीडीओ आवास के सामने का मैदान छीना: पूर्व में इस विद्यालय के बच्चे सकरा प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) के आवास के सामने स्थित मैदान में खेला करते थे। उस मैदान में बच्चों के मनोरंजन और शारीरिक विकास के लिए लोहे के झूले, रेलिंग और विभिन्न प्रकार के खेल उपकरण लगे हुए थे। लेकिन प्रशासन ने बच्चों से वह मैदान छीन लिया। वहां पानी का नल कूप (ट्यूबवेल) निर्माण करा दिया गया और उस पूरे मैदान की घेराबंदी करके चाहारदीवारी का निर्माण करा दिया गया।
नर्सरी का रास्ता भी किया गया बंद: जब खेल का मैदान छीन लिया गया, तो मासूम बच्चे मध्याह्न भोजन के अवकाश के समय सामने स्थित ब्लौक कैम्पस की नर्सरी की ओर रुख करने लगे। कुछ वर्ष पूर्व तक बच्चे दोपहर के समय विद्यालय के सामने वाली नर्सरी में खेलकूद कर अपना समय बिता लेते थे। आम और लीची के मौसम में बच्चे नर्सरी में जाकर फल-फूल तोड़कर खा लिया करते थे। लेकिन जब यह बात प्रखंड के बड़े पदाधिकारियों तक पहुंची, तो उन्होंने आनन-फानन में नर्सरी की तो मजबूत चाहारदीवारी करवा दी ताकि बच्चे अंदर न जा सकें!
विरोधाभास देखिए: अधिकारियों ने अपने आवास की चाहारदीवारी करा दी, सरकारी नर्सरी की चाहारदीवारी करा दी,नल कूप के कैम्पस की चाहारदीवारी करा दी, लेकिन जिस विद्यालय में सैकड़ों बच्चों का भविष्य संवर रहा है, उसकी चाहारदीवारी कराना किसी भी अधिकारी ने आज तक मुनासिब नहीं समझा!
स्कूल भवन की बालकनी में जवानों के कपड़े सूखते नजर आ रहे हैं, जो दर्शाता है कि स्कूल परिसर का इस्तेमाल पढ़ाई के अलावा अन्य कामों के लिए भी हो रहा है।
ऊपरी तल्ले पर होमगार्ड जवानों का कब्जा: वर्ग कक्षों की भारी कमी, एक ही कमरे में 2-2 कक्षाओं के बच्चे बैठने को मजबूर
विद्यालय में जगह की किल्लत और प्रशासनिक मनमानी की पराकाष्ठा यहीं खत्म नहीं होती। सकरा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 6 स्थित राजकीय उच्च मध्य विद्यालय (प्रखंड कॉलोनी, सकरा) के ऊपरी तल्ले पर पिछले लंबे समय से होमगार्ड के जवानों का बसेरा बना दिया गया है। होमगार्ड के जवान विद्यालय भवन के ऊपरी तल्ले पर अवैध रूप से कब्जा जमाए हुए हैं, जिससे विद्यालय प्रशासन और छोटे-छोटे बच्चों के सामने वर्ग कक्षों (क्लासरूम) का भारी संकट पैदा हो गया है।
जवानों द्वारा कमरों पर जबरन कब्जा जमाए रखने के कारण विद्यालय में पठन-पाठन के लिए जरूरी कमरे कम पड़ गए हैं। इसका सीधा और घातक असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। वर्ग कक्षों की अत्यंत कमी के कारण मजबूरी में पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी कक्षा (क्लास 1, 2, 3 और 4) के बच्चों को एक ही कमरे में एक साथ बिठाकर पढ़ाया जा रहा है। अब जरा सोचिए कि जिस कमरे में दो अलग-अलग कक्षाओं के बच्चे एक साथ बैठे हों, वहां शिक्षक एक समय में किसे और क्या पढ़ा पाते होंगे? यह स्थिति न केवल शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) की धज्जियां उड़ाती है, बल्कि मासूम बच्चों के बौद्धिक विकास और शैक्षणिक गुणवत्ता के साथ एक बहुत बड़ा खिलवाड़ है। अधिकारियों की इस अनदेखी के कारण बच्चों का भविष्य पूरी तरह से राम भरोसे चल रहा है।
विद्यालय परिसर में असुरक्षा का माहौल, साइकिल चोरी के भय से घट रही छात्रों की सहूलियत
चारदीवारी (बाउंड्री वॉल) का अभाव विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था और छात्रों की उपस्थिति पर सीधा और प्रतिकूल असर डाल रहा है। स्कूल परिसर पूरी तरह खुला होने के कारण हमेशा असामाजिक तत्वों की आवाजाही और चोरी का भय बना रहता है। सबसे ज्यादा समस्या छात्राओं और दूर-दराज से आने वाले छात्रों को होती है, जो सुरक्षा के लिहाज से साइकिल से स्कूल आने से कतराते हैं, क्योंकि परिसर में खड़ी साइकिलों के चोरी या गायब होने का जोखिम हमेशा बना रहता है। सुरक्षित घेराबंदी न होने से विद्यालय का शैक्षणिक माहौल पूरी तरह असुरक्षित और अस्त-व्यस्त हो गया है, जिससे न केवल विद्यार्थियों की सुरक्षा दांव पर है बल्कि अभिभावक भी अपने बच्चों को स्कूल भेजने में असहज महसूस कर रहे हैं।
गौरवशाली अतीत से वर्तमान की गुमनामी तक का सफर
राजकीय उच्च मध्य विद्यालय, प्रखंड कॉलोनी, सकरा का इतिहास और इसके स्थापना का उद्देश्य बेहद खास था। इस विद्यालय को स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य सकरा प्रखंड कार्यालय, अंचल कार्यालय और सकरा थाना में कार्यरत सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना था।
स्थापना के शुरुआती दौर में यहाँ रहने वाले तमाम कर्मियों और अधिकारियों के बच्चे इसी विद्यालय में पढ़ा करते थे। उनके साथ-साथ आसपास के सामान्य वर्ग के बच्चे भी यहाँ शिक्षा ग्रहण करते थे। उस समय इस विद्यालय का एक अलग रुतबा था।
लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, आबादी बढ़ती गई और आसपास के बच्चों की संख्या में भारी इजाफा होता गया। वहीं दूसरी ओर, यहाँ कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी समय के साथ स्थानांतरित या पलायन कर गए। उनके जाने के बाद, अधिकारियों का इस विद्यालय से जुड़ाव खत्म हो गया और वे इसके प्रति पूरी तरह से उदासीन हो गए। परिणाम यह हुआ कि जो विद्यालय अधिकारियों की देखरेख में प्रखंड का सबसे बेहतरीन विद्यालय होना चाहिए था, वह अधिकारियों के अपने आवास छोड़ जाते ही उपेक्षा का शिकार होकर मूलभूत आवश्यकताओं के लिए तरसने लगा। अगर पिछले 1 दशक में आए किसी भी बीईओ या बीडीओ ने 4 कदम चलकर इस विद्यालय का नियमित निरीक्षण किया होता, तो आज यह सकरा प्रखंड का एक मॉडल और आदर्श विद्यालय होता। लेकिन अफसोस कि बीते 10 वर्षों में यहाँ जो भी प्रशासनिक अधिकारी आए, वे इस मामले में पूरी तरह संवेदनहीन और उदासीन ही साबित हुए।
थक-हारकर जनप्रतिनिधि पहुंचे ‘सहयोग पोर्टल‘ के द्वार
विद्यालय की इस बदहाली, जर्जर भवन के खतरे और बाउंड्री वॉल की मांग को लेकर सकरा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 6 के पार्षद पति रामबालक शर्मा ने लंबी लड़ाई लड़ी है। रामबालक शर्मा ने बताया कि उन्होंने सकरा के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) के समक्ष दर्जनों बार मौखिक और लिखित रूप से इस समस्या को लाया। अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटे, लेकिन अधिकारियों ने हर बार इसे अनसुना कर दिया और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
सकरा के सामाजिक कार्यकर्ता रामबालक शर्मा ने विद्यालय की इन समस्याओं को लेकर आवाज उठाई है। तसवीर में वे आवेदन दिखाते नजर आ रहे हैं, जिसमें उन्होंने स्कूल की मरम्मत, चारदीवारी के निर्माण और मूलभूत सुविधाओं को बहाल करने की मांग की है। शर्मा का कहना है कि यह स्कूल प्रखंड मुख्यालय के पास होने के बावजूद प्रशासन की उपेक्षा का शिकार है, जिससे बच्चों का भविष्य खतरे में है।
स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के इस रवैये से पूरी तरह से निराश और थक-हारकर रामबालक शर्मा ने आखिरकार बिहार सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘सहयोग पोर्टल‘ के शिविर कार्यक्रम में इस गंभीर समस्या को ऑनलाइन निबंधित कराया है।
इसके साथ ही उन्होंने कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ), नगर पंचायत सकरा को भी एक विस्तृत लिखित आवेदन सौंपा है, जिसमें निम्नलिखित 3 मुख्य मांगें रखी गई हैं:
जर्जर व परित्यक्त भवन को हटाना: विद्यालय परिसर के बीचों-बीच स्थित अत्यंत खतरनाक, जीर्ण-शीर्ण और परित्यक्त पुरानी बिल्डिंग को अविलंब ध्वस्त कर वहां से मलबा हटाया जाए ताकि दुर्घटना का खतरा टले और जगह बने।
चाहारदीवारी का निर्माण: विद्यालय परिसर की सुरक्षा, असामाजिक तत्वों के प्रवेश को रोकने और पेयजल सुविधाओं को बचाने के लिए पूरे कैंपस की पक्की चाहारदीवारी (बाउंड्री वॉल) का निर्माण अविलंब कराया जाए।
मिट्टी भराई एवं पेवर ब्लॉक कार्य: सड़क से नीचे स्थित विद्यालय के मैदान को समतल करने के लिए मिट्टी भराई कराई जाए और उस पर पेवर ब्लॉक (Paver Block) बिछाने का कार्य कराया जाए ताकि बच्चों को जलजमाव, कीचड़ और जलजनित बीमारियों से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सके।
जर्जर भवन, जलजमाव और बाउंड्री का अभाव: स्कूल की समस्याओं पर बोले एचएम
राजकीय उच्च मध्य विद्यालय, प्रखंड कॉलोनी, सकरा के प्राचार्य (HM) के कथनानुसार, विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण की नितांत आवश्यकता है। विद्यालय के पास अपनी कोई विशाल भूमि या खेल का मैदान उपलब्ध नहीं है; अनुमानतः महज पाँच कट्ठा जमीन परिसर में है, जिस पर केवल भवन निर्मित है तथा चारों ओर सड़क और ब्लॉक की सरकारी जमीन मौजूद है। जमीन संबंधी पिछला रिकॉर्ड पूर्व प्रभारी द्वारा नहीं सौंपे जाने के कारण अंचल अधिकारी (CO) से संपर्क की बात कही गई है। वर्तमान में लगभग 398 से 400 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, जिनके पठन-पाठन के लिए परिसर में 13 वर्ग कक्ष उपलब्ध हैं। विद्यालय की प्रमुख समस्याओं में चारदीवारी (बाउंड्री वॉल) का न होना, जल-जमाव से बचाव हेतु मिट्टी भराई की जरूरत और जर्जर भवन को हटाना शामिल है—जिसमें जर्जर मकान को ध्वस्त करने की प्रशासनिक प्रक्रिया (प्रोसीडिंग) जारी है। साफ-सफाई हेतु पदेन आदेशपाल न होकर आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, भवन की ऊपरी मंजिल पर बीडीओ के मौखिक निर्देश पर प्रशासनिक व्यवस्था के तहत सुरक्षा बलों को अस्थायी रूप से ठहराया गया है, जिनके लिए अन्यत्र व्यवस्था होते ही स्थान खाली कर दिया जाएगा।
कब जागेगा सुस्त प्रशासनिक अमला?
सकरा प्रखंड का यह विद्यालय आज इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब शासन और प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लेते हैं, तो उसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ता है। बीडीओ आवास से 200 मीटर और बीईओ कार्यालय से 100 मीटर दूर स्थित इस विद्यालय की दुर्दशा अधिकारियों की कार्यशैली पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
अब देखना यह होगा कि सहयोग पोर्टल पर मामला दर्ज होने के बाद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की नींद खुलती है या फिर इस विद्यालय के बच्चे यूं ही जर्जर भवन के साये में, बिना बाउंड्री की असुरक्षा के बीच और जलजमाव वाले मैदान में अपना भविष्य तलाशने को मजबूर रहेंगे। सकरा की जनता और विद्यालय के नौनिहाल अब आने वाले समय का इंतजार कर रहे हैं कि कब इस विद्यालय की तसवीर बदलेगी।
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सकरा (मुजफ्फरपुर)। सकरा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 6 स्थित राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय प्रखंड कॉलोनी सकरा के प्रांगण में आयोजित नगर पंचायत सकरा का सहयोग शिविर पूरी तरह बेअसर साबित हुआ। जनता की समस्याओं के तत्काल समाधान और योजनाओं के लाभ के लिए लगाए गए इस शिविर में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा और अधिकारी फरियादियों की राह तकते नजर आए।
सकरा नगर पंचायत के वार्ड 6 स्थित राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय प्रखंड कॉलोनी में आयोजित सहयोग शिविर में आवेदकों की जानकारी दर्ज करते आईटी असिस्टेंट निरंजन कुमार, डाटा एंट्री ऑपरेटर सुभाष कुमार व अन्य कर्मी।
सुस्ती और मौसम का बहाना, या सकरा नगर पंचायत के लोगो की समस्याएं हो गईं खत्म?
शिविर में फरियादियों की बेहद निराशाजनक मौजूदगी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। एक तरफ जहां प्रचार-प्रसार की भारी कमी और खराब मौसम को लोगों के न पहुंचने की वजह बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या सकरा नगर पंचायत क्षेत्र के निवासियों की सभी समस्याओं का समाधान पहले ही हो चुका है? या फिर सरकारी दावों का ढोल पीटने वाले इस तंत्र से आम जनता का भरोसा उठ चुका है? कारण जो भी हो, लेकिन शाम 4 बजे तक पोर्टल पर महज 10 आवेदन ही पंजीकृत हो सके, जिसने प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोलकर रख दी।
केवल 10 आवेदनों पर सिमटा पूरा शिविर दिनभर चले इस शिविर में शाम तक दर्ज हुए कुल 10 आवेदनों का ब्योरा कुछ इस प्रकार रहा:
जमाबंदी से संबंधित: 4 आवेदन
नल-जल योजना से संबंधित: 2 आवेदन
आवास योजना से संबंधित: 2 आवेदन
बिजली समस्या: 1 आवेदन
विद्यालय चाहरदीवारी व उन्नयन: 1 आवेदन
शिविर में मुख्य रूप से अपनी समस्याएं लेकर पहुंचने वाले फरियादियों में अनुराधा कुमारी, अमरेन्द्र कुमार, मंजू कुमारी सिन्हा, रामबालक शर्मा और मंजय सिंह आदि शामिल रहे।
कुर्सियों पर बैठे रहे कर्मचारी और प्रतिनिधि : जनता की अनुपस्थिति के बावजूद शिविर की औपचारिकता पूरी करने के लिए नगर पंचायत सकरा के आईटी असिस्टेंट निरंजन कुमार, डाटा एंट्री ऑपरेटर सुभाष कुमार, होल्डिंग टैक्स संग्राहक राहुल कुमार, एमटीएस कर्मी शकल कुमार राय एवं सुबोध कुमार राय मौजूद रहे। इसके अलावा स्थानीय वार्ड पार्षद भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने शिविर स्थल पर पहुंचे रहे। हालांकि, फरियादियों के अभाव में सभी कर्मी दिनभर पोर्टल और लैपटॉप पर सन्नाटा नापते नजर आए।
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सदन के बाहर भारी हंगामा, अंदर वित्त मंत्री विजय कुमार चौधरी ने रखा अनुपूरक बजट
पटना: बिहार विधानसभा का मानसून सत्र पहले ही दिन हंगामे और भारी राजनीतिक घमासान की भेंट चढ़ता दिखाई दिया। सत्र के पहले दिन एक तरफ जहां सदन के अंदर सरकार ने अपनी वित्तीय योजनाओं को गति देने के लिए बड़ा कदम उठाया, वहीं दूसरी तरफ सदन के बाहर विपक्ष ने जोरदार प्रदर्शन कर माहौल को पूरी तरह गर्मा दिया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही वित्त मंत्री विजय कुमार चौधरी ने 87,383 करोड़ रुपये का भारी-भरकम अनुपूरक बजट सदन के पटल पर पेश किया। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि राज्य में चल रही विभिन्न विकास योजनाओं को गति देने और अन्य आवश्यक आकस्मिक व्ययों को समय पर पूरा करने के उद्देश्य से यह अतिरिक्त बजट लाया गया है।
बिहार विधानसभा मानसून सत्र के पहले दिन सदन की कार्यवाही में भाग लेते सत्ता पक्ष और विपक्ष के माननीय सदस्य।
सदन के भीतर की इस वित्तीय गतिविधि से इतर, विधानसभा परिसर का नजारा बेहद तनावपूर्ण और गहमागहमी से भरा रहा। विधानसभा की कार्यवाही विधिवत रूप से आरंभ होने से पहले ही विपक्षी विधायकों ने एकजुट होकर एक बड़ा मोर्चा खोल दिया। विपक्षी दलों के नेताओं और विधायकों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को बुलंद करते हुए परिसर में पैदल मार्च निकाला। इस विरोध मार्च के दौरान विपक्षी विधायकों के हाथों में बड़े-बड़े पोस्टर और बैनर थे, जिन पर सरकार विरोधी नारे लिखे हुए थे। पूरे विधानसभा परिसर में विपक्षी सदस्यों द्वारा की जा रही नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन से राजनीतिक तापमान अत्यंत बढ़ गया।
बिहार विधानसभा मानसून सत्र के पहले दिन सदन की कार्यवाही का विरोध करते एवं शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को बुलंद करते हुए विपक्ष के माननीय सदस्य।
विपक्ष के इस आक्रामक तेवर और लगातार किए जा रहे हंगामे पर सत्ताधारी दल जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने भी बेहद तीखा पलटवार किया है। जेडीयू के एमएलसी ने विपक्ष की भूमिका और उनकी गंभीरता पर गंभीर सवाल उठाते हुए तंज कसा। उन्होंने सीधे तौर पर हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में विपक्ष का कोई वजूद ही नजर नहीं आ रहा है, क्योंकि उनके मुख्य नेता प्रतिपक्ष खुद ही इस महत्वपूर्ण अवसर पर गायब हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष का यह प्रदर्शन केवल एक छलावा है, क्योंकि उनकी प्राथमिकता जनहित नहीं, बल्कि निजी और पारिवारिक हित साधना है।
सत्र के पहले ही दिन दोनों पक्षों के बीच उपजे इस भारी गतिरोध से आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही और अधिक गर्माहट भरी होने के आसार दिख रहे हैं।
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विशेष ब्यूरो, पटना | 20 जुलाई 2026| बिहार की राजधानी पटना स्थित पाटलिपुत्र जंक्शन पर सोमवार को आस्था और भक्ति का ऐसा अभूतपूर्व नजारा देखा गया, जिसने इतिहास के पन्नों में एक नया अध्याय जोड़ दिया। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व (अटूट आस्था की गौरव गाथा) के तहत आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में कुल 1,150 श्रद्धालुओं के जत्थे को लेकर सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा स्पेशल ट्रेन रवाना हुई। पूरे स्टेशन परिसर को फूलों से दुल्हन की तरह सजाया गया था और जैसे ही ट्रेन की रवानगी का समय हुआ, दीप प्रज्वलन, डमरू वादन और शंख ध्वनि की महागुंज से पूरा आसमान गूंज उठा।
ट्रेन के भीतर पहुंचे मुख्यमंत्री, यात्रियों से की बातचीत
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस पावन यात्रा का शुभारंभ करते हुए स्पेशल ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। हरी झंडी दिखाने से पहले मुख्यमंत्री खुद ट्रेन की बोगियों के भीतर गए, श्रद्धालुओं से मुलाकात की, उनका कुशलक्षेम जाना और यात्रा की सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि हमारे पूरे बिहार की आस्था, स्वाभिमान और सांस्कृतिक गौरव का संदेश लेकर देश के विभिन्न राज्यों में जा रही है। मुख्यमंत्री ने बिहारवासियों की ओर से श्रद्धालु शोभा सिंह को पवित्र कलश तथा अजीत कुमार को पावन ध्वज सौंपा, जो बिहार की समृद्धि के प्रतीक हैं।
बिहार के ऐतिहासिक गौरव का किया स्मरण
मुख्यमंत्री ने इतिहास का स्मरण कराते हुए कहा कि 1,000 वर्ष पूर्व विदेशी आक्रांताओं ने हमारे सोमनाथ मंदिर को लूटा था और नालंदा विश्वविद्यालय को भी बर्बाद कर दिया था। लेकिन 75 वर्ष पूर्व जब सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ, तो उसमें बिहार के लाल और प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद शामिल हुए थे। ठीक उसी तरह, आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नालंदा विश्वविद्यालय को पुनः स्थापित कर बिहार के गौरवशाली इतिहास को जीवित किया है। हमारा संकल्प है कि हम इस विरासत को फिर से प्रतिष्ठित करें।
दिग्गज नेताओं और अधिकारियों की रही मौजूदगी
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, कला एवं संस्कृति मंत्री प्रमोद कुमार और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सह विधायक संजय सरावगी ने भी संबोधित किया। समारोह के प्रारंभ में कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंटकर उनका स्वागत किया।
इस भव्य अवसर पर सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव, विधायक संजीव चौरसिया, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि और हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे सोमनाथ के साथ-साथ काशी विश्वनाथ के भी दर्शन करें और बाबा भोलेनाथ से बिहार के सुख, शांति, समृद्धि और सर्वांगीण विकास का आशीर्वाद मांगें।
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पटना: भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्य में सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। पटना जिले के साम्यागढ़ थाने के पुलिस अवर निरीक्षक-सह-थानाध्यक्ष सौरभ कुमार को निगरानी विभाग की मुख्यालय टीम ने 27,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी किसी गुप्त स्थान से नहीं, बल्कि खुद साम्यागढ़ थाना परिसर के भीतर से की गई है, जिससे पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
साम्यागढ़ थाना परिसर से 27,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किए गए आरोपी पुलिस अवर निरीक्षक-सह-थानाध्यक्ष सौरभ कुमार (लाल घेरे में) को अपनी कस्टडी में लेकर पटना ले जाती निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की धावा दल टीम।
जेसीबी चलाने के एवज में मांगी थी साप्ताहिक घूस : मिली जानकारी के अनुसार, प्रहलादपुर (थाना- साम्यागढ़, जिला- पटना) के रहने वाले परिवादी मनोज कुमार, पिता- बृजनंदन यादव ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के पटना कार्यालय में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि थाना प्रभारी सौरभ कुमार द्वारा उनके क्षेत्र में जेसीबी (जेसीबी) गाड़ी चलाने की अनुमति देने के बदले लगातार साप्ताहिक रिश्वत की मांग की जा रही थी। पीड़ित इस अवैध वसूली से बेहद परेशान था और उसने भ्रष्टाचार के सामने झुकने के बजाय कानून का सहारा लिया।
सत्यापन के बाद बिछाया गया जाल : शिकायत मिलने के बाद निगरानी ब्यूरो ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गुप्त रूप से जांच कराई। ब्यूरो द्वारा कराए गए सत्यापन के दौरान आरोपी थाना प्रभारी द्वारा रिश्वत मांगे जाने का ठोस प्रमाण मिला। प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने के तुरंत बाद निगरानी ब्यूरो के मुख्यालय में कांड संख्या 0-085/26 (दिनांक 17.07.2026) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद मामले के अनुसंधानकर्ता अरुणोदय पांडेय, वरीय पुलिस उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के नेतृत्व में एक विशेष धावा दल (ट्रैप टीम) का गठन किया गया।
थाना परिसर में ही दबोचा गया आरोपी : आज दिनांक 20.07.2026 को योजना के मुताबिक, निगरानी की धावा दल ने साम्यागढ़ थाना परिसर की घेराबंदी की। जैसे ही परिवादी मनोज कुमार से थानाध्यक्ष सौरभ कुमार ने रिश्वत के 27,000 रुपये (सत्ताईस हजार) नकद स्वीकार किए, वैसे ही पहले से घात लगाए बैठी निगरानी टीम ने उन्हें रंगे हाथ धर दबोचा। ब्यूरो के अधिकारियों ने तुरंत उनके पास से रिश्वत की पूरी रकम बरामद कर ली।
विशेष अदालत में पेशी की तैयारी : निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम आरोपी थानाध्यक्ष सौरभ कुमार को गिरफ्तार कर पटना स्थित अपने मुख्यालय ले आई है। ब्यूरो के अधिकारियों के अनुसार, अभियुक्त से गहन पूछताछ की जा रही है और पूछताछ की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें पटना स्थित माननीय विशेष न्यायालय, निगरानी के समक्ष उपस्थित किया जाएगा। मामले में आगे की कानूनी व अग्रतर अनुसंधान की कार्रवाई तेजी से की जा रही है।
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पटना: बिहार सरकार के पर्यटन विभाग में तैनात अधीक्षण अभियंता अवधेश कुमार सिन्हा के खिलाफ भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक बड़ी कार्रवाई की है। निगरानी ब्यूरो की टीम ने कोर्ट से सर्च वारंट प्राप्त करने के बाद पटना स्थित उनके आवास और कार्यालय समेत तीन ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई में करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति, बेनामी निवेश के दस्तावेज, नगदी और आभूषण बरामद किए गए हैं।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना की टीम द्वारा प्राथमिकी अभियुक्त अवधेश कुमार सिन्हा (अधीक्षण अभियंता, पर्यटन विभाग) के पटना स्थित भव्य तीन मंजिला आवास और कार्यालय में सर्च वारंट के आधार पर की जा रही सघन तलाशी और जांच की कार्रवाई।
निगरानी थाना में कांड संख्या 0-084/26 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(2) सह पठित धारा 13(1)(बी) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था। प्राथमिकी के अनुसार, अवधेश कुमार सिन्हा पर अपनी ज्ञात कानूनी आय से करीब 75% अधिक, यानी कुल 1,41,90,000 (एक करोड़ इकतालीस लाख नब्बे हजार) रुपये की परिसंपत्ति अवैध रूप से अर्जित करने का आरोप है।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना की टीम द्वारा प्राथमिकी अभियुक्त अवधेश कुमार सिन्हा (अधीक्षण अभियंता, पर्यटन विभाग) के पटना स्थित भव्य तीन मंजिला आवास और कार्यालय में सर्च वारंट के आधार पर की जा रही सघन तलाशी और जांच की कार्रवाई।
तलाशी के दौरान बरामद हुई संपत्तियों का विवरण:
विशेष न्यायालय से मिले सर्च वारंट के आधार पर 17 जुलाई 2026 को देर रात तक चली छापेमारी के दौरान अभियुक्त और उनके परिजनों के नाम पर अर्जित निम्नलिखित चल-अचल संपत्तियों के दस्तावेज और सामग्रियां मिली हैं:
जमीन एवं मकान के दस्तावेज: फ्रेंड्स कॉलोनी आशियाना नगर, पटना स्थित एक भूखंड (रकबा: 2 कट्ठा 4 धूर), जिसकी खरीद मूल्य 75,63,000 रुपये अंकित है। इस जमीन पर बने मकान के संबंध में एक सिविल कांट्रैक्टर के साथ किए गए मेमोरेंडम स्टैंडिंग के कागजात मिले हैं, जिसमें 20,00,000 रुपये का भुगतान एमओयू के समय और अग्रिम आठ किस्तों में 97,00,000 रुपये का भुगतान किया जाना दर्ज है।
जमीन एग्रीमेंट: एक अन्य जमीन के एग्रीमेंट के कागजात मिले हैं, जिसका कुल मूल्य 75,62,500 रुपये अंकित है।
बैंक लॉकर: केनरा बैंक में एक लॉकर का पता चला है, जिसे सील कर दिया गया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत खोलकर जांच की जाएगी।
नगद राशि: आवास से तलाशी के दौरान 61,000 रुपये नगद बरामद किए गए।
स्वर्णाभूषण: वर्तमान मूल्य के अनुसार 5,05,019 रुपये के सोने के आभूषण मिले हैं।
हीरा जड़ित आभूषण: 3,07,081 रुपये मूल्य के हीरा जड़ित आभूषण जब्त किए गए हैं।
चांदी के आभूषण: 1,52,804 रुपये के चांदी के आभूषण बरामद हुए हैं।
डीड के कागजात: कुल 12 अलग-अलग डीड के महत्वपूर्ण दस्तावेज पाए गए हैं।
बैंक खाते: विभिन्न बैंकों से जुड़े 19 बैंक अकाउंट के कागजात बरामद किए गए हैं, जिनकी समीक्षा की जा रही है।
इंश्योरेंस निवेश: विभिन्न जीवन बीमा पॉलिसियों (इंश्योरेंस) में किए गए निवेश के दस्तावेज मिले हैं।
फ्लैट के कागजात: कुल 3 फ्लैट से संबंधित मालिकाना हक के कागजात पाए गए हैं।
लक्जरी कार: एक होंडा कार भी बरामद की गई है।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की तीन अलग-अलग टीमों द्वारा यह पूरी कार्रवाई संचालित की गई। ब्यूरो के अधिकारियों के अनुसार, बरामद दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है और बैंक खातों व लॉकर को खंगालने के बाद बेनामी संपत्ति का यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है। मामले का अनुसंधान अभी जारी है।
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समस्तीपुर, 20 जुलाई 2026: देश में लगातार हो रहे पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में गहरी पैठ बना चुके भ्रष्टाचार और परीक्षा संचालन में व्याप्त गंभीर अनियमितताओं के खिलाफ आज समस्तीपुर शहर में अभूतपूर्व जनाक्रोश देखने को मिला। छात्र-युवा आक्रोश दिवस के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर भारी संख्या में छात्र, नौजवान और आम नागरिक सड़कों पर उतर आए। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी (भाकपा माले) और रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (आरवाईए) के संयुक्त बैनर तले आयोजित आक्रोश मार्च ने केंद्र सरकार की नीतियों और शिक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली के खिलाफ तीखा विरोध दर्ज कराया। नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे ऐतिहासिक छात्र आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत पद से इस्तीफे की मांग की।
समस्तीपुर के स्टेडियम गोलंबर पर एकत्रित होकर केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते भाकपा माले, आरवाईए और आइसा के नेता व कार्यकर्ता। प्रदर्शनकारी हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को भंग करने तथा नई शिक्षा नीति (नेप) 2020 को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
सोमवार को समस्तीपुर शहर के प्रतिष्ठित स्टेडियम गोलंबर से प्रारंभ हुआ यह आक्रोश मार्च एक जनसैलाब में तब्दील हो गया। जुलूस में शामिल छात्र-युवाओं के हाथों में लाल झंडे, बैनर और तख्तियां थीं, जिन पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार करने, परीक्षा प्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा भविष्य को अंधकार में धकेलने वाली पेपर लीक की घटनाओं पर अविलंब रोक लगाने की मांगें अंकित थीं। शहर के मुख्य मार्गों से गुजरते समय प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की जनविरोधी और छात्र-विरोधी नीतियों के खिलाफ गगनभेदी नारेबाजी की। आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना था कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) जैसी संस्थाओं की विफलता और परीक्षाओं में लगातार हो रही धांधली के कारण देश के लाखों होनहार छात्रों का भविष्य पूरी तरह से बर्बाद हो रहा है, जबकि सरकार इस अत्यंत संवेदनशील और गंभीर समस्या पर अंकुश लगाने में पूरी तरह विफल साबित हुई है।
शिक्षा व्यवस्था में बढ़ता भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं: प्रो0 उमेश कुमार
सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले के जिला सचिव प्रो0 उमेश कुमार ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश की समूची शिक्षा व्यवस्था भ्रष्टाचार की दलदल में डूब चुकी है। परीक्षा संचालन में हर स्तर पर भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं, जिससे मेहनत करने वाले गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के साथ घोर अन्याय हो रहा है। उन्होंने चेताया कि छात्रों के अधिकारों पर डाका डालने वाली इस व्यवस्था के खिलाफ कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक देशव्यापी आंदोलन खड़ा हो चुका है, जिसे किसी भी दमनकारी नीति से दबाया नहीं जा सकता।
नैतिक जिम्मेदारी लें शिक्षा मंत्री, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बंद हो: रौशन कुमार
सभा की अध्यक्षता करते हुए आरवाईए के जिला सचिव रौशन कुमार ने वर्तमान सत्ता पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार सोची-समझी रणनीति के तहत देश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। वर्षों तक तैयारी करने के बाद जब छात्र परीक्षा देने जाते हैं, तो उन्हें पता चलता है कि प्रश्नपत्र पहले ही बिक चुका है। उन्होंने सीधे तौर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस विफलता का जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि उन्हें अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है और उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।
निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की गारंटी तक संघर्ष रहेगा जारी
सभा का कुशल संचालन करते हुए भाकपा माले जिला स्थाई समिति के सदस्य तथा आइसा-आरवाईए के जिला प्रभारी सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने उपस्थित जनसमूह को संकल्प दिलाते हुए कहा कि जब तक छात्रों और युवाओं की मूलभूत समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो जाता, जब तक देश में एक पूर्णतः निष्पक्ष व पारदर्शी परीक्षा प्रणाली लागू नहीं होती और हर नागरिक के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कानूनी गारंटी नहीं मिलती, तब तक यह संघर्ष सड़कों से लेकर संसद तक अनवरत जारी रहेगा।
इस बड़े राजनीतिक और सामाजिक विरोध प्रदर्शन में विपक्षी एकजुटता भी देखने को मिली। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता शाहिद हुसैन ने भी कार्यक्रम में शामिल होकर छात्रों की मांगों का पुरजोर समर्थन किया। उनके साथ राम विनोद पासवान, डा0 सुरज कुमार दास, पूर्व पार्षद अर्जुन राय, भाकपा माले जिला स्थाई समिति के सदस्य ललन कुमार, महावीर पोद्दार, जीबछ पासवान ने भी व्यवस्था के खिलाफ आवाज बुलंद की।
इसके अलावा माले जिला कमिटी के सम्मानित सदस्यों में अनील कुमार चौधरी, रामचंद्र पासवान, डा0 खुर्शीद खैर, उपेंद्र राय, दीनबंधु प्रसाद, दिनेश साह, आफताब आलम सहित आरवाईए के जुझारू नेता तनंजय प्रकाश, ललन कुमार उर्फ कुंदन राय समेत बहुत बड़ी संख्या में भाकपा माले, आरवाईए और आइसा के समर्पित कार्यकर्ता और आम नागरिक उपस्थित थे।
इन रास्तों से गुजरा जनसैलाब: शहर के स्टेडियम गोलंबर से शुरू होकर यह आक्रोश मार्च समाहरणालय, ओवरब्रीज चौराहा, महिला कॉलेज, नगर थाना एवं मुफस्सिल थाना होते हुए आगे बढ़ा। अंत में यह जुलूस ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) द्वारा कर्पूरी स्थल पर पहले से जारी सभा स्थल पर पहुंचकर एक महा-सभा में तब्दील हो गया, जहां आगे के उग्र आंदोलन की रणनीति की घोषणा की गई।
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मुजफ्फरपुर: जिले की पुलिस को एक बहुत बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। मुजफ्फरपुर पुलिस ने जिला पुलिस की टॉप 10 अपराधियों की सूची में शामिल और सदर थाना क्षेत्र के एक चर्चित हत्याकांड के फरार चल रहे वांछित आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार अपराधी पर अपनी ही पत्नी की बेरहमी से हत्या करने का संगीन आरोप है, जो लंबे समय से कानून की नजरों से छुपकर फरार चल रहा था।
मुजफ्फरपुर में जिला के टॉप 10 वांछित अपराधियों की सूची में शामिल हत्याकांड के फरार आरोपी राजेश कुमार यादव की गिरफ्तारी के बाद प्रेस वार्ता करतीं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, नगर 02 विनीता सिन्हा व साथ में मौजूद पुलिस टीम और पुलिस की गिरफ्त में मुंह पर कपड़ा लपेटे खड़ा मुख्य आरोपी।
मादापुर चौबे के पास से दबोचा गया आरोपी : अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, नगर 02, मुजफ्फरपुर विनीता सिन्हा ने प्रेस मीडिया को इस मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि दिनांक 18/7/2026 को सदर थाना पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली थी। इसी सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए सदर थाना क्षेत्रांतर्गत मादापुर चौबे के पास घेराबंदी की गई। पुलिस ने मौके से जिला के टॉप 10 फरार अपराध कर्मियों में शामिल राजेश कुमार यादव को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार राजेश कुमार यादव स्वर्गीय राजमणि यादव का पुत्र है और वह बीबीगंज के नंदपुरी, थाना सदर का निवासी है।
अवैध संबंध के विरोध पर दी थी खौफनाक मौत : पुलिस अधिकारी विनीता सिन्हा ने बताया कि इस सनसनीखेज हत्या के पीछे अवैध संबंध का एक बड़ा मामला सामने आया है। आरोपी राजेश कुमार यादव का किसी बाहरी महिला से अवैध संबंध था, जिसका उसकी पत्नी लगातार विरोध करती थी। पत्नी का यह विरोध पति को इस कदर नागवार गुजरा कि उसने अपनी ही पत्नी को रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रच डाली। अवैध संबंध को बनाए रखने के जुनून में आरोपी ने अपनी पत्नी को जहर देकर मौत के घाट उतार दिया।
पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट से खुला था राज : इस मामले को लेकर सदर थाना कांड संख्या 832/18 दर्ज है, जो भारतीय दंड विधान की धारा 302/34 के तहत दर्ज किया गया था। घटना के बाद जब मृतिका का पोस्टमार्टम कराया गया और विसरा को फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री यानी एफ.एस.एल. जांच के लिए भेजा गया, तो डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया था। पी.एम. रिपोर्ट और एफ.एस.एल. रिपोर्ट के आधार पर मृतिका के शरीर में गंभीर रूप से पॉइजनिंग यानी जहर की पुष्टि हुई। जांच रिपोर्ट में मृतिका के शरीर के भीतर एलुमिनियम फॉस्फाइड और सल्फास की भारी मात्रा पाई गई थी, जिससे यह पूरी तरह साबित हो गया कि उसे जबरन या धोखे से सल्फास देकर मारा गया था।
अन्य आरोपी जमानत पर, मुख्य आरोपी भेजा गया जेल: पुलिस के अनुसार, इस पूरे हत्याकांड में राजेश कुमार यादव के साथ कुछ अन्य लोग भी शामिल थे। इस कांड के अन्य दो आरोपी पहले ही माननीय न्यायालय से जमानत पाकर मुक्त हो चुके हैं, लेकिन मुख्य आरोपी राजेश कुमार यादव पुलिस की गिरफ्त से लगातार बाहर चल रहा था और अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी को एक बड़ी सफलता माना है और कानूनी कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आज उसे माननीय न्यायालय की अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। इस कार्रवाई से अपराधियों में हड़कंप का माहौल है।
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