मुजफ्फरपुर (कथैया)। कथैया थाना क्षेत्र के पट्टी असवारी स्थित बरदही पुल के पास 20.04.2026 को हुई राहजनी और छिनतई की वारदात का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस की विशेष टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वारदात में शामिल 1 शातिर अपराधी को धर दबोचा है, जबकि उसके 2 अन्य साथी फिलहाल फरार हैं। गिरफ्तार अपराधी के पास से लूट का 1 मोबाइल बरामद हुआ है।
कथैया थाना पुलिस की गिरफ्त में छिनतई कांड का आरोपी विकास कुमार, साथ में मौजूद पुलिस बल।
अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, पश्चिमी 01, सुचित्रा कुमारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि 20.04.2026 को पारू थाना क्षेत्र के रहने वाले पीड़ित प्रेमचंद्र राम के साथ पट्टी असवारी स्थित बरदही पुल के पास छिनतई की घटना हुई थी। बिना नंबर प्लेट की होंडा शाइन बाइक पर सवार होकर आए 3 बेखौफ अपराधियों ने पीड़ित को घेरकर उनका पिठ्ठू बैग छीन लिया था। बैग में लैपटॉप, मोबाइल, चार्जर, ब्लूटूथ स्पीकर और आरसीएम किट जैसे कीमती सामान रखे थे।
घटना के संदर्भ में पीड़ित के आवेदन पर कथैया थाना में कांड संख्या 101/26 दर्ज किया गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक, मुजफ्फरपुर के निर्देशन और पुलिस अधीक्षक, ग्रामीण के अनुश्रवण में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी पश्चिमी 01 सुचित्रा कुमारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसमें थानाध्यक्ष कथैया की टीम भी शामिल थी।
तकनीकी और मानवीय साक्ष्य संकलन के आधार पर पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए पारू थाना क्षेत्र के रहने वाले अभियुक्त विकास कुमार को दबोच लिया। गहन पूछताछ में विकास कुमार ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बाइक पर सवार अपने अन्य 2 सहयोगियों के नाम मनीष कुमार और अविनाश कुमार बताए हैं। ये दोनों भी पारू क्षेत्र के ही निवासी हैं। पुलिस के अनुसार आरोपी मनीष कुमार का पूर्व से भी आपराधिक इतिहास रहा है, जबकि बाकी आरोपियों के इतिहास का पता लगाया जा रहा है।
पुलिस ने गिरफ्तार विकास कुमार की निशानदेही पर छीना गया 1 मोबाइल बरामद कर लिया है। अन्य सामानों की बरामदगी और फरार अपराधियों मनीष कुमार एवं अविनाश कुमार की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है।
दिनांक 20.04.2026 को कथैया थानांतर्गत हुये छिनतई कांड का सफल उद्भेदन…
घटना में संलिप्त 01 अभियुक्त गिरफ्तार।
घटना एवं गिरफ्तारी के संदर्भ श्रीमती सुचित्रा कुमारी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, पश्चिमी 01, मुजफ्फरपुर द्वारा प्रेस मीडिया को दी गई बाइट…#MuzaffarpurPolicepic.twitter.com/VCW8mumlgi
— Muzaffarpur Police (@MuzaffarpurPol3) July 25, 2026
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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राजवंशी नगर स्थित अस्पताल के नए परिसर का किया शुभारंभ; अब एक ही छत के नीचे मिलेगी जांच, इलाज और पुनर्वास की अत्याधुनिक सुविधा!
पटना, 25 जुलाई: बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में सेवाओं का विस्तार करते हुए पटना में एक नई सुविधा की शुरुआत की गई है। राज्य के मरीजों को अब हड्डी रोग और गंभीर चोटों के इलाज के लिए अन्य राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज राजवंशी नगर स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण (एल०एन० जे०पी०) अस्पताल परिसर में नवनिर्मित 400 बेड क्षमता वाले हड्डी रोग अति विशिष्ट (ऑर्थोपेडिक सुपर स्पेशियलिटी) अस्पताल के नए भवन का उद्घाटन किया। इस नए भवन के शुरू होने से मरीजों को आधुनिक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध होंगी।
(बाएं) राजवंशी नगर स्थित एल०एन०जे०पी० अस्पताल के नवनिर्मित 400 बेड वाले ऑर्थोपेडिक सुपर स्पेशियलिटी भवन के मॉडल का अवलोकन करते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री निशांत, सांसद रविशंकर प्रसाद व अन्य अधिकारी। (दाएं) उद्घाटन के बाद अस्पताल के वार्ड में जाकर बेड पर भर्ती मरीज से बातचीत कर स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी लेते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी।
उद्घाटन के उपरांत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अस्पताल के विभिन्न विभागों, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने भर्ती मरीजों से संवाद कर उन्हें मिल रही चिकित्सा सेवाओं और इलाज की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अस्पताल प्रशासन को मरीजों की बेहतर देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
अस्पताल की प्रमुख सुविधाएं:
400 बेड की क्षमता: हड्डी रोग के मरीजों के लिए नया विशाल भवन।
मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर (ओ०टी०): आधुनिक तकनीक से लैस सर्जरी कक्ष।
स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर: खिलाड़ियों और युवाओं की चोटों के इलाज की विशेष व्यवस्था।
आई०सी०यू० एवं क्रिटिकल केयर: गंभीर मरीजों की देखभाल के लिए अत्याधुनिक आईसीयू।
ट्रॉमा एवं इमरजेंसी सेवाएं: 24 घंटे आपातकालीन इलाज की सुविधा।
रेडियोलॉजी व एम०आर०आई०: डिजिटल जांच और इमेजिंग की आधुनिक व्यवस्था।
फिजियोथेरेपी व थेरेपी कक्ष: मरीजों के तेजी से ठीक होने के लिए विशेष यूनिट।
व्यावसायिक चिकित्सा (ऑक्यूपेशनल थेरेपी): रोगियों के पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) की सेवा।
ओ०पी०डी० व प्लास्टर रूम: दैनिक मरीजों के उपचार के लिए अलग कक्ष।
एक ही छत के नीचे सेवाएं: जांच, इलाज और पुनर्वास की संपूर्ण सुविधाएं एक ही स्थान पर।
मुख्यमंत्री का वक्तव्य:
इस अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य बिहार के नागरिकों को अपने ही राज्य में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इस नए अस्पताल के शुरू होने से ऑर्थोपेडिक संबंधी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को अब दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि एल०एन० जे०पी० अस्पताल में इस सुपर स्पेशियलिटी भवन का शुभारंभ इसी दिशा में एक कदम है, जहां जांच से लेकर उपचार और पुनर्वास तक की समस्त सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी।
समारोह में उपस्थित प्रमुख लोग:
समारोह में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री निशांत, सांसद रविशंकर प्रसाद, विधायक संजीव चौरसिया, विधान पार्षद नवल किशोर यादव, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि सहित लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल के निदेशक, चिकित्सक एवं कर्मी उपस्थित थे।
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पटना। बिहार में आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना स्थित वेटनरी कॉलेज ग्राउंड में आयोजित एक समारोह में प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत मिलने वाली नई इलेक्ट्रिक बसों और बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (बीएसआरटीसी) के नए डीलक्स बस बेड़े को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस शुरुआत से बिहार के यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
पटना के वेटनरी कॉलेज ग्राउंड में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव, परिवहन मंत्री दामोदर रावत एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के अंतर्गत नई इलेक्ट्रिक एवं डीलक्स बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते हुए।
शहरों को प्रदूषण मुक्त बनाने की पहल
प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत बिहार के लिए कुल 400 इलेक्ट्रिक बसों की स्वीकृति मिली है। इनमें 200 बसें 12 मीटर और 200 बसें 9 मीटर श्रेणी की हैं। प्रथम चरण में आज पहली इलेक्ट्रिक बस का लोकार्पण किया गया। ये बसें राज्य के प्रमुख शहरों—पटना, मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर, दरभंगा और पूर्णिया में चलाई जाएंगी। इन वातानुकूलित और धुआं-रहित ई-बसों के संचालन से शहरों में वायु प्रदूषण में कमी आएगी और पर्यावरण सुरक्षित रहेगा।
पड़ोसी राज्यों का सफर होगा और भी किफायती व सुरक्षित
बिहार राज्य पथ परिवहन निगम द्वारा बेड़े में 149 नई डीलक्स बसों (75 एसी और 74 नॉन-एसी) को शामिल किया जा रहा है। इनमें से 3 एसी और 73 नॉन-एसी बसों का शुभारंभ आज कर दिया गया। ये नई डीलक्स बसें बिहार को देश के प्रमुख राज्यों और शहरों जैसे दिल्ली, उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल और हरियाणा से सीधे जोड़ेंगी। आधुनिक सुविधाओं और सुरक्षा मानकों से लैस इन बसों के आने से यात्रियों को यात्रा का एक सुरक्षित, किफायती और भरोसेमंद विकल्प मिलेगा।
हरी झंडी दिखाने के बाद नई ई-बस का निरीक्षण करते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव एवं अन्य अतिथिगण।
समारोह में उपस्थित प्रमुख लोग
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव, परिवहन मंत्री दामोदर रावत, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, परिवहन विभाग के सचिव राज कुमार और बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के प्रशासक अतुल कुमार वर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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विशेष संवाददाता, पटना: बिहार सरकार के 100 दिन पूर्ण होने के अवसर पर राज्य भर में 11,464 करोड़ रुपये की लागत वाली 2,476 विकास योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया गया है। बीआईटी मेसरा, पटना परिसर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने डिजिटल माध्यम से इन योजनाओं का शुभारंभ किया।
बीआईटी मेसरा, पटना में सरकार के 100 दिन पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में ‘सेवा, संकल्प और समर्पण के 100 दिन’ की उपलब्धियों पर आधारित पुस्तिका एवं कॉफी टेबल बुक का विमोचन करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव, ग्रामीण विकास एवं सूचना व जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार तथा अन्य प्रतिनिधि।
कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि यह सरकार बिहार की जनता की है और वे जनता के सेवक के रूप में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन 100 दिनों में लिए गए फैसले जनहित, सुशासन और राज्य के विकास को समर्पित रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समृद्ध बिहार के सपने को पूरा करने के लिए सरकार निरंतर काम कर रही है।
100 दिनों के प्रमुख कार्य और योजनाएं:
प्रखंड स्तर पर समस्याओं का समाधान: राज्य के सभी 534 प्रखंडों में ‘सहयोग शिविर’ आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें अब तक प्राप्त 7 लाख में से लगभग 90 प्रतिशत आवेदनों का निष्पादन किया जा चुका है। जो आवेदक निर्णय से संतुष्ट नहीं होते, उनके लिए मुख्यमंत्री स्वयं हर महीने के दूसरे मंगलवार को पटना में सुनवाई करते हैं।
शिक्षा और शहरी विकास: राज्य में 211 नए डिग्री कॉलेज शुरू किए गए हैं और 551 विद्यालयों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया गया है। इसके साथ ही राज्य में 12 नए टाउनशिप विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है।
उद्योग, निवेश और रोजगार:
20 नवंबर तक राज्य में 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश लाने का लक्ष्य रखा गया है।
हर जिले में कम से कम 1 उद्योग स्थापित किया जाएगा।
वैशाली के राजापाकर में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पार्क और उद्योग लगाए जाएंगे, जिससे लगभग 1 लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।
गया में 3000 एकड़ परिसर में स्टील प्लांट हब बनाया जाएगा।
आगामी 5 वर्षों में 25 नई चीनी मिलें स्थापित की जाएंगी।
अधोसंरचना और परिवहन:
पटना की तर्ज पर अगले 3 वर्षों में राज्य में करीब 200 किलोमीटर लंबा मरीन ड्राइव बनाने की योजना है।
गंडक और कोसी नदी के किनारे कॉरिडोर बनाए जाएंगे।
सोनपुर, दरभंगा और सुल्तानगंज में नए हवाई अड्डों के विकास पर कार्य जारी है।
स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण:
15 अगस्त के बाद जिला एवं अनुमंडल अस्पतालों से मरीजों को बिना गंभीर कारण के रेफर करने की व्यवस्था को समाप्त किया जाएगा।
सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार होगा।
1 करोड़ नए राशन कार्ड जारी करने का अभियान चलाया जाएगा।
स्वयं सहायता समूहों और महिला सशक्तिकरण के लिए पटना में जीविका टावर का निर्माण होगा।
तकनीक और नए विश्वविद्यालय:
सूचना एवं प्रावैधिकी विभाग और माइक्रोसॉफ्ट के बीच समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए गए।
डेयरी व पशु संसाधन विभाग का एचपीसीएल और आईओसीएल के साथ समझौता हुआ।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर एआई एवं कंप्यूटर साइंस विश्वविद्यालय तथा शहीद जुब्बा सहनी के नाम पर आर्किटेक्चर एवं इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी।
बीआईटी मेसरा के सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रगान के समय उपस्थित मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, मंत्रीगण, बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और छात्र-छात्राएं।
कार्यक्रम में उपस्थिति:
कार्यक्रम में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव और मंत्री श्रवण कुमार ने भी सभा को संबोधित किया।
समारोह में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, संजय कुमार सिंह, मंत्रिमंडल के सदस्य, विधायक, विधान पार्षद और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
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मुजफ्फरपुर। मुजफ्फरपुर समाहरणालय परिसर और शहर के अन्य प्रमुख स्थानों पर बीते 23.07.2026 की संध्या प्रदर्शन के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वाले उपद्रवियों के खिलाफ पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। वरीय पुलिस अधीक्षक कार्यालय, मुजफ्फरपुर द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर 8 संदिग्ध उपद्रवियों की तस्वीरें सार्वजनिक की गई हैं। पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि किसी भी उपद्रवी को बख्शा नहीं जाएगा और हर हाल में कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पहचान बताइए और पाइए 10,000 रुपये इनाम: मुजफ्फरपुर पुलिस द्वारा समाहरणालय परिसर एवं अन्य स्थानों पर उपद्रव व तोड़फोड़ करने वाले 8 संदिग्ध उपद्रवियों की जारी की गई तस्वीरें। इनकी सूचना जिला पुलिस नियंत्रण कक्ष के नंबर 9431896700 पर देकर आप इनाम प्राप्त कर सकते हैं। सूचनादाता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
CCTV और सोशल मीडिया फुटेज से हुई पहचान
घटना के दौरान समाहरणालय परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों, वीडियो रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों के सूक्ष्म विश्लेषण के बाद पुलिस ने इन 8 मुख्य आरोपियों को चिह्नित किया है। इन उपद्रवियों पर सार्वजनिक एवं सरकारी संपत्ति में तोड़फोड़ करने और कानून-व्यवस्था को खतरे में डालने का गंभीर आरोप है।
पहचान बताने वाले को 10,000 रुपये का नगद इनाम
मुजफ्फरपुर पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि यदि कोई भी व्यक्ति तस्वीरों में दिख रहे संदिग्धों की पहचान करता है, तो वह तुरंत पुलिस को सूचना दे।
पुरस्कार राशि: किसी भी उपद्रवी की सटीक पहचान बताने वाले व्यक्ति को 10,000 (दस हजार रुपये) का नकद इनाम दिया जाएगा।
गोपनीयता की गारंटी: सूचना देने वाले नागरिक की पहचान पूरी तरह से गुप्त और गोपनीय रखी जाएगी।
संपर्क नंबर: पहचान बताने के लिए जिला पुलिस नियंत्रण कक्ष के नंबर 9431896700 पर संपर्क किया जा सकता है।
ड्रोन से सख्त निगरानी, होगी संपत्ति की भरपाई
मुजफ्फरपुर पुलिस ने उपद्रवियों को चेतावनी देते हुए कड़ा संदेश जारी किया है:
“आप पर है हमारी नजर! देर-सबेर आपके घर पहुंचेंगे हम और जुर्माना वसूला जाएगा।”
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाना एक गंभीर कानूनन अपराध है। सार्वजनिक एवं सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए ड्रोन कैमरों के माध्यम से शहर भर में सघन निगरानी (24 घंटे) की जा रही है। तोड़फोड़ या क्षति पहुँचाने वाले तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ न केवल प्राथमिकी दर्ज होगी, बल्कि नुकसान की पूरी भरपाई (हर्जाना/जुर्माना) भी उन्हीं से वसूली जाएगी।
पुलिस प्रशासन ने सभी शहरवासियों से जिम्मेदार नागरिक बनने, अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करने की अपील की है।
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– पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बांटे नियुक्ति पत्र और स्कॉलरशिप चेक
– ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ‘ योजना के तहत अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटरों को मिला बिहार पुलिस में उच्च पद
– 15 सितंबर से पंचायत स्तर पर चलेगा प्रतिभा खोज अभियान, 637 खिलाड़ियों को दी जाएगी खेल छात्रवृत्ति
विशेष रिपोर्ट | पटना
बिहार में खेलों के विकास और खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य को लेकर एक नए युग की शुरुआत हुई है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ‘ योजना के तहत भारतीय क्रिकेट टीम के दो प्रमुख तेज गेंदबाजों, आकाश दीप और मुकेश कुमार को बिहार पुलिस में पुलिस उपाधीक्षक (DSP) के पद पर सीधी नियुक्ति दी गई है। यह पहली बार है जब राज्य में किसी खिलाड़ी को डीएसपी जैसे प्रतिष्ठित और उच्च पद पर नियुक्त किया गया है।
पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, खेल मंत्री श्रेयसी सिंह, खेल सचिव दीपक आनंद, बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक रविंद्रन शंकरण, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर मुकेश कुमार, आकाश दीप तथा अन्य नवनियुक्त खिलाड़ी एवं अधिकारी समूह चित्र में।
पटना के राजवंशी नगर स्थित ऊर्जा ऑडिटोरियम में आयोजित एक भव्य एवं गरिमामय समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटरों आकाश दीप और मुकेश कुमार सहित कुल 19 उत्कृष्ट खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इसके अलावा, एथलेटिक्स खिलाड़ी पियूष राज को पुलिस अवर निरीक्षक (सब इंस्पेक्टर) के पद पर नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया। नियुक्ति पत्र पाने वालों में 5 पैरा-खिलाड़ी भी शामिल हैं।
विश्वस्तरीय खेल इंफ्रास्ट्रक्चर और मोइनुल हक स्टेडियम का कायाकल्प
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार सरकार का लक्ष्य राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर खेलों में नंबर-1 बनाना है। उन्होंने घोषणा की कि आगामी 15 सितंबर से राज्य के प्रत्येक पंचायत स्तर पर विशेष अभियान चलाकर ग्रामीण खेल प्रतिभाओं की खोज की जाएगी और उन्हें वैज्ञानिक पद्धति से प्रशिक्षण दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि पिछले दो वर्षों के दौरान बिहार की विभिन्न पंचायतों में 5,000 खेल मैदानों का निर्माण 100 प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। वहीं, राजधानी पटना के ऐतिहासिक मोइनुल हक स्टेडियम का पुनर्विकास भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की देखरेख में कराया जा रहा है। लगभग 40 हजार दर्शकों की क्षमता वाला यह आधुनिक स्टेडियम भविष्य में अंतर्राष्ट्रीय मैचों और आईपीएल (IPL) की मेजबानी के लिए तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही, नालंदा में स्थापित स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी से राज्य में खेल क्रांति को नई दिशा मिल रही है।
पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के तहत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी उत्कृष्ट खिलाड़ी को नियुक्ति पत्र प्रदान करते हुए। साथ में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, खेल मंत्री श्रेयसी सिंह, खेल सचिव दीपक आनंद एवं अन्य।
अंतर्राष्ट्रीय विजेताओं को लाखों का नकद पुरस्कार और छात्रवृत्ति
कार्यक्रम के दौरान खेल सम्मान योजना के तहत कई अंतर्राष्ट्रीय पदक विजेताओं को नकद पुरस्कार राशि के सांकेतिक चेक प्रदान किए गए:
सेतु मिश्रा (एथलेटिक्स): एशियाई अंडर-23 एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 में स्वर्ण और रजत पदक जीतकर इतिहास रचने वाले पहले बिहारी एथलीट को 37.50 लाख रुपये का चेक दिया गया।
विभास्कर कुमार (एथलेटिक्स): अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए 2.50 लाख रुपये से सम्मानित किया गया।
मरियम फातिमा (शतरंज): कॉमनवेल्थ यूथ चेस चैंपियनशिप 2026 की ब्लिट्ज स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल करने के लिए 9 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया।
इसके अतिरिक्त, बिहार खेल छात्रवृत्ति योजना 2026 के तहत वित्तीय वर्ष में कुल 637 खिलाड़ियों को स्कॉलरशिप दी जा रही है। इसमें उत्कर्ष योजना (20 लाख रुपये प्रतिवर्ष) के तहत 21, सक्षम योजना (5 लाख रुपये प्रतिवर्ष) के तहत 184, और प्रेरणा योजना (3 लाख रुपये प्रतिवर्ष) के तहत 432 खिलाड़ियों का चयन किया गया है। प्रेरणा योजना में 269 खिलाड़ियों का चयन राज्यव्यापी ‘मशाल प्रतिभा खोज‘ कार्यक्रम के जरिए हुआ है।
समारोह में उपस्थित गणमान्य लोग
इस राज्यस्तरीय कार्यक्रम में मंच पर कई वरिष्ठ राजनेता और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम को उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, खेल मंत्री श्रेयसी सिंह, खेल विभाग के सचिव दीपक आनंद, और बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक रविंद्रन शंकरण ने भी संबोधित किया।
मौके पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, पुलिस महानिदेशक विनय कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह सहित खेल विभाग के अन्य वरीय अधिकारी एवं सैकड़ों खिलाड़ी उपस्थित थे। खेल सचिव दीपक आनंद ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को स्मृति चिह्न भेंट कर उनका अभिनंदन किया।
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पटना (विशेष संवाददाता)। बिहार की बेटियों और बहनों को आत्मनिर्भर और हुनरमंद बनाने के उद्देश्य से राज्य में कौशल विकास का नया और ऐतिहासिक अध्याय शुरू हो गया है। बिहटा के सिकंदरपुर में 99.97 करोड़ रुपये की लागत से 4 एकड़ भूमि पर बनने वाले ‘राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (महिला), पटना’ के स्थाई परिसर का भव्य शिलान्यास संपन्न हुआ। लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प’ सभागार से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रिमोट के जरिए शिलापट्ट का अनावरण कर इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला रखी।
बिहटा में आयोजित राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (महिला) के शिलान्यास समारोह के मंच पर उपस्थित गणमान्य अतिथि एवं अधिकारीगण।
खराब मौसम के कारण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े मुख्यमंत्री
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि वे स्वयं कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित होना चाहते थे, परंतु खराब मौसम के कारण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। उन्होंने कहा कि आज का यह शिलान्यास कार्यक्रम महज किसी ईंट-पत्थर के भवन का निर्माण नहीं है, बल्कि यह बिहार की प्रतिभाओं को पंख लगाने, आत्मनिर्भर बनाने और आत्मविश्वास से भरने का बड़ा अवसर है।
विदेशों में सीधे मिलेगा रोजगार: स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के लिए एमओयू
कार्यक्रम की सबसे बड़ी उपलब्धि बिहार सरकार और भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के बीच ‘स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर’ (SIIC) की स्थापना के लिए हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर और आदान-प्रदान रहा। इसके तहत बिहार की बेटियों और युवाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे उनके लिए विदेशों में रोजगार के नए और सीधे दरवाजे खुलेंगे।
अब ट्रेनिंग के लिए नहीं जाना पड़ेगा दूसरे राज्य
इस संस्थान की स्थापना का मुख्य उद्देश्य राज्य की युवतियों को आधुनिक तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार योग्य और उद्यमी बनाना है। अब तक गुणवत्तापूर्ण ट्रेनिंग के लिए बिहार की युवतियों को दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था, लेकिन इस स्थाई परिसर के तैयार हो जाने के बाद उन्हें अपने ही राज्य में विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी। संस्थान के निर्माण के लिए राज्य सरकार ने 4 एकड़ भूमि मुफ्त में उपलब्ध कराई है।
संकल्प सभागार में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सिकंदरपुर, बिहटा में राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (महिला) के स्थाई परिसर का शिलान्यास करते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उपस्थित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी।
मात्र 10 रुपये में इंजीनियरिंग और 5 रुपये में पॉलिटेक्निक की पढ़ाई
राज्य में कौशल विकास के ढांचे की जानकारी देते हुए सम्राट चौधरी ने बताया कि वर्तमान में बिहार में लगभग 1,500 कौशल प्रशिक्षण केंद्र संचालित हैं, जहां 12 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है और 1 लाख 38 हजार युवा अभी ट्रेनिंग ले रहे हैं। राज्य के 38 इंजीनियरिंग कॉलेजों में मात्र 10 रुपये और 46 पॉलिटेक्निक संस्थानों में केवल 5 रुपये के मामूली शुल्क पर गुणवत्तापूर्ण उच्च तकनीकी शिक्षा दी जा रही है। इसके साथ ही युवाओं को ग्लोबल बनाने के लिए लैंग्वेज लैब स्थापित की गई हैं, जहां जापानी, जर्मन और फ्रेंच जैसी भाषाएं सिखाई जा रही हैं।
2047 के विकसित भारत और समृद्ध बिहार का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘स्किल इंडिया मिशन’ और 2047 तक ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने में स्किल्ड युवा सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ‘समृद्ध बिहार’ के सपने को साकार करने के लिए बिहार के युवाओं की प्रतिबद्धता जताई। साथ ही जननायक कर्पूरी ठाकुर के नाम पर बनाए जा रहे कौशल विश्वविद्यालय का भी जिक्र किया।
समारोह में उपस्थित रहे दिग्गज कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी का संदेश सुनाया गया। युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग के मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने मुख्यमंत्री को हरित पौधा एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर स्वागत किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह उपस्थित थे। वहीं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से महानिदेशक दिलीप कुमार, सचिव कौशल किशोर, निदेशक हरिकेश मीणा और निदेशक सुनील कुमार सहित केंद्र व राज्य सरकार के अनेक पदाधिकारी और विद्यार्थी जुड़े रहे।
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जानिए कैसे कागज़ों पर बुना गया 10 लाख से ज़्यादा का ‘घपला जाल‘—2023 में 60% तो 2025 में भी वसूला गया दोगुना कमीशन!
[विशेष रिपोर्ट: एस. एस. कुमार ‘पंकज’]
मुजफ्फरपुर । क्या आपने कभी सुना है कि सरकार का नियम कहे कि किसी काम का कमीशन (सेवा शुल्क) ज़्यादा से ज़्यादा 7 प्रतिशत होना चाहिए, और अफ़सर-ठेकेदार मिलकर 60 प्रतिशत का कमीशन पास कर दें?
जी हाँ, यह कोई फ़िल्मी कहानी नहीं, बल्कि मुजफ्फरपुर ज़िले के नगर पंचायत मुरौल की नंगी सच्चाई है! बिहार सरकार के नगर विकास विभाग और जेएम (GeM) पोर्टल के आधिकारिक काग़ज़ात की जब पड़ताल की गई, तो अफ़सरों, बाबुओं और ठेकेदारों के उस बड़े खेल की पोल खुल गई जिसने सरकारी खजाने को 10 लाख रुपये से भी ज़्यादा की चपत लगा दी।
आइए आम और सीधी भाषा में समझते हैं कि मुरौल में आउटसोर्सिंग बहाली के नाम पर यह ‘महा-घोटाला’ आख़िर कैसे रचा गया!
सबसे पहले समझिए: बिहार सरकार का नियम क्या कहता है?
बिहार सरकार के वित्त विभाग ने आउटसोर्सिंग (ठेके पर मैनपावर रखने) के लिए मार्च 2023 में ही बहुत सख्त नियम बनाए थे:
कमीशन की सीमा: कोई भी ठेकेदार कंपनी 3.85 प्रतिशत से कम और 7 प्रतिशत से ज़्यादा कमीशन (सर्विस चार्ज) नहीं माँग सकती।
सीधे रिजेक्ट करने का नियम: अगर कोई कंपनी 7 प्रतिशत से 1 पैसा भी ज़्यादा माँगती है, तो अफ़सरों का फ़र्ज़ है कि उस कंपनी की अर्ज़ी को तुरंत कचरे के डिब्बे में फेंक दें (निरस्त कर दें)।
लेकिन नगर पंचायत मुरौल में इस नियम को ढाल बनाने के बजाय पैर तले कुचल दिया गया!
क्या है नियम देखें नीचे पत्रांक M-4/06/2023 -2988
घपले का पैंतरा #1 (दिसंबर 2023): ’60 प्रतिशत कमीशन का महा-झोल‘
खेल की शुरुआत: 12 दिसंबर 2023 को नगर पंचायत मुरौल ने 11 महीने के लिए 9 कर्मचारियों (डेटा एंट्री ऑपरेटर, टैक्स कलेक्टर, सैनिटरी इंस्पेक्टर आदि) का ठेका एशियास्किल्स (AsiaSkills) नाम की एक ओडिशा की कंपनी को दिया।
कमीशन का डाका: नियम के हिसाब से कंपनी को ज़्यादा से ज़्यादा 7 प्रतिशत कमीशन मिलना चाहिए था। लेकिन अफ़सरों ने आँखें मूंदकर 60 प्रतिशत का अकल्पनीय कमीशन स्वीकृत कर दिया! यानी नियम से साढ़े आठ गुना ज़्यादा!
बाबुओं का कब्जा: काग़ज़ात बताते हैं कि इस पूरे अनुबंध में मुख्य खरीदार और पेमेंट करने वाला अफ़सर खुद हेड क्लर्क (प्रधान लिपिक) बना बैठा था। कानूनन किसी क्लर्क को लाखों के ठेके पास करने का कोई हक़ नहीं होता, लेकिन अफ़सरों ने पूरी कमान एक लिपिक के हाथ में सौंप रखी थी।
खजाने की लूट: 11 महीने का यह ठेका 23,24,622.19 रुपये का था। अगर नियम से काम होता, तो खर्च सिर्फ़ 15.54 लाख रुपये आता। यानी सीधे-सीधे लगभग 7,70,000 रुपये (सात लाख सत्तर हजार) ठेकेदार की जेब में मुफ़्त के ठूँस दिए गए!
(2023 का अनुबंध – GEMC-511687754617948):60% सेवा शुल्क का खुला खेल: जेएम (GeM) पोर्टल पर 12 दिसंबर 2023 को जारी आधिकारिक अनुबंध पत्र, जिसमें लाल घेरे में दर्शाया गया है कि वित्त विभाग के अधिकतम 7% सेवा शुल्क के कड़े नियम की धज्जियां उड़ाते हुए 60 प्रतिशत अकल्पनीय दर स्वीकृत की गई। साथ ही, प्राथमिक खरीदार (Buyer) के रूप में एक लिपिक (Head Clerk) को अनधिकृत वित्तीय कमान दी गई।
घपले का पैंतरा #2 (मार्च 2025): ‘सुधार का नाटक और दोगुना डाका‘
जब 2023 के घोटाले पर सवाल उठने लगे, तो मार्च 2025 में 24 महीने (2 साल) का नया ठेका निकाला गया। इसमें अफ़सरों ने बायोमेट्रिक हाजिरी का नियम लगाकर ऐसा दिखाया कि सब कुछ ‘दूध का धुला’ हो गया है। लेकिन जब गहराई से जाँच की गई, तो भीतर वही पुराना खेल चल रहा था!
दोगुना कमीशन पास किया: 25 मार्च 2025 को फिनाक्सी (Finaccy) नाम की दरभंगा की एजेंसी के साथ 2 साल के लिए 41,06,057.26 रुपये का नया ठेका हुआ।
नियमों की फिर धज्जियाँ: काग़ज़ों पर दावा किया गया कि व्यवस्था सुधर गई है, लेकिन इसमें भी कमीशन 14.16 प्रतिशत स्वीकृत कर लिया गया। जो कि सरकार की 7 प्रतिशत वाली अधिकतम सीमा से सीधा दोगुना है!
खजाने को फिर चपत: इस नए ठेके में भी नियम के विपरीत जाकर ठेकेदार को लगभग 2,45,000 रुपये (दो लाख पैंतालीस हजार) का अतिरिक्त अनुचित फायदा पहुँचाया जा रहा है।
कुल मिलाकर कितना घपला? (10.15 लाख का सीधा हिसाब)
अगर आप दोनों ठेकों का हिसाब जोड़ें:
2023 का घोटाला: 7,70,000 रुपये
2025 का घोटाला: 2,45,000 रुपये
कुल हेराफेरी:₹10,15,000 (दस लाख पंद्रह हजार रुपये से अधिक)
मुरौल की जनता के टैक्स की कमाई के ₹10 लाख से ज़्यादा रुपये बिना किसी डर के ठेकेदारों और अफ़सरों की जुगलबंदी की भेंट चढ़ गए!
(2025 का अनुबंध – GEMC-511687725968999):2025 में भी नियम-विरुद्ध 14.16% कमीशन: 25 मार्च 2025 को किए गए 24 महीने के नए अनुबंध पत्र की कॉपी, जिसमें लाल घेरे में दर्ज 14.16% सेवा शुल्क साफ देखा जा सकता है, जो वित्त विभाग की तय सीमा (7%) से सीधा दोगुना है। इसमें कार्यपालक पदाधिकारी की जगह एक कार्यालय कर्मी (विशाल कुमार) को बायर बनाया गया।
तुलनात्मक चार्ट: एक नज़र में देखिए पूरा ‘खेल‘
बात / पैंतरा
2023 का ठेका (11 माह)
2025 का ठेका (24 माह)
असली सच्चाई क्या है?
सरकारी नियम
ज़्यादा से ज़्यादा 7% कमीशन
ज़्यादा से ज़्यादा 7% कमीशन
दोनों बार नियम को दरकिनार किया गया।
दिया गया कमीशन
60.00% (8.5 गुना ज़्यादा)
14.16% (2 गुना ज़्यादा)
दोनों ठेके पूरी तरह गैर-कानूनी हैं।
कुल बिल
23,24,622.19 रुपये
41,06,057.26 रुपये
खजाने से बेहिसाब पैसा निकाला गया।
अवैध फायदा (घपला)
~ 7,70,000 रुपये
~ 2,45,000 रुपये
कुल ₹10.15 लाख की सीधी चपत।
किसके दस्तखत/कमान
हेड क्लर्क (प्रधान लिपिक)
विशाल कुमार को जेएम (GeM) पोर्टल पर मुख्य खरीदार (प्राइमरी बायर)
क्लर्क से लेकर अधिकारी तक सब घेरे में।
प्रशासनिक नियमों का फिर उड़ा मज़ाक: बायर बने विशाल कुमार की सच्चाई
2025 के नए अनुबंध में जहाँ एक तरफ सुधार का ढोल पीटा गया, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक मर्यादाओं की फिर धज्जियाँ उड़ाई गईं। जिस विशाल कुमार को जेएम (GeM) पोर्टल पर मुख्य खरीदार (प्राइमरी बायर) बनाकर वित्तीय कमान सौंपी गई है, वे कोई गजटेड अफ़सर या अधिकृत कार्यपालक पदाधिकारी नहीं, बल्कि कार्यालय के ही एक कर्मचारी हैं। सरकारी नियमों और वित्तीय शक्तियों के प्रत्यायोजन (डेलीगेशन ऑफ फाइनेंशियल पावर्स रूल्स) के अनुसार, किसी गैर-राजपत्रित कर्मचारी को बायर बनाकर लाखों रुपये के अनुबंधों को ओके करने का अधिकार देना खुद में एक बड़ा administrative violation (प्रशासनिक अपराध) है। 2023 में जहाँ प्रधान लिपिक को बायर बनाकर खेल हुआ, वहीं 2025 में कार्यालय कर्मी विशाल कुमार के नाम का इस्तेमाल कर 7 प्रतिशत की जगह 14.16 प्रतिशत का नियम-विरुद्ध कमीशन स्वीकृत कर लिया गया। इस पूरे खेल में कार्यालय कर्मी विशाल कुमार तो कानूनी शिकंजे में फँसेंगे ही, साथ ही पर्दे के पीछे से अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ने वाले उच्चाधिकारियों पर भी गाज गिरना तय है।
किसकी-किसकी फंसेगी गर्दन? (कानूनी शिकंजा)
तत्कालीन हेड क्लर्क और एक्जीक्यूटिव ऑफिसर (2023): एक क्लर्क को लाखों के पेमेंट का पावर देना और 60% का घोटाला पास करना भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट) के तहत सीधी जेल की राह दिखाता है।
कार्यालय कर्मी विशाल कुमार एवं बैकडेट अफ़सर (2025 मामला): 2025 के अनुबंध में कार्यपालक पदाधिकारी की जगह कार्यालय कर्मी विशाल कुमार को प्राइमरी बायर बनाया गया और 7 प्रतिशत की वैध सीमा को लाँघकर 14.16 प्रतिशत कमीशन का ठेका साइन कराया गया। एक निचले स्तर के कर्मचारी को वित्तीय बायर बनाना और नियम-विरुद्ध दर पास करना सीधे तौर पर धोखाधड़ी और पद के दुरुपयोग का मामला बनाता है, जिसमें साइन करने वाले कर्मचारी और सहमति देने वाले अफ़सर दोनों की विधिक गर्दन फँस चुकी है।
चेयरमैन (मुख्य पार्षद) व वाइस चेयरमैन (उपमुख्य पार्षद): नगर पंचायत की सशक्त स्थायी समिति के प्रमुख होने के नाते बोर्ड बैठक में इन अवैध प्रस्तावों पर चुप रहना और पास होने देना गंभीर आपराधिक लापरवाही है। धारा 25(5) के तहत इनकी कुर्सी जाना तय माना जा रहा है।
नगर पंचायत अध्यक्ष (मुख्य पार्षद) राम नरेश प्रसाद मेहता का पक्ष:
“हमें तकनीकी और वित्तीय जानकारी नहीं होती, सारा काम कार्यपालक पदाधिकारी का है”
आउटसोर्सिंग बहाली में 60 प्रतिशत और 14.16 प्रतिशत सेवा शुल्क दिए जाने के मामले पर नगर पंचायत मुरौल के अध्यक्ष राम नरेश प्रसाद मेहता ने अपनी अनभिज्ञता जाहिर की है। उन्होंने कहा, “हमें इन सब बातों और टैक्स/कमीशन की कोई जानकारी नहीं रहती है।हम लोग तो पॉलिटिक्स में हैं।हमें इतनी तकनीकी जानकारी नहीं दी जाती। टेंडर प्रक्रिया और सिलेक्शन कमेटी में जनप्रतिनिधियों की कोई भूमिका नहीं होती, सारा काम सरकार के प्रतिनिधि यानी कार्यपालक पदाधिकारी देखते हैं। इस पूरे मामले में जो भी विस्तृत जानकारी चाहिए, वह कार्यपालक पदाधिकारी ही दे सकते हैं।”
उप-मुख्य पार्षद (उपाध्यक्ष) अजय कुमार यादव का पक्ष:
“मुझे कोई जानकारी नहीं, सशक्त स्थायी समिति के कोरम का दुरुपयोग कर मुख्य पार्षद ने कराया खेल”
आउटसोर्सिंग बहाली में 60 प्रतिशत और 14.16 प्रतिशत सेवा शुल्क दिए जाने के सवाल पर नगर पंचायत मुरौल के उप-मुख्य पार्षद (उप-अध्यक्ष) अजय कुमार यादव ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उन्हें इस टेंडर और प्रक्रिया की कोई जानकारी ही नहीं दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य पार्षद ने अपने मनोनीत तीन सदस्यों का दस्तखत कराकर कोरम पूरा किया और मनमाने तरीके से प्रस्ताव पास करा लिए।
अजय यादव ने कहा, “पहली बैठक के बाद मुझे सशक्त स्थायी समिति के बैठकों की सूचना तक नहीं दी जाती थी और घर-घर जाकर दस्तखत कराए जाते थे। नियम के विपरीत 60% सेवा शुल्क देना पूरी तरह गलत है। बोर्ड की बैठक में तय हुआ था कि स्थानीय लोगों को रखा जाएगा, लेकिन नियमों को दरकिनार कर दिया गया। अब नए सशक्त समिति के गठन के बाद हम इन गलत फैसलों और एजेंसियों के खिलाफ कदम उठाएंगे।”
वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) का रुख और आगे की कानूनी राह:
अधिकारी ने नहीं उठाया फोन, जानिए क्या होना चाहिए अगला प्रशासनिक कदम?
नगर पंचायत मुरौल में हुए इस बड़े घपले पर वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) का मंतव्य जानने के लिए न्यूज़ भारत टीवी के पत्रकार कुमार पंकज ने (मोबाइल नम्बर;-7562033888 के द्वारा) उनसे चार बार फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। नतीजतन, इस घोटाले पर उनका कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आ सका।
हालांकि, यह पूरा मामला मीडिया और आधिकारिक दस्तावेजों के जरिए सार्वजनिक होने के बाद वर्तमान ईओ का पहला प्रशासनिक दायित्व बनता है कि वे पूर्व में हुए दोनों नियम-विरुद्ध अनुबंधों (2023 के 60% और 2025 के 14.16% कमीशन) की फाइलों की तत्काल समीक्षा कर पूरी वित्तीय अनियमितता की एक अंतरिम रिपोर्ट तैयार करें। 2025 के अनुबंध में गैर-राजपत्रित कार्यालय कर्मी विशाल कुमार को अनधिकृत रूप से ‘प्राइमरी बायर’ बनाए जाने और वित्त विभाग की 7% की अधिकतम सीमा का उल्लंघन होने के ठोस आधार पर वे इस अवैध अनुबंध को निरस्त (Cancel) करने की सिफारिश नगर विकास एवं आवास विभाग (UDHD) को भेज सकते हैं। इसके साथ ही, सरकारी खजाने को पहुँचे लगभग 10.15 लाख रुपये के वित्तीय नुकसान की वसूली के लिए संबंधित एजेंसियों (एशियास्किल्स व फिनाक्सी) को कारण बताओ नोटिस जारी करने, मामले की विजिलेंस जाँच के लिए विभाग को पत्र लिखने, तथा इसमें संलिप्त पूर्व अधिकारियों व कर्मियों पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने हेतु सशक्त स्थायी समिति एवं बोर्ड के समक्ष प्रस्ताव प्रस्तुत करना उनका प्राथमिक विधिक कर्तव्य है।
जनता का सवाल: क्या विजिलेंस जाँच होगी?
जब सरकार का साफ़ आदेश था कि 7% से ज़्यादा कमीशन मांगने वाली कंपनी को रिजेक्ट कर दो, तो फिर 60% और 14.16% वाले टेंडर को जेएम पोर्टल पर ओके किसने और क्यों किया?क्या बिहार का नगर विकास विभाग और विजिलेंस टीम मुरौल नगर पंचायत में हुए इस 10 लाख रुपये से ज़्यादा के घपले पर कार्रवाई करेगी, या फिर अफ़सर-ठेकेदार मिलकर यूँ ही जनता की गाढ़ी कमाई लूटते रहेंगे?
क्या निष्पक्ष ऑडिट और जांच की आवश्यकता है?
इस पूरे ‘महा-घोटाले’ की तह तक पहुँचने और संलिप्त चेहरों को बेनकाब करने के लिए केवल विभागीय पत्राचार या लीपापोती काफी नहीं है। इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है:
फॉरेंसिक और थर्ड-पार्टी वित्तीय ऑडिट: नगर पंचायत मुरौल के पिछले 3 वर्षों के सभी आउटसोर्सिंग बिलों, GeM टेंडर फाइलों और भुगतान वाउचरों का एक स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए। इससे यह स्पष्ट होगा कि कागज़ों पर दिखाए गए कर्मचारियों की वास्तविक संख्या कितनी थी और वास्तव में कितना भुगतान किया गया।
GeM पोर्टल वेंडर्स और बैंक खातों की जांच: संबंधित आउटसोर्सिंग एजेंसी के बैंक खातों और लेन-देन का ऑडिट यह उजागर करेगा कि 60% और 14.16% के रूप में वसूला गया अतिरिक्त कमीशन किन-किन अधिकारियों या बिचौलियों के खातों में किस रूप में पहुँचा।
विजिलेंस (निगरानी अन्वेषण ब्यूरो) जांच: मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और नगर विकास विभाग को तुरंत इस प्रकरण को विजिलेंस जांच के सुपुर्द करना चाहिए, ताकि पद का दुरुपयोग करने वाले लोक सेवकों और एजेंसी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई और FIR दर्ज हो सके।
यदि समय रहते इस मामले का निष्पक्ष ऑडिट और जांच नहीं कराई गई, तो यह न केवल स्थानीय निकायों में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देगा, बल्कि GeM जैसे पारदर्शी पारदर्शी ई-गवर्नेंस सिस्टम के मूल उद्देश्यों पर भी गहरा सवालिया निशान खड़ा करेगा।
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पटना, 22 जुलाई 2026 । बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को एक नया और ऐतिहासिक नया मोड़ देते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरु गोविंद सिंह अस्पताल (जिला अस्पताल), पटना सिटी के नवनिर्मित भवन में विभिन्न अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का लोकार्पण किया। इसके साथ ही उन्होंने जिला औषधि भंडार गृह, पटना का भी शिलापट्ट अनावरण कर विधिवत शुभारंभ किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नवनिर्मित भवन के विभिन्न विभागों का गहन निरीक्षण किया और वहां उपलब्ध कराई जा रही उच्चस्तरीय सुविधाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों से सीधी बातचीत कर उनका हाल-चाल जाना और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
गुरु गोविंद सिंह अस्पताल, पटना सिटी में नवनिर्मित भवन एवं विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाओं का शिलापट्ट अनावरण कर लोकार्पण करते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, साथ में स्वास्थ्य मंत्री निशांत एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी।
डॉक्टरों को सख्त हिदायत: ‘मरीजों को रेफर करना बंद करें, यहीं मिले सर्वोत्तम इलाज‘
निरीक्षण के क्रम में मुख्यमंत्री ने ऑर्थोपेडिक ऑपरेशन थिएटर (OT) का भी बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने उपस्थित डॉक्टरों को कड़े एवं स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि ऑर्थोपेडिक इलाज की एक विशिष्ट पहचान बनाई जाए ताकि मरीजों को भटकना न पड़े। मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों से कहा, “अस्पताल में इलाज की सभी सुविधाएं बेहतर ढंग से उपलब्ध रखी जाएं ताकि मरीजों को रेफर करने की नौबत न आए। डॉक्टरों सहित इलाज की सभी सुविधाएं समय पर मरीजों को मिलनी ही चाहिए।”
गुरु गोविंद सिंह अस्पताल में स्थापित अत्याधुनिक ऑर्थोपेडिक ऑपरेशन थिएटर (OT) एवं मरीजों के लिए तैयार सर्वसुविधायुक्त वार्ड का दृश्य।
समारोह की मुख्य बातें एवं राज्यस्तरीय सौगातें:
ICU और आपातकालीन सेवाओं का विस्तार: राज्य के विभिन्न जिला अस्पतालों में 105 नए ICU बेड, 70 इंटरमीडिएट केयर यूनिट (IMCU) बेड तथा 24X7 आपातकालीन सेवाओं का भव्य लोकार्पण किया गया।
निःशुल्क पैथोलॉजी सेवाओं की शुरुआत: सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत निःशुल्क पैथोलॉजी सेवाओं के प्रथम चरण की शुरुआत की गई। इसके तहत 11 हब लैब (जहां आधुनिक मशीनें और उपकरण स्थापित हैं) तथा 221 स्पोक लैब (नमूना संग्रहण केंद्र) को आपस में जोड़ा गया है, जिससे जांच रिपोर्ट समय पर मिलेगी।
25 अनुमंडलीय अस्पतालों में फ्री डायलिसिस: राज्य के 25 अनुमंडलीय अस्पतालों में निःशुल्क डायलिसिस सेवा की शुरुआत की गई। PHH और आयुष्मान कार्डधारियों को यह सुविधा पूर्णतः मुफ्त मिलेगी, जबकि अन्य पात्र लाभार्थियों को बेहद रियायती दरों पर डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे किडनी रोग से पीड़ित मरीजों को दूसरे जिलों में भागने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
‘खंडा साहिब‘ का लोकार्पण: मुख्यमंत्री ने गुरु गोविंद सिंह अस्पताल परिसर में प्रबंध कमेटी तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब की ओर से स्थापित ‘खंडा साहिब’ का लोकार्पण कर शीश नवाया और नमन किया।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं को जिला एवं अनुमंडल स्तर तक पहुंचाया जा रहा है। सरकार अत्याधुनिक तकनीक, बेहतर चिकित्सा उपकरण, प्रशिक्षित मानव संसाधन और मजबूत स्वास्थ्य अवसंरचना के बल पर बिहार को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति:
कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य मंत्री निशांत, विधायक रत्नेश कुमार, पटना की महापौर सीता साहू, अन्य जनप्रतिनिधिगण, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव डॉक्टर त्याग राजन एसएम, राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय, बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सुब्रत कुमार सेन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सक और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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पटना, 22 जुलाई 2026 । राजधानी पटना के निवासियों और श्रद्धालुओं के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। गंगा नदी के तट पर स्थित तीन प्रमुख घाटों—भद्र घाट, महावीर घाट और नौजर घाट का रूप-रंग पूरी तरह बदल गया है। 46.26 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से इन तीनों घाटों का आधुनिक सुविधाओं के साथ कायाकल्प कर दिया गया है।
बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिलापट्ट का अनावरण कर इन रिवर फ्रंट और सौंदर्यीकरण परियोजनाओं का भव्य लोकार्पण किया। लोकार्पण समारोह के बाद मुख्यमंत्री ने तीनों गंगा घाटों का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने साइट प्लान के माध्यम से पूरे विकास मॉडल और वहां दी जाने वाली सुविधाओं की जानकारी दी।
पटना के भद्र घाट, महावीर घाट एवं नौजर घाट के 46.26 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का शिलापट्ट अनावरण कर लोकार्पण करते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी। साथ में नगर निगम की महापौर सीता साहू, विधायक रत्नेश कुशवाहा एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित।
निरीक्षण के क्रम में मुख्यमंत्री ने भक्तिभाव से गंगाजल स्पर्श कर मां गंगा को नमन किया और पूरे प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली के लिए प्रार्थना की। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र प्रदान कर मुख्यमंत्री का स्वागत किया, वहीं स्थानीय नागरिकों ने उन पर उत्साहपूर्वक पुष्पवर्षा की।
कच्चे घाटों से मुक्ति, अब छट पर्व में मिलेगी हाई-टेक सुविधाएं
पहले ये घाट पूरी तरह कच्चे और असुरक्षित स्थिति में थे, जिससे लोगों को स्नान और पूजा-पाठ में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम (बुडको) ने इन्हें पक्का बनाकर चकाचौंध से भर दिया है।
नए घाटों की प्रमुख विशेषताएं:
सुरक्षा और बैरिकेडिंग: श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए मजबूत बैरिकेडिंग की गई है।
हाई मास्ट लाइट: पूरे घाट परिसर में पर्याप्त रोशनी के लिए आधुनिक हाई मास्ट लाइटें लगाई गई हैं।
वॉक-वे और सिटिंग एरिया: टहलने के लिए शानदार वॉक-वे और बैठने के लिए आधुनिक बेंचों का निर्माण हुआ है।
स्वच्छता की व्यवस्था: साफ-सफाई के लिए विशेष डस्टबिन और ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया गया है।
इन सुविधाओं से न केवल रोज़मर्रा के श्रद्धालुओं को सहूलियत होगी, बल्कि लोक आस्था के महापर्व छठ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं को स्वच्छ, सुरक्षित और सुगम माहौल मिलेगा।
सौंदर्यीकरण और पक्के निर्माण के बाद आधुनिक वॉक-वे, सुरक्षित बैरिकेडिंग और आकर्षक सजावट से सजा हुआ पटना का नव-निर्मित गंगा घाट।
कार्यक्रम में ये प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद
इस भव्य लोकार्पण के मौके पर विधायक रत्नेश कुशवाहा, पटना नगर निगम की महापौर सीता साहू, उपमहापौर रेशमी कुमारी मौजूद रहीं। प्रशासनिक पक्ष से मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, नगर विकास विभाग के सचिव अनिमेष कुमार पराशर, पटना नगर निगम के आयुक्त यशपाल मीणा तथा बुडको के मुख्य प्रबंध निदेशक सुरेंद्र कुमार मेहता सहित कई वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित थे।
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