मल्लिकार्जुन खड़गे बोले- 94 हजार स्कूल बंद, युवाओं के लिए बनेगा ‘एजुकेशन-टू-एम्प्लॉयमेंट‘ रोडमैप; 5 राज्यों के चुनाव की रणनीति तय।
नई दिल्ली, इंदिरा भवन: संसद के हालिया सत्र के समापन के बाद देश के राजनीतिक परिदृश्य पर नए सिरे से रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की एक उच्चस्तरीय और महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित पार्टी के शीर्ष नीति-निर्धारक और कार्यसमिति के सदस्य मौजूद रहे।

बैठक में केंद्र सरकार की नीतियों, देश की आंतरिक व बाह्य सुरक्षा, अर्थव्यवस्था की स्थिति और जन-आस्था से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर गहराई से विश्लेषणात्मक चर्चा की गई। बैठक का मुख्य बिंदु युवाओं के सामने खड़ा संकट, राम मंदिर निर्माण से जुड़ा वित्तीय प्रबंधन और भारत-चीन सीमा पर बनी परिस्थितियां रहीं।

युवा संकट और शिक्षा का गिरता स्तर: ‘एजुकेशन-टू-एम्प्लॉयमेंट‘ का संकल्प
बैठक के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश के युवा वर्ग की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से इस मुद्दे पर बात रखते हुए उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश है, लेकिन वर्तमान सरकार की दिशाहीन प्राथमिकताओं के कारण देश का युवा हताशा और बेरोजगारी के संकट से जूझ रहा है।
- संस्थागत ढांचा ध्वस्त होने का आरोप: खड़गे ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि हाल के वर्षों में देश भर में लगभग 94 हजार प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल बंद हो चुके हैं। निजीकरण को बिना किसी उचित नियंत्रण के बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे आम परिवारों के लिए उच्च शिक्षा पाना अत्यधिक खर्चीला और पहुँच से बाहर हो गया है। इसके अतिरिक्त, प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता पर आघात किया जा रहा है।
- परीक्षाओं में धांधली और नियुक्तियों में देरी: युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पढ़ाई पूरी करने के बाद जब युवा नौकरी की दौड़ में शामिल होते हैं, तो उन्हें भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, संस्थागत घोटालों और प्रशासनिक विलंब का सामना करना पड़ता है। इसका सबसे प्रतिकूल प्रभाव समाज के गरीब, पिछड़े और वंचित वर्गों के मेधावी छात्रों पर पड़ रहा है।
- ऐतिहासिक संदर्भ और नया रोडमैप: पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के दूरदर्शी निर्णयों का स्मरण कराते हुए खड़गे ने रेखांकित किया कि किस प्रकार 18 वर्ष की आयु में मताधिकार, नवोदय विद्यालयों का जाल, राष्ट्रीय युवा दिवस की शुरुआत और रोजगार से जुड़ी शिक्षा नीति ने देश को आधुनिकता की ओर मोड़ा था। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए, कांग्रेस पार्टी ने देश के युवाओं के लिए एक स्पष्ट, व्यवहारिक और समयबद्ध ‘एजुकेशन-टू-एम्प्लॉयमेंट रोडमैप‘ (शिक्षा से रोजगार मार्गदर्शिका) तैयार करने का संकल्प लिया है।

राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट और वित्तीय पारदर्शिता का सवाल
जन-आस्था के विषय पर बात करते हुए कार्यसमिति ने राम मंदिर निर्माण से जुड़े वित्तीय मामलों को प्रमुखता से उठाया।
- जनता के दान और जवाबदेही पर सवाल: कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि संसद में प्रधानमंत्री द्वारा घोषित ट्रस्ट पर देशवासियों ने पूरा भरोसा जताया था। देश भर के करोड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा के अनुसार धन, सोना और चांदी समर्पित किया।
- पारदर्शिता की मांग: बैठक में यह मुद्दा जोर-शोर से उठा कि निर्माण प्रक्रिया के दौरान वित्तीय अनियमितताओं और भूमि सौदों से जुड़ी खबरें सामने आई हैं। कांग्रेस का स्पष्ट मानना है कि केवल कुछ निचले स्तर के व्यक्तियों पर कार्रवाई करके इस गंभीर विषय से ध्यान नहीं हटाया जा सकता। सरकार और संबंधित ट्रस्ट को देश की जनता के सामने पूर्ण आय-व्यय और प्राप्त चढ़ावे का पारदर्शी लेखा-जोखा रखना चाहिए।

सीमा सुरक्षा और चीन के अतिक्रमण का मुद्दा
राष्ट्रीय सुरक्षा के संवेदनशील विषय पर सीडब्ल्यूसी की बैठक में केंद्र सरकार के रवैये पर कड़े सवाल खड़े किए गए।
- वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग: भारत-चीन सीमा पर हालिया घटनाक्रमों का विश्लेषण करते हुए कांग्रेस नेतृत्व ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय राजनीति से परे है, परंतु सुरक्षा तंत्र में किसी भी प्रकार की शिथिलता देश के लिए हानिकारक है।
- 2020 के गलवान घटनाक्रम का संदर्भ: बैठक में याद दिलाया गया कि 2020 के गलवान संघर्ष के बाद सरकार द्वारा दिए गए बयानों और वर्तमान में जमीनी स्तर पर सीमा की परिस्थितियों के बीच विरोधाभास दिखाई देता है। भारतीय सेना के शौर्य और समर्पण को नमन करते हुए पार्टी ने मांग की कि सरकार को ‘सूत्रों’ के पीछे छिपने के बजाय सीमा की वास्तविक स्थिति पर देश को विश्वास में लेना चाहिए।

आगामी 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों के लिए रणनीति तय
बैठक के अंतिम चरण में देश के राजनीतिक समीकरणों और निकट भविष्य में होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
- जमीनी स्तर पर मुद्दों को ले जाने का निर्देश: नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा चलाए गए “छात्रों की गूँज” जैसे अभियानों को आगे बढ़ाते हुए पार्टी नेताओं से कहा गया कि वे युवाओं, किसानों और आम नागरिकों की समस्याओं को सीधे चुनाव अभियानों का हिस्सा बनाएं।
- संगठनात्मक एकजुटता: खड़गे ने कार्यसमिति के सदस्यों और राज्य इकाइयों को निर्देश दिया कि आगामी चुनावों के लिए रणनीति को अंतिम रूप देकर पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरें, ताकि जनता के सामने एक मजबूत और विश्वसनीय नीतिगत विकल्प प्रस्तुत किया जा सके।

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