एचआईवी/एड्स के खिलाफ मुजफ्फरपुर में महाअभियान: 12 अक्टूबर तक गांव-गांव फैलेगी जागरूकता की अलख, कलंक मिटाने पर जोर

मुजफ्फरपुर : एचआईवी/एड्स जैसी गंभीर बीमारी से बचाव और इसके नियंत्रण के लिए मुजफ्फरपुर जिले में एक व्यापक सामाजिक और स्वास्थ्य जागरूकता अभियान का शंखनाद किया गया है। जिलाधिकारी के विशेष निर्देश पर संचालित हो रहे दो माह लंबे इंटेंसिफाइड अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से बुधवार, 19 अगस्त 2026 को जिला स्वास्थ्य समिति सभागार, सदर अस्पताल में जिला स्तरीय संयुक्त कार्यकारी समूह की एक महत्वपूर्ण संवेदीकरण बैठक का आयोजन किया गया।

जिला एड्स नियंत्रण समिति के तत्वावधान में आयोजित इस संवेदीकरण बैठक की अध्यक्षता जिला जन-संपर्क पदाधिकारी लोकेश कुमार झा ने की। बैठक के दौरान जिले में युवाओं और आम जनमानस को एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूक करने तथा संक्रमण के प्रसार को पूरी तरह रोकने के लिए ठोस रणनीति पर चर्चा की गई।

सदर अस्पताल स्थित जिला स्वास्थ्य समिति सभागार में एचआईवी/एड्स नियंत्रण हेतु आयोजित संवेदीकरण बैठक में मंच से संबोधित करते अधिकारी और अध्यक्षता कर रहे जिला जन-संपर्क पदाधिकारी लोकेश कुमार झा एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति।

12 अक्टूबर तक चलेगा विशेष जागरूकता अभियान

बैठक में जानकारी दी गई कि जिले में एचआईवी-एड्स से बचाव एवं रोकथाम के लिए शुरू किया गया इंटेंसिफाइड कैंपेन 12 अगस्त से प्रारंभ हो चुका है और यह आगामी 12 अक्टूबर तक अनवरत संचालित रहेगा। इस दो महीने के अभियान के दौरान जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की शैक्षणिक, सांस्कृतिक और स्वास्थ्य-संबंधी गतिविधियों का संचालन किया जाएगा, ताकि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सही जानकारी पहुंचाई जा सके।

सुरक्षित व्यवहार, जांच और कलंक मुक्ति पर रहेगा फोकस

बैठक को संबोधित करते हुए जिला जन-संपर्क पदाधिकारी लोकेश कुमार झा ने बताया कि अभियान का मुख्य ध्येय समाज में एचआईवी से जुड़ी भ्रांतियों और सामाजिक कलंक (स्टिग्मा) को समाप्त करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जागरूकता ही एचआईवी से बचाव का सबसे सशक्त माध्यम है।

बैठक में उपस्थित प्रतिनिधियों और अधिकारियों को निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर संवेदित किया गया:

  1. एचआईवी से बचाव और सुरक्षित व्यवहार: आम लोगों को असुरक्षित यौन संबंधों और दूषित सुइयों के इस्तेमाल से होने वाले जोखिमों के प्रति सचेत करना।
  2. समय पर एचआईवी जांच: लोगों को बिना किसी झिझक के अपनी जांच कराने के लिए प्रोत्साहित करना, ताकि समय पर परामर्श व उपचार (एआरटी) शुरू किया जा सके।
  3. सामाजिक कलंक और भेदभाव का अंत: एचआईवी पीड़ित व्यक्तियों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार अपनाना और उनके खिलाफ समाज में व्याप्त भेदभाव को दूर करना।
 जिला स्तरीय संयुक्त कार्यकारी समूह की बैठक में उपस्थित स्वास्थ्यकर्मी, जन-प्रतिनिधि एवं प्रतिभागी, जो एचआईवी/एड्स जागरूकता अभियान की रणनीति और क्रियान्वयन को लेकर चर्चा में शामिल हुए।

व्यापक जन-भागीदारी से सफल बनेगा अभियान

सभागार में मौजूद विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों और स्वास्थ्यकर्मियों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि इस अभियान में युवाओं की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। युवाओं को जागरूक कर हम पूरे समाज को एक सुरक्षित और स्वस्थ दिशा दे सकते हैं। अभियान की अवधि के दौरान जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा जागरूकता रथ, नुक्कड़ नाटक, विद्यालयों व महाविद्यालयों में कार्यशालाएं और स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए जाएंगे।

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